पिता की संपत्ति में सन्तान का हिस्सा …

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समस्या-

रश्मि ने भोपाल मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी को अपने पिता जी से संपत्ति उत्तराधिकार में प्राप्त हुई थी अब पिताजी उस की वसीयत सिर्फ मेरे भाई के नाम करना चाहते हैं। हम तीन बहनें हैं क्या इस संपत्ति में हम बहनों का भी अधिकार है।

 

 

समाधान-

दि आप के पिताजी को प्राप्त यह संपत्ति उन के पिताजी या दादा जी को उन के किसी पूर्वज से उत्तराधिकार में 17 जून 1956 के पूर्व प्राप्त हुई थी और तब से लगातार उत्तराधिकार में ही प्राप्त होती रही है तो वह संपत्ति सहदायिक हो सकती है और उस में आप का हिस्सा हो सकता है।

लेकिन 17 जून 1956 के बाद कोई भी व्यक्तिगत संपत्ति उत्तराधिकार के आधार पर सहदायिक नहीं हो सकती। यदि ऐसा है तो आप के पिता जी को उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति उन की व्यक्तिगत हो सकती है, उस में उन के जीवनकाल में किसी का कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होगा और उसे वे जिसे चाहें वसीयत कर सकते हैं। वैसी स्थिति में आप बहनों या भाई को कोई अधिकार उक्त संपत्ति में प्राप्त नहीं होगा। जिसे भी प्राप्त होगा वसीयत के कारण प्राप्त होगा।

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4 टिप्पणियाँ

  1. Comment by मनोज:

    यदि पिता उनके जीवनकाल में वसीयत ना करे तो उनके मृत्यु के बाद वो सम्पति पुत्र पुत्रियो को बराबर हिस्से में बटेगी

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  2. Comment by मनोज:

    यपुर, राजस्थान से प्रियंका ने पूछा है –

    मैं एक महिला हूं। मेरा एक भाई भी है। अपने पिता की हम दो ही संतान हैं। मेरे पिता को पिछले साल दादा जी के मौत के बाद विरासत में खेती की जमीन अपने पिता से मिली है। मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या मेरे पिता सिर्फ मेरे भाई को उस संपत्ति का वारिस बना सकते हैं या पिता की इच्छा न होने पर भी मुझे उसमें हिस्सा मिल सकता है। कृपया दादा की संपत्ति में हक के बारे में बताएँ।

    समाधान –
    हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 6 में 2005 में हुए संशोधन से पैतृक /सहदायिक संपत्ति में पुत्रियों को पुत्रो के समान ही अधिकार प्राप्त हो गए हैं। लेकिन आप के मामले में यह देखना पड़ेगा कि जो भूमि आप के दादा जी से आप के पिता को प्राप्त हुई है उस की स्थिति 17 जून 1956 के पूर्व क्या थी। यदि उक्त तिथि के पूर्व उक्त संपत्ति आप के किसी पूर्वज को उन के पूर्वज से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई थी तो यह संपत्ति सहदायिक / पुश्तैनी संपत्ति है और इस संपत्ति में आप का वर्तमान में अधिकार निहित है। आप का जो भी हिस्सा उक्त भूमि में है उस पर आप का अधिकार है उसे आप की सहमति के बिना कुछ भी नहीं किया जा सकता। लेकिन इसी तरह उस में आप के पिता और भाई का भी हिस्सा होगा। पिता चाहेँ तो उन के हिस्से की भूमि वे अपने पुत्र या पुत्री दोनों को दे सकते हैं।

    यदि यह संपत्ति आप के दादा जी की स्वअर्जित संपत्ति थी तो फिर आप के पिता को वह उत्तराधिकार में प्राप्त हुई थी तो उस संपत्ति पर आप के पिता का संपूर्ण अधिकार है। वे अपने जीवनकाल में इसे विक्रय कर सकते हैं, दान कर सकते हैं या वसीयत कर सकते हैं। यदि आप के पिता उक्त संपत्ति को वसीयत करते हैं तो जिसे भी वे वसीयत करेंगे, उन के जीवनकाल के उपरान्त यह संपत्ति उसी वसीयती की हो जाएगी। न आप और न ही आप के भाई उस पर कोई आपत्ति कर सकते हैं। यदि पिताजी अपने जीवन काल में उक्त संपत्ति को किसी भी प्रकार से हस्तान्तरित नहीं करते हैं और शेष रह जाती है तो आप के भाई और और आप को आधी आधी संपत्ति उत्तराधिकार में प्राप्त हो सकती है।

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  3. Comment by राम:

    यदि कोई कृषिभूमी चार या पाॅच पीढी पूर्व किसी स्त्री को दान मे मिली हो तो पाॅचवी पीढी के लिए वह भूमी पूश्तैनी होगी या उत्तराधिकार मे प्राप्त सम्पति ?

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