दंड प्रक्रिया संहिता Archive

समस्या-

कौशल पटेल ने ग़ाजियाबाद, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-


मैं कौशल पटेल उम्र 36 वर्ष गाजियाबाद (उ0प्र0) में निवास करता हूँ। मेरी शादी सन् 2008 में हुई थी। मेरी आर्थिक स्थिति के चलते मेरी पूर्व पत्नी ने मुझसे तलाक ले लिया था। मेरा तलाक सन् 2014 में मेरठ (उ0प्र0) न्यायालय में हुआ था। तलाक के बाद धारा 125 में खर्चे के मुकदमें का भी फैसला भी 2014 में ही हो गया था। जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर प्रति माह मुझे अपनी पूर्व पत्नी को रूप्यै 3500/- का भुगतान करना पड़ता है। जो मैं कोर्ट में जमा करवाता हूँ। भुगतान में 2000/-रूपये मेरी पत्नी का और 1500/-रूपये मेरी बेटी का होता है। मेरी बेटी जो कि अब 7 वर्ष की है जो की मेरी पूर्व पत्नी के साथ ही है। चूंकि मैं अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहता हूँ। मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। अभी मुझे मालूम हुआ है कि मेरी पूर्व पत्नी डिग्री काॅलेज में प्राईवेट लेक्चरार हो गई है। सैलरी का मुझे नहीं पता कि कितनी मिलती है लेकिन प्राईवेट लेक्चरार को भी लगभग 20-25 हजार की सैलरी मिलती है। मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या मेरी पूर्व पत्नी नौकरी करते समय भी मुझसे खर्चा लेने की अधिकारी है? क्या मुझे न्यायालय से कोई समाधान मिल सकता है? जिससे मुझे खर्चा ना देना पड़े क्यूंकि मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। कृपया उचित समाधान बतायें।


समाधान-

कौशल जी, आप को न्यायालय के समक्ष दो तथ्य प्रमाणित करने होंगे। पहला यह कि आप की आय नहीं है या बहुत कम है। दूसरा यह कि आप की पत्नी वास्तव में 20-22 हजार रुपया कमाने लगी है। आप इन्हें प्रमाणित करने के लिए सबूत जुटाइए। केवल आप के कहने मात्र से अदालत ये दोनों तथ्य साबित नहीं मानेगी।

यदि आप पर्याप्त सबूत जुटा लेते हैं और उक्त दोनों तथ्यों को साबित करने में सफल हो सकते हों तो धारा 127 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं और पूर्व में जो आदेश धारा 125 के अंतर्गत दिया गया है उसे संशोधित किया जा सकता है।

यदि वास्तव में आप की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और आप इस तथ्य को प्रमाणित कर देते हैं तो पत्नी को दी जाने वाली मासिक भरण पोषण राशि बन्द की जा सकती है। लेकिन बेटी के लिए दी जाने वाली राशि कम होने की बिलकुल सम्भावना नहीं है।

 

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समस्या-

सुनील ने दौसा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


गर कोई किसी को अपने खिलाफ किसी अपराध की गवाही देने के लिए रोकता है और धमकी देता है तो क्या उसके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है?


समाधान-

किसी को अपने खिलाफ किसी अपराध की गवाही देने से रोकना और इस के लिए धमकी देना भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के अन्तर्गत एक गंभीर अपराध है और इस के लिए दंड भी अधिक है। जैसे जैसे गवाही से संबंधित अपराध की गंभीरता बढ़ती है वैसे ही दंड भी बढता जाता है।

आप को तुरन्त सम्बधित पुलिस थाना में रिपोर्ट लिखानी चाहिए। यदि पुलिस रिपोर्ट पर कार्यवाही करने में कोताही करे तो अगले ही दिन एसपी से मिल कर उसे कार्यवाही करने के लिए कहना चाहिए। यदि एस पी भी इस मामले में कोताही करता है तो आप न्यायालय को तुरन्त प्रतिवाद प्रस्तुत करें। न्यायालय तुरन्त कार्यवाही करेगा।

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समस्या-

नीतिश कुमार ने कटिहार बिहार से समस्या भेजी है कि-


मेरी चाची हमेशा मेरे परिवार (मुझसे और मेरी मम्मी) से लड़ती रहती है और हम लोगों को परेशान करती है, गाली देना, अपशब्द कहना तो रोज की बात हो गई है।  वो हमेशा मुझे धमकी देती है कि मुझे झूठे केस में फँसा देगी क्योंकि मेरे घर में मैं और मेरी माँ ही रहते है और दूसरा कोई मर्द सदस्य नहीं है। मुझे डर लगा रहता है कि अगर वो झूठा केस कर देगी तो मेरा जीवन बर्बाद हो जायेगा क्योंकि मैं एक छात्र हूँ और मुझे कहीं नौकरी नही मिलेगी। बिहार की कानून व्यवस्था कैसी है ये बताने की जरुरत नही है। ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए कृपा कर बताएं।


समाधान-

प ने यह नहीं बताया कि आप की चाची ऐसा क्यों करती है। क्या आप लोग एक ही मकान में एक साथ रहते हैं और वह चाहती है कि आप लोग मकान से निकल जाएँ, या क्या कोई संपत्ति है जिसे हड़पने के लिए वह ऐसा करती है? या फिर कोई और कारण है? यदि आप ने कारण बताया होता तो बात स्पष्ट होती और समाधान भी उतना ही स्पष्ट होता। पूरा जरूरी विवरण हमेशा समस्या को सही समाधान की और ले जाता है। खैर।

किसी को भी गाली देना और अपशब्द कहना अपराध है। लेकिन इतना बड़ा अपराध भी नहीं है जिस के लिए पुलिस कोई कार्यवाही करे। इस तरह के अपराध की सूचना पुलिस दर्ज कर लेती है और फिर सीधे न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करने को कहती है। लेकिन झूठी गवाही दे कर किसी मुकदमे में फँसा कर उस के सम्मान या धन को क्षति पहुँचाने की धमकी देना धारा 195ए आईपीसी के अंतर्गत गंभीर अपराध है जिस की शिकायत आप पुलिस को कर सकते हैं, पुलिस इस मुकदमे को दर्ज कर जाँच कर सकती है तब गाली देने और अपशब्द कहने का अपराध भी उस के साथ जुड़ जाएगा। लेकिन आप को इस धमकी का सबूत और गवाही पुलिस को देनी होगी।

इस तरह के कृत्य का बड़ा सबूत इस तरह की धमकी, गालीगलौज व अपशब्दों की रिकार्डिंग हो सकती है। आज कल हर फोन में बातचीत को रिकार्ड करने की सुविधा होती है। अब जब भी चाची ऐसा करें तब उस की आवाज को रिकार्ड करें। जब धमकी सहित गालीगलौज व अपशब्दों की दो चार रिकार्डिंग इकट्ठा हो जाएँ तो पुलिस को रिपोर्ट कराएँ। पुलिस कार्यवाही करेगी। इस तरह आप का डर तो निकलेगा ही चाची को भी मुकदमा झेलना पडे़गा हो सकता है सजा ही हो जाए। आप की समस्या हल हो जाएगी।

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समस्या-

रमेश कुमार ने श्री विजय नगर, राजस्थान से राजस्थान राज्य की समस्या भेजी है कि-


मेरे पड़ोस में 4-5 घर है जिनका व्यवसाय बकरी पालन व मीट की दुकानें है, समस्या यह है कि ये बकरियों को घर और घर के बाहर गली के बीच में खुले में बांधते हैं। पूरा रास्ता रोक देते हैं। गली में कोई साधन बड़ी मश्किल से निकल पाता है। कई बार ये बकरियाँ लोगो के घरों में चली जाती है नुकसान पहुँचाती हैं। गली में सड़क पर इन के कारण गंदगी बनी रहती है। मैं नगरपालिका इलाके में रहता हूंँ ।क्या इस समस्या के बारे में कोई कानून  है।  कृपया इस समस्या का समाधान बताये।


समाधान-

मारे यहाँ गरीबी और बेरोजगारी बहुत है। वैसी स्थिति में लोग अपने सीमित साधन के आधार पर स्वरोजगार का सृजन करते हैं। एक छोटी दुकान किराए पर ले कर उस में व्यवसाय आरंभ करते हैं और सड़क की 10 फुट जमीन पर अपना व्यवसाय फैला देते हैं। सारे बाजार इसी कारण संकरे हो चुके हैं। सड़क के किनारे किसी भी वस्तु को बेचने के लिए फैला देते हैं फिर धीरे धीरे उस का विस्तार करते जाते हैं। सड़कें वाहनों के लिए छोटी हो जाती हैं। गर्मी के दिनों में सड़क किनारे गन्ने के रस के ठेले खड़े होते हैं और सड़क पर उन की कुर्सियाँ, मूढ़े सज जाते हैं। सड़क वहाँ भी अवरुद्ध हो जाती है। इन लोगों को रोजगार का स्थान देने की कोई योजना न तो नगरपालिका और पंचायतों के पास है और न ही सरकारों के पास है। सब अपना अपना समय काटते हैं। सरकारों में बैठे राजनितिज्ञों को चुनाव के पहले कुछ सुध आती है तो वे वादे करते हैं और फिर सरकार में पहुँच कर मनमर्जी का करते हैं। किसी केन्द्र सरकार से ले कर ग्राम पंचायत तक किसी संस्था पर जनता का वास्तविक नियंत्रण नहीं है। इस कारण ये समस्याएँ  फैलती जा रही हैं। एक दिन वे इतनी फैलती जाएंगी कि गृहयुद्ध का रूप ले सकती हैं।

जहाँ तक आप की समस्या का विवरण है उस से पता लगता है कि आप के कुछ पड़ौसी जो कि बकरी पालन और मीट के धंधे से अपना गुजारा करते हैं उन की इन व्यवसायिक गतिविधियों से गली में न्यूसेंस (कंटक) उत्पन्न हो रहा है। दंड प्रक्रिया संहिता ( क्रिमिनल प्रोसीजर कोड या सीआरपीसी) की धारा 133 में सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट को यह शक्ति दी हुई है कि यदि कहीं न्यूसेंस की शिकायत उसे प्राप्त होती है तो वह सभी पक्षों की सुनवाई कर के न्यूसेंस हटाने का आदेश दे सकता है। आप के मामले में भी आप एसडीएम के न्यायालय में न्यूसेंस फैलाने वाले पड़ौसियों के विरुद्ध धारा 133 में आवेदन प्रस्तुत कर कार्यवाही आरंभ कर सकते हैं। एसडीएम न्यूसेंस हटाने का आदेश दे सकता है। इस आदेश से आप के पड़ौसियों को परेशानी होती है तो वे अपने रोजगार के लिए कोई स्थान विशेष नगर पालिका से आवंटित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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अपराधिक केस फर्जी होने पर प्रतिरक्षा करना ही उपाय है।

December 21, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

जितेन्द्र ने शैखपुरा बिहार से समस्या भेजी है कि-

मेरे विरुद्ध एक सरकारी कर्मचारी द्वारा धारा 341, 323, 353, 379, 504, 506/34 में एक फर्जी केस दर्ज करवा दिया है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

जितेन्द्र जी,

प के विरुद्ध मुकदमा हुआ है। केवल आप जानते हैं कि वह फर्जी है। बाकी पुलिस ने तो गवाही और सबूतों के आधार पर ही आरोप पत्र प्रस्तुत किया होगा। इस का एक ही इलाज है कि आप इस मुकदमे में अच्छा वकील करें और अपनी प्रतिरक्षा करें। यदि यह सिद्ध हो जाता है कि यह एक फर्जी मुकदमा है तो आप न्यायालय से यह निवेदन कर सकते हैं कि उक्त मामले में फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले कर्मचारी के विरुदध कार्यवाही की जा कर उसे सजा दी जाए।

यदि आप इस मुकदमे में बरी हो जाते हैं तो आप दुर्भावनापूर्ण अभियोजन के लिए हर्जाना प्राप्त करने के लिए उक्त सरकारी कर्मचारी के विरुदध दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

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बन्दी रखने वाला ससुराल छोड़ कर ही आगे बढा़ जा सकता है।

September 19, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

मोनिका ने हिसार, हरियाणा से पूछा है-

मेरी शादी को पाँच महिने हुए हैं। कुछ दिन बाद से ही मरे ससुराल वाले और पति मुझे परेशान कर रहे हैं। शादी से पहले मुझे बताया था कि मेरा पति ड्रिंक नहीं करता है औऱ शादी के बाद मैं अपनी पढ़ाई जारी रख सकती हूँ। लेकिन ये मुझे पढ़ाई नहीं करने देते हैं, न ही नौकरी करने देते हैं। घर से भी नहीं निकलने देते, मुझे कैद कर रखा है। मेरा पति रोज ड्रिंक कर के घर आता है और मुझ से लड़ाई करता है। मुझे मायके भेजने की धमकी देते हैं। मैं पढ़ना चाहती हूँ, आगे बढ़ना चाहती हूँ कुछ बोलती हूँ तो सब मेरे साथ बोलना बन्द कर देते हैं 20-20 दिन मुझ से कोई नहीं बोलता। मायके गयी तो एक माह तक मुझे लेने कोई नहीं आया। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प के कथनों से एक बात पक्की लग रही है कि आप के ससुराल वालों को आप जैसी बहू नहीं बल्कि घर में बन्द रह कर घर का काम करने वाली बहू चाहिए थी। आम तौर पर विवाह के पहले लोग वायदे कर देते हैं यह सोच कर कि विवाह के बाद सब ठीक हो जाएगा। हमें नहीं लगता कि आप अपनी ससुराल में रह कर पढ़ाई आगे बढ़ा सकती हैं। आप का पति भी ड्रिंक करना नहीं छोड़ेगा। घर के बाहर निकलना भी आप का स्वतंत्रता पूर्वक नहीं हो सकता।

यदि आप इन परिस्थितियों से तंग हैं तो आप अपनी ससुराल छोड़ सकती हैं इस का आप को अधिकार है। क्यों कि आप के साथ ससुराल में वाजिब व्यवहार नहीं हो रहा है जो कि आप के साथ क्रूरता है। यदि आप के मायके वाले सपोर्ट करने में सक्षम हों तो आप मायके जा कर वहाँ नौकरी तलाश कर के नौकरी कर सकती हैं और अपनी पढ़ाई जारी रख सकती हैं। इस के साथ ही आप अपने पति से प्रतिमाह भऱण पोषण राशि प्राप्त कर सकती हैं जिस के लिए आप को धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता अथवा घरेलू हिंसा अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन करने होंगे। आप चाहें तो ससुराल वालों की क्रूरता के लिए उन के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करवा सकती है जिस पर धारा 498ए का मामला दर्ज हो सकता है।

आप यदि वास्तव में अपनी परिस्थितियों को बदलना चाहती हैं तो आप को ससुराल छोड़ना ही पड़ेगा। एक बार ससुराल छोड़ दें फिर किसी अच्छे स्थानीय वकील से मिल कर सलाह करते हुए आगे का रास्ता तय कर सकती हैं।

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समस्या-

प्रियंका गौतम ने इस्लामपुरा, सोरन, जिला टोंक राजस्थान से पूछा है-

मेरे पापा को 20 अगस्त 2016 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है दारू के केस में जो कि 2006 का केस है। मेरे पापा की पिछली बार हम ने जमानत पर छुड़वाया था उस के बाद ताऱीख पर न जाने के कारण कोर्ट ने उन को भगोड़ा घोषित कर दिया। कोर्ट ने उन को भगोड़ा घोषित क्यों किया? 2010 के बाद कोई पुलिस वाला हमारे पास नहीं आया, कोई नोटिस नहीं आया।

 

समाधान-

ब दारू के केस में आप के पापा पहली बार पकड़े गए तो अदालत ने उन की जमानत ले कर उन्हें छोड़ दिया क्यों कि जमानत इस बात की थी कि वे हर तारीख पर अदालत में हाजिर होते रहेंगे। लेकिन वे तारीख चूके और उन का गिरफ्तारी वारंट निकला। आप ने उन की जमानत करवा ली। वे फिर से तारीख पर नहीं गए तो फिर से जमानत जब्त हो गयी और फिर गिरफ्तारी वारंट निकल गया।

इस तरह यह जरूरी नहीं है कि गिरफ्तारी वारंट निकालने के लिए किसी मुलजिम को फरार या भगोड़ा घोषित किया ही जाए और उस के पहले उसे तथा उस के पते पर कोई नोटिस या समन भेजा ही जाए।

हमें नहीं लगता कि आप के पिताजी को भगोड़ा घोषित किया गया है।दो-तीन बार जमानत पर छोड़े जाने के बाद भी कोई अभियुक्त पेशी चूके तो उसे भगोड़ा घोषित किया जा सकता है उस के लिए उस की संपत्ति को कुर्क करना होता है। यदि उन की संपत्ति कुर्क की गयी होती तो संपत्ति पर नोटिस जरूर चस्पा होते।

आप अपने पापा की जमानत करवा सकते हैं, हालांकि यह आसानी से नहीं होगी। फिर भी एक दो सप्ताह जेल में रहने के बाद हो सकती है। आप को प्रयत्न करना चाहिए।

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rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

प्रमोद ने भिलाई छत्तीसगढ़ से पूछा है-

त्नी व ससुराल वालों ने मेरे व मेरे परिवार के विरुद्ध आजमगढ़ न्यायालय (उ.प्र.) में डी.वी. एक्ट 2005, 125, 498ए, 323, 504, 506, 3/4 डी.पी. एक्ट के तहत झूठा मुकदमा लगाया है। उसने अपने आरोप पत्र में दहेज मांगने, दिनांक 15/08/2015 को मार-पीट गाली-गलौज करके घर (गांव के घर) से निकाल देने का आरोप लगाया है। उसने अपने गांव के सरपंच से फर्जी कागज बनवाया है जिसमें उसने शादी का स्थान उसके गांव कोलमोदीपुर (आजमगढ़) को दर्शाया व उसे न्यायालय में लगाया है। जबकि शादी दिनांक 22/02/2015 को गाजीपुर (उ.प्र.) में होने के गवाह व सबूत हैं तथा दिनांक 15/08/2015 को मैं अपने गांव के घर में नहीं था उस दिन मैं ट्रैन से यात्रा कर रहा था उसका टिकट व गवाह हैं। मेरे भाई भी गांव में नहीं थे वे हमारे मूल- निवास भिलाई (छ.ग.) में थे।  मेरे पास ये भी सबूत है कि पत्नी के विदाई के दिनांक 14/08/2015 को ही पत्नी अपने पिता व रिश्तेदार के साथ मिलकर गांव-समाज व पंचायत के सामने अपने मांग का सिन्दूर पोंछकर तलाक देने की बात कहकर अपना पूरा सामान गहना व हमलोगों से रुपये लेकर अपने मायके चली गयी थी।  मेरे पास पत्नी के द्वारा दिया हुआ नोटरियल इकरारनामा/ शपथपूर्वक कथन है जिसमें स्पष्ट लिखा है कि मैं और मेरा परिवार कभी भी उससे या उसके परिवार से धन- दहेज की मांग नहीं किये है, कभी भी उसके साथ मार- पीट गाली गलौज व दुर्व्यवहार नहीं किया है। उल्टा पत्नी ने ही मेरे व मेरे परिवार वालो से गाली गलौज व दुर्व्यवहार किया है तथा उसके तलाक देना व उसकी धमकियों का विवरण है। उसने यह नोटरी अपने मायके (गाजीपुर) में रहते हुए गाजीपुर न्यायालय में दिनांक 07/12/2015 को कर के दिया है। जिसमें उसका फोटो व हस्ताक्षर तथा उसके पिता व चार गवाहों के हस्ताक्षर हैं।  मेरे पास गवाह दस्तावेजी सबूत है जिससे यह साबित हो जायेगा कि मैं और मेरा परिवार निर्दोष है तथा पत्नी व ससुराल वाले दोषी साबित हो जायेंगे। मेरे ससुराल वाले किसी भी तरह से समझौता नहीं करना चाहते हैं। मेरा प्रश्न आप से यह है कि क्या मैं सीआरपीसी की धारा 340 के तहत मुकदमा कर सकता हूँ यदि हाँ तो किस प्रकार से और किस न्यायालय में (मेरी शादी के स्थान गाजीपुर या मूल निवास भिलाई में) और यदि नहीं तो किस वजह से नहीं कर सकता हूँ इसका कारण बताईये । यह भी जानना चाहता हूँ कि और कौन- कौन सा मुकदमा उनके विरुद्ध कर सकता हूँ?

समाधान-

प ने अपनी समस्या से संबंधित काफी तथ्य यहाँ रखे हैं। हमारी अपराधिक न्याय व्यवस्था ऐसी है कि जब तक न्यायालय किसी अपराधिक मामले में प्रसंज्ञान नहीं ले लेता तब तक अभियुक्त को कुछ कहने का अधिकार नहीं है, अदालत को भी उसे सुनने का अधिकार नहीं है। प्रसंज्ञान लेने के उपरान्त आरोप विरचित करने के लिए बहस होती है वहाँ अभियुक्त को सुनवाई का अवसर प्राप्त होता है वहाँ आप अपनी बात कह सकते हैं, लेकिन वहाँ भी आप के बचाव वाले सबूतों को नहीं देखा जाएगा।

जब मुकदमे की सुनवाई होगी तब आप को गवाहों से जिरह का अवसर मिलेगा। अभियोजन पक्ष की गवाही हो जाने के उपरान्त आप को बचाव में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा तब आप इन सारे सबूतों का उपयोग कर सकते हैं। मुकदमे तो आप को लड़ने ही होंगे।

धारा 340 दंड प्रक्रिया संहिता में आप उसी न्यायालय को शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं जहाँ आप के विरुद्ध झूठे सबूत या गवाही आदि दी जा रही है। पर यदि आप अभी यह आवेदन प्रस्तुत करेंगे तो यह जल्दबाजी होगी। पहले उन सबूतों को गवाही से प्रमाणित हो जाने दीजिए तभी तो आप धारा 340 के अन्तर्गत आवेदन दे सकेंगे।

आप किन किन धाराओं के अन्तर्गत धारा 340 का आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं यह आप की सामग्री का अध्ययन कर तथा आप से बातचीत कर के आप के वकील तय कर सकते हैं।

फिर भी आप को लगता है कि प्रथम दृष्टया ही आप यह साबित कर सकते हैं कि आप के विरुद्ध किए गए मुकदमे झूठे हैं तो आप प्रथम सूचना रिपोर्ट तथा मुकदमा रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय में धारा 482 के अन्तर्गत रिविजन याचिका दायर कर सकते हैं।

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समस्या-Havel handcuff

शीलू ने उन्नाव, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरा एक लड़के से कई दिनों से अफेयर चल रहा था। पहले उसने मेरे साथ जबरदस्ती की थी। लेकिन बाद में उसने कहा कि वह उससे शादी कर लेगा। लेकिन 2 से 3 साल बीत जाने पर अब वह मना कर रहा है। वह कह रहा है कि जो करना है कर लो वह शादी नहीं करेगा। उसके घर वालो को सब पता है। मुझे शुरू से बहुत डरा धमका रहा है इसलियें मैंने अपने घर में सबको नहीं बताया है। मेरी अपेक्षा वह पैसे वाला भी है। अब वह मुझको डराकर अपने दास्तों से सम्बन्ध बनाने के लिये कह रहा है। घर पर मैंने अपने भाई से बताया है तो वह कह रहा है कि चुपचाप रहो और मैं लड़का देखकर कहीं और शादी कर दूंगा।  नहीं तो सब जगह अपनी ही बदनामी होगी। उसके पास पैसा है उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा। वह अच्छा वकील कर के छूट जायेगा।  लेकिन मैं अब उसी लड़के से शादी करना चाहती हूँ क्या करूँ। अगर कुछ हल नहीं निकला तो मैं आत्महत्या कर लूंगी।  मेरी मदद करें।

समाधान-

म उन लोगों की बात का कोई उत्तर नहीं देते जो अपने प्रश्न में यह कहते हैं कि हल न निकला तो आत्महत्या कर लूंगा/ लूंगी। इस प्रश्न का उत्तर इस कारण दे रहा हूँ कि इस तरह का प्रश्न पहली बार हमारे पास आया है।

आप के कहने से पता लगता है कि उस लड़के ने कभी आप से प्रेम नहीं किया। उस ने पहले आप के साथ जबर्दस्ती की। फिर समाज में प्रचलित इस धारणा का कि जिस लड़की के साथ किसी ने बलात्कार कर दिया वह विवाह और परिवार में रहने लायक नहीं होती, दुरूपयोग करते हुए आप को धमकाया साथ में आप को विवाह का लालच दिया। आप भी यही समझती हैं कि बलात्कार की इस श्रंखला को छुपाना ही श्रेयस्कर है आप ने भी अपने शोषण को स्वीकार कर लिया। अब उस लड़के ने पीठ दिखा दी है। वह समझता है कि आप में अब इतना नैतिक साहस शेष नहीं है कि आप पुलिस में बलात्कार की इस श्रंखला की शिकायत कर सकें। इस कारण वह अकड़ गया है।

यह सब कथानक यह बताता है कि वह लड़का आप से कभी प्रेम नहीं करता था। ऐसा व्यक्ति कभी किसी से प्रेम नहीं कर सकता। क्यों कि जो व्यक्ति किसी लड़की का बलात्कार कर सकता है और उसे धमका कर और लालच दिखा कर बलात्कार को जारी रखता है वह कभी किसी से प्रेम करने लायक हो ही नहीं सकता। वह आप का ही नहीं अपितु समस्त स्त्री समुदाय का अपराधी है, इस समाज का अपराधी है उस की शिकायत होनी चाहिए और उसे दंडित होना चाहिए।

आप के भाई का सुझाव भी जैसा हमारा समाज है वैसा ही है। अक्सर ऐसी घटनाओं की शिकार लड़कियों में से 99 प्रतिशत लड़कियाँ यही करती हैं कि वे चुपचाप विवाह कर अपनी ससुराल चली जाती हैं और सारा जीवन इस भय में गुजार देती हैं कि उन के पति को या ससुराल वालों को या अन्य किसी को उन के जीवन का यह अंधेरा पता न लगे।

यदि आप उस लड़के के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट कराती हैं तो उस का पैसा भी उसे नहीं बचा पाएगा। उस के विरुद्ध बलात्कार और ब्लेकमेल करने के अपराध में मुकदमा भी चलेगा और उसे सजा भी मिलेगी। अभी आप उस लड़के के चंगुल में हैं, जब वह चंगुल में फंसेगा तो दस बार आप के सामने विवाह के लिए नाक रगड़ेगा। हमारा सुझाव है कि आप को उस लड़के के विरुद्ध पुलिस रिपोर्ट करना चाहिए और उसे दंडित कराना चाहिए। यदि आप पूरी मुस्तैदी से यह काम करती हैं तो आप समाज का भला करेंगी, उन तमाम स्त्रियों के हक में काम करेंगी जो इस तरह शिकार बनती हैं। जब वह खुद को बचाने के लिए  पुनः विवाह का प्रस्ताव रखे तो उसे मना कर दीजिएगा, यही उस की सजा होगी। हमें विश्वास है कि आप को कोई न कोई सच्चा जीवन साथी भी मिल जाएगा जो आप के अतीत को जानते हुए भी आप के साथ पूरा जीवन बिताने को तैयार होगा।

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rp_judge5.jpgसमस्या-

 

रजनीश रानू ने सुपौल बिहार से पूछा है-

 

दो भाई आपस में ज़मीनी विवाद किए और उसमें मेरा नाम दे दिए। मैं पुलीस जाँच और चार्जशीट से बाहर हो गया। परंतु सीजीएम ने हमारे ऊपर प्रसंज्ञान ले लिया है। क्या करूँ? उपाय सुझायें।

 

समाधान-

 

प के पास दो विकल्प हैं-

 

पहला विकल्प तो यह है कि जैसे इस मुकदमे के सब अभियुक्त मुकदमे में अपना बचाव करेंगे वैसे ही आप भी करिए। जब आप पर आरोप मिथ्या है तो आप बरी हो जाएंगे।

 

दूसरा विकल्प यह है कि आप अपने विरुद्ध प्रसंज्ञान लेने के आदेश के विरुद्ध रिविजन याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं और न्यायालय द्वारा लिए गए प्रसंज्ञान को रद्द करवा सकते हैं। यह दूसरा विकल्प आप को अवश्य अपनाना चाहिए।

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