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तलाकशुदा होने का झूठा तथ्य बता कर नौकरी प्राप्त करना अपराध है।

समस्या-

मितेश पालीवाल ने नाथद्वारा, जिला राजसमन्द , राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरी शादी 5 साल पूर्व हिन्दू रीती से हुई थी। हम दोनों ने शादी से पूर्व b.ed. की थी। मेरे एक लड़का भी है जिसे मेरी पत्नी मुझे देना नहीं चाहती क्योंकि मेरी पत्नी मुझसे सिर्फ सरकारी नौकरी पाने के इरादे से मुझसे तलाक चाहती है। मेरे द्वारा मना करने पर उसने मेरे व मेरे परिवार पर दहेज़, महिला उत्पीडन, मेन्टेनेंस आदि केस कर दिए हैं कोर्ट ने 4000 की डिग्री भी कर दी है। मेरी पत्नी ने RPSC सेकण्ड ग्रैड में ऑनलाइन आवेदन भी कर दिया है। जिसमें उसने अपने आप को तलाकशुदा बताया है।  उसका कहना है कि जब तक rpsc का exam होगा तब तक तो वो मुझ से तलाक भी ले लेगी,  मेने उस तलाक के फॉर्म को ऑनलाइन निकाल कर कोर्ट में पेश कर दिया है कोर्ट ने भी उसे गलत माना। साथ ही उसे आगे से एसा नहीं करने की नसीहत दी। श्रीमान मेरी पत्नी व सास-ससुर लालची प्रवृत्ति के हैं,  ये सब मुझसे पैसों की डिमांड करते रहते हैं।   मेरा सवाल है की मेरी पत्नी ने तलाक नहीं होने के बावजूद rpsc में तलाकशुदा का आवेदन किया है क्या यह गैरक़ानूनी है। अगर है तो किस धारा के अंतर्गत साथ ही और कोई उपाय हो तो अवगत करावे। मैं अपनी बात को मिडिया में भी बताना चाहता हूँ।

समाधान-

प की पत्नी नौकरी करना चाहती है और आत्मनिर्भर बनना चाहती है, यह एक अच्छी बात है। पर उस ने नौकरी पाने के लिए जो कदम उठाया है खुद को तलाकशुदा बता कर, वह गलत है और इस तरह वह नौकरी प्राप्त करती है तो वह धारा 420 आईपीसी का अपराध होगा। इस से प्राप्त की हुई नौकरी भी जा सकती है और उस पर अपराधिक मुकदमा चलाया जा कर उसे कारावास के दंड से दंडित भी किया जा सकता है।

मुझे नहीं लगता कि आप की पत्नी ने आप का घर छोड़ा है वह केवल इस कारण छोड़ा है कि वह तलाक की डिक्री प्राप्त कर नौकरी कर सके। लगता है यह योजना बाद में दिमाग में आई हो। आप के बीच विवाद का कारण कुछ और है जो आप यहां बताना नहीं चाहते। मीडिया में इस तथ्य को उजागर करना आप के लिए ठीक नहीं होगा। आप उस के पति हैं और यह पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण होगा। मेरे  विचार से आप को अपनी पत्नी को ऐसा गलत कदम उठाने से रोकना चाहिए। जब तक वाकई तलाक नहीं  हो जाता है तब तक आप की ओर से कोई कदम ऐसा नहीं उठाया जाना चाहिए जो पत्नी के प्रति दुर्भावना को व्यक्त करता हो।

हिन्दू विधि में तलाक/ विवाह विच्छेद केवल न्यायालय की डिक्री से ही संभव है।

समस्या-

राकेश कुमार ने अलवर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरी ओर मेरे भाई की शादी फऱवरी 2015 में हुई। शादी के 1 साल तक सही रहा।  इसके बाद हम दोनों भाई की उनसे बनी नहीं वो बिना बात पे ही हम से लड़ाई करती थी।  फिर वो दोनों चली गई, हम लेने गए तो दोनो नहीं आई।  बड़ी बहन गर्भ से थी। हम ने धारा 9 का केस डाल दिया। चार माह बाद जब डिलीवरी होने का टाइम आया तो उन्होने कहा कि इनको ले जाओ।  हम दोनों को ले आए। डिलीवरी के दो माह बाद छोटी बहन, मेरी घरवाली कहती है कि मुझे नहीं रहना तलाक चाहिए। हम ने उसको कई बार रहने को बोला लेकिन वो अपने माँ बाप के पास चली गई और उसके बाद उसने मुझे नोटरी करवा कर रुपए 100 के स्टांप पर तलाक़ दे दिया और बड़ी बहन अभी रह रही है, क्या ये तलाक़ मान्य है।

समाधान-

प खुद हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 के अन्तर्गत एक आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत कर चुके हैं। इस का अर्थ है कि आप हिन्दू विवाह अधिनियम से शासित होते हैं। इस अधिनियम में कोई भी तलाक केवल तभी मान्य होता है जब कि न्यायालय से डिक्री पारित हो जाए।

आप की पत्नी आप के साथ नहीं रहना चाहती है और उस ने 100 रुपए के स्टाम्प पर आप को तलाकनामा लिख भेजा है। यह अपने आप में क्रूरता पूर्ण व्यवहार है। आप इसी स्टाम्प के आधार पर तथा अन्य आधारों पर परिवार न्यायालय में तलाक की अर्जी प्रस्तुत कर सकते हैं। आप को तुरन्त कर ही देनी चाहिए। न्यायालय से डिक्री पारित होने और निर्धारित अवधि में उस की कोई अपील दाखिल न होने पर यह तलाक अन्तिम हो सकता है।

विवाह विच्छेद का विचार फिलहाल त्याग कर अपने बीच की समस्याएँ समझ कर हल करने की कोशिश करें।

समस्या-

हेमन्त प्रताप सिंह ने कानपुर उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी 2014 में हुई थी, मेरी ससुराल वाले धनी परिवार से हैं। मैं एक प्राइवेट फर्म में काम करता हूँ। हमारे विचार एक दूसरे से कभी नहीं मिले। मेरा ससुराल पक्ष मेरे ऊपर दबाव डालता है कि आप अपने भाई से अलग रहो। छह छह माह एक दूसरे से दूर रहते हैं और मुझे कोई कमी भी महसूस नहीं होती। मेरा उन के साथ इंटीमेट होने का मन भी नहीं करता। मेरे मन में डाइवोर्स का ख्याल आया कि क्यों न हम कानूनी तौर पर अलग हो जाएँ। लेकिन घर वाले डरते हैं कि वे धनी लोग हैं हमें दहेज एक्ट में फँसा देंगे। मेरा मार्गदर्शन करें।

समाधान-

मुझे नहीं लगता कि आप के बीच कोई बड़ी समस्या है। आप ने यह तो बताया कि ससुराल पक्ष आप पर दबाव डालता है कि आप भाई से अलग रहें। लेकिन आप ने यह नहीं बताया कि जब वे यह बात करते हैं तो क्या तर्क देते हैं कि भाई से अलग क्यों रहना चाहिए। वे कुछ तो कहते होंगे कि भाई के साथ रहने में फलाँ बुराई है और इस कारण से अलग होना चाहिए। हो सकता है उन की इस बात के पीछे कोई गंभीर वजह हो। आप को अपने ससुराल पक्ष से पूछना चाहिए कि इस का कारण क्या है। यदि कारण पता लग जाए और वह वाजिब हो तो आप को उस कारण को दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए। यदि कारण ऐसा है कि उसे दूर करना संभव नहीं हो तो ससुराल पक्ष का सुझाव स्वीकार कर लेना चाहिए।

ऐसा तो अक्सर होता है कि पति पत्नी के बीच के विचारों में पर्याप्त अंतर हो। लेकिन उस के बाद भी वे साथ रहते हैं। यह सब आपसी समझदारी से होता है। आप दोनों भी इस तरह अपने बीच आपसी समझदारी विकसित कर सकते हैं।  जो कि समय के साथ हो जाती है। यदि छह माह दूर रहने पर भी आप को कोई कमी महसूस नहीं होती, पत्नी के साथ इंटीमेट होने का मन नहीं होता तो यह आप के अंदर किसी तरह की हार्मोनल गड़बड़ी के कारण भी हो सकता है और यह अन्य कोई यौन समस्या भी हो सकती है। आप को चाहिए कि इस संबंध में किसी अच्छे मनोचिकित्सक से मिलें वह आप की समझाइश कर के तथा कुछ दवाएँ आदि दे कर आप के अंदर की इस उदासीनता को समाप्त कर सकता है।

यदि इन सब के बाद भी आप समझते हैं कि आप दोनों को अलग होना ही अच्छा हल है तो इस संबंध में खुल कर अपनी पत्नी से बात करें। उसे सारी समस्या बताएँ। हो सकता है आप की पत्नी इस समस्या का कोई अच्छा हल सुझा सके। हो सकता है वह भी इस समस्या को समझ कर आप से अलग होने को तैयार हो जाए। यदि ऐसा होता है तो सहमति से तलाक की अर्जी न्यायालय में दाखिल की जा सकती है। आप को यह भी सोचना चाहिए कि तलाक अपने आप में अनेक नई समस्याएँ खड़ी करता है। आप सोचें कि क्या क्या समस्याएँ तलाक से उत्पन्न होंगी और उन से कैसे निपटा जाएगा। आप यह भी सोचें कि आप के तलाक देने से आप की पत्नी के जीवन में क्या समस्याएँ पैदा होंगी और उन का क्या हल निकल सकता है।

मेरे विचार में आप और आप की पत्नी के बीच कोई बड़ी समस्या नहीं है जिसे किसी तरीके से हल न किया जा सके। इस कारण आप को इस मामूली समस्या को हल करना चाहिए। विवाहित जीवन मे डाइवोर्स तो अंतिम हल होता है इस कारण आप को फिलहाल डाइवोर्स का विचार त्याग देना चाहिए।

तलाक के स्थान पर न्यायिक पृथक्करण के लिए अर्जी दें।

rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

सुशील कुमार ने जहाँनाबाद, बिहार से पूछा है-

मेरी शादी को दस साल हुए हैं एक पुत्र आठ वर्ष का है। मेरी पत्नी मेरी माँ से बहुत झगड़ा करती है, बहुत गंदी रहती है, पागलों जैसा व्यवहार करती है, गंदी गंदी गालियाँ देती है। उस के साथ पाँच वर्ष से मेरा कोई शारीरिक संबंध नहीं है। मैं तलाक चाहता हूँ लेकिन वह नहीं चाहती। मैं किस आधार पर तलाक ले सकता हूँ? क्या मैं दूसरे जिले में अपना मुकदमा पेश कर सकता हूँ, मेरी स्थिति कुछ करने या मरने जैसी है मैं अपने पुत्र और माँ के साथ रहना चाहता हूँ।  मैं एक सरकारी कर्मचारी हूँ, मुझे स्थाई पुनर्भरण के बारे में भी बताएँ।

समाधान-

प क्रूरतापूर्ण व्यवहार के आधार पर तलाक ले सकते हैं अथवा न्यायिक पृथक्करण करवा सकते हैं। यदि फिलहाल आप का दूसरा विवाह का कोई इरादा न हो तो हमारी सलाह है कि आप तलाक के लिए अर्जी देने स्थान पर न्यायिक पृथक्करण (Judicial Separation) के लिए अर्जी प्रस्तुत करें। वास्तव में पत्नी के व्यवहार के कारण ही सारी परेशानी है। हो सकता है आप की पत्नी को कोई मानसिक रोग हो और उसे चिकित्सा की जरूरत हो। दस साल के विवाह के बाद तलाक हो जाने पर वह कहाँ जाएगी? उस का भरण पोषण तो आप को ही करना होगा। जैसी उस की स्थिति है उसे देखभाल और चिकित्सा की जरूरत भी हो सकती है।

हमारा सुझाव है कि आप न्यायिक पृथक्करण के लिए अर्जी दें। जो क्रूरता के आधार पर दी जा सकती है, आप किसी स्थानीय वकील से मिलेंगे तो वह अन्य आधार भी आप से बातचीत कर के जोड़ देगा। न्यायिक पृथक्करण के बाद आप अपनी पत्नी को अलग आवास में अपने घऱ से दूर रख सकते हैं और आप अपने घर माँ और बेटे के साथ रह सकते हैं। यदि आवश्यक हुआ तो न्यायिक पृथक्करण की डिक्री के वर्ष भर बाद आप तलाक का आवेदन भी कर सकते हैं। स्थाई पुनर्भरण का जहाँ तक प्रश्न है तो यह तो तलाक के साथ ही तय हो सकता है, उस के पहले नहीं।

संभव हो तो पत्नी का विवाह उस के प्रेमी से करवा दें।

rp_gavel2.jpgसमस्या-

मुकेश प्रसाद ने जम्मू कश्मीर से पूछा है-

मैं पिछले १० सालों से इंडियन आर्मी में देश की सेवा में लगा हूँ। मेरी पोस्टिंग इस समय  जम्मू कश्मीर के बॉडर क्षेत्र में है। मेरी शादी इसी साल २२ अप्रेल 2016  को प्रिया के साथ हुई थी।  मैं  अपनी   शादी से  बहोत  खुश  था।  शादी के  बाद  मैं ड्यूटी  पर  चला  आया,  और  देश  की  सेवा  में  लग  गया,  जब  भी   मुझे  समय  मिलता  मैं  उस से फ़ोन  पर  बात  करता  और  खुश  होता  रहता। पर  प्रिया  का  शादी  से  पहले  कुछ  गैर  मर्दों  के  साथ  गलत  सम्बन्ध  भी  थे  जो  कि  उसने  मुझे  नहीं  बताया  था। शादी के   बाद  भी   वो  उन  लोगो  के  साथ  फ़ोन  और  व्हाटसअप  पर  बातें  करते  रहती थी। मेरे  जाने  के  बाद  उसे  का  उन  लोगो  के  साथ  फिर  से  मिलना  शुरु  हो  गया। घर  पर  कोई  भी  न  होने  पर  वो  उन  लोगो   के  साथ  गलत  सम्बन्ध  बनाने  लगी। एक  दिन  इसे   मेरे  रिस्तेदार  ने  उसे  ऐसा  करते  हुवे  देख  लिया।  फिर  मुझे  पता  चला। मैं  आर्मी  के (SPL .  डिपार्टमेंट ) से तालुक रखता  हूँ। मेरे  इन्वेस्टीगेशन  करने  पर उसने  मुझे  सब  कुछ  बता  दिया। इन   सब  बातों  का  मेरे  पास वीडियो  भी  है। उनसे बात करने का कॉल  रिकॉर्ड भी है। मैं  अब  उसके  साथ  नहीं  रहना  चाहता हूँ। तलाक  लेकर नई जिंदगी शुरु करना चाहता  हूँ। पर   उसके  पिता  और  समाज  के  लोगो  ने कहा  कि  आगे  ऐसी  गलती  नहीं  होगी। पर  उसने  मुझे  कहा  कि  मैं   उस  लड़के  से  शादी    कर  लूंगी। मेरे  तलाक  देने  की  बात  पर  वो   आत्महत्या  की   धमकी  देती  है।  दहेज़ पाऔर मार पीट के केश में फाँसने की बात करती है।  पहले ही मैंने शादी  लेट की अब इन सब क़ानूनी दाव पेंच में फंस  कर बाकी की जिंदगी भी ख़राब नहीं करना चाहता हूँ और किसी भी सूरत मे उसे कबुल नहीं करूँगा। जबरदस्ती कबूल करवाने पर मैं आपने आप को गोली मार कर या कोर्ट के इसे फैसले पर में आत्मदाह कर लूंगा। परंतु मेरे कमांडिंग अफसर के कहने पर  ये  सब   भूल  कर  उस  तलाक  दे  कर  दूसरी  जिंदगी  की  सुरुवात  करना  चाहता  हूँ। अब मैं क्या करूँ?

समाधान-

ड़कियाँ/ औरतें आज भी पराधीन हैं। विवाह के पहले आप की पत्नी पिता के अधीन थी अब आप के अधीन है। उस ने डर छुप कर प्रेम किया। विवाह आप से कर लिया। प्रेम को छुपाती रही। आप के ड्यूटी पर आने पर उस के प्रेम को फिर से फलने का अवसर मिल गया। उस ने आप से प्रेमवश नहीं बल्कि माता पिता की इच्छा से विवाह किया था। इन परिस्थितियों में बेहतर उपाय तो यह है कि जिस लड़के से वह प्रेम करती है विवाह करने की बात करती है उसे बुलाइये और उस से स्पष्ट रूप से बात कीजिए। उसे कहिए कि वह आप की पत्नी से विवाह कर ले। यदि वह और आप की विवाहिता इस के लिए तैयार होते हैं तो ठीक है, वर्ना उसे कहिए कि वह आप की पत्नी के जीवन से दूर चला जाए।

यदि वे दोनों विवाह के लिए राजी हो जाएँ तो आप अपनी पत्नी से सहमति से तलाक ले कर उस का विवाह करा दीजिए और स्वतंत्र हो जाइए। यदि वह लड़का आप की पत्नी के जीवन से हट जाता है तो आप पत्नी के साथ अपना जीवन बिताइए। इस से आप के औऱ आप की पत्नी के बीच प्रेम पनपने के भी अवसर हैं।

यदि यह सब नहीं होता है तो अपनी पत्नी से तलाक के लिए आवेदन कीजिए। यह आवेदन आप अप्रेल 2017 में विवाह को एक वर्ष हो जाने पर ही हो सकेगा। तब तक यह सब प्रयत्न कर के देख लें। नहीं तो बाद में तलाक के लिए अर्जी पेश करें। दहेज या मारपीट के केस की धमकी पर ज्यादा ध्यान न दें। वह आरोप गलत है तो गलत सिद्ध हो जाएगा। हाँ वह यदि कोई मुकदमा करती है तो आप को जमानत करानी पड़ेगी। एक बार जमानत हो जाने पर आगे ठीक से पैरवी करवा कर आप बरी हो सकते हैं।

बेहतर यही है कि तलाक हो जाए।

rp_judicial-sep8.jpgसमस्या-

मितेश पालीवाल ने नाथद्वारा, जिला राजसमंद, राजस्थान से पूछा है-

मेरी शादी को करीब चार साल हो चुके है मेरी पत्नी ने बी .एड कर रखी है मेरे एक तीन साल का लड़का भी है। मेरी पत्नी सरकारी नौकरी (अध्यापिका) के लिये मुझसे तलाक लेना चाहती थी जब मैं ने तलाक के लिए मना किया तो मेरी पत्नी ने 17/07/2015 को मुझ पर मेरे भाई, बहन, माता-पिता सभी पर 498ए,  दहेज़ 67, 125 दं.प्र.संहिता, 13 हिन्दू विवाह अधिनियम व घरेलु हिंसा आदि केस कर दिए हैं।  मैं ने दहेज़ का सारा सामान, पीहर व् ससुराल की सारी सोने चांदी की रकमें भी उसको क़ानूनी तरीके से दे दी, अब मेरी पत्नी न तो मेरे साथ रहना चाहती है न ही तलाक देना चाहती है। वह तलाक के साथ  खर्चा भी लेना चाहती है। मुझे सिर्फ तीन सवालों के जवाब नहीं मिल रहे हैं  1- मेरा लड़का जो मेरी पत्नी के पास है में उससे रोज दो घन्टे मिल सकता हूँ या नहीं?  2- जब मैं मेरी पत्नी को अपने घर पर, किराये पर या फिर उसी के घर में उस के साथ रहने के लिये तेयार हूँ  लेकिन मेरी पत्नी मेरे साथ नहीं रहना चाहती और महीने के 10,000 हजार रुपये की मांग कर रही है तो क्या मुझे खर्चा देना पड़ेगा?  3- मैं अगर खर्चा देने के लिये पूरी तरह से मना कर दू तो मेरी सजा क्या होगी?

समाधान-

ऐसा लगता है कि आप की पत्नी एक स्वतंत्र जीवन जीना चाहती थी। यह पिता के घर में संभव नहीं था। क्यों कि हमारे अधिकांश मायके आज भी विवाह तक ही बेटी की नियमित जिम्मेदारी उठाना चाहते हैं उस के बाद वे भूल जाते हैं कि वह भी उन के परिवार का हिस्सा है। इस कारण उस ने विवाह कर लिया। यहाँ भी वह यह सपना पूरा नहीं कर सकी, संतान और हो गयी। इसी स्वतंत्र जीवन के लिए वह तलाक लेकर परित्यक्ता के रूप में अनुकंपा नियुक्ति चाहती थी। उसे आपने सफल नहीं होने दिया। आज आप सोचते होंगे कि उस का वही प्रस्ताव मान लेना ठीक था।

आप के तीनों प्रश्नों के उत्तर अनेक अन्य तथ्यों को जान कर ही दिए जा सकते हैं जो इस प्रश्न में नहीं हैं। बेहतर है कि आप इस मामले में अपने नजदीक के किसी अच्छे वकील से सलाह लें।

आप की पत्नी के लगाए केस अधिकांश खारिज होंगे। लेकिन बेहतर यही है कि सहमति से या जैसे भी हो। आप उसे तलाक दे दें, उसे नौकरी मिल जाए। तब वह खर्चा नहीं मांग सकेगी। आप बच्चे से मिलने के लिए न्यायालय में आवेदन करें, हो सकता है आप को अपने बेटे के साथ रहने का समय मिल जाए।

एक बात निश्चित है कि जितना खर्चा आप की पत्नी ने मांगा है नहीं मिलेगा। दूसरे आप यदि खर्चा देने से मना करेंगे तो न्यायालय आप को जेल भेज देगी। हर माह के खर्चे के लिए एक माह जेल भुगतनी पड़ सकती है। यह बात तो आप के वकील आप को ठीक से समझा भी देंगे।

गलतियों की माफी से ही आगे का रास्ता बनेगा।

rp_two-vives.jpgसमस्या-

रशीद वारसी ने आगरा, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरी शादी 2012 में हुई थी। 3 साल बाद मैं ने अपनी बीवी को कुछ गलतफहमियों की वजह से छोड़ दिया और मैं किसी और के साथ लिव इन में रहने लगा। मुझे पता लगा कि मेरी बीवी मुझ पर केस करने जा रही है तो मैं ने बिना पूछे 10 रुपए के स्टाम्प पेपर पर उसे तीन बार तलाक लिख कर भेज दिया। क्या मेरी तलाक हो गयी? मेरी उस से एक बेटी भी है। वो मुझे उस से भी नहीं मिलने देती। मैं क्या करूँ? मैं अपनी बीवी को वापस लाना चाहता हूँ। कोई कानूनी तरीका हो तो बताएँ।

समाधान-

प बड़े अजीब आदमी हैं। आप ने गलतफहमी के चलते अपनी बीवी को छोड़ दिया। किसी अन्य महिला के साथ लिव इन में रहने लगे। गलतफहमी आप को थी बीवी को नहीं। बीवी ने बिना किसी कसूर के दंड भुगता। जब आप को पता लगा कि वह मुकदमा करेगी तो डर के मारे आप ने 10 रुपए के स्टाम्प पेपर पर तीन बार तलाक लिख कर भेज दिया। अब आप को बेटी याद आ रही है। आप औरतों और लड़कियों को समझते क्या है? तीन औरतों को आप ने परेशान कर दिया है। बीवी को छोड़ा, बेटी को पिता के स्नेह से वंचित किया और जिस के साथ लिव इन में रहे हैं उस का क्या उस की तो कोई चिन्ता तक आप ने इस सवाल में व्यक्त नहीं की है। यदि आप धार्मिक व्यक्ति हैं तो खुद सोचिए इन तीन इंसानों के साथ जो गुनाह आपने किए हैं क्या आप का खुदा उन्हें माफ कर देगा? क्या वे माफ कर दिए जाने के काबिल हैं? और यदि नहीं हैं तो उस की सजा आप को क्या मिलनी चाहिए?

आप को सब से पहले तीनों से अपने रिश्ते तय करने होंगे। आप अब अपनी लिव इन वाली स्त्री के साथ किस तरह के संबंध रखने चाहेंगे। यदि आप उस से संबंध न ऱखेंगे तो क्या वह बखेड़ा नही ख़ड़ा करती रहेगी। आप को उस से माफी मांग कर उस से अपने संबंध समाप्त करने होंगे। अपनी पत्नी से भी आप को माफी मांगनी चाहिए। उस के बाद यदि वह वाकई आप को माफ कर दे तो ठीक वर्ना आप अपनी बीवी को कभी साथ नहीं रख पाएंगे और जीवन भर बीवी और बेटी के लिए भरण पोषण का खर्च देते रहने पड़ेगा।

आप ने पूछा है कि क्या आप का तलाक हो गया है? यदि आप ने एक ही स्टाम्प पेपर पर तीन जगह तलाक लिख कर भेजा है तो इसे शरीयत के मुताबिक तलाक नहीं माना जा सकता। भारतीय न्यायालयों की व्याख्या यह है कि तीनों के तलाकों के बीच में पर्याप्त अंतर होना चाहिए जिस से खाविंद और बीवी दोनों को सोचने का अवसर मिले और दोनों के बीच समझौते की बात चल सके। इस तरह यदि आप अदालत जाएंगे तो आप का तलाक अवैध माना जाएगा। इस तरह आप की बीवी अब भी आप की बीवी है। उसे वापस लाने के लिए आप को हलाला की जरूरत नहीं पड़ेगी। पर आप की समस्या का हल यही है कि आप अपनी लिव इन को छोड़ें, बीवी और बेटी के साथ न्याय पूर्वक अपना जीवन बिताएँ। इस के लिए आप को प्रयास करने होंगे। आप फिलहाल आप के दाम्पत्य जीवन की पुनर्स्थापना के लिए वाद संस्थित कर सकती हैं। जब एक बार दावा अदालत में जाएगा तो बातचीत और समझौते का मार्ग भी निकलेगा।

देश में अदालतें जरूरत की चौथाई हैं, मुकदमे के निर्णय के लिए धैर्य रखें।

rp_judge-caricather.jpgसमस्या-

आरके ने भरतपुर, राजस्थान से पूछा है-

मेरे तलाक के केस को लगभग चार साल होने को हैं, लेकिन अभी तक कुछ नही हुआ है। मैं और मेरे माता-पिता बहुत परेशान हो चुके हैं। माता-पिता बुजुर्ग हैं और उनकी देख भाल करने वाला कोई नहीं है। क्योंकि मैं सरकारी कर्मचारी हूँ इसलिए घर से दूर रहता हूँ। मेरी उम्र भी लगभग 37 वर्ष होने वाली है। तलाक का केस अवैध सम्बन्ध व मानसिक क्रूरता के कारण किया है, कोई सन्तान नहीं है। कृपया ऐसा कोई रास्ता बताये जिससे समस्याओं का समाधान हो सके। मैंने जो सी० डी० पेश की है विरोधी पक्ष ने उस CD की कॉपी प्राप्त करने हेतु कोर्ट मे एप्लीकेशन लगाई है, क्या हमें CD की कॉपी देनी पडेगी?

समाधान-

प ने क्रूरता और जारता के आधार पर तलाक का मुकदमा प्रस्तुत कर रखा है। अब उस के निपटारे में समय तो लगेगा। आप सिर्फ इतना करें कि जिस स्थानीय वकील से सलाह लेते रहे हैं उस से सलाह लेते रहें और गंभीरता से इस मुकदमे को लड़ें। आप के मुकदमे में समय इस कारण लग रहा है कि हमारे यहाँ आवश्यकता से बहुत कम, जरूत की चौथाई से भी कम अदालतें हैं। यदि सरकार आप के यहाँ एक परिवार न्यायालय और खोल दे तो जल्दी निर्णय होने लगें। जो भी परिस्थिति है उस में कुछ धैर्य रखने की तो जरूरत है। माता-पिता बुजुर्ग हैं तो उन की देखभाल के लिए कोई अन्य व्यवस्था कीजिए। विवाह इस बात की गारन्टी नहीं होता कि आप को अपने माता पिता की देखभाल के लिए स्थायी व्यक्ति मिल गया है।

आप के द्वारा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गयी सीडी भी एक तरह से दस्तावेज ही है। इस की प्रति प्रतिपक्षी को देना अनिवार्य है। आप को यह सीडी की प्रति देनी होगी। प्रत्येक व्यक्ति जो मुकदमा लड़ रहा है उसे पता होना चाहिए कि उस के विरुद्ध क्या क्या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

बिना ठोस कानूनी आधारों के बिना तलाक संभव नहीं है।

rp_judicial-sep8.jpgसमस्या-

प्रवीण ने जंजगीर चम्पा, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

मेरी शादी को मात्र 3 महीने हुए हैं। शादी के एक महीने बाद मुझे पता चला कि शादी के पहले किसी को प्यार करती थी और अभी भी करती है। उन दोनो के बीच की बात को सुन कर घृणा होने लगी। मैं अपनी बीवी को साथ नहीं रखना चाहता। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प के विवाह को अभी मात्र 3 माह हुए हैं। इस तीन माह में किसी बातचीत के आधार पर आप ने यह निष्कर्ष निकाल लिया कि आप की पत्नी को किसी लड़के से प्यार था और अब भी है और आप मात्र इस आधार पर अपनी पत्नी से घृणा करने लगे और उस के साथ नहीं रहना चाहते। आप की यह सारी बात बहुत बचकाना है।

आप ने यह नहीं बताया कि यह बातचीत आप ने कैसे सुनी? वे फोन पर बात कर रहे थे या प्रत्यक्ष रूप से बात कर रहे थे? आप के अलावा भी उस बातचीत को किसी ने सुना है या नहीं? कोई भी तथ्य आप ने सामने नहीं रखा है।

विवाह के पहले आप की पत्नी क्या करती थी और क्या नहीं करती थी इस के बारे में आप को पूरी तरह से पता कर लेना चाहिए था। आप को अपने ससुराल वालों से और होने वाली पत्नी से भी बात कर लेनी चाहिए थी। यदि वे कोई बात बताते और गलत निकलती तो आप उन्हें कुछ कह सकते थे। पर आप ने विवाह के पहले तो इस तरह का कोई प्रयत्न नहीं किया।

किसी लड़की या लड़के का किसी व्यक्ति को विवाह के पहले या या बाद में प्यार करना अपराध नहीं है और न ही विवाह का किसी तरह उल्लंघन है जिस के आधार पर उस से अलग हुआ जा सके या तलाक लिया जा सके। किसी कानून में कहीं यह नहीं लिखा है कि किसी की पत्नी या पति किसी दूसरे के साथ प्यार करे तो उस से तलाक लिया जा सकता है।  यदि पति या पत्नी किसी दूसरे पुरुष या स्त्री के साथ यौन संबंध स्थापित करे तो इस आधार पर तलाक के लिए कार्यवाही की जा सकती है और यह तथ्य साबित होने पर न्यायालय तलाक की डिक्री आप को प्रदान कर सकता है। तलाक के लिए ठोस कानूनी आधार चाहिए जिन्हें सबूतों के साथ न्यायालय के समक्ष प्रमाणित किया जा सके। लेकिन जिन तथ्यों के आधार पर आपने समस्या भेजी है उन के आधार पर तो कुछ भी नहीं किया जा सकता।

बेहतर यह है कि आप बात की तह तक जाएँ और उसे समझने का प्रयास करें। हो सकता है आप की पत्नी ने किसी व्यक्ति के साथ प्यार किया हो और उस से विवाह न हो सका हो। उस प्यार के अवशेष अब भी मौजूद हों। लेकिन अब वह आप की विवाहिता है। उसे आप के साथ ईमानदारी से जीवन निर्वाह करना चाहिए। अपने वैवाहिक जीवन को शुचितापूर्ण रीति से चलाना चाहिए। लड़कियाँ इस तथ्य को समझती हैं और विवाह के बाद जीवन को एक नए तरीके से ढालने की कोशिश करती हैं। हो सकती है उस ने अपने किसी बहिन या भाई से ही इस तरह की बत की हो और आप का संदेह पूरी तरह गलत हो। आप को पत्नी के प्रति उपजी घृणा को त्याग कर  सहृदयता पूर्वक अपने दाम्पत्य को स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।

बच्चे की अभिरक्षा उस के हितों को सर्वोपरि देख कर ही माँ या पिता को प्राप्त होगी।

rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

पवन ने हरिद्वार उत्तराखंड से पूछा  है-

मेरा विवाह नवंबर 2009  में एक पढ़ी लिखी (BA BEd पास) मेरठ उत्तर प्रदेश की रहने वाली अनामिका के साथ हिन्दू रीतिरिवाज के अनुसार हरिद्वार उत्तराखंड में संपन्न हुआ था।  वह शुरू से ही मुझे व मेरे परिवार वालों को परेशान करती थी,   शादी के दो माह बाद गर्भवती होने पर वह जिद करके मायके चली गई और वहां जाकर मुझे सूचना दिए बगेर बिना मेरी इच्छा व अनुमति के उसने अपना गर्भपात करवा लिया। इसके बाद कुछ समय ठीक चला लेकिन दिसम्बर 2010 मायके जाकर अपने के पिता के घर से उसने दहेज़ मांगने व दहेज़ के लिए परेशांन करने का आरोप लगाते हुए एक पत्र मेरे पिताजी के पास भेजा था जिसकी एक एक  नक़ल महिला आयोग उत्तराखंड ,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार व समाचार पत्र को भेजनी बताई थी। मैंने तब वकील की सलाह पर तलाक  का एक वाद स्थानीय परिवार न्यायालय में दायर कर दिया था।  लेकिन कुछ समय बाद ही एक मध्यस्थ के माध्यम से समझौते के बाद मेरी पत्नी घर आकर मेरे माता पिता से अलग रहने लगी तलाक के केस में कोई कार्यवाही नहीं हुई थी।  दिसम्बर 2011 में हमारे बेटा होने के बाद मेरी पत्नी फिर मेरे साथ बुरा व्यवहार करने लगी व मुझे मरने मारने की धमकी देने लगी। वह मेरे व मेरे बेटे का कोई ख्याल नहीं रखती थी, केवल टीवी आदि  में लगी रहती थी। घर की शांति के लिए मैं सब कुछ सहता रहा। इसके बाद उसने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया तथा बेटे को मेरे या मेरे माता पिता के पास सुबह सात बजे से रात के दस बजे तक छोड़ कर मस्त रहने लगी। लेकिन केवल तीन माह में ही उसने नौकरी छोड़ दी। अगस्त 2014 से अप्रैल 2015 के बीच वह कई बार मेरे कार्यस्थल में लड़ाई झगडे करने के लिए गई और वहां उपस्थित मेरे सहयोगियों व बाहरी व्यक्तियों के सामने मुझसे गाली गलौज की और सितम्बर 2014 में महिला हेल्प लाइन हरिद्वार में उसने मेरे विरुद्ध शिकायत कर दी कि मैं ध्यान नहीं रखता हूँ व उसे जरुरी सामान नहीं लाकर देता हूँ। महिला हेल्प लाइन में मुझे व उसको समझा बुझा कर केस समाप्त कर दिया। इसके बाद 7 अप्रैल 2015 में मुझे परेशान करने के लिए महिला हेल्प लाइन में फिर से उसी प्रकार की शिकायत कर दी। 20 दिनों तक मुझे वहा बुलाया गया लेकिन परिणाम इसकी इच्छा के मुताबिक न होने पर इसने  हेल्प लाइन में यह कह कर की आगे की कार्यवाही मैं अपने मायके मेरठ से करुँगी ये केस बंद हो गया। 30 अप्रैल को वह मेरे बेटे रुपेश को लेकर मेरे घर से मेरी अनुपस्थिति में कमरों में ताले लगा कर चली गईं। मेरा बेटा प्री नर्सरी पढ़ चुका था और उसका एडमिशन LKG में करवा दिया था। पर सब बेकार गया वह मुश्किल से 6 दिन स्कूल गया और उसकी माँ उसे लेकर चली गई। उसने मेरा फोने उठाना भी बंद कर दिया, फिर मैंने रुपेश की तबियत व स्कूल में अनुपस्थिति व नाम काटने की चिंता जताते हुए Whatapp पर मेसेज भी भेजे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला और उसने मुझे ब्लोक कर दिया। मैं मजबूर होकर चुप बैठ गया क्योंकि उसके पिता इंडियन आर्मी के बहुत बड़े अफसर है और वे मुझे कई बार गली गलौज तथा मारने की धमकी दे चुके हैं। मेरी पत्नी 1 साल 3  माह से बेटे के साथ  मायके में है अब मैं अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता हूँ और बेटे की कस्टडी लेना चाहता हूँ।|   मेरे प्रश्न ये हैं 1. क्या मैं उन कमरों के ताले तोड़ कर उन्हें इस्तेमाल कर सकता हूँ?

  1. मैं अपने बेटे से मिलना चाहता हूँ तो में क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाऊँ जिससे मैं अपने बेटे से हर महीने मिल सकूँ। क्योंकि मेरा अपनी पत्नी और उसके घरवालो से कोई संवाद नहीं है न ही कोई बीच में बात करने वाला बिचौलिया है?
  2. मुझे मेरे बेटे जिसकी उम्र 4 वर्ष 9 माह है की कस्टडी कैसे ले सकता हूँ?
  3. मैं अपनी पत्नी से कैसे तलाक ले सकता हूँ?
  4. क्या मेरी पत्नी अब भी मेरे या मेरे परिवार पर 498(A), घरेलू हिंसा, या कोई अन्य केस फाइल कर सकती हे जेसे उसको गये हुए 1 साल से ऊपर हो गया है?

समाधान-

प की समस्या का हल तो तलाक ही है। तलाक लेने के लिए आप को आधार चाहिए। एक आधार तो यही है कि वह एक वर्ष से अधिक से आप से अलग निवास कर रही है। इस के अतिरिक्त जो कुछ उस ने किया है वह क्रूरता की श्रेणी में आता है। इस कारण दो मजबूत आधार आप के पास हैं। आप किसी भी वकील से मिल कर उन्हें तथ्य बता कर और आपसी विचार विमर्श करते हुए तलाक का एक मजबूत मुकदमा प्रस्तुत कर सकते हैं। इसी मुकदमे को पेश करने के उपरांत आप उसी न्यायालय में हर माह अपने बेटे से मिलने और उस की कस्टडी के लिए आवेदन कर सकते हैं।

बच्चे की कस्टड़ी का आधार बच्चे का हित होता है। इस के लिए आप को यह साबित करना होगा कि बच्चे का हित उस की माँ के साथ नहीं बल्कि आप के साथ है और उस की माँ उस की परवरिश ठीक से नहीं कर पा रही है। यदि आप यह साबित कर सके तो आप को पुत्र की कस्टड़ी मिल जाएगी।

कोई भी मुकदमा करने के लिए कुछ नहीं करना पड़ता है। आप वकीलों से जा कर कहें दीजिए कि मुझे फलाँ व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा करना है, उसे परेशान करना है। तो आप को कुछ वकील तो ऐसे भी मिल जाएंगे जो पूरी कहानी और तथ्य खुद गढ़ लेंगे। इस कारण यह बिलकुल नहीं कहा जा सकता कि आप की पत्नी आपके विरुद्ध कौन से मुकदमे कर सकती है या करेगी। वह किसी भी तरह का मुकदमा आप के विरुदध कर सकती है। हाँ आप ने इस तरह के मुकदमों में पैरवी ठीक से कराई और सतर्क रहे तो किसी मुकदमे में आप की पत्नी को सफलता प्राप्त नहीं होगी।

 

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