Partition Archive

समस्या-

सुनीता ने निजामुद्दीन, दिल्ली से हरियाणा राज्य की समस्या भेजी है कि-


पावर ऑफ़ अटोर्नी क्या होता है? क्या यह रजिस्ट्री जैसा ही होता है? मैंने जिससे जमीन खऱीदी है, वो यही बोल रहा है। मैं ने प्लाट बल्लबगढ़ हरयाणा में लिया है और वो जेवर, यूपी में बोल रहा है पावर ऑफ़ अटोर्नी करने के लिए। क्या यह सही है? क्या इससे हम बाद में बिना बिल्डर के ही  रजिस्ट्री करा सकते हैं?


समाधान-

आप को और लगभग सभी लोगों को यह समझना चाहिए कि रजिस्ट्री, विक्रय पत्र यानी सेल डीड और पावर ऑव अटॉर्नी अर्थात मुख्तारनामा क्या होते हैं। हम यहाँ बताने का प्रयत्न कर रहे हैं-

रजिस्ट्री या रजिस्ट्रेशन या पंजीकरण-

जब आप कोई पत्र किसी को भेजना चाहते हैं तो साधारण डाक से लिफाफे पर टिकट लगा कर डाक के डब्बे में डाल देते हैं। यह साधारण पत्र होता है। लेकिन जब आप उस पर अधिक (25 रुपए) का डाक टिकट लगा कर तथा एक अभिस्वीकृति पत्र जिस पर आपका व पाने वाले का पता लिख कर डाक घर में देते हैं तो डाक घर आप को रसीद देता है। आप उस के लिए कहते हैं की हमने रजिस्ट्री से चिट्ठी भेजी है। इस चिट्ठी को भेजने के सबूत के तौर पर आपके पास डाकघर की रसीद होती है। डाकघर यह जिम्मेदारी लेता है कि जो अभिस्वीकृति पत्र आप ने लिफाफे के साथ लगाया है उस पर पाने वाले के हस्ताक्षर करवा कर आप के पास लौटाएगा। यदि 30 दिनों में अभिस्वीकृति पत्र आप को वापस नहीं मिलता है तो आप डाकघर को पत्र दे कर पूछ सकते हैं कि उस ने उस पत्र का क्या किया। इस पर डाकघर आप को एक प्रमाण पत्र देता है कि आप का पत्र फलाँ दिन अमुक व्यक्ति को अमुक पते पर डिलीवर कर दिया गया है। अब आप रजिस्टर्ड पत्र या रजिस्ट्री शब्द का अर्थ समझ गए होंगे कि आप का पत्र आप के द्वारा डाक में देने से ले कर पाने वाले तक पहुँचने  तक हर स्थान पर रिकार्ड़ में दर्ज किया जाता है।

इसी तरह जब  कोई भी दस्तावेज जैसे विक्रय पत्र, दान पत्र, मुख्तार नामा, गोदनामा, एग्रीमेंट, राजीनामा, बंटवारानामा आदि लिखा जाता है तो उस में किसी संपत्ति के हस्तांतरण या हस्तान्तरण किए जाने का उल्लेख होता है। अधिकारों का आदान प्रदान होता है। तब उस दस्तावेज को हम डीड या विलेख पत्र, या प्रलेख कहते हैं। हमारे यहाँ पंजीकरण अधिनियम (रजिस्ट्रेशन एक्ट) नाम का एक केन्द्रीय कानून है जिस के अंतर्गत यह तय किया हुआ है कि कौन कौन से दस्तावेज हैं जिन का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा, कौन से दस्तावेज हैं जिन का ऐच्छिक रूप से आप पंजीयन करा सकते हैं। इस के लिए हर तहसील स्तर पर और नगरों में एक या एक से अधिक उप पंजीयकों के दफ्तर खोले हुए हैं जिन में इन दस्तावेजों का पंजीयन होता है। यदि पंजीयन अधिनियम में किसी दस्तावेज की रजिस्ट्री कराना अनिवार्य घोषित किया गया है तो उस दस्तावेज की रजिस्ट्री अनिवार्य है अन्यथा उस दस्तावेज को बाद में सबूत के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर किसी भी 100 रुपए से अधिक मूल्य की स्थाई संपत्ति (प्लाट या मकान, दुकान) के किसी भी प्रकार से हस्तांतरण विक्रय, दान आदि का पंजीकृत होना अनिवार्य है अन्यथा वह संपत्ति का हस्तांतरण नहीं माना जाएगा।  अब आप समझ गए होंगे कि रजिस्ट्री का क्या मतलब होता है। रजिस्ट्री से कोई भी दस्तावेज केवल उप पंजीयक कार्यालय में दर्ज होता है उस का निष्पादन किया जाना प्रथम दृष्टया सही मान लिया जाता है।

विक्रय पत्र सेल डीड –

कोई भी स्थाई अस्थाई संपत्ति जो प्लाट, दुकान, मकान,वाहन, जानवर आदि कुछ भी हो सकता है उसे कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित कर सकता है। यह हस्तांतरण दान हो सकता है अदला बदली हो सकती है, या धन के बदले हो सकता है। जब यह धन के बदले होता है तो इसे विक्रय कहते हैं। इस विक्रय का दस्तावेज लिखना होता है। इसी दस्तावेज को विक्रय पत्र कहते हैं। यदि यह संपत्ति स्थाई हो और उस का मूल्य 100 रुपए हो तो उस का विक्रय पत्र उप पंजीयक के यहाँ पंजीकरण कराना जरूरी है। यदि पंजीकरण नहीं है तो ऐसा विक्रय वैध हस्तान्तरण नहीं माना जाएगा। यह विक्रय पत्र वस्तु को विक्रय करने वाला वस्तु का वर्तमान स्वामी निष्पादित करता है और उस पर गवाहों के ह्स्ताक्षर होते हैं। यदि वस्तु का वर्तमान स्वामी किसी कारण से उप पंजीयक के कार्यालय तक पहुँचने में असमर्थ हो तो उस स्वामी का मुख्तार (अटोर्नी) यह विक्रय पत्र स्वामी की ओर से निष्पादित कर सकता है। इस के लिए उस के पास वैध अधिकार होना चाहिए।

मुख्तारनामा या पावर ऑफ अटॉर्नी-

जब कोई संपत्ति का स्वामी स्वयं पंजीयन के लिए उप पंजीयक के कार्यालय में उपस्थित होने में असमर्थ हो तो वह एक मुख्तार नामा या पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित कर किसी अन्य व्यक्ति को मुख्तार या अटॉर्नी नियुक्त कर देता है जो कि उस की ओर से उप पंजीयक कार्यालय में उपस्थित हो कर दस्तावेज अर्थात विक्रय पत्र आदि का विक्रय पत्र हस्ताक्षर कर सकता है और उस का पंजीयन करा सकता है विक्रय का मूल्य प्राप्त कर सकता है। इस के लिए यह आवश्यक है कि मुख्तार नामा के द्वारा मुख्तार को ये सब अधिकार देना लिखा हो। मुख्तार नामा किसी भी काम के लिए दिया जा सकता है। लेकिन वह उन्हीं कामों के लिए दिया हुआ माना जाएगा जो मुख्तार नामा में अंकित किए गए हैं इस कारण मुख्तार द्वारा कोई दस्तावेज निष्पादित कराए जाने पर मुख्तारनामे को ठीक से पढ़ना जरूरी है जिस से यह पता लगे कि वह किन किन कामों के लिए दिया जा रहा है। मुख्तार नामा का पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है वह किसी नोटेरी से तस्दीक कराया गया हो सकता है लेकिन यदि वह किसी स्थाई संपत्ति मकान, दुकान, प्लाट आदि के विक्रय के हो तो उस का पंजीकृत होना जरूरी है। कई बार जब किसी संपत्ति के हस्तांतरण पर किसी तरह की रोक होती है या कोई और अड़चन होती तब भी वस्तु को विक्रय करने के लिए एग्रीमेंट कर लिया  जाता है और क्रेता के किसी विश्वसनीय व्यक्ति के नाम मुख्तार नामा बना कर दे दिया जाता है ताकि मुख्तार जब वह अड़चन हट जाए तो क्रेता के नाम विक्रय पत्र पंजीकृत करवा ले। लेकिन इस तरह से क्रेता के साथ एक धोखा हो सकता है। मुख्तार नामा कभी भी निरस्त किया जा सकता है। यदि संपत्ति का मालिक ऐसी अड़चन समाप्त होने पर या उस के पहले ही मुख्तार नामा को निरस्त करवा दे तो फिर मुख्तार को विक्रय पत्र निष्पादित करने का अधिकार नहीं रह जाता है। इस तरह मुख्तार नामा के माध्यम से किसी संपत्ति का क्रय करना कभी भी आशंका या खतरा रहित नहीं होता है।

1 टिप्पणी. आप भी अपनी प्रतिक्रिया दीजिये

समस्या-

हरपाल सिंह ने फरीदाबाद हरयाणा से समस्या भेजी है कि-


म चार भाई बहन हैं। मेरे माता-पिता ने दादा की संपत्ति (सारी चल-अचल संपत्ति) की रजिस्ट्री मेरे नाम 2015 को कर दी है। पंजीकरण भी हो गया है। मेरे भाई को 2001 में सारी चल-अचल संपत्ति से बेदखल कानूनन कर रखा है।  दादा जी जीवित नहीं है दादा जी से पिता को उक्त संपत्ति उत्तराधिकार के माध्यम से प्राप्त हुई है। दादा जी की संपत्ति पुश्तैनी है। 1956 से पहले की। लेकिन अब मेरे पिता भाई बहनों के पास रहने लगे हैं। 2016 तक मेरे साथ ही रहते थे अौर अब मुझ पर देखभाल ना करने का इलजाम लगाकर संपत्ति मांग रहे हैं। कोर्ट केस करने की बात करते हैं। कृपा बताएँ कि क्य़ा मेरे पिता को कोर्ट से संपत्ति वापिस मिल सकती है रजिस्ट्री में केयर करने का कोई वादा नहीं किया गया है।


समाधान-

प के द्वारा दी गई सूचनाएँ अधूरी हैं। आप ने यह तो बताया कि जो संपत्ति आप के नाम की गयी है वह पुश्तैनी है, लेकिन आपने यह नहीं बताया कि आपके नाम रजिस्ट्री किस बात की की गयी है। क्या वह विक्रय पत्र है? या दान पत्र है या बंटवारा है? रजिस्ट्री तो किसी भी दस्तावेज की होती है, वसीयत की भी हो सकती है और गोदनामे की भी होती है।

यदि संपत्ति पुश्तैनी थी तो उस में आप के सभी भाइयों को जन्म से तथा बहनों को 2005 से और यदि उन का जन्म 2005 के बाद हुआ है तो जन्म से उस संपत्ति में हिस्सा है। इस तरह पुश्तैनी संपत्ति में आप का हिस्सा भी था, आप के भाई बहनों का भी था और पिता का भी था। आप के पिता केवल आप के हिस्से को आप के नाम हस्तान्तरित कर सकते थे, उस से अधिक का उन्हें कोई अधिकार नहीं था। इस तरह आप के नाम हस्तान्तरित की गयी संपत्ति में से केवल पिता के हिस्से के बराबर संपत्ति आप को हस्तान्तरित हो सकती थी, आप के हिस्से की तो आप की थी ही। इस तरह पिता तो नहीं लेकिन आप के भाई बहन इस हस्तान्तरण को चुनौती दे सकते हैं और यह निरस्त किया जा सकता है। वे कभी भी यह कर सकते हैं क्यों कि वे कह सकते हैं कि इस बात का उन्हें पता ही अब लगा है।

यदि कोई संपत्ति माता पिता या किसी सीनियर सिटीजन ने अपनी संतान या किसी रिश्तेदार को हस्तान्तरित कर दी है तो उस संतान और रिश्तेदार की ड्यूटी है कि वह अपने माता पिता की देखभाल करे और उन्हें मेंटीनेंंस प्रदान करे। यदि वह ऐसा नहीं करता तो वे माता-पिता और वरिष्ठ नागिरकों का भरणपोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के अंतर्गत वे भरण पोषण मांग सकते हैं और न्यायालय भरण पोषण देने का आदेश दे सकता है। यदि ऐसे आदेश के उपरान्त भी वह व्यक्ति उस आदेश की पालना नहीं करता तो उक्त संपत्ति का हस्तान्तरण रद्द किया जा सकता है।

 

यहाँ क्लिक कर सबसे पहले टिप्पणी कीजिए

समस्या-

अशोक ने खंडवा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-


मारी पुस्तैनी अचल सम्पत्ति गाँव में है, मेरे पिताजी 3 भाई और एक बहन हैं एक ताउजी की 5 साल पहले मृत्यु हो गई, आज से 25 साल पहले 1989 में दादा जी की मृत्यु हो गई थी। दादाजी की मृत्यु के बाद 1991 में गाव की ग्राम सभा में चारो भाई बहन ने मौखिक रूप से सभी की सहमति से हमारा मकान मेरे पिताजी और ताउजी के नाम नामांतरण कर दिया। 20 सालों से उस मकान पर हमारा कब्जा है तथा हमारे द्वारा भवन कर जमा किया जा रहा है। बिजली बिल नल कनेक्सन पिताजी और ताउजी के नाम है। आज 20 साल बाद बुआ मकान में हिस्सा मांग रही है। उसके लिए दीवानी वाद दायर किया है। बुआ भी हमारे साथ ही मकान में रहती है। कृपया उचित सलाह दें।


समाधान-

म यहाँ तीसरा खंबा में कानूनी समाधान प्रदान करते हैं, आप ने उचित सलाह मांगी है।

Deokoo Bai W/O Anna Rao And Ors. vs Keshari Chand S/O Ganeshlal Jain व अन्य अनेक मामलों में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का निर्णय है कि नामान्तरण से किसी भी हिस्सेदार के अधिकार प्रभावित नहीं होते। आप उक्त मामले में उक्त निर्णय का पैरा 10 देखें। यदि कोई किसी अचल संपत्ति में अपना हिस्सा छोड़ना चाहता है तो उसे अपने हिस्से का हकत्याग विलेख उस व्यक्ति या व्यक्तियों के पक्ष में निष्पादित कर उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत कराना चाहिए। तभी हकत्याग को सही माना जा सकता है।

बुआ यदि अपने हिस्से की  मांग कर रही है तो उचित ही कर रही है। आप लोगों को बुआ का हिस्सा सहर्ष दे देना चाहिए था, उसे न्यायालय में जाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए थी। अब भी कोई देरी नहीं हुई है। आप लोग एक ही मकान में निवास करते हैं अब भी इस मामले को परिवार में ही आपस में बैठ कर निर्णय कर लेना उचित कदम होगा।

यहाँ क्लिक कर सबसे पहले टिप्पणी कीजिए

समस्या-

अनुराधा ने रायबरेली, उत्तर प्रदेश से उत्तर प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-


मेरे पिता जी ने कोई भी संपत्ति खुद नही बनायी उनके पास जो भी कृषिभूमि व मकान हैं वह उन्होने क्रमश अपने पिता व चाचा से प्राप्त किया हैं , पिता जी का देहान्त जनवरी 2017 मे हुआ था,मेरा विवाह 1994 व छोटी बहन का विवाह 2007 मे हुआ था, कृषिभूमि आजादी से पहले से दादा के पास थी व एक मकान 19949-50 व दूसरा 1965-67 के आसपास पिता के चाचा ने बनवाया था क्या दावा कायम करने पर मुझे व मेरे बहन को हिस्सा मिलेगा.


समाधान-

प के अनुसार आप के पिताजी के पास जो भी खेती की जमीन व मकान आदि हैं वे पुश्तैनी संपत्ति थी। लेकिन पिता से प्राप्त संपत्ति तो पुश्तैनी /सहदायिक हो सकती है चाचा से प्राप्त संपत्ति सहदायिक है या नहीं वह तो संपत्ति के स्वामित्व के इतिहास से ही पता लग सकता है। आप ने यह भी नहीं बताया कि अन्य उत्तराधिकारी कौन कौन हैं?

बहरहाल कृषि भूमि के बारे में उत्तर प्रदेश में स्थिति यह है कि विवाहित पुत्रियों को उत्तराधिकार का अधिकार प्राप्त नहीं है। इस कारण उस मामले में आप का दावा चल नहीं सकेगा। जहाँ तक मकान का प्रश्न है उस में आप का अधिकार है चाहे वह मकान पुश्तैनी हो या न हो। आप मकान के लिए बंटवारे और अपने हिस्से पर अलग कब्जे का दावा कर सकती हैं। कृषि भूंमि के मामले में यदि आप किसी स्थानीय वकील से सलाह प्राप्त करें तो बेहतर होगा।

यहाँ क्लिक कर सबसे पहले टिप्पणी कीजिए

हिस्से के लिए विभाजन का वाद करें।

February 23, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

हेमन्त मिश्रा ने अजमेर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मैं जिस मकान में रहता हूँ वो मेरे दादाजी के नाम है। उनकी कोई वसीयत नहीं है, रजिस्ट्री की कॉपी मेरे पास है। ओरिजनल रजिस्ट्री मेरी दादी और बुआ ने गायब कर दी है। मेरे दादाजी का देहांत 1992 में हो गया था। मेरे पिताजी का देहांत भी 2015 में हो गया है। अब घर में मैं, दादी, मम्मी, एक क्वांरी बहिन, मेरी पत्नी और मेरा बच्चा रहता है। हम यहाँ लगभग 30 साल से रह रहे हैं। अब दादी कहती है कि मैं अपनी लड़कियों को हिस्सा या इस मकान को बेच कर पैसे दूंगी। तुम सब जाओ यहाँ से ये मेरे पति का घर है। जबकि मेरे पिताजी ने अपनी बहनों (5) में से (3) की शादी की। अपने जीवित समय तक सारी रस्में निभाई। पर अब दादी अपनी उम्र का फायदा उठा कर मुझे और बाकी सब को परेशान करती रहती है। उन्होंने मेरी छोटी बुआ के साथ मिलकर मेरे खिलाफ झूठी पुलिस कंप्लेन भी की थी। इसके कारण मैं बहुत परेशान रहता हूँ। मैंने घर का हिस्सा करने की बात भी कह दी उनसे पर न तो दादी हिस्सा कर रही है न कोई वसीयत और न ही घर में कुछ मरम्मत करवाती है। घर भी जर्जर हो रहा है। मैं इसमें पैसे लगाने से डरता हूँ क्यूंकि कब दादी और बुआ मिलकर क्या कर दे कुछ पता नहीं। कुछ समाधान बताये।

समाधान-

दि मकान की रजिस्ट्री की मूल प्रति आप को नहीं मिल रही है तो उस की फोटो कॉपी में दर्ज विवरण के आधार पर रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रतिलिपि सहायक कलेक्टर स्टाम्प के यहाँ से प्राप्त की जा सकती है।

मकान दादा जी के नाम था। इस कारण उन की मृत्यु के उपरान्त आप की दादी, आप के पिता और आप की 5 बुआओं के कुल सात हिस्से हुए। इस में से एक हिस्सा आप का है। आप के पिता ने अपनी बहनों का विवाह किया है तो वह उन का पारिवारिक दायित्व था। इस से बहनों का अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा कम नहीं हो जाता है।

आप की दादी आप के कहने पर भी हिस्से नहीं कर रही है तो आप न्यायालय में विभाजन का वाद प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि आप की बुआओं में से कोई अपना हिस्सा नहीं लेना चाहती है तो उस से आप अपने नाम या अपनी माँ के नाम रिलीज डीड करवा सकते हैं। यदि आप विभाजन का वाद प्रस्तुत करने के पहले बुआओं से रिलीज डीड पंजिकृत करवा लेते हैं तो बेहतर होगा।

यहाँ क्लिक कर सबसे पहले टिप्पणी कीजिए

समस्या-

वेद ने बादशाहपुर, हरयाणा से समस्या भेजी है कि-

मैं एक मध्यम परिवार से ताल्लुक रखता हूँ। मेरे दादा जी ने जो हमारा घर था ,उसको किसी के नाम नही किया, वो स्वर्ग सिधर गये। मेरे दादा जी के तीन लड़के हैं। मेरे पिता जी सब से छोटे हैं। मेरे पिताजी और ताउजी ने अपना अपना बटवारा कर लिया। मेरे पिता जी को जो हिस्सा मिला वो उन्होने सन् 1997 में बेच दिया।  दादा जी के नाम से जो हिस्सा मेरे पिता जी ने बेचा इस में उन्होने मेरे सिग्नेचर करा लिए और अलग जगह पर उस पैसे से ज़मीन लेकर मकान बनाया। जो मकान बनाया वो मेरे पिता जी के नाम पर है। मेरे पिता जी के हम चार बच्चे हैं . जिसमे हमारी दो बहनो की शादी सन् 1993 में और हम दोनों भाइयों की शादी सन् 1996 में हो गई। अभी हम सभी इसी नये मकान मे रहते हैं। हमारे घर मे लड़ाई होती रहती है। बात बात पर मेरे पिता जी और माँ हमें परेशान करते हैं। एक बार मेरे पिता जी ने लड़ाई के बाद जब कुछ लोगों के माध्यम से फ़ैसला किया। जिसमें उन्होने मुझे मकान में तीसरा हिस्सा दिया। जो कि एक लाइन वाली कॉपी के पेज पर लिखा है और रसीदी टिकट लगा कर मेरे पिता जी ने सिग्नेचर किए हैं।  साथ मे दो हमारे दोनो के रिलेटिव है उनके भी सिग्नेचर हैं। लेकिन वो पेपर मेरी अलमारी से गुम / चोरी हो गया। उसकी एक फोटो कॉपी मेरे पास है। अब मेरे पिता जी हमे इस घर से निकलना चाहते हैं। इसलिए हमारे साथ लड़ाई करते हैं कि ये यहाँ से घर छोड़ कर चला जाए। इस घर में बिजली का बिल मेरे नाम से आता है। मेरे पिता जी का एलेक्ट्रिसिटी बिल /मीटर अलग है। क्या मुझे इस मकान मे सिर छुपाने के लिए जगह मिल सकती है।

समाधान-

प के तथ्यों से लग रहा है कि मकान पुश्तैनी संपत्ति है जिसे न्यायालय में साबित किया जा सकता है, जिस का हिस्सा आप को पिताजी पहले ही दे चुके हैं। आप अपने पिताजी से कह सकते हैं कि आप ने मुझे इस मकान में अलग हिस्सा दे चुके हैं और सब को शान्ति से रहना चाहिए। आप को जो हिस्सा मिला है उसे बनाए रखने की कार्यवाही आप को करनी है।

यदि फिर भी बात नहीं बनती है तो आप मकान से निष्कासन पर रोक के लिए स्थाई निषेधाज्ञा का दीवानी वाद प्रस्तुत कर दीवानी न्यायालय से अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त कर सकते हैं। इस के लिए आप को अपने शहर के किसी अच्छे दीवानी वकील से सलाह कर के कार्यवाही करना चाहिए। पिताजी का लिखा जो कागज आप से खो गया है या चोरी हो गया है उस की फोटो प्रति न्यायालय में प्रस्तुत की जा सकती है और उसे द्वितीयक साक्ष्य के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। उस पर गवाहों के रूप में जिन रिश्तेदारों के हस्ताक्षर हैं उन के बयान करवा कर उसे साबित किया जा सकता है।

यहाँ क्लिक कर सबसे पहले टिप्पणी कीजिए

संपत्ति पर आप का कब्जा है तो आप को अदालत जाने की जरूरत नहीं।

January 17, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

महेश ने खंडवा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे नानाजी का तीन कमरो का पुराना मकान था। अब उसे तोड़कर मेरी मौसी और माताजी के सहयोग से ये मकान नया बना लिया। मेरे तीनो मामाओ ने जब  मकान बन रहा था तब किसी ने आपत्ति नही ली। मैं उस वक्त पढ़ाई के लिये इंदौर गया था। अब हम उस मकान में चार साल से रह रहे हैं। मेरा बड़ा मामा कह रहा है कि तुम कब्जा करने आ गये हो, तुम्हारा क्या हे यहाँ से निकलो। हमारी मकान की रजिस्ट्री भी नहीं है अब हम क्या कानूनी कार्यवाही करें?

समाधान-

कान तो नाना जी का था जिसे गिराया गया था। फिर आप की माता जी और मौसी के सहयोग से बनाया गया। मामाओं का भी कुछ तो सहयोग रहा होगा। उस मकान में अब कौन कौन रहते हैं यह भी आपने नहीं बताया। जब तक पूरा विवरण न हो पूरा समाधान भी संभव नहीं है। नानाजी अब शायद नहीं हैं। यदि हैं तो मामाजी आप को उस मकान से नहीं निकाल सकते। यदि नहीं हैं तो उस मकान के जितने हिस्से का स्वामी हर मामा है उतने ही हिस्से के मालिक आप की माँ और मौसी हैं। इस कारण यदि उस मकान पर कब्जा है तो वे आप को उस मकान से नहीं निकाल सकते। जैसे बड़े मामान ने कहा है वैसे आप की माँ और मौसी कह सकती हैं कि तुम निकलो मकान हमने बनाया है। जिस के पास संपत्ति का कब्जा है उसे अदालत में जाने की जरूरत नहीं है। जिस के पास संपत्ति का कब्जा नहीं है उसे अदालत जाने दें।

यदि मामाजी कुछ गड़बड़ करें तो मौसी और माताजी अदालत में इस आशय का वाद संस्थित कर सकती हैं कि वे भी मकान में हिस्सेदार हैं और उन्हें मकान से न निकाला जाए। पह हमारी राय है कि अदालत में आप की माँ व मौसी न जाएँ। मामा को अदालत में जाने दें। मौसी व माताजी ने निर्माण में जो खर्च किया उस का हिसाब और सबूत हो तो संभाल कर रखें। मुकदमे में काम आएंगे।

हिस्सेदार अधिक से अधिक मकान के बंटवारे की मांग कर सकते हैं और बंटवारे का वाद संस्थित कर सकते हैं।

अब तक 4 टिप्पणियाँ, आप भी अपनी प्रतिक्रिया दीजिये

समस्या-

नीरज ने इन्दौर मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे चाचा की पुश्तैनी जमीन है, उनके कोई संतान नहीं थी और उनका देहांत हो गया। उन्होंने अपनी जमीन मेरे नाम से ‍रजिस्ट्री कर दी थी अर्थात रजिस्ट्री में बेचे जाने का उल्लेख किया गया है।‍ मतलब उसको मेरे द्वारा खरीदा गया है जिसे चार साल हो गये हैं।  उस जमीन पर मेरे दूसरे चाचा के लडके ने दावा कर दिया है तो क्या वह जमीन मेरे दूसरे चाचा के लडके भी ले सकते है।

समाधान-

प के चाचा की जमीन पुश्तैनी थी और दूसरे चाचा के लड़के ने उस में हिस्से का दावा किया है। जब कि आप के चाचा अपनी जमीन को अपने जीवन काल में ही आप को विक्रय कर चुके थे।

किसी भी व्यक्ति को पुश्तैनी जमीन में अपने हिस्से को भी बेच देने का अधिकार होता है। चाहे उस जमीन का बँटवारा हो कर वह उस के अलग खाते में आई हो या नहीं आई हो। वह अपने हिस्से की जमीन को बेच कर उस के अधिकार से वंचित हो सकता है। यदि जमीन का बँटवारा हो कर खाता न खुला हो तो अलग खाता खोले जाने के लिए खरीददार बँटवारे का दावा कर सकता है और बँटवारा करवा कर अपना हिस्सा अलग करवा सकता है।

आप के मामले में ऐसा लगता है कि पुश्तैनी जमीन का बंटवारा हो कर वह आप के चाचा के अलग खाते में आ गयी थी। उसे बेचने का उन्हें अधिकार था। उन्हों ने अपने जीवनकाल में ही वह जमीन आप को बेच दी थी। इस प्रकार आप उनके जीवनकाल में ही उक्त जमीन के स्वामी हो चुके थे। आप के दूसरे चाचा के लड़के का दावा सही नहीं है। इस वाद में आप को अच्छा वकील कर के मुस्तैदी से मुकदमा लड़ना चाहिए। आप से उस जमीन को कोई नहीं ले सकेगा।

यहाँ क्लिक कर सबसे पहले टिप्पणी कीजिए

पिता की संपत्ति में हिस्सा?

December 15, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

partition of propertyसमस्या-

सुबाला देवी ने रांची, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मैं एक शादीशुदा महिला हूँ। मैं अपने पिताजी के चल-अचल संपति में हिस्सा चाहती हूँ। लेकिन मेरे पिताजी माँ और मेरे भाई हिस्सा नहीं देना चाहते हैं।  इसके लिए मुझे क्या करना होगा? मेरे पास कोई कगजात भी नहीं हैं।

समाधान-

किसी भी पुत्र या पुत्री को अपने पिता या माता की स्वअर्जित सम्पत्ति में हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। जब तक वे जीवित हैं यह संपत्ति उन की है और वे अपनी इच्छानुसार इस का उपयोग कर सकते हैं। यदि माता या पिता में से किसी का देहान्त हो जाए और मृतक ने अपनी संपत्ति या उस का भाग वसीयत न किया हो तो ऐसी संपत्ति का स्वामित्व मृत्यु के साथ ही उस के उत्तराधिकारियों में निहीत हो जाता है। सभी उत्तराधिकारी उस संपत्ति के संयुक्त स्वामी हो जाते हैं। ऐसे संयुक्त स्वामियों में से कोई भी संपत्ति के बंटवारे और अपने हिस्से पर पृथक कब्जा प्राप्त करने का वाद न्यायालय में संस्थित कर सकता है।

यदि आप के पिता के पास कोई पुश्तैनी सहदायिक संपत्ति है तो उस में जन्म से ही पुत्रों का अधिकार होता है। 2005 से पुत्रियों का अधिकार भी होने लगा है। तब आप उस संपत्ति की संयुक्त स्वामी हो सकती हैं और उस में आप का हिस्सा हो सकता है। आप चाहें तो बँटवारे और अपने हिस्से पर पृथक कब्जा प्राप्त करने का वाद न्यायालय में संस्थित कर सकती हैं।

अब तक 11 टिप्पणियाँ, आप भी अपनी प्रतिक्रिया दीजिये

संयुक्त स्वामी तंग करते हैं तो विभाजन का वाद संस्थित करें।

December 14, 2016 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

राकेश कुमार ने बी-21/ 12 बी, ब्लॉक-बी, ओम नगर, मीठापुर, बदरपुर, दिल्ली से समस्या भेजी है कि-


र्तमान में मैं जिस मकान में रहता हूँ वह मेरी माँ के नाम है। माँ का देहान्त दिसम्बर 2014 में हो चुका है। मेरे पिता और भाई मुझ से और मेरी पत्नी से रोज लड़ाई करते हैं और कहते हैं कि यहाँ तेरा कोई हक नहीं है तू अपने बीवी बच्चों को ले कर यहाँ से निकल जा। मेरे दो छोटे छोटे बच्चे हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि उस संपत्ति में मेरा कोई अधिकार है या नहीं है। मैं अपने पिता और भाई के विरुद्ध क्या कार्यवाही कर सकता हूँ?


समाधान-

जिस स्थान पर जो निवास करता है अथवा जिस मकान /जमीन पर जिस का कब्जा है वहाँ उसे कब्जा बनाए रखने और निवास करने का अधिकार प्राप्त है। किसी भी व्यक्ति से जिस  संपत्ति पर वह काबिज है उसे जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता। इस तरह आप को भी मकान के उस परिसर से जिस पर आप का कब्जा है और जिस में आऐप रहते हैं जबरन नहीं निकाला जा सकता।

यह मकान माँ के नाम था तो माँ के देहान्त के साथ ही उस का उत्तराधिकार निश्चित हो चुका है। यदि वह मकान किसी के नाम वसीयत था तो उस का स्वामी वह वसीयती हो चुका है। यदि कोई वसीयत नहीं की थी तो माँ के सभी उत्तराधिकारी उस के संयुक्त रूप से स्वामी हो चुके हैं। कोई भी उत्तराधिकारी उस मकान का बँटवारा करवा कर अपने हिस्से का पृथक रूप से कब्जा प्राप्त करने का अधिकारी है। यदि आप के केवल एक भाई है और बहिन नहीं है तो माँ के केवल 3 उत्तराधिकारी आप, आप के पिता और भाई है। इस तरह आप को उस मकान के एक तिहाई हिस्से का स्वामित्व प्राप्त है।

आप चाहें तो तुरन्त उक्त मकान का विभाजन करने और आप के हि्स्से का पृथक कब्जा देने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं। इसी वाद में आप यह आवेदन भी दे सकते हैं कि जब तक इस वाद का निर्णय न हो तब तक आप के पिता और भाई आप को उस मकान के उस परिसर से बेदखल न करें और न आप को सामान्य रूप से उस परिसर में रहने में किसी तरह की बाधा उत्पन्न करें। आप को इस वाद के निर्णय तक इस आशय की अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त हो सकती है।

यहाँ क्लिक कर सबसे पहले टिप्पणी कीजिए
Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada