Crime Archive

समस्या-

सुनील ने अहमदाबाद, गुजरात से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी फरवरी 2014 में हुई थी मेरी पत्नी को मिर्गी का रोग है। जो हमको बताए बिना शादी की थी। मुझे यह बात नवम्बर 2014 में पता चली। फिर मेरी पत्नी मायके गई तो मैंने उसे तलाक की नोटिस भेजी। तलाक की नोटिस भेजने के बाद में उसने मुझ पर दहेज का झूठा केस लगाया जिसके कारण मुझे और मेरी फैमिली को लॉकअप में रहना पड़ा। उस केस को हमने हाईकोर्ट में रखा मार्च 2017 में हाईकोर्ट ने मेरी पत्नी की पूरी FIR रद्द की और हमको बरी कर दिया। मेरी वाइफ ने सूरत में 125 भरण पोषण के लिए और डोमेस्टिक वायलेंस का केस घरेलू हिंसा के लिए किया है वे अभी चल रहे हैं और अहमदाबाद में तलाक का केस चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है अगर दहेज का केस झूठा निकलता है तो पति को तलाक का पूरा अधिकार है। उसके तहत और मेरी पत्नी को मिर्गी की बीमारी है उसको छुपाकर शादी की है उसके तहत में तलाक लेना चाहता हूं। लेकिन कोर्ट की प्रक्रिया बहुत ही धीमी है। मैं आपसे यह जानना चाहता हूं कि मैं तलाक की प्रक्रिया फास्ट करने के लिए क्या कर सकता हूँ। जिसके कारण तलाक के केस की जल्दी तारीख पड़े मेरा केस जल्दी पूरा हो। हाई कोर्ट ने मेरी वाइफ की 498 की जो FIR रद्द की है उस पर मुझे डोमेस्टिक वायलेंस यानी घरेलू हिंसा अधिनियम में क्या फायदा हो सकता है? कृपया कर अपना सुझाव दीजिए। मैं नवंबर 2015 से अपने भाई, बुआ के लड़के के घर पर रह रहा हूँ और मेरी अभी पीएचडी की पढ़ाई चालू है। अगर कोर्ट भरण पोषण की रकम तय करती है तो मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ेगी और कहीं जॉब ढूंढना पड़ेगा क्या? कोर्ट फैसला दे सकती है कि तुम अपनी पढ़ाई छोड़ कर अपनी पत्नी की जिम्मेदारी उठाओ? क्योंकि मैं अपने मम्मी पापा से अलग हो गया हूँ वह मुझे अपने घर में नहीं रखते, मेरी पढ़ाई लिखाई का खर्चा मेरे भाई उठाते हैं।

समाधान-

मुकदमा निपटने की प्रक्रिया फास्ट होने का कोई माकूल तरीका नहीं है। देरी इस कारण होती है कि देश में पर्याप्त मात्रा में न्यायालय नहीं हैं। न्यायालयों की कमी को केवल राज्य सरकारें ही पूरी कर सकती हैं। फिलहाल आप यह कर सकते हैं कि उच्च न्यायालय में रिट लगवा कर अदालत के लिए यह निर्देश जारी करवा सकते हैं कि आप के मुकदमे में सुनवाई जल्दी की जाए और नियत समय में आप के मुकदमे में निर्णय पारित किया जाए।

498 ए की प्रथम सूचना रिपोर्ट रद्द होने के निर्णय की प्रतियाँ आप अपने सभी मामलों में प्रस्तुत करें। वह आप को लाभ देगी। इस से यह साबित होगा कि आप की पत्नी की ओर से मिथ्या तथ्यों के आधार पर आप के विरुद्ध मुकदमे करने का प्रयत्न किया गया है। इस से आप को लाभ प्राप्त होगा।

न्यायालय भरण पोषण की राशि तय कर सकती है लेकिन इस के लिए वह आप को पढ़ाई छोड़ने के लिए नहीं कह सकती। वह यह कह सकती है कि जब आप कमाते नहीं थे, अध्ययनरत थे और पत्नी का खर्च नहीं उठा सकते थे तो आप को विवाह नहीं करना चाहिए था। वैसे इस परिस्थिति में पत्नी का भरण पोषण इतना नहीं होगा कि उसे अदा करने के लिए आप को पढ़ाई छोड़नी पड़े।

प्रेम कोई अपराध नहीं, मन से हर तरह का भय निकाल दें।

April 7, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

संदीप ने उत्तम नगर,दिल्ली से समस्या भेजी है कि-

मेरा एक लड़की से रीलेशन था। वो मुझसे शादी भी करना चाहती थी। लेकिन उसके घर में मेरे बारे में पता लग गया और उसके मामा ने ओर माँ-बाप ने लड़की को डरा कर मुझ पर धारा 354 आईपीसी का मुकदमा दर्ज करवा दिया। क्योंकि हमारा रीलेशन इंटरकास्ट है ओर पुलिस भी उन्हीं का साथ दे रही है। जिस दिन एफआईआर हुई उस दिन भी बात हुई थी लेकिन शाम को ये जब हो गया,  मैं उनके घर पे शादी की बात करने गया।  उन्होने मुझे घर आने से पहले ये सब कर दिया। 2 महीने हो गये एफाईआर की कॉपी भी नहीं मिली थाने में जमानत हुई है। फोन भी जमा है।  लड़की वालों को जब थाने में उसके मेरे बारे में पूरा सच पता चला तो वो केस वापस लेने की कहने लगे। पुलिस वाले मुझे ही डरा रहे हैं। अब मैं क्या करूँ?

समाधान-

संदीप जी, सब से पहले तो आप डरना बंद कर दीजिए। आप ने लड़की से प्रेम किया है तो करते रहिए। पुलिस ने जब थाने में जमानत ले ली है तो अब वह अधिक से अधिक न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत करेगी। वहाँ भी आप की जमानत हो कर मुकदमा चलेगा। मुकदमा लड़िए, अच्छा वकील कीजिए। मुकदमा फर्जी है तो एक दिन खारिज हो जाएगा। आप का प्रेम देख कर हो सकता है लड़की को भी हिम्मत आ जाए और वह अदालत में सच बोले और कहे कि मैं तो संदीप से विवाह करना चाहती हूँ। लेकिन अन्तर्जातीय होने के कारण मेरे परिवार वालों ने मुझे धमका कर यह मुकदमा चलाया है। हो सकता है वह खुद अदालत से कहे कि वह अब अपने माता पिता के साथ नहीं आप के साथ विवाह कर के रहना चाहती है मुझे और संदीप को सुरक्षा प्रदान की जाए।

जो मैं ने बताया वह अच्छी वाली संभावनाएँ हैं। यदि लड़की को हिम्मत न आई तो  एक दिन यह मुकदमा खारिज हो जाएगा। लड़की का विवाह किसी दूसरे व्यक्ति के साथ हो जाएगा। आप उसे फिर भी प्रेमं करते रह सकते हैं। लेकिन इस का अर्थ यह नहीं कि आप किसी अन्य स्त्री से विवाह न करें, अपना घर न बसाएँ। बस आप के प्रेम में जो देह का मिलन था वही नहीं हो सकेगा। प्रेम में यह जरूरी भी नहीं। और यह भी किसी किताब में नहीं लिखा है कि एक व्यक्ति  किसी एक से ही प्रेम करे। प्रेम का अर्थ दैहिक संबंध नहीं है। अंत में एक बार और कहूंगा कि आप ने कोई अपराध नहीं किया है इस कारण किसी भी तरह का भय मन से निकाल दें और समस्या का मुकाबला करें।

किसी भी पंजीयन के लिए झूठे तथ्यों का शपथ पत्र देना अपराध है।

April 3, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मुरारी ने रामगढ़ पचवाड़ा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरा विवाह 2003 में हुआ था, 1989 जन्म तिथि है। तब में 14 वर्ष का था। तो क्या में 21 वर्ष 2010 में होने पर 21 वर्ष की डेट में विवाह पंजीयन करा सकता हूँ?  ये गलत होगा या सही? इससे पहले मेरे दो बच्चे भी हो गए अगर 2010 की डेट में करवाता हूँ तो शादी से पहले दो बच्चे नौकरी में अयोग्यता का आधार तो नही होंगे? उचित सलाह दें।


समाधान-

ब से बड़ी गलत बात तो यह है कि आप विवाह की एक ऐसी तारीख चुन रहे हैं जो सही नहीं है। जिस तिथि को आप का विवाह हुआ था उस के सिवा किसी भी अन्य तारीख का विवाह का पंजीयन कराना गलत होगा। क्यों कि इस के लिए आप झूठ बोलेंगे, झूठा शपथ पत्र देंगे जो अपराध होगा जिस के लिए आप को सजा हो सकती है। यदि नौकरी लग भी जाए तो इसी कारण छूट भी सकती है और आप को कारावास का दंड भी भुगतना पड़ सकता है।

यह सही है कि आप की शादी हुई तब आप नाबालिग थे, या विवाह की उम्र के नहीं थे। विवाह हुए 14 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। यदि वह बाल विवाह किसी के लिए आप के व आप की माता की पत्नी का अपराध था भी तो अब इतना समय गुजर चुका है कि उस मामले में पुलिस या कोई भी उन के वि्रुद्ध कोई कार्यवाही नहीं कर सकता। इस कारण किसी का अपराध छुपाने के लिए झूठ बोलने की  जरूरत ही नहीं है और बोलते हैं तो अपराध छुपाना भी अपराध है। इस कारण से आप को झूठ नहीं बोलना चाहिए।

कोई भी हिन्दू विवाह यदि संपन्न हो जाता है तो वह गलत हो सकता है लेकिन समाप्त नहीं होता और वैध होता है। इस कारण कम उम्र में किया गया आप का विवाह पूरी तरह से वैध है और आप उस का पंजीयन करवा सकते हैं। मेरी राय में आप को विवाह का पंजीयन उसी तिथि का करवाना चाहिए जिस तिथि में आप का विवाह हुआ है। इस से आप को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। यदि पंजीयक पंजीयन करने से  मना करे तो न्यायालय से पंजीयक के विरुद्ध घोषणा व आदेशात्मक व्यादेश का वाद प्रस्तुत कर डिक्री पारित कराई जा सकती है और पंजीयन करवाया जा सकता है।

 

समस्या-

कल्याण सिंह ने राजीव नगर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मुझे एक कंपनी ने (जिस से मेने एक कियोस्क लिया था) नोटिस भेजा है जिसमें यह कहा गया है कि कंपनी जो कमीशन देती है उसमें जितना कमीशन देना चाहिए था उस अमाउंट से 13957 रुपए  ग़लती से ज़्यादा दे दिया है वो नही लोटाए जाने पर आईपीसी की धारा 409 के तहत अपराध है जबकि यह कंपनी मुझे फॉर्म 16 नहीं प्रोवाइड करवा रही और वो भी पिछले 3 साल से जिसमे मेरा टीडीएस कट रहा हे तो सर टीडीएस काट कर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में जमा नही करवाना भी तो एक अपराध है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प को कंपनी ने कमीशन खुद स्वैच्छा से दिया है। यदि अधिक दे दिया है तो वह उस की कानूनी तरीके से वसूली कर सकती है। आप उन्हें लिखिए कि आप के हिसाब से जो कमीशन मिला है वह सही है। इस तरह कमीशन की धनराशि विवादित हो जाएगी और अमानत नहीं रहेगी। यदि वे समझते हैं कि अधिक भुगतान हो गया है तो इस का निर्णय न्यायालय से कराने के लिए कार्यवाही करें। आपने कोई अपराध नहीं किया है।

उन्हें सूचित करें कि उन्होंने आप का जो टीडीएस आज तक काटा है उस का विवरण आप को नहीं भिजवाया है जो कि इनकम टैक्स कानून का उल्लंघन है यदि वे उचित समय में यह विवरण नहीं भिजवाते हैं तो आप इनकम टैक्स विभाग को शिकायत करेंगे। टीडीएस काट कर इनकम टैक्स विभाग में जमा न कराना गंभीर अपराध है इनकम टैक्स विभाग स्वयमेव कार्यवाही करेगा। वैसे यदि कंपनी ने टीडीएस काटा होगा तो आप के पैन नंबर से इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर आप को पता लग जाएगा कि कितना टीडीएस काटा गया है।

 

समस्या-

सुनील ने दौसा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


गर कोई किसी को अपने खिलाफ किसी अपराध की गवाही देने के लिए रोकता है और धमकी देता है तो क्या उसके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है?


समाधान-

किसी को अपने खिलाफ किसी अपराध की गवाही देने से रोकना और इस के लिए धमकी देना भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के अन्तर्गत एक गंभीर अपराध है और इस के लिए दंड भी अधिक है। जैसे जैसे गवाही से संबंधित अपराध की गंभीरता बढ़ती है वैसे ही दंड भी बढता जाता है।

आप को तुरन्त सम्बधित पुलिस थाना में रिपोर्ट लिखानी चाहिए। यदि पुलिस रिपोर्ट पर कार्यवाही करने में कोताही करे तो अगले ही दिन एसपी से मिल कर उसे कार्यवाही करने के लिए कहना चाहिए। यदि एस पी भी इस मामले में कोताही करता है तो आप न्यायालय को तुरन्त प्रतिवाद प्रस्तुत करें। न्यायालय तुरन्त कार्यवाही करेगा।

समस्या-

नीतिश कुमार ने कटिहार बिहार से समस्या भेजी है कि-


मेरी चाची हमेशा मेरे परिवार (मुझसे और मेरी मम्मी) से लड़ती रहती है और हम लोगों को परेशान करती है, गाली देना, अपशब्द कहना तो रोज की बात हो गई है।  वो हमेशा मुझे धमकी देती है कि मुझे झूठे केस में फँसा देगी क्योंकि मेरे घर में मैं और मेरी माँ ही रहते है और दूसरा कोई मर्द सदस्य नहीं है। मुझे डर लगा रहता है कि अगर वो झूठा केस कर देगी तो मेरा जीवन बर्बाद हो जायेगा क्योंकि मैं एक छात्र हूँ और मुझे कहीं नौकरी नही मिलेगी। बिहार की कानून व्यवस्था कैसी है ये बताने की जरुरत नही है। ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए कृपा कर बताएं।


समाधान-

प ने यह नहीं बताया कि आप की चाची ऐसा क्यों करती है। क्या आप लोग एक ही मकान में एक साथ रहते हैं और वह चाहती है कि आप लोग मकान से निकल जाएँ, या क्या कोई संपत्ति है जिसे हड़पने के लिए वह ऐसा करती है? या फिर कोई और कारण है? यदि आप ने कारण बताया होता तो बात स्पष्ट होती और समाधान भी उतना ही स्पष्ट होता। पूरा जरूरी विवरण हमेशा समस्या को सही समाधान की और ले जाता है। खैर।

किसी को भी गाली देना और अपशब्द कहना अपराध है। लेकिन इतना बड़ा अपराध भी नहीं है जिस के लिए पुलिस कोई कार्यवाही करे। इस तरह के अपराध की सूचना पुलिस दर्ज कर लेती है और फिर सीधे न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करने को कहती है। लेकिन झूठी गवाही दे कर किसी मुकदमे में फँसा कर उस के सम्मान या धन को क्षति पहुँचाने की धमकी देना धारा 195ए आईपीसी के अंतर्गत गंभीर अपराध है जिस की शिकायत आप पुलिस को कर सकते हैं, पुलिस इस मुकदमे को दर्ज कर जाँच कर सकती है तब गाली देने और अपशब्द कहने का अपराध भी उस के साथ जुड़ जाएगा। लेकिन आप को इस धमकी का सबूत और गवाही पुलिस को देनी होगी।

इस तरह के कृत्य का बड़ा सबूत इस तरह की धमकी, गालीगलौज व अपशब्दों की रिकार्डिंग हो सकती है। आज कल हर फोन में बातचीत को रिकार्ड करने की सुविधा होती है। अब जब भी चाची ऐसा करें तब उस की आवाज को रिकार्ड करें। जब धमकी सहित गालीगलौज व अपशब्दों की दो चार रिकार्डिंग इकट्ठा हो जाएँ तो पुलिस को रिपोर्ट कराएँ। पुलिस कार्यवाही करेगी। इस तरह आप का डर तो निकलेगा ही चाची को भी मुकदमा झेलना पडे़गा हो सकता है सजा ही हो जाए। आप की समस्या हल हो जाएगी।

समस्या-

बबीता सक्रे ने बैतूल मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं ने बैतूल सिटी की चौकी गैंग पर पुलिस को मेरे पड़ौसी के विरुद्ध रिपोर्ट दी थी। लेकिन पुलिस ने पड़ौसी का पक्ष लिया। उस ने मुझे गालियाँ दीं, अश्लील शब्द कहे, घर के अन्दर घुस कर मेरा हाथ पकड़ा और बलात्कार करने की धमकी दी। उस की माँ ने रोड के बीच जा कर जाति से संबंधित गालियाँ दीं। पर पुलिस का कहना है कि गवाह ले कर आओ, वह लड़का भी वहीं था। जबकि मैं ने वीमेन  हेल्पलाइन पर शिकायत की था इस के बाद एसपी को शिकायत की। तब पुलिस ने 294,323, 506 का मुकदमा बनाया तो मैं ने एफआईआर पर हस्ताक्षर नहीं किए। दूसरे दिन फिर एसपी साहब के पास गयी तो 452 और लगा दी। पर छेड़छाड़ और जाति से संबंधित गाली गलौच का केस नहीं बनाया। इस के चार दिन बाद उस लड़के की बहन की रिपोर्ट पर मेरे पति के विरुद्ध झूठी रिपोर्ट लिख ली जब कि पति उस दिन शहर में ही नहीं थे। पुलिस ने धमकी दी कि राजीनामा नहीं करोगे तो मेरे पति पर 354 का मुकदमा बना देंगे। पुलिस घर आ कर हमें परेशान कर रही है। जिस की शिकायत 181 पर की। एसडीओपी जाँच कर रहे हैं पर पड़ौसी अभी भी हम को धमकी देता है और पुलिस गवाह सबूत लाने को कहती है।

समाधान-

प की समस्या से पता लगता है कि आप के पड़ौसी की मिली भगत पुलिस के साथ है। पुलिस आप की शिकायत पर आप से सबूत और गवाहों के लिए कह रही है। पुलिस का यह कथन सही है यदि अपराध का कोई सबूत और गवाह नहीं मिलते हैं तो पुलिस द्वारा की गयी कार्यवाही न्यायालय में जा कर समाप्त हो सकती है। इस कारण आप को कम से कम परिस्थितिजन्य सबूत तो देने होंगे।

आप के विपक्षी की मिथ्या शिकायत पर पुलिस आप के पति के विरुद्ध कार्यवाही कर रही है तो इस कारण कि आप के विपक्षी ने पुलिस को झूठे ही सही पर कुछ गवाह उपलब्ध कराए होंगे। पुलिस उन की गवाही के आधार पर आप के विरुद्ध कार्यवाही कर सकती है। आप के पति अपना प्रतिवाद पुलिस के समक्ष पेश कर सकते हैं पुलिस द्वारा आप के पति के विरुद्ध न्यायालय में कोई आरोप दाखिल किया जाता है तो आप के पति वहाँ बचाव कर सकते हैं।

आपकी शिकायत पुलिस नहीं सुन रही है। एसपी को भी आप शिकायत कर चुकी हैं। यदि आप के पास परिस्थितिजन्य सबूत हैं तो आप सीधे मजिस्ट्रेट के न्यायालय में अपना परिवाद प्रस्तुत कर सकती हैं और वहाँ अपने गवाहों के बयान करवा कर तथा परिस्थिति जन्य साक्ष्य प्रस्तुत कर मुकदमा दर्ज करवा सकती हैं। इस के लिए बेहतर है कि आप अपराधिक मामले देखने वाले किसी स्थानीय वकील की मदद लें।

अपराधिक केस फर्जी होने पर प्रतिरक्षा करना ही उपाय है।

December 21, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

जितेन्द्र ने शैखपुरा बिहार से समस्या भेजी है कि-

मेरे विरुद्ध एक सरकारी कर्मचारी द्वारा धारा 341, 323, 353, 379, 504, 506/34 में एक फर्जी केस दर्ज करवा दिया है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

जितेन्द्र जी,

प के विरुद्ध मुकदमा हुआ है। केवल आप जानते हैं कि वह फर्जी है। बाकी पुलिस ने तो गवाही और सबूतों के आधार पर ही आरोप पत्र प्रस्तुत किया होगा। इस का एक ही इलाज है कि आप इस मुकदमे में अच्छा वकील करें और अपनी प्रतिरक्षा करें। यदि यह सिद्ध हो जाता है कि यह एक फर्जी मुकदमा है तो आप न्यायालय से यह निवेदन कर सकते हैं कि उक्त मामले में फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले कर्मचारी के विरुदध कार्यवाही की जा कर उसे सजा दी जाए।

यदि आप इस मुकदमे में बरी हो जाते हैं तो आप दुर्भावनापूर्ण अभियोजन के लिए हर्जाना प्राप्त करने के लिए उक्त सरकारी कर्मचारी के विरुदध दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

चाचा के विरुद्ध अपराधिक षड़यंत्र की रिपोर्ट पुलिस को कराएँ।

October 13, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_police-officer4.jpgसमस्या-

बुन्देल सिंह यादव ने पिचूरी, जिला शिवपुरी, मध्यप्रदेश से पूछा है-

मैं 13 वर्ष का था तब मेरे पिताजी का देहान्त हो गया। मेरा चाचा चाची ने अपने बेटे का नाम को मेरे पिताजी के नाम से जोड़ दिया जैसे मेरा बुन्देल सिंह पुत्र श्री जिहान सिंह यादव है उन के बच्चे का नाम रामपाल पुत्र श्री जिहान सिंह यादव रख दिया है। अब कहते हैं कि ये जिहान सिंह का बैटा है। जब कि वह गोपाल सिंह का बेटा है। मैं क्या करूँ।

समाधान-

प के चाचा चाची ने बहुत दूर की कौड़ी ली है। इस तरह आप दोनों आप के पिता के बेटे हो गए। जो संपत्ति चाचा की है वह तो चाचा के पास है उसे वह किसी के नाम वसीयत कर सकते हैं। लेकिन आप के पिता की संपत्ति में भी चाचा का बेटा आधी का हकदार बता सकता है, यह कहते हुए कि वह भी आप के पिता का ही बेटा है। यह एक अपराध और अपराधिक षड़यंत्र है।

आप को चाहिए कि आप इस की पुलिस में रिपोर्ट कराएँ। यदि पुलिस रिपोर्ट पर कार्यवाही करने से इन्कार करे तो एस पी को पत्र के साथ पुलिस को की गयी रिपोर्ट की प्रतिलिपि प्रस्तुत करें। दोनों की रसीद अवश्य रखें। फिर भी कोई कार्यवाही न हो तो आप किसी स्थानीय वकील की सहायता से मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद प्रस्तुत कर उसे पुलिस को जाँच के लिए भिजवाने का प्रयत्न करें। इस मामले में दोनों के डीएनए टेस्ट कराने से स्पष्ट हो जाएगा कि कौन किसका बेटा है। वैसे अन्य पारिवारिक रिश्तेदारों के बयान से और अस्पताल आदि के रिकार्ड से जहाँ बच्चे पैदा हुए या दाई के बयान से भी यह बात साबित की जा सकती है।

बन्दी रखने वाला ससुराल छोड़ कर ही आगे बढा़ जा सकता है।

September 19, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

मोनिका ने हिसार, हरियाणा से पूछा है-

मेरी शादी को पाँच महिने हुए हैं। कुछ दिन बाद से ही मरे ससुराल वाले और पति मुझे परेशान कर रहे हैं। शादी से पहले मुझे बताया था कि मेरा पति ड्रिंक नहीं करता है औऱ शादी के बाद मैं अपनी पढ़ाई जारी रख सकती हूँ। लेकिन ये मुझे पढ़ाई नहीं करने देते हैं, न ही नौकरी करने देते हैं। घर से भी नहीं निकलने देते, मुझे कैद कर रखा है। मेरा पति रोज ड्रिंक कर के घर आता है और मुझ से लड़ाई करता है। मुझे मायके भेजने की धमकी देते हैं। मैं पढ़ना चाहती हूँ, आगे बढ़ना चाहती हूँ कुछ बोलती हूँ तो सब मेरे साथ बोलना बन्द कर देते हैं 20-20 दिन मुझ से कोई नहीं बोलता। मायके गयी तो एक माह तक मुझे लेने कोई नहीं आया। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प के कथनों से एक बात पक्की लग रही है कि आप के ससुराल वालों को आप जैसी बहू नहीं बल्कि घर में बन्द रह कर घर का काम करने वाली बहू चाहिए थी। आम तौर पर विवाह के पहले लोग वायदे कर देते हैं यह सोच कर कि विवाह के बाद सब ठीक हो जाएगा। हमें नहीं लगता कि आप अपनी ससुराल में रह कर पढ़ाई आगे बढ़ा सकती हैं। आप का पति भी ड्रिंक करना नहीं छोड़ेगा। घर के बाहर निकलना भी आप का स्वतंत्रता पूर्वक नहीं हो सकता।

यदि आप इन परिस्थितियों से तंग हैं तो आप अपनी ससुराल छोड़ सकती हैं इस का आप को अधिकार है। क्यों कि आप के साथ ससुराल में वाजिब व्यवहार नहीं हो रहा है जो कि आप के साथ क्रूरता है। यदि आप के मायके वाले सपोर्ट करने में सक्षम हों तो आप मायके जा कर वहाँ नौकरी तलाश कर के नौकरी कर सकती हैं और अपनी पढ़ाई जारी रख सकती हैं। इस के साथ ही आप अपने पति से प्रतिमाह भऱण पोषण राशि प्राप्त कर सकती हैं जिस के लिए आप को धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता अथवा घरेलू हिंसा अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन करने होंगे। आप चाहें तो ससुराल वालों की क्रूरता के लिए उन के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करवा सकती है जिस पर धारा 498ए का मामला दर्ज हो सकता है।

आप यदि वास्तव में अपनी परिस्थितियों को बदलना चाहती हैं तो आप को ससुराल छोड़ना ही पड़ेगा। एक बार ससुराल छोड़ दें फिर किसी अच्छे स्थानीय वकील से मिल कर सलाह करते हुए आगे का रास्ता तय कर सकती हैं।

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