स्वयं उपलब्ध न हो सकने पर मुख्तार-खास नियुक्त कर उस के माध्यम से विलेख निष्पादित व पंजीकृत कराया जा सकता है

 मथुरा (उ.प्र.) से बृजेन्द्र कुमार दुबे ने पूछा है –

पिताजी के देहांत के बाद हम चार भाई मकान का बँटवारा करना चाहते हैं। एक भाई दिल्ली में रहता है। वह कहता है कि मैं नहीं आ सकता हूँ। तुम दिल्ली आ जाओ और स्टाम्प पेपर पर लिखवा लो या किसी वकील द्वारा स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर मेरे से हस्ताक्षर करवा लो और फोटो ले लो। क्या इस तरह का स्टाम्प मान्य होगा या नहीं। मान्य होगा तो भविष्य में यह भाई किसी प्रकार का विरोध करने का हकदार होगा कि नहीं । स्टाम्प पर क्या लिखवाना होगा और उस के बाद क्या करना पड़ेगा? कृपया उचित सलाह दें।
 
 
 उत्तर –
बृजेन्द्र जी,
प चाहते हैं कि पिता का छोड़ा हुआ मकान का आप बँटवारा कर लें। लेकिन किसी भी संपत्ति का बँटवारा उस के सभी हिस्सेदारों के बिना नहीं होता है। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार किसी भी व्यक्ति के देहावसान पर उस की संपत्ति में उस के उत्तराधिकारियों का हित निहित हो जाता है। प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी के जीवित न होने पर ही द्वितीय श्रेणी के उत्तराधिकारियों का संपत्ति में हित उत्पन्न होता है। आप के मामले में दिवंगत पिता के चार पुत्र मौजूद हैं, जो प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी हैं। लेकिन आप को यह भी देखना होगा कि इन के अतिरिक्त प्रथम श्रेणी का कोई अन्य उत्तराधिकारी तो नहीं है। पुत्रों के अतिरिक्त पुत्रियाँ या दिवंगत पुत्रियों की संतानें और माता भी प्रथम श्रेणी की उत्तराधिकारी हैं। सम्पत्ति के बँटवारे के लिए प्रथम श्रेणी के सभी उत्तराधिकारियों की सहमति बँटवारे में होना आवश्यक है। यदि आप चारों भाई के अतिरिक्त कोई बहिन या आप की माता जीवित हैं तो उन की सहमति भी और बँटवारा विलेख पर उन की सहमति आवश्यक है। 
प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों में से जो भी बँटवारा विलेख पर हस्ताक्षर करने के लिए उपस्थित होने में सक्षम न हो तो बँटवारा विलेख पर हस्ताक्षर करने के लिए उस से मुख्तारनामा-खास प्राप्त किया जा सकता है। वह इस मुख्तारनामे से जिस व्यक्ति को मुख्तार नियुक्त करेगा वह व्यक्ति उस की ओर से बँटवारा विलेख पर हस्ताक्षर कर सकता है। इस मुख्तारनामा-खास में यह अंकित किया जाएगा कि वह किस व्यक्ति को किस उद्देश्य के लिए मुख्तार नियुक्त कर रहा है और मुख्तार को उस का कौन सा काम करना है। बेहतर हो कि आप भाई से मुख्तारनामा-खास निष्पादित करवा कर स्वयं को मुख्तार नियुक्त हो जाएँ। तब आप अपनी ओर से तथा अपने भाई की ओर से बँटवारा विलेख पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि कोई अन्य उत्तराधिकारी बँटवारा-विलेख को हस्ताक्षर करने और उसे पंजीकृत करवाने के लिए उपलब्ध न हो सके तो आप उन के भी मुख्तार नियुक्त हो कर उन की ओर से बँटवारा-विलेख निष्पादित कर उसे पंजीकृत करवा सकते हैं। एक व्यक्ति अनेक व्यक्तियों का भी मुख्तार हो सकता है। लेकिन इस के पहले आप को यह जानकारी करनी होगी कि मुख्तारनामा कितने रुपये के स्टाम्प पेपर पर लिखा जाएगा। यह जानकारी आप मथुरा के उप-पंजीयक कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।  इस कार्यालय में दस्ता
वेजों को पंजीकृत करवाने वाला कोई भी डीड-राइटर यह जानकारी आप को दे सकता है। यदि आप किसी जानकार स्थानीय वकील की सलाह से यह मुख्तारनामा तैयार करवाएँ तो और बेहतर होगा। 
भी उत्तराधिकारियों की सहमति से बँटवारा विलेख तैयार कर उस पर सभी उत्तराधिकारियों के हस्ताक्षर करवाएँ जाएँ और फिर सभी उत्तराधिकारी या उन के मुख्तार उप-पंजीयक कार्यालय में उपस्थित हो कर बँटवारा-विलेख को पंजीकृत करवाएँ। 
 
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4 टिप्पणियाँ

  1. Comment by Mohd riyaz:

    पावर आर्टटोनी देने के बाद अगर बैंक रकम आजाय और पॉवर आर्टोटनी वाला बैंक से नहीं ले तो किया करे

  2. Comment by मलखान:

    उपयोगी जानकारी दी आपने
    अच्छा लिखा है. बधाई
    मेरे ब्लॉग पर आकर उत्साहवर्धन करें.
    क्या यही है पत्रकारिता का स्टैंडर्ड
    चीयर लीडर्स की जगह आएंगी चीयर क्वीन्स

  3. Comment by राज भाटिय़ा:

    बहुत उपयोगी जानकारी

  4. Comment by सुशील बाकलीवाल:

    बहुसंख्यक जनसमुदाय के लिये उपयोगी जानकारी । आभार…

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