कब्जा Archive

समस्या-

संध्या कश्यप ने रेलवे पाड़ा, अडावल, जगदलपुर, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

35 वर्ष से हमारे ससुर ने घर के समीप एक जमीन पर कब्जा कर रका था। उस समय पर वहाँ कोई मकान नहीं था। अब सरपंच पंचायत की जमीन बता कर दूसरो को बेच रहे हैं और हमें क्या तुम्हारे पास पट्टा है कह कर डरा रहे हैं। क्या यह जमीन हमें मिल सकती है? क्या हम लोग कोई कानूनी कार्यवाही कर सकते हैं? सरपंच का काम पंचायत के लोगों को सुरक्षित करना है कि उन्हें लूटें।

समाधान-

प का घर के पास की किसी जमीन पर इतना पुराना कब्जा है इस का अर्थ ये तो नहीं कि आप उस जमीन के स्वामी हो गए हैं। यदि जमीन पंचायत की है तो वह सार्वजनिक है और उस पर कब्जा हटाने की कार्यवाही पंचायत को करने का अधिकार है। वे आप का कब्जा हटाने की कार्यवाही कर सकते हैं और किसी जरूरतमंद को जमीन मकान बनाने के लिए बेच सकते हैं। आखिर गाँव में जमीन सीमित होती है और लगातार आबादी बढ़ने से मकानों के लिए जमीन की जरूरत होती है।

लेकिन किसी भी व्यक्ति का कब्जा यदि 30 वर्ष से अधिक का है तो उसे हटाया जाना संभव नहीं है। यदि आप को आशंका है कि आप का कब्जा जबरन हटा दिया जाएगा तो आप दीवानी न्यायालय में जा कर कब्जा हटाए जाने के विरुद्ध पंचायत तथा उस के द्वारा जिस को विक्रय की जाए दोनों के विरुद्ध स्थगन आदेश प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन फिर भी उस जमीन पर आप का स्वामित्व स्थापित नहीं होगा।   उस के लिए जमीन पंचायत से खरीदनी होगी या पट्टा बनवाना पड़ेगा।

 

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आप ने मकान का स्वामित्व नहीं बल्कि केवल कब्जा खरीदा है।

June 12, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

राधेश्याम ने इंदौर, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी ने २०१२ में इंदौर में एक मकान ३०० वर्गफुट जिस पर चद्दर का शेड है, 1,25,000/- रूपये में ख़रीदा था, जिसकी १०० रूपये के स्टाम्प पर नोटरी करायी गयी थी! उस वक़्त पिताजी के पास रजिस्ट्री कराने के पैसे उपलब्ध नहीं थे इसलिए उस वक़्त सिर्फ नोटरी कराकर कब्ज़ा हासिल कर लिया था, बाद में पैसे आने पर जब पुराने मकान मालिक से रजिस्ट्री कराने के लिए कहा तो उसने साफ़ इनकार कर दिया और कहा कि मकान का अब न तो हमारे पास पट्टा है और न हॉं कोई लिखा पढ़ी है ! जबकि पुराना मकान मालिक उस मकान में पिछले बीस वर्षों से रह रहा था! और नगर पालिका में संपत्ति कर भी भर रहा था, जो की अब हम भर रहे हैं, लेकिन मकान मालिक के नाम से (हस्ते में पिताजी का नाम)। एक नयी बात पता चली कि उस मकान सम्बन्धी और आसपास के मकान पर जमीन विवादित कोर्ट में केस चल रहा है। लेकिन अभी तक हमारे पास उक्त सम्बन्ध में कोई भी नोटिस या कानूनी तौर पर किसी ने कुछ भी नहीं कहा। सिर्फ आसपास वाले ही हमें भयभीत करते है कि आपने यह मकान क्यों लिया यह तो कभी भी टूट सकता है। मेरे पिताजी मकान में दूसरी मंजिल बनाना चाहते हैं परन्तु अनचाहे डर से भयभीत हैं! मेरे पिताजी की उम्र ७५ वर्ष है, और इस विषय को लेकर वो बहुत चिंतित रहते हैं! इस स्थिति में हमें क्या कदम उठाना चाहिए?

समाधान-

प के पिताजी ने 300 वर्गफुट जमीन और उस पर बने मकान को खरीदा नहीं है बल्कि केवल खरीदने का सौदा किया है। किसी भी अचल संपत्ति का जिस का मूल्य 100 रुपये या उस से अधिक का हो खऱीदना तभी पूर्ण हो सकता है जब कि उस का विक्रय पत्र पंजीकृत करवा दिया हो। इस कारण जो नोटेरी से प्रमाणित दस्तावेज है वह केवल मकान खरीदने का एग्रीमेंट या अनुबंध है।

किसी भी वस्तु को वही विक्रय कर सकता है जिस का वह स्वामी हो या स्वामी से उसे उस वस्तु को विक्रय करने का लिखित अधिकार मुख्तार नामे से प्राप्त हो। आप बता रहे हैं कि विक्रेता के पास न तो पट्टा है और न ही कोई लिखा पढ़ी है। इस से पता लगता है कि उक्त विक्रेता के पास भी उस मकान का कब्जा ही है हो सकता है यह कब्जा बीस वर्ष से बना हुआ हो। इस प्रकार आप के पिताजी ने उस व्यक्ति से केवल उस मकान का कब्जा खरीदा है जो उस व्यक्ति के पास था।

अब आप को यह पता करना चाहिए कि वह जमीन किस की है और उस पर कैसा मुकदमा चल रहा है। यह तो स्थानीय रूप से पता करने पर ही पता चल सकता है। नगर निगम आदि से यह पता किया जा सकता है कि वह जमीन किस की है। उसी से यह भी पता लग सकता है कि यदि कोई मुकदमा चल रहा है तो वह किस का किस के विरुद्ध हो सकता है। आम तौर पर यदि वह जमीन किसी की निजी हुई तो उस पर से आप को कोई हटा नहीं सकेगा। बस आप को प्रमाणित करना पड़ेगा कि जिस व्यक्ति ने आप को कब्जा बेचा है वह उस पर बीस वर्ष से काबिज था। और उस जमीन या मकान से संबंधित मुकदमे से बेचने वाले का कोई लेना देना नहीं था। वैसे भी जिस मूल्य में आप के पिताजी ने मकान लिया है उस में इसी तरह का विवादित भूखंड मिल पाना इंदौर नगर में  मुमकिन था। हो सकता है कभी उस मामले में निर्णय हो जाए और बाद में नगर निगम या न्यास आदि वहाँ काबिज लोगों को पट्टे जारी कर दे। तब आप के पिताजी उस संपत्ति के स्वामी हो जाएँ। पर इस सब के लिए सतर्क रहना होगा और पट्टा जारी करने की कार्यवाही करते रहना होगा। तब तक यदि आप दूसरी मंजिल बनाना चाहते हैं तो बना कर रह सकते हैं। जितना रिस्क इस संपत्ति के छिनने का है उतना ही दूसरी मंजिल का भी होगा। पर कब्जा बना कर उसी मकान में रहते रहेंगे तब ही इस संपत्ति को आप बचा सकेंगे।

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बंटवारे का वाद प्रस्तुत कर न्यायालय से बंटवारा कराएँ।

June 10, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

उमाकान्त ने देवी तहसील सौसर, जिला छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

दादाजी ने अपने जीवनकाल में कोई बंटवारा नहीं किया और न ही नाप के हिसाब से जोतने के लिए दिया। लेकिन उन की मृत्यु के बाद जिन्हें जोतने को ज्यादा मिला वे बंटवारा नहीं चाहते लेकिन बाकी हिस्सेदार बंटवारा चाहते हैं। हमन कुछ कानूनी कार्यवाही की लेकिन उन्हों ने जानपहचान से रद्द करवा दी। बताए हमें क्या करना चाहिए।

समाधान-

प ने क्या कानूनी कार्यवाही की यह नहीं बताया। हमें लगता है कि आप ने कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की बल्कि आप राजस्व अधिकारियों को फिजूल मैं आवेदन देते रहे। अब आप की समस्या का हल न्यायालय द्वारा बंटवारे में है। आप ने यह भी नहीं बताया है कि दादाजी के देहान्त के बाद नामान्तरण भी हुआ है या नहीं। यदि नहीं हुआ है तो नामान्तरण कराना चाहिए।

यदि नामान्तरण हो गया है तो ठीक वर्ना नामान्तरण की कार्यवाही के साथ साथ आप को चाहिए कि आप राजस्व न्यायालय में अपनी जमीन के बंटवारे, खाते अलग अलग करने और अपने हिस्से पर पृथक कब्जा दिलाए जाने के लिए वाद प्रस्तुत करें। बाकी सभी हिस्सेदार और राज्य सरकार जरिए तहसीलदार पक्षकार बनेंगे। यह वाद तब तक चलेगा जब तक कि बंटवारा हो कर सब को अपने अपने हिस्से पर अलग कब्जा न मिल जाए।

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समस्या-

रोहन ने लुधियाना, पंजाब से उत्तर प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

मेरे नाना का देहान्त2015 में हुआ। वो हमारे साथ लुधियाना ही रहते थे। सारी संपत्ति हरदोई उत्तर प्रदेश में है। मृत्यु के पहले उन्हों ने वसीयत की इच्छा की थी, वो हमने करवाई। उन्हों ने 4 हिस्सों में अपनी सम्पति वसीयत की क्यों कि उनके 3 लड़के थे। चौथा हिस्सा उन्हों ने हमारी मां को वसीयत किया। उत्तराधिकार में उस सम्पति का नामान्तरण नायब की कोर्ट से 3 लोगो के हक़ में था। बाद में वसीयत दाखिल की हमने और तहसीलदार ने पंजीकृत वसीयत के आधार पर मेरी माँ का नाम भी नामान्तरण करवा दिया। समस्या ये है कि आर्डर के 70 दिन बाद एक मामा ने आर्डर के खिलाफ अपील की है। क्या अपील अवधि बाधित नहीं है?  क्या नामान्तरण हो जाने से भी हमें कोई लाभ नहीं मिलेगा? नाना ने चौथा हिस्सा हमारे नाम किया है क्या उस पे हम कब्जा नहीं ले सकते।  वसीयत के समय छोटे मामा साथ थे, उन्होंने हमारे हक़ में एफिडेविट भी लगाया था । क्या एसडीएम ऑर्डर बदल सकते हैं। हम को कब्जा कैसे मिलेगा एग्रीकल्चर लैंड का,वो 14 बीघा का है? उसका पार्टीशन कैसे करवाए? उसका अलग खाता कैसे करवाएँ?

समाधान-

दि  किसी नामान्तरण के मामले में वसीयत प्रस्तुत हो और  उसे चुनौती दी जाए तो तहसलीदार या नायब उस मामले में नामान्तरण नहीं कर सकता। वैसी स्थिति में नामान्तरण कराने के लिए न्यायालय ही जाना होगा। इस  मामले में आप ने जब वसीयत पेश की तो तहसलीदार ने अन्य पक्षकारों को बुलाया या नहीं या आपत्तियाँ ली या नहीं उस पर बहुत कुछ निर्भर करता है। अपील तो व्यथित पक्षकार का अधिकार है, इस कारण उस पर सुनवाई होगी और तभी उस का निर्णय होगा। अपील यदि अवधि बाधित है तो आप अपील में यह आपत्ति ले सकते हैं। यदि वसीयत में कोई खेोट नहीं है तो अपील भी आप की माँ के पक्ष में निर्णीत हो जाएगी। लेकिन अपील आप के हक में निर्णीत हो जाने मात्र से आप को जमीन का कब्जा नहीं मिल जाएगा। .

नामान्तरण से किसी भी कृषि भूमि में उस के हिस्सेदारो का हिस्सा निर्धारित हो जाता है लेकिन भूमि संयुक्त बनी रहती है उस पर सभी हिस्सेदारों का संयुक्त स्वामित्व बना रहता है। अलग अलग खाता करने के लिए और अपने खाते की भूमि पर अलग कब्जा प्राप्त करने के लिए आप की माता जी को संयुक्त स्वामित्व की भूमि के बंटवारे और अपने हिस्से पर कब्जा दिलाए जाने का दावा करना पड़ेगा। चूँकि नामान्तरण आज भी आप के पक्ष में है इस कारण आप यह दावा तुरन्त कर सकते हैं। आप को अपील का निर्णय होने का इन्तजार किए बिना बंटवारे का दावा कर देना चाहिए।

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समस्या-

अनिल ने भोपाल, मध्य प्रदेश से मध्य प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

मेरे दादाजी के नाम एक मकान है। मेरे पिता वर्ष २००३ से लापता हैं। मेरे पिता ४ भाई हैं। तीनों भाइयों ने मुझे ये मकान मौखिक हिस्से में दे दिया था। मैं २० बर्षो से इस मकान कि देख रेख व टेक्स देता आ रहा हूँ।  मकान पर मेरा कब्ज़ा है तथा किरायेदार भी मुझे ही किराया देते हैं। वर्ष २०१२ में मैंने मकान का नामांतरण अपनी माँ के नाम से करा लिया था।  अब उन्होंने उससे निरस्त करा के उसे मेरी दादी के नाम करा लिया है? क्या वे उसे बेच सकती हैं? उन्हें कैसे रोका जाये?

समाधान-

नामान्तरण किसी भी प्रकार से स्वामित्व और स्वामित्व के हस्तांतरण को प्रकट नहीं करता है। आप का उस मकान पर 20 वर्षों से कब्जा है, इस कारण कोई आप को उस मकान से बेदखल नहीं कर सकता। किन्तु मौखिक बंटवारे में आप को मकान मिला था इसे साबित करना आसान नहीं होगा। देख-रेख करना और टैक्स जमा करने मात्र से यह उपधारणा नहीं ली जा सकती है कि वह मकान आप को मौखिक बंटवारे में दे दिया गया था। यदि यह साबित होता है कि कोई बंटवारा नहीं हुआ था तो दादाजी के मकान और शेष संपत्ति का बंटवारा होना चाहिए और उस स्थिति में उन के सभी उत्तराधिकारियों को उस का हिस्सा मिलना चाहिए।

आप के पिता 2003 से लापता हैं तो आप दीवानी न्यायालय में घोषणा का दावा कर के उन्हें मृत घोषित करवा सकते हैं और इस घोषणा के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र आप को मिल सकता है। वैसी स्थिति में आप अपने पिता के उत्तराधिकारी हो जाएंगे। चूंकि दादी के नाम मकान का नामान्तरण हो जाने से वह मकान दादी का नहीं हो जाता बल्कि संयुक्त संपत्ति बना रहता है। इस कारण उन्हें इस मकान को बेचना तो नहीं चाहिए। फिर भी ऐसी कोशिश हो सकती है। इस के लिए स्थाई निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत कर विक्रय पर अस्थाई   निषेधाज्ञा प्राप्त की जा सकती है। इस वाद में आप यह कथन कर सकते हैं कि आप के पिता 14 वर्षों से लापता है इस कारण साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत उपधारणा के अंतर्गत उन्हें मृत माना जाना चाहिए और आप उन के उत्तराधिकारी होने के नाते यह वाद प्रस्तुत कर रहे हैं।

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भाई आप से मकान छीन नहीं सकेंगे।

June 4, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

अंगद ने बेगूंसराय, बिहार से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता ने सन 1969 एक जमीन मेरे बडे भाई के नाम से खरीदा, उस समय मेरे बड़े भाई की उम्र 19 या 20 साल थी मेरी उम्र 15 साल थी। सन 1995 ई. में हम दोनो भाई ने उस जमीन पर एक सयुंक्त घर बनाया। जिस में दो अलग अलग पलैट हैं। दोनो भाई ने अपना अपना पलैट अपने अपने पैसा से बनाया। जिस में हम दोनो भाई आज भी रह रहे हैं। जिस समय मैं ने उस जमीन पर घर बनाना आरंभ किया उस समय तक मुझे पता नहीं था कि वह जमीन मेरे भाई के नाम है और मेरे बडें भाई ने भी मुझे नहीं बताया था। मुझे लगता था की वह जमीन मेरे पिता के नाम हैं। इसका पता मुझे अब चला कि वह जमीन मेरे भाई के नाम है। अब मेरे बडा भाई मुझे कहता है कि मेरी जमीन व घर खाली करो। मेरे माता व पिता का देहांत हो चुका हैं। बहुत मेंहनत से मैंने अपना घर बनाया है मैं भूतपूर्व फौजी हूँ। बताएं कि मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

मीन आप के पिताजी ने खरीदी थी लेकिन भाई के नाम है इस कारण प्राथमिक रूप से उस भूमि का स्वामी आप के भाई हैं। जब तक आप यह साबित नहीं कर देते कि यह जमीन पिताजी ने भाई के नाम से खरीदी जरूर थी लेकिन पूरे परिवार के लाभ के लिए खऱीदी थी।

आप उस जमीन पर मकान बना चुके हैं। आप ने अपने पैसे से बनाया है तो आप यह साबित कर सकते हैं कि इस मकान को आप ने अपने धन से खुद बनाया है।

आप को इस मकान को बना कर उस में रहते हुए 22 वर्ष हो चुके हैं। आप के भाई यदि अदालत में यह दावा करें कि आप से उस मकान का कब्जा दिलाया जाए तो यह दावा लिमिटेशन के आधार पर ही खारिज हो जाएगा क्यों कि कब्जे का दावा केवल 12 वर्ष की अवधि में किया जा सकता है। मकान में बिजली और नल के कनेक्शन भी आप के नाम से होंगे। वोटर कार्ड आदि में भी पिछले 22 वर्ष से आप के नाम अंकित होंगे। आप 22 वर्ष का पजेशन उक्त संपत्ति पर अच्छे से साबित कर सकते हैं। इस तरह आप का कब्जा मकान पर प्रतिकूल कब्जा है।

आप के भाई आप को मकान खाली करने को कहें तो उन्हें कहें कि मकान तो मेरा है और मैं खाली नहीं कर रहा हूँ और यदि वे समझते हैं कि यह मकान उन का है तो वे अदालत में दावा कर दें अदालत फैसला कर देगी। जब अदालत में दावा पेश हो तो दावे की प्रतिलिपि आप को मिल जाए तब आप किसी अच्छे दीवानी मामलों के वकील से सलाह ले कर मुकदमे में अपनी प्रतिरक्षा करें। आप के भाई आप से उस मकान को किसी स्थिति में नहीं छीन सकते।

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समाधान-

राम नारायण ने बड़ौदा, गुजरात से समस्या भेजी है कि-

मेरी समस्या ये है कि मेरे पिता की स्वअर्जित सम्पति है।  जिसे मेरे पिता ने 1965 में लिया था।  मेरे पिता का देहांत 03/10/2005 को हो गया है।  मेरे पिता ने कोई वसीयत नहीं बनाई थी।  देहांत के बाद मेरी 3 बहनो में से एक बहन ने अपनी परिस्थिति का रोना रोकर मेरे से मेरा एक रूम ले लिया और बोली की मेरी परिस्थिति ठीक होने के बाद मैं चली जाउंगी। लेकिन अब 8 साल हो गया है। लेकिन वो जाने को नहीं बोलती है और झगड़ा करती है। मेरी माँ मेरे साथ ही रहती है। उससे भी झगड़ा करती है। मेरी बहन को रूम से निकालने के लिए क्या करना होगा? मेरी बहन का आदमी भी उसके साथ ही रहता है।


समाधान-

प के पिता की स्वअर्जित संपत्ति पर आप के पिता की मृत्यु के साथ ही उन के उत्तराधिकारियों का स्वत्वाधिकार स्थापित हो गया। आप अकेले उस संपत्ति के स्वामी नहीं हैं। पुत्र होने के नाते आप अकेले उस मकान के स्वामी नहीं हो सकते। इस मकान में फिलहाल पाँच हिस्से हैं। एक आप की माँ का तीन आप की बहनों के और पाँचवाँ आपका। यदि आप बहिन से कुछ कहेंगे तो वह अदालत में बंटवारे का दावा करेगी। दूसरी बहनों और माँ को भी साथ ले लेगी तो आप को केवल पाँचवाँ हिस्सा ही प्राप्त होगा, जो आप का है। वैसे भी जब तकआप को सभी बहनों से रिलीज डीड के माध्यम से हक प्राप्त नहीं हो जाए उन सभी का हि्स्सा बना रहेगा।

बहिन ने परिस्थिति का रोना रो कर जो कमरा प्राप्त किया है वह उस का हक है। उस ने कैसे भी मकान पर कब्जा प्राप्त कर लिया है और उसी में रहती भी है आप अपनी बहन को रहने दें। जो भी समाधान हो वह प्यार से आपसी समझ से करें।

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संपत्ति पर आप का कब्जा है तो आप को अदालत जाने की जरूरत नहीं।

January 17, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

महेश ने खंडवा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे नानाजी का तीन कमरो का पुराना मकान था। अब उसे तोड़कर मेरी मौसी और माताजी के सहयोग से ये मकान नया बना लिया। मेरे तीनो मामाओ ने जब  मकान बन रहा था तब किसी ने आपत्ति नही ली। मैं उस वक्त पढ़ाई के लिये इंदौर गया था। अब हम उस मकान में चार साल से रह रहे हैं। मेरा बड़ा मामा कह रहा है कि तुम कब्जा करने आ गये हो, तुम्हारा क्या हे यहाँ से निकलो। हमारी मकान की रजिस्ट्री भी नहीं है अब हम क्या कानूनी कार्यवाही करें?

समाधान-

कान तो नाना जी का था जिसे गिराया गया था। फिर आप की माता जी और मौसी के सहयोग से बनाया गया। मामाओं का भी कुछ तो सहयोग रहा होगा। उस मकान में अब कौन कौन रहते हैं यह भी आपने नहीं बताया। जब तक पूरा विवरण न हो पूरा समाधान भी संभव नहीं है। नानाजी अब शायद नहीं हैं। यदि हैं तो मामाजी आप को उस मकान से नहीं निकाल सकते। यदि नहीं हैं तो उस मकान के जितने हिस्से का स्वामी हर मामा है उतने ही हिस्से के मालिक आप की माँ और मौसी हैं। इस कारण यदि उस मकान पर कब्जा है तो वे आप को उस मकान से नहीं निकाल सकते। जैसे बड़े मामान ने कहा है वैसे आप की माँ और मौसी कह सकती हैं कि तुम निकलो मकान हमने बनाया है। जिस के पास संपत्ति का कब्जा है उसे अदालत में जाने की जरूरत नहीं है। जिस के पास संपत्ति का कब्जा नहीं है उसे अदालत जाने दें।

यदि मामाजी कुछ गड़बड़ करें तो मौसी और माताजी अदालत में इस आशय का वाद संस्थित कर सकती हैं कि वे भी मकान में हिस्सेदार हैं और उन्हें मकान से न निकाला जाए। पह हमारी राय है कि अदालत में आप की माँ व मौसी न जाएँ। मामा को अदालत में जाने दें। मौसी व माताजी ने निर्माण में जो खर्च किया उस का हिसाब और सबूत हो तो संभाल कर रखें। मुकदमे में काम आएंगे।

हिस्सेदार अधिक से अधिक मकान के बंटवारे की मांग कर सकते हैं और बंटवारे का वाद संस्थित कर सकते हैं।

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स्वामित्व खरीदें, सम्पत्ति का केवल कब्जा न खरीदें।

December 16, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

एजाज ने चम्पारन, बिहार से समस्या भेजी है कि-

क व्यक्ति 1969 के पूर्व से एक खाली प्लॉट पर घर बना कर रह रहा है और उसी समय 1969 से बिजली बिल उसके नाम से है। म्युनिसिपेलिटी की रसीद भी उसके नाम से है। लेकिन अंचल से म्यूटेशन अभी नहीं हुआ है। क्या यह घर मैं उससे खरीद सकता हूँ। जबकि इस प्लाट का असली मालिक वो नहीं है। असली मालिक कहाँ है यह पता नहीं चल पा रहा है जमीन लेकिन निजी है सरकारी नहीं है।

समाधान-

ब आप खुद जानते हैं कि जो व्यक्ति जमीन बेच रहा है वह उस जमीन का मालिक नहीं है उस पर मकान जरूर उस ने बनाया है। कोई भी जो किसी संपत्ति का मालिक नहीं है वह उस संपत्ति को किसी भी प्रकार विक्रय नहीं कर सकता है। वह व्यक्ति केवल वे अधिकार बेच सकता है जो उसे प्राप्त हुए हैं।

यह व्यक्ति आप से इस तरह का एग्रीमेंट कर सकता है कि जब उसे स्वामित्व मिलेगा तब वह आप को उक्त जमीन  बेच देगा। तब तक वह आप से धनराशि ले कर उस संपत्ति का कब्जा दे सकता है। उस व्यक्ति का तो उस जमीन पर प्रतिकूल कब्जा है जिस के कारण उसे वहाँ से कोई हटा नहीं सकता। लेकिन आप का कब्जा तो फिर भी नया होगा।

हमारी राय में ऐसी संपत्ति लेने का विचार त्याग दें।  आप यदि केवल कब्जा खरीदना चाहें तो खरीद लें, उस पर हमेशा कब्जा बनाए रखने के लिए सतर्क रहना पड़ेगा और प्रतिकूल कब्जे के आधार पर नगर पालिका से कभी पटटा जारी करा सकें तो आप उस के वैध स्वामी हो सकते हैं।   हमारा मानना है कि जब भी खरीदें संपत्ति का स्वामित्व खरीदें, केवल उस का कब्जा न खरीदें। बिना स्वामित्व का कब्जा तो हमेशा ही रिस्की होता है।

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संयुक्त स्वामी तंग करते हैं तो विभाजन का वाद संस्थित करें।

December 14, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

राकेश कुमार ने बी-21/ 12 बी, ब्लॉक-बी, ओम नगर, मीठापुर, बदरपुर, दिल्ली से समस्या भेजी है कि-


र्तमान में मैं जिस मकान में रहता हूँ वह मेरी माँ के नाम है। माँ का देहान्त दिसम्बर 2014 में हो चुका है। मेरे पिता और भाई मुझ से और मेरी पत्नी से रोज लड़ाई करते हैं और कहते हैं कि यहाँ तेरा कोई हक नहीं है तू अपने बीवी बच्चों को ले कर यहाँ से निकल जा। मेरे दो छोटे छोटे बच्चे हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि उस संपत्ति में मेरा कोई अधिकार है या नहीं है। मैं अपने पिता और भाई के विरुद्ध क्या कार्यवाही कर सकता हूँ?


समाधान-

जिस स्थान पर जो निवास करता है अथवा जिस मकान /जमीन पर जिस का कब्जा है वहाँ उसे कब्जा बनाए रखने और निवास करने का अधिकार प्राप्त है। किसी भी व्यक्ति से जिस  संपत्ति पर वह काबिज है उसे जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता। इस तरह आप को भी मकान के उस परिसर से जिस पर आप का कब्जा है और जिस में आऐप रहते हैं जबरन नहीं निकाला जा सकता।

यह मकान माँ के नाम था तो माँ के देहान्त के साथ ही उस का उत्तराधिकार निश्चित हो चुका है। यदि वह मकान किसी के नाम वसीयत था तो उस का स्वामी वह वसीयती हो चुका है। यदि कोई वसीयत नहीं की थी तो माँ के सभी उत्तराधिकारी उस के संयुक्त रूप से स्वामी हो चुके हैं। कोई भी उत्तराधिकारी उस मकान का बँटवारा करवा कर अपने हिस्से का पृथक रूप से कब्जा प्राप्त करने का अधिकारी है। यदि आप के केवल एक भाई है और बहिन नहीं है तो माँ के केवल 3 उत्तराधिकारी आप, आप के पिता और भाई है। इस तरह आप को उस मकान के एक तिहाई हिस्से का स्वामित्व प्राप्त है।

आप चाहें तो तुरन्त उक्त मकान का विभाजन करने और आप के हि्स्से का पृथक कब्जा देने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं। इसी वाद में आप यह आवेदन भी दे सकते हैं कि जब तक इस वाद का निर्णय न हो तब तक आप के पिता और भाई आप को उस मकान के उस परिसर से बेदखल न करें और न आप को सामान्य रूप से उस परिसर में रहने में किसी तरह की बाधा उत्पन्न करें। आप को इस वाद के निर्णय तक इस आशय की अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त हो सकती है।

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