न्याय के लिए जल्दी से जल्दी न्यायालय का द्वार खटखटाएँ।

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समस्या-

कृष्ण ने नोएडा उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैंने 25 साल पहले 40000 रू. पगड़ी पर दुकान दी थी। अब मुझे दोबारा मकान बनाना है। दुकान खाली करने के लिए उसको 5 लाख का ऑफर दिया लेकिन वो 20 लाख मांग रहा है। 10 साल से किराया भी नहीं देता। उसने यहाँ के लोगों से 20 लाख रुपए उधार ले रखे थे। पैसे ना होने की वजह से उसकी दूकान 7 महीनो से बंद है। उसका भी कोई पता नहीं। क्या में उसकी दुकान खाली करवा सकता हूँ?

समाधान-

प बड़े सुस्त व्यक्ति हैं। आप के किराएदार ने दस साल से किराया नहीं दिया है और आप अब पूछ रहे हैं कि क्या मैं दुकान खाली करवा सकता हूँ। यदि किराया छह माह का भी बकाया हो जाए तो तुरन्त किराएदार को नोटिस दे कर वसूली के वाद के साथ दुकान खाली करने का वाद संस्थित करना चाहिए। लेकिन आप ने यह सब नहीं किया। यदि एक संपत्ति का स्वामी इतना सुस्त होगा तो उस की संपत्ति ही संकट में पड़ जाएगी। न्याय का सिद्धान्त यह है कि पीड़ित को शीघ्र से शीघ्र न्यायालय के पास फरियाद ले कर जाना चाहिए। वह जितनी देरी करेगा उतना ही न्याय उस से दूर चला जाएगा।

देरी का नतीजा यह है कि आप कभी भी तीन वर्ष से अधिक का किराया वसूल करने के लिए न्यायालय में कोई वाद संस्थित नहीं कर सकते। अब भी देरी न करें। तुरन्त दुकान खाली करने का वाद संस्थित करें। दुकान खाली कराने के आधारों में व्यक्तिगत आवश्यकता के लिए मकान का पुनर्निर्माण, किराया अदायगी में कानूनी चूक तथा छह माह से अधिक समय से दुकान का उपयोग न करने को शामिल करें।

याद रखे कि पगड़ी पर दुकान देना और दुकान खाली करने के लिए धनराशि मांगना अपराध हैं। इन्हें स्वीकार करने वाले को दंडित कराने के लिए अभिजोजन पक्ष को अधिक समस्या नहीं होती।

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