तलाक का आधार हो तो दूसरे पक्ष की सहमति की जरूरत नहीं।

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समस्या-

नवीन ने साईखेड़ा, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी को एक  साल हो चुका है। मेरी पत्नी छत से कूदने की, फाँसी लगाने की धमकी देती है। काम करने की मना कर चुकी है। शादी से पहले उसका अफ़ेयर रह चुका है। घर से 2 बार व मायके से 1 बार भाग चुकी है। एक रात कहीं रह चुकी है। 4 माह से उसका मानसिक इलाज़ करा रहा हूँ। दूसरों के सामने अच्छा व्यवहार करती है। तलाक की याचिका लगा दी है पर वो तलाक देने को तैयार नहीं है। क्या करूँ?

समाधान-

प के सवाल का छोटा सा जवाब है कि “मुकदमा लड़िए”।

आप की ही तरह मेरे पास ऐसे बहुत लोग समस्या ले कर आते हैं, जो यही कहते हैं कि मेरी पत्नी या पति तलाक के लिए राजी नहीं है। 1955 में हिन्दू मैरिज एक्ट प्रभावी होने के पहले तो भारत में कोई भी इस बात पर राजी नहीं था कि हिन्दू विवाह में तलाक होना चाहिए।

फिर हिन्दू मैरिज एक्ट आया तो उस में तलाक के प्रावधान आए जिन के अनुसार कुछ आधारों पर पति या पत्नी तलाक की मांग कर सकते थे, कुछ ऐसे मुद्दे थे जिन पर केवल पत्नी तलाक की मांग कर सकती थी। लेकिन कानून के अनुसार इस के लिए अदालत में आवेदन देना अनिवार्य था। पति की अर्जी पर पत्नी या पत्नी की मर्जी पर पति अदालत में सहमत भी होता था तो तलाक होना असंभव था। स्थिति यह थी कि जो भी तलाक लेना चाहता/ चाहती थी उसे जिस आधार पर तलाक चाहिए था उसे साक्ष्य के माध्यम से साबित करना जरूरी था। आधार मुकम्मल रूप से साबित होने पर ही तलाक मिल सकता था। तलाक का यह तरीका हिन्दू मैरिज में अभी भी मौजूद है।

फिर  1976 में सहमति से तलाक का प्रावधान आया। पहले यदि पति पत्नी दोनों सहमत होते हुए भी तलाक लेने जाते थे तब भी कम से कम एक पक्ष को विपक्षी के विरुद्ध तलाक के आधार को साक्ष्य से साबित करना पड़ता था। अब दोनों पक्षों के सहमत होने पर इस की जरूरत नहीं रह गयी। बस सहमति से तलाक का आवेदन पेश करें और छह माह बाद भी सहमति बनी रहे तो अदालत तलाक की डिक्री प्रदान करने लगी।

तो नवीन जी¡ तो कुछ समझ आया? आप के पास तलाक के लिए आधार मौजूद है। आपने अपनी समस्या में जो बातें लिखी हैं उन में से शादी के पहले के अफेयर की बात के सिवा सारी बातें अदालत में साबित कर देंगे तो आप को तलाक की डिक्री मिल जाएगी। उस के लिए पत्नी की सहमति की जरूरत नहीं है। बस ये है कि कुछ समय अधिक लगेगा।

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4 टिप्पणियाँ

  1. Comment by Natwarsahani:

    मै नटवर साहनी राज्य छत्तीसगढ़ से श्रीमान् वकील साहब जी मेरी समस्या का निराकरण करे।मेरा पिताजी गोबरा नवापारा मे 40 वर्षो से उस मकान में काबिज व निवासरत है।टैक्स उन्ही के नाम से नगरपालिका में दर्ज है।मेरे पिताजी,माता जी का देहांत वर्ष् 2015 में हुई है।उनका सिर्फ मैं ही एक पुत्र हूँ।मेरे पिता को शासन द्वारा आबादी पट्टा नही मिला है।टैक्स रसीद के अलावा उक्त मकान का कोई दस्तावेज नही है।मै अपने नाम पर नामांतरण करवाना चाहता हूँ।किन्तु नगरपालिका के कर्मचारी नामांतरण नही होगा यह कहरहा है।वे कह रहे है कि मकान/भूमि के पट्टा लाओ या उप-पंजीयक शाखा से मकान/भूमि को रजिस्ट्री करवाये।उक्त पेपर लाने पर ही नामांतरण होगा। कृपया उचित सलाह देवे।

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  2. Comment by saurabh verma:

    मेरी शादी को २ साल होने वाला है जो की हिन्दू रीति रिवाज के तहत है और मेरी एक ८ महीने की बेटी भी है। हम दोनो पति पत्नी मे अब बनती नही है। मेरी पत्नी के पिताजी एक क्रिमिनल है। वो हमारी शादी से ६ महीने पहले ही किसी मामले मे जेल से रिहा हुए है और उसके दोनो भाई भी आवारा गर्दी मार पीट करते फिरते है। और ये सब मुझे शादी के बाद पता चला। हम दोनो ने अपनी एंगेजमेंट के बाद एक दूसरे से अपने लाइफ मे बीती हर बात सेयर की मेरा भी किसी के साथ अफेयर था और मेरी पत्नी का भी किसी के साथ अफेयर था। लेकिन हम दोनो आपसी सलाह करके की अब पीछे मुड़ कर नही देखना है। मेरी पत्नी की माँ और पिताजी मे बनती नही क्योंकि उनका भी कही अफेयर चल रहा है ये मेरी पत्नी ने मुझे बताया। मेरी सास मेरी पत्नी को भड़काती रहती है मेरे खिलाफ। और कभी हम दोनो मे झगड़ा होता है तो वो मुझे और मेरे परिवार वालो को गुंडो से पिटवाने की धमकी देती है। मैं अपनी पत्नी से तलाक चाहता हूँ। मैं बंगलोर मे रहता हूँ और वो बंगलोर आती है और अपने घर जाती है पर मेरे मा पिताजी के पास नही जाती। बोलती है वहां केसे रहेंगे दोनो बीमार रहते है और बूढ़े भी हो गये है। और झगड़ा के दौरान वो ऐसी ऐसी बाते मुझसे करती है जिससे मैं अपने आप के नजर मे गिर जाता हूँ। मैंने कभी किसी चीज की कमी नही किया और प्यार भी बहोत करता था। उसकी माँ मेरी बेटी के बगेर नही रह सकती इसलिए अपनी बेटी को भड़कति रहती है और वो झगड़ा करती है मेरे से। मेरी अब जान पे आ गई है। मुझे उससे तलाक चाहिए मगर वो देना नही चाहती। कृपा कके कोई समाधान दे।

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