क्या ‘तीसरा खंबा’ भारतीय न्याय प्रणाली का उत्प्रेरक बनेगा ?
Posted On 31 Dec 2007 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Uncategorized.
विगत कुछ वर्षों से न्याय जगत में घट रही घटनाऐं मेरे मानस पटल को लगातार झकझोर रही थीं। २००७ में ही मैं हिन्दी ब्लॉगिंग के सम्पर्क में आ सका। मुझे ... Continue Reading
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मुकदमे का फैसला कितने सालों में?
Posted On 30 Dec 2007 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Uncategorized.
आज हम न्याय प्रणाली के क्षरण के प्रभावों की परीक्षा करेंगे। पिछली पोस्ट में हमने न्याय प्रणाली के क्षरण पर अराजकता के उत्पन्न होने पर बात ... Continue Reading
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न्याय की स्थापना ही एक समाज को अराजकता से बचा सकती है
Posted On 29 Dec 2007 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Uncategorized.
आप ने देख लिया। पाकिस्तान में किस तरह बेनजीर की हत्या हुई और उस के बाद किस तरह पूरा पाकिस्तान अराजकता के हवाले है। हालात यह हैं कि ... Continue Reading
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देश को जरूरत है 77,664 जजों की
भारतीय न्याय प्रणाली की विश्व में अच्छी साख है, लेकिन यह अपने ही देश में अपनी ही जनता का विश्वास खोती जा रही है। देश में शिक्षा ... Continue Reading
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मियाद के दिनों की चोरी
आज के आलेख में मैं एक ऐसी चोरी के बारे में बताना चाहता हूँ, जिस की किसी भी थाने या अदालत में रपट दर्ज नहीं होती है, और न ही ... Continue Reading
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स्थाई हड़ताल बनाम महत्वपूर्ण दिन
कोटा, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान का संभागीय मुख्यालय है। यहां पचास से अधिक अदालतें हैं। यहां के वकील जिन में मैं भी शामिल हूँ, प्रत्येक माह के आखिरी शनिवार को हड़ताल कर ... Continue Reading
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जज के खिलाफ वकीलों की हड़ताल
सुबह-सुबह फोन पर प्रदेश के सबसे बड़े महिला संगठन की नेता ने मुझ से अपने संगठन के एक कार्यकर्ता निकेत और उस की पत्नी निशा के बीच वैवाहिक सम्बन्ध विच्छेद ... Continue Reading
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