सूचना का अधिकार Archive

सचाई साबित करने के लिए जिरह (Cross Examination) का प्रयोग करें।

December 28, 2012 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित
समस्या-

गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश से सतीश कुमार जानना चाहते हैं –

मेरे और मेरी पत्नी के मध्य वैवाहिक मतभेद विवाह के पश्चात से ही चल रहे हैं। जिस सम्बन्ध में मैं ने तलाक हेतु एक वाद परिवार न्यायालय में डाल रखा है और मेरी पत्नि ने मेरे विरूद्ध दहेज मांगे जाने के लिये एक परिवाद कर रखा है।  जिसमें मेरी पत्नी द्वारा वर्ष 2011 तक मेरे साथ रहना दिखाया गया है जबकि लगभग 3 वर्षो से मैं व पत्नी साथ साथ नहीं रह रहे हैं।  मेरी पत्नि अपने मायके में ना रहकर नौएडा में किसी स्थान पर रह रही है।  साक्ष्य छुपाने की नियत से  वह किसी और की आई.डी. का मोबाईल नम्बर इस्तेमाल कर रही है।  मैं मोबाईल के माध्यम से उसकी लोकेशन पता चलाना चाहता हूँ।  परन्तु मोबाईल किसी और के नाम होने पर पत्नि इस बात का फायदा उठा सकती है कि यह मोबाईल उसका नहीं है। और ना ही यह कॉल डिटेल उसकी है। उक्त परिस्थिति में मैं किस प्रकार अपनी पत्नी के नौएडा में रहने सम्बन्धी जानकारी सर्विलान्स के माध्यम से प्राप्त कर सकता हूँ?

समाधान-

cross examinationप इंटरनेट पर सर्च कर के उस मोबाइल नं. का राज्य व कंपनी पता कर सकते हैं।  फिर उस कंपनी को आप लिख सकते हैं कि इस नंबर से मेरी पत्नी लगातार मुझ से व अन्य व्यक्तियों से बात करती रही है, मेरे व पत्नी के मध्य अदालत में विवाद चल रहे हैं, इस कारण यह बताया जाए कि यह मोबाइल नं. किस व्यक्ति को दिया हुआ है।  ऐसी सूचना आप सूचना के अधिकार के अंतर्गत मांग सकते हैं।  लेकिन फिर भी यह जानकारी आप को यह साबित करने के लिए बहुत कमजोर होगी कि आप की पत्नी आप के साथ पिछले तीन साल से नहीं रही है।

प के मुकदमे में निश्चय ही आपने किसी वकील की सलाह और सहायता प्राप्त की होगी।  आप को उस से विमर्श करना चाहिए। यह साबित करने की जिम्मेदारी आप की पत्नी की है कि वह आप के साथ कहाँ कहाँ रही है? यदि मुकदमे में आप की साक्ष्य पहले हो तो आप साक्ष्य समाप्त करने के समय रिबुटल साक्ष्य प्रस्तुत करने का अधिकार सुरक्षित रखें।  बाद में जब आप की पत्नी साक्ष्य के लिए आए तो उस से जिरह में प्रश्न पूछें कि वह कहाँ कहाँ आप के साथ रही है? आप का कौन कौन मित्र घर पर आता रहा है? वह मकान कहाँ है? घर की लोकेशन क्या है? आसपास के मकान कैसे हैं? उन में कौन कौन रहता है? आप काम पर कब जाते हैं? आप के दफ्तर आदि का विवरण पूछें। बाद में आप अपनी गवाही में अपने मुहल्ले व दफ्तर के लोगों के बयान करवा सकते हैं कि आप को वे तीन साल से अकेले रहते देख रहे हैं, इस बीच आप की पत्नी वहाँ आ कर नहीं रही है।

समस्या-

ग्राम-पोस्ट परेऊ, तहसील-बायतु, जिला-बाङमेर (राजस्थान) से मुश्ताक खान ने पूछा है-

मेरे गॉव की एक निजी स्कूल मे आर टी ई के तहत फ्री पढने वाले 25% छात्रो की सूची प्राप्त करना चाहता हू। ये सूचना ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के अलावा और कौन कौन दे सकता है? ये सूचना मुझे कितने समय मे दी जायेगी तथा यह सूचना देने वाला अधिकारी सूचना देने का चार्ज कितना लेगा? हमारे ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बायतु (जिला बाङमेर) मे बैठते है।

समाधान-

प को सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत निजि विद्यालय में मुफ्त पढ़ने वाले 25 प्रतिशत विद्यार्थियों की सूची के लिए ब्लाक शिक्षा अधिकारी को ही आवेदन करना चाहिए। वे निजि स्कूल से सूचना मंगवा कर आप को उपलब्ध करवाएँगे। इस संबंध में केन्द्रीय सूचना आयोग स्पष्ट कर चुका है कि निजि स्कूलों को इस तरह की सूचनाएँ शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध करानी होगी।

सूचना प्राप्त करने के लिए आप को एक आवेदन निम्न प्रारूप में ब्लाक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में दस रुपए के पोस्टल आर्डर के साथ प्रस्तुत करना चाहिए। इस संबंध में यदि अधिक शुल्क की आवश्यकता होगी तो दस्तावेज तैयार होने के उपरान्त आप को सूचित कर दिया जाएगा। अन्यथा सूचना आप को आवेदन प्रस्तुत करने के 30 दिनों में प्राप्त  हो जाएगी। यदि तीस दिनों में आप को सूचना न मिले तो आप प्रथम अपील अधिकारी स्तर पर अपील कर सकते हैं।

सहकारी समिति से दस्तावेज की प्रतियाँ कैसे प्राप्त करें?

January 31, 2012 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

मैं सहकारी समिति का कर्मचारी हूँ, मुझे सेवा से हटा दिया गया है। मैं ने अपनी सेवा समाप्ति के विरुद्ध श्रम न्यायालय में मुकदमा किया हुआ है। मुझे अपना पक्ष साबित करने के लिए दस्तावेजों की आवश्यकता है जो समिति के पास हैं। मैं उन दस्तावेजों को कैसे प्राप्त कर सकता हूँ?

-विष्णु कुमार, भरतपुर, राजस्थान

जिन दस्तावेजों की आप को अपना पक्ष साबित करने के लिए आवश्यकता है यदि वे उस सहकारी समिति के कब्जे में हैं जिस के विरुद्ध आप ने सेवा समाप्ति का मुकदमा किया हुआ है तो आप उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत कराने के लिए श्रम न्यायालय को आवेदन कर सकते हैं। श्रम न्यायालय के समक्ष दस्तावेज प्रकट कराने और प्रस्तुत कराने के लिए दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश 11 का उपयोग किया जा सकता है। आप आदेश 11 नियम 12 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं कि समिति जो कि उक्त मुकदमे में प्रतिपक्षी है आवश्यक दस्तावेजों को प्रकट करे कि वे उस की शक्ति और आधिपत्य में हैं अथवा नहीं। समिति को उक्त दस्तावेज उस की शक्ति और आधिपत्य में होने या न होने के बारे में शपथ पत्र प्रस्तुत करना पड़ेगा। यदि समिति स्वीकार करती है कि उक्त दस्तावेज उस की शक्ति एवं आधिपत्य में हैं तो आप आदेश 11 नियम 14 के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत कर न्यायालय से प्रार्थना कर सकते हैं कि प्रतिपक्षी उन दस्तावेजों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।

स के अतिरिक्त आप सहकारी समिति से उक्त दस्तावेजों की प्रतियाँ सूचना का अधिकार कानून के अंतर्गत भी मांग सकते हैं। सहकारी समितियों को राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयपुर महिला होलसेल सहकारी उपभोक्ता भंडार लि. बनाम नानगराम शर्मा एवं अन्य (2010 डब्लूएलसी (राज.) यूसी 740) में यह निर्णीत किया है कि सहकारी समितियाँ लोक प्राधिकरण हैं और उन से सूचना का अधिकार कानून के अंतर्गत दस्तावेजों की प्रतियाँ प्राप्त की जा सकती हैं।

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