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	<title>तीसरा खंबा</title>
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	<description>विधि और न्याय प्रणाली पर प्रथम हिन्दी जालस्थल</description>
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		<title>कम आयु के कारण हिन्दू विवाह शून्य या शू्न्यकरणीय नहीं होते</title>
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		<pubDate>Thu, 16 Feb 2012 18:22:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
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		<description><![CDATA[समस्या- शादी के समय लड़के की उम्र 18 साल और लड़की की उम्र 19 साल हो तो क्या ये शादी वैध होगी? -कमल हिन्दुस्तानी, हिसार, हरियाणा समाधान- यहाँ लड़की 19 वर्ष की है वह विवाह की न्यूनतम उम्र प्राप्त कर चुकी है, लड़का 18 वर्ष का है जिस ने विवाह की न्यूनतम उम्र प्राप्त नहीं [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h6><span style="color: #990000;">समस्या-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">शा</span>दी के समय लड़के की उम्र 18 साल और लड़की की उम्र 19 साल हो तो क्या ये शादी वैध होगी?</p>
<p style="text-align: right;"><span style="color: #333399;"><strong><span style="font-size: medium;">-कमल हिन्दुस्तानी, हिसार, हरियाणा</span></strong></span></p>
<h6><span style="color: #008000;">समाधान-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;"><a href="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/child-marr.jpg"><img class="alignright size-thumbnail wp-image-14548" title="child-marr" src="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/child-marr-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" /></a>य</span>हाँ लड़की 19 वर्ष की है वह विवाह की न्यूनतम उम्र प्राप्त कर चुकी है, लड़का 18 वर्ष का है जिस ने विवाह की न्यूनतम उम्र प्राप्त नहीं की है। इस तरह यह एक बाल विवाह कहा जाएगा। विवाह के समय वर और वधु दोनों या उन में से कोई एक यदि विवाह योग्य न्यूनतम उम्र के हों तो भी वह विवाह केवल इस कारण से शून्य या शून्यकरणीय नहीं होगा।  ऐसे विवाह के पति-पत्नी तब तक पति-पत्नी बने रहेंगे जब तक कि न्यायालय द्वारा यह विवाह विच्चेद न कर दिया जाए। हिन्दू विवाह अधिनयम-1955 की धारा 11 में यह बताया गया है कि कौन से विवाह शून्य होंगे और उन्हें न्यायालय से शून्य घोषित करवाया जा सकता है। ऐसे ही अधिनियम की धारा 12 यह बताती है कि कौन से विवाह शून्य करणीय हैं। इन दोनों ही धाराओं में धारा 5 (iii) का उल्लंघन कर होने वाले विवाहों को शून्य अथवा शू्न्यकरणीय नहीं बनाया गया है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">वि</span>वाह के समय वर-वधु की आयु कुछ भी हो एक बार विवाह हो जाने पर हिन्दू विवाह केवल न्यायालय द्वारा पारित विवाह विच्छेद की डिक्री से ही समाप्त हो सकता है। धारा-13 में भी केवल उपधारा (2) (iv) में ही यह उपबंध किया गया है कि यदि किसी स्त्री का विवाह 15 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने के पूर्व कर दिया गया हो तो वह अपने विवाह को रेपुडिएट कर सकती है, लेकिन वह ऐसा केवल अठारह वर्ष की उम्र प्राप्त करने के पूर्व ही कर सकती है। इस उपबंध के अतिरिक्त कोई भी उपबंध हिन्दू विवाह अधिनियम में ऐसा नहीं है जो विवाह के समय वर-वधु की आयु के आधार पर विवाह विच्छेद की अनुमति देता हो।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">हाँ,</span> यदि अधिनियम की धारा 5 (iii) का उल्लंघन किया जाना दंडनीय अपराध बनाया गया है। जिस के अंतर्गत 18 वर्ष की आयु से अधिक लेकिन 21 वर्ष की आयु प्रा्प्त कर लेने के पूर्व विवाह करने वाले पुरुष को 15  दिन के साधारण कारावास तथा 1000 रुपए तक के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। 21 वर्ष की आयु से अधिक के पुरुष द्वारा किसी बालिका से विवाह करने, कोई भी बाल विवाह संपन्न कराने पर तथा माता पिता द्वारा अपने बच्चों का ऐसा विवाह करने पर उन्हें तीन माह तक के साधारण कारावास तथा जुर्माने के दंड से से दंडित किया जा सकता है।  लेकिन कोई भी बाल विवाह शून्य या शून्यकरणीय नहीं होता है।</p>
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		<title>अभिभाषक-पत्र या वकालतनामा क्या है?</title>
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		<pubDate>Wed, 15 Feb 2012 02:20:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
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		<category><![CDATA[वकालतनामा]]></category>
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		<description><![CDATA[समस्या- गाँव में हमारा एक भूखंड है जिस में एक दूसरा व्यक्ति और मैं 50-50 प्रतिशत के हिस्सेदार हैं। मैं ने बँटवारे के लिए अपना वकील नियुक्त किया। वकील द्वारा टाइप करवाए गए सभी वाद पत्रों पर मैं ने भली भाँति पढ़ कर हस्ताक्षर कर दिये हैं। उन के बाद वकील ने दो हरे रंग [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h6><span style="color: #cc0000;">समस्या-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">गाँ</span>व में हमारा एक भूखंड है जिस में एक दूसरा व्यक्ति और मैं 50-50 प्रतिशत के हिस्सेदार हैं। मैं ने बँटवारे के लिए अपना वकील नियुक्त किया। वकील द्वारा टाइप करवाए गए सभी वाद पत्रों पर मैं ने भली भाँति पढ़ कर हस्ताक्षर कर दिये हैं। उन के बाद वकील ने दो हरे रंग के कागजों पर जिन पर अभिभाषक पत्र लिखा हुआ था को बिना भरे ही मेरे हस्ताक्षर करवाए हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि भविष्य में इन खाली अभिभाषक पत्रों पर हस्ताक्षर करने से मुझे किसी प्रकार की हानि तो नहीं होगी?</p>
<p style="text-align: right;"><span style="color: #333399;"><strong><span style="font-size: medium;">-विनोद कुमाँवत, गुढ़ा गोरजी, राजस्थान</span></strong></span></p>
<h6><span style="color: #006600;">समाधान-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;"><a href="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/advocate.jpg"><img class="alignright size-thumbnail wp-image-14542" title="advocate" src="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/advocate-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" /></a>दी</span>वानी प्रक्रिया संहिता के आदेश 3 नियम 4 में यह उपबंध किया गया है कि कोई भी प्लीडर किसी भी न्यायालय में किसी भी व्यक्ति के लिए कार्य नहीं करेगा जब तक कि वह उस व्यक्ति द्वारा ऐसी लिखित दस्तावेज द्वारा इस प्रयोजन के लिए नियुक्त न किया गया हो जो उस व्यक्ति द्वारा या उस के मान्यताप्राप्त अभिकर्ता द्वारा या ऐसी नियुक्ति करने के लिए मुख्तारनामे द्वारा या उस के अधीन सम्यक रूप से प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित है। ऐसे दस्तावेज को ही हम अभिभाषक-पत्र या वकालत नामा कहते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">आ</span>प के वकील ने आप से दो ऐसे अभिभाषक पत्रों पर हस्ताक्षर करवाए हैं जिन्हें भरा नहीं गया है। आप ने वाद पत्र तथा उस के साथ आवश्यक टाइप किए गए जिन कागजों पर हस्ताक्षर किए हैं उन के अलावा अनेक फार्म और भी हैं जिन्हें आप के वाद पत्र के साथ न्यायालय में प्रस्तुत करना पड़ेगा। इन सभी फार्मों को वकील का क्लर्क या मुंशी भरेगा। आप से जिन खाली वकालतनामों या अभिभाषक-पत्रों पर हस्ताक्षर कराए गए हैं उन्हें भी मुंशी ही भरेगा। उन में से एक तो वाद प्रस्तुत करने के साथ ही न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया जाएगा। लेकिन दूसरा अभिभाषक-पत्र आप के वकील ने क्यों हस्ताक्षर करवाया है यह आप का वकील ही बता सकता है। हो सकता है उस ने आप की ओर से दो भिन्न न्यायालयों में भिन्न-भिन्न कार्यवाहियाँ दाखिल की हों। यह भी हो सकता है कि एक वकालतनामा इस सबूत के रूप में कि वह आप द्वारा नियुक्त वकील है अपने पास रखना चाहता हो।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">ज</span>ब दो वकालतनामों पर हस्ताक्षर करवाये जा रहे थे तभी आप को वकील या वकील के मुंशी से पूछना चाहिए था कि दो वकालतनामे किस प्रयोजन से हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं। वकील आप की शंका को दूर कर देता। अब भी देरी नहीं हुई है। आप अपने वकील को जब भी मिलें पूछ सकते हैं कि उस ने आप से दूसरा वकालतनामा क्यों हस्ताक्षर करवाया है। वैसे आम तौर पर वकालतनामे पर हस्ताक्षर करने से किसी भी मुवक्किल को कोई हानि होने की संभावना नहीं होती है, फिर भी आप को अपने वकील से बात कर के अपनी शंका दूर कर लेनी चाहिए।</p>
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		<title>पुत्रवधु व उस के बच्चों ने मकान पर कब्जा कर लिया है और मेरे साथ गाली-गलौच व मारपीट करते हैं</title>
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		<pubDate>Thu, 09 Feb 2012 18:39:15 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
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		<description><![CDATA[समस्या- मेरी उम्र 75 साल है। मेरे पति की मौत 2008 में हो गई है। मेरा एक लड़का और एक लड़की है। लड़की की शादी हो चुकी है और लड़के की शादी 17 साल पहले हुई थी, उसके भी दो बच्चे हैं।  मेरे पति ने कुछ पैसे अर्जित कर यहाँ एक मकान बनाया था और [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>
<h6 style="text-align: justify;"><span style="color: #cc0000;">समस्या-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">मे</span>री उम्र 75 साल है। मेरे पति की मौत 2008 में हो गई है। मेरा एक लड़का और एक लड़की है। लड़की की शादी हो चुकी है और लड़के की शादी 17 साल पहले हुई थी, उसके भी दो बच्चे हैं।  मेरे पति ने कुछ पैसे अर्जित कर यहाँ एक मकान बनाया था और हम सब लोग अभी तक उसी मकान में रह रहे हैं। मेरे पति की मौत के बाद मेंने अदालत से रजिस्टर्ड डिग्री मकान की मेरे नाम करवा ली है। जिसमें मेरे लड़का और लड़की ने अदालत में जाकर मकान मेरे नाम करने के बयान भी दिए हैं। लेकिन अब मेरी बहू और बेटे के बीच कई सालों से झगडा चल रहा है और दोनों ने एक दूसरे पर कोर्ट केस कर रखे हैं। मेरा लड़का करीब चार सालों से मेरे घर में नहीं रह रहा है। लेकिन बहू और बच्चे अभी भी मकान में ही रह रहे हैं। मुझे मेरी बहू शुरु से ही नहीं चाहती है। अब तो उसने मेरा जीना ही दुश्वार कर दिया है। बात बात पर मुझे गाली देती है, मारती पीटती है,और मुझे कहती है कि मेरे घर से निकल जा। इस सभी से तंग आकर मैंने अपने बेटा और बहू को अपनी चल अचल सम्पत्ती से बेदखल कर दिया है। लेकिन वो लोग मेरे ही घर में रहकर मुझे ही मारते पीटते हैं और बहू कहती है कि मकान पर मेरा हक़ है। तू यहाँ से निकल जा।  इसलिए मैं आपसे जानना चाहती की इस पर कानून क्या है? क्यों कि मेरी जिन्दगी अब नरक बन चुकी है। क्या कानून में उनलोगों का कोई हिस्सा बनता है या नहीं। जबकि ये मेरी पूर्वजों की जायदाद नहीं है। पूर्वजों की जायदाद गाँव में है।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="color: #333399;"><strong><span style="font-size: medium;">-राधा, रोहतक, हरियाणा</span></strong></span></p>
<h6 style="text-align: justify;"><span style="color: #008000;">समाधान-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">आ</span>प के द्वारा दिए गए विवरण से पता लगता है कि जिस मकान (जायदाद) की आप बात कर रही हैं वह आप के पति ने स्वअर्जित आय से निर्मित किया था। आप के पति की मृत्यु के उपरान्त आप के पुत्र और पुत्री ने अपना हिस्सा आप के हक में त्याग कर आप को उस मकान का पूर्ण स्वामी बना दिया है। इस तरह वह मकान आप की स्वअर्जित संपत्ति हो गया है। उक्त मकान में आप के जीते जी किसी भी व्यक्ति का कोई हक नहीं है। आप चाहें तो उक्त मकान की किसी भी व्यक्ति के नाम वसीयत कर सकती हैं, उसे दान कर सकती हैं या उसे बेच सकती हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;"><a href="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/old-woman-india.jpg"><img class="alignright size-thumbnail wp-image-14537" title="old woman india" src="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/old-woman-india-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" /></a>आ</span>प की समस्या यह है कि आप के उस मकान में ही आप की पुत्रवधु व उस के बच्चे निवास कर रहे हैं जो आप के साथ गाली-गलौच करते हैं और मारपीट करते हैं। अब तक उन्होंने आप के साथ जो कुछ भी किया है आप ने उस के बारे में संभवतः कोई कार्यवाही नहीं की है। लेकिन आप की पुत्रवधु और उस की संतानों द्वारा आप के साथ गाली-गलौच करना और मारपीट करना अपराधिक कृत्य हैं। आप को उन के इस कृत्य के लिए पुलिस को सूचित करना चाहिए कि वह उन के विरुद्धसमुचित कार्यवाही करे। इस पर पुलिस उनके विरुद्ध कार्यवाही करेगी। यदि वे लोग दुबारा आप के साथ ऐसा करते हैं तो आप दुबारा शिकायत कीजिए। पुलिस फिर से दुबारा उन के विरुद्ध कार्यवाही करेगी।आप पुलिस को उन से अपनी सुरक्षा के लिए भी कह सकते हैं। पुलिस इस संबंध में भी कार्यवाही कर सकती है।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">आ</span>प की पुत्रवधु और उस की संतानें जो आप के मकान में निवास कर रहे हैं। वे आप की इच्छा से ही वहाँ निवास कर रहे हैं। आप उन्हें नोटिस दे सकती हैं या किसी वकील के माध्यम से दिलवा सकती हैं कि मकान आप का है और आप अब उन्हें मकान में नहीं रखना चाहती हैं। यदि वे इस नोटिस के उत्तर में मकान खाली कर देते हैं तो ठीक है अन्यथा मकान के जिस भाग में वे निवास कर रहे हैं उसे खाली कर उस का कब्जा आप को दिलवाने के लिए आप न्यायालय में कब्जे तथा नोटिस देने से ले कर मकान खाली करने तक मकान के उपयोग-उपभोग के खर्चे का दावा दाखिल करवा सकती हैं। इस में कुछ समय तो लग सकता है। लेकिन उन्हें मकान खाली कर कब्जा आप को देना पड़ेगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो न्यायालय आप को अपना मकान खाली करवा कर उस का कब्जा दिलवा सकता है। इसी दावे में आप आवेदन कर के न्यायालय से अंतरिम निषेधाज्ञा इस आशय की जारी करवा सकती हैं कि वे मकान के उस हिस्से तक ही सीमित रहें जिस में वे निवास कर रहे हैं और आप के हिस्से में प्रवेश नहीं करें तथा आप के साथ गाली-गलौच व मारपीट आदि न करें। यदि वे फिर भी ऐसा कुछ करते हैं तो आप न्यायालय के आदेश की पालना न करने के मामले में उन के विरुद्ध कार्यवाही कर सकती हैं।</p>
</div>
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		<title>पति किस विधिक उपबंध में पत्नी से गुजारे भत्ते की मांग कर सकता है?</title>
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		<pubDate>Wed, 08 Feb 2012 17:48:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
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		<description><![CDATA[समस्या- क्या देश में कोई ऐसा कानून भी है की पति अपनी पत्नी से खर्चा मांग सके, जबकि पति बेरोजगार है और पत्नी एक लिमिटेड कंपनी में कार्यरत है। -कमल हिन्दुस्तानी समाधान- यह एक दुर्भाग्य ही है कि देश में ऐसा कोई सामान्य कानून नहीं है जिस के अंतर्गत कोई पति अपनी कमाऊ और संपन्न [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h6><span style="color: #cc0000;">समस्या-</span></h6>
<p><span style="font-size: xx-large;">क्या</span> देश में कोई ऐसा कानून भी है की पति अपनी पत्नी से खर्चा मांग सके, जबकि पति बेरोजगार है और पत्नी एक लिमिटेड कंपनी में कार्यरत है।</p>
<p style="text-align: right;"><span style="font-size: medium; color: #333399;">-कमल हिन्दुस्तानी</span></p>
<h6 style="text-align: justify;"><span style="color: #006600;">समाधान-</span></h6>
<p><span style="font-size: xx-large;"><a href="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/hindu-marraige.gif"><img class="alignright  wp-image-14533" title="hindu-marraige" src="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/hindu-marraige-300x287.gif" alt="" width="197" height="190" /></a>य</span>ह एक दुर्भाग्य ही है कि देश में ऐसा कोई सामान्य कानून नहीं है जिस के अंतर्गत कोई पति अपनी कमाऊ और संपन्न पत्नी से गुजारे भत्ते की मांग कर सके। लेकिन हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 24 एवं धारा 25 के अंतर्गत उस परिस्थिति में जब कि उन के बीच किसी न्यायालय में हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत किसी तरह का कोई आवेदन लंबित हो तो पति द्वारा गुजारे भत्ते की मांग की जा सकती है।</p>
<p><span style="font-size: xx-large;">धा</span>रा 24 हिन्दू विवाह अधिनियम में मुकदमा लंबित रहने के दौरान पति पत्नी से गुजारे भत्ते की मांग कर सकता है। इसी तरह धारा 25 के अंतर्गत वह स्थाई पुनर्भरण की मांग कर सकता है और न्यायालय को यह अधिकार है कि वह पति को पत्नी से गुजारा भत्ता दिला सके।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">दि</span>ल्ली उच्च न्यायालय ने <a href="http://indiankanoon.org/doc/139372539/">रानी सेठी बनाम सुनील सेठी</a> के मुकदमे में दिनांक 31 मार्च 2011 को एक निर्णय में एक व्यवसायी महिला को अपने 55 वर्षीय पति को 20 हजार रूपए हर माह गुजाराभत्ता देने एवं कहीं आने-जाने के लिए मारूति जेन कार भी देने को कहा था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर महिला की अपील को खारिज करते हुए यह फैसला दिया था। निर्णय में कहा गया था कि महिला की आय लाखों में है, जबकि पति के पास आय का कोई साधन नहीं है, ऎसे में उसे पति को भरण-पोषण का खर्चा देना होगा। दोनों की शादी 1982 में हुई थी। उनका 26 साल का एब बेटा व 24 साल की एक बेटी है।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">प</span>ति ने एक लाख रूपए से ग्रेटर नोएडा में पत्नी के नाम पेइंग गेस्ट रखने का व्यवसाय शुरू किया जो कि काफी कामयाब हुआ, लाखों की आय होने लगी। इस बीच दोनों मे झगडा हुआ और अलग हो गए। पत्नी व उसके बच्चों ने विज्ञापन देकर पति को संपत्ति से बेदखल कर दिया। पति ने 2008 में कडकडडूमा कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई और साथ ही हिंदू मैरिज एक्ट की धारा-24 के तहत गुजारा भत्ता देने की गुहार की। इस याचिका में कहा गया था कि उसे घर से निकाला गया और उसे गुजारे के लिए खर्चा तक नहीं दिया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि जो गेस्ट हाउस उसने बनवाया था उससे काफी कमाई हुई है।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">प</span>ति ने अदालत को बताया कि उसकी पत्नी की सालाना आमदनी एक करोड है। उसकी पत्नी के पास चार गाडियां है दूसरी तरफ उसकी कोई आमदनी नहीं है और वह सडक पर आ चुका है। पत्नी ने कहा था कि उसको अपनी बीमारी पर बहुत खर्च करना पडता है, उसके बच्चे बड़े हो रहे हैं और बेटी की शादी करनी है इसलिए वो ये गुजारा भत्ता नहीं दे सकती। लेकिन ऊपरी अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए तीन माह के भीतर उसे निचली अदालत के फैसले का पालन करने का आदेश दिया।</p>
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		<title>पिताजी जमीन न बेचें इस के लिए क्या किया जाए?</title>
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		<pubDate>Tue, 07 Feb 2012 13:21:14 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
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		<description><![CDATA[समस्या- मेरी माताजी का देहांत हो चुका है। मेरे पिताजी की आयु 80 बरस है। वे फैजाबाद (उ.प्र.) जिले के गाँव में अकेले रहते थे। उन्हें मैं अपने पास मुंबई ले आया हूँ। मैं यहाँ अपने फ्लेट में रहता हूँ। गाँव के खुले वातावरण के स्थान पर यहाँ के भीड़ भरे माहौल तथा फ्लेट के [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h6 style="text-align: justify;"><span style="color: #cc0000;">समस्या-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">मे</span>री माताजी का देहांत हो चुका है। मेरे पिताजी की आयु 80 बरस है। वे फैजाबाद (उ.प्र.) जिले के गाँव में अकेले रहते थे। उन्हें मैं अपने पास मुंबई ले आया हूँ। मैं यहाँ अपने फ्लेट में रहता हूँ। गाँव के खुले वातावरण के स्थान पर यहाँ के भीड़ भरे माहौल तथा फ्लेट के बंद वातावरण में घुटन महसूस करते हैं और कहते हैं कि मुझे कहाँ जेल में ले आए हो। मुझे गाँव में ही छोड़ दो। मैं उन्हें गाँव में भी अकेले नहीं छोड़ सकता।  उन्हें भूलने की बीमारी है, आधे घंटे पहले की बात भी याद नही रहती।   मेरी 5 बहनें हैं।  इस उम्र मे पिता जी यह भी कहते हैं कि वे दूसरी शादी कर लेंगे। यह भी कहते हैं कि गांव की जमीन बेच दूंगा तो मेरा काम चल जाएगा। उन्हों ने जमीन पर ऋण ले रखा था उसे मैं ने पैसा भेज कर चुकाया है। जमीन उन की ही खरीदी हुई है। मेरी सारी बचत उसी में लग गई है। पिताजी को गाँव भेजना ही पड़े तो वे जमीन न बेच दें इसके लिये क्या किया जा सकता है?</p>
<h6 style="text-align: justify;"><span style="color: #006600;">समाधान-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><a href="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/Old-indian.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-14529" title="Old indian" src="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/Old-indian-226x300.jpg" alt="" width="226" height="300" /></a><span style="font-size: xx-large;">आ</span>प की समस्या विकट है। आप के पिताजी की गाँव की जमीन उन्ही के द्वारा खरीदी हुई होने के कारण उन की स्वअर्जित संपत्ति है और उस संपत्ति को बेचने, हस्तान्तरित कर देने का उन्हें पूरा अधिकार है। इस कारण कानूनन कोई रोक उस संपत्ति को आप के पिताजी द्वारा बेचे जाने से रोके जाने पर नहीं लगाई जा सकती है।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">आ</span>प के पिताजी की उम्र 80 वर्ष की है और वे मानसिक रूप से अस्वस्थ भी हैं। वैसी अवस्था में उन्हें गाँव में अकेले छोड़ना उचित नहीं है। आप को उन्हें समझाना चाहिए कि उन्हें आप के पास ही रहना चाहिए। वैसे भी अभी उन्हें आप के पास रहने आए अधिक समय नहीं हुआ है। कुछ दिन समझा-बुझा कर उन्हें अपने साथ रखिये, हो सकता है जब उन्हें अधिक समय आप के साथ रहते हो जाए और वे यहाँ के माहोल में अभ्यस्त हो जाएँ तो शायद उन्हें यहाँ अच्छा लगने लगे। आप को उन की रुचियों और सुविधाओं का खयाल रखना होगा। आप जिस बिल्डिंग में रहते हैं उस में या आस पास की बिल्डिंग में कुछ बुजुर्ग रहते हो तो उन से उन की जान पहचान करवाइए। उन का दिन में आपस में मेल जोल बढ़ेगा तो हो सकता है उन का मन मुम्बई में रम जाए और वे गाँव जा कर रहने की सोच को त्याग दें। यदि वे मुम्बई में रहेंगे तो गाँव की जमीन किसी तरह बेच नहीं सकेंगे। कभी आप को अवकाश मिले और आप  कुछ दिन के लिए गाँव जाएँ तो उन्हें साथ ले जाएँ और साथ ही वापस ले आएँ, लेकिन कुछ महिनों के बाद। मुम्बई की सुविधाओं को अपना लेने के बाद यदि गाँव में वहाँ की असुविधाएँ उन्हें मिलेंगी तो उन का मन भी वहाँ रहने का नहीं करेगा और वे भी आप के साथ वापस लौटने को तैयार हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">इ</span>स के अतिरिक्त आप उन की चिकित्सा करवाइए। किसी न्यूरोलोजिस्ट और साइकेट्रिस्ट को उन्हें दिखाइए। उन के इलाज के पर्चे के आधार पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि वे उम्र कारण ऐसी मानसिक अवस्था में पहुँच गए हैं कि अपना भला बुरा नहीं सोच सकते। यदि चिकित्सक इस तरह  की रिपोर्ट दे देते हैं। तो फिर यह स्पष्ट होगा कि वे आप की उपस्थिति के बिना जमीन या कोई भी अन्य संपत्ति को बेचने तथा उस का विक्रय पत्र निष्पादित करने के लिए सक्षम नहीं रह गए हैं। तब आप गाँव में आम तौर पर पढ़े जाने वाले समाचार पत्रों में अपनी ओर से यह सूचना प्रकाशित करवा सकते हैं कि आप के पिताजी की मानसिक अवस्था ठीक नहीं है और वे ऐसी अवस्था में संपत्ति बेचते हैं तो ऐसा विक्रय अवैधानिक होगा। इस से कोई आप के पिताजी से जमीन खरीदने से कतराएगा। फिर भी कोई उन्हें बहला-फुसला कर उन की जमीन खरीदना चाहेगा और ऐसा कर लेता है तो आाप उन की मानसिक स्थिति की चिकित्सकीय रिपोर्ट तथा उक्त विज्ञापन के आधार पर न्यायालय में दावा कर के ऐसे विक्रय को शून्य घोषित करवाया जा सकता है और निरस्त करवाया जा सकता है।</p>
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		<item>
		<title>हिन्दू उत्तराधिकार के मामले में संपत्ति पर अधिमान्य अधिग्रहण का अधिकार (preferential right to aquire) क्या है?</title>
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		<pubDate>Mon, 06 Feb 2012 02:30:03 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
				<category><![CDATA[Legal Advice]]></category>
		<category><![CDATA[succession]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराधिकार]]></category>
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		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>

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		<description><![CDATA[समस्या- हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 में वर्णित में वर्णित संपत्ति पर अधिमान्य अधिग्रहण का अधिकार (preferential right to acquire) क्या है? समाधान- हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा-22 में संपत्ति पर अधिमान्य अधिग्रहण का अधिकार (preferential right to acquire) का उल्लेख किया गया है। इसे समझना बिलकुल कठिन नहीं है। जब भी किसी व्यक्ति का [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h6 style="text-align: justify;"><span style="color: #cc0000;">समस्या-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">हि</span>न्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 में वर्णित में वर्णित संपत्ति पर अधिमान्य अधिग्रहण का अधिकार (preferential right to acquire) क्या है?</p>
<h6 style="text-align: justify;"><span style="color: #006600;">समाधान-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;"><a href="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/Hindu-Succession-Act.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-14524" title="Hindu Succession Act" src="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2012/02/Hindu-Succession-Act-199x300.jpg" alt="" width="199" height="300" /></a>हि</span>न्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा-22 में संपत्ति पर अधिमान्य अधिग्रहण का अधिकार (preferential right to acquire) का उल्लेख किया गया है। इसे समझना बिलकुल कठिन नहीं है।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">ज</span>ब भी किसी व्यक्ति का देहान्त बिना कोई वसीयत छोड़े हो जाता है तो मृतक की संपत्ति और व्यवसाय पर उस के उत्तराधिकारियों का स्वामित्व स्थापित हो जाता है। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अनुसार प्रथम अनुसूची के सभी उत्तराधिकारियों को उस संपत्ति और व्यवसाय में समान हिस्सा प्राप्त हो जाता है और वे सभी उक्त संपत्ति और व्यवसाय के संयुक्त स्वामी हो जाते हैं। ऐसी संपत्ति और व्यवसाय अविभाजित संयुक्त संपत्ति और व्यवसाय हो जाते हैं। उस संपत्ति और व्यवसाय में सभी हिस्सेदारों के भागों का निर्धारण या तो सभी उत्तराधिकारियों के आपसी समझौते से हुए विभाजन विलेख के माध्यम से संपन्न होता है अथवा किसी एक या अधिक उत्तराधिकारियों द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किए गए विभाजन के वाद में हुई डिक्री के माध्यम  से होता है।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">य</span>दि ऐसी किसी संयुक्त संपत्ति या व्यवसाय का विभाजन किए बिना उत्तराधिकारियों में से कोई एक भागीदार अपना हिस्सा स्थानान्तरित करवाना चाहे तो उस समय उस संयुक्त संपत्ति या व्यवसाय के अन्य भागीदारों को यह अधिकार प्राप्त होता है कि वे संपत्ति या व्यवसाय से अपना हिस्सा अलग चाहने वाले पक्षकार का हिस्सा उस का मूल्य उस हिस्सेदार को चुका कर स्वयं अपने नाम हस्तान्तरित करवा लें।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">इ</span>स तरह स्वयं अपने नाम हस्तान्तरित करवाने का इच्छुक भागीदार उस हिस्से को प्राप्त करने के लिए जिस क्षेत्र में वह संपत्ति स्थित है अथवा जिस क्षेत्र में वह व्यवसाय चल रहा है उस क्षेत्र पर क्षेत्राधिकार रखने वाले दीवानी न्यायालय में हिस्से को हस्तान्तरित करवाने के लिए आवेदन कर सकता है। संपत्ति या व्यवसाय का मूल्य क्या अदा किया जाएगा इस पर विवाद होने पर न्यायालय हस्तांतिरित होने वाली संपत्ति या व्यवसाय का मू्ल्य तय करेगा। इस प्रकार तय मूल्य अदा करने को तैयार न होने पर संपत्ति या व्यवसाय का भाग उस का अधिकारी भागीदार किसी भी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित कर सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">य</span>दि अपने नाम हस्तांतरित करवाने के इच्छुक सहभागीदारों की संख्या दो या अधिक हो तो उन में से जो भी भागीदार हस्तांतरित कराए जाने वाली संपत्ति या व्यवसाय के भाग का अधिक मूल्य देने को तैयार होगा वही उस संपत्ति या व्यवसाय को अपने नाम हस्तांतरित कराने का अधिकारी होगा।</p>
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		<title>पिताजी की मिल्कियत का हिस्सा प्राप्त करने के लिए क्या किया जाए?</title>
		<link>http://teesarakhamba.com/archives/14520</link>
		<comments>http://teesarakhamba.com/archives/14520#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 05 Feb 2012 02:25:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
				<category><![CDATA[Legal Advice]]></category>
		<category><![CDATA[Partition]]></category>
		<category><![CDATA[कानूनी सलाह]]></category>
		<category><![CDATA[दीवानी विधि]]></category>
		<category><![CDATA[Undivided property]]></category>
		<category><![CDATA[अविभाजित संपत्ति]]></category>
		<category><![CDATA[विभाजन]]></category>

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		<description><![CDATA[समस्या- मुझे मेरे पिताजी के नाम की मिल्कियत से हिस्सा लेना है, मुझे इस के लिए क्या करना होगा? हम चार भाई थे, मैं सब से छोटा हूँ। मुझे से बड़े भाई की एक्सीडेंट में मृत्यु हो चुकी है, उन की पत्नी के साथ मेरा विवाह हुए 16 वर्ष हो गए हैं, उन की एक [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>
<h6><span style="color: #cc0000;">समस्या-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">मु</span>झे मेरे पिताजी के नाम की मिल्कियत से हिस्सा लेना है, मुझे इस के लिए क्या करना होगा? हम चार भाई थे, मैं सब से छोटा हूँ। मुझे से बड़े भाई की एक्सीडेंट में मृत्यु हो चुकी है, उन की पत्नी के साथ मेरा विवाह हुए 16 वर्ष हो गए हैं, उन की एक लड़की भी थी जो अभी 16 वर्ष की हो गई है। मेरे बड़े भाई हमें हिस्सा देने से मना करते हैं। कहते हैं कि सब मैं ने ही किया है तुमने कुछ नहीं किया है। मिल्कियत पिताजी के नाम पर है। पापा-मम्मी का स्वर्गवास हो गया है। मैं क्या करूँ? मुझे रास्ता दिखाएँ।</p>
<p style="text-align: right;"><span style="color: #333399;"><strong><span style="font-size: medium;">-राधेश्याम भाटी, अहमदाबाद, गुजरात</span></strong></span></p>
<h6 style="text-align: justify;"><span style="font-size: small; color: #006600;">समाधान-</span></h6>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;"><a href="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2011/12/justice.jpg"><img class="size-full wp-image-13737 alignright" src="http://teesarakhamba.com/wp-content/uploads/2011/12/justice.jpg" alt="" width="122" height="92" /></a>आ</span>प के पिता के नाम जो संपत्ति है उस में आप के पिता जी के सभी उत्तराधिकारियों का हिस्सा है। जिस में आप के चारों भाई तथा बहिनें हों तो वे भी हिस्सेदार हैं। यदि बहिन नहीं है तो माता जी का देहान्त हो जाने से अब पिताजी की संपत्ति के चार हिस्से होंगे जिस में एक एक हिस्सा सभी भाइयों को प्राप्त होगा। आप एक हिस्से के अधिकारी हैं। आप के दिवंगत भाई के हिस्से का आधा उन की विधवा का है जिस का विवाह आप के साथ हो चुका है और आधा हिस्सा उनकी पुत्री को प्राप्त होगा। आप के भाई के इस कथन से कि सब कुछ उन्हीं ने किया है पिता जी की संपत्ति के उत्तराधिकार पर कोई प्रभाव नहीं होगा।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: xx-large;">आ</span>प को अपना हिस्सा प्राप्त करने के लिए जिला न्यायालय के समक्ष विभाजन का वाद प्रस्तुत करना होगा।</p>
</div>
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