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नोशनल परिलाभ आप को न्यायालय ही दिला सकता है।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

हरीश गुप्ता ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता का स्वर्गवास 1999 में हुआ उस वक्त वह निलंबित थे। मेरे द्वारा 45 दिन के अन्दर निवेदन किया गया था तब विभाग ने कहा आपके पिता निलंबित होने के कारण आपको अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा सकती है। 2015 में राजस्थान उच्च न्यायालय में उन्हें निरंतर सर्विस में माना है।| परिणामस्वरूप विभाग द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति दे दी है, परन्तु अभी से सेवा में माना है। मैं चाहता हूँ कि मुझे 1999 से मेरे निवेदन को मान कर नियुक्ति मानी जाये। क्या ये हो सकता है तथा क्या मुझे नोशनल परिलाभ मिल सकता है?

समाधान-

प का प्रश्न अधूरा और विवरणहीन है। उच्च न्यायालय ने 2015 में उन्हें निरन्तर सेवा में माना है। यह किस प्रकरण में हुआ है? क्या यह आप के पिता के द्वारा संस्थित किसी प्रकरण पर हुआ है? यदि ऐसा है तो उस प्रकरण में तो आप को यह लाभ मिल नहीं सकता था। आप ने उसी प्रकरण के आधार पर पूर्व में प्रस्तुत आप के नियुक्ति आवेदन पर निर्णय लेने को कहा होगा जिस पर विभाग ने आप को अनुकम्पा नियुक्ति दे दी।

राज्य सरकार ने तो उक्त निर्णय के अनुसार आप को नियुक्ति दे दी है। वे अपना दायित्व पूर्ण कर चुके हैं। अब यदि आप नोशनल परिलाभ चाहते हैं तो राज्य सरकार के पास ऐसा कोई नियम नहीं है जिस के अन्तर्गत आप को यह परिलाभ दिए जा सकें।

स के लिए आप को पुनः राज्य सरकार को नोशनल परिलाभ देने के लिए लिखना चाहिए। जैसा की संभावित है यदि राज्य सरकार आप को नोशनल परिलाभ देने से मना करेगी। तब आप न्यायालय की शरण ले सकते हैं। हो सकता है न्यायालय आप को नोशनल परिलाभ देने का आदेश राज्य सरकार को दे दे। यह आप के पिता के संबंध में हुए निर्णय का अध्ययन कर के ही कहा जा सकता है। आप के पिता के प्रकरण को जो वकील साहब उच्च न्यायालय में देख रहे थे आप को उन्हीं से संपर्क कर के इस संबंध में राय करते हुए तुरन्त कार्यवाही करना चाहिए।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन दें, मना करने पर रिट याचिका प्रस्तुत करें।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

गुड्डू कुमार ने रामगढ़ केन्ट, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

दिनांक 02.12.2014 को मेरे पिता एक सड़क दुर्घटना में घायल हुए और दिनांक 04.12.2014 को उन का देहान्त हो गया। वे स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लि. के स्थाई कर्मचारी थे और उन का सेवा काल दो वर्ष शेष था। मैं ने फैक्ट्री में संपर्क किया तो मुझे बताया गया कि कंपनी की इस यूनिट में अनुकम्पा नियुक्ति का नियम नहीं है। सेल की अन्य यूनिटों में अनुकम्पा नियुक्ति दी जाती है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

ह सही है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लि. की अलग अलग इकाइयों में अलग अलग नियम हैं। हो सकता है आप जिस इकाई की बात कर रहे हैं वहाँ इस तरह का कोई नियम नहीं हो। लेकिन सेल की इकाइयों में इस तरह के अलग अलग नियमों के होने पर आपत्तियाँ उठी हैं और एक कमेटी भी बनाई गयी है जिस के द्वारा सेल की सभी इकाइयों में एक समान नियम बनाने पर विचार हुआ है। यह काम कितना आगे बढ़ा है इस की हमें वर्तमान में जानकारी नहीं है।

सी अवस्था में आप को चाहिए कि आप समस्त दस्तावेजों की प्रतियों सहित उस युनिट में जिस में आप के पिता सेवा में थे लिखित आवेदन अनुकम्पा नियुक्ति के लिए दे दें। उस युनिट के ऊपर के अधिकारियों और कम्पनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को भी इस तरह का आवेदन करें। इस से यह होगा कि आप के पार्ट पर आवेदन देने का काम पूरा हो जाएगा। आप की तरफ से कोई कमी नहीं रहेगी। प्रत्येक आवेदन जो आप दें उस की प्रतिलिपि और आवेदन प्रस्तुत करने का सबूत अर्थात प्राप्ति स्वीकृति आदी संभाल कर रखें। स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया सार्वजनिक क्षेत्र का संस्थान है और आप के आवेदन पर अनुकम्पा नियुक्ति देने से इन्कार करने पर उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की जा सकती है।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पुत्रवधु आश्रित की श्रेणी में नहीं।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

हरिओम सोनी ने कोटा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरे अॉफिस में एक वर्कचार्ज कुली की मृत्यु दिनांक 02.09.2015 को गई।  मृतक के एक मात्र पुत्र था, जिस की भी वर्ष 2012 में मृत्यु हो चुकी है। मृतक कुली की अब मात्र एक वारिस पुत्रवधु ही है।  क्या पुत्र वधु को अनुकंपा नियुकि़त मिल सकती है? यदि हां तो किस नियम के तहत कृपया शीघ् अवगत कराने की कृपा करें।

समाधान-

राजस्थान के अनुकम्पा नियुक्ति नियमों में विधवा पुत्रवधु को आश्रितों में सम्मिलित नहीं माना गया है। इस कारण सामान्य नियमों के अन्तर्गत पुत्र वधु को नियुक्ति मिलना संभव नहीं है। लेकिन यदि परिवार में वह एक मात्र आश्रित है तो उस से आवेदन प्रस्तुत करवाया जा सकता है। यह आवेेदन सामान्य नियमों में निरस्त किए जाने योग्य है। इस कारण से इसे नियम 13 के अन्तर्गत राय प्राप्त करने के लिए विभाग द्वारा राज्यसरकार को भेजा जा सकता है। फिर भी अधिक संभावना है कि यह निरस्त ही होगा।

लेकिन इस मामले में एक मात्र आश्रित होने के कारण इस मामले में आवेदन निरस्त होने पर आवेदन निरस्त होने के आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की जा सकती है और न्यायालय उसे स्वीकार करते हुए उसे नियुक्ति देने का आदेश दे भी सकता है और नहीं भी दे सकता है। लेकिन इस मामले में पुत्र वधु को इस तथ्य के मजबूत सबूत देने होंगे कि वह पूरी तरह मृतक कर्मचारी की आश्रिता थी। हमारी राय में उस महिला को आवेदन तुरन्त प्रस्तुत कर देना चाहिए। आगे की कार्यवाही को आगे की परिस्थितियों पर छोड़ देना चाहिए।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए कर्मचारी की मृत्यु के दिन कोई आश्रित सरकारी सेवा में नहीं होना चाहिए।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

उमा शंकेर जायसवाल ने जयपुर, राजस्थान से की समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी की मृत्यु दिनांक 06.06.2007 को एक सड़क दुर्घटना में हो गयी है। मैं ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया और मुझे 2008 में राजस्थान के शिक्षा विभाग में नियुक्ति मिल गयी। इस बीच मेरे छोटे भाई को भी सरकारी विभाग में नौकरी मिल गयी। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या मैं अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए अर्हता रखता था।

समाधान

राजस्थान में अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों का प्रासंगिक नियम निम्न प्रकार है-

Government service subject to the condition that employment under these rules shall not be admissible in cases where the spouse or at least one of the sons, unmarried daughters, adopted son/adopted unmarried daughter of the deceased Government servant is already employed on regular basis under the central / any State Government or Statutory Board, Organisation/Corporation owned or controlled wholly or partially by the Central/ any State Government at the time of death of the Government servant.

न नियमों में स्पष्ट है कि जिस दिन सरकारी कर्मचारी का देहान्त हुआ है उस दिन पुत्रों, अविवाहित पुत्रियों, दत्तक पुत्र/पुत्री में से कोई एक भी स्थाई आधार पर राज्य या केन्द्र के सरकारी विभाग, विधिक निकाय, संगठन, निगम में नियुक्त नहीं होना चाहिए। आप के भाई को जो नौकरी प्राप्त हुई है वह आप के पिता जी की मृत्यु के उपरान्त प्राप्त हुई है इस कारण से आप अनुकम्पा नियुक्ति के लिए अर्हता रखते थे। आप को नियक्त किया जाना नियमों के अनुकूल है।

संतान के बालिग होने तक अनुकंपा नियुक्ति की सुविधा बरकरार नहीं रह सकती।

समस्या-
मूल सिंह राणावत ने सांगवाड़ा, सिरोही, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

राजस्थान सरकार के अधीन चिकित्सा विभाग में कार्यरत फार्मासिस्‍ट मृत राज्‍य कर्मचारी का पु्त्र नाबालिग 7 वर्ष का है। क्‍या उसे बालिग होने पर अनुकम्‍पा नियुकित दी जायेगी?

समाधान-

राजस्थान सरकार के अनुकम्पा नियुक्ति नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि यदि मृत सरकारी कर्मचारी की मृत्यु पर उस का पुत्र नाबालिग हो तो उस के बालिग होने तक अनुकम्पा नियुक्ति का उस का अधिकार सुरक्षित रहे। इन नियमों में कर्मचारी के देहान्त के 90 दिनों की अवधि में आवेदन कर दिया जाना चाहिए।

नुकम्पा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं है। यह केवल मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए एक अपवाद मात्र है वर्ना सारी सरकारी सेवाएँ केवल खुले आमंत्रण द्वारा योग्यतम प्रत्याशियों को ही नियमानुसार दी जा सकती हैं। यदि नाबालिग 7 वर्ष का है तो उसे बालिग होने में अभी 11 वर्ष लगेंगे तब तक उस के इस आधे अधूरे अधिकार को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। बेहतर है कि मृत कर्मचारी की पत्नी नौकरी के लिए आवेदन करे। नौकरी करते हुए एक माँ अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा प्रदान कर उस के पैरों पर खड़ा कर सकती है।

अनुकम्पा के आधार पर नौकरी प्राप्त कर्मचारी के देहान्त पर उस के आश्रित को भी अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त हो सकती है।

Compassionate Appointmentसमस्या-

राहुल ने आगरा, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता जी भारतीय पुरातत्व विभाग में स्मारक परिचर के पद पर कार्यरत थे।2007 में उन की जॉब अनुकम्पा के आधार पर लगी थी। हम तीन भाईवहन हैं। इस में पेंशन सुविधा कितने समय तक मिल सकती है। हमारी माता जी नहीं है उनका भी स्वर्गवास हो चुका है। हमारी तीनों की उम्र 20 तक है। हमे जानना है कि अनुकम्पा के आधार पर कितनी पीढ़ी नोकरी कर सकती है?

समाधान-

प भाई बहनों को वयस्क होने तक पेंशन सुविधा प्राप्त हो सकती है।

प के पिता सरकारी सेवा में थे। वे अनुकंपा के आधार पर नौकरी में आये थे या फिर अन्य प्रकार से यह गौण प्रश्न है। यदि आप के पिता का देहान्त सेवा में रहते हुए हुआ था तो आप में से कोई एक अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने का अधिकारी है लेकिन नियमानुसार। आप को इस के लिए तुरन्त आवेदन करना चाहिए। ऐसा न हो कि आवेदन करने का समय निकल जाए।

अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने के बाद भी योग्यतानुसार पद प्राप्त करने के प्रयास किए जा सकते हैं।

Compassionate Appointmentसमस्या-

सुभांशु खरे ने रीवा, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी जनस्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग में सहायक अभियन्ता के पद पर थे जिन की मई 13 को मृत्यु हो गई। विभाग मुझे अनुकम्पा नियुक्ति दे रहा है, लेकिन एलडीसी (क्लर्क) के पद पर जब की मैं ने बीई किया हुआ है। मुझे सब इंजिनियर का पद कैसे मिल सकता है? क्या एलडीसी जोइन कर लेने के बाद का भी कोई रास्ता हो तो बताएँ?

समाधान-

ध्यप्रदेश में अनुकंपा नियुक्ति निर्देश सं. 5.1 निम्न प्रकार है-

“ अनुकम्पा नियुक्ति अभ्यर्थी द्वारा धारित योग्यता एवं अर्हता के आधार पर सीधी भर्ती के रिक्त निम्नतर पद पर दी जाएगी। यथा सहायक ग्रेड-*3, संविदा शाला शिक्षक एवं रुपए 3500-5200 तक वेतनमान वाले अन्य कार्यपालिक पदों (लोक सेवा आयोग के कार्यक्षेत्र के पदों को छोड़कर) पर भी अनुकम्पा नियुक्ति दी जा सकेगी। इन में वार्डबॉय, पटवारी, वाणिज्यिक कर विभाग के अधीन पंजीयन लिपिक (कार्यपालिक) स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न पद, ड्राइवर, तकनीकी पद भी शामिल हैं।“

क्त निर्देश के अनुसार यदि सब इंजिनियर पद लोक सेवा आयोग के अधीन नहीं है, आपकी योग्यता व अर्हता के आधार पर निम्नतम पद है और रिक्त है तो आप को सब इंजिनियर का पद अनुकम्पा नियुक्ति में प्राप्त हो सकता है। लेकिन यदि उक्त तीनों बातों में में से एक भी नहीं है तो यह पद आप को प्राप्त नहीं हो सकेगा।

प बीई हैं। इस योग्यता के अनुसार पद प्राप्त करने का मार्ग आप के लिए हमेशा खुला है। लिपिक का पद ग्रहण कर लेने के उपरान्त भी आप योग्यतानुसार सीधी भर्ती में पद प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र हैं। इन कठिन दिनों में आप को लिपिक का पद प्राप्त कर लेना चाहिए। उस के बाद आप अपनी योग्यता के अनुसार सीधी भर्ती के पदों के लिए लगातार प्रयास करते रह सकते हैं।

एक बात याद रखें। अनुकम्पा नियुक्ति अनुकम्पा है, यह किसी का अधिकार नहीं है। इस कारण जो मिल रहा है उसे जाने न देना चाहिए। उसे प्राप्त कर कठिन दिनों को निकालना चाहिए और अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार के लिए प्रयत्न करते रहना चाहिए।

सरकारी नौकरी पुश्तैनी संपत्ति नहीं।

Compassionate Appointmentसमस्या-

संजय कुमार ने पांवटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैंने अनुकम्पा के आधार पर नौकरी के लिए 2010 आवेदन किया था। क्योंकि मेरी माता की मृत्यु के समय मैं नाबालिग था। जब मेरा विवाह नहीं हुआ था तो मुझे पेंशन भी मिलती थी।| जिस कारण मेरे केस को अधिक आय होने के कारण विचाराधीन रखा गया था। किन्तु अब जब मेरा विवाह हो गया है तो मुझे मिलने वाली पेंशन भी बंद कर दी गई है| और नये प्रमाण पत्र के अनुसार मेरे वार्षिक आय 36000/- सालाना है। जब कि मेरे परिवार के कुल सदस्य दो है। बोर्ड कहता है की उपरोक्त स्थिति में आप ही अपनी माता के जायज वारिस आप हैं अत: आपकी पत्नी को आपके परिवार का सदस्य नहीं माना जाएगा एवं आप की आय अकेले ही आपके केस हेतु मानी जायेगी। कृपया मुझे सही सलाह दें।

समाधान-

भारत एक जनतांत्रिक गणतंत्र है। इस में जो भी नौकरियाँ राजकीय, अर्धराजकीय और सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध होती हैं उन पर सारे देश के नागरिकों का अधिकार है। जो भी प्रतियोगिता में उत्तम सिद्ध हो उसे ये नौकरियाँ मिलनी चाहिए। किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। अनुकंपा नियुक्ति इस नियम का अपवाद है। कोई सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र का कर्मचारी अचानक मृत्यु का शिकार हो जाए औरउस का परिवार पूरी तरह निराश्रित हो तो उसे मदद करने के उद्देश्य से अनुकम्पा नियुक्ति के नियम बनाए गए हैं। यह अनुकम्पा मात्र है किसी आश्रित का कोई अधिकार नहीं है। एक अनुकम्पा नियुक्ति एक प्रतियोगी का रोजगार का स्थान छीन लेती है। उस के साथ अन्याय होता है। आप को केवल इस लिए नौकरी मिल जाए कि आप का पालक सरकारी कर्मचारी था। तो देश में बहुत लोग हैं जो आप के जैसे आश्रितों से अधिक असहाय हैं। फसल के बर्बाद होने पर एक किसान आत्महत्या कर लेता है क्या उस के परिवार में एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी नहीं मिलनी चाहिए?

प को मिलने वाली पेंशन इस कारण बन्द हो गई कि आप बालिग हो चुके हैं। आप की वार्षिक आय 36000 है तो आप सक्षम हैं। आप ने विवाह कर लिया है तो आप की सुविधा के लिए किया है। आप की पत्नी तो आप की माँ की आश्रित नहीं है। उसे आप की माँ के आश्रितों में नहीं गिना जा सकता। यदि आप की आय नहीं थी तो आप को विवाह नहीं करना चाहिए था। कल से आप कहेंगे आप के तीन बच्चे हैं उन्हें भी आपकी माँ के परिवार में गिना जाना चाहिए। आप अनुकम्पा नियुक्ति के योग्य नहीं पाए गए हैं। आप को रोजगार का अपना साधन बनाना चाहिए। सरकारी नौकरी कोई पुश्तैनी जायदाद नहीं है। आप उसे भी पुश्तैनी जायदाद समझ बैठे हैं।

च्छा तो ये है कि आप अनुकम्पा के रूप में सरकारी नौकरी की आस पूरी तरह त्याग कर कोई रोजगार करें। उसी में आप की भलाई है। भविष्य में यह भी हो सकता है कि अनुकम्पा नियुक्ति का नियम पूरी तरह समाप्त हो जाए।

मृत कर्मचारी का कोई आश्रित पहले से सरकारी सेवा मेें हो तो अनुकम्पा नियुक्ति संभव नहीं।

Compassionate Appointmentसमस्या-

मनमोहन ने सरदार शहर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी का देहान्त पीएचईजी तारानगर में सेवा में रहते हुए हो गया। मेरे बड़े भाई केन्द्रीय सरकार में कर्मचारी हैं वे हम से कोई संबन्ध नहीं रखते और अलग रहते हैं। मैं पिता के स्थान पर अनुकम्पा नियुक्ति चाहता हूँ। कृपया मेरी सहायता करें।

इसी तरह चेतन ने  साँवेर, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

परिवार में यदि माताजी की नगर पंचायत में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की सरकारी नौकरी हो तो क्या उन के पुत्र को पिता की मृत्यु के कारण पिता के विभाग म.प्र. पुलिस में अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है?

समाधान-

राजस्थान के अनुकम्पा नियुक्ति नियमों का नियम 5 निम्न प्रकार है।

5. Appointment subject to certain conditions :- (1) When a Government servant dies while in service one of his/her dependents may be considered for appointment in Government service subject to the condition that employment under these rules shall not be admissible in cases where the spouse or at least one of the sons, unmarried daughters, adopted son/adopted unmarried daughter of the deceased Government servant is already employed on regular basis under the central / any State Government or Statutory Board, Organisation/Corporation owned or controlled wholly or partially by the Central/ any State Government at the time of death of the Government servant.

Provided that this condition shall not apply where the widow seeks employment for herself.

इन नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि मृतक के आश्रितों में से मृतक सरकारी कर्मचारी की पत्नी/पति, कोई एक पुत्र, अविवाहित पुत्री, गोद पुत्र/पुत्री कोई भी राज्य या केन्द्रीय सरकार का नियमित आधार पर कर्मचारी है तो अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। इस स्थिति में यदि मृतक राज्य कर्मचारी की विधवा अनुकम्पा नियुक्ति चाहती है तो उस पर विचार किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में मनमोहन का अनुकम्पा नियुक्ति का आवेदन विचार योग्य नहीं है। उन की यह इच्छा पूरी नहीं हो सकती।

इसी प्रकार मध्यप्रदेश अनुकम्पा नियुक्ति नियमों भी समान प्रकार का प्रावधान है कि दिवंगत शासकीय सेवक के परिवार का कोई भी अनुकम्पा नियुक्ति का पात्र सदस्य यदि पूर्व से शासकीय सेवा अथवा निगम, मण्डल, परिषद, आयोग आदि में नियोजित हो तो अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता। इस तरह चेतन का अनुकम्पा नियुक्ति का आवेदन भी पोषणीय नहीं है और वे अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त नहीं कर सकते।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए विवाहित बहिन की अनापत्ति आवश्यक नहीं।

Compassionate Appointmentसमस्या-

आकाशदीप ने बिजनौर, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी माताजी शिक्षा विभाग में कार्यरत थीं। उनका स्वर्गवास दिंनाक 14 अक्टूबर 2012 को हो गया था। हम दो भाई-बहन हैं। बहन छोटी है तथा विवाहित है। मेरा बहनोई व उसका परिवार लालची किस्म के हैं। मेरे बहनोई ने मेरी माताजी को डरा धमकाकर अपने पक्ष में कर लिया था तथा हम से सम्बन्ध विच्छेद करा दिया था।

हमारी माताजी हम से अलग बिजनौर में मकान खरीद कर रहने लगी तथा मेरी बहन व बहनोई भी जबरदस्ती उनके साथ रहने लगे। मेरी माताजी से जबरदस्ती पी.एफ. में भी मेरी बहन को नोमिनी करा लिया तथा वह मकान भी अपने नाम लिखवा लिया। उस के बाद उन्होनें एक वसीयत अपने पक्ष में लिखवा कर रजिस्टर्ड करा ली। उस वसीयत में यह भी उल्लेख नहीं है कि मेरी बहन विवाहित है। वसीयत के बाद मेरी माताजी को घर से निकाल दिया। मेरी माताजी उनसे अलग होकर वहीं पडोस में किराये पर रहने लगी। मेरी माताजी के स्वर्गवास बाद उनका सारा सामान एवं सारे कागजात उन्होने अपने कब्जे में कर लिये तथा हमसे मना कर दिया कि उनके पास कुछ भी नहीं हैं।

उनकी मृत्यु के बाद इसकी सूचना मैं ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में दी तथा अनुकम्पा नियुक्ति के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया। मेरा वारिसान प्रमाण पत्र जिलाधिकारी बिजनौर द्वारा निर्गत किया जा चुका है। महोदय अभी तक पी.एफ. का पैसा भी नहीं निकला है और न ही मेरी नियुक्ति हुई है। क्या विवाहित पुत्री उत्तराधिकारी बन सकती है? मेरी बहन व बहनोई नौकरी एवं पैसा दोनों लेना चाहते हैं। क्या विवाहित पुत्री को अनुकम्पा में नियुक्ति मिल सकती है? क्या मुझे नौकरी पाने के लिए मेरी बहन की अनापत्ति की आवश्यकता पडेगी। मैं बडी मुसीबत में हूँ। नियुक्ति ना मिलने की दशा में मुझे क्या करना चाहिए। मैं क्या करूं?

समाधान-

प ने यह उल्लेख नहीं किया है कि माताजी की वसीयत में क्या लिखा है। अर्थात उन्हों ने वसीयत के माध्यम से अपनी किस किस संपत्ति के लिए किस किस को अपना वसीयती घोषित किया है।

हाँ तक पीएफ का प्रश्न है तो उस पर सभी उत्तराधिकारियों का उन के हिस्से के समान हक है। यदि वसीयत में पी.एफ. का किसी को अधिकारी घोषित नहीं किया गया है तो पीएफ सभी उत्तराधिकारियों को प्राप्त होगा। नोमिनी केवल उसे प्राप्त करने की अधिकारी है लेकिन प्राप्त राशि को उत्तराधिकार विधि के अनुसार उत्तराधिकारियो में वितरित करने की उस की ड्यूटी है। आप को पी.एफ. व अन्य सभी संपत्तियों व धरोहरों के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जिला न्यायालय से प्राप्त कर विभागों को प्रस्तुत करना चाहिए जिस से आप को अपना हिस्सा प्राप्त हो सके।

त्तर प्रदेश के अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों में क्या प्रावधान हैं जो आप की माताजी के विभाग पर प्रभावी हैं उन की जानकारी हमें नहीं मिल रही है। फिर भी सामान्य रूप से विवाहित पुत्री जिस का पति जीवित हो उसे अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। उस की अनापत्ति की भी कोई आवश्यकता नहीं है। क्यों कि वह अपने पति के परिवार की सदस्या है न कि आप की माताजी के परिवार की सदस्य है।

दि किसी प्रकार से विभाग आप को अनुकम्पा नियुक्ति देने से इन्कार करता है तो आप को तुरन्त नियुक्ति से इनकार करने वाले आदेश के विरुद्ध रिट याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए तथा अन्य व्यक्ति को नियुक्ति देने से रोकने का स्थगन आदेश प्राप्त कर लेना चाहिए। हमारी राय में आप अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पात्र हैं और आप की बहिन से आप को अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि विभाग आप से इस तरह की अपेक्षा करता है और कोई पत्र जारी करता है तो आप उस पत्र के विरुद्ध भी रिट याचिका कर सकते हैं। इस मामले में आप को आप के उच्च न्यायालय में प्रेक्टिस कर रहे सेवा मामलों के वकील से राय करनी चाहिए।

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