संपत्ति Archive

समस्या-

मेरे दादाजी तीन भाई है और उन सभी ने क़ानूनी रूप से कोई बँटवारा किए बगैर आपसी सहमती से अपनी सुविधानुसार संपत्ति का बँटवारा कर लिया था और अभी तक खसरा नंबर मे भी दादाजी समेत उनके दोनो भाइयो का भी नाम है, दादाजी की दो संतान है एक पिताजी और दूसरी बुआजी, पिताजी ने दो शादियाँ की थी, पहली पत्नी से तीन लड़कियाँ और एक लड़का है सभी लड़कियो की शादियाँ हो चुकी है और मेरा सौतेला भाई और सौतेली माँ दादी और दादाजी के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने चार कमरो के मकान मे रहते है, पिताजी ने पाँच कमरो का मकान  बनवाया था जिसमे से दो कमरे पिताजी ने किराए से दुकान चलाने हेतु गाँव के ही एक व्यक्ति को सन २००५ मे दे दिए थे जिसका किराया दादाजी ही लेते रहे है और आज तक ऐसा ही चल रहा है और बाकी बचे तीन कमरो मे माँ, मैं और मेरा भाई रहते है| पिताजी के देहांत (२०११) के बाद जब हमने किराए से दी हुई दुकान को खाली कराना चाहा तो दादाजी ने आपत्ति करते हुए कहा की ये मेरा मकान है और जब हम चाहेंगे तभी खाली होगा, इसी तरह से जब हमने मकान का विस्तार करना चाहा तब भी उन्होने आपत्ति करते हुए कहा की तुम लोगो का कोई हिस्सा नही है, और अपने जीते जी मै बँटवारा भी नही करूँगा, क़ानूनी रूप से बँटवारा करने के लिए जब हम सरपंच के पास खानदानी सजरा बनवाने के लिए गये तो वहाँ से भी नकारात्मक जवाब मिला, दरअसल दादाजी हम लोगो को ज़मीन – जायदाद मे से कोई हिस्सा ही नही देना चाहते और लोगो के बहकावे मे आकर दादाजी संपत्ति को बिक्री करने की तथा मेरे सौतेले भाई के नाम करने की योजना बना रहे है अगर ऐसा हुआ तो हम लोग सड़्क पर आ जाएँगे, कृपया सलाह दें कि –
 (१) संपत्ति का बँटवारा कैसे होगा|
 (२) क्या हमारे दादाजी की संपत्ति मे उनके दोनो भाइयो का भी हिस्सा है|
 (३) हम किरायेदार से किराए की दुकान को कैसे खाली करवा सकते है |

– प्रदीप कुमार ज़ायसवाल, गाँव – सिहावल, पोस्ट- सिहावल, तहसील – सिहावल, थाना – अमिलिया, जिला- सीधी (मध्य प्रदेश)

समाधान-

प के दादाजी और उन के भाइयों के बीच बँटवारा कानूनी तौर पर नहीं हुआ था। बल्कि उन्होंने परिवार के अंदर एक अन्दरूनी व्यवस्था बना रखी थी। उस के अंतर्गत कुछ लगो कहीं काम करते थे और कहीं रहते थे। बँटवारा आज तक नहीं हुआ आप को बँटवारा कराने के लिए बँटवारे का दीवानी/ राजस्व वाद संस्थित करना होगा।  चूंकि दादाजी व उन के भाइयों के बीच बंटवारा नहीं हुआ था इस कारण संपूर्ण संपत्ति जो तीनों भाइयों की संयुक्त रूप से थी उस का बंटवारा इस बंटवारे में होगा। इस में आप के दादा जी के अतिरिक्त शेष दो दादाजी को जो संपत्ति अलग कर के दी गयी थी उस का भी बंटवारा होगा। यह वाद संस्थित करने के साथ ही संपत्ति का कोई भी हिस्सेदार किसी संपत्ति को बेच कर खुर्दबुर्द न करे इस के लिए अदालत से स्टे प्राप्त किया जा सकता है।

आप के  दादाजी की अलग से कोई संपत्ति नहीं है बल्कि तीनों दादाओँ की संयुक्त संपत्ति है इस कारण तीनों  भाइयों की संपत्ति में तीनों का हिस्सा है।

यदि किराएदार को आप के पिताजी ने दुकान किराए पर दी है तो उस के संबंध में आप के पिता ही लैंडलॉर्ड माने जाएँगे और वे दुकान खाली कराने के लिए दीवानी न्यायालय में दावा संस्थित कर सकते हैं।

आप को किसी स्थानीय वकील को सभी दस्तावेज दिखा कर परामर्श प्राप्त कर के तुरन्त कार्यवाहियाँ करनी चाहिए।

 

 

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माँ के पूर्व पति की संपति में हिस्सा।

August 17, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

 

समस्या-

ब कोई विधवा स्त्री अपने पति की मृत्यु के बाद किसी अन्य व्यक्ति के साथ शादी कर लेती है, तो क्या दूसरे पति से जन्मे बच्चे उस स्त्री के पहले पति की संपति में हिस्सा ले सकते हैं? क्या उस पहले पति के लड़के को उस स्त्री के दूसरे पति से जन्मे लड़के को हिस्सा देना पडेगा?

-विजय कुमार, ग्राम दरौली, जिला, सिवान (बिहार)

समाधान-

कोई भी स्त्री विधवा तब होती है जब उस के पति की मृत्यु हो जाए। मृत्यु के साथ ही उस के पति की संपत्ति का उत्तराधिकार तय हो जाता है। यदि उस के पति के एक पुत्र था तो दो उत्तराधिकारी हुए एक पुत्र और दूसरा पत्नी। इस तरह मृत व्यक्ति की संपत्ति में दो लोग हिस्सेदार हो गए।

विधवा स्त्री ने दूसरे व्यक्ति से विवाह कर लिया। उसके वहा और संतानें हो गयीं। उन संतानों का अपनी माँ के पूर्व पति की संपत्ति के उस हिस्से पर कोई अधिकार नहीं है जो उन के सौतेले भाई का है। लेकिन उन की माँ को जो आधा हिस्सा मिला है उस पर उस की मृत्य के उपरान्त पूर्व पति व दूसरे पति से उत्पन्न सभी संतानों को समान उत्तराधिकार मिलेगा।

आप ने अपनी समस्या न पूछ कर केवल एक कानूनी प्रश्न पूछा है। हम आम तौर पर ऐसे प्रश्नों का उत्तर नहीं देते। लेकिन इस तरह की भ्रान्तियों को दूर करने के लिए हम उत्तर दे रहे हैं। सभी पाठको से अनुरोध है कि हमें समस्या भेजें तो हम समाधान कर पाएंगे। कानूनी प्रश्नों का जवाब पाने के लिए किसी दूसरे साधन का उपयोग करें या फिर खुद कानून का अध्ययन करें।

समस्या –

क अचल संपत्ति मकान जिसकी रजिस्ट्री वर्तमान में मेरी दादी के नाम पर है एवं मेरी दादी का स्वर्गवास वर्ष 2009 में हो चुका है एवं मेरे दादा जी का भी स्वर्गवास वर्ष 2002 में हो चुका है।  मेरी दादी की चार संतानें जिसके अंतर्गत मेरे पिताजी, मेरे ताऊजी एवं मेरी दो बुआजी (पिताजी की बहनें) हैं एवं मेरे पिताजी की दो संताने जिसके अंतर्गत मैं स्वयं एवं मेरी बहन शामिल है एवं मेरी स्वयं की चार संताने जिसके अंतर्गत मेरे चार पुत्र हैं।  मेरे ताऊजी की तीन संताने जिसके अंतर्गत ताऊजी का एक पुत्र और दो पुत्रियाँ हैं एवं ताऊजी का जो पुत्र है उसकी भी चार संतानें जिसके अंतर्गत उसके चार पुत्र हैं। अब सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि उपरोक्त वर्णित अचल संपत्ति मकान में उपरोक्त वर्णित सभी सदस्यों में से कौन-कौन कानूनी रूप से हिस्सेदार हैं। उपरोक्त वर्णित अचल संपत्ति मकान में उक्त वर्णित मेरी दोनों बुआजी की संतानें भी क़ानूनन भागीदार है क्या? उपरोक्त वर्णित अचल संपत्ति मकान में उक्त वर्णित मेरे ताऊजी की दोनों बेटियों की संतानें एवं मेरी बहन की संतानें भी कानूनन भागीदार हैं क्या? उपरोक्त लिखित समस्या के प्रत्येक बिन्दु पर विस्तृत जानकारी देने का आभार करें।

– अभिषेक बंसल, तहसील व जिला ग्वालियर, मध्यप्रदेश

समाधान-

कान का स्वामित्व आप की दादी का था। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 14 के अंतर्गत यह उपबंध है कि किसी भी हिन्दू स्त्री की संपत्ति उस की एब्सोल्यूट संपत्ति होती है। अर्थात उस में कोई भागीदार नहीं होता। इस कारण आप की दादी के नाम की यह संपत्ति पुश्तैनी संपत्ति नहीं है।

आप की दादी के देहान्त के उपरान्त अधिनियम की धारा 15 के अंतर्गत इस संपत्ति का उत्तराधिकार खुला है। धारा 15 में किसी भी स्त्री की संपत्ति के उत्तराधिकारी प्रथमतः उस स्त्री के पुत्र पुत्री व पति हैं। आप के दादाजी का देहान्त पूर्व में ही हो चुका है। इस कारण से आप की दादी की उक्त संपत्ति के उत्तराधिकारी उन के पुत्र अर्थात आप के पिता, आप के ताऊजी और आप की बुआएँ हुई हैं। सभी एक चौथाई हिस्से के अधिकारी हैं। जब तक ये चारों जीवित हैं इस संपत्ति पर किसी भी अन्य व्यक्ति का कोई अधिकार नहीं है। इन चारों में से किसी की मृत्यु हो जाने पर उस के हिस्से का उत्तराधिकार खुलेगा जो कि या तो उस व्यक्ति की वसीयत के अनुसार होगा और यदि कोई वसीयत नहीं की गयी तो पुरुष के मामले में उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-8 से तथा स्त्री होने पर धारा-15 के आधार पर खुलेगा। यदि इन चारों में से कोई हिस्सेदार चाहे तो बंटवारा करवा सकता है, या बिना बंटवारे के अपने हिस्से को विक्रय कर सकता है।

अपनी संपत्ति की सुरक्षा नहीं करेंगे तो उसे खो बैठेंगे।

August 12, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मैंने अपना मकान किराए पर दुकान चलाने के लिए दिया था।  आपसी सहमति के कारण कोई एग्रीमेंट नहीं लिखा गया था।  किराएदार लगभग 8 साल से रह रहा है।  4 साल का किराया नहीं दिया है। किराया मांगने पर किराया नहीं दे रहा है।  कहने पर दुकान खाली नहीं कर रहा है।  उसके पास कोई भी कागजी तौर पर सबूत नहीं है। उल्टा फर्जी जाकर कोर्ट में मुकदमा कर दिया है कहता है मकान मैंने बनवाया है। किराएदार के पास कोई भी लिखित प्रमाण नहीं है कि मैंने यह रूम किराए पर लिया है।  जबकि मकान मालिक के नाम (बिजली ,मकान नक्शा ,खतौनी, नगर पालिका टैक्स रसीद) है।  किरायादार जो किराया देता था वह भी रसीद काट कर नहीं  देता था। किराएदार पूर्ण रूप से इन लीगल तरीके से रह रहा है। क्या इसे पुलिस की मदद से हटाया जा सकता है ?  कृपया इस समस्या का हल बताए।

-वासदेव चौधरी, गाँव – बिहरा पोस्ट – ऊँचगाव  जिला – बस्ती  उत्तर प्रदेश

समाधान-

प जिस मुसीबत में फँसे हैं वह आप की खुद की मूर्खता और काहिली का सबूत है। पहले जब मकान किराए पर दिया तब आप को कम से कम उस से यह लिखाना चाहिए था कि वह मकान किराए पर ले रहा है। किरायानामा लिखने का प्राथमिक उद्देश्य यही होता है कि किराएदार की स्वीकृति मकान मालिक के पास रहे कि वह उस मकान पर बहैसियत किराएदार ही काबिज है। यदि यह होता तो आप को परेशानी नहीं होती।

आप ने किरायानामा नहीं लिखवाया और चार साल तक किराया लेते रहे तब उसे चार साल के किराए की रसीद देनी चाहिए थी और उस की काउंटर प्रति पर किराएदार के हस्ताक्षर होने चाहिए थे जिस से आप के पास यह सबूत हो जाता कि वह किराएदार है। आप ने यह भी नहीं किया।

जब चार साल पहले किराएदार ने किराया देना बंंद कर दिया तब आप को उस पर बकाया किराया वसूली का मुकदमा करना चाहिए था। आप ने चार साल तक वह मुकदमा भी नहीं किया।

अब जब वह खुद यह कहते हुए अदालत चला गया है कि मकान उस का खुद का है आप परेशान हो रहे हैं तो गलत क्या है? जो व्यक्ति समय रहते अपने अधिकारों की सुरक्षा नहीं करता वह ऐसे ही अपने अधिकार खो देता है।

आप को सब से पहले यह करना चाहिए कि कोई ऐसा सबूत तलाशना चाहिए जिस से यह साबित कर दें कि किराएदार आप के मकान में किराएदार है। यदि ऐसा कोई सबूत मिल जाता है तो आप किराएदार द्वारा किए गए मुकदमे में अपना बचाव कर सकेंगे। इस के साथ ही आप को पिछले 3 वर्ष के बकाया किराए और डिफाल्ट व व्यक्तिगत जरूरत के आधार पर मकान खाली करने हेतु बेदखली के लिए दीवानी वाद दाखिल करना चाहिए। यह काम आप से साक्षात्कार कर के वकील कर सकता है। इस कारण बेहतर है कि आप अपने यहाँ के बेहतर से बेहतर वकील करें, जो आप को इस मुसीबत से निजात दिला दे। हम ने अपने जीवन में अनेक मामले देखे हैं जिन में मकान मालिक की काहिली के कारण लोग कब्जा कर के खुद मालिक बन बैठे हैं। इस कारण शीघ्रता कीजिए और अच्छा वकील तलाश कर बचाव के साथ साथ बेदखली की कार्यवाही भी कराइए।

समस्या-

मेरे दादाजी की 6 हेक्टेयर जमीन है,और हम उनके जीते जी ही जमीन का नामांतरण कराना चाहते है,पिताजी के नाम पर,या डायरेक्ट मेरे नाम पर। मेरी 2 बुआजी है, तो क्या कर सकते हैं हम? ,और नामांतरण शुल्क तथा वसीयत के बारे में बताएँ।

-अनिल गुर्जर, ग्राम पोखरनी, तहसील टिमरनी, जिला हरदा, मध्यप्रदेश

समाधान-

प का प्रश्न बिना पूर्ण विवरण के है। आपने यह नहीं बताया कि उक्त भूमि आप के दादाजी की स्वअर्जित है या फिर पुश्तैनी है। यदि पुश्तैनी है तो उस में आप के दादाजी का नाम होते हुए भी आप के पिताजी और दोनों बुआएँ भी जन्म से भागीदार हो सकती हैंं। वैसी स्थिति में दादाजी केवल अपने हिस्से की जमीन को ही हस्तान्तरित कर सकते हैं आपके पिता और बुआओँ के हिस्से की जमीन को हस्तान्तरित नहीं कर सकते।

हम यदि यह मान लें कि उक्त भूमि आप के दादाजी की स्वअर्जित है तो उन के जीवनकाल में उक्त भूमि आप के पिता या आप के नाम केवल हस्तान्तरण से ही संभव है। वह विक्रय पत्र या दानपत्र के पंजीकरण से ही संभव है। इस में भूमि के बाजार मूल्य का 7-10 प्रतिशत खर्चा आ सकता है। इस संबंध में आप को अपने उप पंजीयक के कार्यालाय से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। एक बार दान पत्र या विक्रय पत्र का पंजीयन हो जाने पर आप उस के आधार पर नामांतरण करवा सकते हैं।

अत्यधिक कम खर्च मे ंउक्त भूमि को आप के या आप के पिताजी के नाम हस्तांतरित कराने का तरीका यह है कि आप के दादाजी जिस के नाम भी उक्त भूमि को हस्तांतरित कराना चाहते हैं उस के नाम वसीयत कर दें और उस वसीयत को उपपंजीयक के यहाँ पंजीकृत करा लिया जाए। आप के दादाजी के जीवनकाल के बाद आप उस वसीयत के आधार पर नामांतरण करवा सकते हैं। लेकिन दादाजी आपनी वसीयत को अपने जीवनकाल में कभी भी निरस्त कर सकते हैं या बदल सकते हैं।

समस्या-

मेरे पति की असामयिक मृत्यु हो गयी है।  मेरे पति को पैतृक संपत्ति में 4 बीघा जमीन हिस्से में आई थी।  क्या मेरे पति की मृत्यु के बाद मेरा कोई हक उस पैतृक संपत्ति में बनेगा अथवा नही?  मैंने अभी कोई दूसरी शादी नही की है। अगर मेरे मां बाप मेरी दूसरी शादी कर देते हैं तो मेरा पैतृक संपत्ति जो मेरे पति की थी क्या मैं उस पर दावा कर सकती हूँ?

-लता देवी,  2/881 कोर्ट रॉड सहारनपुर

समाधान-

प के पति की जो भी स्वअर्जित संपत्ति थी अथवा पुश्तैनी सहदायिक संपत्ति में जो भी उन का हिस्सा था वह आप के पति की मृत्यु के साथ ही उत्तराधिाकार में आप को प्राप्त हो चुका है। आप उसे प्राप्त करने के लिए दावा कर सकती हैं।

यदि आप दूसरा विवाह करती हैं तो भी आप का इस संपत्ति पर यह अधिकार बना रहेगा। वह आप के विवाह करने से समाप्त नहीं होगा। आप चाहें तो विवाह के बाद भी दावा कर सकती हैं। लेकिन आप को यह दावा समय रहते करना चाहिए। क्यों कि अक्सर ऐसा होता है कि आप दावा करते हैं तब तक दावा करने की कानूनी समयावधि समाप्त हो जाती है और आप दावा करने से वंचित हो सकती हैं। इस कारण आप को चाहिए कि तुरन्त किसी वकील से परामर्श कर के कार्यवाही करें।

पिता के रहते बंटवारे में पिता का भी हिस्सा है।

July 28, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मारे पिता की दो पत्नी थी मेरी माँ का देहांत हो चुका है मेरी शौतेली माँ का एक लड़का है  मेरे पिताजी शौतेली के कहने पर मुझे सम्पत्ति  (4 बिघा खेत और घर) देने से इनकार कर रहे हैं। मुझे1/2 सम्पत्ति चाहिए किन्तु वे 1/3 का बँटवारा कर रहै है। क्या हमें कोर्ट द्वारा 1/2 का भागीदार हो सकते हैं?  उचित जानकारी दे।

RAJU GUPTA
गाँव फुटिया जिला चन्दौली राज्य उत्तरप्रदेश

समाधान-

जिस संपत्ति का बंटवारा किया जा रहा है वह पुश्तैनी संपत्ति है तो उस नें आप के और आप के सौतेले भाई के सिवा आप के पिता का भी हिस्सा है। यदि पिताजी के रहते बंटवारा होता है तो एक हिस्सा पिताजी के पास भी तो रहेगा। इस तरह आप को एक तिहाई हिस्सा ही आप को मिलेगा।  पिता के जीवनकाल के उपरान्त यदि वे अपने हिस्से की वसीयत नहीं करते हैं या अपने जीवनकाल में अपने हिस्से को हस्तान्तरित नहीं करते हैं तो उन के पास के हिस्से का उत्तराधिकार उन के जीवनकाल के बाद खुलेगा। तब आप दोनों सौतेले भाइयों को आधा आधा हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार होगा। अभी आप के पिता जो कर रहे हैं वह सही है।

पिता के जीवित रहते पुश्तैनी संपत्ति का बंटवारा

July 22, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मारे पिता की दो पत्नी थी मेरी माँ का देहांत हो चुका है मेरी शौतेली माँ का एक लड़का है  मेरे पिताजी शौतेली के कहने पर मुझे सम्पत्ति  (4 बिघा खेत और घर) देने से इनकार कर रहे हैं। मुझे1/2 सम्पत्ति चाहिए किन्तु वे 1/3 का बँटवारा कर रहै है। क्या हमें कोर्ट द्वारा 1/2 का भागीदार हो सकते हैं?  उचित जानकारी दे।

RAJU GUPTA
गाँव फुटिया जिला चन्दौली राज्य उत्तरप्रदेश

समाधान-

पुश्तैनी का पिता के रहते बंटवारा किया जाएगा तो आप को तीसरा हिस्सा ही मिल सकता है। पुश्तैनी संपत्ति में  एक हिस्सा पिता के पास भी तो रहेगा। उन के पास के हिस्से का उत्तराधिकार उन के जीवनकाल के बाद खुलेगा। बशर्ते कि उस से पहले वे वसियत नहीं कर जाएँ।

 

बँटवारा गैर खातेदारी की भूमि का भी हो सकता है।

July 1, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

शमीम अहमद ने बीकानेर, राजस्थान से पूछा है-

र्स्ट पार्टी में मेरी माताजी मेरे बडे भाई साहब और दूसरी पार्टी में मेरे चाची और उसके दो बेटों के नाम से सँयुक्त रूप से स्थगन आदेश लगभग 200 बीघा खेती की जमीन का माननीय राजस्व न्यायालय, अजमेर में राजस्थान सरकार उपनिवेशन कार्यालय इंदिरा ग़ांधी नहर के खिलाफ़  चल रहा हैं। यह सारी ज़मीन अभी तक ग़ैरखातेदारी की हैं और इसके खातेदारी के वास्ते ऊपर दिए गए नामों का ही सँयुक्त दावा राजस्व अपील अधिकारी कार्यालय में चल रहा है। अभी तक जमीन की खातेदारी नही मिली है, इसलिए इस पर केवल स्थगन आदेश पर ही हम लोग खेती करते हैं। मेरी समस्या यह है कि इस सारी जमीन पर मेरे चाचा के दोनों लड़को में कब्जा कर रखा है और वो ही खेती कर रहे है। हमे जमीन का एक भी टुकड़ा नही दे रहे है खेती करने के लिए। चूंकि हम गरीब लोग है और अभी बरसात का मौसम चल रहा है तो खेती के लिए हमारे पास किसी भी प्रकार की इसके अलावा जमीन नहीं है।  अब जब तक हमे खातेदारी नही मिलती तब तक हमें हमारा हक ये लोग नहीं देंगे। श्रीमान जी मेरा प्रश्न यह है कि –
1. क्या स्थगन आदेश में भी बंटवारा करवाया जा सकता हैं कानूनी रूप से और क्या स्थगन आदेश में भी बंटवारे के लिए दावा कर सकते है । ऐसा करने के लिए क्या प्रक्रिया है?
2. हमे जब तक खातेदारी नही मिलती है तब तक हम अपना हक उन लोगों सर कैसे ले सकते हैं?
3. स्थगन आदेश में बंटवारा करने पर राजस्व अपील अधिकारी के कार्यालय में चल रहे सयुक्त रूप से खातेदारी के वास्ते दावे पर क्या असर पड़ेगा?

समाधान-

प की समस्या तो समझ में आ रही है पर तथ्य ठीक से समझ नहीं आ रहे हैं। स्थगन िकसी मुकदमे में होता है और यह मुकदमा किस बात का है आप के प्रश्न से स्पष्ट नहीं हो रहा है। फिर भी हम आप के प्रश्नों के उत्तर दे रहे हैं-

  1.  गैरखातेदारी अधिवासी (टीनेंट) भी टीनेंसी एक्ट की धारा 53 के अंतर्गत बंटवारे के लिए वाद संस्थित कर सकते हैं। आप भी अपना बंटवारे, तथा अपने हिस्से का अलग कब्जा दिलाने का दावा पेश कर सकते हैं। इसी दावे में आप पूरी जमीन पर रिसीवर कायम करने के लिए आवेदन दे सकते हैं कि रिसीवर ही उस जमीन पर खेती की देखरेख करें और उस से होने वाले मुनाफे को अपने पास रखे जो बंटवारा होने पर उस के हिसाब से पक्षकारों को दे दिया जाए। इस तरह आप के विपक्षी जो पूरी जमीन पर खेती कर रहे हैं उन की खेती रिसीवर के पास चली जाएगी। आप के पास तो कुछ है नहीं, इस कारण उन पर दवाब आएगा। इस दबाव के कारण वे जमीन का एक हिस्सा आप को खेती करने के लिए दे सकते हैं।
  2. दूसरे प्रश्न का उत्तर भी यही है।
  3. एक बार बंटवारे की डिक्री हो जाए तो आप उस की प्रमाणित प्रति राजस्व अपील न्यायालय में पेश कर सकते हैं और उस का संज्ञान लिया जा कर तदनुरूप वहाँ निर्णय किया जा सकता है।

हमें आप के दोनों चल रहे मुकदमों की प्रकृति के बारे में जानकारी स्पष्ट नहीं है। इस कारण इन उत्तरों को केवल मार्गदर्शक समझा जाए। इस संबंध में आप अपने वकीलों से परामर्श कर के उचित कार्यवाही करें तो बेहतर है।

समस्या-

मखदूमपुर गोमती नगर विस्तार लखनऊ से संतपाल ने पूछा है-

मेरे पिता जी पिता के नाम एक ४ बिस्वा प्लाट है।  पर उस प्लाट मे एक व्यक्ति ३५ साल से घर बनवाकर रह रहा है । अब वह अपना हक बताता है इस स्थिति मे उसे किस प्रकार घर से बेदखल किया जाये।

समाधान-

मारे पास अक्सर आप के जैसे सवाल आते है ंकि हमारी पुश्तैनी, या दादा जी की, या पिताजी की जमीन है उस पर कुछ लोगों ने कब्जा कर के 15, 20, 25, 35 या अधिक वर्ष से मकान बना लिया है या उस पर खेती कर रहे हैं या फिर और कुछ कर रहे हैं।

भाई जब किसी ने आप की जमीन पर कब्जा किया और वहाँ अपना निर्माण या काम करने लगा तब क्या आप सोए हुए थे? और फिर उस के बाद अभी तक 12-13 या उस से अधिक सालों से क्या आप और आप के तमाम परिवार वाले सोए रहे? आपने सुना होगा कि सोते रहने वाले सब कुछ खो देते हैं।

आप बताइए कि आप की सम्पत्ति पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है लेकिन संपत्ति अभी तक आप के स्वामित्व की है तो आप को चाहिए क्या? आप उस का कब्जा ही तो वापस लेना चाहते हैं? यदि आप कब्जा वापस लेना चाहते हैं तो आप को अचल संपत्ति के कब्जे के लिए वाद संस्थित करना पड़ेगा। वैसी स्थिति में कब्जा आप के हाथ से निकल जाने की तिथि से केवल 12 वर्ष की अवधि में आप ऐसा कर सकते हैं।  इस से अधिक अवधि हो जाने पर आप का अचल संपत्ति के कब्जे का वाद इसलिये खारिज हो जाएगा कि आप ने दावा करने की निर्धारित अवधि में यह दावा पेश नहीं किया।

आप सभी इसे ठीक से पढ़ लें, और हमें ऐसे सवाल न भेजें जिन में आप अपनी अचल संपत्ति पर 12 वर्ष से पहले हो चुके कब्जे को वापस लेना चाहते हों। हम आज के बाद से इस तरह के सवालों का कोई उत्तर नहीं देंगे।

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