घर तक पहुँचने का मार्ग सुखाधिकार है जिस में बाधा डालने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा प्राप्त की जा सकती है

Farm & house
समस्या-

ग्राम चिव्ताहिन, उत्तर प्रदेश से मोहम्मद फरहान अहमद ने पूछा है-

मेरा घर ग्राम की मुख्य सड़क से थोड़ी दूरी पर स्थित है, घर तक जाने के लिए अलग अलग पड़ौसियों के कब्जे की ज़मीनों से हो कर जाना पड़ता है।  पड़ौसी बार बार अवरोध उत्पन्न करते हैं  ऐसी स्थिति में मैं अपना घर तो छोड़ नहीं सकता और आने जाने के लिए रोज़ रोज़ कहा सुनी और मारपीट भी नहीं की जा सकती। मैं ये जानना चाहता हूँ कि ऐसी स्थिति होने पर कानून क्या मार्ग बताता है?

समाधान-

प के प्रश्न से स्थिति स्पष्ट नहीं है। आप का घर आबादी भूमि में है या कृषि भूमि में है? फिर जो कब्जे की जमीनें हैं जिन पर से हो कर घर आने जाने में आप को गुजरना पड़ता है वे कृषि भूमि है या फिर आबादी की भूमि है? आप का घर कब से स्थित है और कब से आप उस रास्ते से आ जा रहे हैं? यदि ये तथ्य भी होते तो आप का प्रश्न अधिक स्पष्ट होता।

दि आप के उक्त मकान में आने जाने का और कोई मार्ग नहीं है तो जिस मार्ग से आप अपने मकान के लाभकारी उपयोग के लिए निरन्तर आ जा रहे हैं, वह चाहे किसी भी व्यक्ति की भूमि में से क्यों न गुजरता हो, उस मार्ग से आने जाने का आप को सुखाधिकार प्राप्त है। कोई भी व्यक्ति जो उन भूमियों का स्वामी है आप के आने जाने के सुखाधिकार में किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता। यदि आप को आशंका है तो आप विशिष्ठ अनुतोष अधिनियम की धारा 52 से 54 तथा सुखाधिकार अधिनियम की धारा 35 के अन्तर्गत दीवानी वाद प्रस्तुत कर ऐसी बाधा उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध निषेधाज्ञा की डिक्री प्राप्त कर सकते हैं। इसी वाद में आप अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर वाद के चलने तक आप को अपने घर आने जाने के मार्ग को अवरुद्ध न करने संबंधी अस्थाई निषेधाज्ञा भी प्राप्त कर सकते हैं।

दि किसी ने आप का मार्ग अवरुद्ध किया है और उस से आप को परेशानी, आर्थिक नुकसान और मानसिक संताप हुआ है तो आप सुखाधिकार अधिनियम की धारा 33 के अन्तर्गत इन के लिए क्षतिपूर्ति की मांग कर सकते हैं और उसे प्राप्त करने के लिए वाद प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि दोनों कारण उपलब्ध हों तो आप निषेधाज्ञा तथा क्षतिपूर्ति के लिए एक ही संयुक्त दीवानी वाद भी प्रस्तुत कर सकते हैं।

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2 टिप्पणियाँ

  1. Comment by premlal singh:

    मेरा बैठ का खसरा no ११२/२ है उसी बैठ की मेड ११३ है जो की नाम में आना रह गई है जो की पूर्व में ११२ की बांध की है उसका १/२ नहीं किया गया

  2. Comment by RAJENDRA SINGH:

    अति उत्तम समाधान / साधुवाद
    राजेंद्र सिंह / अजमेर / राजस्थान

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