Archive for September 10th, 2018

समस्या-

मेरे दादाजी तीन भाई है और उन सभी ने क़ानूनी रूप से कोई बँटवारा किए बगैर आपसी सहमती से अपनी सुविधानुसार संपत्ति का बँटवारा कर लिया था और अभी तक खसरा नंबर मे भी दादाजी समेत उनके दोनो भाइयो का भी नाम है, दादाजी की दो संतान है एक पिताजी और दूसरी बुआजी, पिताजी ने दो शादियाँ की थी, पहली पत्नी से तीन लड़कियाँ और एक लड़का है सभी लड़कियो की शादियाँ हो चुकी है और मेरा सौतेला भाई और सौतेली माँ दादी और दादाजी के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने चार कमरो के मकान मे रहते है, पिताजी ने पाँच कमरो का मकान  बनवाया था जिसमे से दो कमरे पिताजी ने किराए से दुकान चलाने हेतु गाँव के ही एक व्यक्ति को सन २००५ मे दे दिए थे जिसका किराया दादाजी ही लेते रहे है और आज तक ऐसा ही चल रहा है और बाकी बचे तीन कमरो मे माँ, मैं और मेरा भाई रहते है| पिताजी के देहांत (२०११) के बाद जब हमने किराए से दी हुई दुकान को खाली कराना चाहा तो दादाजी ने आपत्ति करते हुए कहा की ये मेरा मकान है और जब हम चाहेंगे तभी खाली होगा, इसी तरह से जब हमने मकान का विस्तार करना चाहा तब भी उन्होने आपत्ति करते हुए कहा की तुम लोगो का कोई हिस्सा नही है, और अपने जीते जी मै बँटवारा भी नही करूँगा, क़ानूनी रूप से बँटवारा करने के लिए जब हम सरपंच के पास खानदानी सजरा बनवाने के लिए गये तो वहाँ से भी नकारात्मक जवाब मिला, दरअसल दादाजी हम लोगो को ज़मीन – जायदाद मे से कोई हिस्सा ही नही देना चाहते और लोगो के बहकावे मे आकर दादाजी संपत्ति को बिक्री करने की तथा मेरे सौतेले भाई के नाम करने की योजना बना रहे है अगर ऐसा हुआ तो हम लोग सड़्क पर आ जाएँगे, कृपया सलाह दें कि –
 (१) संपत्ति का बँटवारा कैसे होगा|
 (२) क्या हमारे दादाजी की संपत्ति मे उनके दोनो भाइयो का भी हिस्सा है|
 (३) हम किरायेदार से किराए की दुकान को कैसे खाली करवा सकते है |

– प्रदीप कुमार ज़ायसवाल, गाँव – सिहावल, पोस्ट- सिहावल, तहसील – सिहावल, थाना – अमिलिया, जिला- सीधी (मध्य प्रदेश)

समाधान-

प के दादाजी और उन के भाइयों के बीच बँटवारा कानूनी तौर पर नहीं हुआ था। बल्कि उन्होंने परिवार के अंदर एक अन्दरूनी व्यवस्था बना रखी थी। उस के अंतर्गत कुछ लगो कहीं काम करते थे और कहीं रहते थे। बँटवारा आज तक नहीं हुआ आप को बँटवारा कराने के लिए बँटवारे का दीवानी/ राजस्व वाद संस्थित करना होगा।  चूंकि दादाजी व उन के भाइयों के बीच बंटवारा नहीं हुआ था इस कारण संपूर्ण संपत्ति जो तीनों भाइयों की संयुक्त रूप से थी उस का बंटवारा इस बंटवारे में होगा। इस में आप के दादा जी के अतिरिक्त शेष दो दादाजी को जो संपत्ति अलग कर के दी गयी थी उस का भी बंटवारा होगा। यह वाद संस्थित करने के साथ ही संपत्ति का कोई भी हिस्सेदार किसी संपत्ति को बेच कर खुर्दबुर्द न करे इस के लिए अदालत से स्टे प्राप्त किया जा सकता है।

आप के  दादाजी की अलग से कोई संपत्ति नहीं है बल्कि तीनों दादाओँ की संयुक्त संपत्ति है इस कारण तीनों  भाइयों की संपत्ति में तीनों का हिस्सा है।

यदि किराएदार को आप के पिताजी ने दुकान किराए पर दी है तो उस के संबंध में आप के पिता ही लैंडलॉर्ड माने जाएँगे और वे दुकान खाली कराने के लिए दीवानी न्यायालय में दावा संस्थित कर सकते हैं।

आप को किसी स्थानीय वकील को सभी दस्तावेज दिखा कर परामर्श प्राप्त कर के तुरन्त कार्यवाहियाँ करनी चाहिए।

 

 

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