उच्च न्यायालयों की स्थापना के लिए अधिनियम : भारत में विधि का इतिहास-76
ब्रिटिश भारत में 1861 तक जो न्यायिक व्यवस्था विकसित हुई थी वे दो भिन्न प्रकार की थीं। प्रेसीडेंसी नगरों मद्रास, कलकत्ता और मुम्बई में सुप्रीम कोर्ट स्थापित थे जो ब्रिटिश ... Continue Reading
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मध्य प्रांत और अवध की न्यायिक व्यवस्था : भारत में विधि का इतिहास-75
मध्य प्रांत की न्यायिक व्यवस्थामध्य भारत के ब्रिटिश क्षेत्रों के लिए जिन्हें मध्य प्रांत कहा जाता था, 1865 के 14वें अधिनियम के द्वारा न्यायिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के प्रयत्न ... Continue Reading
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पंजाब की न्यायिक व्यवस्था : भारत में विधि का इतिहास-74
पंजाब को 1849 में ब्रिटिश भारत में सम्मिलित कर लिया गया। वहाँ जो न्यायिक व्यवस्था स्थापित की गई वह एक ही प्राधिकारी के अधीन सौंपी गई, जिसे न्यायिक आयुक्त (Judicial ... Continue Reading
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प्रथम विधि आयोग और अविनियमित प्रान्तों की न्यायिक व्यवस्था : भारत में विधि का इतिहास-73
मद्रास, बम्बई और कलकत्ता प्रेसीडेंसियों में विधि व्यवस्था का विकास अलग अलग हुआ था और उन में पर्याप्त भिन्नता थी। इन दिनों जो न्यायिक व्यवस्था भारत के कंपनी शासित क्षेत्रों ... Continue Reading
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बम्बई की पुलिस व्यवस्था, राजस्व मामले और विधि प्रवर्तन : भारत में विधि का इतिहास-72
बम्बई में जिले के कलेक्टर को मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ प्राप्त थीं। उस के कार्यों में सहायता के लिए जिला पुलिस अधिकारी और ग्राम मुखिया नियुक्त थे। ग्राम मुखिया अभियुक्त को ... Continue Reading
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बम्बई में 1827 के बाद की न्यायिक व्यवस्था : भारत में विधि का इतिहास-71
दीवानी न्याय व्यवस्था बम्बई प्रेसीडेंसी में जल्द ही यह महसूस होने लगा कि 1827 के न्यायिक सुधारों में और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। 1828 में ही सदर दीवानी ... Continue Reading
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बम्बई में न्यायिक व्यवस्था का विकास : भारत में विधि का इतिहास-70
बम्बई में क्षेत्रीय प्रभुता का विस्तार शनैः शनैः हुआ। इस कारण से वहाँ न्यायिक समस्याएँ भी कम रहीं और न्यायिक व्यवस्था का विकास भी सीमित हुआ। 1793 में बंगाल में ... Continue Reading
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