Landlord-Tenant Archive

समस्या-

सत्नू राजपूत ने लखनऊ उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी सासू माँ के मकान में चार दुकानदारों ने दुकान किराए पर ले रखी है। मेरी सासू माँ वेवा महिला है। मेरे ससुर की मृत्यु हो चुकी है। घर पर कमाने वाला कोई नहीं है। उन के दो लड़कियाँ हैं एक की शादी मेरे साथ हो चुकी है एक अभी अविवाहित है। लड़के नहीं हैं। 1-पहले दुकानदार के बड़े भाई ने बिना लिखा के दुकान किराए पर ली थी और बिजली कनेक्शन अपने नाम पर लिया था बीमारी की वजह से दुकान उनका छोटा भाई कर रहा है। अब बड़े भाई की मृत्यु हो चुकी है। बड़े भाई के बच्चे भी साथ नहीं रहते हैं। वो अलग रहते हैं क्या छोटे भाई का अधिकार बनता है। दुकान खाली करने के लिए कहने पर दुकान खाली नहीं कर रहा है, किराया भी बहुत कम देता है। 2-दूसरा दुकानदार 14-15 साल पहले 11माह के एग्रीमेंट पर दुकान किराए पर ली थी। बिना अनुमति के दुकान के अंदर टाइल्स लगवा लिया है। मना करने पर दबँगई दिखाते हैं, किराया भी बहुत कम देता हैं, कहने पर दुकान खाली नही कर रहा है। 3-तीसरे दुकानदार के बड़े भाई ने बिना लिखा पढ़ी के दुकान किराए पर ली थी जो अब दुकान नहीं चलाता है उनका छोटा भाई दुकान चलाता है। खाली करने को कहो तो नहीं कर रहा है। दुकान मिल जाएगी तब खाली करूँगा लगभग 5-6 सालों से कहता चला आ रहा है। बिजली का कनेक्सन भी नही है. 4-चौथा दुकानदार 14-15 साल पहले पीसीओ चलाने के लिए 11 माह के एग्रीमेंट पर दुकान किराए पर ली थी. लगभग 7-8 सालो से पीसीओ की दुकान बंद है। 3-4 सालों से दुकान बंद है। अब दुकान के सामने एक सब्जी वाले को लगा रक्खा है जो बिजली बिल का भुगतान करता है वह सब्जी देता हैं किराया भी नहीं देता है।. अब मेरी सासू मा अपना स्वयं का बिजनेस करना चाहती है। जिसके लिए दुकानों की आवश्यकता है। दुकान खाली करने के उपाय बताएँ।

समाधान-

प की सासू माँ की चारों दुकानें उन का खुद का बिजनेस करने की जरूरत के आधार पर खाली हो सकती हैं। बिजनेस ऐसा हो जिस के लिए चारों दुकानों की जरूरत हो। चारों दुकाने तोड़ कर शो रूम बनाया जा सकता है।

आप वास्तव में सासू माँ की मदद करना चाहते हैं तो तुरन्त दीवानी मामले के किसी वकील से मिलें और चारों के विरुद्ध किराया बढ़ाने, बकाया किराया वसूली और दुकान खाली कराने के लिए मुकदमे दायर कर दे। कई लोग ये सोचते हैं कि अदालत में दुकान मकान को खाली कराने का मुकदमा करेंगे तो कई साल लगेंगे। कई साल तो इस कारण लगते हैं कि अदालतों की संख्या पर्याप्त नहीं है। लेकिन उपाय अन्य कोई नहीं है दुकान मकान खाली कराने का एक मात्र उपाय अदालत के जरीए खाली कराना ही है। आप मुकदमा करने में जितनी देरी करेंगे उतनी ही देरी से आप को राहत मिलेगी। इस कारण देरी न करें।

rp_judge-cartoon-300x270.jpgसमस्या-

कुसुम लाता जैन ने भोपाल, मध्यप्रदेश से पूछा है-

मैं आयु वयस्क विधवा माहिला हूँ।  मेरे पति का देहान्त सन 2002 में हुआ था।  मैं पेन्शन से अपना गुजारा चलाती हूँ।  मेरे पति द्वारा सन 1997 में इस्लामुद्दीन (काबिटपुरा निवासी) शालीमार ट्रेडर्स को केवल 6 माह के लिये दुकान गोदाम के उपयोग के लिए किराये पर दी थी। (पता – 677 नया कबाड़खाना मेनरोड भोपाल) वह दुकान में गोदाम की जगह रिटेल काउंटर चला रहा हैं। उसने दुकान उप-भाड़े पर आपने भतीजे को दे रखी है।  इस से पहले भी इस्लामुद्दीन ने मेरी दुकान को मोहम्मद नवाब को उप-भाड़े पर दे रखी थी।  अब 7 महिने से किराया भी नहीं दे रहा है, ना-ही दुकान खाली कर रहा है।,  मेरे कई बार अनुरोध करने के बाद भी इस्लामुद्दीन दुकान खाली नहीं कर रहा है।  इस्लामुद्दीन  ने  पिछले १९ साल से किरायानामा रिन्यू नहीं किया। जब भी दुकान ख़ाली करने की बात करो तो वह टाल  दता है। हमें धमकी देता है कि दुकान 5 लाख में बेच दो।  हम अपनी दुकान नहीं बेचना चाहते हैं न ही इस्लामुद्दीन को किराये पर देना चाहते हैं मैं मानसिक तनाव एवं प्रताड़ना  की वजह से काफी परेशान रहती हूँ इस्लामुद्दीन के इस व्यवहार से हमेशा तनाव एवं प्रताड़ना महसूस करती हूँ। ये मेरी दुकान हड़पना चाहते हैं।  मैं अपनी बहु के साथ मिल कर व्यापार करना चाहती हूँ जो हमारी जीविका का साधन बने। मुझे स्वयं के व्यापार के लिए दुकान की आवश्यकता है।  मैं ने आपनी जमा पूंजी से पानी की टंकी व दरवाज़े का व्यापार प्रारंभ किया है। मैं कोर्ट केस (court case)  लड़ने  कि हालात मे नहीं हूँ। बताएँ, मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

प के पास दुकान को खाली कराने के बहुत सारे कानूनी आधार हैं। जैसे किराएदार द्वारा छह माह से अधिक का किराया न दे कर किराया अदायगी में कानूनी डिफाल्ट करना, दुकान को शिकमी किराए पर देना और इन दोनों कारणों से अधिक मजबूत कारण यह कि आप अपनी बहू के साथ मिल कर व्यापार कर रही हैं और उस के लिए आप को दुकान की जरूरत है। भोपाल में किसी भी संपत्ति से किराएदार को न्यायालय की डिक्री के निष्पादन में ही हटाया जा सकता है, अन्यथा नहीं। यदि आप समझती हैं कि न्यायालय बिना जाए आप का काम हो जाए तो आप कभी सफल नहीं हो सकेंगी। यदि आप किसी गुंडा गेंग को भी सुपारी दे कर मकान खाली कराना चाहें तो नहीं कर सकेंगी क्यों कि इस मामले में भी शायद आप का किराएदार भारी पड़ेगा। यह एक गलत और गैर कानूनी काम है और इस के लिए आप को जेल भी जाना पड़ सकता है।

यदि आप को दुकान खाली कराना है तो आप को अदालत में ही अर्जी देनी पड़ेगी। अदालत आप इस लिए नहीं जाना चाहती कि वहाँ कई वर्ष तक निर्णय नहीं होता। तो इस में अदालत की गलती नहीं है। इस में राज्य सरकार की गलती है कि उस ने पर्याप्त अदालतें नहीं खोल रखी हैं। राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार के समय 2003 में ही नया किराया कानून बन गया था। बाद में उस के अनुरूप किराया अधिकरण और अपील किराया अधिकरण स्थापित हो जाने से अब दो साल में मुकदमा अधिकरण से तथा साल भर में अपील से निपट जाता है।

जो भी स्थिति है उस में आप को चाहिए कि तुरन्त वकील से मिल कर दुकान खाली कराने का मुकदमा करें। अभी तक मुकदमा न कर के आप ने कई वर्ष बर्बाद कर दिए हैं। जब पहली बार शिकमी किराएदार रखा गया तभी आप दुकान खाली कराने का दावा कर देतीं तो हो सकता था अभी तक दुकान का कब्जा आप को मिल चुका होता।

rp_judge-caricather.jpgसमस्या-

पूनम चौहान ने रतलाम, मध्यप्रदेश से पूछा है-

म किराए के मकान में 30 वर्ष से निवास कर रहे हैं। हमारे मकान मालिक द्वारा बिजली सुविधा नहीं दी गयी है जिस के कारण हम  कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हम मकान का किराया कोर्ट में जमा करते हैं। क्या हमें कानूनन बिजली सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है?

समाधान-

र नागरिक को बिजली सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है। किसी को इस कारण से बिजली सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह किराएदार है।

आप अपने मकान मालिक को नोटिस दीजिए कि वह आप के लिए बिजली सुविधा चालू करे। यदि वह नोटिस की समाप्ति के बाद भी बिजली सुविधा चालू नहीं करता है तो आप बिजली कंपनी से अपने नाम कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं।

यदि बिजली कंपनी आप को कनेक्श्न देने से मना करे तो आप न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर न्यायालय से आदेश करवा सकते हैं कि बिजली कंपनी आप को कनेक्शन प्रदान करे।

मकान मालिक परेशान करता है तो पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराएँ।

September 1, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_property1.jpgसमस्या-

दीप्ति मिश्रा ने कानपुर, उत्तरप्रदेश से पूछा है-

मेरी माँ, पिता और पति सब का देहान्त हो चुका है, कोई भाई भी नहीं है। मैं अपने मायके के किराए के मकान में निवास करती हूँ। मकान 70 वर्ष पुराना है। क्या मेरा मकान मालिक मकान खाली करवा सकता है? पहले ये ट्रस्ट का था. उस ने फाइल जलवा दी। मेरा कोई सहारा नहीं है मैं इस के लिए क्या कर सकती हूँ?

समाधान-

कोई भी कितने भी वर्ष तक मकान में किराएदार रहे लेकिन वह मकान मालिक नहीं हो सकता। आप नगरीय क्षेत्र में किराए के मकान में रहती हैं। यहाँ कोई भी मकान मालिक कानूनी आधार उपलब्ध न होने से मकान खाली नहीं करवा सकता। यदि आप मकान खाली नहीं करना चाहती हैं तो आप मकान मालिक से कह सकती हैं कि आप मकान खाली नहीं कर रही हैं क्यों कि उस के पास मकान खाली कराने का कोई कानूनी आधार नहीं है।

मकान मालिक को मकान खाली करवाना होगा तो वह आप को नोटिस देगा या फिर अदात में मुकदमा करेगा। अदालत में मकान मालिक मकान को खाली करने का आधार बताएगा और साबित करेगा। आप को भी अपना पक्ष रखने का अवसर प्राप्त होगा। यदि वहाँ मकान मालिक अपना पक्ष साबित कर सका तो न्यायालय खाली कराने की डिक्री पारित कर सकता है। आप इस डिक्री के विरुद्ध अपील कर सकती हैं। लेकिन यदि अपील न्यायालय ने भी यही कहा कि मकान खाली करना होगा तो फिर आप को मकान खाली करना होगा।

इस प्रक्रिया के अतिरिक्त मकान खाली नहीं कराया जा सकता। यदि मकान मालिक आप को परेशान या तंग करता है तो आप को उस की शिकायत पुलिस में करनी चाहिए।

किराया बढ़ाने के लिए अदालत में वाद संस्थित करें।

August 9, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rental-agreementसमस्या-

सैफ उल्लाह खान ने बरेली उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मैं ने अपने कुछ गोदाम 800 माहवार पर 2001 से 2006 के मध्य 11 माह किराये के एग्रीमेंट पर दिए। जिस पर एक लाइन यह लिखी कि यदि किरायेदार अपनी किरायेदारी आगे भी कायम रखना चाहेगा तो हर 3 साल के बाद किराये में 10% कि वृद्धि करेगा। आज 10 साल से अधिक हो जाने के बाद भी किराया केवल 1100-1200 तक ही पहुँच पाया है जबकि मार्किट वैल्यू इस समय 2500-3000 है। मैं आपसे ये जानना चाहता हूँ कि क्या इस एग्रीमेंट में एक लाइन हर 3 साल के बाद किराये में 10% कि वृद्धि लिखने से ये तमाम उम्र (मेरी अगली कितनी पीढ़ी तक) वैध हो गया या इस एग्रीमेंट को मैं 5,10 या 15 साल बाद नवीनीकृत करवा सकता हूँ। क्यों कि किरायेदार मुझे हमेशा 3 साल के बाद किराये में 10% कि वृद्धि का ही उल्लेख कर देता है।

समाधान-

क्या आप बता सकते हैं कि आप ने किरायानामा केवल 11 माह की अवधि का ही क्यों कराया? और बाद में तीन साल और किराया वृद्धि की बात क्यों अंकित कर दी गयी? इस का जवाब आप को पता नहीं, बस सब लोग 11 माह का किरायानामा लिखाते हैं तो आपने  भी लिख दिया। सड़क पर, अदालत के आसपास अनेक टाइपिस्ट अपनी मशीनें कम्प्यूटर लिए बैठे हैं, उन के पास किराएनामे के ड्राफ्ट हैं। आप भी उन के पास गए और टाइप करवा लिया तथा नोटेरी से अटेस्ट करवा कर काम पूरा कर लिया। भाई जब पहली बार किरायानामा लिखवा रहे थे तो किसी ढंग के वकील से बात करते। एग्रीमेंट में अंकित एक एक शब्द का अर्थ समझने की कोशिश करते तो यह परेशानी नहीं होती।

ग्यारह मार का किरायानामा मात्र इस कारण लिखाया जाता है कि एक वर्ष का होते ही किरायानामा उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत कराना जरूरी हो जाता है वर्ना उसे साक्ष्य में पढ़ने योग्य नहीं समझा जाता है। उस पर स्टाम्प ड्यूटी भी अधिक लगती है। इन सब से बचने के लिए किरायानामा 11 माह का लिखाया जाता है। फिर यह किरायानामा तो 11 माह के बाद समाप्त हो गया। उस के बाद से वह किराएनामे के कारण नहीं बल्कि किराया कानून के कारण किराएदार है। किराया कानून में यह अंकित है कि किराया बाजार दर के अनुसार कराने  के लिए दावा किया जा सकता है और न्यायालय किराया निर्धारित कर सकता है।

आप को चाहिए कि आप किसी स्थानीय वकील से सलाह ले कर किराया बढ़ाने के लिए वाद संस्थित करें। और इस काम में जल्दी करें क्यों कि किराया उसी तारीख से बढ़ाया जाएगा जिस तारीख को आप वाद न्यायालय में प्रस्तुत कर देंगे।

माता-पिता व वृद्धों के भरण पोषण का कानून

August 3, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

hinduwidowसमस्या-

शीला देवी ने जबलपुर म.प्र. से पूछा है-

मेरी बेटी और दामाद मेरे मकान में कब्जा कर के बैठ गये हैं। ना तो किराया देते हैं ना मकान खाली करते हैं। जब कि मकान मेरे नाम पे है। मेरे पति का देहान्त 1986 में हो गया था। किराए से ही गुजारा चलता था। वो भी ये लोगों ने बन्द कर दिया। मेरा बेटा हैदराबाद में रहता है।

समाधान-

प ने यह नहीं बताया कि आप के बेटी दामाद ने किस तरह आप के मकान में कब्जा किया है? क्या वे किराएदार के बतौर मकान में रहे थे? क्या उन का किरायानामा लिखा गया था। क्या उन्हों ने कभी किराया दिया और आप ने रसीद दी, क्या किसी रसीद पर आप की बेटी या दामाद के हस्ताक्षर हैं? इन तथ्यों के बिना सही उपाय बताया जाना संभव नहीं है। यदि आप दस्तावेजी रूप से यह साबित करने में सक्षम हों कि वे किराएदार की हैसियत से वहाँ निवास कर रहे थे तो आप न्यायालय में उन के विरुद्ध बकाया किराया और बेदखली के लिए वाद प्रस्तुत कर सकती हैं।

यदि ऐसा नहीं है तो आप माता पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण अधिनियम 2007 तथा उस के अंतर्गत बने मध्यप्रदेश के नियम 2009 के अन्तर्गत अपनी बेटी-दामाद तथा पुत्र के विरुद्ध भरण पोषण के लिए आवेदन इस अधिनियम के अन्तर्गत स्थापित अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। इस के लिए आप जिला न्यायालय परिसर में स्थापित विधिक सहायता केन्द्र में स्थापित कानूनी समस्या क्लिनिक से भी सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

मकान खाली कराना है तो जल्दी से जल्दी मुकदमा पेश करें।

July 18, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

rp_law-suit.jpgसमस्या-

गणेश ने कानपुर उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मैं कानपुर में रहता हूँ, मेरे दादाजी ने 35 वर्ष पूर्व एक विधवा महिला को किराए पर कमरा दिया था। अब हम उसे मकान खाली करने को कहते हैं तो वह कमरा खाली नहीं कर रही है। उस की उम्र अधिक होने से वह अपने रिश्तेदारों को अपने साथ रखे हुए है। हमें क्या करना चाहिए?

समाधान-

प ने यह नहीं बताया कि आप उस वृद्ध किराएदार स्त्री से मकान या कमरा खाली क्यों कराना चाहते हैं। नगरीय क्षेत्रों में जहाँ जहाँ किराया नियंत्रण कानून प्रभावी है वहाँ बिना किसी वैध कारण के मकान या परिसर खाली कराया जाना संभव नहीं है। आप को पहले कोई वैध आधार तलाशना पड़ेगा।

इस के लिए आप को किसी स्थानीय वकील से मिल कर उसे सारी बात बतानी चाहिए। फिर वह आप से कानून के अनुसार आवश्यक जानकारी प्राप्त कर यह पता लगाएगा कि आप के पास कमरा खाली कराने के लिए क्या आधार हो सकते हैं? यदि वकील आप को सुझाता है कि एक या एक से अधिक आधारों पर मकान खाली कराने का दावा किया जा सकता है तो आप को वकील की सलाह मानते हुए तुरन्त कमरा खाली कराने का दावा कर देना चाहिए।

देर से कार्यवाही तो परिणाम भी देर से

June 21, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

clothshopसमस्या-

हृदयेश दीक्षित ने फरुक्खाबाद, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

र के नीचे दुकान है 30 साल से दुकान किराए पर है सात साल पहले किराएदार की मृत्यु हो गए  तब से दुकान  उसके पुत्र के पास है जो की ना दुकान खोलता है ना  खाली कर रहा है नाही किराया दे रहा है  अब हम दुकान खाली कराना चाहते हैं, क्या करें?

समाधान-

प बड़े अजीब आदमी हैं। सात साल से दुकान बन्द है और आप हाथ पर हाथ धर कर बैठे हैं। यदि किराएदार जिस काम के लिए परिसर किराए पर ले उसे लगातार छह माह तक उपयोग न करे तो मालिक उस परिसर को खाली कराने का अधिकारी हो जाता है। दुकान के बन्द हुए छह माह होने के बाद यदि आप ने कार्यवाही कर दी होती तो अब तक दुकान आप के कब्जे में होती।

किराया छह माह से अधिक का बकाया होने पर उसे वसूले जाने और परिसर खाली कराने का वाद संस्थित किया जा सकता है। आप को तो सात सालसे किराया नहीं मिला है।

आप तुरन्त किसी स्थानीय वकील से मिलिए और परिसर को खाली कराने का वाद संस्थित करिए। आप के सामने समस्या आएगी कि अदालत से तो बरसों लग जाएंगे। जितना समय लगना है वह तो लगेगा। आप के पास और कोई रास्ता नहीं है। जितनी देर करेंगे उतना ही देर से परिणाम आएगा।

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अभिनव ने रीवा मध्यप्रदेश से पूछा है-

मारे किराएदार जो बहुत पहले से है वह अभी बहुत ही कम किराया देते हैं। ओर खाली करने कीकहने पर 20 लाख रुपयों की मांग कर रहे हैं। दूसरे लोगों को किराए पर दे कर खुद अच्छा किराया वसूल करते हैं। क्या उन से आसानी से हटाया जा सकता है या किराया बढ़ाया जा सकता है। क्या लोक अदालत में इस की कार्यवाही हो सकती है?

समाधान-

म ने हमेशा कहा है कि किराएदार किराएदार ही रहता है वह कभी मकान मालिक नहीं हो सकता। किराएदार कम किराया देता है तो उस का कारण है कि आप ने किराया बढ़ाने के लिए कभी कानूनी कार्यवाही नहीं की। यदि समय रहते आप ने किराया बढ़ाने की कार्यवाही की होती तो अब तक किराया बढ़ चुका होता। यदि आप किराया बढ़ाना चाहते हैं तो आप को न्यायालय में कार्यवाही करनी ही होगी।

आप के किराएदार आप को कम किराया देता है और उस ने अन्य व्यक्ति को वही परिसर या उस का कोई भाग अधिक किराये पर दे रखा है तो आप को इस बात के सबूत एकत्र करना चाहिए कि आप के किराएदार ने परिसर को शिकमी किराएदारी पर चढ़ा दिया है। यदि आप के किराएदार ने परिसर को शिकमी किराएदार को चढ़ा दिया है तो आप इसी आधार पर अपना परिसर खाली करवा सकते हैं।

किराएदार से परिसर खाली कराने का हर राज्य में अलग कानून बना है। इसी तरह मध्यप्रदेश में भी है। आप को तुरन्त किसी वकील से संपर्क करना चाहिए। आप किराया भी बढ़ा सकते हैं और परिसर खाली भी करवा सकते हैं। वकील आप से जरूरी सारे तथ्य जान कर उपाय बता सकता है।

कई लोग सोचते हैं कि अदालत में मुकदमा करने से बहुत समय लगेगा। तो अदालत में समय तो लगता है। कितना समय लगेगा यह स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। यदि अदालत में मुकदमे बहुत अधिक संख्या में लंबित हैं तो समय भी अधिक लगेगा। मुकदमों में देरी होने का कारण अदालतों की संख्या का बहुत कम होना है। देश के मुख्य न्यायाधीश ने देश भर में 70000 अदालतों की और जरूरत बताई है। जब तक देश में पर्याप्त अदालतें नहीं होतीं तब तक मुकदमों के निर्णय में देरी होना जारी रहेगा। वैसे अधीनस्थ न्यायालय स्थापित करने का दायित्व राज्य सरकार का है। लोगों को चाहिए कि अधिक अदालतें स्थापित करने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाएँ।

लेकिन यह सोच गलत है कि अदालत में मुकदमा करने से देरी होगी इस कारण अन्य उपाय तलाशा जाए। अन्य कोई भी वैध उपाय उपलब्ध नहीं है इस कारण आप को जाना तो अदालत ही पड़ेगा। आप अदालत जाने में जितनी देरी करेंगे उतनी ही देरी से आप को राहत प्राप्त होगी। इस कारण मुकदमा करने में देरी न करें।

लोक अदालत में न्याय बिलकुल नहीं मिलता। वहाँ भी मजबूर पक्ष को ही झुकना पड़ता है और जो कुछ मिल रहा है उस पर इसलिए सब्र करना पड़ता है कि अदालतें समय रहते न्याय करने में सक्षम नहीं हैं। वस्तुतः लोक अदालतें तो लोगों को न्याय प्राप्ति से दूर करने की तरकीब है जो सरकारों और न्यायपालिका ने मिल कर तलाश कर ली है। यह पूरी तरह से न्याय से विचलन है।

Shopsसमस्या-

संजीव ने लुधियाना, पंजाब से समस्या भेजी है कि-

मेरी दुकान 42 साल से किराये पर है। दुकान के मालिक ने उसको अपनी निजी जरुरत बता कर खाली करवाने के लिए एक साल पहले केस किया हुआ है। हम ने आज तक का जो भी बनता किराया है वह दिया हुआ है। क्या मेरी दूकान का मालिक इसको अदालत द्वारा खाली करवा सकता है।

समाधान-

दि किसी व्यक्ति ने अपनी संपत्ति वह चाहे आवासीय हो अथवा व्यवसायिक किराए पर दे रखी है और उसे स्वयं अपनी निजी आवश्यकता के लिए उस की सद्भाविक और युक्तियुक्त आवश्यकता हो तो वह किराएदार से अपनी संपत्ति को खाली करवा कर कब्जा ले सकता है। किराएदारी को समाप्त करने और संपत्ति का कब्जा किराएदार से वापस प्राप्त करने का यह सब से मजबूत आधार है।

संपत्ति के स्वामी को न्यायालय के समक्ष बस इतना साबित करना है कि उसे या उस के परिवार के किसी सदस्य को उस संपत्ति की सद्भाविक और युक्तियुक्त आवश्यकता है।

स तरह के मामलों में आम तौर पर न्यायालय का निर्णय मकान मालिक के पक्ष में ही होता है। अपील में भी निर्णय अक्सर मकान मालिक के पक्ष में रहता है। दो न्यायालयों का निर्णय मकान मालिक के पक्ष में होने पर कोई विधिक बिन्दु न होने पर दूसरी अपील में प्रारंभिक स्तर पर ही निर्णय हो जाते हैं।

स तरह के मामलों में दूसरी अपील में किराएदार अधिक से अधिक कुछ समय अपने व्यवसाय को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए समय मांग सकता है। हमारी राय में यदि मकान मालिक की निजी या किसी परिवार के सदस्य की जरूरत के आधार पर व्यवसायिक परिसर खाली कराने का मुकदमा किराएदार के विरुद्ध हो तो उस किराएदार को अपने व्यवसाय के लिए वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था करना आरंभ कर देना चाहिए। जिस से परिसर का कब्जा देने की स्थिति में उस के व्यवसाय को नुकसान न उठाना पड़े।

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