गलतियों की माफी से ही आगे का रास्ता बनेगा।

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rp_two-vives.jpgसमस्या-

रशीद वारसी ने आगरा, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरी शादी 2012 में हुई थी। 3 साल बाद मैं ने अपनी बीवी को कुछ गलतफहमियों की वजह से छोड़ दिया और मैं किसी और के साथ लिव इन में रहने लगा। मुझे पता लगा कि मेरी बीवी मुझ पर केस करने जा रही है तो मैं ने बिना पूछे 10 रुपए के स्टाम्प पेपर पर उसे तीन बार तलाक लिख कर भेज दिया। क्या मेरी तलाक हो गयी? मेरी उस से एक बेटी भी है। वो मुझे उस से भी नहीं मिलने देती। मैं क्या करूँ? मैं अपनी बीवी को वापस लाना चाहता हूँ। कोई कानूनी तरीका हो तो बताएँ।

समाधान-

प बड़े अजीब आदमी हैं। आप ने गलतफहमी के चलते अपनी बीवी को छोड़ दिया। किसी अन्य महिला के साथ लिव इन में रहने लगे। गलतफहमी आप को थी बीवी को नहीं। बीवी ने बिना किसी कसूर के दंड भुगता। जब आप को पता लगा कि वह मुकदमा करेगी तो डर के मारे आप ने 10 रुपए के स्टाम्प पेपर पर तीन बार तलाक लिख कर भेज दिया। अब आप को बेटी याद आ रही है। आप औरतों और लड़कियों को समझते क्या है? तीन औरतों को आप ने परेशान कर दिया है। बीवी को छोड़ा, बेटी को पिता के स्नेह से वंचित किया और जिस के साथ लिव इन में रहे हैं उस का क्या उस की तो कोई चिन्ता तक आप ने इस सवाल में व्यक्त नहीं की है। यदि आप धार्मिक व्यक्ति हैं तो खुद सोचिए इन तीन इंसानों के साथ जो गुनाह आपने किए हैं क्या आप का खुदा उन्हें माफ कर देगा? क्या वे माफ कर दिए जाने के काबिल हैं? और यदि नहीं हैं तो उस की सजा आप को क्या मिलनी चाहिए?

आप को सब से पहले तीनों से अपने रिश्ते तय करने होंगे। आप अब अपनी लिव इन वाली स्त्री के साथ किस तरह के संबंध रखने चाहेंगे। यदि आप उस से संबंध न ऱखेंगे तो क्या वह बखेड़ा नही ख़ड़ा करती रहेगी। आप को उस से माफी मांग कर उस से अपने संबंध समाप्त करने होंगे। अपनी पत्नी से भी आप को माफी मांगनी चाहिए। उस के बाद यदि वह वाकई आप को माफ कर दे तो ठीक वर्ना आप अपनी बीवी को कभी साथ नहीं रख पाएंगे और जीवन भर बीवी और बेटी के लिए भरण पोषण का खर्च देते रहने पड़ेगा।

आप ने पूछा है कि क्या आप का तलाक हो गया है? यदि आप ने एक ही स्टाम्प पेपर पर तीन जगह तलाक लिख कर भेजा है तो इसे शरीयत के मुताबिक तलाक नहीं माना जा सकता। भारतीय न्यायालयों की व्याख्या यह है कि तीनों के तलाकों के बीच में पर्याप्त अंतर होना चाहिए जिस से खाविंद और बीवी दोनों को सोचने का अवसर मिले और दोनों के बीच समझौते की बात चल सके। इस तरह यदि आप अदालत जाएंगे तो आप का तलाक अवैध माना जाएगा। इस तरह आप की बीवी अब भी आप की बीवी है। उसे वापस लाने के लिए आप को हलाला की जरूरत नहीं पड़ेगी। पर आप की समस्या का हल यही है कि आप अपनी लिव इन को छोड़ें, बीवी और बेटी के साथ न्याय पूर्वक अपना जीवन बिताएँ। इस के लिए आप को प्रयास करने होंगे। आप फिलहाल आप के दाम्पत्य जीवन की पुनर्स्थापना के लिए वाद संस्थित कर सकती हैं। जब एक बार दावा अदालत में जाएगा तो बातचीत और समझौते का मार्ग भी निकलेगा।

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4 टिप्पणियाँ

  1. Comment by fatma:

    Mere pas 15 din k time h koi samadhan btaiye meri samasya k

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  2. Comment by fatma:

    Meri bhabi ne mere bhai pr 4 sal pehle khane kharche k case kiya h or adalat ne 4500 rp prati mah dene k order zari kiya tha fir hmlogo ne high court me apeal ki to wahan maintenance k kharcha pure 4 sal k jo bhi paisa hua 4500 k hisab se uska half kr diya pr hm log utna paisa dene k bhi kabil nhi hain to kya isse bachne k liye dubara high court me apeal ki ja sakti h……meri samsaya k samadhan kre or koi shi salah de k ab hmlog kya kr sakte hain plz reply me

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    • Comment by दिनेशराय द्विवेदी:

      आप इसी पेज पर ऊपर कानूनी सलाह के लिंक पर क्लिक करें और अपनी समस्या वहाँ खुलने वाले पेज पर स्थित फार्म में दें जिस में अपना नाम, पता व टेलीफोन नं जरूर अंकित करें।

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  3. Comment by goutam:

    मैं अपने परिवार वालों के द्वारा सताया गया हूँ.मेरे चाचा और मेरी पत्नी और पत्नी के माँ बाप चाहते थे कि मैं अपना घर खेत बेच कर पत्नी के साथ चाचा के घर पर रहूँ.मेरे मना करने पर उक्त चारों द्वारा पहले मूझ पर सामाजिक तरिके से दबाव बनाया और २६दिन का समय दिया ताकि मैं अपना घर खेत बेच कर पत्नी के साथ चाचा के घर रहूँ. मेरे मना करने पर पत्नी चाचा के साथ भाग गई .दूसरे दिन पत्नी के मायके से पत्नी को वापस लाने गया पर वह आने से मना कर दी .और लगभग ८ दिन बाद उसके बाप ने पत्नी को चाचा के घर पहूँचाया और फोन फिर से मूझे चाचा के घर जाकर रहने के लिए दबाव बनाने लगा.
    मैने महिला प्रकोष्ठ में आवेदन लगाया पर चाचा और ससूर ने अधिकारियों से मिल कर आवेदन खारिज करवा कर मामला न्यायालय में लगा दिया है. भरण पोषण के लिए.लगातार ६ महिने हर पेशी में गया लेकिन पेशकर महोदय के १५० रूपये के माँग को पूरी न कर पाने की वजह से मूझे अगली पेशी की तारिख ही नहीं मिली और न ही मेरे वकील ने मूझे मेरे बार बार पूछने पर भी अगली तारिख न बताया और मैंने भी कोर्ट जाने की जहमत न उठाई इस बीच तीन साल दस महिने गुजर गये इतने समय में कई पेशी की तारिखें आई पर नियामानुसार यदि कोई अनावेदक लगातार तीन पेशी नहीं पहूँचता है तो कोर्ट को अधिकार है कि वह अनावेदक के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करे पर एसा नहीं किया गया और अब पैसे लेने है अतः मेरे लिए वारंट जारी किया गया है पेशकर ने रूपये जमा करने केलिए १महिने का समय दिया है.
    मैं ऐसा क्या करूँ कि मूझे इस समस्या से निजात मिले.मूलतः यह लड़ाई चाचा और मेरे बीच में है पत्नी महज एक माध्यम है .पत्नी और उसके माँ बाप मेरे किसी भी बात को सुनना समझना ही नहीं चाहते ,जो चाचा चाहता है वही ये तीनो कर रहे है.

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