मुस्लिम विधि का पदार्पण और अकबर का धार्मिक न्याय को अधीन करने का युग परिवर्तनकारी कदम: भारत में विधि का इतिहास-7
300 ईस्वी पूर्व से 12 वीं शती तक प्राचीन धार्मिक विधियों और अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के अनुरूप ही न्याय व्यवस्था चलती रही। धार्मिक और नैतिक नियम न्याय का मुख्य आधार ... Continue Reading
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मोर्य युगीन अपराध विधि : भारत में विधि का इतिहास-6
अर्थशास्त्र की दंडविधिअर्थशास्त्र का यह सिद्धांत आज भी अनुकरणीय है कि उन सभी सदोष कार्यों को जिस से किसी अन्य व्यक्ति को किसी प्रकार की क्षति होती हो अपराध माना ... Continue Reading
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कौटिल्य का अर्थशास्त्र और दीवानी विधियाँ : भारत में विधि का इतिहास-5
विधि और न्याय राज्य के महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्हें राज्य से कभी पृथक नहीं किया जा सका है। इस कारण से जब भी राज्य नीति की चर्चा होगी। विधि और ... Continue Reading
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धर्मशास्त्र और स्मृतियाँ : भारत में विधि का इतिहास-4
(401वीं पोस्ट) वेदोत्तर काल 1000 ईस्वी पूर्व तक वैदिक साहित्य रचा गया और तदनुसार विधियों का प्रचलन रहा। तब तक भारत में गणतांत्रिक व्यवस्था मौजूद थी। इस बीच एक स्तर ... Continue Reading
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वैदिक काल में विधि के स्रोत : भारत में विधि का इतिहास-3
विधि के स्रोतवैदिक युग में ऐसी कोई संवैधानिक संस्था का उल्लेख नहीं मिलता जो विधि का निर्माण करती हो. विधि का स्रोत तब तक रची जा चुकी वेद ऋचाएँ ही ... Continue Reading
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वैदिक सभ्यता : भारत में विधि का इतिहास-2
विकसित सिंधु सभ्यता के उपरांत प्राचीन भारतीय सभ्यता के प्रमाण के रूप में आर्यजनों द्वारा रची गई ऋचाओं का संकलन चार वेद हमारे सामने हैं। ये काव्य रचनाएँ, हैं जिन्हें ... Continue Reading
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जिरह के बाद आत्महत्या के मामले में जज की जिम्मेदारी क्यों न तय हो?
कल अदालत में खबर पढ़ी "बलात्कार की शिकार महिला से अदालत में ऐसे सवाल-ज़वाब हुये कि उसने खुदकुशी कर ली"।खबर पढ़ कर मन खट्टा तो हुआ ही लेकिन हमारी न्याय-प्रणाली ... Continue Reading
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