संयुक्त संपत्ति के लिए विभाजन का वाद प्रस्तुत करना चाहिए।

समस्या-

प्रदीप ने भोपाल, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियममेरे ससुर जी के पिता जी का देहान्त हो चुका है। उन्हों ने अपनी वसीयत नही लिखी। उनकी पत्नी जीवित है। मेरे ससुर जी तीन भाई हैं और वो सबसे बड़े थे और जब उनके पिताजी जीवित थे तब उन्हों ने अपने तीनो बेटों को हिस्सा दे दिया था। जिस में दो लोगो के हिस्से में घर आया था और बीच वाले के हिस्से में प्लॉट था। इस के बाद हमारे ससुर जी के पिताजी का देहान्त हो गया। अब प्रोब्लम ये है कि दूसरे भाई की मृत्यु हो गयी है उस के कोई बच्चे नहीं हैं, उस की पत्नी अपने मायके चली गयी और फ्राड कर के उसने वसीयत अपने नाम करवा ली है जो कि दोनों के हिस्से में घर था, और उसे उस ने किसी तीसरे को बेचने की कोशिश भी की। जब से वो गयी उस घर से अपने सब समान भी ले के चली गयी और 4 सालो में एक भी बार नहीं आई। कभी कभी उस ने जिसे घर बेचने की कोशिश की है उस को साथ ले कर इन लोगों को घर खाली करवाने की धमकी देती है। हमारे ससुर जी सीधे नेचर के हैं उन्होंने अपने सभी भाइयों को पढ़ाया और खूब मदद भी की। अब इस स्थिति में वो क्या करें? 1. क्या वो फ्रॉड करके की गई वसीयत अपने नाम करवा के उसे बेच सकती है? जब कि अभी उसकी सास जीवित है? उस के खिलाफ अपने बचाव के लिए क्या किया जाए?

समाधान-

प के ससुर जी की देहान्त हो गया है और उन्हों ने कोई वसीयत नहीं की है। ऐसी स्थिति में आप सब को यह मानना चाहिए कि उन की कोई वसीयत नहीं है और उन की संपत्ति में हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार उन के उत्तराधिकारियों को मिल चुकी है। उन के उत्तराधिकारियों में उन की सभी संतानें अर्थात पुत्र, पुत्रियाँ और पत्नी हैं और सब का समान हिस्सा है।

प के ससुर के पिता ने दो बेटों को मकान व एक को प्लाट देने का जिक्र किया है। लेकिन यह केवल दान या किसी अन्य प्रकार के पंजीकृत विलेख के माध्यम से ही हो सकता था। लेकिन केवल मौखिक ही ऐसा हुआ है तो ऐसा दिया जाना केवल रहने के लिए दिया जाना माना जाएगा और सारी संपत्ति को उन की मृत्यु के पूर्व उन का ही माना जाएगा। और उन की मृत्यु के समय उस का अधिकार सभी उत्तराधिकारियों को मिलना माना जाएगा।

मृत भाई की पत्नी इस संपत्ति को बेचने का प्रयास कर चुकी है। इस तरह उक्त समस्त संपत्ति में उस के पति का जो हिस्सा था उस हिस्से की वह उत्तराधिकारी है और पति का देहान्त हो जाने से उस हिस्से की स्वामी है। वह अपना हिस्सा बेच सकती है। संपूर्ण संपत्ति का उस के नाम वसीयत बना लेना एक मिथ हो सकता है क्यों कि ऐसी वसीयत अभी तक सामने नहीं आई है।

प के ससुर साहब को चाहिए कि उक्त संपूर्ण संपत्ति का विभाजन करने तथा सभी उत्तराधिकारियों का अलग अलग हिस्सा निर्धारित कर उन्हें अलग अलग कब्जा दिए जाने के लिए विभाजन का वाद सिविल न्यायालय में प्रस्तुत करें तथा किसी भी उत्तराधिकारी के द्वारा अपने हिस्से को बेच कर अलग करने पर रोक लगाने के लिए अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करें। यदि आप के ससुर के पिता जी की कोई असली या फर्जी वसीयत हुई तो सामने आ जाएगी और उसे असली या फर्जी साबित किया जा सकता है।

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