स्वयं की आवश्यकता होने पर ही त्याग पत्र दें, नियोजक के कहने पर नहीं

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 अनूप अकुलवार ने पूछा है –
मैं एक निजि फर्म में पिछले 12 वर्ष से नौकरी कर रहा हूँ। अब किसी बात को ले कर नए साहब मुझे नौकरी छोड़ने को कह रहे हैं। मुझे क्या करना चाहिए?
 उत्तर –
अनूप जी,
प 12 वर्ष से नौकरी कर रहे हैं। 12 वर्षों की नौकरी के कारण आप के अनेक अधिकार स्थापित हो चुके हैं। जैसे आप ग्रेच्युटी के हकदार हैं। यदि नियोजक द्वारा आप को सेवा से पृथक किया जाता है तो उसे कोई उचित कारण बताना पड़ेगा। इस के अतिरिक्त उसे नोटिस की अवधि का वेतन और सेवाकाल का मुआवजा भी देना पड़ेगा।  इस के अतिरिक्त अन्य लाभ भी हो सकते हैं जिन्हें प्राप्त करने के आप अधिकारी हो चुके होंगे। सब से बड़ी बात तो यह है कि इन 12 वर्षों में आप एक अच्छा वेतन प्राप्त कर रहे होंगे। 
प्रत्येक नियोजक यह चाहता है कि उसे अपने कर्मचारी को कम से कम वेतन देना पड़े। लेकिन पुराने कर्मचारी का वेतन अधिक होता है। जैसे जैसे उस का वेतन बढ़ता जाता है नियोजक यह सोचने लगता है कि यदि पुराने कर्मचारी को निकाल कर नया कर्मचारी रख लिया जाए तो वही कार्य आधी कीमत पर करवाया जा सकता है। इस कारण से वह किसी भी रीति से पुराने कर्मचारी को सेवा से निकालना चाहता है। लेकिन एक तो यह किसी कर्मचारी को सेवा से हटाने का उचित कारण नहीं है दूसरे वह कर्मचारी को देय लाभ भी उसे नहीं देना चाहता। इस कारण से वह किसी न किसी बहाने कर्मचारी पर मानसिक दबाव उत्पन्न करता है कि वह स्वयं नौकरी छोड़ दे। होता यह है कि कर्मचारी की सेवा तो नियोजक समाप्त करना चाहता है लेकिन रिकॉर्ड यह बनाना चाहता है कि स्वयं कर्मचारी ने सेवा त्याग दी हो।
त्याग-पत्र प्राप्त करने के पूर्व नियोजक इस तरह के प्रलोभन भी कर्मचारी को देता है कि उसे प्राप्त होने वाले समस्त लाभ उसे तुरंत दे दिए जाएंगे। यहाँ तक कि उसे अतिरिक्त लाभ भी देने की बात की जाती है। लेकिन त्याग-पत्र देते ही इन लाभों से इन्कार कर दिया जाता है। कानूनी रूप से त्याग पत्र देने वाले कर्मचारी को जो लाभ प्राप्त होते हैं उस से अधिक लाभ उन कर्मचारियों को प्राप्त होते हैं जिन्हें स्वयं नियोजक किसी कारणवश सेवा से हटाता है। इस तरह त्याग पत्र प्राप्त कर नियोजक कर्मचारी को अनेक लाभ प्रदान करने से बच जाता है। यदि कोई कर्मचारी स्वयं त्याग पत्र देता है तो फिर वह उस की सेवा समाप्ति को कानून के समक्ष चुनौती भी नहीं दे सकता। लेकिन यदि नियोजक उस की सेवाएँ समाप्त करता है और ऐसी सेवा समाप्ति में कोई अवैधानिकता है तो कर्मचारी उसे प्रदान किए गए लाभों को प्राप्त करने के बाद भी उस सेवा समाप्ति को कानून के समक्ष चुनौती दे सकता है।

मेरी स्पष्ट राय यह है कि यदि आप स्वयं ही किसी उद्देश्य से सेवा छोड़ना चाहते हों तब ही आप त

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एक प्रतिक्रिया

  1. Comment by ज़ाकिर अली ‘रजनीश’:

    Kaam ki jaankari, Aabhar.

    …………
    खुशहाली का विज्ञान!
    ये है ब्लॉग का मनी सूत्र!

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