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गोदनामा कानून के अनुसार न हो तो उसे निरस्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित किया जा सकता है।

समस्या-

संगीता ने प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं शादी शुदा हूँ और मेरी एक बहन है, वो भी शादी शुदा हैं। मेरे पिता जी सरकारी नौकरी पर कार्यरत थे। दोनों बेटियों की शादी कर देने पर उन्होंने हम दोनों बहनो को बिना बताये अपने सगे भतीजे के बेटे को पंजीकृत गोद ले लिया। उसे  अपनी सम्पति का मालिक बना दिया सेवा के दौरान उनका देहांत हो गया तो क्या हम दोनों बहनो गोद नामा कैंसल करवा सकती हैं और अनुकम्पा के आधार पर नौकरी किसे मिल सकती है? हम को या दत्तक पुत्र को और मेरी सहमति के बिना दत्तक पुत्र को नौकरी मिल सकती है?

समाधान-

आप कैसे कहती हैं कि दत्तक पुत्र को आप के पिता ने संपूर्ण संपत्ति का स्वामी बना दिया? क्या उन्हों ने कोई वसीयत की है। यदि कोई वसीयत नहीं की है तो जैसे एक पुत्र के होते हुए विवाहित पुत्रियों को जो अधिकार प्राप्त हैं वे सभी अधिकार आपको प्राप्त हैं। आप कृषि भूमि के अतिरिक्त तमाम संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार हैं और दत्तक पुत्र भी। आप तीनों  में से प्रत्येक पिता की छोड़ी हुई संपत्ति में एक तिहाई हिस्से की हकदार हैं। अनुकंपा के आधार पर उस आश्रित को नियुक्ति मिल सकती है जो शेष आश्रितों की अनापत्ति ले आए।  आप की आपत्ति करेंगी या अनापत्ति नहीं देंगी तो दत्तक पुत्र अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त नहीं कर सकेगा। गोदनामा आप तभी निरस्त करवा सकती हैं जब कि वह कानून के अनुसार न हो। इस के लिए आप गोदनामा की प्रति प्राप्त कर किसी स्थानीय वकील से सलाह कर सकती हैं और गोद के नियमों का उल्लंघन हुआ हो तो उसे निरस्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकती हैं।

संतानों को संपत्ति से बेदखल करने के विज्ञापनों का कोई अर्थ नहीं है।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

श्वेत गुप्ता ने हलदौर, बिजनौर उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी माताजी पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका के पद पर कार्यरत थीं। मेरी एक छोटी बहन है, जो विवाहित है, जिसका विवाह वर्ष 2001 में हो गया था। मेरी माताजी की मृत्यु के उपरान्त मुझे पता चला है कि मेरे बहनोई ने मेरी माताजी के द्वारा साजिश करके वर्ष 2003 में समाचार पत्र में एक विज्ञापन दिलवा दिया था कि मैं अपने पुत्र को गलत चाल चलन होने के कारण अपनी चल अचल सम्पत्ति से बेदखल करती हूँ। इस बात का पता हमें उनकी मृत्यु के बाद चला। जब मैं बेसिक शिक्षा विभाग में अनुकम्पा नियुक्ति हेतु गया तो वहाँ पर पता चला कि मेरी बहन ने आपत्ति लगाई हुई है तथा उसके द्वारा नियुक्ति की मांग की जा रही है। क्या विवाहित लडकी अनुकम्पा नियुक्ति की हकदार है ? अपने पुत्र को किसी भी चीज से बेदखल करने की क्या प्रक्रिया है? क्या बेदखल होने वाले व्यक्ति के पास कोई नोटिस या अन्य कोई कानूनी प्रक्रिया होती है? मैं बहुत परेशान हूँ। क्या मेरी माताजी के स्थान पर मुझे अनुकम्पा नियुक्ति मिल सकती है? क्या बहन व बहनोई कोई अडचन लगा सकते हैं। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

क्सर ऐसे विज्ञापन अखबारों में देखने को मिलते हैं जिन में माता पिता यह कहते हैं कि हम ने हमारे पुत्र या पुत्री को अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया है। लेकिन वह संपत्ति तो तब माता पिता की होती है। संतानों को संपत्ति तो जिस के नाम होती है उस की मृत्यु के उपरान्त उत्तराधिकार में प्राप्त होती है। इस तरह जिस दिन बेदखल करने का विज्ञापन प्रकाशित होता है या कोई दस्तावेज लिखा जाता है उस दिन संपत्ति उस के नाम नहीं होती है जिसे बेदखल किया जा रहा होता है। जो व्यक्ति किसी संपत्ति का स्वामी ही नहीं है और जिस का उस में कोई दखल ही नहीं है उसे कैसे उस से बेदखल किया जा सकता है? यदि कोई किसी संपत्ति का स्वामी हो तो उसे बेदखल इस लिए नहीं किया जा सकता कि वह संपत्ति का स्वामी है और उस का उस संपत्ति पर दखल का पूरा अधिकार है। इस तरह आप के मामले में बेदखली का विज्ञापन पूरी तरह से बेमानी है। उस का कोई अर्थ नहीं है। जो भी संपत्ति आप की माताजी की है उस में आप दोनों भाई बहन की संयुक्त हो गयी है और आप को अपना हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार है। चाहे यह संपत्ति कोई अचल संपत्ति हो या फिर बैंक में जमा राशि हो या बीमा और आप की माताजी की नौकरी के लाभ हों।

कोई भी विवाहित बहिन यदि उस का पति जीवित है तो अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त नहीं कर सकती क्यों कि विवाहित स्त्री उस के पति की आश्रित है न कि आप की माता जी की। हाँ यदि कोई स्त्री विधवा हो जाए या उस का विवाह विच्छेद हो जाए और अपने माता पिता के साथ रहने आ जाए तो वह आश्रित हो सकती है। आप की बहिन के साथ ऐसा नहीं है। इस कारण से वह अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त नहीं कर सकती। उस के द्वारा लगाई गई आपत्ति का कोई अर्थ नहीं है, आप प्रतिआपत्ति प्रस्तुत करें वह निरस्त हो जाएगी। यदि आप अपनी माताजी के आश्रित हैं तो आप अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। आप ने अब तक अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने के लिए आवेदन नहीं किया हो तो आप को तुरन्त आवेदन करना चाहिए।

प को बेदखल करने की प्रक्रिया से कोई मतलब नहीं है, उस की आप को जानने की आवश्यकता नहीं है इस कारण हम यहाँ नहीं बता रहे हैं। वैसे तीसरा खंबा को सर्च करेंगे तो वहाँ यह प्रक्रिया पहले बताई जा चुकी है।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए यह नहीं देखा जाएगा कि मृतक कर्मचारी को किस आधार पर सेवा में नियुक्ति प्राप्त हुई थी

 आनन्द शर्मा ने पूछा है –
मेरे पिता सेलटेक्स में सहायक ग्रेड-3 के पद पर काम करते थे। उन के निधन के उपरान्त मेरी माँ को नौकरी मिली। अब मेरी माँ का भी निधन हो गया है।  लोग कहते हैं कि अनुकम्पा पर अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिल सकती। क्या ये सही है और क्या क्या ये नौकरी मुझे मिल सकती है?
 उत्तर –
आनन्द जी,
ब से पहले तो आप को यह जान लेना चाहिए कि अनुकम्पा नियुक्ति केवल एक राहत है और अनुकम्पा के आधार पर मिलती है। यह किसी का अधिकार नहीं है। यह नियुक्ति प्रत्येक राज्य में उस राज्य के अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों के अन्तर्गत मिल सकती है और उपयुक्त पद उपलब्ध होने पर ही मिल सकती है। इस के लिए अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता।
नुकम्पा नियुक्ति का आधार यह है कि जब एक परिवार में परिवार के लिए कमाने वाला व्यक्ति चला जाता है तो उसे तुरन्त सहारे की आवश्यकता होती है। सरकारी विभागों में और कुछ सरकारी कंपनियों में इस तरह की नियुक्तियाँ देने का प्रावधान है। इस तरह की नियुक्तियों के लिए किसी भी सरकारी कर्मचारी की नौकरी में रहते हुए निधन हो जाने पर उस के आश्रितों (पति, पत्नी और उस की संतानों) में से किसी एक को प्रदान की जाती है। आप की माता सरकारी कर्मचारी थी औऱ आप के परिवार का खर्च चलाती थी, आप उस के आश्रित थे तो आप अपनी माँ की मृत्यु के उपरान्त अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह बात बेमानी है कि आप की माता को भी अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त हुई थी। लेकिन आप को नियमों के अनुसार निश्चित अवधि में इस नियुक्ति के लिए आवेदन करना होगा। यदि अवधि निकल गई तो फिर आप नियुक्ति प्राप्त करने से वंचित हो सकते हैं। इस कारण से आप को तुरन्त इस के लिए आवेदन कर देना चाहिए। 
हो सकता है कि आप के राज्य में कोई ऐसा नियम हो कि अनुकम्पा के आधार पर नियुक्त कर्मचारी की नौकरी में रहते हुए मृत्यु हो जाने पर अनुकम्पा नियुक्ति न दी जाए। हालाँकि ऐसा उपबंध अभी तक किन्हीं भी नियमों मुझे देखने को नहीं मिला है। आप सब से पहले तो अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन कर दें। यदि आप को इस आधार पर नियुक्ति नहीं दी जाती है कि आप की माता स्वयं अनुकम्पा नियुक्ति के माध्यम से नौकरी में आई थीं, तो आप ऐसे नियुक्ति नहीं देने के आदेश के विरुद्ध अपने राज्य के उच्चन्यायालय के समक्ष रिट याचिका प्रस्तुत कर राहत प्राप्त करने का प्रयत्न कर सकते हैं। यदि आप के राज्य में अनुकम्पा के आधार पर नियुक्त कर्मचारी की नौकरी में रहते हुए मृत्यु हो जाने पर अनुकम्पा नियुक्ति न दिए जाने का नियम न हुआ तो आप को अवश्य ही राहत मिल जाएगी। 

क्या मुझे मेरे पिता जी के सेवा में रहते हुए दिवंगत होने के कारण अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है?

 कमलेश सोनी ने पूछा है-
मेरे पापा कलेक्टर कार्यालय में 1980 से नियमित कर्मचारी थे। सेवा में रहते हुए उन का दिनांक 11.02.2005 में देहान्त हो गया। लेकिन मेरी मम्मी 1999 से शिक्षाकर्मी-3 के पद पर कार्यरत है। मध्यप्रदेश शासन की अनुकंपा नियमों के अय़नुसार मैं अनुकंपा नियुक्ति के लिए अधिकार नहीं रखता। क्या मेरी मध्यप्रदेश में अनुकंपा नियुक्ति हो सकती है?
 उत्तर – 

कमलेश जी,

च्चतम न्यायालय का निर्णय है कि अनुकंपा नियुक्ति मृत कर्मचारी का अधिकार नहीं है। अपितु यह कर्मचारियों के परिवारों को दी गई एक सुविधा है। यदि किसी कर्मचारी की सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाती है, और उस का परिवार अचानक संकट में आ जाता है तो वैसी स्थिति में नियमों के अनुसार मृत राजकीय कर्मचारी के आश्रितों में से किसी एक को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा सकती है। आप की माताजी पहले से ही सरकारी सेवा में हैं, वैसी स्थिति में आप का परिवार उस तरह के संकट में नहीं कहा जा सकता जैसा कि यदि परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी सेवा में न हो तो संकट में होता। 
प्रत्येक राज्य सरकार के अनुकंपा नियुक्ति के नियम भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, मध्यप्रदेश के राजकीय कर्मचारियों पर प्रभावी अनुकंपा नियुक्ति के नियमों की जानकारी हम नहीं कर सके हैं, लेकिन यह निश्चित है कि यदि परिवार में आश्रितों में से कोई एक पहले से सरकारी सेवा में है तो उस परिवार में मृत कर्मचारी के अन्य आश्रितों को इन नियमों के अंतर्गत नियुक्ति प्राप्त होना दुष्कर है। वैसे भी अनुकंपा नियुक्ति के मामले में मध्यप्रदेश में कोई अच्छी स्थिति नहीं है। अनेक मृत कर्मचारियों को आश्रितों को पिछले दस वर्ष से नौकरियाँ नहीं दी जा सकी हैं, जब कि वे नियमों के अंतर्गत नौकरी के लिए हकदार हैं। 
मुझे नहीं लगता कि आप को अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है। आप चाहें तो यहाँ क्लिक कर के अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में उच्चतम न्यायालय का छत्तीसगढ़ सरकार बनाम धीरजो कुमार सेंगर के मुकदमें में दिया गया निर्णय पढ़ सकते हैं। इस मामले में आप को सेवा संबंधी मामलों को देखने वाले किसी उच्चन्यायालय के वकील से सलाह करनी चाहिए।

अशक्तता के कारण सेवानिवृत्ति पर आश्रितों को नौकरी देने की सरकारों की नीति

अश्विनी अग्रवाल पूछ रहे हैं …..

मैं देवबंद (सहारनपुर) में रह रहा हूँ।  मैं सिविल अपील सं. 4210/ 2003 शिवामूर्ती बनाम आंध्र प्रदेश राज्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 12.08.2008 को दिए गए निर्णय के बारे में जानना चाहता हूँ, जिस की सूचना 15 अगस्त 2008 के अमर उजाला में प्रकाशित हुई है।  इस निर्णय के अनुसार यदि कोई सरकारी कर्मचारी शारीरिक रूप से कार्य करने में अक्षम हो जाए तो उस के किसी आश्रित को उस के स्थान पर नौकरी दी जा सकती है।
क्या यह पूरे देश में प्रभावी होगा? मुझे जल्दी इस निर्णय के नियमों और उपनियमों के बारे में बताएँ।

उत्तर – 

आप ने सर्वोच्च न्यायालय के जिस निर्णय का उल्लेख किया है वह अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में है।  इस निर्णय की एक प्रमुख बात यह है कि इस में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति राज्य की नीति से सम्बद्ध मामला है और इस में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

मामला यह था कि आंध्रप्रदेश की सरकार ने 30 जुलाई,1980 के सरकारी आदेश से एक योजना लागू की गई थी जिस में चिकित्सकीय आधार पर अक्षम होने के आधार पर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को अनकंपा नियुक्ति दिए जाने का प्रावधान था।   4 जुलाई  1985 तो सरकारी आदेश से इस योजना में यह संशोधन किया गया कि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी की वास्तविक सेवानिवृत्ति के पांच या अधिक वर्ष शेष हों तभी इस योजना का लाभ वह कर्मचारी उठा पाएगा।  9 जून 1998 को एक और सरकारी आदेश यह जारी हुआ कि इस योजना का अनुचित लाभ न उठाया जाए इस के लिए जब भी इस योजना के अंतर्गत सेवानिवृत्ति हेतु किसी कर्मचारी का आवेदन प्राप्त होगा तो उसे मेडीकल बोर्ड के समक्ष भेजा जाएगा।  मेडीकल बोर्ड द्वारा मामला उचित पाए जाने पर जिला स्तर की, और सचिवालय के कर्मचारियों के मामले में राज्य स्तर की समिति के पास अनुशंसा के लिए भेजा जाएगा जो मामलों की जांच करेगी और निश्चित मानदंडों के आधार पर अपनी सिफारिश देगी।  जिस के उपरांत ही राज्य सरकार निर्णय करेगी कि आवेदक कर्मचारी को इस योजना के अंतर्गत सेवा निवृत्ति की अनुमति प्रदान की जाए अथवा नहीं।  25 जून 1999 को एक सरकारी स्मरणपत्र जारी किया गया कि इस योजना के अंतर्गत मामले में सरकार द्वारा अनुमति दिए जाने की तिथि के उपरांत सेवा काल 5 वर्ष का शेष होना चाहिए, अर्थात वास्तविक सेवानिवृत्ति की तिथि में पाँच वर्ष शेष होने चाहिए।

इस मामले में जिन लोगों ने आवेदन किए थे उन्हों ने आवेदन की तिथि से पांच साल की सेवा अवधि शेष मानते हुए आवेदन किए थे और निर्णय की प्रक्रिया लंबी होने के कारण देरी हो गई थी और अवधि पांच वर्ष से कम रह गई जिस के कारण आवेदन इस योजना में स्वीकार योग्य न रह गया थे।  प्रभावित कर्मचारियों ने इस मामले में अधिकरण के समक्ष अपीलें प्रस्तुत की जो मंजूर कर ली गईं।   राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में रिटें प्रस्तुत की।  उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि इस मामले में पांच वर्ष की अवधि सेवानिवृत्ति की तिथि  से ही मानी जाएगी।  मामला उच्च न्यायालय गया और वहाँ यह कहते हुए कि यह राज्य का नीतिगत मामला है और इस में न्यायालय को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, निर्णय दिया कि पांच वर्ष की अवधि राज्य सरकार द्वारा सेवानिवृति को अनुमति देने की तिथि से देखी जाएगी।  निर्णय में यह भी उल्लेख है कि राज्य सरकार ने इस योजना को वापस ले लिया है। यदि राज्य सरकार चाहे तो इस योजना को पुनः लागू कर सकती है।

इस प्रकार यह निर्णय कोई भी लाभकारी प्रभाव कर्मचारियों के हित में नहीं रखता।  इस तरह की योजनाएँ यदि कहीं किसी रा
जकीय संस्थान में लागू हैं तो कर्मचारी को अपने संस्थान या विभाग में ही पता करना पड़ेगा कि उन के यहाँ यह योजना लागू है अथवा नहीं?  और इस योजना का लाभ उन्हें मिल सकता है या नहीं।  हाँ यदि किसी कर्मचारी के संस्थान या विभाग या राज्य में यह योजना लागू हो तो फिर उस योजना को सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय प्रभावित करेगा।

वैसे भी अनुकंपा नियुक्ति के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का यह मानना है कि यह सरकार की अनुकंपा है न कि कर्मचारी का अधिकार। 
                                                                                                                                                                    

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