विभाजन Archive

समस्या-

अब्दुल्लाह ने इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश से उत्तर प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी तीन भाई हैं और शुरु से साथ रहते आये हैं। अब वो अलग हुये तो एक भाई ने जो सबसे बड़ा है जमीन के कुछ हिस्से पर बराबर न लेकर ज्यादा कब्ज़ा कर लिया है। अब पहले की जमीन है न उनके पास किसी तरह का कागज है न हमारे पास। पीढी दर पीढी ऐसे ही चला आ रहा था। क्या पिताजी अपने हिस्से की सही जमीन पा सकते हैं? और जो अभी कब्जे में है उसकी रजिस्ट्री कैसे कराई जाये?

समाधान-

क लंबे समय से कब्जा अचल संपत्ति के स्वामित्व का सब से प्राथमिक और मजबूत सबूत है। इस कारण संपत्ति के स्वामित्व का दस्तावेज न होने से परेशान नहीं हों। बंटवारा आपस में हुआ है इस कारण उस का पंजीकृत होना जरूरी है। यदि नहीं होता है तो बाद में कभी भी समस्या आ सकती है। इस कारण पहली जरूरी बात तो यह है कि आप के पिता व उन के भाइयों के बीच बंटवारा विलेख लिखा जा कर उसे पंजीकृत करा लिया जाए। बंटवारा विलेख की दो अतिरिक्त प्रमाणित प्रतियाँ प्राप्त कर शेष दो भाई रख लें। इस तरह संपत्ति का एक पंजीकृत दस्तावेज हासिल हो सकता है। यह कर लेना चाहिए।

आप के पिता को जमीन कम मिली है इस से केवल आपको ही असंतोष है या आप के पिता को भी है। साझे में कई बार बंटवारे के समय जो थोड़ा बहुत हिस्सा जो कम अधिक होता है उस का कोई न कोई कारण होता है। एक ही जमीन के एक हिस्से की कीमत कम और दूसरे की अधिक होती है। पहले इस का कारण पता कर लें। यदि फिर भी लगता है कि गलत हो रहा है तो बंटवारे का वाद दाखिल करें। बंटवारा कानून के अनुसार हो जाएगा।जब बंटवारे की डिक्री होगी तब संपत्ति के संबंध में एक दस्तावेज भी हो जाएगा।

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विक्रय निरस्त करने, विभाजन और पृथक हिस्से के कब्जे का वाद

September 6, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

कल्पना ने फरीदाबाद, हरयाणा से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी ने अपनी पैतृक जमींन अपनी पुत्र वधू के नाम 6 वर्ष पूर्व बेच दी। पिताजी को किसी प्रकार की आर्थिक आवश्यकता नहीं थी तथा पुत्र वधू किसी प्रकार की आय नहीं करती थी। अब मेरे पिताजी और मेरा बड़ा भाई मुझे, मेरे बच्चों व मेरे पति का मान सम्मान नहीं करते व हमें गाली-गालोंज भी करते है। .क्या अब मैं अपना हक/ ज़मीन वापस ले सकती हूँ?  समाज में बेटी के मान-सम्मान का भी प्रश्न है। कृपया राह सुझाएँ।

समाधान-

प पहले जाँच लें कि जमीन पैतृक ही है। कौन सी जमीन पैतृक है जिस में संतानों का जन्म से अधिकार होता है इस पर तीसरा खंबा पर पहले पोस्टें लिखी जा चुकी हैं, उन्हें सर्च कर के पढ़ लें। लड़कियों को 2005 से पैतृक संपत्ति में अधिकार मिला है। आप की जमीन की बिक्री बाद में हुई है। इस तरह आप जमीन के विक्रय को चुनौती दे सकती हैं। इस मामले में लिमिटेशन की बाधा भी नहीं आएगी। यदि पिता किसी संतान का का हक किसी और को दे देता है तो वाद 12 वर्ष तक की अवधि में किया जा सकता है। आप को चाहिए कि आप विक्रय पत्र निरस्त करवाने तथा संपत्ति का बँटवारा कर आप का हिस्सा अलग करते हुए उस का पृथक कब्जा आप को देने का वाद दीवानी न्यायालय में संस्थित करें।

 

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पुश्तैनी जमीन में आप का हक है, बँटवारे का वाद संस्थित करें।

August 30, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

वर्षा देवी ने रानीवाड़ा, जालोर राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मैं विवाहित हूँ, हम दो बहन और तीन भाई हैं। पिता भी जीवित हैं। हाल में मेरे पिता के यहाँ रहती हूँ और पिताजी ने मुझे उनकी जमीन पर मकान बंनाने की इजाजत दी थी तो मैं ने उनकी ही जमीन पर मकान बना दिया है और लाइट भी उनके नाम से ही ली थी। मेरे पास में कोई दस्तावेज भी नहीं है। अब मेरे पिताजी और मेरे भाइयो से अनबन चल रही है। मेरे पिता और भाई सब मिल कर मकान खाली करने को बोल रहे हैं और कई बार तो बवाल भी कर् चुके हैँ। अभी मेरी बेटी की 29/6/2017 को शादी थी तो गणेश पूजा के दिन ही सब मेहमानों के सामने घर बुला के मार पीट भी की है, मेरे पति के साथ और पुलिस भी बुलवाई थी फ़ँसाने को। उनकी ये साजिश थी वो नाकाम हो गई। फिर मैंने शादी के बाद पुलिस में रिपोर्ट की मगर कोई कार्यवाही नहीं हुई पैसो के बल पर। मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की भी धमकी देते हैँ।  अब मुझे क्या और कैसे करना होगा जो मेरा परिवार शान्ति से रह पाये। रही बात जमीन की मेरे पिताजी के पिताजी के पिताजी से मिली थी अब मेरे साथ इतना सब कुछ हो गया है सब रिश्तों की हत्या हुई है तब मैंने अपना हक माँगा तो मेरे पिता ने सारी सम्पति मेरे तीन भाइयों को दान पत्र कर दी है और रजिस्ट्री और नामांतरण भी कुछ दिन पहले हो गया है। अब मुझे मेरा हक कैसे मिलेगा कैसे ले सकती हूँ अब मुझे क्या करना होगा कृपिया उचित सलाह दें।

समाधान-

प के पिता की समूची जमीन पुश्तैनी है और उस जमीन में आप का भी हक 2005 से कानून के माध्यम से बन गया है। आप उक्त दानपत्र को चुनौती दे कर निरस्त करवाने की कार्यवाही कर सकती हैं तथा समूची जमीन और उस पर निर्मित संपत्ति के बंटवारे का वाद संस्थित कर सकती हैं। यह वाद संस्थित करने साथ ही आप जिस जमीन पर कब्जे में हैं, मकान बना रखा है उस जमीन पर अपने पिता, तीनों भाई और उन के बच्चों के विरुद्ध आप के कब्जें में दखल देने, धमकाने मारपीट का प्रयास करने आदि के विरुद्ध स्टे प्राप्त कर सकती हैं।

इस के बाद भी पिता या भाई वगैरह धमकी या मारपीट करने जैसी अपराधिक कार्यवाही होने पर पुलिस को रिपोर्ट कर सकती हैं। पुलिस कार्यवाही न करे तो एस पी को शिकायत करें और उस के एक दो दिन में ही न्यायालय में अपना परिवाद प्रस्तुत करें।

 

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विधवा और उस की पुत्री को विभाजन कराने का अधिकार है।

August 15, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

सौरव ताया ने रसीना, कैथल, हरियाणा से समस्या भेजी है कि-

20 दिन पहले मेरे भाई की मौत हो गई है और अब से 2 साल पहले मेरे पापा की मौत हो गई थी। मेरे भाई की शादी को 2 साल 6 माह हो गए है। क्या उसकी पत्नी और डेढ़ साल की बेटी का उनकी सम्पत्ति पर अधिकार है? जबकि उनके पास मेरे भाई के नाम सहित कोई भी दस्तावेज नहीं है और मेरे पिता के बाद उनकी सम्पति का बंटवारा नहीं हुआ। उन की संपत्ति अपने आप मेरी मां और हम 3 भाईयों के हिस्से में आ गई थी। भाभी हमारे घर रहना नहीं चाहती और ना ही अपनी बेटी को छोड़ रही है।

समाधान-

प के पिता के देहान्त के उपरान्त पिता की संपत्ति के चार हिस्सेदार हुए आप तीन भाई और माँ। इस संपत्ति में एक हिस्सा आप के मृत भाई का था। जेसै आप के पिता की संपत्ति आप चारों के नाम अपने आप आ गयी थी, उसी तरह आप के भाई के हिस्से की संपत्ति उस की पत्नी और बेटी के नाम आ चुकी हैं।

आप की भाभी आप के साथ नहीं रहना चाहती तो यह उन की मर्जी है उन्हें साथ रहने को बाध्य नहीं किया जा सकता। डेढ़ वर्ष की उन की बेटी उन की जिम्मेदारी है, वह उन के साथ ही रहेगी जब तक वह वयस्क हो कर उस का विवाह नहीं हो जाता।

आप की जिस संपत्ति में ¼ हिस्सा आप की भाभी व भतीजी का है वे उस हिस्से को प्राप्त करने की अधिकारी हैं। आप स्वैच्छा से दें तो ठीक अन्यथा आप की भाभी विभाजन का वाद संस्थित कर के भी अपना हिस्सा अलग प्राप्त कर सकती हैं।

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बँटवारा कैसे किया जाए?

August 13, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

नटवर साहनी ने गोबरा नवापारा, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

क्या पैतृक सम्पति का बँटवारा करवाने पर बटवारा करने वाला जीवित न रहने पर मान्य रहता है?  क्या बटवारा नामा बिना पंजीकृत मान्य रहता है? क्योंकि वह पंजीकृत करवाने में असहाय है।

समाधान-

किसी भी साझी संपत्ति का बँटवारा आपसी सहमति से हो सकता है। यदि साझीदार या परिवार किसी एक व्यक्ति के द्वारा सुझाए गए बंटवारे पर सहमत हों तो वैसे भी किया जा सकता है। पर सभी साझीदारों की सहमति जरूरी है। एक बार बँटवारा हो जाने पर और सब के अपने अपने हिस्से पर काबिज हो जाने पर एक लंबे समय तक स्थिति वैसे ही बने रहने पर उस बँटवारे को चुनौती देना संभव नहीं होता है।

यह बँटवारा मौखिक हो कर बँटवारे के अनुसार संपत्ति का कब्जा सब को मिल जाने पर उस का निष्पादन हो जाता है। बँटवारे के कुछ समय बाद चाहेँ तो सारे साझीदार बँटवारे का स्मरण पत्र लिख कर उस पर सभी के हस्ताक्षर और गवाहों के हस्ताक्षर करवा कर उसे नौटेरी से प्रमाणित करा कर रख सकते हैं इसे भविष्य में किसी भी  मामले में साक्ष्य में प्रस्तुत किया जा सकता है।

बँटवारा यदि लिखित में होता है तो उस का पंजीकृत होना आवश्यक है, यदि वह पंजीकृत न हुआ तो भविष्य में साक्ष्य में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में उस दस्तावेज का कोई महत्व नहीं रह जाता है।

बेहतर यह है कि बँटवारा पंजीकृत हो। यदि नहीं होता है तो बँटवारा मौखिक हो और बँटवारे के मुताबिक संपत्ति पर पृथक पृथक कब्जे दे दिए जाएँ और उस के बाद बँटवारे का स्मरण पत्र नौटेरी से निष्पादित करा लिया जाए तो वह पर्याप्त है।

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समस्या-

मोहम्मद जीशान ने सीतापुर, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

क घर का बैनामा है, उस पर ६ लोगो के नाम अंकित हैं। परन्तु ५ लोग उस मकान में १३ सालों से नहीं रह रहे हैं। अब वो ५ लोग अपना हिस्सा बेचना चाहते हैं। जिसका छठा हिस्सा है वो जबरदस्ती कब्ज़ा किये है, कृपया बेचने के लिए कानूनी हल बताएँ।

समाधान-

किसी भी संयुक्त संपत्ति के सारे साझेदार मिल कर आपसी सहमति से ही पूरी संपत्ति को विक्रय कर सकते हैं या फिर एक या एक से अधिक साझेदार उस संपत्ति में अपना हिस्सा विक्रय कर सकते हैं। यदि उन के पास कब्जे में संपत्ति का कोई भाग हो तो उस का कब्जा दे सकते हैं। इस तरह करने पर खरीददार को उस संपत्ति के एक भाग पर कब्जा मिल जाता है तथा पूरी संपत्ति के उतने हिस्से का वह साझीदार हो जाता है जितने हिस्से उसने खरीदे हैं। यहाँ समस्या यह आती है कि इस तरह के विक्रय में खरीददार नहीं मिलता। खरीददार को अपने हिस्सा अलग करने के लिए बंटवारे का मुकदमा करना पड़ता है।

आप के मामले में जिस के पास कब्जा है वह मकान बेचना नहीं चाहता। जो बेचना चाहते हैं उन के पास कब्जा नहीं है। बिना कब्जे के कोई हिस्सा खरीदने को तैयार नहीं होगा। वैसी स्थिति में बेचने के इच्छुक साझीदारों को बंटवारे का दावा करने तथा अपने हिस्से का कब्जा दिलाने के लिए दावा करना होगा और बंटवारा कराना होगा। एक बार बंटवारे की प्राथमिक डिक्री पारित होने पर अंतिम डिक्री पारित करने के दौरान वे चाहें तो छठे व्यक्ति का हिस्सा खरीद सकते हैं और पूरी संपत्ति के स्वामी हो जाने पर संपत्ति विक्रय कर सकते हैं।

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नामान्तरण सही समय पर कराएँ जिस से गलफहमियाँ न पनपें।

July 29, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

राकेश कुमार ने ग्राम पोस्ट माकतपुर जिला कोडरमा, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मेरी फुआ (गुंजारी देवी) शादी के तुरंत बाद बिना कोई औलाद के बल बिधवा हो गई। मेरी फुआ अपने पति की मृत्यु के बाद अपने मायके में अपने भाई भतीजों के साथ रहने लगी। प्रश्नगत भूमि को राज्य सरकार द्वारा गुंजारी देवी के नाम से बंदोबस्ती वाद संख्या 14/75-76 के माध्यम से 1.40 डी (गैर मजरुआ खास) जमीन बंदोबस्त किया गया एवं सरकारी लगान रसीद गुंजारी के से कट रहा है गुंजारी देवी को प्राप्त भूमि जिला निबंध, कोडरमा के कार्यालय से दान पत्र संख्या 7252 दिनांक 09/06/1986 के माध्यम से अपने भाई एवं भतीजों के नाम से कर दिया।  जो आज तक गुंजारी देवी के नाम से रसीद कटवाते आ रहे हैं उक्त जमीन पर माकन दुकान एवं कुआं बनाकर रहते चले आ रहे हैं | गुंजारी देवी की मृत्यु सन 1993 में हो गई। गांव के कुछ लोगों का कहना है की गुन्जरी देवी को वारिस नहीं होने के कारण उनकी मृत्यु के बाद यह जमीन सरकार के खाते में वापस चली गई इसलिए इस जमीन को हम लोग सामाजिक कार्य के लिए उपयोग करेंगे। क्या गावं वालों का आरोप सही है? क्या ऐसा संभव है? उक्त जमीन पर अपनी दावेदारी मजबूत कैसे करें?

समाधान-

गाँव वालों का आरोप सही नहीं है पर इस आरोप के पीछे गलती गाँव वालों की नहीं गुञ्जारी देवी के भाई भतीजों की है। जंगल में मोर नाचता है तो कोई नहीं देखता। जब शहर गाँव में नाचता है तो लोग देखते हैं और कहते हैं आज मोर नाचा है। गुञ्जारी देवी ने दान पत्र अपने भाई भतीजों के नाम निष्पादित कर रजिस्टर कराया तो उस का नामान्तरण राजस्व रिकार्ड में होना चाहिए था। इस नामान्तरण के न होने से राजस्व रिकार्ड में आज भी भूमि गुञ्जारी देवी के नाम है। यदि उस रिकार्ड को देख कर गाँव के लोग आरोप लगाते हैं और जमीन को सार्वजनिक काम में लेने के लिए कहते हैं तो वे गलत कैसे  हो सकते हैं। सही समय पर नामान्तरण न होने से अनेक गलतफहमियाँ उत्पन्न होती हैं।

अब इस समस्या का निदान यह है कि उक्त पंजीकृत दान पत्र के आधार पर नामान्तरण के लिए आवेदन करें और नामान्तरण कराएँ जब राजस्व रिकार्ड में यह जमीन गुञ्जारी देवी के खाते में आ जाएगी तो गाँव वाले अपने आप यह आरोप लगाना बंद कर देंगे। वैसे भी जब गाँव को सार्वजनिक कार्यों के लिए भूमि की जरूरत हो और भूमि उपलब्ध न हो तो सार्वजनिक कार्यों के लिए उपलब्ध होने वाली भूमि पर उन की निगाह रहेगी। इस कारण तुरन्त नामान्तरण कराया जाना जरूरी है।

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समस्या-

वत्सला कुमारी ने पटना, बिहार से  समस्या भेजी है कि-

म लोग तीन बहन और एक भाई है। तीनों बहन औार भाई की शादी हो चुकी है। भाई का एक बेटा है। एक बहन की एक बेटी है। एक बहन की कोई संतान नहीं है। हमारे दो संतान है, एक बेटा और बेटी है। हमारे दादा जी के दो मकान हैं। एक मकान जिला-पटना, राज्य-बिहार में है जो पटना पीपुल्स कॉपरेटिव से सन् 1968 में खरीदी गई थी, और दूसरा मकान जिला-मुंगेर, राज्य-बिहार में है जो सन् 1969 में मेरे दादा जी ने अपने भाई से खरीदा था जो खास महल की जमीन पर बनाया हुआ है। मेरे दादा जी को एक ही संतान मेरे पिताजी थे। मेरे दादा जी का देहांत सन 1983 में, पिताजी का देहांत सन 1999 में तथा मेरे माता जी की देहांत सन 2017 में हुई। मेरे भाई ने पिताजी की देहांत के बाद पटना के मकान जो पिपुल्स कॉपरेटीव में हैं बिना किसी सूचना के अपना नाम सन् 2000 में अपना नाम से करबा लिया। उक्त मकान का विभाजन किस प्रकार किया जा सकता है। मेरा भाई दोनों मकान पर अपना दावा करता है। क्या उक्त मकान पर हमारा अधिकार है?

समाधान-

दोनों मकान आप के दादा जी ने 1956 के बाद खरीदे थे। आप के दादाजी और पिता जी की संपत्ति का उत्तराधिकार हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-8 के अनुसार तय होगा। आप के दादाजी के देहान्त के बाद यदि दादी जीवित रही होंगी तो इन दोनों मकानों के दो हिस्सेदार आप के पिता और आप की दादी हुईं। दादी के देहान्त के बाद केवल आप के पिता उस के स्वामी हुए। अब पिता के तीन बेटियाँ और एक पुत्र है। माताजी का देहान्त भी हो चुका है। ऐसी स्थिति में तीनों पुत्रियाँ और एक पुत्र कुल संपत्ति के ¼ एक चौथाई हिस्से के स्वामी हैं। बंटवारा होने पर चारों को बराबर के हिस्से प्राप्त होंगे।

आप ने लिखा है कि भाई ने मकान अपने नाम करा लिया है। तो अधिक से अधिक यह हुआ होगा कि भाई ने नगर पालिका या नगर निगम में नामान्तरण करवा लिया होगा। लेकिन नामान्तरण से किसी अचल संपत्ति का स्वामित्व निर्धारित नहीं होता है। आप के पिता के देहान्त के साथ ही संपत्ति चारों संतानों की संयुक्त हो चुकी थी। चारों का यह स्वामित्व केवल किसी स्थानान्तरण विलेख ( विक्रय पत्र, दानपत्र, हकत्याग पत्र) आदि के पंजीयन से ही समाप्त हो सकता है अन्यथा नहीं। इस तरह सभी संतानें एक चौथाई हिस्से की अधिकारी हैं।

हमारी राय है कि आप को आप के पिता की समस्त चल अचल संपत्ति के विभाजन के लिए वाद संस्थित कर देना चाहिए। यह वाद पटना या मुंगेर दोनों स्थानों में से किसी एक में किया जा सकता है। आप पटना रहती है  तो वहाँ यह  वाद संस्थित करना ठीक रहेगा। इस काम में जितनी देरी करेंगी उतनी ही देरी से परिणाम प्राप्त होगा। इस कारण बिना देरी के यह काम करें।

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समस्या-

राजीव गुप्ता ने सकरा, मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार से समस्या भेजी है कि-

मेरे दादा के नाम से कुछ ज़मीन और मकान की ज़मीन है, मगर सारी पुश्तैनी है। मेरे पापा 4 भाई हैं दादा गुज़र चुके हैं मेरे पापा ओर चाचा को ज़मीन घर बनाने के लिए मौखिक रूप से बाँट दिया गया। हम सबका 20 साल से मकान पर समान रूप से क़ाबिज हैं। दिल्ली में भी ह्मारा 1 मकान है जो मेरी माँ के नाम है मेरे छोटे चाचा ने उसपर दावा किया था। लेकिन हम केस जीत गये अब चाचा और दादी मिलकर उस मकान का बदला लेने के लिए गाँव की ज़मीन चाचा के नाम करना चाहती है। क्या मेरी दादी का भी मेरे दादा की पुश्तैनी ज़मीन में अधिकार है? वो ऐसा बदला लेने के लिए कर रही है। एक बात और ह्मारा मकान पर 20 सालों से क़ब्ज़ा तो है मगर ज़्यादा प्रूफ सर्टिफिकेट नहीं हैं। चुनाव का पहचान पत्र, ओर स्कूल सर्टिफिकेट हैं। हम दादी का पूरा खर्च उठाने को भी तैयार हैं, मगर वो अब तैयार नहीं है। इससे पहले 20 साल तक हमने ही उनकी सेवा की है। क्या हमें अब मकान बनाने के बाद इस में से दादी को हिस्सा देना होगा?

समाधान-

दि आप के गाँव की संपत्ति पुश्तैनी है तो उस में दादी का हिस्सा तो अवश्य है। लेकिन पुश्तैनी संपत्ति में जिसे वास्तव में सहदायिक संपत्ति कहा जाता है। पुरुष संतानों का जन्म से ही अधिकार होता है, 2005 से पुत्रियों का भी जन्म से अधिकार हो गया है। यदि संयुक्त /सहदायिक संपत्ति में हिस्सेदार की मृत्यु होती है तो उस का उत्तराधिकार वसीयत से अथवा हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार होगा न कि उत्तरजीविता के पुराने नियमों से। इस कारण दादी का उस में हिस्सा है।

आप के पिता का कुछ तो हिस्सा तब भी था जब दादाजी जीवित थे। फिर दादा जी की मृत्यु के समय कुछ हिस्सा उन से उत्तराधिकार में मिला है। इस तरह आप के अधिकार में काफी हिस्सा आ सकता है। दादी का हिस्सा भी बहुत थोड़ा होगा। आप बंटवारे में कह सकते हैं कि आप के पिता को यह जमीन दादा ने मकान बनाने के लिए दी थी।  मकान आप के पिताजी ने अपनी आय से बनाया है। आप यह साबित कर देते हैं कि मकान आप के पिता ने अपनी निजी आय से बनाया है तो बंटवारे में उस का भी ध्यान रखा जा सकता है।

बेहतर तो यह है कि आप इस तरह अंदाज लगाना बंद करें। यदि दादी चाचा के नाम वसीयत करती हैं या दादी बंटवारे का वाद करती हैं तो आप के पिताजी अपने अधिकार के लिए लड़ सकते हैं। बंटवारा भी होता है तो हमारी राय में आप के पिता दादी के आंशिक हिस्से की राशि का भुगतान कर के अपना बनाया हुआ मकान पर अपना पूर्ण स्वामित्व प्राप्त कर सकते हैं।

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समस्या-

ज्ञानेन्द्र कुमार रूँठाला ने जयपुर, राजस्थान समस्या भेजी है कि-

म चार भाई हैं, जिनमें से दो जयपुर में इसी मकान में रहते हैं. पिता का निधन हो चुका है. माता जीवित हैं. पिता ने एक वसीयत बनाई थी जो रजिस्टर्ड नहीं है पर नोटेरी है. एक भाई को मकान का जो हिस्सा दिया गया वो उन्हें पसंद नहीं है. बाकि तीन भाई उनको जो हिस्सा चाहिए, वो देने को तैयार हैं. अब बाकी तीन भाई अपनी ज़मीन पर रिहाइशी बिल्डिंग बनाना चाहते हैं. क्या चौथे भाई स्टे आर्डर ले सकते हैं. यदि हाँ तो किस कारण पर?

समाधान-

प के पिता जी की संपत्ति आप के पिता की मृत्यु के साथ ही संयुक्त संपत्ति हो गयी है। आप के पिता की जो वसीयत है वह केवल इस कारण से खारिज नहीं मानी जा सकती कि वह नोटेरी है। उस का प्रोबेट कराया जा सकता है। आप ने यह नहीं बताया कि उस वसीयत में क्या अंकित है?

आप के पिता के देहान्त के बाद आप चार भाई, आप की माँ और यदि कोई बहिन हो तो वह सब पिता की छोड़ी हुई संपत्ति में हिस्सेदार हैं। सभी हिस्सेदारों के बीच संपत्ति का बंटवारा विधिक रूप से होना चाहिए। यह या तो आपसी समझौते से हो और फिर उस पर सभी हिस्सेदारों के हस्ताक्षर हो कर वह उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत करवा लिया जाए। या फिर बंटवारा न्यायालय के माध्यम से हो। पंजीयन में खर्च अधिक होने के कारण लोग यह सूरत निकाल लेते हैं कि बंटवारा मौखिक हो गया था और अब कुछ सप्ताह, माह या वर्ष के बाद उस का मेमोरेंड़म लिखा गया है। इस मेमोरेंडम ऑफ पार्टीशन को नोटेरी करा लें। बंटवारा हुए बिना किसी भी एक हिस्सेदार को छोड़ कर संयुक्त संपत्ति के किसी हिस्से का विकास करना हमेशा ही संकटग्रस्त हो सकता है। कोई भी हिस्सेदार न्यायालय जा कर स्टे ला सकता है।

इन सारी परिस्थितियों में हमारी राय है कि आप सभी हिस्सेदार पहले विधिपूर्वक बंटवारा कर लें, उस के बाद जो करना हो सो करें।

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