उत्तराधिकार Archive

पिता की संपत्ति में सन्तान का हिस्सा …

January 11, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

रश्मि ने भोपाल मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी को अपने पिता जी से संपत्ति उत्तराधिकार में प्राप्त हुई थी अब पिताजी उस की वसीयत सिर्फ मेरे भाई के नाम करना चाहते हैं। हम तीन बहनें हैं क्या इस संपत्ति में हम बहनों का भी अधिकार है।

 

 

समाधान-

दि आप के पिताजी को प्राप्त यह संपत्ति उन के पिताजी या दादा जी को उन के किसी पूर्वज से उत्तराधिकार में 17 जून 1956 के पूर्व प्राप्त हुई थी और तब से लगातार उत्तराधिकार में ही प्राप्त होती रही है तो वह संपत्ति सहदायिक हो सकती है और उस में आप का हिस्सा हो सकता है।

लेकिन 17 जून 1956 के बाद कोई भी व्यक्तिगत संपत्ति उत्तराधिकार के आधार पर सहदायिक नहीं हो सकती। यदि ऐसा है तो आप के पिता जी को उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति उन की व्यक्तिगत हो सकती है, उस में उन के जीवनकाल में किसी का कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होगा और उसे वे जिसे चाहें वसीयत कर सकते हैं। वैसी स्थिति में आप बहनों या भाई को कोई अधिकार उक्त संपत्ति में प्राप्त नहीं होगा। जिसे भी प्राप्त होगा वसीयत के कारण प्राप्त होगा।

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स्त्री के उत्तराधिकार में पति का हिस्सा

January 6, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

अभिलाषा प्रसाद ने मुरी, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मेरी माँ ने अपनी शादी में मिले गहनों को बेच कर जमीन खरीदी अपने नाम से और उस पर घर भी बनाया। लेकिन कुछ दिनों बाद बीमारी से उनकी मृत्यु हो गई है। इस के बाद मेरे पिता ने दूसरी शादी कर ली है। अब वह मेरे माता की सम्पत्ति मांग रहा है क्या मेरे पिता या सौतेले भाई को इस सम्पत्ति में हिस्सा मिलेगा। मेरी माता के हम चार सन्तान हैं तीन बेटी और एक बेटा। एक सौतेला बेटा है। कैसे हिस्से होंगे?

समाधान-

किसी भी स्त्री की संपत्ति उस की संपत्ति होती है। उस में किसी का अधिकार नहीं होता। यदि वह स्त्री कोई वसीयत नहीं करती है तो उस संपत्ति उत्तराधिकार के नियमों से उस के उत्तराधिकारियों को प्राप्त हो जाती है।

आप की माता की संपत्ति उन की स्वयं की स्वअर्जित है। उन्हों ने कोई वसीयत नहीं की थी। इस कारण वह संपत्ति उन के उत्तराधिकारियों को प्राप्त होगी।

आप की माता जी के उत्तराधिकारियों में आप के पिता, आप स्वयं और आप की तीन बहनें, कुल पाँच उत्तराधिकारी हैं। सौतेला पुत्र आप की माँ का उत्तराधिकारी नहीं है। इस तरह माँ की संपत्ति के पाँच समान हिस्से होंगे और उन में से एक हिस्सा अर्थात कुल संपत्ति का पाँचवा हिस्सा ही आप के पिता प्राप्त करने अधिकारी हैं। एक एक हिस्सा आप चारों भाई बहन प्राप्त करने के अधिकारी हैं।

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नामान्तरण सभी उत्तराधिकारियों के नाम होगा।

December 19, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

शंभू लाल सेन ने बेमाली, भीलवाड़ा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता कि मौत होने के बाद उनका मकान का पट्टा मेरे नाम पर कैसे होगा? जबकि मैं ओर मेरी मां दोनो ही वारिस हैं।

समाधान-

शंभू जी, आप की माँ और आप दोनों उक्त संपत्ति के स्वामी हैं, उत्तराधिकार से आप दोनों का स्वामित्व अस्तित्व में आया है। उत्तराधिकार के उपरान्त अलग से पट्टा नहीं बनता है बल्कि केवल नगर पालिका के रिकार्ड में नामान्तरण हो जाता है। नामान्तरण जब किसी व्यक्ति की मृत्यु के कारण होता है तो उस व्यक्ति के सभी उत्तराधिकारियों के नामही हो सकता है। फिलहाल नामान्तरण आप दोनों के नाम होगा। यदि आप चाहते हैं कि आप की माता का हिस्सा भी आप को मिल जाए तो यह आप को माँ से खरीदना होगा।

यह भी हो सकता है कि माताजी अपने हिस्से को आप के नाम रिलीज कर दें (त्याग दें) इस के लिए आप को माता जी से अपने नाम रिलीज डीड निष्पादित करवानी पड़ेगी। क्यों कि नामान्तरण से स्वामित्व हस्तान्तरित नहीं होता है। रिलीज डीड के आधार पर नामान्तरण ही पुख्ता होगा अन्यथा बिना उस के आप के नाम से हुआ नामान्तरण कभी भी रद्द किया जा सकता है।

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कोई भी अपनी स्वअर्जित संपत्ति को वसीयत कर सकता है।

December 18, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

अरविन्द कुमार ने बुन्दू झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मेरे पापा और चाचा एक माँ के हैं और मेरे पापा और चाचा के तीन बड़े भाई है जो कि सौतेले हैं। सौतेले हमें जमीन का हिस्सा सभी जगह नहीं दे रहे हैं और कही कहीं के जमीन पर उन्होंने अपने नाम से जमीन को करवा लिया है जो कि पहले दादा जी के नाम से थी।  तो मुझे सभी जगह जमीन का हिस्सा कैसे मिलेगा बताएं? इसका जवाब आप मेल में भी जरुर भेजे|

समाधान-

रविन्द जी, तीसरा खंबा की कानूनी सलाह सेवाएँ निःशुल्क हैं। हम जिन समस्याओं का उत्तर अपनी साइट पर देते हैं उन्हें मेल नहीं करते। आप को चाहिए कि आप साइट देखते रहें। जिन समस्याओं का उत्तर हम साइट पर नहीं दे सकते उन्हें अवश्य मेल करने की कोशिश करते हैं।

आप को जानना होगा कि आखिर आप के दादा की जमीन आप के तीन ताउओं को बिना बँटवारे के कैसे मिल गयी। कोई भी अपनी स्वअर्जित संपत्ति को वसीयत कर सकता है। हो सकता है दादा जी की यह जमीन उन की स्वअर्जित हो और उन्हों ने पहले ही आप के ताउओं के नाम वसीयत कर रखी हो। अक्सर ऐसा होता है कि जब व्यक्ति दूसरा विवाह करता है तो अपनी कुछ संपत्ति पहले विवाह की संतानों के नाम वसीयत कर देता है जिस से उन के साथ सौतेला व्यवहार न हो। यदि ऐसा है तो फिर आप को उस जमीन में कोई हिस्सा प्राप्त नहीं हो सकेगा। यदि वह जमीनें गलत तरीके से आप के ताउओं के नाम आ गयी है तो आप उन के नाम जमीन के नामान्तरण को चुनौती दे कर उसे निरस्त करवा सकते हैं। चूंकि हर राज्य का कृषि भूमि से संबंधित कानून भिन्न है इस कारण से आप को चाहिए कि इस मामले में स्थानीय वकीलों से परामर्श कर के उचित उपाय करें।

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पिता की संपत्ति में हिस्सा?

December 15, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

partition of propertyसमस्या-

सुबाला देवी ने रांची, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मैं एक शादीशुदा महिला हूँ। मैं अपने पिताजी के चल-अचल संपति में हिस्सा चाहती हूँ। लेकिन मेरे पिताजी माँ और मेरे भाई हिस्सा नहीं देना चाहते हैं।  इसके लिए मुझे क्या करना होगा? मेरे पास कोई कगजात भी नहीं हैं।

समाधान-

किसी भी पुत्र या पुत्री को अपने पिता या माता की स्वअर्जित सम्पत्ति में हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। जब तक वे जीवित हैं यह संपत्ति उन की है और वे अपनी इच्छानुसार इस का उपयोग कर सकते हैं। यदि माता या पिता में से किसी का देहान्त हो जाए और मृतक ने अपनी संपत्ति या उस का भाग वसीयत न किया हो तो ऐसी संपत्ति का स्वामित्व मृत्यु के साथ ही उस के उत्तराधिकारियों में निहीत हो जाता है। सभी उत्तराधिकारी उस संपत्ति के संयुक्त स्वामी हो जाते हैं। ऐसे संयुक्त स्वामियों में से कोई भी संपत्ति के बंटवारे और अपने हिस्से पर पृथक कब्जा प्राप्त करने का वाद न्यायालय में संस्थित कर सकता है।

यदि आप के पिता के पास कोई पुश्तैनी सहदायिक संपत्ति है तो उस में जन्म से ही पुत्रों का अधिकार होता है। 2005 से पुत्रियों का अधिकार भी होने लगा है। तब आप उस संपत्ति की संयुक्त स्वामी हो सकती हैं और उस में आप का हिस्सा हो सकता है। आप चाहें तो बँटवारे और अपने हिस्से पर पृथक कब्जा प्राप्त करने का वाद न्यायालय में संस्थित कर सकती हैं।

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संयुक्त स्वामी तंग करते हैं तो विभाजन का वाद संस्थित करें।

December 14, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

राकेश कुमार ने बी-21/ 12 बी, ब्लॉक-बी, ओम नगर, मीठापुर, बदरपुर, दिल्ली से समस्या भेजी है कि-


र्तमान में मैं जिस मकान में रहता हूँ वह मेरी माँ के नाम है। माँ का देहान्त दिसम्बर 2014 में हो चुका है। मेरे पिता और भाई मुझ से और मेरी पत्नी से रोज लड़ाई करते हैं और कहते हैं कि यहाँ तेरा कोई हक नहीं है तू अपने बीवी बच्चों को ले कर यहाँ से निकल जा। मेरे दो छोटे छोटे बच्चे हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि उस संपत्ति में मेरा कोई अधिकार है या नहीं है। मैं अपने पिता और भाई के विरुद्ध क्या कार्यवाही कर सकता हूँ?


समाधान-

जिस स्थान पर जो निवास करता है अथवा जिस मकान /जमीन पर जिस का कब्जा है वहाँ उसे कब्जा बनाए रखने और निवास करने का अधिकार प्राप्त है। किसी भी व्यक्ति से जिस  संपत्ति पर वह काबिज है उसे जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता। इस तरह आप को भी मकान के उस परिसर से जिस पर आप का कब्जा है और जिस में आऐप रहते हैं जबरन नहीं निकाला जा सकता।

यह मकान माँ के नाम था तो माँ के देहान्त के साथ ही उस का उत्तराधिकार निश्चित हो चुका है। यदि वह मकान किसी के नाम वसीयत था तो उस का स्वामी वह वसीयती हो चुका है। यदि कोई वसीयत नहीं की थी तो माँ के सभी उत्तराधिकारी उस के संयुक्त रूप से स्वामी हो चुके हैं। कोई भी उत्तराधिकारी उस मकान का बँटवारा करवा कर अपने हिस्से का पृथक रूप से कब्जा प्राप्त करने का अधिकारी है। यदि आप के केवल एक भाई है और बहिन नहीं है तो माँ के केवल 3 उत्तराधिकारी आप, आप के पिता और भाई है। इस तरह आप को उस मकान के एक तिहाई हिस्से का स्वामित्व प्राप्त है।

आप चाहें तो तुरन्त उक्त मकान का विभाजन करने और आप के हि्स्से का पृथक कब्जा देने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं। इसी वाद में आप यह आवेदन भी दे सकते हैं कि जब तक इस वाद का निर्णय न हो तब तक आप के पिता और भाई आप को उस मकान के उस परिसर से बेदखल न करें और न आप को सामान्य रूप से उस परिसर में रहने में किसी तरह की बाधा उत्पन्न करें। आप को इस वाद के निर्णय तक इस आशय की अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त हो सकती है।

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संपत्ति के बँटवारे का वाद राजस्व न्यायालय में संस्थित करें।

December 11, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

agricultural-landसमस्या-

दिनेश ने भुवाना, उदयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरे दादा जी की मृत्यु फरवरी 2001 में हो गयी थी। दादा जी ने अगस्त 2000 में सारी संपत्ति मेरे चाचा जी के नाम वसीयत कर दी थी। यह सारी संपत्ति पुश्तैनी है। पटवारी और तहसीलदार ने वसीयत खारिज करते हुए 3 भाई और 4 बहनों के नाम इन्तकाल में चढ़ा दिए हैं। मुझे क्या करना चाहिए?


समाधान-

जो भी संपत्ति पुश्तैनी होती है वह सदैव पुश्तैनी ही रहती है। लेकिन 2001 में प्रचलित हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार जिस व्यक्ति के उत्तराधिकारियों में पुत्रियाँ भी हों पुश्तैनी संपत्ति में उस के हिस्से की संपत्ति का उत्तराधिकार धारा 8 हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार होगा। इस तरह राजस्व रिकार्ड में हुआ नामांतरण सही है। इस भूमि में आप के पिता का हिस्सा तो हैे ही आप का भी हिस्सा जन्म से ही है।

यदि आप चाहते हैं कि इस संपत्ति में आप के अपने हिस्से की संपत्ति पर आप को पृथक कब्जा मिल जाए तो आप उक्त भूमि के बंटवारे का वाद निकट के एसडीओ की अदालत में दाखिल कर सकते हैं।

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rp_property.jpgसमस्या-

अजय कुमार ने फरीदाबद, हरियाणा से भेजी है कि-

मस्या मेरे एक संबंधी की है। व्यक्ति के द्वारा ख़रीदे गए मकान पर उस की आकस्मिक मृत्यु के बाद किस का अधिकार है? व्यक्ति का परिवार इस प्रकार है – पत्नी, एक पुत्र, दो पुत्रियां (एक विवाहित, एक अविवाहित) अभी उस मकान में व्यक्ति का पुत्र रहता है जो अपनी माँ और बहनो को रखने को तैयार नहीं है। पुत्र का पहले का आपराधिक रिकॉर्ड है। ऐसे में बेटियों को और उनकी माँ क्या करना चाहिए?

समाधान-

किसी व्यक्ति द्वारा खरीदा गया मकान उस की स्वअर्जित संपत्ति है। उस के देहान्त के उपरान्त उस का उत्तराधिकार हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 के अनुसार उस के उत्तराधिकारियों को प्राप्त होगा। अर्थात व्यक्ति के देहान्त के उपरान्त से ही उक्त संपत्ति में उस की पत्नी, एक पुत्र व दोनों पुत्रियों में से प्रत्येक को एक चौथाई हिस्सा प्राप्त हो चुका है। सभी चारों उस संपत्ति के संयुक्त रूप से स्वामी हैं। पुत्र उस मकान में निवास करता है इस कारण से उस के पास उस मकान का कब्जा है।

इस मकान पर पुत्र का कब्जा होते हुए भी उसे सभी चारो उत्तराधिकारियों का संयुक्त रूप से कब्जा माना जाएगा। माँ और दोनों पुत्रियाँ इस संपत्ति का विभाजन कराने और अपने अपने हिस्से का पृथक कब्जा  दिलाने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं। इसी दीवानी वाद में इस तरह का आवेदन दिया जा सकता है कि उक्त संपत्ति के लिए रिसीवर की नियुक्ति की जाए जो कि उस संपत्ति के लाभों को एकत्र कर के रखे जिसे बाद में न्यायालय के आदेश से वितरित कर दिया जाए। इस आशय का अस्थाई व्यादेश जारी करने का आवेदन भी न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सकता है कि उक्त संपत्ति का कब्जा पुत्र किसी अन्य को हस्तांतरित न करे और न ही किसी तरह संपत्ति और उस के स्वामित्व को हानि पहुँचाए।

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Muslim-Girlसमस्या-

पवन ने नरवाना, हरियाणा से पूछा है-

मेरे नाना की अचल संपत्ति है जो पुश्तैनी है। मेरे नाना के एक पुत्र और तीन पुत्रियाँ हैं। पुत्र की मृत्यु हो गयी है। उस की पत्नी ने दूसरा विवाह कर लिया है। क्या दूसरा विवाह करने के बाद भी वह स्त्री मेरे नाना की अचल संपत्ति में हिस्सा प्राप्त कर सकती है?

समाधान-

जिस क्षण एक सहदायिकी के किसी सदस्य का देहान्त होता है उस के हिस्से की संपत्ति का उत्तराधिकार निश्चित हो जाता है और उस के उत्तराधिकारी हिस्सेदार बन जाते हैं।

आप की मामी मामा का देहान्त होते ही उस सहदायिकी का हिस्सा बन गयी है जिस में आप के मामा का हिस्सा था अर्थात आप के नाना की पुश्तैनी संपत्ति में। एक बार वह हिस्सेदार हो गयी तो फिर उस के द्वारा फिर से विवाह कर लेने से उस की सहदायिकी की सदस्यता समाप्त नहीं होगी। वह अपने हिस्से के बंटवारे की मांग कर सकती है और न दिए जाने पर वह न्यायालय से बंटवारा करवा सकती है।

यदि आप के नाना की संपत्ति पुश्तैनी न हो और उन की स्वअर्जित हो तब भी हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार आप की मामी उन का हिस्सा प्राप्त करने की अधिकारी हैं। उन के दूसरा विवाह कर लेने से उन का यह अधिकार समाप्त नहीं होगा। इस संदर्भ में मद्रास उच्च न्यायालय का श्रीमती यमुना देवी बनाम श्रीमती डी नलिनी के प्रकरण में दिया गया निर्णय पढ़ा जा सकता है।

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दत्तक के सांपत्तिक अधिकार …

October 3, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

Hindu succession actसमस्या-

कृष्णगोपाल शर्मा ने देवगुढा बावडी, वाया जाहोता, तहसील आमेर,  जिला जयपुर, राजस्थान से पूछा है-

मेरे दादाजी को उनके चाचाजी ने गोद ले रखा था। मेरे दादाजी की म़त्‍यु सऩ् 2003 में हो गई। हमने पंचायत से एक म़त्‍यु प्रमाण पत्र बनवाया जिसमें उनके दत्‍तक पिताजी का अंकन था,  कुछ समय बाद पता चला कि इनके (दादाजी के चाचाजी) पास कोई पैत़ृक जमीन नहीं है सो हमने अपने निज पिताजी के नाम से दूसरा म़ृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया तथा उसके आधार पर हमारा जमीन में से नामांतकरण खुल गया। क्‍या इस तरह से एक ही व्यक्ति का म़त्‍यु प्रमाण पत्र दो अलग अलग पिताओं के नाम से बनना कानून की नजर में अपराध है? और क्‍या मेरे दादाजी को अपने वास्‍तविक पिताजी व दत्‍तक पिताजी दोनों की सम्‍पत्ति मिल सकती है या कानून केवल एक पिता की सम्‍पत्ति ही लेने के लिए कहता है।

समाधान-

जिस ने भी दादाजी की मृत्यु का प्रमाण पत्र बनवाया वह प्रक्रिया के अधीन बनवाया। इस प्रक्रिया में मृतक के संबंधी कुछ सूचनाएँ जन्म-मृत्यु पंजीयक को देते हैं उस के आधार पर मृत्यु दर्ज हो जाती है। जब उस से लाभ न हुआ तो कुछ सूचनाएँ परिवर्तित कर दूसरा प्रमाण पत्र बनाया इस का अर्थ है आप ने एक ही व्यक्ति की मृत्यु को दो बार रिकार्ड में अंकित करवाया। यह दंडनीय अपराध है और शिकायत होने पर इस मामले में कार्रवाई हो सकती है।

यदि कोई व्यक्ति गोद चला जाए और किसी सहदायिक (पुश्तैनी) संपत्ति में उस का कोई हिस्सा हो तो वह उसी का बना रहता है। गोद जाने से उस के उस हिस्से के स्वामित्व में कोई अंतर नहीं आता। लेकिन गोद जाने के बाद अपने मूल पिता से उत्तराधिकार प्राप्त करने का अधिकार खो देता है। इस तरह यह कहा जा सकता है कि गोद जाने वाला व्यक्ति दोनों तरह की संपत्ति प्राप्त करने का अधिकारी होता है। लेकिन ऐसा नहीं है।

हर व्यक्ति को ऐसा अधिकार होता है। यदि कोई सहदायिक संपत्ति हो तो उस में तो किसी व्यक्ति का हिस्सा जन्म से ही मिल जाता है। जब कि उस के पिता, व माता की स्वअर्जित संपत्ति में उत्तराधिकार का उस का अधिकार उन की मृत्यु पर उत्पन्न होता है। इसी तरह गोद गए व्यक्ति को जिस सहदायिक संपत्ति में जन्म से अधिकार मिल गया है वह तो उसी तरह बना रहता है। लेकिन उसे अपने गोद पिता व माता की स्वअर्जित संपत्ति में उत्तराधिकार तो प्राप्त होता ही है लेकिन गोद पिता की सहदायिकी में भी हिस्सा प्राप्त करने का उस का अधिकार गोद लेते ही उत्पन्न हो जाता है।

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