संयुक्त संपत्ति में हिस्से की वसीयत की जा सकती है।

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियमसमस्या-

राजेश कुमार ने कटिहार, बिहार से समस्या भेजी है कि-

मेरी माँ के नाम से दो घर व खेती की जमीन है। यह मेरे पिता जी ने अपनी कमाई से खरीदा है। मेरी माँ का देहान्त 15 फरवरी को हो गया है। मेरी चार बहनें विवाहित हैं, बड़े भाई और मैं भी विवाहित हूँ। मेरे पापा की भी उम्र हो चुकी है। पर भैया हमेशा पैसा बरबाद करते रहते हैं क्यों कि उन्हें शराब और जुआ की गन्दी लत है। पापा अब चाहते है कि जमीन की वसीयत मेरे नाम हो जाए जिस से बड़े भाई बेच नहीं सकें।

समाधान-

हुत देर हो चुकी है। संपत्ति आप की माता जी के नाम से है। इस कारण उन की मृत्यु के साथ ही उस का उत्तराधिकार तय हो चुका है। आप के पिता जी, चार बहनें और दो भाई कुल 7 उत्तराधिकारी हैं। अब समूची संपत्ति में इन सभी के 1/7 हिस्से हैं। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-30 के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति किसी संयुूक्त, पुश्तैनी या सहदायिक संपत्ति में अपने हिस्से की वसीयत सकता है। आप के पिता जी यदि वसीयत करते हैं तो वह वसीयत केवल उन के 1/7वें हिस्से पर प्रभावी होगी। यदि वे वसीयत से अपना हिस्सा आप के नाम कर दें और आप की बहनें अपना हिस्सा रिलीज डीड निष्पादित कर उन का हिस्सा आप के नाम रिलीज कर दें तो आप के पास संपत्ति का 6/7वाँ हिस्सा हो जाएगा। आप के भाई के पास केवल उस का 1/7वाँ हिस्सा रह जाएगा। आप चाहें तो यह व्यवस्था कर सकते हैं। जो बेहतरीन तरीका है।

दि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी या बेटी के नाम से संपत्ति खरीदता है तो यह माना जाता है कि वह संपत्ति उस के हित के लिए खरीदी गयी है। यदि यह साबित कर दिया जाए कि यह संपत्ति आप के पिता ने पत्नी के हित के लिए खरीदी थी और उस का देहान्त हो चुका है जिस के कारण वह संपत्ति उन की स्वयं की हो गयी है तो वे समूची संपत्ति की वसीयत कर सकते हैं। पर इस वसीयत को आप के भाई द्वारा न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जा सकती है। इस से मुकदमे बाजी बढ़ेगी और व्यर्थ समय जाया होगा। फिर यह मुकदमा भी जटिल होगा उस में यह साबित करना होगा कि संपत्ति पिता ने अपनी निजि आय से पत्नी के हित के लिए खरीदी थी और पत्नी की मृत्यु से वे उस के असल स्वामी हो गए हैं। इस तरह के मामले कम देखने में आए हैं और अभी तक इस तरह के मामलों में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की नजीरें भी देखने को नहीं मिली हैं। इस कारण हमारी राय में आप के लिए पहला वाला उपाय ही ठीक है। पिता अपने हिस्से की वसीयत आपके नाम कर दें और बहनें सम्पति को आप के नाम रिलीज कर दें।

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एक प्रतिक्रिया

  1. Comment by इन्द्रजीत:

    मेरे दादा ने अपनी पेत्रीक ज़मीन जो ७२ बीघा थी सारी अपने परिवार के भतीजों के नाम १९८८ मे सेवा चाकरी का हवाला देकर वसीयत कर दी बल्कि दादाजी के १ लड़का और ७ लड़की एवम दादीजी भी अब तक मौजूद है दादाजी की १९९३ मे म्रत्यु हो गयी बल्कि दादाजी शुरू से हमारे पास ही रहते थे और अंतिम समय भी हमारे पास ही थे
    १९९८ मे अनंतकाल वसीयत के आधार पर भतीजों के नाम दर्ज हो गया अब क्या वह ज़मीन हमें मिल सकती है कृपया सुझाव दे ज़मीन दादा के दादा से आयी हुई है
    वसीयत मे वारिसों का कोई जिक्र नहीँ किया गया ह

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