प्रस्ताव और प्रस्तावों की स्वीकृतियाँ निरस्त करने का महत्वपूर्ण अधिकार
Posted On 30 Jun 2008 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Uncategorized.
भुवनेश जी ने सही कहा कि “देखने से तो ये बड़ा सरल लग रहा है....पर प्रैक्टिकली मुकदमों में काफी दिमाग खपाऊ होगा”। वाकई मुकदमों में यह सब बहुत ... Continue Reading
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संदेशों का संचार और बाबा आइंस्टीन की सापेक्षता
Posted On 28 Jun 2008 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Uncategorized.
... अब तक बात यह हुई थी कि, प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाये तो वह वादा होता है; प्रत्येक वादा, या वादों का समूह जिस का कोई प्रतिफल भी ... Continue Reading
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प्रस्ताव (proposal) का संचार (communication), स्वीकृति (acceptance) और निरसन (revocation)
Posted On 26 Jun 2008 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Uncategorized.
भुवनेश जी पहली ही बार में कक्षा के विद्यार्थी हो गए। वे कहते हैं कि बातों को उदाहरण सहित समझाया जाए तो उत्तम होगा। उन्हों ने विशेष रूप से कंसीडरेशन ... Continue Reading
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प्रस्ताव, स्वीकृति, प्रतिफल, अनुबंध और कॉन्ट्रेक्ट
Posted On 24 Jun 2008 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Uncategorized.
पिछली पोस्ट पर आई टिप्पणियों ने मुझे उत्साहित किया। मुझे लगा कि कॉन्ट्रेक्ट या संविदा या (contract) एक ऐसा विषय है जिस से प्रत्येक व्यक्ति पग-पग पर प्रभावित होता है। ... Continue Reading
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दो व्यक्ति, एक दूसरे के जमानती हो सकते हैं?
Posted On 22 Jun 2008 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Uncategorized.
जी. विश्वनाथ जी जैसे पाठक सब चिट्ठाकारों के पास हों।कल के आलेख पर मुझे अपने चिट्ठाकारी जीवन की अब तक की सब से लम्बी टिप्पणी प्राप्त हुई, श्री जी. विश्वनाथ ... Continue Reading
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छूटे इंटेन्स डिबेट से, बाबा चमत्कारी की कृपा
Posted On 19 Jun 2008 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Uncategorized.
समुद्र मंथन के बाद अमृत कुंभ को दैत्य ले भागे। तब विष्णु ने मोहिनी ऱूप धरा और वे दैत्यों से अमृत को देवताओं के खेमें में ले आए। यह कथा ... Continue Reading
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हत्यारा कौन? सजा किसे?
Posted On 16 Jun 2008 By दिनेशराय द्विवेदी. Under Uncategorized.
हत्या को पूरे तीन माह भी नहीं हुए थे। उसे हत्या के दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था। यूँ वह पेशियों पर आता रहता था। पर सुनवाई के ... Continue Reading
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