Archive for July 21st, 2018

समस्या-

पिताजी की मत्यु के उपरान्त मां के नाम पेन्सन लगानी है। पसन्तु  पिताजी के आघार कार्ड  मैं नाम केदार दत्त है और ट्रेजरी ऑफिस में केदार दत्त थपलियाल है  और sbi account मैं भी केदार दत्त थपलियाल है ,किन्तु sbi  bank मैं nominne कोई न होने के कारण sbi bank से पेसे कैसे प्राप्त किये जाएं?  और साथ ही उत्तराधिकार पत्र कैसे प्राप्त किया जाए?

– दीपक प्रसाद,  ग्राम – महेश नगर, पो० – रहुवा चाँदनीखाल, तहसिल  – पोखरी, जिला- चमोली

समाधान-

धार कार्ड में उसी नाम से काम चलाना पडेगा। अन्य पहचान पत्र दिखाए जा सकते हैं। बैक से धन प्राप्त करने के लिए उत्तराधिकार प्रमाण बनवाना होगा जिस  के लिए जिला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करना पड़ेगा। इस के लिए किसी स्थानीय वकील की सहायता प्रप्त करें।

पति-पत्नी को साथ रहने या रखने को बाध्य नहीं किया जा सकता।

July 21, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

प्रभाकर कुमार ने  झारखण्ड राज्य के गोड्डा जिले में गुलजारबाग, जिला गोड्डा, झारखंड से पूछा है-

मेरी एक बहन है, जिसका नाम प्रियंका है। जन्म से ही प्रियंका थोड़ी मंदबुध्दि की है। जब वो विवाह योग्य हुई तो उसके विवाह संबंधी चर्चा समाज में की जाने लगी। चूँकि प्रियंका मंदबुध्दि की थी इसलिए व्यवहारिक है उससे कोई पढ़ा-लिखा व्यक्ति विवाह को तैयार नहीं था। पिताजी द्वारा इस बात की भी घोषणा की गयी कि यदि कोई ऐसा लड़का जो गरीब हो और पढ़ा-लिखा हो प्रियंका से विवाह करेगा तो उसकी आगे की पढाई लिखाई का पूरा खर्च पिताजी द्वारा दिया जायेगा। एक लड़का प्रियंका से विवाह संबंधी बातचीत के लिए सामने आया। नयंजय भारती (उर्फ़ श्रीकांत मंडल) जो बिहार राज्य के बाँका जिले के बाराहाट प्रखंड में ग्राम- बेलटिकरि का निवासी है। वो गुलजारबाग मोहल्ले में ही रहकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था। उसे उसके माता-पिता द्वारा पढ़ाई हेतु पैसा नहीं दिया जा रहा था अतः वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपने पढ़ाई का खर्च पूरा किया जा रहा था। नयंजय भारती प्रियंका के मानसिक दशा से भली-भाँति परिचित था, वो सारी बातें जानते हुए भी वह प्रियंका से विवाह को तैयार हुआ। मेरे पूरे परिवार द्वारा भी नयंजय भारती को प्रियंका के मानसिक दशा से परिचित कराया गया। नयंजय भारती ने इस बात को स्पष्ट किया कि वह प्रियंका के साथ सामन्जस्य बिठा लेगा।

अंततः दोनों परिवारों की रजामन्दी से इस रिस्ते की अनुमति प्रदान की गयी। प्रियंका और नयंजय भारती का विवाह 2005 में हुआ। शादी के कुछ हफ्ते बाद मेरे पिताजी द्वारा नयंजय भारती को पटना प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी हेतु भेजा गया। वह पटना में  2008 तक रहा। इस दौरान उसके सभी प्रकार के जरूरतों को पूरा मेरे पिताजी द्वारा किया गया। इसके बाद नयंजय भारती नोएडा (दिल्ली) चला गया और वहां किसी प्राईवेट कंपनी में नौकरी करने लगा।  उसी क्रम में 2012 में उसका चयन रेलवे विभाग में ग्रुप डी के पद पर हुआ। उसके बाद नयंजय द्वारा प्रियंका को मेरे माता-पिता के पास पहुंचा दिया गया। उसके कुछ दिनों बाद नयंजय भारती के जीजा का एक दिन फोन आया और उसने पिताजी से सवाल किया कि प्रियंका के साथ नयंजय का जीवन कैसे गुजरेगा? साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से उसने दूसरी शादी की भी बात कह दी। पिताजी द्वारा इस बात की सूचना मुझे प्राप्त हुई। इसके बाद नयंजय भारती से बात करने के लिए उसे गोड्डा बुलाया गया, जहाँ उसने रुपयों की मांग रख दी, उसे मेरे परिवार के सदस्यों द्वारा काफी समझाया गया किन्तु वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुआ। बाद में मैं पुनः अपने मित्र और फुआ के दामाद यानि जीजा जी के साथ नयंजय भारती के घर गया। वहां पर उसके परिवार के सभी सदस्यों ने ये स्पष्ट कहा कि वह नयंजय की दूसरी विवाह करायेंगें।

अंततः बाध्य होकर मैं न्यायालय की शरण में गया। न्यायालय में नयंजय से सहमति बनी तथा प्रियंका को नयंजय भारती अपने साथ जगाधरी, हरियाणा ले गया जहाँ वह कार्यरत है।  किन्तु  बार बार प्रताड़ित करना जारी रखा । इस वर्ष नयंजय भारती दूसरी शादी करने के लिए घर आया हुआ था जिसकी सूचना मेरी बहन द्वारा मुझे प्राप्त हुई। मैंने इसकी सूचना बाँका के पुलिस अधीक्षक को दिया। जिससे विवाह की रात्रि में पुलिस उनके घर गयी। लेकिन उसी दिन शाम को नयंजय प्रियंका को मेरे आवास गोड्डा पहुंचाकर चला गया। मुझे बाद में पता चला कि नयंजय का विवाह मंदिर में होना था किन्तु जब पुलिस उनके घर गयी तो उसकी शादी रुक गयी। मेरी बहन अभी तक संतान सुख से वंचित है, जब मेरे परिवार द्वारा 2012 में प्रियंका का मेडिकल चेकअप कराया गया तो मेडिकल रिपोर्ट में रिजल्ट सामान्य आया और डॉक्टर ने नयंजय को भी अपना चेकअप कराने को कहा किन्तु उसने नहीं कराया। जब मेरे परिवार द्वारा नयंजय को IVF करने की बात की तो वह तैयार नहीं।  इस विषय पर नयंजय का कहना है कि वह IVF (टेस्ट ट्यूब बेबी) तकनीक का उपयोग नहीं करने वाले है बल्कि दूसरी विवाह करेंगे। हम सभी नयंजय को पूर्ण सहयोग करने को तत्पर हैं किन्तु नयंजय भारती केवल दूसरी विवाह कर मेरी बहन के साथ साथ मेरे पूरे परिवार को मानसिक दवाव व तनाव बनाये हुए हैं, जिस कारण मेरी माँ और पिताजी की तबियत बराबर ख़राब रहने लगी है।

ये बात तो स्पष्ट है कि उसने मेरे पिताजी की अच्छाइयों का और मेरी बहन की कमजोर मानसिक स्थिति का गलत लाभ उठाया है.. उसे न तो कानून का डर है और ना ही हमलोगों की बातों की कोई कदर। वो पुनः विवाह करने के लिए बातचीत करना प्रारम्भ कर दिया है। वो सारी बातें गुपचुप तरीके से करता है जिसके बारे में उसके करीबी कुछ लोगों को ही पता रहता है। उसकी पिछली शादी कहाँ तय हुई ये हमलोगों को सप्ताह भर बाद पता चला था। वह पुनः विवाह के प्रयास में है कृपया मार्गदर्शन करने की कृपा करें।अतः अनुरोध है कि कृपया मार्ग दर्शन करने की कृपा करें।

समाधान-

प की बहिन मंदबुद्धि थी, उस से कोई विवाह नहीं करेगा,  यह आप के परिवार को आशंका थी। इस कारण उन्हों ने विवाह के लिए लालच रखा कि कोई युवक उस से विवाह करेगा तो आप के पिता उसे विद्याध्ययन और रोजगार प्राप्त करने में भरपूर मदद करेंगे। इस तरह आप के पिता ने बेटी को ट्राफी बना दिया कि जो कोई इसे ले जाएगा उसे बड़ा ईनाम मिलेगा। एक जरूरतमंद आदमी ने इस ट्राफी को ले जा कर अपनी जरूरतें पूरी कर लीं। उस का विद्याध्ययन हो गया, उसे रोजगार मिल गया जो अब स्थायी भी है और कमाई भी अच्छी है। अब उसे आप की बहिन बोझा लगने लगी है। अब वह चाहता है कि किसी सामान्य स्त्री से विवाह कर के सामान्य जीवन बिताए, और अपनी ट्राफी पत्नी के बोझे से छुटकारा प्राप्त कर ले।  आप को लगता है कि नयंजय ने आप के साथ धोखाधड़ी की है। उस ने एक कांट्रेक्ट के तहत आप की बहिन से विवाह किया था और वह उस कांट्रेक्ट को तोड़ रहा है, यह न केवल गैर कानूनी है बल्कि अनैतिक भी है।

कोई मंदबुद्धि स्त्री भी स्त्री और मनुष्य ही होती है। उस में भी शारीरिक और मानसिक सौंदर्य हो सकता है, वह स्वयं भी प्रेम कर सकती है और उस से प्रेम भी किया जा सकता है। यदि हमारे समाज में लड़के लड़कियों का आपस में मिलने जुलने और एक दूसरे को समझने के सामान्य अवसर उपलब्ध होते तो शायद कोई लड़का ऐसा भी मिलता जो आप की बहिन से प्यार कर सकता था और उस से प्रेम के वश विवाह कर सकता था। तब ऐसी स्थिति संभवतः नहीं आती जो आज खड़ी है। आप के पिता ने जो लालच रखा था वह नयंजय की तात्कालिक जरूरत थी। उस ने उसे सीढ़ी बनाया और दुमंजिले पर चढ़ गया। वह अब भी आप की बहिन को सीढ़ी बनाए रखना चाहता है। इसी कारण उस ने आप के बात करने पर आप के पिता के सामने रुपयों की मांग रख दी। जिस व्यक्ति ने आप की बहिन को सदैव सीढ़ी बना कर रखा है, वह कभी उसे न तो प्रेम कर सकता है और न ही उसे सम्मान दे सकता है, न ही स्वैच्छा से उस के भरण पोषण का दायित्व उठा सकता है। एक व्यक्ति ने आप के पिता के दिए लालच का लाभ उठाया और उस के जो दायित्व थे उन्हें नहीं निभाया। लेकिन आप के पिता ने खुद लालच परोस कर अपनी बेटी के जीवन को नर्क बना दिया यह भी सही है।

अब हम कानूनी स्थिति पर विचार करते हैं। प्रियंका नयंजय की विवाहिता पत्नी है, जो मंदबुद्धि है। वह तब भी थी जब उस का विवाह हुआ था और यह बात नयंजय को पता होते हुए उस ने विवाह किया था। यह विवाह या तो सहमति से तलाक ले कर समाप्त हो सकता है या फिर किसी एक पक्ष द्वारा विवाह विच्छेद के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र पर दोनों पक्षों की सुनवाई की जा कर न्यायालय की डिक्री से समाप्त हो सकता है। इस विवाह के समाप्त हुए बिना नयंजय दूसरा विवाह करता है तो वह अवैध होगा और धारा-494 आईपीसी के अंतर्गत दंडनीय अपराध भी होगा। लेकिन यदि आप उसका दूसरा विवाह होना साबित नहीं कर सकते हैं या फिर नयंजय  बिना विवाह किए किसी भी स्त्री को पत्नी की तरह साथ रह कर रहने लगता है तो यह किसी तरह का अपराध नहीं होगा। केवल ऐसा जारकर्म होगा जो अपराध तो नहीं होगा लेकिन जिस के कारण आप की बहिन को तलाक लेने का अधिकार मिल जाएगा। आप की बहिन को तलाक लेने का लाभ तभी है जब कि उस से कोई दूसरा व्यक्ति विवाह करने को तैयार हो या फिर वह एक तलाकशुदा स्त्री के रूप में आप के साथ रहने और आप उसे अपने साथ रहने को तैयार रहें। वैसे वह अभी आप के साथ ही रह रही है।

कानून में किसी भी व्यक्ति को व्यक्तिगत सेवा के लिए बाध्य करने का कोई आदेश न तो पारित किया सकता है और न ही पारित हो जाने पर उस का निष्पादन कराया जा सकता है। किसी पत्नी या पति को अपने पार्टनर के साथ रहने या उसे साथ रखने को बाध्य नहीं किया जा सकता। हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा-9 में यह उपबंधित किया गया है कि यदि कोई दाम्पत्य अधिकारों को मानने से इन्कार कर दे तो इस के लिए डिक्री पारित की जा सकती है। लेकिन इस डिक्री के आधार पर कोई अपने पार्टनर के साथ रहने या उसे साथ रखने से इन्कार कर दे तो उसे बाध्य नहीं किया जा सकता। उस से भी आप की बहिन को केवल तलाक प्राप्त करने का अधिकार ही प्राप्त हो सकता है।

अब इन परिस्थितियों में आप को अभी यह करना चाहिए कि आप की बहिन की ओर से धारा-9 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत दाम्पत्य अधिकारों की प्रत्यास्थापना के लिए आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। प्रताड़ना के लिए और आप की बहिन के स्त्रीधन के लिए धारा 498-ए व धारा 406 में पुलिस को रिपोर्ट दे कर या न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर नयंजय और उस के रिश्तेदारों के विरुद्ध अपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। दूसरा विवाह करना और पति के रिश्तेदारों का उस के लिए प्रयत्न करना भी प्रताडऩा में आता है धारा 498-ए का अपराध बनता है। आप कीबहिन की ओर से भरण पोषण प्राप्त करने के लिए स्त्रियों के प्रति घरेलू हिंसा अधिनियम तथा धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता में भी कार्यवाही करना चाहिए। इस के बाद क्या परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं इस पर दोबारा से विचार कर के निर्णय किया जा सकता है।

हमारी राय में प्रियंका के हक में सब से बेहतर यह है कि उसे भरण पोषण दिलाया जाए जिस के लिए न्यायालय अवश्य आदेश करेगा। यह भरण पोषण उसे नयंजय के जीवनकाल में तब तक मिलेगा जब तक कि वह तलाक ले कर दूसरा विवाह नहीं कर लेती। बेहतर तो यही है कि उक्त तमाम मुकदमों के हो जाने के बाद जब आप बारगेंनिंग करने की स्थिति में हों नयंजय और उस के परिवार से साफ बात करें कि वह प्रियंका के भविष्य के जीवन के लिए कितना धन एक मुश्त दे सकता है? यदि वह एक बड़ी धनराशि उसे देने को तैयार हो तो सहमति से तलाक ले लिया जाना चाहिए। प्राप्त धनराशि को प्रियंका के नाम जमा करना चाहिए या उस से कोई ऐसी संपत्ति बनानी चाहिए जिस से प्रियंका को इतनी स्थायी आय हो जाए जिस से उस का जीवन भर खर्च आराम से चलता रहे। तलाक हो जाने के बाद कोशिश की जाए कि प्रियंका को प्रेम करने वाला कोई सही जीवनसाथी मिल जाए। यदि नहीं भी मिलता है तो वह आपके परिवार के साथ जीवन बिताए।  नयंजय को उस के हाल पर छोड़ दिया जाए।

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