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खराब स्टाम्प्स का क्या करें?

Sale Deedसमस्या-

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश से यज्ञदत्त त्यागी ने पूछा है-

जिस व्यक्ति के द्वारा हमको सम्पत्ति की रजिस्ट्री करानी थी उस ने सम्पत्ति केविवरण छपे हुये दोनो पक्षों के हस्ताक्षर करे हुयेस्टाम्प पेपरों को हम सेलेकर के स्टाम्प पेपरों पर छल से जहां-जहां हस्ताक्षर हो रहे थे वहां-वहां पर स्टाम्प पेपरों पर फ्ल्यूड लगा कर 20 लाख केस्टाम्प पेपर खराब कर अपठनीय कर दिये। इस में कौन कौन सी धाराएँ लगेंगी औरहम को क्या करना चाहिये।

समाधान-

ब से पहले तो आप को उन स्टाम्प पेपर्स को अपने कब्जे में ले कर ट्रेजरी में आवेदन दे कर वापस करने का प्रयास करना चाहिए। इस तरह वापस किए गए स्टाम्प पेपर्स की कीमत का एक बड़ा हिस्सा आप को वापस प्राप्त हो जाएगा और आप को जो क्षति हो चुकी है वह कम हो सकती है। इस मामले में जिस व्यक्ति से आप ने स्टाम्प पेपर्स खरीदे हैं वह आप की मदद कर सकता है।

दि रजिस्ट्री करवाने वाले व्यक्ति ने उक्त स्टाम्प पेपरों को जानबूझ कर किसी गलत इरादे से खऱाब किया है तो यह छल है और यह छल उस व्यक्ति द्वारा किया गया है जिस पर आपके हितों को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी थी। इस तरह के मामला धारा 418 आईपीसी के अन्तर्गत अपराध है। आप इस मामले की पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं, यदि पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर कार्यवाही करने से इन्कार कर दे तो आप न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर उसे पुलिस थाना अन्वेषण हेतु भिजवा सकते हैं या फिर स्वयं ही न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत कर न्यायालय को प्रसंज्ञान लेने के लिए निवेदन कर सकते हैं।

स के अतिरिक्त आप को जो हानि हुई है उस की क्षतिपूर्ति के लिए उस व्यक्ति के विरुद्ध दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकते हैं तथा उस से क्षतिपूर्ति प्राप्त कर सकते हैं।

क्षति की संभावना के ठोस आधार हों तो निर्माण रुकवाने की कार्यवाही की जा सकती है।

basement constructionसमस्या-
राजेश अरोरा ने फरीदाबाद, हरियाणा से पूछा है-

मेरे घर के पास वाले भूखंड पर बेसमेंट में शॉपिंग काम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। मुझे अपने घर के गिरने का डर है। मैं जब भी बेसमेंट बनवाने वालों से कहता हूँ तो वे कहते हैं कि कुछ नहीं होगा। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प का डर केवल संभावना पर टिका है जो हो भी सकती है और नहीं भी हो सकती है। किसी भी घटना की केवल संभावना होने पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकती। लेकिन आप की संभावना ठोस हो तो कार्यवाही की जा सकती है।

वैसे वे लोग अपने प्लाट पर काम कर रहे हैं, जिस की उन्हों ने नगर निगम से अनुमति प्राप्त की होगी। यदि उन के पास अनुमति है तो वे अपना काम कर सकते हैं। आप उन्हें नहीं रोक सकते। लेकिन उन का कर्तव्य है कि यदि वे अपने भूखंड पर काम करते हैं तो पड़ौसियों की संपत्ति को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचे।

दि वे लापरवाही करते हैं, या उन के कार्य से आप को नुकसान होता है तो यह उन का दुष्कृत्य (Tort) होगा। तथा ऐसे दुष्कृत्य से हुई हानि की भरपाई करने की जिम्मेदारी उन की होगी। नुकसान होने पर उस नुकसानी की भऱपाई करने के लिए आप उनके विरुद्ध दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं। यदि आप को नुकसान होने की संभावना के लिए कोई ठोस आधार हों तो आप इन ठोस आधारों के साथ नुकसान होने की संभावना के आधार पर स्थाई निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत कर उन के निर्माण को भी रुकवा सकते हैं। लेकिन यदि ठोस आधार न हुए तो आप जो कार्यवाही करेंगे वह निष्फल हो जाएगी।

रेल में हुई क्षतियों के लिए रेलवे अधिकरण में दावा करें।

Rail Claim tribunalसमस्या-
अनिल कुमार पारा, तहसील न्‍यू रामनगर, जिला सतना म0प्र0 ने पूछा है-

दिनांक 19;01;2014 को रेल में यात्रा के दौरान बांदा से चित्रकूट के बीच में मेरी पत्‍नी का पर्स चोरी हो गया, जिसमें कीमती मोबाइल सहित कीमती जेबरात और अन्‍य सामग्री चोरी हो गई। जिसकी विवेचना थाना जी0आर0पी0 चित्रकूट के द्वारा की जाकर कॉल डिटेल के आधार पर चोर की पत्‍नी को शिवरामपुर से पकडे जाने की सूचना प्राप्‍ती हुई। मोबाइल व अन्‍य सामान बरामद किया गया है।  किन्‍तु पुलिस यह नहीं बता रही है कि सामान बरामद किया जा चुका है। पुलिस मात्र सिम बराम‍द करने की सूचना दे रही है, ऐसी स्थिति में क्‍या किसी सक्षम न्‍यायालय की शरण में जाया जा सकता ह? अन्य चोरी गये सामान के मुआवजा के लिये मुझे कहाँ पर दावा करना पडेगा? और पार्टी किसको बनाया जायेगा?

समाधान-

ब से पहले तो यह आवश्यक है कि आप ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई हो। यदि अब तक नहीं कराई है तो अब करवाएँ।

पुलिस यदि बरामद सामान का विवरण नहीं दे रही है तो इस का अर्थ है कि अभी अन्वेषण चल रहा है और हो सकता है वह और सामान बरामद करने की कोशिश कर रही हो। अन्वेषण किस स्तर पर चल रहा है, क्या सामान बरामद हुआ है। अभियुक्त कौन पकड़े गए हैं इस के लिए आप जीआरपी के एसपी कार्यालय के सूचना अधिकारी को सूचना के अधिकार के अन्तर्गत सूचना मांग सकते हैं। सूचना आप को प्राप्त हो जाएगी।

दि अभियुक्त पकड़े गए हैं और जो माल बरामद हुआ है वह सब सबूत के रूप में जब्त किया गया है। आप को वह सामान जो थाना अन्वेषण कर रहा है उस से संबंधित न्यायालय से जमानत पर वापस प्राप्त हो जाएगा। इस के लिए आप संबंधित न्यायालय में आवेदन दे सकते हैं। जमानत आवेदन पर न्यायालय द्वारा पुलिस से मांगी गई रिपोर्ट में स्पष्ट हो जाएगा कि क्या क्या बरामद हुआ है?

स के उपरान्त जो सामान आप का प्राप्त नहीं हुआ है उस की क्षति के लिए आप रेलवे अधिकरण में क्षतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं। रेलवे अधिकरण की वेबसाइट पर आप को इस की सारी जानकारी मिल जाएगी।

भैंस का बीमा होने पर जिस की गलती से भैंस की मृत्यु हुई है वह क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी है।

समस्या-bufallow killed by electrocutiion
युनुस अंसारी ने सारंगपुर, मध्यप्रदेश से पूछा है-

क भैंस विद्युत करंट लगने की वजह से मौके पर मर गई है। पुलिस ने पंचनामा बनाया है तथा पशु चिकित्‍सक द्वारा पोस्ट मार्टम कर लिया गया है। अब भैंस के पालक मालिक को क्षतिपूर्ति हेतु क्‍या कार्यवाही करना चाहिए?  तथा आर्थिक सहायता के लिए कहां अर्जी लगाना होगी?

समाधान-

दि भैंस बीमित है तो बीमा कंपनी को दुर्घटना की सूचना देते हुए अपना क्षतिपूर्ति दावा बीमा कंपनी के दावा फार्म में प्रस्तुत करना चाहिए। बीमा कंपनी अपना अन्वेषक नियुक्त कर अन्वेषण कराएगी और फिर उस के हिसाब से क्षतिपूर्ति निर्धारित करेगी।

दि भैंस का कोई बीमा नहीं है तो उस की मृत्यु बिजली विभाग की गलती से या फिर किसी व्यक्ति की गलती से हुई है। वैसी स्थिति में दुष्कृत्य के आधार पर क्षतिपूर्ति का दावा दीवानी अदालत में करना होगा। इस के लिए भैंस मालिक को बिजली कंपनी को या जिस की गलती से करंट लगा है उसे क्षतिपूर्ति का नोटिस देना चाहिए और नोटिस अवधि की समाप्ति के बाद दीवानी न्यायालय में क्षतिपूर्ति हेतु वाद प्रस्तुत करना चाहिए।

ट्रांसपोर्टेशन में हुई क्षति की मांग के लिए नोटिस . . .

Laxmi-travels-Servicesसमस्या-
नागपुर, महाराष्ट्र  से शंकर व्यास ने पूछा है –

मैंने एक टेलीविज़न सेट इंदौर से नागपुर भेजने के लिए एक ट्रेवल्स से पार्सल बुक किया।  नागपुर तक आते आते टी.वी. पूरी तरह से फूट चुका है और ट्रेवल्स वाला मुझे हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए तैयार नहीं है।  मैं उसके खिलाफ उपभोक्ता न्यायालय जाने के लिए सोच रहा हूँ,  लेकिन उस से पहले मैं उसे एक नोटिस देना चाहता हूँ।   मुझे मदद चाहिए कि उस नोटिस का प्रारूप कैसा होना चाहिए?

समाधान-

स मामले में पहले आप को देखना चाहिए कि आप के ट्रेवल्स वाले ने पार्सल बुक करते समय जो रसीद दी थी उस पर क्या शर्तें अंकित की हुई थीं। कहीं ऐसा तो नहीं कि उस ने टूट-फूट की जिम्मेदारी से मुक्त होने की कोई शर्त उस पर अंकित कर रखी हो। यदि उस रसीद पर ऐसी कोई शर्त नहीं थी तो आप को जो भी हानि हुई उस की भरपाई करने की जिम्मेदारी ट्रेवल्स वाले की है। आप उसे नोटिस दे सकते हैं।

नोटिस एक साधारण पत्र की तरह हो सकता है जिस में आप लिख सकते हैं कि आप ने एक टीवी नागपुर भेजने के लिए उस के यहाँ बुक कराया था जिसे सही सलामत नागपुर पहुँचाने की जिम्मेदारी उस की थी। लेकिन उस ने लापरवाही से यह काम किया जिस के कारण टीवी टूट-फूट गया जिस से आप को रु……….. की हानि हुई है जिसे उस से प्राप्त करने के आप अधिकारी हैं। वह यह पत्र मिलने के 15 दिनों में आप को क्षतिपूर्ति की राशि अदा कर दे अन्यथा आप 12 प्रतिशत ब्याज सहित यह राशि वसूल करने के लिए सक्षम न्यायालय में कार्यवाही संस्थित करेंगे।

प्रारूप इस तरह होगा-

नागपुर, दिनांक- ……………………

प्रति

मेसर्स ……………..

………………………..

…………………………….

विषय – क्षतिपूर्ति अदा करने हेतु

महोदय,

मैं ने आप की ट्रेवल्स से एक टीवी इन्दौर से नागपुर भेजे जाने के लिए दिनांक …………… को बुक कराया था। बुकिंग रसीद सं. ……………. दिनांक ……………….. है। दिनांक ………………. को जब मैने टीवी को नागपुर में प्राप्त करना चाहा तो वह पूरी तरह से टूट फूट चुका है। इस तरह आप ने अपने काम में घोर लापरवाही की है जिस से मुझे हुए नुकसान की भरपाई करने की जिम्मेदारी आप की है। इस टीवी के टूट-फूट जाने से मुझे रु. ………………. की हानि हुई है। मैं ने आप से मुझे हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए कहा तो आप ने मना कर दिया और अभद्र भाषा का प्रयोग भी किया।

इस पत्र के द्वारा मैं आप से मांग करता हूँ कि आप टीवी को हुए नुकसान की भरपाई के लिए रु. ……………….. मात्र तथा आप के व्यवहार के लिए व टीवी का उपयोग न कर पाने के मानसिक संताप व परेशानी के लिए रुपए 5000.00  मात्र कुल रुपया  ……………. मात्र इस नोटिस की प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर मुझे अदा कर के रसीद प्राप्त कर लें अन्यथा मैं उक्त राशि को प्राप्त करने के लिए आप के विरुद्ध सक्षम न्यायालय अथवा मंच के समक्ष विधिक कार्यवाही संस्थित करने को बाध्य हो जाउंगा जिस के हर्जे खर्चों के लिए भी आप जिम्मेदार होंगे।

भवदीय

शंकर व्यास, नागपुर, महाराष्ट्र  

 

बैंक सेवा में कमी या त्रुटि एक उपभोक्ता मामला है . . .

SBIसमस्या-
बारसी, जिला शोलापुर, महाराष्ट्र से रमण कारंजकर ने पूछा है-

मेरी कपडे की दुकान है। मैंने जिस पार्टी से माल उधार लिया था, उसे पेमेन्ट के रुप में बैंक का चेक दिया था। बैंक ने मेरा सीसी खाता रिन्युअल नहीं किया इस गलती की वजह से वह चेक बाऊंस हो गया है। मैंने बैंक हेड ऑफिस पूना में शिकायत की तो बैंक मैनेजर ने अपनी गलती मान ली। शिकायत में मैंने शारीरिक, मानसिक नुकसान एवं बेइज्जती के लिए क्षतिपूर्ति की माँग की है। उस में क्षितपूर्ति की राशि नहीं बतायी है। अब बैंक मैनेजर बार बार मेरी दुकान पर चक्कर काटकर मामला रफा दफा करने की विनती कर रहा है और मेरी मांग पूछ रहा है। मैं उनसे कितनी रकम मांग सकता हूँ?  कृपया बतायें और अगर मुझे बैंक के खिलाफ केस दायर कर के क्षतिपूर्ति वसूल करनी हो तो मैं ज्यादा से ज्यादा कितनी रकम की मांग कर सकता हूँ। मेरा यह केस अदालत में किया जा सकता है या कंज्युमर फोरम में?

समाधान –

प बैंक के ग्राहक हैं, उपभोक्ता हैं इस कारण से आप के बैंक द्वारा जो गलती की है वह सेवा में त्रुटि/कमी है। आप का यह मामला उपभोक्ता मंच के दायरे में आता है। आप अपनी क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के लिए उपभोक्ता मंच के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं।

हाँ तक सेवा में कमी के कारण क्षतिपूर्ति की राशि का मामला है कोई भी न्यायालय वही क्षति आप को दिला सकता है जो कि आप को वास्तविक रूप में हुई है। आप को बैंक की इस गलती के कारण जो भी क्षतियाँ हुई हैं। मसलन आने-जाने, भाग-दौड़ में हुआ खर्च, आप को जो नुकसान या ब्याज पार्टी को देना पड़ा हो। आप के धन्धे पर जो आर्थिक असर पड़ा हो और उस से जो नुकसान हुआ हो। और मानसिक व शारीरिक कष्ट के लिए जो भी नुकसान आप उचित समझते हों उस का आकलन तो सिर्फ आप ही कर सकते हैं। यह आकलन बहुत अधिक या बहुत कम नहीं होना चाहिए। कोई भी निष्पक्ष व्यक्ति यह समझ सके कि इतना पैसा मिलने से आप को नुकसान की भरपाई हो सकती है उतनी ही क्षतिपूर्ति आप को मिल सकेगी।

बैंक का मैनेजर इस मामले को आपस में निपटाने को इसलिए कह रहा है कि जब आप बैंक के विरुद्ध क्षतिपूर्ति का दावा करेंगे तो जो न्यायालय आप को दिलाएगा उस राशि को बैंक उसी कर्मचारी से वसूल कर सकता है और उसे इस गलती के लिए दंडित भी कर सकता है। इस तरह वह बैंक कर्मचारी उतनी राशि आप को आपसी निपटारे में दे सकता है जितना उसे नुकसान हो रहा हो। मेरा भी यह मानना है कि आप को आप की संतुष्टि की राशि मिल जाए तो उस कर्मचारी से आपस में बैठ कर निपटारा कर लेना चाहिए। क्यों कि उपभोक्ता न्यायालय से भी आप को क्षतिपूर्ति प्राप्त करने में कम से कम दो-चार वर्ष तो लग ही जाएंगे।

घर तक पहुँचने का मार्ग सुखाधिकार है जिस में बाधा डालने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा प्राप्त की जा सकती है

Farm & house
समस्या-

ग्राम चिव्ताहिन, उत्तर प्रदेश से मोहम्मद फरहान अहमद ने पूछा है-

मेरा घर ग्राम की मुख्य सड़क से थोड़ी दूरी पर स्थित है, घर तक जाने के लिए अलग अलग पड़ौसियों के कब्जे की ज़मीनों से हो कर जाना पड़ता है।  पड़ौसी बार बार अवरोध उत्पन्न करते हैं  ऐसी स्थिति में मैं अपना घर तो छोड़ नहीं सकता और आने जाने के लिए रोज़ रोज़ कहा सुनी और मारपीट भी नहीं की जा सकती। मैं ये जानना चाहता हूँ कि ऐसी स्थिति होने पर कानून क्या मार्ग बताता है?

समाधान-

प के प्रश्न से स्थिति स्पष्ट नहीं है। आप का घर आबादी भूमि में है या कृषि भूमि में है? फिर जो कब्जे की जमीनें हैं जिन पर से हो कर घर आने जाने में आप को गुजरना पड़ता है वे कृषि भूमि है या फिर आबादी की भूमि है? आप का घर कब से स्थित है और कब से आप उस रास्ते से आ जा रहे हैं? यदि ये तथ्य भी होते तो आप का प्रश्न अधिक स्पष्ट होता।

दि आप के उक्त मकान में आने जाने का और कोई मार्ग नहीं है तो जिस मार्ग से आप अपने मकान के लाभकारी उपयोग के लिए निरन्तर आ जा रहे हैं, वह चाहे किसी भी व्यक्ति की भूमि में से क्यों न गुजरता हो, उस मार्ग से आने जाने का आप को सुखाधिकार प्राप्त है। कोई भी व्यक्ति जो उन भूमियों का स्वामी है आप के आने जाने के सुखाधिकार में किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता। यदि आप को आशंका है तो आप विशिष्ठ अनुतोष अधिनियम की धारा 52 से 54 तथा सुखाधिकार अधिनियम की धारा 35 के अन्तर्गत दीवानी वाद प्रस्तुत कर ऐसी बाधा उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध निषेधाज्ञा की डिक्री प्राप्त कर सकते हैं। इसी वाद में आप अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर वाद के चलने तक आप को अपने घर आने जाने के मार्ग को अवरुद्ध न करने संबंधी अस्थाई निषेधाज्ञा भी प्राप्त कर सकते हैं।

दि किसी ने आप का मार्ग अवरुद्ध किया है और उस से आप को परेशानी, आर्थिक नुकसान और मानसिक संताप हुआ है तो आप सुखाधिकार अधिनियम की धारा 33 के अन्तर्गत इन के लिए क्षतिपूर्ति की मांग कर सकते हैं और उसे प्राप्त करने के लिए वाद प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि दोनों कारण उपलब्ध हों तो आप निषेधाज्ञा तथा क्षतिपूर्ति के लिए एक ही संयुक्त दीवानी वाद भी प्रस्तुत कर सकते हैं।

फर्जी चैक अनादरण का अभियोजन निरस्त होने पर क्षतिपूर्ति के लिए दुर्भावनापूर्ण अभियोजन का वाद प्रस्तुत करें।

malicious procecutionसमस्या-

उज्जैन, मध्यप्रदेश से मिलन गुप्ता ने पूछा है –

मेरे विरुद्ध एक व्यक्ति ने  5, 25, 000 रु. का चैक बाउंस का प्रकरण चलाया था, जो कि पूरी तरह से फर्जी था। करीब 5 साल तक प्रकरण चलने के बाद अंतत: मुझे बरी कर दिया गया। इस दौरान मुझे करीब 60 हजार रुपए वकील फीस व अन्य खर्च करने पड़े, इस के साथ ही मुझे बहुत परेशानी भी झेलनी पड़ी। अब इस केस में मैं बरी हो गया हूँ तो मुझे आगे क्या कार्रवाई करना चाहिए जिससे उसे सबक मिले और जितना भी खर्च मेरा हुआ है वह मुझे मिले।

समाधान –

प के विरुद्ध जो प्रकरण चलाया गया था वह एक अपराधिक अभियोजन था। इस अभियोजन के निरस्त हो जाने से यह सिद्ध हुआ है कि यह दुर्भावना पूर्ण अभियोजन था। इस अभियोजन से आप को बहुत खर्च करना पड़ा और लगातार पेशियों पर जाने से काम का नुकसान हुआ। इस के अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक पीड़ा भी भुगतनी पड़ी। समाज में भी आप की प्रतिष्ठा इस अपकीर्ति के साथ कम हुई कि आप चैक दे कर उसे अनादरित करवा देते हैं जिस से समाज में आप का भरोसा टूटा और पाँच वर्षों तक आप को अपकीर्ति का दोष भुगतना पड़ा।

मुकदमे में हुए खर्च अर्थात वकील की फीस की रसीद और अन्य खर्चों का विवरण तैयार करें। मानसिक व शारीरिक पीड़ा व अपकीर्ति से हुई क्षतियों का अपनी हैसियत के अनुसार मूल्यांकन करें और एक विधिक नोटिस उस व्यक्ति को प्रेषित करवाएँ जिस ने उक्त अभियोजन चलाया था। इस नोटिस में लिखें कि आप को जो क्षतियाँ हुई हैं, आप ने उस का मूल्यांकन इस प्रकार किया है और वह व्यक्ति आप को उतनी धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करे। यदि वह नियत समय में यह क्षतिपूर्ति अदा नहीं करता है तो आप उस के विरुद्ध दुर्भावना पूर्ण अभियोजन के लिए वाद प्रस्तुत कर उक्त क्षतिपूर्ति राशि की वसूली करेंगे। उक्त वाद में जो खर्च आएगा और जो हर्जा होगा वह भी उसे भुगतना पड़ेगा।

ह नोटिस उक्त व्यक्ति को मिल जाने तथा आप के द्वारा क्षतिपूर्ति के भुगतान के लिए दिया गया समय व्यतीत हो जाने पर आप दुर्भावनापूर्ण अभियोजन तथा क्षतिपूर्ति का वाद उक्त व्यक्ति के विरुद्ध प्रस्तुत कर दें।

विक्रय संविदा के भंग के लिए दावा संविदा की तिथि से तीन वर्ष में प्रस्तुत करें

समस्या-

चित्तौड़गढ़, राजस्थान से रौनक ने पूछा है-

मैं ने एक कृषि भूमि क्रय की है जिस में यह बताया गया था कि विक्रेता उसे दो ओर से प्रवेश का मार्ग देगा। लेकिन उस ने मेरे साथ छल किया। वर्तमान में मौके पर जाने पर कोई मुझे कोई मार्ग प्राप्त नहीं हुआ। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या यह मामला धारा 406,420 भारतीय दंड संहिता का है? मैं ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन उन्हों ने यह कह कर कि मामला दीवानी प्रकृति का है, आरोप पत्र प्रस्तुत नहीं किया। मैं ने आपत्ति आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है। क्या मैं पुलिस के विरुद्ध मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर सकता हूँ? क्या मुझे मेरा आपत्ति आवेदन लंबित रहते कृषि भूमि के क्रय की संविदा भंग करने पर मिलने वाले धन के लिए दावा करना चाहिए? मैं ऐसा कब तक कर सकता हूँ? इस की अवधि सीमा क्या है? धारा-251 ए काश्तकारी अधिनियम के अंतर्गत मार्ग प्राप्त करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनानी होगी?

समाधान-

प ने उक्त कृषि भूमि क्रय की है उस का विक्रय पत्र पंजीकृत हुआ होगा। क्या पंजीकृत विक्रय पत्र में लिखा है कि विक्रेता अपनी भूमि में से दो तरफ मार्ग प्रदान करेगा। यदि ऐसा है और उस ने मार्ग प्रदान नहीं किया है तो यह संविदा भंग का मामला है। तब धारा-406, 420 भा.दं.संहिता का मामला बनता है। आप पुलिस द्वारा प्रस्तुत की गई अंतिम प्रतिवेदन के विरुद्ध आपत्ति आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत कर चुके हैं। न्यायालय में अपनी मौखिक साक्ष्य दुबारा प्रस्तुत कर उसे निर्णीत कराएँ।

प्रथम दृष्टया देखने से नहीं लगता है कि यह मानवाधिकार का मामला है। लेकिन फिर भी मानवाधिकार आयोग को शिकायत करने में कोई हानि नहीं है। आप को करनी चाहिए।

बिना विक्रय पत्र का अध्ययन किए यह बताना संभव नहीं है कि विक्रेता ने संविदा भंग की है अथवा नहीं। यदि उस ने संविदा भंग की है तो संविदा भंग होने की तिथि अर्थात भूमि का कब्जा लेने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि में आप संविदा भंग करने और क्षतिपूर्ति प्राप्त करने हेतु दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि विक्रय पत्र में विक्रेता ने उस की भूमि में से मार्ग देने का वायदा किया था तो आप संविदा के विशिष्ट पालन का वाद भी प्रस्तुत कर सकते हैं इस के लिए भी सीमा अवधि तीन वर्ष ही है।

धारा 251 काश्तकारी अधिनियम के अंतर्गत किसी भूमि पर कोई मार्ग पहले से स्थित हो और उस में अवरोध उत्पन्न किया हो तो आप तहसीलदार को शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं उस का कर्तव्य है कि वह मामले की जाँच कर के यदि यह पाता है कि पहले से उस भूमि पर मार्ग का सुखाधिकार था और उसे अवरुद्ध किया गया है तो वह मौके पर जा कर आप को रास्ता प्रदान करेगा। लेकिन आप ने तथ्यों को जितने संक्षिप्त रुप में लिखा है उस से पता नहीं लगता कि क्या यह सुखाधिकार को अवरुद्ध करने का मामला है या नहीं?

सा प्रतीत होता है कि यह विक्रय संविदा के भंग किए जाने का मामला है और आप आप के द्वारा विक्रय के लिए अदा की गई राशि जो कि विक्रय पत्र में अंकित है उस की और क्षतिपूर्ति की राशि प्राप्त करने के लिए वाद प्रस्तुत कर सकते हैं उस के लिए भी सीमा अवधि तीन वर्ष ही है।

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