जॉन शोर ने न्यायशुल्क में और वृद्धि की : भारत में विधि का इतिहास-52
जॉन शोर के 1795 के उपायों से भी अदालतों में दीवानी मामलों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आई। उस ने 1797 में पुनः न्यायालय शुल्क में वृद्धि कर दी। ... Continue Reading
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न्यायालय शुल्क की वापसी और बनारस में न्यायिक प्रणाली : भारत में विधि का इतिहास-51
जॉन शोर द्वारा 1794 में किए गए सुधारों से न्याय प्रणाली में आए अवरोध दूर हुए, लेकिन गतिशीलता फिर भी नहीं आ सकी। अदालतों में पेश होने वाले नए मुकदमों ... Continue Reading
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पैतृक संपत्ति क्या है? क्या मुझे पिता को उन के पिता से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति में अधिकार है?
मनोज सैनी पूछते हैं --मेरे पिताजी मेरी सौतेली माँ के साथ रहते हैं और मैं और मेरी बहन अपनी माँ के साथ बीस साल से अलग रहता हूँ। मेरे पिता ... Continue Reading
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जॉन शोर के न्यायिक सुधार : भारत में विधि का इतिहास-50
वारेन हेस्टिंग्स (1772-1786) और लार्ड कार्नवलिस (1786-1793) ने अपने कार्यकाल के दौरान न्यायिक व्यवस्था के सुधारों पर जोर दिया। दोनों के प्रयासों से न्यायिक व्यवस्था ने देश की जनता को ... Continue Reading
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विधि व्यवसाय का नियमन : भारत में विधि का इतिहास-49
लॉर्ड कार्नवलिस ने 1793 के सातवें विनियम के माध्यम से विधि व्यवसाय का नियमन किया। योग्य और चरित्रवान अधिवक्ताओं को लायसेंस प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गई और उन्हें ... Continue Reading
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दांडिक और दीवानी न्यायालयों का एकीकरण व न्याय-शुल्क की समाप्ति : भारत में विधि का इतिहास-48
लॉर्ड कॉर्नवलिस ने न्यायिक सुधारों की 1793 की योजना के अंतर्गत बहुत से मूल सुधार किए जिन्हो ने न्याय व्यवस्था को सुगम और लोकप्रिय बनाया। दंड न्यायालयों का फिर से ... Continue Reading
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हाबड-तोब़ड़ का क्या लाभ?
आज कल किसी भी विचारण न्यायालय में यह दृश्य देखने को मिल सकता है। एक ओर अदालत का रीडर किसी मुकदमे में वकीलों से आवेदन या उन के जवाब रिकार्ड ... Continue Reading
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