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समस्या-

अशोक अग्रवाल ने हरदा, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

म तीन भाई और एक बहन है, बहन का विवाह हो चूका हे एक भाई की कोई सन्तान नहीं है इसलिए सभी ने पिता की म्रत्यु 1990 में हो जाने के बाद आपसी सहमति से मौखिक रूप से आपसी बटवारा कर मकान दो भाइयो के नाम पंचायत अभिलेख में नामांतरण दर्ज करवा लिया। मकान जीर्ण होने से हम दो भाइयों द्वारा मकान का मरम्मत कार्य करवा लिया एवम् उसे ठीक करवा लिया। आज 20 साल बाद हमारी बहन से आपसी झगड़ा होने से उस नामान्तरण को गलत ठहरा कर हिस्सा मांग रही है, जबकि मकान 20×70 में दो भागो में बना हे जिसमे 10×70 में अलग अलग भाइयो का निवास है। मकान इस तरह बना हुआ है कि किसी तरह हिस्से नहीं हो सकते। क्या कोर्ट दखल देकर हिस्से किस प्रकार दिला सकती है? क्या बहन का हिस्सा मांगना जायज है हमारे द्वारा मकान में किया गया निर्माण में कुछ छूट मिलेगी? सिविल कोर्ट में कितना समय लगेगा? कृपया समस्या का उचित समाधान बताएँ।

समाधान-

प की बहन का हिस्सा मांगना पूरी तरह जायज है। नामांतरण किसी भी संपत्ति के स्वत्व को निर्धारित नहीं करता। पिता की मृत्यु के साथ ही उन के उत्तराधिकारियों का अधिकार उन की संपत्ति में बन गया। कोई भी अपना हिस्सा केवल रिलीज डीड के माध्यम से ही छोड़ सकता है या फिर अन्य विधि से हस्तान्तरित कर सकता है जिस का उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीयन आवश्यक है। आप की बहन का हिस्सा उस संपत्ति में अभी भी विद्यमान है।

यदि न्यायालय समझती है कि भौतिक रूप से संपत्ति को विभाजित किया जाना संभव नहीं है तो भी पहले वह इस मामले में प्राथमिक डिक्री पारित करेगी जिस में हिस्से निर्धारित होंगे। उस के बाद यदि आपस में रजामंदी से हिस्से बांट नहीं लिए जाते अथवा खरीद नहीं लिए जाते हैं तो न्यायालय संपत्ति को विक्रय कर के सभी को हिस्से देने का निर्णय दे सकता है। आप दोनों भाई चाहें तो बहिन का हिस्सा मिल कर खरीद सकते हैं।

आप ने यदि पिता की मृत्यु के उपरान्त निर्माण किया है तो उस का सबूत देने पर न्यायालय उस खर्चे को बंटवारे से अलग रख कर निर्णय कर सकती है, खर्च के अनुरूप बंटवारे में आप का हिस्सा बढ़ा सकती है। मुकदमे मे कितना समय लगेगा इस का उत्तर तो खुद विधाता भी यदि कोई हों तो नहीं दे सकते। यह आप के यहाँ की अदालत में काम के आधिक्य पर निर्भर करेगा।

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व्यर्थ धमकियों से न डरें, आवश्यकता होने पर कार्यवाही करें।

July 6, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

अहमद ने जिला देवरिया, (उत्तर प्रदेश) समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी के पिता जी के नाम पर एक पुश्तैनी जमीन थी जिसका बंटवारा 37 साल पहले मेरे पिता और उनके छोटे भाई ने आपसी रजामंदी से कर लिया था। मेरे पिता ने अपने हिस्से के 15*40 स्क्वायर फुट के प्लाट पर 37 साल पहले ही पक्का मकान बनवा लिया, कितु उनके भाई ने अपने हिस्से के 15*40 पर कोई निर्माण नहीं करवाया। अब मेरे पिता उनके भाई एवं भाई की पत्नी तीनों की मृत्यु हो चुकी है। मेरी माँ जीवित और स्वस्थ है। अभी तक उस पुश्तैनी जमीन के खसरे मे पिता के पिताजी का ही नाम दर्ज है,लेकिन मकान के पिछले 37 सालों की टैक्स पावती,37 साल पुरानी मकान की नंबर प्लेट की पावती मे भी पिताजी का ही नाम है।पिता की मृत्यु के बाद घर का जल कर/बिजली बिल मेरे ही नाम से आ रहा। मेरे परिवार के सद्स्यो का नाम भी राशन कार्ड में है तथा सभी के जाति/ निवास पत्र भी बने है। पिताजी के मकान का नगर निगम टाउन एरिया से स्वीकृत नक्शा भी पिताजी के नाम पर है। अब विवाद का विषय यह है कि मेरे पिता के भाई का इकलौता पुत्र 37 साल पहले हुए बंटवारे को मान नही रहा, उसका कहना है कि जमीन के खसरे मे उसके पिता के पिता का नाम है तथा बंटवारे की कोई बात नही लिखी। अब वह छल कपट मारपीट पर उतारू है। मकान और उसके पीछे मौजूद उसके खुद के प्लाट का बंटवारा करने को कह रहा। मैं ने उससे कहा कि यदि 37 साल पहले बंटवारा नही हुआ होता तो तुम्हारे पिताजी क्या यह मकान बनाने देते,अपने भाई पर केस न कर दिये होते? लेकिन वह नही मान रहा और न ही मुझ पर बंटवारे विवाद पर कोर्ट केस कर रहा क्यों कि वह जानता है कि उसका मकान मे कोई हक नहीं।  वह यही कह रहा कि अपना मकान हमको बेच दो या आधा हिस्सा दो, नहीं तो झूठे केस मे फंसाकर सबको जेल करवा देंगे। महोदय इन परिस्थितियो में मुझे क्या कदम उठाना चाहिये। इस समय मैं मध्यप्रदेश में नौकरी कर रहा हूँ,  मेरा परिवार भी साथ में है और गांव के मकान में मेरा ही ताला लगा है। किस तरह से मकान का खसरा अपने नाम से बनवा सकता हूँ। जिससे  कि भविष्य मे कभी उसे बेच सकूँ। क्या चाचा का पुत्र मेरे पिता का आधा मकान हड़प लेगा? क्या मेरे पास मौजूद डाक्युमेंट से मेरे नाम से खसरा बन जाएगा??  कृपया उचित सलाह दीजिए मै क्या करूं?

समाधान-

कानून और अदालत से तो वह आप के मकान में हिस्सा लेने में असमर्थ है। इसी से वह आप को उलझाने की धमकी देता है। यह सब वह स्थानीय दोस्तों आदि के सिखाए में कहता है। उसे लगता है कि आप परदेसी हो गए हैं। मकान बेचेंगे ही, उसे सस्ते में पल्ले पड़ जाएगा। आप सख्त बने रहें, और यदि वे लोग न्यूसेंस करने की कोशिश करे तो उस की पुलिस को रिपोर्ट कराएँ। साथ के साथ गाँव में मित्र बनाए रखें जिस से आप को वहाँ के हालात की जानकारी मिलती रहे। कोरी धमकियों के आधार पर कोई भी कार्यवाही करना उचित नहीं है, धमकियों को आप प्रमाणित नहीं कर सकेंगे। बेहतर है दृढ़ता बनाए रखें। चचेरा भाई यदि कुछ न्यूसेंस करे तो उस के विरुद्ध अपराधिक कार्यवाही तो करें ही। मकान पर कब्जा करने की उस की कोशिश के विरुद्ध न्यायालय से स्थगन भी प्राप्त करें। आप का मामला परिस्थितियों के अनुसार कार्यवाही करने का है। इस कारण गाँव के जिले के किसी अच्छे वकील से सलाह ले कर जिस तरह की कार्यवाही वे उचित समझें करें। व्यर्थ मुकदमेबाजी में भी न पड़ें।

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जो बंटवारा चाहता है उसे कार्यवाही करने दें।

July 1, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

सुनील शर्मा ने कोटा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे दादा जी ने उनके चारो बेटो को बराबर जमींन बाट दी, लेकिन जमीन नाम पर नहीं हुई। सिर्फ एक पेपर पर लिखा है और सभी के साइन हैं उस पर। लेकिन हमारे हिस्से की जमीन में शहर का रोड निकल गया हे तो बाकी के भाई उस जमींन में हक़ मांग  रहे हैं।  हमें हमारी जमीन अपने नाम पर करवानी है। दादा जी का देहांत हो गया है।

समाधान-

दि आप के दादाजी सभी बेटों को बराबर जमीन बांट गए थे तो उन्हें उसी समय राजस्व रिकार्ड में अलग अलग खाते बनवा देने चाहिए थे, यह काम वे जीतेजी नहीं कर गए। उन की मृत्यु के उपरान्त भी बंटवारा किया जा कर सब के खाते अलग अलग करवा लेने चाहिए थे। लेकिन तब भी नहीं हुआ। अब दादाजी की जमीन का रिकार्ड एक साथ है और उस में सभी पुत्रों के नाम अंकित हैं। इस कारण सारी जमीन अभी तक संयुक्त स्वामित्व मे ंहै। हो सकता है जमीन के कब्जे अलग अलग हों, लेकिन स्वामित्व सारी जमीन पर सब का है।

आप के पास जो दस्तावेज है यदि वह  किसी मौखिक बंटवारे के स्मरण पत्र के रूप में है और उस पर सभी हिस्सेदारों के हस्ताक्षर हों तो न्यायालय उसे बंटवारे के समान मान सकता है। पर इस के लिए आप को कानूनी कार्यवाही करने की जरूरत नहीं है। यदि आप कानूनन बंटवारा करेंगे तो भी सब को आज की स्थिति में बराबरी से देखा जाएगा और सब को समान रूप से हिस्सा मिलेगा। यदि बंटवारे के स्मरण पत्र को वैध मान लिया गया तो हो सकता है आप के कब्जे की जमीन आप के ही हिस्से में रह जाए।  यदि आप जमीन का खाता अपने नाम कराने जाएंगे तो आप को हानि ही हो सकती है। इस कारण से आपके जो भाई हिस्सा चाहते हैं उन्हें कहें कि वे अपने हक के लिए अपने हिसाब से कार्यवाही करें।

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समस्या-

राजेश कुमार ने पटना बिहार से समस्या भेजी है कि-

मेरी माँ का देहांत 1994 में हुआ था, उस वक़्त मेरी आयु 10 वर्ष थी। मेरी एक विवाहित बहन और एक अविवाहित भाई है। माँ के नाम के घर को आज मेरे पिताजी अपनी दूसरी पत्नी के बहकावे में आकर बेचना चाहते हैं। माँ की इस निशानी को बचाने का उपाय बताएं। क्या हम भाई बहनों का इसमें कोई अधिकार नहीं?

समाधान-

दि मकान आप की मृत माता के नाम था तो उन की मृत्यु से उत्तराधिकार में यह मकान उन की संतानों और पति के संयुक्त स्वामित्व में है। आप तीन भाई बहन और एक पिता, इस तरह चार व्यक्ति उक्त संपत्ति के संयुक्त स्वामी हैं और प्रत्येक का एक चौथाई हिस्सा ही है। पिता का भी एक चौथाई हिस्सा ही है। इस तरह वे मकान का विभाजन हुए बिना नहीं बेच सकते।

आप तीनों या तीनों में से कोई एक उक्त मकान को बेचे जाने के विरुद्ध न्यायालय में स्थाई व्यादेश हेतु वाद प्रस्तुत कर के अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त कर के मकान को बेचे जाने से रोक सकता है।

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समस्या-

धर्मेन्द्र सिंह ने बालोतरा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे दादा जी का मकान है जिनकी मृत्यु हो गयी है। अब इस मकान पर उनका छोटा पुत्र कब्जा करना चाहता है। मेरी दादीजी जिंदा है वो यह मकान नहीं देना चाहती हैं। ये मकान दादीजी के नाम करवाना है और उनके छोटे पुत्र को बाहर निकलना है। इसके लिए मैं क्या करुँ?

समाधान-

प के दादा जी का देहान्त होने के पहले उन्हों ने कोई वसीयत नहीं की है। आप के दादा जी के देहान्त के साथ ही उन का उत्तराधिकार खुल गया है औोर उन की संपत्ति हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार उन के उत्तराधिकारियों को प्राप्त हो चुकी है। आप के दादा जी के उत्तराधिकारी, उन के पुत्र, पुत्रियाँ, मृत पुत्र/ पुत्रियों की पत्नी/ पति और उन की संतानें, उन की पत्नी (आप की दादीजी) हैं। ये सभी उस मकान के संयुक्त रूप से स्वामी हो चुके हैं। आप के दादाजी के छोटे पुत्र को भी उस मकान के स्वामित्व में हिस्सेदारी प्राप्त हुई है। इस हिस्सेदारी से उसे अलग नहीं किया जा सकता।

आप की दादी या अन्य कोई भी उत्तराधिकारी यह कर सकता है कि मकान के बंटवारे का दावा करे और सब को अलग अलग हिस्सा देने की राहत प्रदान करने की मांग करे, या फिर यह भी राहत मांगी जा सकती है कि आप के दादाजी के छोटे पुत्र को उस के हिस्से की कीमत अदा कर के उस मकान से बेदखल करने की डिक्री की मांग की जाए। इस बीच अस्थाई निषेधाज्ञा जारी कराई जा सकती है कि दादाजी का छोटा पुत्र न्यूसेंस पैदा न करे। यदि वह फिर भी कुछ गड़बड़ करता है या तंग करता है तो दादी जी की ओर से महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा का प्रतिषेध अधिनियम में कार्यवाही की जा सकती है।

 

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बंटवारे का वाद प्रस्तुत कर न्यायालय से बंटवारा कराएँ।

June 10, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

उमाकान्त ने देवी तहसील सौसर, जिला छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

दादाजी ने अपने जीवनकाल में कोई बंटवारा नहीं किया और न ही नाप के हिसाब से जोतने के लिए दिया। लेकिन उन की मृत्यु के बाद जिन्हें जोतने को ज्यादा मिला वे बंटवारा नहीं चाहते लेकिन बाकी हिस्सेदार बंटवारा चाहते हैं। हमन कुछ कानूनी कार्यवाही की लेकिन उन्हों ने जानपहचान से रद्द करवा दी। बताए हमें क्या करना चाहिए।

समाधान-

प ने क्या कानूनी कार्यवाही की यह नहीं बताया। हमें लगता है कि आप ने कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की बल्कि आप राजस्व अधिकारियों को फिजूल मैं आवेदन देते रहे। अब आप की समस्या का हल न्यायालय द्वारा बंटवारे में है। आप ने यह भी नहीं बताया है कि दादाजी के देहान्त के बाद नामान्तरण भी हुआ है या नहीं। यदि नहीं हुआ है तो नामान्तरण कराना चाहिए।

यदि नामान्तरण हो गया है तो ठीक वर्ना नामान्तरण की कार्यवाही के साथ साथ आप को चाहिए कि आप राजस्व न्यायालय में अपनी जमीन के बंटवारे, खाते अलग अलग करने और अपने हिस्से पर पृथक कब्जा दिलाए जाने के लिए वाद प्रस्तुत करें। बाकी सभी हिस्सेदार और राज्य सरकार जरिए तहसीलदार पक्षकार बनेंगे। यह वाद तब तक चलेगा जब तक कि बंटवारा हो कर सब को अपने अपने हिस्से पर अलग कब्जा न मिल जाए।

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समस्या-

रोहन ने लुधियाना, पंजाब से उत्तर प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

मेरे नाना का देहान्त2015 में हुआ। वो हमारे साथ लुधियाना ही रहते थे। सारी संपत्ति हरदोई उत्तर प्रदेश में है। मृत्यु के पहले उन्हों ने वसीयत की इच्छा की थी, वो हमने करवाई। उन्हों ने 4 हिस्सों में अपनी सम्पति वसीयत की क्यों कि उनके 3 लड़के थे। चौथा हिस्सा उन्हों ने हमारी मां को वसीयत किया। उत्तराधिकार में उस सम्पति का नामान्तरण नायब की कोर्ट से 3 लोगो के हक़ में था। बाद में वसीयत दाखिल की हमने और तहसीलदार ने पंजीकृत वसीयत के आधार पर मेरी माँ का नाम भी नामान्तरण करवा दिया। समस्या ये है कि आर्डर के 70 दिन बाद एक मामा ने आर्डर के खिलाफ अपील की है। क्या अपील अवधि बाधित नहीं है?  क्या नामान्तरण हो जाने से भी हमें कोई लाभ नहीं मिलेगा? नाना ने चौथा हिस्सा हमारे नाम किया है क्या उस पे हम कब्जा नहीं ले सकते।  वसीयत के समय छोटे मामा साथ थे, उन्होंने हमारे हक़ में एफिडेविट भी लगाया था । क्या एसडीएम ऑर्डर बदल सकते हैं। हम को कब्जा कैसे मिलेगा एग्रीकल्चर लैंड का,वो 14 बीघा का है? उसका पार्टीशन कैसे करवाए? उसका अलग खाता कैसे करवाएँ?

समाधान-

दि  किसी नामान्तरण के मामले में वसीयत प्रस्तुत हो और  उसे चुनौती दी जाए तो तहसलीदार या नायब उस मामले में नामान्तरण नहीं कर सकता। वैसी स्थिति में नामान्तरण कराने के लिए न्यायालय ही जाना होगा। इस  मामले में आप ने जब वसीयत पेश की तो तहसलीदार ने अन्य पक्षकारों को बुलाया या नहीं या आपत्तियाँ ली या नहीं उस पर बहुत कुछ निर्भर करता है। अपील तो व्यथित पक्षकार का अधिकार है, इस कारण उस पर सुनवाई होगी और तभी उस का निर्णय होगा। अपील यदि अवधि बाधित है तो आप अपील में यह आपत्ति ले सकते हैं। यदि वसीयत में कोई खेोट नहीं है तो अपील भी आप की माँ के पक्ष में निर्णीत हो जाएगी। लेकिन अपील आप के हक में निर्णीत हो जाने मात्र से आप को जमीन का कब्जा नहीं मिल जाएगा। .

नामान्तरण से किसी भी कृषि भूमि में उस के हिस्सेदारो का हिस्सा निर्धारित हो जाता है लेकिन भूमि संयुक्त बनी रहती है उस पर सभी हिस्सेदारों का संयुक्त स्वामित्व बना रहता है। अलग अलग खाता करने के लिए और अपने खाते की भूमि पर अलग कब्जा प्राप्त करने के लिए आप की माता जी को संयुक्त स्वामित्व की भूमि के बंटवारे और अपने हिस्से पर कब्जा दिलाए जाने का दावा करना पड़ेगा। चूँकि नामान्तरण आज भी आप के पक्ष में है इस कारण आप यह दावा तुरन्त कर सकते हैं। आप को अपील का निर्णय होने का इन्तजार किए बिना बंटवारे का दावा कर देना चाहिए।

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समस्या-

अनिल ने भोपाल, मध्य प्रदेश से मध्य प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

मेरे दादाजी के नाम एक मकान है। मेरे पिता वर्ष २००३ से लापता हैं। मेरे पिता ४ भाई हैं। तीनों भाइयों ने मुझे ये मकान मौखिक हिस्से में दे दिया था। मैं २० बर्षो से इस मकान कि देख रेख व टेक्स देता आ रहा हूँ।  मकान पर मेरा कब्ज़ा है तथा किरायेदार भी मुझे ही किराया देते हैं। वर्ष २०१२ में मैंने मकान का नामांतरण अपनी माँ के नाम से करा लिया था।  अब उन्होंने उससे निरस्त करा के उसे मेरी दादी के नाम करा लिया है? क्या वे उसे बेच सकती हैं? उन्हें कैसे रोका जाये?

समाधान-

नामान्तरण किसी भी प्रकार से स्वामित्व और स्वामित्व के हस्तांतरण को प्रकट नहीं करता है। आप का उस मकान पर 20 वर्षों से कब्जा है, इस कारण कोई आप को उस मकान से बेदखल नहीं कर सकता। किन्तु मौखिक बंटवारे में आप को मकान मिला था इसे साबित करना आसान नहीं होगा। देख-रेख करना और टैक्स जमा करने मात्र से यह उपधारणा नहीं ली जा सकती है कि वह मकान आप को मौखिक बंटवारे में दे दिया गया था। यदि यह साबित होता है कि कोई बंटवारा नहीं हुआ था तो दादाजी के मकान और शेष संपत्ति का बंटवारा होना चाहिए और उस स्थिति में उन के सभी उत्तराधिकारियों को उस का हिस्सा मिलना चाहिए।

आप के पिता 2003 से लापता हैं तो आप दीवानी न्यायालय में घोषणा का दावा कर के उन्हें मृत घोषित करवा सकते हैं और इस घोषणा के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र आप को मिल सकता है। वैसी स्थिति में आप अपने पिता के उत्तराधिकारी हो जाएंगे। चूंकि दादी के नाम मकान का नामान्तरण हो जाने से वह मकान दादी का नहीं हो जाता बल्कि संयुक्त संपत्ति बना रहता है। इस कारण उन्हें इस मकान को बेचना तो नहीं चाहिए। फिर भी ऐसी कोशिश हो सकती है। इस के लिए स्थाई निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत कर विक्रय पर अस्थाई   निषेधाज्ञा प्राप्त की जा सकती है। इस वाद में आप यह कथन कर सकते हैं कि आप के पिता 14 वर्षों से लापता है इस कारण साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत उपधारणा के अंतर्गत उन्हें मृत माना जाना चाहिए और आप उन के उत्तराधिकारी होने के नाते यह वाद प्रस्तुत कर रहे हैं।

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समस्या-

रेणु भदोरिया ने अहमदाबाद गुजरात से उत्तर प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

म उत्तर प्रदेश के जसमई गाँव के निवासी थे पिछले 25 सालों से हम अहमदाबाद में निवास कर रहे हैं। हमारे गांव में हमारी पुश्तैनी ज़मीन है घर बनाने की उस में से कुछ ज़मीन पर हमारे परिवार के लोगों ने कब्जा कर लिया था, और हमारे घर के निकालने का रास्ता सिर्फ़ 2.5 फुट छोड़कर अपना निर्माण कर लिया और वो लोग कहते है हमने तुम्हारे ज़मीन पर कब्जा नहीं किया। हमारी घर की ज़मीन का बटवारा प्रधान द्वारा किया गया था, जो बाद में प्रतिपक्ष वालों ने मानने से इनकार कर दिया। इसके अलावा परिवार के दूसरे लोगों द्वारा भी हमारी ज़मीन निर्माण कर लिया गया है। अब मैं चाहती हूँ कि बिना लड़ाई झगड़े के हमें हमारी ज़मीन क़ानून के नियम के हिसाब से मिल जाए। मैं सरकारी बटवारा करना चाहती हूँ। उसके लिए हमें क्या करना पड़ेगा?

समाधान-

प का कहना सही है आप की संयुक्त संपत्ति का बँटवारा नहीं हुआ है। हमारे यहाँ ऐसे ही चलता रहता है। परिवार के कुछ लोग गाँव से बाहर चले जाते हैं। जो रह जाते हैं वे आपस में संपत्ति के अधिक से अधिक भाग पर कब्जा बनाए रखने की कोशिश करते हैं। जब बाहर जाने वाला बंधु वापस आता है तो वह फिर बंटवारे की बात करता है। लेकिन संपत्ति का बंटवारा बिना अदालत जाए नहीं हो पाता।

आप बंटवारा कराना चाहती हैं तो आप को जिला न्यायाधीश के न्यायालय में बंटवारे का वाद प्रस्तुत करना होगा। संयुक्त संपत्ति के सभी स्वामी उस वाद में पक्षकार बनेंगे। अदालत सभी पक्षों को सुन कर बंटवारा कर देगा। यह बंटवारा स्थाई होगा। इस के लिए आप जिला मुख्यालय के किसी दीवानी  मामलों के वकील से मिलें और उस की सहायता से संपत्ति के विभाजन तथा अपने हिस्से का अलग कब्जा दिलाए जाने का वाद संस्थित करें।

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रजिस्टर्ड बंटवारानामा संपत्ति के स्वत्व का दस्तावेज है।

May 17, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

जितेन्द्र ने उज्जैन, से मध्य प्रदेश -समस्या भेजी है कि-

मेरे दादाजी की मुत्यु हो चुकी है। मेरे दादाजी की स्वंय अर्जित सम्पत्ति का एक मकान जो कि हॉउसिंग बोर्ड द्वारा लीज होल्ड है एवं नगर निगम सीमा में है जिसका सम्पत्ति कर वगैरह उस सम्पत्ति पर निवासरत् दादाजी के 3 पुत्रों द्वारा सम्मिलित रूप से जमा किया जाता है। दादीजी का भी देहान्त दिनांक हो गया है। दादाजी की कुल 7 संतानें (5 पुत्र एवं 2 पुत्रियां) हैं। दादाजी ने अपनी मृत्यु के पूर्व कोई भी वसियत भी नहीं की थी। इस सम्पत्ति पर वर्तमान में 3 पुत्रों के परिवार निवासरत है, अन्य में से 1 पुत्र लापता है, 1 पुत्र अन्यत्र निवासरत है, 1 पुत्री का देहान्त कुछ समय पूर्व हो चुका है एवं 1 पुत्री अन्यत्र निवासरत होकर अविवाहित है। इस सम्पत्ति का बंटवारा किस प्रकार किया जा सकता है? सभी संतानों का मालिकाना हक किस प्रकार इस सम्पत्ति पर हो सकता है? मालिकाना हक से संबंधित क्या दस्तावेज तैयार करवा सकते हैं? कृपया बतायें- 1. क्या इस सम्मत्ति की रजिस्ट्री होगी? 2. हॉउसिंग बोर्ड इस सम्पत्ति में क्या कार्यवाही कर सकता है ? 3. रजिस्टर्ड बंटवारा ओर रजिस्ट्री में क्या कोई अंतर है? क्या रजिस्टर्ड बंटवारा में रजिस्ट्री के सभी अधिकार प्राप्त होते है या नहीं?

समाधान-

ब आप रजिस्ट्री शब्द का उल्लेख करते हैं तो आम तौर पर उसका अर्थ पंजीकृत विक्रय पत्र से या पंजीकृत लीज डीड से होता है। लेकिन पंजीकरण का कानून यह है कि यदि 100 रुपए से अधिक कीमत की कोई अचल संपत्ति का हस्तांतरण हो तो उस की रजिस्ट्री होना जरूरी है। बंटवारा भी ऐसा ही एक विलेख है। पंजीकरण कानून कहता है कि बंटवारे के विलेख का पंजीकृत होना जरूरी है वर्ना वह विलेख जरूरत पड़ने पर किसी कार्यवाही में नहीं पढ़ा जाएगा।

संपत्ति के सभी साझेदारों के बीच आपसी सहमति से बंटवारा होता है तो उसे पंजीकृत कराना जरूरी है। यह पंजीकृत विलेख ही संपत्ति के स्वामित्व का विलेख होगा। हाउसिंग बोर्ड या नगर निगम में जहाँ संपत्ति का रिकार्ड रहता है वे अपने रिकार्ड में नामान्तरण करते हैं लेकिन नामान्तरण हो जाने से किसी को स्वत्वाधिकार प्राप्त नहीं होता है। नामान्तरण गलत होने पर न्यायालय के आदेश से उसे हटाया या दुरुस्त किया जा सकता है। स्वअर्जित संपत्ति में सभी पुत्रों और पुत्रियों का समान हिस्सा है। यदि किसी का देहान्त हो गया है तो उस की संपत्ति हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार उस के उत्तराधिकारियों को जाएगी। किसी के मर जाने से या गायब हो जाने से उस का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता है।

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