जिस जन्म-मृत्यु पंजीयक कार्यालय के क्षेत्राधिकार में मृत्यु हुई है वही मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर सकता है।

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समस्या-

कमल शुक्ला ने जंजगीर, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-


दो वर्ष पूर्व मेरे पिता जी की देखभाल के लिए जांजगीर शहर में हमने एक आबादी भूमि में स्थित मकान खरीदा । इसके लिए तीनो भाई ने और पिता जी ने खर्च किया । नगर पालिका में पिता जी के नाम से नामांतरण कराया । पिता जी की देखभाल मेरे जिम्मे थी । पर अक्टूबर से नवंबर महीने में मुझे एक सम्मान समारोह में अमेरिका जाना हुआ । इस बीच मेरे 84 वर्षीय पिता जी की देखभाल के लिए मैंने वही पड़ोस में रहने वाली अपनी बहन को सौंपा था । इस बीच मे पिता जी का स्वास्थ्य खराब हुआ और उनकी मृत्यु हो गयी । मैं अपनी यात्रा स्थगित कर लौट आया और मृतक संस्कार के बाद हम तीनो भाइयों ने दिसम्बर में नामांतरण हेतु अर्जी दी , शुल्क पटाया । इश्तहार प्रकाशन के दो माह बाद भी नगर पालिका से कोई जवाब नही आने पर सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि हमारे आवेदक पर आपत्ति आया है । पता चला कि मेरी बहन ने पिता जी से उनकी बीमारी की स्थित में मृत्यु से 15 दिन पूर्व वसीयत कराया हुआ है । वसीयत की तिथि के दिन उसने बेहोशी की स्थिति में पिता जी को एक कार में डाल कर मुहल्ले वालों को बताई कि वह उसे अस्पताल ले जा रही है । पिता जी को उसी स्थिति में पंजीयक कार्यालय ले जाकर उसका अंगूठा वसीयत में करवाई जबकि मेरे पिता जी रिटायर्ड शिक्षक थे । उसी तिथि को गंभीर स्थिति में पिता जी का चेकअप भी उसी ने करवाया है । जिसके कागजात हमारे पास ही है । नगर पालिका नबाब तक हमे किसी प्रकार का नोटिश नही दिया । काफी दिन टालने के बाद अब कह रहे हैं कि इस मामले में दोनो की ओर से अलग अलग मृत्य प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है । आगे कार्यवहीँ करने से दोनों के खिलाफ रिपोर्ट लिखाना पड़ेगा , इसलिए मामले को ठंठे बस्ते में डाल दिये हैं और इस मकान का नामांतरण नही होगा । क्या ऐसा हो सकता है ? कहीं मेरी बहन के पक्ष में कोई एकतरफा कार्यवाही तो नही कर रहे ? नगर पालिका का बड़ा बाबू मेरे जीजा जी का मित्र है और साथ पढ़ा हुआ है । दो प्रमाण पत्र इसलिए बन गया क्योंकि मुझे नही पता था कि पहले से ही मेरी बहन ने इसी नगर पालिका में बनवा लिया है । जबकि मैंने पास के ही पैतृक गांव से बनवा लिया है । दोनो में एक ही तिथि और समय है ।


समाधान-

मृत्यु प्रमाण पत्र उस कार्यालय से जारी होगा जिस कार्यालय के क्षेत्राधिकार में मृतक की मृत्यु हुई है। इस कारण जो प्रमाण पत्र उस कार्यालय से जारी हुआ है जहाँ आप के पिता मृत्यु नहीं हुई है वह गलत है उसे निरस्त माना जाना चाहिए। आप सही कार्यालय से जारी प्रमाण पत्र की प्रतियाँ प्राप्त कर अपने उपयोग में ले सकते हैं।

यदि नगर पालिका नामांतरण नहीं कर रही है तो नगर पालिका को नोटिस दे कर नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद घोषणा व स्थाई निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत किया जा सकता है। इस वाद में आप के पिता के सभी उत्तराधिकारी और नगर पालिका को पक्षकार बनाना होगा। यदि आप की बहिन संपत्ति को केवल अपने नाम नामान्तरण कराना चाहती है तो वह वसीयत के आधार पर उस का प्रतिवाद करेगी। आप वहाँ वसीयत को गलत साबित कर सकते हैं जिस से सभी उत्तराधिकारियों के नाम मकान का नामांतरण हो सके।

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2 टिप्पणियाँ

  1. Comment by रवि श्रीवास्तव:

    कमल जी आपकी बहन का पक्ष आपकी आपेक्षा मजबूत प्रतीत हो रहा है. पहला तो ये कि आपकी बहन उप निबंधक कार्यालय में जाकर पंजीकृत वसीयत अपने जीवन काल में अपनी पुत्री को की है, निबंधक द्वारा संतुष्टि के उपरांत ही पंजीकरण किया जाता है. जहाँ न केवल फोटो खिंची जाती है बल्कि डिजीटल अँगूठे का निशान भी लिया जाता है, बेहोशी की हालत में इतना संभव नहीं है. दूसरा आपकी बहन के पास विधिक रूप से सही मृत्यु प्रमाण-पत्र भी है. आप द्वारा जो प्रमाण-पत्र बनवाया गया है वो गलत है, मतलब कि आपने गलत सूचनाओं के आधार पंजीयन कराया है. इसके लिए आपके खिलाफ़ कार्यवाही भी हो सकती है. लिहाजा आप किसी अच्छे अधिवक्ता से संपर्क करके अपनी समस्या का यथाशीघ्र समाधान कर लें.

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