मकान मालिक-किराएदार Archive

बिना रसीद के किराया अदा करना पैसे को पानी में फैंकना है।

June 13, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

विकास सिंह ने आजादपुर, दिल्ली से समस्या भेजी है कि-

म 3० दुकादार पिछले 9 सालों से एक कॉम्पलेक्स में शॉप चला रहे हैं। जिसका किराया 5000 है और एग्रीमेंट 36 महीने का (बिना रजिस्टर्ड वाला) होता था। किराया हर एग्रीमेंट के ख़त्म होने के बाद 10% बढ़ता था। हमारा वो एग्रीमेंट ख़तम हो गया, लेकिन नया नहीं बना रहा। मकान मालिक सबको बहुत परेशान करता था और अब हम सबको दुकाने खाली करने की धमकी दे रहा है। किराया लेना भी बंद कर दिया। उसने किसी को भी पिछले 3 सालो में किराये की रसीद नहीं दी, न कभी चेक से किराया लिया। हमेशा बहाने बनाता था। अब हम क्या करें। क्या कोर्ट में किराया जमा करवायें? या उसके नोटिस का इंतज़ार करे। क्या वो हम सबसे दुकानें खली करवा सकते हैं।

समाधान-

प लोगों की सब से बड़ी गलती है कि आप ने मकान मालिक को बिना रसीद के किराया दिया है। बिना रसीद के दिया हुआ किराया भुगतान किया हुआ नहीं माना जा सकता। बिना रसीद के किराया अदा करना पैसे को पानी में फैंकना है। मकान मालिक 3 साल से अधिक के किराए की मांग नहीं कर सकता।  लेकिन वह 3 साल का किराया बकाया बता कर किराया अदायगी में कानूनी चूक के आधार पर दुकान खाली कराने का दावा कर सकता है। इस तरह आप को 3 साल का किराया जो आप दे चुके हैं वह दुबारा देना पड़ सकता है।

हमारी राय यह है कि आप सभी दुकानदार न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर चालू किराया यह कह कर अदालत में जमा करवा दें कि दुकानदार किराया ले कर रसीद नहीं देता। पहले हम उस के विश्वास पर थे पर अब जब उस से रसीद मांगी तो उस ने मना कर दिया इस कारण बकाया किराया जमा करवा रहे हैं।

हो सकता है मकान मालिक नोटिस दे कर पिछला किराया बकाया बताए। बाद में दुकान खाली करने का दावा करे। उस स्थिति में न्यायालय दावे में बकाया किराए का निर्धारण करे। तब यदि न्यायालय आदेश देता है तो आप को पिछले तीन वर्ष के किराए में से उतना किराया दुबारा देना पड़ेगा जितना न्यायालय निर्धारित करती है। यदि कोर्ट द्वारा निर्धारित किराया  आदेश से एक माह में जमा नहीं करवाएंगे तो दुकान किराया अदायगी में चूक के आधार पर खाली करने का निर्णय हो सकता है।

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समस्या-

राहुल मेहरा ने गाजियाबाद, उत्तर प्रदेस से समस्या भेजी है कि-

मने लगभग 1 साल पहले ग़ाज़ियाबाद उत्तर प्रदेश में अपना घर किराये पर दिया। कुछ महीनो के पश्चात वहां रहने वाले पड़ोसियों ने शिकायत की कि हमारे किरायेदार घर में अवैध शराब का कारोबार करता है। हमने किरायेदार को मकान खाली करने को बोला तो वह खाली नहीं कर रहा है। अब न तो वह मकान खाली कर रहा और पिछले 4 महीनो से न तो वह किराया दे रहा न बिजली का बिल जमा कर रहा। क्या उपाय संभव है कृपया सहायता कीजिये।

समाधान-

दि किरायेदार बिजली का बिल नहीं जमा कर रहा है तो सब से पहले बिजली कंपनी को आवेदन प्रस्तुत कर बिजली का कनेक्शन कटवा दें।

यदि यह शिकायत सच है कि किराएदार शराब के अवैध कारोबार में लिप्त है तो सीधे पुलिस और प्रशासन के उच्चाधिकारियों को शिकायत करें। क्यों कि इस तरह के कारोबारियों की स्थानीय पुलिस से सैटिंग होती है और कोई कार्यवाही नहीं होती। पुलिस को की गयी शिकायत की प्रति अवश्य रखें।

किसी वकील से मिल कर किराएदार को बकाया किराया जमा कराने, मकान खाली कराने का नोटिस दिलवाएँ। वकील को कहें कि मकान खाली कराने के जितने आधार हो सकते हैं उन मे से जितने आधार काम में लिए जा सकते हैं उन का नोटिस में उल्लेख करें। नोटिस की अवधि समाप्त हो जाने पर तुरन्त मकान खाली कराने तथा बकाया किराया प्राप्त करने का दावा न्यायालय में प्रस्तत करें।

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किराएदार को परिसर खरीदने का कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होता।

May 31, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

राधेश्याम सिंह ने सीरमपुर, पश्चिम बंगाल से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी करीब 50 साल से किराएदार हैं, घर के मालिक का निधन के बाद किराया नियंत्रण न्यायालय में जमा कराते हैं। अब हम लोगों का प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नम्बर आया है। हम ये घर खरीदना चाहते हैं लेकिन दिवंगत मकान मालिक के छह बेटों में से कोई राजी नहीं हो रहा है। कृपया बताएँ कि क्या कानूनी तरीके से हम इस घर को खऱीद सकते हैं कि नहीं?

समाधान-

संपत्ति का अधिकार एक मूल अधिकार है। इसे बाधित किया जाना संभव नहीं है। यदि कोई मकान मालिक अपना मकान बेचना नहीं चाहता है तो उसे बाध्य नहीं किया जा सकता है।  मैं यहाँ अनेक बार लिख चुका हूँ कि किराएदार हमेशा किराएदार ही रहेगा चाहे वह पूरे सौ साल तक किराये पर उस संपत्ति में रह ले। उसे किराए वाले मकान का मालिक बनने का कोई अधिकार नहीं है। एक लंबे समय तक किसी परिसर में किराए से रह लेने से कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होता है।

इस तरह जब तक स्वयं मकान मालिक ही अपना मकान बेचने को तैयार न हो तो किराएदार को यह अधिकार भी नहीं कि वे किसी भी प्रकार से मकान मालिक पर घर बेचने के लिए कोई दबाव  बना सकें। इस तरह का कोई कानून नहीं है। हमारी राय है कि आप को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर खरीदने की सुविधा मिल रही  है तो उस का उपयोग कर कैसा भी घऱ जो कहीं भी हो खऱीद लें और इस मकान में जिस में आप लोग रह रहे हैं उस के मोह में न पड़ें।

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किराएदार की बेदखली के लिए मुकदमा करने में विलम्ब न करें।

May 30, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

सत्येन्द्र कुमार ने लखनऊ, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरा मकान जो मिट्टी के गारे से बना हुआ पुराना मकान है, बरसात में सीलन दीवारों पर उपर तक पहुँच जाती है।  बाहर से अच्च्छा दिखाई देता है। मेरे मकान में दुकानदार दुकान किराए पर चलाते हैं। दीवारे गारे से बनी होने के कारण दो मंज़िल बनवाया नहीं जा सकता। मेरी दो संतानें हैं मैं मकान तोड़कर दो भागो में बनवाना चाहता हूँ। किरायेदार खाली नहीं करना चाह रहे हैं।  मैं बहुत परेशान हूँ, मुझे अच्छी सलाह दें जिससे मैं इस समस्या से झुटकारा पा सकूँ।

समाधान-

कुल मिला कर आप की समस्या ये है कि वर्तमान मकान का विस्तार बिना मकान गिराए संभव नहीं है। चूंकि आप का परिवार बढ़ गया है इस कारण आप दोनों बच्चों और परिवार के निवास की जरूरत के लिए मकान गिरा कर मकान बनाना चाहते हैं। यह आप की सद्भाविक एवं युक्तियुक्त आवश्यकता है। आप इस आधार पर मकान किराएदार से खाली करवा सकते हैं।

आप को तुरन्त बिना किसी देरी के मकान खाली कराने का मुकदमा किराएदार के विरुद्ध कर देना चाहिए। तुरन्त तो नहीं लेकिन मकान खाली कराने की डिक्री आप के पक्ष में हो जाएगी। इस के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। इस कारण जितनी देर आप मुकदमा करने में करेंगे उतनी ही देरी से आप अपनी योजना को मूर्तरूप दे पाएंगे।

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समस्या-

सोरू ने उत्तर प्रदेश के अज्ञात स्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पति सरकारी नौकरी करते हैं। हम लोग अपनी माँ के साथ ही रहते हैं। पिता का देहान्त हो चुका है। मेरी छोटी बहिन अभी पढ़ रही है। मेरी माँ के मकान में दुकान है जो किराए पर दे रखी है। मेरे कोई भाई नहीं है। मैं  उस दुकान में अपना व्यवस्या करना चाहती हूँ, मेरी माँ भी इस से सहमत है तो क्या हम अपने किराएदार से दुकान खाली करवा सकते हैं?

समाधान-

कान की स्वामी आप की माताजी हैं। यदि मकान के स्वामी आप के पिताजी थे तो उन के बाद उस की स्वामी आप की माताजी के साथ साथ आप दोनों बहने भी हैं। इस तरह यदि आप तीनों मकान की स्वामी हैं तो आप को अपने व्यवसाय के लिए दुकान की जरूरत होने पर आप कानूनी तरीके से दुकान किराएदार से खाली करवा सकती हैं। परिवार के किसी भी सदस्य की जरूरत के लिए दुकान खाली कराई जा सकती है।

इस के लिए आप को तुरन्त किसी स्थानीय वकील से सलाह ले कर बिना कोई देरी किए दुकान खाली कराने का मुकदमा कर देना चाहिए। क्यों कि फिर अदालत में भी समय लगेगा। लेकिन आप जितनी जल्दी मुकदमा कर देंगी उतनी जल्दी आप दुकान खाली करवा सकेंगी। यदि मकान माँ के नाम है तो यह  मुकदमा केवल माँ कीा ओर से हो सकता है।  यदि पिता के नाम था तो उत्तराधिकार के कनूुन के अनुसार आप तीनों उस की स्वामी हैं। इस कारण मुकदमा तीनो  तरफ से संयुक्त रुप से होगा।

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rp_judge-cartoon-300x270.jpgसमस्या-

कुसुम लाता जैन ने भोपाल, मध्यप्रदेश से पूछा है-

मैं आयु वयस्क विधवा माहिला हूँ।  मेरे पति का देहान्त सन 2002 में हुआ था।  मैं पेन्शन से अपना गुजारा चलाती हूँ।  मेरे पति द्वारा सन 1997 में इस्लामुद्दीन (काबिटपुरा निवासी) शालीमार ट्रेडर्स को केवल 6 माह के लिये दुकान गोदाम के उपयोग के लिए किराये पर दी थी। (पता – 677 नया कबाड़खाना मेनरोड भोपाल) वह दुकान में गोदाम की जगह रिटेल काउंटर चला रहा हैं। उसने दुकान उप-भाड़े पर आपने भतीजे को दे रखी है।  इस से पहले भी इस्लामुद्दीन ने मेरी दुकान को मोहम्मद नवाब को उप-भाड़े पर दे रखी थी।  अब 7 महिने से किराया भी नहीं दे रहा है, ना-ही दुकान खाली कर रहा है।,  मेरे कई बार अनुरोध करने के बाद भी इस्लामुद्दीन दुकान खाली नहीं कर रहा है।  इस्लामुद्दीन  ने  पिछले १९ साल से किरायानामा रिन्यू नहीं किया। जब भी दुकान ख़ाली करने की बात करो तो वह टाल  दता है। हमें धमकी देता है कि दुकान 5 लाख में बेच दो।  हम अपनी दुकान नहीं बेचना चाहते हैं न ही इस्लामुद्दीन को किराये पर देना चाहते हैं मैं मानसिक तनाव एवं प्रताड़ना  की वजह से काफी परेशान रहती हूँ इस्लामुद्दीन के इस व्यवहार से हमेशा तनाव एवं प्रताड़ना महसूस करती हूँ। ये मेरी दुकान हड़पना चाहते हैं।  मैं अपनी बहु के साथ मिल कर व्यापार करना चाहती हूँ जो हमारी जीविका का साधन बने। मुझे स्वयं के व्यापार के लिए दुकान की आवश्यकता है।  मैं ने आपनी जमा पूंजी से पानी की टंकी व दरवाज़े का व्यापार प्रारंभ किया है। मैं कोर्ट केस (court case)  लड़ने  कि हालात मे नहीं हूँ। बताएँ, मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

प के पास दुकान को खाली कराने के बहुत सारे कानूनी आधार हैं। जैसे किराएदार द्वारा छह माह से अधिक का किराया न दे कर किराया अदायगी में कानूनी डिफाल्ट करना, दुकान को शिकमी किराए पर देना और इन दोनों कारणों से अधिक मजबूत कारण यह कि आप अपनी बहू के साथ मिल कर व्यापार कर रही हैं और उस के लिए आप को दुकान की जरूरत है। भोपाल में किसी भी संपत्ति से किराएदार को न्यायालय की डिक्री के निष्पादन में ही हटाया जा सकता है, अन्यथा नहीं। यदि आप समझती हैं कि न्यायालय बिना जाए आप का काम हो जाए तो आप कभी सफल नहीं हो सकेंगी। यदि आप किसी गुंडा गेंग को भी सुपारी दे कर मकान खाली कराना चाहें तो नहीं कर सकेंगी क्यों कि इस मामले में भी शायद आप का किराएदार भारी पड़ेगा। यह एक गलत और गैर कानूनी काम है और इस के लिए आप को जेल भी जाना पड़ सकता है।

यदि आप को दुकान खाली कराना है तो आप को अदालत में ही अर्जी देनी पड़ेगी। अदालत आप इस लिए नहीं जाना चाहती कि वहाँ कई वर्ष तक निर्णय नहीं होता। तो इस में अदालत की गलती नहीं है। इस में राज्य सरकार की गलती है कि उस ने पर्याप्त अदालतें नहीं खोल रखी हैं। राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार के समय 2003 में ही नया किराया कानून बन गया था। बाद में उस के अनुरूप किराया अधिकरण और अपील किराया अधिकरण स्थापित हो जाने से अब दो साल में मुकदमा अधिकरण से तथा साल भर में अपील से निपट जाता है।

जो भी स्थिति है उस में आप को चाहिए कि तुरन्त वकील से मिल कर दुकान खाली कराने का मुकदमा करें। अभी तक मुकदमा न कर के आप ने कई वर्ष बर्बाद कर दिए हैं। जब पहली बार शिकमी किराएदार रखा गया तभी आप दुकान खाली कराने का दावा कर देतीं तो हो सकता था अभी तक दुकान का कब्जा आप को मिल चुका होता।

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rp_judge-caricather.jpgसमस्या-

पूनम चौहान ने रतलाम, मध्यप्रदेश से पूछा है-

म किराए के मकान में 30 वर्ष से निवास कर रहे हैं। हमारे मकान मालिक द्वारा बिजली सुविधा नहीं दी गयी है जिस के कारण हम  कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हम मकान का किराया कोर्ट में जमा करते हैं। क्या हमें कानूनन बिजली सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है?

समाधान-

र नागरिक को बिजली सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है। किसी को इस कारण से बिजली सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह किराएदार है।

आप अपने मकान मालिक को नोटिस दीजिए कि वह आप के लिए बिजली सुविधा चालू करे। यदि वह नोटिस की समाप्ति के बाद भी बिजली सुविधा चालू नहीं करता है तो आप बिजली कंपनी से अपने नाम कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं।

यदि बिजली कंपनी आप को कनेक्श्न देने से मना करे तो आप न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर न्यायालय से आदेश करवा सकते हैं कि बिजली कंपनी आप को कनेक्शन प्रदान करे।

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मकान मालिक परेशान करता है तो पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएँ।

September 1, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_property1.jpgसमस्या-

दीप्ति मिश्रा ने कानपुर, उत्तरप्रदेश से पूछा है-

मेरी माँ, पिता और पति सब का देहान्त हो चुका है, कोई भाई भी नहीं है। मैं अपने मायके के किराए के मकान में निवास करती हूँ। मकान 70 वर्ष पुराना है। क्या मेरा मकान मालिक मकान खाली करवा सकता है? पहले ये ट्रस्ट का था. उस ने फाइल जलवा दी। मेरा कोई सहारा नहीं है मैं इस के लिए क्या कर सकती हूँ?

समाधान-

कोई भी कितने भी वर्ष तक मकान में किराएदार रहे लेकिन वह मकान मालिक नहीं हो सकता। आप नगरीय क्षेत्र में किराए के मकान में रहती हैं। यहाँ कोई भी मकान मालिक कानूनी आधार उपलब्ध न होने से मकान खाली नहीं करवा सकता। यदि आप मकान खाली नहीं करना चाहती हैं तो आप मकान मालिक से कह सकती हैं कि आप मकान खाली नहीं कर रही हैं क्यों कि उस के पास मकान खाली कराने का कोई कानूनी आधार नहीं है।

मकान मालिक को मकान खाली करवाना होगा तो वह आप को नोटिस देगा या फिर अदात में मुकदमा करेगा। अदालत में मकान मालिक मकान को खाली करने का आधार बताएगा और साबित करेगा। आप को भी अपना पक्ष रखने का अवसर प्राप्त होगा। यदि वहाँ मकान मालिक अपना पक्ष साबित कर सका तो न्यायालय खाली कराने की डिक्री पारित कर सकता है। आप इस डिक्री के विरुद्ध अपील कर सकती हैं। लेकिन यदि अपील न्यायालय ने भी यही कहा कि मकान खाली करना होगा तो फिर आप को मकान खाली करना होगा।

इस प्रक्रिया के अतिरिक्त मकान खाली नहीं कराया जा सकता। यदि मकान मालिक आप को परेशान या तंग करता है तो आप को उस की शिकायत पुलिस में करनी चाहिए।

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किराया बढ़ाने के लिए अदालत में वाद संस्थित करें।

August 9, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rental-agreementसमस्या-

सैफ उल्लाह खान ने बरेली उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मैं ने अपने कुछ गोदाम 800 माहवार पर 2001 से 2006 के मध्य 11 माह किराये के एग्रीमेंट पर दिए। जिस पर एक लाइन यह लिखी कि यदि किरायेदार अपनी किरायेदारी आगे भी कायम रखना चाहेगा तो हर 3 साल के बाद किराये में 10% कि वृद्धि करेगा। आज 10 साल से अधिक हो जाने के बाद भी किराया केवल 1100-1200 तक ही पहुँच पाया है जबकि मार्किट वैल्यू इस समय 2500-3000 है। मैं आपसे ये जानना चाहता हूँ कि क्या इस एग्रीमेंट में एक लाइन हर 3 साल के बाद किराये में 10% कि वृद्धि लिखने से ये तमाम उम्र (मेरी अगली कितनी पीढ़ी तक) वैध हो गया या इस एग्रीमेंट को मैं 5,10 या 15 साल बाद नवीनीकृत करवा सकता हूँ। क्यों कि किरायेदार मुझे हमेशा 3 साल के बाद किराये में 10% कि वृद्धि का ही उल्लेख कर देता है।

समाधान-

क्या आप बता सकते हैं कि आप ने किरायानामा केवल 11 माह की अवधि का ही क्यों कराया? और बाद में तीन साल और किराया वृद्धि की बात क्यों अंकित कर दी गयी? इस का जवाब आप को पता नहीं, बस सब लोग 11 माह का किरायानामा लिखाते हैं तो आपने  भी लिख दिया। सड़क पर, अदालत के आसपास अनेक टाइपिस्ट अपनी मशीनें कम्प्यूटर लिए बैठे हैं, उन के पास किराएनामे के ड्राफ्ट हैं। आप भी उन के पास गए और टाइप करवा लिया तथा नोटेरी से अटेस्ट करवा कर काम पूरा कर लिया। भाई जब पहली बार किरायानामा लिखवा रहे थे तो किसी ढंग के वकील से बात करते। एग्रीमेंट में अंकित एक एक शब्द का अर्थ समझने की कोशिश करते तो यह परेशानी नहीं होती।

ग्यारह मार का किरायानामा मात्र इस कारण लिखाया जाता है कि एक वर्ष का होते ही किरायानामा उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत कराना जरूरी हो जाता है वर्ना उसे साक्ष्य में पढ़ने योग्य नहीं समझा जाता है। उस पर स्टाम्प ड्यूटी भी अधिक लगती है। इन सब से बचने के लिए किरायानामा 11 माह का लिखाया जाता है। फिर यह किरायानामा तो 11 माह के बाद समाप्त हो गया। उस के बाद से वह किराएनामे के कारण नहीं बल्कि किराया कानून के कारण किराएदार है। किराया कानून में यह अंकित है कि किराया बाजार दर के अनुसार कराने  के लिए दावा किया जा सकता है और न्यायालय किराया निर्धारित कर सकता है।

आप को चाहिए कि आप किसी स्थानीय वकील से सलाह ले कर किराया बढ़ाने के लिए वाद संस्थित करें। और इस काम में जल्दी करें क्यों कि किराया उसी तारीख से बढ़ाया जाएगा जिस तारीख को आप वाद न्यायालय में प्रस्तुत कर देंगे।

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माता-पिता व वृद्धों के भरण पोषण का कानून

August 3, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

hinduwidowसमस्या-

शीला देवी ने जबलपुर म.प्र. से पूछा है-

मेरी बेटी और दामाद मेरे मकान में कब्जा कर के बैठ गये हैं। ना तो किराया देते हैं ना मकान खाली करते हैं। जब कि मकान मेरे नाम पे है। मेरे पति का देहान्त 1986 में हो गया था। किराए से ही गुजारा चलता था। वो भी ये लोगों ने बन्द कर दिया। मेरा बेटा हैदराबाद में रहता है।

समाधान-

प ने यह नहीं बताया कि आप के बेटी दामाद ने किस तरह आप के मकान में कब्जा किया है? क्या वे किराएदार के बतौर मकान में रहे थे? क्या उन का किरायानामा लिखा गया था। क्या उन्हों ने कभी किराया दिया और आप ने रसीद दी, क्या किसी रसीद पर आप की बेटी या दामाद के हस्ताक्षर हैं? इन तथ्यों के बिना सही उपाय बताया जाना संभव नहीं है। यदि आप दस्तावेजी रूप से यह साबित करने में सक्षम हों कि वे किराएदार की हैसियत से वहाँ निवास कर रहे थे तो आप न्यायालय में उन के विरुद्ध बकाया किराया और बेदखली के लिए वाद प्रस्तुत कर सकती हैं।

यदि ऐसा नहीं है तो आप माता पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण अधिनियम 2007 तथा उस के अंतर्गत बने मध्यप्रदेश के नियम 2009 के अन्तर्गत अपनी बेटी-दामाद तथा पुत्र के विरुद्ध भरण पोषण के लिए आवेदन इस अधिनियम के अन्तर्गत स्थापित अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। इस के लिए आप जिला न्यायालय परिसर में स्थापित विधिक सहायता केन्द्र में स्थापित कानूनी समस्या क्लिनिक से भी सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

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