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प्रत्येक पक्षकार को दावे की सूचना होना जरूरी है।

समस्या-

मनोज ने बांसवाडा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरी माँ ने अपने स्वर्गीय पिता की कृषि भूमि पर अपना उतराधिकार का दावा कर रखा है। कोर्ट ने मेरी माँ की अन्य बहनों को नोटिस भेजा है, उनको भी दावा करने हेतु हिदायत दी है ताकि एक एक करके न आये और केस में लम्बी प्रक्रिया ना हो। दो बार नोटिस भेजे गये हैं लेकिन उन्होंने कोर्ट में अपनी उपस्थिति नहीं दी। दो नोटिस भेजने में 2 साल हो गए हैं। वैसे में ये जानना चाहता हूँ कि कानूनन रूप से कितनी बार नोटिस भेजा जाता है? और अन्य क्या प्रक्रिया करने के बाद, कोर्ट स्वतंत्र रूप से उनकी गैर हाजरी में अपना फैसला सुना सकता है?

समाधान-

किसी भी मुकदमे में सभी संबंधित लोगों को पक्षकार बनाना जरूरी होता है जिन का हित प्रभावित होने वाला हो। आप की माताजी के इस मुकदमे में उन के पिता के सभी उत्तराधिकारियों को पक्षकार बनाना जरूरी था क्यों कि माताजी के पिताजी की संपत्ति का बंटवारा सभी उत्तराधिकारियों के मध्य होना है। इस के लिए सभी को दावे का समन भी भेजा जाना जरूरी है और इस समन का सभी पक्षकारों को मिलना भी जरूरी है।

आम तौर पर समन एक ही बार भेजा जाता है। यदि समन के संबंध में कोर्ट को यह रिपोर्ट प्राप्त हो कि समन संबंधित व्यक्ति ने प्राप्त कर लिया है या उसे सम्यक प्रकार से समन और दावे की सूचना मिल गयी है तो दुबारा समन नहीं भेजा जाता है। इस तरह यह आवश्यक है कि समन जिस व्यक्ति को भेजा गया है उसे मिल जाए और उस की सूचना भी पर्याप्त रूप से न्यायालय को मिल जाए। जब तक समन संबधित व्यक्ति को नहीं मिलता है तब तक यह प्रक्रिया चालू रहती है। एक बार प्रतिवादी को समन मिल जाने पर यदि वह अदालत में उपस्थित नहीं होता है तो अदालत उस के विरुद्ध एक तरफा कार्यवाही कर सकती है। एक तरफा कार्यवाही हो जाने पर उपस्थित पक्षकारों की साक्ष्य प्राप्त कर निर्णय किया जाता है।

प्रतिवादी को उस के नियोजक के माध्यम से समन की तामील कराई जा सकती है।

समस्या-law

अंकित गुप्ता ने बनीपार्क, जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मैंने अपने परिचित के जानकार वाले को १००,०००/- रूपये दिए थे, जिसका नाम पुष्पेन्द्र था। वह समय आने मुझे पैसे देने में आनाकानी कर रहा था। विवश होकर मुझे उस पर न्यायालय में वाद करना पड़ा। वह एक स्कूल में सरकारी कर्मचारी था, पर अब वह अपने निवास स्थल पर नहीं रहता है। वह वहाँ से मुझे बिना बताये कहीँ दूसरी जगह निकल गया है। समस्या यह है कि वह अपनी स्कूल में भी नहीं जाता, जिस से मैं उसे पकड़ सकूँ और समन की तामील करा सकूँ। वह सरकारी कर्मचारी है फिर भी कोर्ट मुझे ही तामील करवाने के लिए कह रहा है। बिना पते के मैं सम्मन तामील कैसे करवाऊँ। मुझे कुछ उपाय बताइये कि मैं उस सरकारी कर्मचारी का पता प्राप्त कर सकूँ।

समाधान-

प ने जिस के विरुद्ध दावा किया है उसे आप ही जानते हैं। आप को ही बताना होगा कि वह कौन व्यक्ति है जिस से आप को रुपए वापस लेने हैं। जब वह आप को ही नहीं मिल रहा है तो अदालत का तामील कराने वाला कर्मचारी भी उसे कहाँ से तलाश करेगा? इस कारण उस व्यक्ति का पता तो आप को ही मालूम करना पड़ेगा।

ह व्यक्ति जिस स्कूल में नौकरी करता था उस स्कूल में जा कर पता करिए कि वह अब भी नौकरी में है या नहीं। यदि नौकरी में है तो उस का पदस्थापन कहाँ है। यदि आप को उस के पदस्थापन का पता लग गया तो वहाँ जा कर आप उसे तलाश कर के तामील करवा सकते हैं।

दि आप को पूरा पता है कि वह किसी स्कूल में नौकरी करता है तो उस स्कूल के प्रधानाध्यापक के माध्यम से भी उसे समन की तामील कराई जा सकती है। इस के लिए आप न्यायालय को आवेदन कर सकते हैं कि प्रतिवादी जिस स्कूल में नौकरी करता है उस के प्रधानाध्यापक के माध्यम से उसे समन की तामील कराई जाए।

नोटिस लेने से इन्कार करना उसे प्राप्त करने के समान है।

noticeसमस्या-
पूनम सिंह ने भोपाल मध्य प्रदेश से पूछा है-

रेलू हिंसा और भरण पोषण के मामले में विपक्षी नोटिस लेने से बार बार इन्कार करे तो क्या करना चाहिए?

समाधान-

प ने यह नहीं बताया कि आप किस तरह के नोटिस की बात कर रही हैं? क्या आप ने मामले में न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर दिए हैं? या फिर आवेदन प्रस्तुत करने के पूर्व आप विपक्षी को नोटिस दे रही हैं जिन्हें वह न ले कर वापस लौटा देता है?

दि आप ने कोई विधिक नोटिस स्वयं दिया है या किसी वकील से दिलाया है जिसे  पंजीकृत डाक से भेजा गया है तो ऐसे नोटिस को लेने से इन्कार कर देना भी उसे लेने के समान ही है। आप नोटिस पर लिखे गए नोट के आधार पर कि प्राप्तकर्ता ने लेने से इन्कार किया नोटिस को प्राप्त किया हुआ मान कर न्यायालय में अपना आवेदन संस्थित कर सकती हैं।

लेकिन आप ने घरेलू हिंसा अधिनियम अथवा भरण पोषण के लिए कोई आवेदन संस्थित कर दिया है और न्यायालय द्वारा प्रेषित नोटिस या सम्मन लेने से इन्कार कर दिया गया है तो न्यायालय भी उस नोटिस या सम्मन को तामील किया हुआ मान कर आप के आवेदन पर आगे कार्यवाही आरंभ कर सकता है।

प्रतिपक्षी के नोटिस की तामील से बचने पर प्रतिस्थापित तामील कराने को आवेदन प्रस्तुत करें

समस्या –

सिरोही, राजस्थान से मांगीलाल चौहान ने पूछा है –

मैं ने अपनी पत्नी से विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त करने के लिए आवेदन कर दिया है।  पत्नी को पहला नोटिस 16 फरवरी 2013 को भेजा था जिसे उस ने नहीं लिया। वह कोर्ट में आने से मना कर रही है। इस तरह उस को चार नोटिस गए हैं लेकिन उस ने लेने से मना कर दिया है। अब मुझे क्या करना चाहिए कि वह कोर्ट में हाजिर हो जाए।

समाधान-Service of summons

प की बात में कुछ तो गड़बड़ है। आप की पत्नी ने नोटिस लेने से मना किया है तो जो नोटिस वापस लौटा है उस पर लिखा होना चाहिए कि अप्रार्थी ने नोटिस लेने से मना किया और उस पर गवाहों के हस्ताक्षर होने चाहिए। जो व्यक्ति नोटिस देने गया था उसे नोटिस को उस के निवास पर चस्पा कर के गवाहों के हस्ताक्षर कराने चाहिए थे। यदि न्यायालय को यह विश्वास हो जाता कि नोटिस की जानकारी आप की पत्नी को हो चुकी है तो वह आप की पत्नी के विरुद्ध एक तरफा सुनवाई करने का आदेश पारित कर देता। आप को स्पष्ट पता करना चाहिए कि जो नोटिस लौट कर आ रहा है उस पर क्या लिखा आ रहा है? हो सकता है उस पर यह लिखा आ रहा हो कि जब नोटिस देने जाते हैं तो वह घर पर नहीं मिलती।

प अपने वकील को कहें कि नोटिस की तामील ठीक से करवाई जाए। यदि एक बार नोटिस की तामील के बाद पत्नी न्यायालय में नहीं आती है तो एक तरफा कार्यवाही हो कर आप की व गवाहों की गवाही ली जा कर एक तरफा निर्णय हो जाएगा।

दि पत्नी जानबूझ कर नोटिस लेने से बच रही है तो अपने शपथ पत्र के साथ आवेदन प्रस्तुत करें कि वह नोटिस की तामील से बच रही है इस कारण से प्रतिस्थापित तामील कराई जाए। न्यायालय द्वारा प्रतिस्थापित तामील का आदेश देने पर नोटिस आप के खर्चे पर स्थानीय अखबार जो आप की पत्नी के निवास के स्थान पर आम तौर पर जाता है उस में प्रकाशित करा दिया जाएगा और अगली पेशी पर तामील हो कर एक तरफा कार्यवाही के लिए आदेश दे दिया जाएगा।

चैक बाउंस के मुकदमे में समन और वारंट की तामील पुलिस ही कराएगी, लेकिन परिवादी को शुल्क के साथ आवेदन देना होता है।

समस्या-

दिल्ली से शारदा ने पूछा है –

मैं ने एक परिवाद धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम के अंतर्गत प्रस्तुत किया है। अब अभियुक्त को समन कोर्ट भेजेगी या मुझे भेजना होगा?

Code of Criminal Procedure
समाधान-

प ने जो परिवाद प्रस्तुत किया है उस पर जो कार्यवाही आरंभ हुई है वह अपराधिक प्रकृति की है और दंड प्रक्रिया संहिता के अनुसार ही समस्त कार्यवाही होगी। पहले आप को शपथ पत्र प्रस्तुत कर के अपने परिवाद के तथ्यों को साबित करना होगा। तब न्यायालय आप के परिवाद पर प्रसंज्ञान ले कर अभियुक्त को समन से बुलाने का आदेश करेगा। तब आप को समन जारी करने के लिए आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करना होगा। जिस पर मामूली न्यायशुल्क लगेगा। तब न्यायालय अभियुक्त व्यक्ति के लिए समन जारी करेगा। इस समन को पुलिस द्वारा अभियुक्त को पहुँचाया जाएगा। यह हो सकता है कि अभियुक्त किसी दूरस्थ स्थान पर रहता हो तो न्यायालय आप को समन दस्ती देने का आदेश दे दे। तब भी समन आप को एक बंद लिफाफे में सिर्फ इतना करने के लिए दिया जाएगा कि आप उसे उस पुलिस थाने तक पहुँचा दें जिस के अंतर्गत अभियुक्त रहता है।

ब तक अभियुक्त को समन प्राप्त नहीं हो जाता है तब तक आप को समन जारी करने के लिए हर पेशी पर समन जारी करने का आवेदन शुल्क सहित देना पड़ सकता है। यदि समन मिलने पर भी अभियुक्त उपस्थित नहीं हो तो उसे जमानती या गिरफ्तारी वारंट से बुलाए जाने का आदेश न्यायालय दे सकता है। तब भी वारंट जारी करने के लिए सशुल्क आवेदन आप को ही देना होगा। लेकिन वारंट की तामील पुलिस ही कराएगी। वही अभियुक्त को गिरफ्तार कर के न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

दावे के समन अखबार में प्रकाशन के माध्यम से कैसे तामील कराएँ?

समस्या-

कृषि भूमि के विभाजन के मुकदमें में प्रतिवादियों को समन अखबार में प्रकाशन के माध्यम से तामील कराने के लिए क्या करना पड़ेगा और इस में कितना खर्च आएगा?

-विनोद कुमाँवत, गुढ़ा गौरजी, जिला झुंझुनू, राजस्थान

समाधान-

किसी भी दीवानी वाद में या राजस्व भूमि के वाद में प्रक्रिया दीवानी प्रक्रिया संहिता से शासित होती है।  कृषि भूमि के विभाजन के वाद में भी दीवानी प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार प्रतिवादियों पर समन की तामील कराई जाएगी।  इस के लिए दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 में उपबंध किए गए हैं।  आम तौर पर न्यायालय समन की तामील पहले अपने अधीनस्थ कर्मचारी से अथवा किसी अन्य न्यायालय के अधीनस्थ कर्मचारी से करवाती है।  यदि यह संभव नहीं हो पाता है तो रजिस्टर्ड ए.डी डाक के माध्यम से करवाती है। यदि डाक द्वारा भी यह संभव नहीं होता है तो फिर प्रतिस्थापित तामील करवाती है जिस के लिए आदेश 5 नियम 20 में उपबंध किया गया है।

स के लिए वादी को एक आवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होता है कि प्रतिवादीगण जानबूझ कर तामील से बच रहे हैं और सामान्य रीति से व डाक द्वारा तामील कराया जाना संभव नहीं हो रहा है इस लिए समन को अखबार में प्रकाशित करवा कर प्रतिस्थापित तामील कराए जाने की अनुमति प्रदान की जाए।  न्यायालय द्वारा इस आवेदन पर आदेश दिया जाता है कि वादी किसी खास अखबार में प्रकाशन के माध्यम से समन की तामील प्रतिवादियों पर करवा सकता है। इस आदेश के उपरान्त समन के फार्म  न्यायालय के समक्ष निश्चित न्यायशुल्क जो कि राजस्थान में मात्र दो रुपया है के साथ प्रस्तुत किए जाते हैं।  न्यायालय समन को हस्ताक्षर कर मुहर लगा कर वापस वादी या उस के वकील को लौटा देता है।  इस समन को जिस अखबार में प्रकाशन के लिए न्यायालय ने आदेश दिया है उसे देना पड़ता है।  सभी अखबारों की इस तरह के न्यालायय के समन और नोटिस प्रकाशित करने की दरें निश्चित हैं जो उस अखबार के दफ्तर या फिर उस के एजेंट से पता की जा सकती हैं।  इस दर के अनुसार निश्चित राशि का भुगतान कर के समन का अखबार में प्रकाशन करवाया जा सकता है। इस प्रकाशन के उपरान्त भी प्रतिवादी न्यायालय में उपस्थित नहीं हों तो उन के विरुद्ध न्यायालय की कार्यवाही एक-तरफा आगे बढ़ाई जा सकती है।

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