Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Mutation Supreme Court wife Will अदालत अनुबंध अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक नामान्तरण न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

गिरफ्तार कर लिए जाने पर जमानत अदालत से ही होगी।

rp_police-station2.jpgसमस्या-

संदीप ने सतना, मध्यप्रदेश से पूछा है-

मेरे भाई को पुलिस ने चोरी के इल्जाम में गिरफ्तार कर लिया है आपसी रंजिश की वजह से। दो और लड़कों को गिरफ्तार किया है लेकिन वे बोलते हैं कि इसी ने चोरी की है। मैं अपने भाई को छुड़ाने के लिए क्या कर सकता हूँ। पुलिस मेरे भाई को कितने दिन में अदालत में पेश करेगी? भाई को बरी करवाने के लिए मुझे क्या करना पड़ेगा?

समाधान-

किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के बाद 24 घंटों की अवधि में मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है। यदि गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ की और बरामदगी आदि की जरूरत हो तो मजिस्ट्रेट पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ा सकती है। यदि इन दोनों की जरूरत समाप्त हो चुकी हो तो मजिस्ट्रेट उसे न्यायिक हिरासत में ले कर जेल भिजवा देता है। जब तक न्यायिक हिरासत में गिरफ्तार व्यक्ति न आ जाए तब तक उस की जमानत की अर्जी पर कोई विचार नहीं किया जा सकता।

आप को पता करना चाहिए कि आप के भाई को गिरफ्तार भी किया है या नहीं? या फिर केवल पूछताछ के लिए थाने में बिठा रखा है? गिरफ्तार कर लिए जाने पर तो जमानत अदालत से ही होगी।

यदि पुलिस स्पष्ट जवाब नहीं देती है तो संबंधित मजिस्ट्रेट के यहाँ आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है और मजिस्ट्रेट पुलिस से रिपोर्ट मंगा सकता है।

आप को अपने तईँ यह भी पता करना चाहिए कि वाकई में आप के भाई की चोरी की वारदात में कोई भूमिका तो नहीं है?

फिर भी आप को किसी स्थानीय फौजदारी मामलों के वकील की मदद प्राप्त करनी चाहिए। वह आप के भाई की जमानत करवा सकता है। एक बार जमानत पर छूट जाने पर आप का भाई स्वयं अपने मामले को देख सकता है।

गायब हुए वाहन के टैक्स दायित्व से मुक्ति कैसे पाई जाए?

used carसमस्या-

जीतेन्द्र कुमार ने बिन्दापुर, नई दिल्ली से समस्या भेजी है कि-

मारी एक कंपनी है, हम 5 व्यक्ति कॉमर्शियल कार ले कर लीज पर चलाने का व्यवसाय करते हैं। हम ने कारें अलग अलग लोगों को लीज पर दी थी। कुछ दिन तो ये लोग गाड़ी की ईएमआई समय पर दे रहे थे। फिर ये लगो हमारी गाड़ी ले कर गायब हो गए। हम ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दी। जिस में धारा 406 आईपीसी के अन्तर्गत दर्ज की गई है। सभी गाड़ियों का यू.पी. का टैक्स और सभी दस्तावेजों का समय समाप्त हो गया है। गाड़ी का ईएमआई हमें अपनी ओर से भरना पड़ रहा है। हमें आगे क्या करना चाहिए, जिस से यू.पी. टैक्स माफ हो सके और गाड़ियों को पकड़ा जा सके?

समाधान-

प के वाहन को वह लोग जिन्हों ने आप से लीज पर लिया था ले कर गायब हो गए हैं। आप ने उन्हें वाहन वैध रूप से सौंपा था तथा लीज की अवधि समाप्त हो जाने पर वाहन उन्हें आप को सौंप देना चाहिए था। लेकिन वे लोग ले कर गायब हो गये। ये वाहन उन के पास अमानत थे जो उन्हों ने आप को नहीं लौटाए। इस तरह पुलिस ने धारा 406 आईपीसी में प्रथम सूचना रिपोर्ट सही दर्ज की है। इस के साथ धारा 420 आईपीसी का अपराध भी गठित होता है। इस तरह आप ने वाहन को पकड़े जाने की व्यवस्था तो कर ली है। लेकिन पुलिस के पास बहुत काम होते हैं। उन्हों ने गाड़ियों की सूचना पूरे देश में भेज दी होगी। यदि गाड़ियाँ कहीं पहचानी गईं तो पकड़ ली जाएंगी। लेकिन कोई सायास प्रयास नहीं होगा। इस तरह वाहनों को पकड़े जाने के लिए आप को स्वयं अपने स्तर पर सायास प्रयास करने होंगे। हर व्यक्ति को जो किसी भी प्रकार की निजी संपत्ति रखता है उसे यह जुमला ध्यान रखना चाहिए कि व्यक्ति अपने माल की हिफाजत खुद करे। पुलिस या प्रशासन आम जनता की हिफाजत के लिए नहीं है। वे तो प्रथम सूचना रिपोर्ट भी आसानी से दर्ज नहीं करते हैं। यह चोरी भी नहीं है जिस के कारण आप बीमा कंपनी से कोई दावा वसूल कर सकते हों।

हाँ तक टैक्स का संबंध है तो सभी टैक्स राज्य सरकार के विभाग द्वारा वसूल किए जाते हैं जिस के लिए समय समय पर निर्देश जारी होते हैं। आप को यू.पी. सरकार के टैक्स के नियमों व निर्देशों की जानकारी कर उन का अध्ययन करना चाहिए। क्यों कि वाहन का टैक्स उस के उपयोग के लिए लिया जाता है। यदि वाहन आप के पावर और पजेशन से निकल गया है और आप ने उस की रिपोर्ट पुलिस को दर्ज करवा दी है तो आप टैक्स विभाग को आवेदन कर के रिपोर्ट दर्ज होने की तिथि से उक्त वाहनों के टैक्स के दायित्व से मुक्त होने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। यदि विभाग आप को टैक्स से मुक्ति नहीं देता है और आप के आवेदन को निरस्त करता है तो आप को उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका दाखिल करनी चाहिए। केरल उच्च न्यायालय द्वारा के के मोहनदास बनाम क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के मुकदमें में इस तरह के मामले में टैक्स से मुक्ति प्रदान की गई है। आप इस निर्णय या इस जैसे दूसरे निर्णयों की मदद ले सकते हैं।

बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार करने पर उपभोक्ता न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करें।

consumer protectionसमस्या-

देवेन्द्र ने अमृतसर, पंजाब से पूछा है-

मैं ने अगस्त 2012 में आईओबी बैंक से कम्यूटर का शोरूम बनाने के लिए 11 लाख रुपए का ऋण लिया था। बैंक ने मेरे घर को सीक्योरिटी में रख कर मुझ 11 लाख की लिमिट दी थी। अप्रेल 2013 में मेरी दुकान में चोरी हो गई। मेरा सारा सामान चोरी हो गया। बैंक ने स्टाक का बीमा करवा रखा था लेकिन बीमा कंपनी ने मेरा दावा अस्वीकार कर दिया। मेरे पास बैंक का ऋण चुकाने के लिए कुछ भी नहीं है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

बैंक तो अपना ऋण आप से वसूल करेगा क्यों कि उस ने ऋण आप को दिया था। वह सीक्योरिटी में रखे मकान को कुर्क कर के ऐसा कर सकता है।

मूल समस्या बीमा कंपनी द्वारा आप का दावा अस्वीकार करना है। बीमा कंपनी ने आप का दावा किस आधार पर खारिज किया है यह जानने की कोशिश करें। यदि वह आधार गलत है तो आप बीमा कंपनी को नोटिस दे कर उपभोक्ता न्यायालय में अपना परिवाद बीमा कंपनी के विरुद्ध प्रस्तुत करें। चूंकि बीमा बैंक द्वारा कराया गया था, इस कारण आप इस परिवाद में बैंक को भी प्रतिपक्षी पक्षकार बना सकते हैं और उपभोक्ता न्यायालय से यह निवेदन कर सकते हैं कि जब तक आप के परिवाद का निर्णय न हो जाए बैंक आप से ऋण की वसूली को स्थगित रखे।

स परिवाद को करने के लिए आप को किसी अच्छे वकील की मदद लेनी होगी जो कि बीमा कंपनी से इस परिवाद के माध्यम से चोरी से हुई आप की क्षतियों की क्षतिपूर्ति दिलवा सके।

रेल में हुई क्षतियों के लिए रेलवे अधिकरण में दावा करें।

Rail Claim tribunalसमस्या-
अनिल कुमार पारा, तहसील न्‍यू रामनगर, जिला सतना म0प्र0 ने पूछा है-

दिनांक 19;01;2014 को रेल में यात्रा के दौरान बांदा से चित्रकूट के बीच में मेरी पत्‍नी का पर्स चोरी हो गया, जिसमें कीमती मोबाइल सहित कीमती जेबरात और अन्‍य सामग्री चोरी हो गई। जिसकी विवेचना थाना जी0आर0पी0 चित्रकूट के द्वारा की जाकर कॉल डिटेल के आधार पर चोर की पत्‍नी को शिवरामपुर से पकडे जाने की सूचना प्राप्‍ती हुई। मोबाइल व अन्‍य सामान बरामद किया गया है।  किन्‍तु पुलिस यह नहीं बता रही है कि सामान बरामद किया जा चुका है। पुलिस मात्र सिम बराम‍द करने की सूचना दे रही है, ऐसी स्थिति में क्‍या किसी सक्षम न्‍यायालय की शरण में जाया जा सकता ह? अन्य चोरी गये सामान के मुआवजा के लिये मुझे कहाँ पर दावा करना पडेगा? और पार्टी किसको बनाया जायेगा?

समाधान-

ब से पहले तो यह आवश्यक है कि आप ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई हो। यदि अब तक नहीं कराई है तो अब करवाएँ।

पुलिस यदि बरामद सामान का विवरण नहीं दे रही है तो इस का अर्थ है कि अभी अन्वेषण चल रहा है और हो सकता है वह और सामान बरामद करने की कोशिश कर रही हो। अन्वेषण किस स्तर पर चल रहा है, क्या सामान बरामद हुआ है। अभियुक्त कौन पकड़े गए हैं इस के लिए आप जीआरपी के एसपी कार्यालय के सूचना अधिकारी को सूचना के अधिकार के अन्तर्गत सूचना मांग सकते हैं। सूचना आप को प्राप्त हो जाएगी।

दि अभियुक्त पकड़े गए हैं और जो माल बरामद हुआ है वह सब सबूत के रूप में जब्त किया गया है। आप को वह सामान जो थाना अन्वेषण कर रहा है उस से संबंधित न्यायालय से जमानत पर वापस प्राप्त हो जाएगा। इस के लिए आप संबंधित न्यायालय में आवेदन दे सकते हैं। जमानत आवेदन पर न्यायालय द्वारा पुलिस से मांगी गई रिपोर्ट में स्पष्ट हो जाएगा कि क्या क्या बरामद हुआ है?

स के उपरान्त जो सामान आप का प्राप्त नहीं हुआ है उस की क्षति के लिए आप रेलवे अधिकरण में क्षतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं। रेलवे अधिकरण की वेबसाइट पर आप को इस की सारी जानकारी मिल जाएगी।

एटीएम खाते से धन निकलने के मामले में पुलिस अन्वेषण के लिए न्यायालय में तथा ग्राहक सेवा में कमी के लिए उपभोक्ता न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करें।

समस्या-

नोएडा, उत्तर प्रदेश से भूपेन्द्र प्रताप सिंह ने पूछा है-

मैं पंजाब नेशनल बैंक का खाताधारक हूँ।  पिछले साल जनवरी 2012 में मैं एटीएम में अपनी राशि जाँचने गया था जो कि नॉएडा में मेट्रो स्टेशन पर स्थित है।  जब मैंने अपने अकाउंट से राशि जाँची तो एटीएम सही से काम करने में असमर्थता जता रहा था। मैं वहाँ से चला आया।  तीन  दिन बाद दूसरी जगह अपना अकाउंट चेक किया तो पता चला की उस दिन मेरे खाते से 8000 हज़ार रुपये निकले थे।  जब कि उस एटीएम से पैसे ही नहीं निकल रहे थे।  मैं ने बैंक में शिकायत की तो वहाँ से जवाब आया कि हमारी जांच में पता चला है की पैसे डिलीवर हो गये थे।  मैं ने बैंक से फोटो क्लिप माँग कर देखी तो उस में साफ़ पता चल रहा है कि पैसे कोई और कलेक्ट कर रहा है।  मैं ने इस की शिकायत अपनी शाखा में की जहाँ मेरा खाता है।   मैं ने नॉएडा में भी एक एफ.आई.आर. भी दर्ज करवाई और बैंकिंग लोकपाल को भी पत्र लिखा वहाँ से भी जवाब आया कि यह मामला हमारी जांच से बाहर का है।  मैं ने पीएनबी को बहुत मेल और फोन भी किये, बहुत परेशान हुआ, पैसा भी इस प्रकिया में खूब खर्च हुआ।  पर अब तक न्याय नहीं मिला है। अब मुझे क्या करना चाहिए? क्या मुझे कंजूमर कोर्ट जाना चाहिए?

समाधान-

atm-machineप ने जो तथ्य सामने रखे हैं उस से लगता है कि आप के खाते से किसी युक्ति के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति ने धन निकाला है। आप को हानि हुई है।  दूसरी ओर यह भी स्पष्ट है कि बैंक का धन चला गया है। इस कारण उन का कहना तो यहाँ तक सही है कि आप के खाते से धन निकल चुका है। इस तरह यह मामला आप के खाते से तीसरे व्यक्ति द्वारा चोरी का है जो कि फोटो क्लिप से साबित भी है।

किस व्यक्ति ने धन निकाला है यह तो अन्वेषण के माध्यम से ही पता चल सकता है और पुलिस ही इस छानबीन कर के किसी निष्कर्ष पर पहुँच सकती है।  इस कारण से आप को पता करना चाहिए कि आप ने जो एफआईआर कराई है उस का क्या हुआ। यह भी हो सकता है कि आपने पुलिस थाने में रिपोर्ट दी हो और उस की एफआईआर नहीं दर्ज की गई हो।  इस कारण आप को पुलिस से जानना चाहिए कि वास्तव में आप की शिकायत का क्या हुआ? एक बार एफआईआर दर्ज हो जाने के बाद पुलिस को किसी नतीजे पर पहुँचना जरूरी होता है।  यदि एफआईआर दर्ज हुई होती और पुलिस इस नतीजे पर पहुँचती कि अपराध ही नहीं हुआ है या अपराधी का पता लगाया जाना कठिन है तो पुलिस इस की रिपोर्ट न्यायालय को करती जिस की सूचना आप को मिलती। लेकिन यदि सूचना नहीं मिली है तो एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटों की अवधि में उस की एक प्रति संबंधित मजिस्ट्रेट के न्यायालय में जमा होती है। आप संबंधित न्यायालय से भी पता कर सकते हैं कि एफआईआर दर्ज हुई है अथवा नहीं हुई है।

क बार यदि आप को पता लग जाए कि एफआईआर दर्ज नहीं हुई है तो आप को सीधे न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करना चाहिए और उसे अन्वेषण के लिए पुलिस को भेजा जाना चाहिए। यदि आप को पता लगता है कि एफआईआर दर्ज हुई थी लेकिन अभी कोई रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई है तो न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर यह निवेदन किया जा सकता है कि न्यायालय पुलिस से उस मामले में प्रगति रिपोर्ट मांगे।

स मामले में बैंक में आप के खाते से चोरी होने के कारण बैंक को भी पुलिस को एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी। लेकिन बैंक ने ऐसी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है।  चुंकि आप ने अपने खाते को ऑपरेट ही नहीं किया था इस कारण यह आप के बैंक खाते से चोरी है और आप के खाते से गई राशि की भरपाई बैंक को करनी चाहिए। लेकिन बैंक ऐसा नहीं कर रहा है। यह ग्राहक की सेवा में कोताही है। इस कारण से आप को बैंक को एक कानूनी नोटिस देना चाहिए और उस के बाद उस के विरुद्ध उपभोक्ता न्यायालय में अपनी शिकायत प्रस्तुत कर बैंक से आप का धन खाते में डालने, आप को हुई परेशानी के लिए बैंक से हर्जाना दिलाने और न्यायालय खर्चे दिलाए जाने की मांग करनी चाहिए। इस तरह आप को अपराधिक न्यायालय और उपभोक्ता न्यायालय दोनों के समक्ष कार्यवाही करनी चाहिए।

जिस मामले में आप ने स्वयं कानून की पालना नहीं की उस में आप न्याय की आशा कैसे कर सकते हैं?

समस्या-

जबलपुर, मध्यप्रदेश से शिरीष कुमार सोनी पूछते हैं –

मैं एक सुनार हूँ, मेरी दुकान जबलपुर में है।  सितम्बर 2012 में कुछ लोग मेरी दुकान में  आए, उनके साथ मेरा एक दोस्त था।  उसने गारंटी दी थी कि मैं इनको जानता हूँ, इनको ट्रक खरीदना है इसलिए चांदी-सोना बेच रहे हैं।  उन्हों ने मेरी दुकान पर गोल्ड का 150 ग्राम सोना और 50 ग्राम चान्दी बेची और चले गये।  दूसरे दिन पुलिस आई और कहा कि तुमने चोरी का माल खरीदा है।  मुझको थाने ले गई।  वहाँ पर उन्हों ने मुझ से 40ग्राम सोना और 50 ग्राम चान्दी का माल जमा करवा लिया।  फिर बाद में जिस के घर से चोरी हुई थी वो भी आता था और मेरे पास से सोने के कुल मिला कर 150 ग्राम जेवर ले चुका है, और मांग रहा है।  मैं क्या करूं?  जो लड़के चान्दी सोना बेचने आए थे उनको पुलिस ने उसी दिन पकड़ लिया था। पूरी राशि रुपए 3,92,000 जप्त व कर लिया था।  लेकिन उसकी जब्ती नहीं बनाई।  उस माल के खरीदने की कोई रसीद नहीं है।  मैं अपना पैसा वापस पाने के लिए क्या करूँ?

समाधान-

प की समस्या स्वयं आप के व्यापार करने के तरीके से उत्पन्न हुई है।  आप ने जब सोना-चांदी खरीदा तो आप ने रुपया दिया था। आप ने बेचने वालों को जो रुपया दिया था उस की रसीद उन से प्राप्त करनी चाहिए थी और सोना-चांदी की रसीद उन्हें देनी चाहिए थी। लेकिन आप ने यह सब काम बिना किसी सबूत के किया।  बेचने वाले पकड़े गए और रुपया भी उन से बरामद कर लिया गया। अब पुलिस ने रुपए की जब्ती नहीं बनाई यह आप किस आधार पर कह रहे हैं? यदि जब्ती नहीं बनाई है तो फिर आप यह कैसे कह सकते हैं कि उन से सारा रुपया जब्त कर लिया गया है? यदि पुलिस ने रुपया ले लिया है और जब्ती नहीं बनाई है और इस बात का सबूत है तो फिर आप को इन सबूतों को पुलिस के उच्चाधिकारियों और न्यायालय के सामने रखना चाहिए।

प का जो मित्र बेचने वालों के साथ आया था उस ने कोई मौखिक गारंटी दी है तो उस का कोई महत्व नहीं है। आप से पुलिस ने जो सोना चांदी जमा करवाया है उसे जब्ती में दिखाया है अथवा नहीं यह आप ने नहीं बताया है। यदि उस की जब्ती दिखाई गई है तो वह सोना चांदी अभी मौजूद है। वह सोना-चांदी आप को नहीं मिलेगा। क्यों कि उसे अदालत उसी की सुपूर्दगी में देगी जो उस का असली मालिक है।  जिस व्यक्ति के घर चोरी हुई थी उस व्यक्ति को आपने जो माल दिया है उसे आप से लेने का कोई अधिकार नहीं था?   आपने उसे माल दिया यह आप की गलती है। यदि उसे माल दिया है तो उस की रसीद आप को लेनी चाहिए थी।  यदि आप ने उस से कोई रसीद प्राप्त नहीं की है तो आप यह कैसे कह सकते हैं कि आप ने उस व्यक्ति को माल दिया है? जब पुलिस ने आप के द्वारा खरीदे हुए माल को चोरी का माल बताया था तो आप को सारा माल पुलिस के सुपुर्द कर के उस की रसीद प्राप्त करनी चाहिए थी। आप ने अधूरा माल पुलिस को दिया और उस की रसीद प्राप्त की या नहीं, तथा चोरी का माल खरीदने के लिए पुलिस ने आप के विरुद्ध कोई मुकदमा बनाया है या नहीं इस की कोई जानकारी आप ने नहीं दी है। जब आप ने कुछ माल पुलिस को जब्त करा दिया था तो फिर शेष माल ही आप उस व्यक्ति को दे सकते थे जिस के घर चोरी हुई थी। आप ने उस से अधिक माल आपने उसे क्यों दे दिया?

स तरह आप की समस्या के सारे तथ्य स्पष्ट नहीं हैं।  प्रतीत होता है कि आप चोरी का माल बिना रसीद के खरीदने के अपराध बोध से और मुकदमा बनने के दबाव से इतने अधिक घबरा गए कि जो जैसा कहता गया करते गए।  आप को पहले ही दिन तुरन्त किसी अच्छे वकील से राय करनी चाहिए थी उस राय के अनुसार काम करना चाहिए था। यदि पुलिस ने आप के विरुद्ध कोई मुकदमा नहीं बनाया है और आप से कोई जब्ती नहीं दिखाई है तो पूरे मामले से आप की संबद्धता पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। ऐसी स्थिति में कोई कानूनी राय आपसी बातचीत और तथ्यों की पूरी जानकारी के बिना देना संभव नहीं है।

जो कुछ आप खो चुके हैं उस में से बहुत कम वापस लौटने की उम्मीद है।  क्यों कि आप के पास किसी बात का कोई सबूत नहीं।  जिस मामले में आप ने स्वयं कानून की पालना नहीं की उस मामले में आप न्याय की आशा कैसे कर सकते हैं?  अब भी आप को चाहिए कि आप जबलपुर में ही किसी अच्छे फौजदारी मामलों के वकील से संपर्क कर के राय करें। पूरे तथ्य उसे बताएँ। जिन तथ्यों की जानकारी आप को नहीं हो सकी है उन्हें जानने में भी वह वकील आप की मदद कर सकता है।  यदि आप की समस्या का कोई हल हुआ या आप के नुकसान में कुछ कमी करने का कोई मार्ग निकलेगा तो भी  वह जबलपुर के किसी स्थानीय वकील से राय कर के ही निकल सकता है।

नई बाइक चोरी हो गई, क्या चोरी का बीमा होता है? मैं बीमा दावा कैसे करूँ?

राकेश ने पूछा है …..
मेरी नई बाईक घर से चोरी हो गई है, उसका बीमा है।  क्या चोरी का बीमा मिलता है? बाईक का मूल्य 40000 है,  मै बहुत परेशान हो गया हूँ।  कृपया  जल्दी समाधान भेजें, मै आपका आभारी रहूँगा।
समाधान ……
राकेश जी,
प तो मोटर सायकिल के चोरी जाने से बिलकुल घबरा गए हैं। स्वाभाविक भी है। बमुश्किल और बहुत अरमानों के साथ एक नौजवान अपनी पसंद की मोटर सायकिल खरीदता है। वह नई की नई चोरी चली जाए घबराना स्वाभाविक है। 
किसी भी मोटर सायकिल के दो प्रकार के बीमे हो सकते हैं। एक तो अधिनियम दायित्व बीमा होता है, अर्थात जिन चीजों का बीमा कराना कानूनन जरूरी है, जैसे किसी तीसरे पक्ष को होने वाली जन-धन-स्वस्थ्य की हानि का बीमा। यह तो हर मोटर वाहन के स्वामी को कराना जरूरी है। लेकिन इस में चोरी का बीमा शामिल नहीं होता है। इस के अलावा एक पैकेज पॉलिसी बीमा होता है। इस में सभी तरह का बीमा शामिल होता है. जिस में चोरी व किसी दुर्घटना में आप के वाहन को होने वाली हानियों की भरपाई शामिल होती है।
म तौर पर नई मोटर सायकिल किसी न किसी ऋण के माध्यम से खरीदी जाती है। यदि ऐसा है तो ऋणदाता स्वयं ही पैकेज पॉलिसी बीमा कराता है। यदि ऋण नहीं भी लिया होता है तो भी नए वाहन का बीमा पैकेज पॉलिसी के अंतर्गत करने का पूरा प्रयत्न बीमा कंपनी करती है। आप अपना बीमा प्रमाण पत्र देखें कि आप की बाइक का किस तरह का बीमा किया गया है।
दि आप का पैकेज पॉलिसी बीमा है तो आप को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आप ने चोरी की रपट तो पुलिस को लिखवा ही दी होगी। आप बीमा कंपनी को भी चोरी की सूचना दे दें और आप के द्वारा की गई रपट की प्रतिलिपि संलग्न कर दें। बीमा कंपनी वाले आप से एक दावा फार्म भरवाएंगे। आप से वाहन का पंजीकरण,  आप का ड्राइविंग लायसेंस, बीमा प्रमाणपत्र की प्रति और मोटर सायकिल की दोनों चाबियाँ मांगेंगे। आप इन्हें जमा करा दीजिए। बीमा कंपनी अपने अन्वेषक से अन्वेषण कराएगी कि वाकई मोटर सायकिल चोरी हुई है अथवा नहीं। फिर वह पुलिस अन्वेषण की रिपोर्ट की प्रतीक्षा करेगी। यदि इस बीच मोटर सायकिल पुलिस बरामद कर लेती है तो आप उसे न्यायालय में आवेदन कर के अपने कब्जे में ले सकते हैं। इस बीच यदि बाइक में कोई नुकसान हुआ है तो उस की भरपाई बीमा कंपनी कर देगी।
दि आप की मोटर सायकिल वापस नहीं मिलती है तो पुलिस मामले में अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करेगी। न्यायालय प्रतिवेदन की जाँच कर के उसे स्वीकार कर लेता है तो आप अंतिम प्रतिवेदन तथा उस की स्वीकृति के न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रतियाँ न्यायालय से प्राप्त कर बीमा कंपनी को दे दें। बीमा कंपनी आप की मोटर सायकिल की कीमत में से घिसाई (Depreciation) काट कर आप को नुकसान की भरपाई कर देगी। आप बीमा दावा से प्राप्त राशि से नई मोटर सायकिल खरीद लें। इस काम में पाँच-छह माह लग सक

मियाद के दिनों की चोरी

आज के आलेख में मैं एक ऐसी चोरी के बारे में बताना चाहता हूँ, जिस की किसी भी थाने या अदालत में रपट दर्ज नहीं होती है, और न ही अपराधी को कोई सजा ही दी जा सकती है।

जब भी किसी मुकदमे का फैसला होता है तो उस फैसले की अपील की जा सकती है, जिस के लिए एक निश्चित समय निर्धारित होता है। इस निर्धारित समय में ही अपील की जा सकत है। इस निर्धारित समय क व्यतीत हो जाने के बाद अपील किया जाना संभव नहीं होता है। अपील करने के लिए निर्धारित यह समय आम बोल चाल में मियाद और अंग्रेजी में लिमिटेशन कहा जाता है। आम तौर पर यह निर्धारित समय तीस दिन, और हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में की जाने वाली अपील के मामलों में अधिक से अधिक नब्बे दिनों तक का हो सकता है। मियाद के इन दिनों में अपीलार्थी पक्षकार का ऊँची अदालत के वकील से सम्पर्क करना, सभी आवश्यक दस्तावेजों और फैसले की नकलें लेना, ऊँची अदालत के वकील द्वारा मामले का अध्ययन आदि काम करने होते हैं। यदि कोई पक्षकार इस बीच चैन से न बैठे तो यह समय पर्याप्त होता है। फैसला करने वाली अदालत से फैसले की नकल प्राप्त करने में लगा समय मियाद के समय में और जुड़ जाता है। पर मियाद के इस समय के एक भाग की बड़े ही शातिराना तरीके से चोरी हो जाती है।

होता यह है कि मुकदमे की बहस के बाद अदालत फैसले की तारीख निश्चित कर देती है। इसे अदालत अपनी सुभीते के लिए बदल कर आगे भी खिसका देती है। फैसले की निश्चित तारीख पर अदालत का समय समाप्त होने तक पक्षकार या उस के वकील के पूछने पर अदालत का रीडर यह कहता रहता है कि (जज) साहब फैसला लिखा रहे हैं। अदालत का समय समाप्त होने के ठीक पहले या कभी कभी उस के भी बाद, यह बताया जाता है कि फैसला पूरा नहीं लिखाया जा सका, कल पूछ लेना। अकसर दूसरे-तीसरे दिन भी यही जवाब मिलता है। फिर पक्षकार से कहा जाता है कि तुम क्यों रोज-रोज चक्कर लगा रहे हो? जब फैसला हो जाए तब तुम्हारे वकील साहब पता कर तुम्हें बता देंगे। पक्षकार अदालत आना बन्द कर देता है। चार-पाँच दिनों में या एक दो सप्ताह में फैसला सुना दिया जाता है। नकल लेने के लिए प्रार्थना पत्र दिया जाता है। नकल मिलती है, तब पता लगता है कि उस पर फैसले की तारीख वही छपी है जो पहले निश्चित की गई थी। ये चार-पाँच दिन या एक दो सप्ताह जो मौखिक बढ़ाए ग थे चुपचाप चोरी हो जाते हैं।

यह चोरी खुद अदालत कर लेती है।

अब बोलिए। किस थाने या अदालत में इस चोरी की रपट लिखाई जाए? और कौन सा थाना या अदालत इस चोरी की रपट दर्ज करेगा?

पहले ऐसा किसी किसी मामले में,किसी किसी अदालत में हुआ करता था। अब यह लगभग सभी निचली अदालतों का आम अभ्यास हो गया है।

और हाँ, बाहर हूँ, कल अवकाश रहेगा।

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada