Legal Remedies Archive

समस्या-

मेरे ऊपर धारा 498a आईपीसी तथा घरेलू हिंसा अधिनियम में प्रकरण लंबित हैं, साक्ष्य हो चुकी है, साक्ष्य में उन्होंने दहेज देना स्वीकार किया है, दहेज देना अपराध है, कार्यवाही कैसे हो उन पर?

-रामकिशोर, मारवाड़ी का बाग, उनाव रोड, जिला दतिया, मध्य प्रदेश

समाधान-

हेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 के अंतर्गत दहेज लेना और दहेज देना तथा दहेज लेने या देने के लिए प्रतिज्ञा या संविदा करना अपराध है। इस अपराध के लिए अभियुक्त को अपराध साबित हो जाने पर छह माह तक का कारावास और 5 हजार तक के जुर्माने का दंड दिया जा सकता है। यह अपराध जमानतीय है और प्रसंज्ञेय नहीं है, अर्थात इस में प्रसंज्ञान लेने पर अभियुक्त को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए जमानती वारंट ही जारी किया जा सकता है तथा न्यायालय में उपस्थित होने पर उसे जमानत पेश करने पर हिरासत में नहीं लिया जा सकता है।

इस अपराध का परिवाद मजिस्ट्रेट के न्यायालय में ही प्रस्तुत किया जासकता है और मजिस्ट्रेट को अपराध घटित होने के 1 वर्ष की अवधि में प्रसंज्ञान लेने का अधिकार है उस के पश्चात नहीं जिस का सीधा अर्थ है कि यह अपराध घटित होने के एक वर्ष की अवधि में यदि सक्षम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत नहीं किया गया तो फिर इस अपराध के संबंध में कोई कार्यवाही किया जाना संभव नहीं है। आप के मामले में यदि दहेज देने की अभिस्वीकृति में एक वर्ष पूर्व दहेज देना स्वीकार किया गया है तो कोई कार्यवाही किया जाना संभव नहीं होगा।

समस्या-

मेरी मां की मृत्यु 2 साल पहले हो चुकी है। मेरे पिता हम लोगो से 15 साल से अलग दुसरी औरत के साथ रह  रहे हैं। हम  जो लोग के पास जो मकान और जमीन हैं वो मां के नाम हैं। कया  मेरे पिता को यह अधिकार है कि  मेरी मां की  सपंति का दुरुपयोग कर पायेगे।

-राहुल, रांची, झारखंड

समाधान-

प की माँ के नाम से जो जमीन और मकान हैं वे सभी आप की माँ की एब्लोल्यूट संपत्ति थीं। उन की मृत्यु के साथ ही उन का उत्तराधिकार तय हो गया और संपत्ति का आधिकार उन के उत्तराधिकारियों को प्राप्त हो चुका है। हिन्दू स्त्री का उत्तराधिकार हिन्दू उत्तराधिाकर अधिनियम की धारा 15 व 16 से निर्धारित होता है।

प्राथमिक रूप से एक स्त्री की संपत्ति पर उत्तराधिकार उस की संतानों और और पति का होता है। लेकिन यदि कोई संपत्ति उसे अपने मायके से मिली हो तो उस पर पति का अधिकार नहीं होता। यदि उक्त संपत्ति या उस का कोई भाग आप की माताजी को अपने मायके से प्राप्त हुई है तो उस में आप के पिता का कोई अधिकार नहीं है।

यदि संपत्ति आप के माता पिता की आय से बनी है तो उस में आप के पिता का भी हिस्सा है। इस कारण आप यदि चार भाई बहिन हैं तो एक पिता का हिस्सा जोड़ कर कुल पाँच हिस्से हुए और पाँचवें हिस्से पर आप के पिता का अधिकार है वे चाहेँ तो उसे आप से ले सकते हैं, लेकिन उस के लिए उन्हें पहले संपत्ति का कानूनी तौर पर विभाजन करना होगा। हालांकि वे चाहें तो बिना विभाजन के अपना हिस्सा किसी को हस्तांतरित कर सकते हैं। इस से जैसे अभी वे हिस्सेदार हैं वैसे ही खरीददार हिस्सेदार हो जाएगा।

समस्या-

मैंने अपने पति इरशाद अली  पर भरण पोषण का मुकदमा किया था, जिसका फैसला 1 दिसम्बर 2017 को मेरे पक्ष में हुआ। मेरे लिये 5000 और दोनों बेटो के लिये 2500, 2500 रुपये का प्रतिमाह का खर्चा निश्चित किया गया। परंतु उस के दूसरे दिन मेरे पति और उनकी बहन ने मुझे वापस ससुराल ले जाने के लिये ज़ोर देने शुरू कर दिया और सामाजिक दबाव के चलते मुझे वापस ससुराल आना पड़ा।  मुझे बताये बिना मेरे पति ने न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील लगायी है, परंतु न तो वो खुद किसी तारीख पर गये न मुझे जाने दिया। मुझे मेरे मायके भी नहीं जाने देते,  न ही किसी को मुझसे मिलने देते हैं, मुझे मारते पीटते हैं, मेरी सास मुझे और मेरे बच्चों को खाने का सामान भी नहीं देती है। कई बार मेरे पति गैस का सिलेंडर निकाल कर कमरे में बंद कर देते हैं। मेरी सास राशन के कमरे में ताला लगा कर रखती हैं, मेरे पति मुझे तलाक भी नहीं देना चाहते और दूसरा विवाह करना चाहते हैं। 2 बार जब मेरे पति ने मुझे बुरी तरह मारा पीटा तब मैंने महिला हेल्प लाइन को 181 पर कॉल की थी उन लोगो ने केवल समझौता करा दिया। लेकिन उसके बाद से मेरे सास और पति ने मेरे कमरे का बिजली का कनेक्शन काट दिया ताकि मैं मोबाइल चार्ज न कर पाऊँ।  मेरा मायका ससुराल से 360 किलोमीटर दूर है, मैं अपनी सास के घर में नही रहना चाहती। मेरी इच्छा है कि मैं किसी किराये के कमरे में अपने दहेज़ का सामान ले आऊं और जो खर्च न्यायालय द्वारा मुझे मिलना तय हुआ था वो मै यहाँ अपने ससुराल के क्षेत्र के न्यायालय से प्राप्त कर सकूँ। क्या यह कानूनी रूप से सम्भव है? यदि हां तो इसके लिये मुझे क्या करना होगा?

– जूही, मुसाफिरखाना, अमेठी, उत्तर प्रदेश

समाधान-

धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता में जो मेंटीनेंस का आदेश हुआ है उस के अनुसार आप के पति को आप को प्रतिमाह गुजारा भत्ता देना चाहिए। वे नहीं दे रहे हैं तो आप धारा 125(3) के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं जिस में गुजारा भत्ता ने देने के लिए हर माह आप के पति को जैल भेजा जा सकता है। लेकिन यह आवेदन मजिस्ट्रेट के उसी न्यायालय में प्रस्तुत करना पड़ेगा जिस ने उक्त धारा 125 का आदेश प्रदान किया था।

आप अलग निवास स्थान चाहती हैं जिस का खर्चा आप का पति दे और आप को धारा 125 के अंतर्गत जो आदेश हुआ है उस के मुताबिक आप को अपने और बच्चों के लिए मुआवजा मिल सके। इस के लिए आप को महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा-12 के अंतर्गत स्थानीय (जहाँ आप के पति का निवास है और आप रह रही हैं) न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करना होगा।

इस परिवाद में आप सारी परिस्थितियों का वर्णन कर सकती हैं। कि किस तरह धारा 125 का गुजारे भत्ते का आदेश हो जाने पर आप को धोखा दे कर आप के पति ले आए और उस के बाद आप के साथ लगातार हिंसा का व्यवहार हो रहा है। परिस्थितियाँ ऐसी हैं कि आप अपने पति के साथ या ससुराल वालों के साथ नहीं रह सकतीं। इस लिए पति को आदेश दिया जाए कि वह आप के लिए अलग आवास व्यवस्था करे और आप के व बच्चों के लिए प्रतिमाह गुजारा भत्ता दे। इस के साथ ही पति व उस के ससुराल वालों को पाबंद किया जाए कि वे आप के प्रति किसी तरह की हिंसा न करें और आप से दूर ही रहें। इस के लिए आप को किसी स्थानीय वकील से मिलना होगा जो इस तरह का आवेदन कर सके।

माँ के पूर्व पति की संपति में हिस्सा।

August 17, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

 

समस्या-

ब कोई विधवा स्त्री अपने पति की मृत्यु के बाद किसी अन्य व्यक्ति के साथ शादी कर लेती है, तो क्या दूसरे पति से जन्मे बच्चे उस स्त्री के पहले पति की संपति में हिस्सा ले सकते हैं? क्या उस पहले पति के लड़के को उस स्त्री के दूसरे पति से जन्मे लड़के को हिस्सा देना पडेगा?

-विजय कुमार, ग्राम दरौली, जिला, सिवान (बिहार)

समाधान-

कोई भी स्त्री विधवा तब होती है जब उस के पति की मृत्यु हो जाए। मृत्यु के साथ ही उस के पति की संपत्ति का उत्तराधिकार तय हो जाता है। यदि उस के पति के एक पुत्र था तो दो उत्तराधिकारी हुए एक पुत्र और दूसरा पत्नी। इस तरह मृत व्यक्ति की संपत्ति में दो लोग हिस्सेदार हो गए।

विधवा स्त्री ने दूसरे व्यक्ति से विवाह कर लिया। उसके वहा और संतानें हो गयीं। उन संतानों का अपनी माँ के पूर्व पति की संपत्ति के उस हिस्से पर कोई अधिकार नहीं है जो उन के सौतेले भाई का है। लेकिन उन की माँ को जो आधा हिस्सा मिला है उस पर उस की मृत्य के उपरान्त पूर्व पति व दूसरे पति से उत्पन्न सभी संतानों को समान उत्तराधिकार मिलेगा।

आप ने अपनी समस्या न पूछ कर केवल एक कानूनी प्रश्न पूछा है। हम आम तौर पर ऐसे प्रश्नों का उत्तर नहीं देते। लेकिन इस तरह की भ्रान्तियों को दूर करने के लिए हम उत्तर दे रहे हैं। सभी पाठको से अनुरोध है कि हमें समस्या भेजें तो हम समाधान कर पाएंगे। कानूनी प्रश्नों का जवाब पाने के लिए किसी दूसरे साधन का उपयोग करें या फिर खुद कानून का अध्ययन करें।

समस्या –

क अचल संपत्ति मकान जिसकी रजिस्ट्री वर्तमान में मेरी दादी के नाम पर है एवं मेरी दादी का स्वर्गवास वर्ष 2009 में हो चुका है एवं मेरे दादा जी का भी स्वर्गवास वर्ष 2002 में हो चुका है।  मेरी दादी की चार संतानें जिसके अंतर्गत मेरे पिताजी, मेरे ताऊजी एवं मेरी दो बुआजी (पिताजी की बहनें) हैं एवं मेरे पिताजी की दो संताने जिसके अंतर्गत मैं स्वयं एवं मेरी बहन शामिल है एवं मेरी स्वयं की चार संताने जिसके अंतर्गत मेरे चार पुत्र हैं।  मेरे ताऊजी की तीन संताने जिसके अंतर्गत ताऊजी का एक पुत्र और दो पुत्रियाँ हैं एवं ताऊजी का जो पुत्र है उसकी भी चार संतानें जिसके अंतर्गत उसके चार पुत्र हैं। अब सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि उपरोक्त वर्णित अचल संपत्ति मकान में उपरोक्त वर्णित सभी सदस्यों में से कौन-कौन कानूनी रूप से हिस्सेदार हैं। उपरोक्त वर्णित अचल संपत्ति मकान में उक्त वर्णित मेरी दोनों बुआजी की संतानें भी क़ानूनन भागीदार है क्या? उपरोक्त वर्णित अचल संपत्ति मकान में उक्त वर्णित मेरे ताऊजी की दोनों बेटियों की संतानें एवं मेरी बहन की संतानें भी कानूनन भागीदार हैं क्या? उपरोक्त लिखित समस्या के प्रत्येक बिन्दु पर विस्तृत जानकारी देने का आभार करें।

– अभिषेक बंसल, तहसील व जिला ग्वालियर, मध्यप्रदेश

समाधान-

कान का स्वामित्व आप की दादी का था। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 14 के अंतर्गत यह उपबंध है कि किसी भी हिन्दू स्त्री की संपत्ति उस की एब्सोल्यूट संपत्ति होती है। अर्थात उस में कोई भागीदार नहीं होता। इस कारण आप की दादी के नाम की यह संपत्ति पुश्तैनी संपत्ति नहीं है।

आप की दादी के देहान्त के उपरान्त अधिनियम की धारा 15 के अंतर्गत इस संपत्ति का उत्तराधिकार खुला है। धारा 15 में किसी भी स्त्री की संपत्ति के उत्तराधिकारी प्रथमतः उस स्त्री के पुत्र पुत्री व पति हैं। आप के दादाजी का देहान्त पूर्व में ही हो चुका है। इस कारण से आप की दादी की उक्त संपत्ति के उत्तराधिकारी उन के पुत्र अर्थात आप के पिता, आप के ताऊजी और आप की बुआएँ हुई हैं। सभी एक चौथाई हिस्से के अधिकारी हैं। जब तक ये चारों जीवित हैं इस संपत्ति पर किसी भी अन्य व्यक्ति का कोई अधिकार नहीं है। इन चारों में से किसी की मृत्यु हो जाने पर उस के हिस्से का उत्तराधिकार खुलेगा जो कि या तो उस व्यक्ति की वसीयत के अनुसार होगा और यदि कोई वसीयत नहीं की गयी तो पुरुष के मामले में उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-8 से तथा स्त्री होने पर धारा-15 के आधार पर खुलेगा। यदि इन चारों में से कोई हिस्सेदार चाहे तो बंटवारा करवा सकता है, या बिना बंटवारे के अपने हिस्से को विक्रय कर सकता है।

अपनी संपत्ति की सुरक्षा नहीं करेंगे तो उसे खो बैठेंगे।

August 12, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मैंने अपना मकान किराए पर दुकान चलाने के लिए दिया था।  आपसी सहमति के कारण कोई एग्रीमेंट नहीं लिखा गया था।  किराएदार लगभग 8 साल से रह रहा है।  4 साल का किराया नहीं दिया है। किराया मांगने पर किराया नहीं दे रहा है।  कहने पर दुकान खाली नहीं कर रहा है।  उसके पास कोई भी कागजी तौर पर सबूत नहीं है। उल्टा फर्जी जाकर कोर्ट में मुकदमा कर दिया है कहता है मकान मैंने बनवाया है। किराएदार के पास कोई भी लिखित प्रमाण नहीं है कि मैंने यह रूम किराए पर लिया है।  जबकि मकान मालिक के नाम (बिजली ,मकान नक्शा ,खतौनी, नगर पालिका टैक्स रसीद) है।  किरायादार जो किराया देता था वह भी रसीद काट कर नहीं  देता था। किराएदार पूर्ण रूप से इन लीगल तरीके से रह रहा है। क्या इसे पुलिस की मदद से हटाया जा सकता है ?  कृपया इस समस्या का हल बताए।

-वासदेव चौधरी, गाँव – बिहरा पोस्ट – ऊँचगाव  जिला – बस्ती  उत्तर प्रदेश

समाधान-

प जिस मुसीबत में फँसे हैं वह आप की खुद की मूर्खता और काहिली का सबूत है। पहले जब मकान किराए पर दिया तब आप को कम से कम उस से यह लिखाना चाहिए था कि वह मकान किराए पर ले रहा है। किरायानामा लिखने का प्राथमिक उद्देश्य यही होता है कि किराएदार की स्वीकृति मकान मालिक के पास रहे कि वह उस मकान पर बहैसियत किराएदार ही काबिज है। यदि यह होता तो आप को परेशानी नहीं होती।

आप ने किरायानामा नहीं लिखवाया और चार साल तक किराया लेते रहे तब उसे चार साल के किराए की रसीद देनी चाहिए थी और उस की काउंटर प्रति पर किराएदार के हस्ताक्षर होने चाहिए थे जिस से आप के पास यह सबूत हो जाता कि वह किराएदार है। आप ने यह भी नहीं किया।

जब चार साल पहले किराएदार ने किराया देना बंंद कर दिया तब आप को उस पर बकाया किराया वसूली का मुकदमा करना चाहिए था। आप ने चार साल तक वह मुकदमा भी नहीं किया।

अब जब वह खुद यह कहते हुए अदालत चला गया है कि मकान उस का खुद का है आप परेशान हो रहे हैं तो गलत क्या है? जो व्यक्ति समय रहते अपने अधिकारों की सुरक्षा नहीं करता वह ऐसे ही अपने अधिकार खो देता है।

आप को सब से पहले यह करना चाहिए कि कोई ऐसा सबूत तलाशना चाहिए जिस से यह साबित कर दें कि किराएदार आप के मकान में किराएदार है। यदि ऐसा कोई सबूत मिल जाता है तो आप किराएदार द्वारा किए गए मुकदमे में अपना बचाव कर सकेंगे। इस के साथ ही आप को पिछले 3 वर्ष के बकाया किराए और डिफाल्ट व व्यक्तिगत जरूरत के आधार पर मकान खाली करने हेतु बेदखली के लिए दीवानी वाद दाखिल करना चाहिए। यह काम आप से साक्षात्कार कर के वकील कर सकता है। इस कारण बेहतर है कि आप अपने यहाँ के बेहतर से बेहतर वकील करें, जो आप को इस मुसीबत से निजात दिला दे। हम ने अपने जीवन में अनेक मामले देखे हैं जिन में मकान मालिक की काहिली के कारण लोग कब्जा कर के खुद मालिक बन बैठे हैं। इस कारण शीघ्रता कीजिए और अच्छा वकील तलाश कर बचाव के साथ साथ बेदखली की कार्यवाही भी कराइए।

समस्या-

मेरे दादाजी की 6 हेक्टेयर जमीन है,और हम उनके जीते जी ही जमीन का नामांतरण कराना चाहते है,पिताजी के नाम पर,या डायरेक्ट मेरे नाम पर। मेरी 2 बुआजी है, तो क्या कर सकते हैं हम? ,और नामांतरण शुल्क तथा वसीयत के बारे में बताएँ।

-अनिल गुर्जर, ग्राम पोखरनी, तहसील टिमरनी, जिला हरदा, मध्यप्रदेश

समाधान-

प का प्रश्न बिना पूर्ण विवरण के है। आपने यह नहीं बताया कि उक्त भूमि आप के दादाजी की स्वअर्जित है या फिर पुश्तैनी है। यदि पुश्तैनी है तो उस में आप के दादाजी का नाम होते हुए भी आप के पिताजी और दोनों बुआएँ भी जन्म से भागीदार हो सकती हैंं। वैसी स्थिति में दादाजी केवल अपने हिस्से की जमीन को ही हस्तान्तरित कर सकते हैं आपके पिता और बुआओँ के हिस्से की जमीन को हस्तान्तरित नहीं कर सकते।

हम यदि यह मान लें कि उक्त भूमि आप के दादाजी की स्वअर्जित है तो उन के जीवनकाल में उक्त भूमि आप के पिता या आप के नाम केवल हस्तान्तरण से ही संभव है। वह विक्रय पत्र या दानपत्र के पंजीकरण से ही संभव है। इस में भूमि के बाजार मूल्य का 7-10 प्रतिशत खर्चा आ सकता है। इस संबंध में आप को अपने उप पंजीयक के कार्यालाय से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। एक बार दान पत्र या विक्रय पत्र का पंजीयन हो जाने पर आप उस के आधार पर नामांतरण करवा सकते हैं।

अत्यधिक कम खर्च मे ंउक्त भूमि को आप के या आप के पिताजी के नाम हस्तांतरित कराने का तरीका यह है कि आप के दादाजी जिस के नाम भी उक्त भूमि को हस्तांतरित कराना चाहते हैं उस के नाम वसीयत कर दें और उस वसीयत को उपपंजीयक के यहाँ पंजीकृत करा लिया जाए। आप के दादाजी के जीवनकाल के बाद आप उस वसीयत के आधार पर नामांतरण करवा सकते हैं। लेकिन दादाजी आपनी वसीयत को अपने जीवनकाल में कभी भी निरस्त कर सकते हैं या बदल सकते हैं।

समस्या-

मेरे पति की असामयिक मृत्यु हो गयी है।  मेरे पति को पैतृक संपत्ति में 4 बीघा जमीन हिस्से में आई थी।  क्या मेरे पति की मृत्यु के बाद मेरा कोई हक उस पैतृक संपत्ति में बनेगा अथवा नही?  मैंने अभी कोई दूसरी शादी नही की है। अगर मेरे मां बाप मेरी दूसरी शादी कर देते हैं तो मेरा पैतृक संपत्ति जो मेरे पति की थी क्या मैं उस पर दावा कर सकती हूँ?

-लता देवी,  2/881 कोर्ट रॉड सहारनपुर

समाधान-

प के पति की जो भी स्वअर्जित संपत्ति थी अथवा पुश्तैनी सहदायिक संपत्ति में जो भी उन का हिस्सा था वह आप के पति की मृत्यु के साथ ही उत्तराधिाकार में आप को प्राप्त हो चुका है। आप उसे प्राप्त करने के लिए दावा कर सकती हैं।

यदि आप दूसरा विवाह करती हैं तो भी आप का इस संपत्ति पर यह अधिकार बना रहेगा। वह आप के विवाह करने से समाप्त नहीं होगा। आप चाहें तो विवाह के बाद भी दावा कर सकती हैं। लेकिन आप को यह दावा समय रहते करना चाहिए। क्यों कि अक्सर ऐसा होता है कि आप दावा करते हैं तब तक दावा करने की कानूनी समयावधि समाप्त हो जाती है और आप दावा करने से वंचित हो सकती हैं। इस कारण आप को चाहिए कि तुरन्त किसी वकील से परामर्श कर के कार्यवाही करें।

पिता के रहते बंटवारे में पिता का भी हिस्सा है।

July 28, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मारे पिता की दो पत्नी थी मेरी माँ का देहांत हो चुका है मेरी शौतेली माँ का एक लड़का है  मेरे पिताजी शौतेली के कहने पर मुझे सम्पत्ति  (4 बिघा खेत और घर) देने से इनकार कर रहे हैं। मुझे1/2 सम्पत्ति चाहिए किन्तु वे 1/3 का बँटवारा कर रहै है। क्या हमें कोर्ट द्वारा 1/2 का भागीदार हो सकते हैं?  उचित जानकारी दे।

RAJU GUPTA
गाँव फुटिया जिला चन्दौली राज्य उत्तरप्रदेश

समाधान-

जिस संपत्ति का बंटवारा किया जा रहा है वह पुश्तैनी संपत्ति है तो उस नें आप के और आप के सौतेले भाई के सिवा आप के पिता का भी हिस्सा है। यदि पिताजी के रहते बंटवारा होता है तो एक हिस्सा पिताजी के पास भी तो रहेगा। इस तरह आप को एक तिहाई हिस्सा ही आप को मिलेगा।  पिता के जीवनकाल के उपरान्त यदि वे अपने हिस्से की वसीयत नहीं करते हैं या अपने जीवनकाल में अपने हिस्से को हस्तान्तरित नहीं करते हैं तो उन के पास के हिस्से का उत्तराधिकार उन के जीवनकाल के बाद खुलेगा। तब आप दोनों सौतेले भाइयों को आधा आधा हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार होगा। अभी आप के पिता जो कर रहे हैं वह सही है।

पिता के जीवित रहते पुश्तैनी संपत्ति का बंटवारा

July 22, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मारे पिता की दो पत्नी थी मेरी माँ का देहांत हो चुका है मेरी शौतेली माँ का एक लड़का है  मेरे पिताजी शौतेली के कहने पर मुझे सम्पत्ति  (4 बिघा खेत और घर) देने से इनकार कर रहे हैं। मुझे1/2 सम्पत्ति चाहिए किन्तु वे 1/3 का बँटवारा कर रहै है। क्या हमें कोर्ट द्वारा 1/2 का भागीदार हो सकते हैं?  उचित जानकारी दे।

RAJU GUPTA
गाँव फुटिया जिला चन्दौली राज्य उत्तरप्रदेश

समाधान-

पुश्तैनी का पिता के रहते बंटवारा किया जाएगा तो आप को तीसरा हिस्सा ही मिल सकता है। पुश्तैनी संपत्ति में  एक हिस्सा पिता के पास भी तो रहेगा। उन के पास के हिस्से का उत्तराधिकार उन के जीवनकाल के बाद खुलेगा। बशर्ते कि उस से पहले वे वसियत नहीं कर जाएँ।

 

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada