Crime Archive

समस्या-

बबीता सक्रे ने बैतूल मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं ने बैतूल सिटी की चौकी गैंग पर पुलिस को मेरे पड़ौसी के विरुद्ध रिपोर्ट दी थी। लेकिन पुलिस ने पड़ौसी का पक्ष लिया। उस ने मुझे गालियाँ दीं, अश्लील शब्द कहे, घर के अन्दर घुस कर मेरा हाथ पकड़ा और बलात्कार करने की धमकी दी। उस की माँ ने रोड के बीच जा कर जाति से संबंधित गालियाँ दीं। पर पुलिस का कहना है कि गवाह ले कर आओ, वह लड़का भी वहीं था। जबकि मैं ने वीमेन  हेल्पलाइन पर शिकायत की था इस के बाद एसपी को शिकायत की। तब पुलिस ने 294,323, 506 का मुकदमा बनाया तो मैं ने एफआईआर पर हस्ताक्षर नहीं किए। दूसरे दिन फिर एसपी साहब के पास गयी तो 452 और लगा दी। पर छेड़छाड़ और जाति से संबंधित गाली गलौच का केस नहीं बनाया। इस के चार दिन बाद उस लड़के की बहन की रिपोर्ट पर मेरे पति के विरुद्ध झूठी रिपोर्ट लिख ली जब कि पति उस दिन शहर में ही नहीं थे। पुलिस ने धमकी दी कि राजीनामा नहीं करोगे तो मेरे पति पर 354 का मुकदमा बना देंगे। पुलिस घर आ कर हमें परेशान कर रही है। जिस की शिकायत 181 पर की। एसडीओपी जाँच कर रहे हैं पर पड़ौसी अभी भी हम को धमकी देता है और पुलिस गवाह सबूत लाने को कहती है।

समाधान-

प की समस्या से पता लगता है कि आप के पड़ौसी की मिली भगत पुलिस के साथ है। पुलिस आप की शिकायत पर आप से सबूत और गवाहों के लिए कह रही है। पुलिस का यह कथन सही है यदि अपराध का कोई सबूत और गवाह नहीं मिलते हैं तो पुलिस द्वारा की गयी कार्यवाही न्यायालय में जा कर समाप्त हो सकती है। इस कारण आप को कम से कम परिस्थितिजन्य सबूत तो देने होंगे।

आप के विपक्षी की मिथ्या शिकायत पर पुलिस आप के पति के विरुद्ध कार्यवाही कर रही है तो इस कारण कि आप के विपक्षी ने पुलिस को झूठे ही सही पर कुछ गवाह उपलब्ध कराए होंगे। पुलिस उन की गवाही के आधार पर आप के विरुद्ध कार्यवाही कर सकती है। आप के पति अपना प्रतिवाद पुलिस के समक्ष पेश कर सकते हैं पुलिस द्वारा आप के पति के विरुद्ध न्यायालय में कोई आरोप दाखिल किया जाता है तो आप के पति वहाँ बचाव कर सकते हैं।

आपकी शिकायत पुलिस नहीं सुन रही है। एसपी को भी आप शिकायत कर चुकी हैं। यदि आप के पास परिस्थितिजन्य सबूत हैं तो आप सीधे मजिस्ट्रेट के न्यायालय में अपना परिवाद प्रस्तुत कर सकती हैं और वहाँ अपने गवाहों के बयान करवा कर तथा परिस्थिति जन्य साक्ष्य प्रस्तुत कर मुकदमा दर्ज करवा सकती हैं। इस के लिए बेहतर है कि आप अपराधिक मामले देखने वाले किसी स्थानीय वकील की मदद लें।

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अपराधिक केस फर्जी होने पर प्रतिरक्षा करना ही उपाय है।

December 21, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

जितेन्द्र ने शैखपुरा बिहार से समस्या भेजी है कि-

मेरे विरुद्ध एक सरकारी कर्मचारी द्वारा धारा 341, 323, 353, 379, 504, 506/34 में एक फर्जी केस दर्ज करवा दिया है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

जितेन्द्र जी,

प के विरुद्ध मुकदमा हुआ है। केवल आप जानते हैं कि वह फर्जी है। बाकी पुलिस ने तो गवाही और सबूतों के आधार पर ही आरोप पत्र प्रस्तुत किया होगा। इस का एक ही इलाज है कि आप इस मुकदमे में अच्छा वकील करें और अपनी प्रतिरक्षा करें। यदि यह सिद्ध हो जाता है कि यह एक फर्जी मुकदमा है तो आप न्यायालय से यह निवेदन कर सकते हैं कि उक्त मामले में फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले कर्मचारी के विरुदध कार्यवाही की जा कर उसे सजा दी जाए।

यदि आप इस मुकदमे में बरी हो जाते हैं तो आप दुर्भावनापूर्ण अभियोजन के लिए हर्जाना प्राप्त करने के लिए उक्त सरकारी कर्मचारी के विरुदध दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

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चाचा के विरुद्ध अपराधिक षड़यंत्र की रिपोर्ट पुलिस को कराएँ।

October 13, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_police-officer4.jpgसमस्या-

बुन्देल सिंह यादव ने पिचूरी, जिला शिवपुरी, मध्यप्रदेश से पूछा है-

मैं 13 वर्ष का था तब मेरे पिताजी का देहान्त हो गया। मेरा चाचा चाची ने अपने बेटे का नाम को मेरे पिताजी के नाम से जोड़ दिया जैसे मेरा बुन्देल सिंह पुत्र श्री जिहान सिंह यादव है उन के बच्चे का नाम रामपाल पुत्र श्री जिहान सिंह यादव रख दिया है। अब कहते हैं कि ये जिहान सिंह का बैटा है। जब कि वह गोपाल सिंह का बेटा है। मैं क्या करूँ।

समाधान-

प के चाचा चाची ने बहुत दूर की कौड़ी ली है। इस तरह आप दोनों आप के पिता के बेटे हो गए। जो संपत्ति चाचा की है वह तो चाचा के पास है उसे वह किसी के नाम वसीयत कर सकते हैं। लेकिन आप के पिता की संपत्ति में भी चाचा का बेटा आधी का हकदार बता सकता है, यह कहते हुए कि वह भी आप के पिता का ही बेटा है। यह एक अपराध और अपराधिक षड़यंत्र है।

आप को चाहिए कि आप इस की पुलिस में रिपोर्ट कराएँ। यदि पुलिस रिपोर्ट पर कार्यवाही करने से इन्कार करे तो एस पी को पत्र के साथ पुलिस को की गयी रिपोर्ट की प्रतिलिपि प्रस्तुत करें। दोनों की रसीद अवश्य रखें। फिर भी कोई कार्यवाही न हो तो आप किसी स्थानीय वकील की सहायता से मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद प्रस्तुत कर उसे पुलिस को जाँच के लिए भिजवाने का प्रयत्न करें। इस मामले में दोनों के डीएनए टेस्ट कराने से स्पष्ट हो जाएगा कि कौन किसका बेटा है। वैसे अन्य पारिवारिक रिश्तेदारों के बयान से और अस्पताल आदि के रिकार्ड से जहाँ बच्चे पैदा हुए या दाई के बयान से भी यह बात साबित की जा सकती है।

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बन्दी रखने वाला ससुराल छोड़ कर ही आगे बढा़ जा सकता है।

September 19, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

मोनिका ने हिसार, हरियाणा से पूछा है-

मेरी शादी को पाँच महिने हुए हैं। कुछ दिन बाद से ही मरे ससुराल वाले और पति मुझे परेशान कर रहे हैं। शादी से पहले मुझे बताया था कि मेरा पति ड्रिंक नहीं करता है औऱ शादी के बाद मैं अपनी पढ़ाई जारी रख सकती हूँ। लेकिन ये मुझे पढ़ाई नहीं करने देते हैं, न ही नौकरी करने देते हैं। घर से भी नहीं निकलने देते, मुझे कैद कर रखा है। मेरा पति रोज ड्रिंक कर के घर आता है और मुझ से लड़ाई करता है। मुझे मायके भेजने की धमकी देते हैं। मैं पढ़ना चाहती हूँ, आगे बढ़ना चाहती हूँ कुछ बोलती हूँ तो सब मेरे साथ बोलना बन्द कर देते हैं 20-20 दिन मुझ से कोई नहीं बोलता। मायके गयी तो एक माह तक मुझे लेने कोई नहीं आया। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प के कथनों से एक बात पक्की लग रही है कि आप के ससुराल वालों को आप जैसी बहू नहीं बल्कि घर में बन्द रह कर घर का काम करने वाली बहू चाहिए थी। आम तौर पर विवाह के पहले लोग वायदे कर देते हैं यह सोच कर कि विवाह के बाद सब ठीक हो जाएगा। हमें नहीं लगता कि आप अपनी ससुराल में रह कर पढ़ाई आगे बढ़ा सकती हैं। आप का पति भी ड्रिंक करना नहीं छोड़ेगा। घर के बाहर निकलना भी आप का स्वतंत्रता पूर्वक नहीं हो सकता।

यदि आप इन परिस्थितियों से तंग हैं तो आप अपनी ससुराल छोड़ सकती हैं इस का आप को अधिकार है। क्यों कि आप के साथ ससुराल में वाजिब व्यवहार नहीं हो रहा है जो कि आप के साथ क्रूरता है। यदि आप के मायके वाले सपोर्ट करने में सक्षम हों तो आप मायके जा कर वहाँ नौकरी तलाश कर के नौकरी कर सकती हैं और अपनी पढ़ाई जारी रख सकती हैं। इस के साथ ही आप अपने पति से प्रतिमाह भऱण पोषण राशि प्राप्त कर सकती हैं जिस के लिए आप को धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता अथवा घरेलू हिंसा अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन करने होंगे। आप चाहें तो ससुराल वालों की क्रूरता के लिए उन के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करवा सकती है जिस पर धारा 498ए का मामला दर्ज हो सकता है।

आप यदि वास्तव में अपनी परिस्थितियों को बदलना चाहती हैं तो आप को ससुराल छोड़ना ही पड़ेगा। एक बार ससुराल छोड़ दें फिर किसी अच्छे स्थानीय वकील से मिल कर सलाह करते हुए आगे का रास्ता तय कर सकती हैं।

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गिरफ्तार कर लिए जाने पर जमानत अदालत से ही होगी।

August 16, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_police-station2.jpgसमस्या-

संदीप ने सतना, मध्यप्रदेश से पूछा है-

मेरे भाई को पुलिस ने चोरी के इल्जाम में गिरफ्तार कर लिया है आपसी रंजिश की वजह से। दो और लड़कों को गिरफ्तार किया है लेकिन वे बोलते हैं कि इसी ने चोरी की है। मैं अपने भाई को छुड़ाने के लिए क्या कर सकता हूँ। पुलिस मेरे भाई को कितने दिन में अदालत में पेश करेगी? भाई को बरी करवाने के लिए मुझे क्या करना पड़ेगा?

समाधान-

किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के बाद 24 घंटों की अवधि में मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है। यदि गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ की और बरामदगी आदि की जरूरत हो तो मजिस्ट्रेट पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ा सकती है। यदि इन दोनों की जरूरत समाप्त हो चुकी हो तो मजिस्ट्रेट उसे न्यायिक हिरासत में ले कर जेल भिजवा देता है। जब तक न्यायिक हिरासत में गिरफ्तार व्यक्ति न आ जाए तब तक उस की जमानत की अर्जी पर कोई विचार नहीं किया जा सकता।

आप को पता करना चाहिए कि आप के भाई को गिरफ्तार भी किया है या नहीं? या फिर केवल पूछताछ के लिए थाने में बिठा रखा है? गिरफ्तार कर लिए जाने पर तो जमानत अदालत से ही होगी।

यदि पुलिस स्पष्ट जवाब नहीं देती है तो संबंधित मजिस्ट्रेट के यहाँ आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है और मजिस्ट्रेट पुलिस से रिपोर्ट मंगा सकता है।

आप को अपने तईँ यह भी पता करना चाहिए कि वाकई में आप के भाई की चोरी की वारदात में कोई भूमिका तो नहीं है?

फिर भी आप को किसी स्थानीय फौजदारी मामलों के वकील की मदद प्राप्त करनी चाहिए। वह आप के भाई की जमानत करवा सकता है। एक बार जमानत पर छूट जाने पर आप का भाई स्वयं अपने मामले को देख सकता है।

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समस्या-Havel handcuff

शीलू ने उन्नाव, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरा एक लड़के से कई दिनों से अफेयर चल रहा था। पहले उसने मेरे साथ जबरदस्ती की थी। लेकिन बाद में उसने कहा कि वह उससे शादी कर लेगा। लेकिन 2 से 3 साल बीत जाने पर अब वह मना कर रहा है। वह कह रहा है कि जो करना है कर लो वह शादी नहीं करेगा। उसके घर वालो को सब पता है। मुझे शुरू से बहुत डरा धमका रहा है इसलियें मैंने अपने घर में सबको नहीं बताया है। मेरी अपेक्षा वह पैसे वाला भी है। अब वह मुझको डराकर अपने दास्तों से सम्बन्ध बनाने के लिये कह रहा है। घर पर मैंने अपने भाई से बताया है तो वह कह रहा है कि चुपचाप रहो और मैं लड़का देखकर कहीं और शादी कर दूंगा।  नहीं तो सब जगह अपनी ही बदनामी होगी। उसके पास पैसा है उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा। वह अच्छा वकील कर के छूट जायेगा।  लेकिन मैं अब उसी लड़के से शादी करना चाहती हूँ क्या करूँ। अगर कुछ हल नहीं निकला तो मैं आत्महत्या कर लूंगी।  मेरी मदद करें।

समाधान-

म उन लोगों की बात का कोई उत्तर नहीं देते जो अपने प्रश्न में यह कहते हैं कि हल न निकला तो आत्महत्या कर लूंगा/ लूंगी। इस प्रश्न का उत्तर इस कारण दे रहा हूँ कि इस तरह का प्रश्न पहली बार हमारे पास आया है।

आप के कहने से पता लगता है कि उस लड़के ने कभी आप से प्रेम नहीं किया। उस ने पहले आप के साथ जबर्दस्ती की। फिर समाज में प्रचलित इस धारणा का कि जिस लड़की के साथ किसी ने बलात्कार कर दिया वह विवाह और परिवार में रहने लायक नहीं होती, दुरूपयोग करते हुए आप को धमकाया साथ में आप को विवाह का लालच दिया। आप भी यही समझती हैं कि बलात्कार की इस श्रंखला को छुपाना ही श्रेयस्कर है आप ने भी अपने शोषण को स्वीकार कर लिया। अब उस लड़के ने पीठ दिखा दी है। वह समझता है कि आप में अब इतना नैतिक साहस शेष नहीं है कि आप पुलिस में बलात्कार की इस श्रंखला की शिकायत कर सकें। इस कारण वह अकड़ गया है।

यह सब कथानक यह बताता है कि वह लड़का आप से कभी प्रेम नहीं करता था। ऐसा व्यक्ति कभी किसी से प्रेम नहीं कर सकता। क्यों कि जो व्यक्ति किसी लड़की का बलात्कार कर सकता है और उसे धमका कर और लालच दिखा कर बलात्कार को जारी रखता है वह कभी किसी से प्रेम करने लायक हो ही नहीं सकता। वह आप का ही नहीं अपितु समस्त स्त्री समुदाय का अपराधी है, इस समाज का अपराधी है उस की शिकायत होनी चाहिए और उसे दंडित होना चाहिए।

आप के भाई का सुझाव भी जैसा हमारा समाज है वैसा ही है। अक्सर ऐसी घटनाओं की शिकार लड़कियों में से 99 प्रतिशत लड़कियाँ यही करती हैं कि वे चुपचाप विवाह कर अपनी ससुराल चली जाती हैं और सारा जीवन इस भय में गुजार देती हैं कि उन के पति को या ससुराल वालों को या अन्य किसी को उन के जीवन का यह अंधेरा पता न लगे।

यदि आप उस लड़के के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट कराती हैं तो उस का पैसा भी उसे नहीं बचा पाएगा। उस के विरुद्ध बलात्कार और ब्लेकमेल करने के अपराध में मुकदमा भी चलेगा और उसे सजा भी मिलेगी। अभी आप उस लड़के के चंगुल में हैं, जब वह चंगुल में फंसेगा तो दस बार आप के सामने विवाह के लिए नाक रगड़ेगा। हमारा सुझाव है कि आप को उस लड़के के विरुद्ध पुलिस रिपोर्ट करना चाहिए और उसे दंडित कराना चाहिए। यदि आप पूरी मुस्तैदी से यह काम करती हैं तो आप समाज का भला करेंगी, उन तमाम स्त्रियों के हक में काम करेंगी जो इस तरह शिकार बनती हैं। जब वह खुद को बचाने के लिए  पुनः विवाह का प्रस्ताव रखे तो उसे मना कर दीजिएगा, यही उस की सजा होगी। हमें विश्वास है कि आप को कोई न कोई सच्चा जीवन साथी भी मिल जाएगा जो आप के अतीत को जानते हुए भी आप के साथ पूरा जीवन बिताने को तैयार होगा।

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अपराधिक मुकदमा लंबित होने पर सेवा से निलंबित रखा जा सकता है।

July 24, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

Trialसमस्या-

ओम प्रकाश शर्मा ने 12, नई सड़क उज्जैन (म.प्र.) से पूछा है-

मैं विगत एक वर्ष से एक वित्तीय संस्थान में कार्यरत हूँ! पिछले माह 5 जून को मेरे सहकर्मी जिनसे मेरा मनमुटाव है की पत्नी ने मुझ पर छेड़छाड़ का झूठा आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज करवा दी। धारा ३५४ के तहत मामला कोर्ट में है और मैं ने सेशन से जमानत ले ली है! वर्तमान में मुझे कंपनी द्वारा सस्पेंड कर दिया गया है, जब कि ये पूरा मामला झूठा है! मुझे क्या करना चाहिये?

समाधान-

प के विरुद्ध न्यायालय में एक अपराधिक मुकदमा लंबित है और संभवतः आप 24 घंटों से अधिक न्यायिक हिरासत में भी रह चुके हैं वैसी स्थिति में कंपनी द्वारा आप को निलंबित करना गैर कानूनी नहीं है। लेकिन यह निलम्बन कोई दंड नहीं है। इस निलम्बन में आप को कंपनी के स्थाई आदेशों के अनुसार कुछ समय तक 50% तथा उस के उपरान्त 75% वेतन प्रतिमाह प्राप्त होगा। आप अपना निलम्बन समाप्त करने के लिए अपने प्रबंधन को आवेदन दे सकते हैं जिस में आप लिख सकते हैं कि किन परिस्थितियो में आप पर मिथ्या आरोप लगाए गए हैं। प्रबन्धन आप का निलम्बन समाप्त कर सकता है।

यदि प्रबंधन आप का निलम्बन समाप्त नहीं करता है तो इस संबंध में आप स्वयं कोई औद्योगिक  विवाद नहीं उठा सकते। लेकिन यदि आप की यूनियन आप का साथ देने को तैयार हो तो वह इस विवाद को उठा सकती है। यदि यूनियन निलम्बन समाप्त करने के इस विवाद को उठाने को तैयार न हो तो आप स्वयं भी इस मामले को दीवानी न्यायालय में ले जा सकते है और निलम्बन समाप्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं। लेकिन यदि मामला बिना न्यायालय जाए बन जाए तो बेहतर है।

 

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rp_domestic-violence-13.jpgसमस्या-

पलक वर्मा ने लखनऊ, उत्तरप्रदेश से पूछा है-

मेरी शादी लखनऊ से ही 23 अप्रैल 2015 को हुई थी। पर शादी के  कुछ महीने बाद ही ससुराल में मुझे झूठे आरोप लगा के प्रताड़ित किया जाने लगा। मेरे साथ आये दिन गाली गलौच व मारपीट होती थी।  मेरा फोन भी छीन लिया गया ताकि मैं अपने मायके से कोई सम्पर्क न कर सकूँ।  मेरे पति ने मुझे शारीरिक व सास व उनके मामा ने मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उन लोगों ने मेरें ऊपर झूठे शिकायत पत्र थानों में दिए। पर तमाम प्रताड़ना के बाद भी समाज के दबाव से मेरे द्वारा कोई शिकायत नहीं की गयी। पर कुछ समय बाद जब मैंने गर्भ धारण किया तो मेरे पति मुझे  मेरें मायके छोड़ आये। तब भी वे लोग मुझ पर झूठे आरोप लगाते रहे। लेकिन दुबारा वो 7-8 महीने मुझे बुलाने नहीं आये न ही फोन किया।  इस दौरान जब मैं उनको फोन करती तो वह मुझे गन्दी- गन्दी गालियाँ देते व कहते कि “न तो मैं तुम्हें कभी बुलाने आऊँगा न ही कभी तलाक दूँगा, तुम्हारी जिन्दगी बर्बाद कर दूँगा”। बाद में उन्होंने फिर मेरे ही खिलाफ महिला थानें में झूठी शिकायत की। पर वहाँ के पुलिस ने उनको समझाया और मुझे अपने घर बुलाने को कहा। उससे बुलाने का वादा भी किया पर कुछ समय बाद जब उन्हें पता चला कि मुझे लड़की नहीं हुई है तो वह बुलाने नहीं आया। 2 महीने बाद फिर जब मैंने व मेरे पापा ने फोन किया तो दोनों को खूब गन्दी- गन्दी गालियाँ दी। जब मेरे पापा मुझे भेजने गये तो वो लोग गाली गलौच कर घर में ताला बन्द कर भाग गये। उसके बाद मेरे ऊपर झूठा मुकदमा किया कि वह बुलाने आता है पर मेरें पापा मुझे भेजते नहीं है।

समाधान-

प की समस्या यह है कि जो भी आप के विरुद्ध अत्याचार हुए हैं या अपराध हुए हैं उस के विरुद्ध कोई शिकायत करने को तैयार नहीं हैं। आप समझती हैं कि इतने सारे अपराध होने पर भी आप के लिए सब से उपयुक्त यही है कि किसी तरह आप अपने पति के साथ जा कर रहने लगें और वह मारपीट और प्रताड़ित करना बन्द कर दे। आप ने यह भी नहीं बताया कि आखिर आप के पति और सास वगैरा आप को प्रताड़ित क्यों करते हैं और आप को अपने माता पिता के यहाँ क्यों छोड़ गए? इस से यह पता लगता कि आप के ससुराल वाले किस मानसिकता के लोग हैं? लगता है कि आप नहीं चाहती कि आप के माता पिता पर आप बोझ बनें। आप को स्वयं ससुराल में जा कर रहने के सिवा अपने जीवन का कोई विकल्प नहीं नजर आता है।

आप को अपने ससुराल वालों के अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने का साहस तो करना होगा। आप को चाहिए कि आप आप की प्रताड़ना और मारपीट के विरुद्ध पुलिस में रपट लिखाएँ अथवा वकील के माध्यम से न्यायालय के समक्ष परिवाद प्रस्तुत करें। हमें नहीं लगता है कि आप अपने ससुराल में वापस जा कर सुरक्षित रह पाएंगी। आप के पति स्वयं स्वयं आप को मायके छोड़ कर गए हैं और लेने नहीं आए हैं। इस कारण आप को तुरन्त धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर अपना और अपनी संतान के लिए भरण पोषण का खर्चा निर्धारित करने की मांग करनी चाहिए।

इस के साथ ही आप को अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश करनी चाहिए। जिस से आप कुछ शक्ति अर्जित करें और अपने विरुद्ध हो रहे अन्याय के विरुद्ध लड़ सकें और आप के विरुद्ध अपराध करने वालों को दंडित करा सकें।

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rp_judge5.jpgसमस्या-

 

रजनीश रानू ने सुपौल बिहार से पूछा है-

 

दो भाई आपस में ज़मीनी विवाद किए और उसमें मेरा नाम दे दिए। मैं पुलीस जाँच और चार्जशीट से बाहर हो गया। परंतु सीजीएम ने हमारे ऊपर प्रसंज्ञान ले लिया है। क्या करूँ? उपाय सुझायें।

 

समाधान-

 

प के पास दो विकल्प हैं-

 

पहला विकल्प तो यह है कि जैसे इस मुकदमे के सब अभियुक्त मुकदमे में अपना बचाव करेंगे वैसे ही आप भी करिए। जब आप पर आरोप मिथ्या है तो आप बरी हो जाएंगे।

 

दूसरा विकल्प यह है कि आप अपने विरुद्ध प्रसंज्ञान लेने के आदेश के विरुद्ध रिविजन याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं और न्यायालय द्वारा लिए गए प्रसंज्ञान को रद्द करवा सकते हैं। यह दूसरा विकल्प आप को अवश्य अपनाना चाहिए।

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वाहन बेचना और कब्जा देना साबित करना होगा।

July 12, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

motor accidentसमस्या-

रविन्द्रसिंह ने जयपुर, राजस्थान से पूछा है-

मैं ने एक मोटरवाहन बेचा जिस का बीमा नहीं था। जिसने वाहन खरीदा उस ने स्टाम्प पर लिखित में खरीदना और कब्जा प्राप्त करना दे रखा है। 15 दिन बाद वाहन से दुर्घटना हो गयी। एक व्यक्ति को फ्रेक्चर हुआ है। वाहन अभी तक ट्रान्सफर नहीं हुआ था और बीमा भी नहीं कराया था। इस मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हो गयी है।

समाधान-

प इस बात से चिन्तित हैं कि आप दुर्घटना के दिन तक वाहन के पंजीकृत स्वामी थे इस कारण से आप पर क्षतिपूर्ति का दायित्व आएगा।

मोटर यान दुर्घटना में प्राथमिक दायित्व चालक और वाहन स्वामी का होता है, यदि दायित्व बीमित हों तो बीमा कंपनी इन दायित्वों को वहन कर लेती है।

आप के मामले में पुलिस वाहन के नंबर से आप तक पहुँचेगी और जानना चाहेगी कि दुर्धटना के समय वाहन कौन चला रहा था। आप उसे बता दीजिए कि यह आप नहीं बता सकते क्यों कि आप वाहन को बेच चुके थे। इस के साथ ही आप के पास वाहन प्राप्ति की जो रसीद स्टाम्प पर आप के पास है उस की स्वहस्ताक्षरित फोटो प्रति पुलिस को दे दें।

इस के बाद आप के विरुद्ध कोई मोटर दुर्घटना दावा होता है तो आप को वाहन का विक्रय और कब्जा हस्तान्तरित होना साबित करना होगा। आप वहाँ आप यह जवाब दे सकते हैं कि दुर्घटना से आप का कोई लेना देना नहीं था, आप पहले ही वाहन बेच चुके थे। स्टाम्प पर उपलब्ध रसीद के माध्यम से इसे साबित भी कर सकते हैं। इस से आप पर आ रहा दायित्व वाहन क्रेता पर पहुँच जाएगा।

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