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पड़ौसी के प्लास्टर करने से रोकने पर दीवानी न्यायालय से व्यादेश प्राप्त किया जा सकता है।

House constructionसमस्या-

राजेश वर्मा ने ग्राम पोस्ट पिपरौली बड़ा गाँव जिला बलिया, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरा एक नया मकान बना है ! मेरे मकान के पीछे का जो दीवार है. वो मेरे पाटीदारों के छत से लगा हुआ है। मुझे अपने पीछे की दीवार को प्लास्टर करना है, क्योंकि जब बारिश होता है तो बारिश का पानी दीवार के सहारे मेरे घर में आता है इसलिये  मै अपने छत का प्लास्टर  कराना  चाहता  हूँ! लेकिन मेरे पाटीदार वाले मुझे अपने छत पर चढने से रोक रहे हैं और मारने की धमकी देने लगते हैं कृपया मुझे उचित सलाह दें।

समाधान-

सा अक्सर होता है। जब कोई नया मकान बनाता है तो पड़ौसियों को परेशानी होती है। वे बताते हैं लेकिन उस परेशानी को मकान बनाने वाला भी कम नहीं कर सकता। नतीजा ये होता है कि पड़ौसी होते हुए भी आपसी संबंध ऐसे ही तनावपूर्ण हो जाते हैं। अभी तो बरसात निकल गयी है इस कारण सीलन आने की संभावना तो छह आठ माह के लिए नहीं है। यदि संभव हो तो आप उस मकान में जा कर रहने लगें। आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने का प्रयत्न करें। यह कर सके तो चार माह बाद वे आप को प्लास्टर करने से मना नहीं करेंगे।

यदि फिर भी मना करें तो पहले उन्हें वकील के माध्यम से नोटिस दिलाएँ, फिर दीवानी वाद दायर कर न्यायालय से व्यादेश (Injunction) जारी कराएँ कि वह आप को प्लास्टर करने दे। इस आदेश के बाद उसे प्लास्टर करने देना होगा। यदि मारने की धमकी देता है तो पुलिस में तुरन्त रिपोर्ट दर्ज कराएँ।

नगरपालिका अधिनियम में होने वाले अपराधोें का अभियोजन न होने से ये अपराध लोग धड़ल्ले से करते हैं।

rp_lawyer-22.pngसमस्या-

विजय जसूजा ने श्री विजयनगर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मारे घर के साथ एक खाली प्लाट है जिस के मालिक उस में अपने जानवर रखते हैं और डेयरी फार्म चलाते हैं। उन के अपशिष्ट (गोबर) को वे हमारे घर की हमारी खुद की बनाई हुई दीवार के साथ इकट्ठा करते हैं जिस से हमारे सारे घर में सीलन पैदा हो गयी है और दीवार भी गिरने जैसी हो रही है। प्लाट के मालिक ने हम से बाद में वो प्लाट खरीदा है और वह कहता है कि आप की दीवार मेरे प्लाट की 5 इंच जगह में है और जानवर की अपशिष्ट नहीं उठा रहा है। नगर पालिका में भी आवेदन दिया है पर वो कहते हैं कि कोई अपने प्लाट में कुछ भी करे हम उन्हें ऐसा करने से नहीं रोक सकते। कृपया बताएँ कि प्लाट के मालिक को कैसे रोका जा सकता है कि वह हमारी दीवार को नुकसान नहीं पहुँचाए।

समाधान-

प का घर पडौसी के भूखंड के बीच का मामला है जिस पर नगर पालिका को कोई अधिकार नहीं है। वह व्यक्ति अपने भूखंड को अपने हिसाब से उपयोग में ले रहा है जिस में नगर पालिका का कोई दखल नहीं है। लेकिन संभवतः नगरपालिका को अपने अधिकारों का ही पता नहीं है। यदि कोई व्यक्ति नगर में व्यापार के उद्देश्य से पशुपालन करता है तो उसे उस का लायसेंस लेना अनिवार्य है जो कि नगरपालिका अधिनियम की धारा 251 के अन्तर्गत आवश्यक है। इस धारा के अन्तर्गत नगर पालिका बिना लायसेंस के डेयरी का काम करने वाले के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर सकती है और उसे दंडित करवा सकती है।

किन्तु राजस्थान में नगरपालिकाओं ने नगर पालिका अधिनियम के अंतर्गत वर्णित अपराधों के लिए अभियोजन चलाने का काम बन्द ही कर रखा है। जिस के कारण ये सारे अपराध लोग धड़ल्ले से करते हैं। आप को चाहिए कि आप नगरपालिका को एक विधिक नोटिस दें कि वे आप के पड़ौसी को बिना लायसेंस डेयरी चलाने के अपराध में अभियोजित करें और उस डेयरी को बन्द कराएँ। यदि नगरपालिका आप के नोटिस पर कार्यवाही नहीं करती है तो आप इस के लिए अपने पडौसी और नगर पालिका दोनों के विरुद्ध नोटिस दिए जाने के दो माह के उपरान्त दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

ड़ौसी अपने प्लाट पर कुछ भी कर सकता है, लेकिन वह ऐसा कोई कृत्य नहीं कर सकता जिस से आप को या आप की संपत्ति को हानि हो। ऐसा कृत्य दुष्कृत्य है। आप इस के लिए अपने पड़ौसी के विरुद्ध हर्जाने का दावा कर सकते हैं साथ ही दुष्कृत्य को रोके जाने के लिए अस्थाई और स्थाई निषेधाज्ञा भी प्राप्त कर सकते हैं। इस मामले में आप किसी स्थानीय वकील से सलाह ले कर उचित कार्यवाही कर सकते हैं।

कब्जे से बेदखली की आशंका होने पर न्यायालय से निषेधाज्ञा जारी कराई जा सकती है।

court-logoसमस्या-

चन्दन गिरी ने ग्राम भैरोंताल, कटघोरा, कोरबा, छत्तीसगढ से समस्या भेजी है कि-

दिए गए पते पर मैं निवास करता हूँ | यहाँ मेरे बाबा आये थे जो कि बिहार के स्थाई निवासी थे। यहाँ हम लोग 1980 से निवास कर रहे हैं | यह जमीन यहाँ के स्थाई निवासी(महेशराम) की थी। जिस ने बाबा को यहाँ निवास करने की अनुमति दी थी| यहाँ की अधिकतर जमीन को कोल इंडिया ने खरीद लिया है परन्तु यह अभी तक पता नहीं है कि इस जमीन का भू स्वामित्व किस के नाम पर है पर महेशराम के पुत्र इस जमीन को अपना बताते हैं| हम यहाँ 1991 में बाढ़ के बाद कच्चा घर बनाकर निवास कर रहें थे | घर की जर्जर हो जाने के बाद अब उसे पक्का मकान बनाया है | यह लगभग 900 स्कवायर फीट है | अब महेशराम के पुत्र इस घर को तोड़ दिए जाने की धमकी तथा थाना में केस करने की धमकी दे रहे हैं | हमें क्या करना चाहिए? क्या हम इस सन्दर्भ में क़ानूनी मदद ले सकते हैं?

समाधान-

प का उक्त भूमि पर 1980 से निवास है। अर्थात आप का कब्जा उक्त भूमि पर विगत 35 वर्षों से है। इस बीच किसी ने भी उस भूमि पर अपना स्वामित्व प्रदर्शित नहीं किया है। आप को कुछ दस्तावेजी सबूतों से अपने इस लंबे कब्जे को साबित करना होगा कि आप 1980 से इस स्थान पर काबिज हैं। उस के बाद कोई भी आप को वहाँ से नहीं हटा सकेगा। किसी भी भूमि के स्वामित्व का प्राथमिक सबूत उस का कब्जा है। यदि कोई इस के विपरीत प्रमाणित करता है तो वह उस कब्जे को हटा कर अपने स्वामित्व को पुनर्स्थापित कर सकता है। लेकिन कानूनन कब्जा हटाने को ले कर केवल 12 वर्ष की अवधि में ही दीवानी वाद प्रस्तुत किया जा सकता है। इस कारण यदि आप का कब्जा हटाने के लिए कोई कानूनी कार्यवाही की जाती है तो वह विफल हो जाएगी।

प के विरुद्ध पुलिस में रपट लिखाने और जबरन आप को बेदखल करने की धमकी दी जा रही है। यह एक अपराध है और आप को इस अपराध की रिपोर्ट खुद पुलिस को देनी चाहिए। जिस से ऐसे लोगों के विरुद्ध पुलिस कार्यवाही कर सके।

स के अतिरिक्त आप लंबे कब्जे के आधार पर ऐसे लोगों के विरुद्ध न्यायालय से स्थगन प्राप्त कर सकते हैं कि ये लोग आप को वहाँ से बिना किसी कानूनी कार्यवाही के बेदखल न करें। इस के लिए आप को स्थाई निषेधाज्ञा के लिए दीवानी वाद प्रस्तुत करना होगा तथा वाद के लंबित रहने की अवधि के लिए अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करने के लिए अलग से एक आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इस के लिए आप को अपने क्षेत्र के दीवानी मामलों के अच्छे वकील से संपर्क कर के उस की प्रोफेशन सेवाएँ प्राप्त करनी चाहिए।

अवेैध, अनियमित और सुखाधिकार में बाधा उत्पन्न करने वाले निर्माण को निषेधाज्ञा से रुकवाया जा सकता है।

lawसमस्या-

कृष्णा नायडू ने कोरबा, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

मेरे घर के सामने मंदिर है और फिर बाद में उसके बगल में स्टेज बना दिया। फिर अब स्‍टोर रूम बना रहे हैं मेरा घर पूरी तरह से दब गया है। स्टेज निर्माण में मेरी सहमति थी, पर स्टोर के लिये नहीं। बस्ती वालों की एक समिति है जिनका कहना है कि विधायक निधि से निर्माण कराया गया है मैं क्या करूँ? उपाय बतायें।

समाधान-

ब तक तो स्टोर रूम बन चुका होगा। आप को उस स्टोर रूम के निर्माण से परेशानी है और उस से आप की हवा, पानी, रोशनी, मार्ग आदि का सुखाधिकार प्रभावित होता है तो आप निषेधाज्ञा का दीवानी वाद प्रस्तुत उस निर्माण पर रोक लगाने हेतु अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर सकते थे। वैसे भी निर्माण आदि के लिए नगरपालिका की अनुमति नहीं ही ली गई होगी।

प चाहें तो निर्माण होने के बाद भी उसे हटाने के लिए आज्ञात्मक निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत कर सकते हैं। यदि आप साबित कर सके कि इस स्टोर रूम का निर्माण अवैध रूप से नगरपालिका के निर्माण के नियमों के विरुद्ध किया गया है या आप का कोई सुखाधिकार इस से प्रभावित होता है तो उस स्टोर रूम को हटाए जाने का आदेश न्यायालय दे सकता है।

दुकान के सामने का अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम के विरुद्ध वाद प्रस्तुत करें

Shopsसमस्या-

विशाल ने इन्दौर, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

गर की मुख्य सड़क पर कॉर्नर की दो दुकानें भूतल व प्रथम तल पर मेरे स्वामित्व की हैं। पिछले एक वर्ष से एक पान वाले ने गुमटी लगा कर मेरा कार्नर कवर कर लिया है। वह दादागिरी दिखाता है और बात करने जाओ तो बद्तमीजी करता है, भीड़ इकट्ठी कर लेता है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प अपनी दुकान के स्वामी हैं। आप की दुकानें मुख्य सड़क पर खुलती हैं। आप की दुकानों के सामने जिस पान वाले ने अपनी गुमटी लगाई है वह निश्चित रूप से नगर निगम की सड़क/ जमीन पर अतिक्रमण होना चाहिए। आप उस से आग्रह कर के गुमटी हटाने के लिए कह रहे हैं। निश्चित रूप से जब उस ने गुमटी लगाई होगी तो यह भी विचारा होगा कि आप उसे हटने के लिए कहेंगे और यह भी कि नगर निगम भी उस की गुमटी को हटा सकता है। इस के उपाय भी उस ने सोच रखे होंगे। आप से बद्तमीजी करना और भीड़ इकट्ठी कर लेना वही सोचा समझा उपाय है। नगर निगम में भी उस ने बाबुओं, अफसरों और नेताओं से भी अपनी सेटिंग कर रखी होगी। इस कारण हो सकता है वहाँ भी आप की सुनवाई न हो।

लेकिन आप की समस्या का आरंभिक उपाय यही है कि आप नगर निगम को आवेदन करें कि आप की दुकान के सामने गुमटी लगा कर अतिक्रमण किया गया है जिस से आप को परेशानी हो रही है। आप को होने वाली परेशानियाँ विस्तार से लिखें और उस गुमटी के अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रार्थना करें। यदि नगर निगम उस पर कार्यवाही कर उस गुमटी को हटा देता है तो बहुत ठीक है। लेकिन वह कोई कार्यवाही नहीं करता है तो किसी वकील के माध्यम से आप नगर निगम को पालिका अधिनियम के अन्तर्गत लीगल नोटिस दें कि नगर निगम इस अतिक्रमण को नहीं हटाता है तो वे नगर निगम और गुमटी वाले के विरुद्ध दीवानी न्यायालय में दावा करेंगे।

नोटिस की अवधि समाप्त होने पर नगर निगम और गुमटी वाले को पक्षकार बनाते हुए घोषणा और स्थाई आदेशात्मक निषेधाज्ञा का दीवानी वाद संस्थित करें जिस में प्रार्थना करें कि न्यायालय नगर निगम को आदेश दे कि वह उस गुमटी को हटाए।

गलत निर्माण को रोकने या हटाने के लिए निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत करें

House demolishingसमस्या-

गोविन्द गौतम ने खजुराहो, छतरपुर, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

किसी व्यक्ति द्वारा जबरन मेरी ज़मीन पर छत का छज्जा निकाला जाता है तो ऐसी स्थिति में मैं क्या कर सकता हूँ? पहले से पडौसी के पास दो दो दरवाज़े हैं फिर भी जबरन हमारी जमीन की तरफ तीसरा दरवाज़ा करना उस जगह दूसरे की ज़मीन आती है, वह भी परेशान है तो हम ऐसी स्थिति में क्या करें?

समाधान-

गरीय क्षेत्र में किसी भी आवासीय भूखंड पर निर्माण नगरपालिका या नगर विकास न्यास से बिना मानचित्र स्वीकृत कराए तथा अनुमति प्राप्त किए बिना नहीं किया जा सकता। नगर पालिका इस तरह के निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रदान नहीं करती है जिस से पड़ौसियों को परेशानी हो या उन के अधिकारों का अतिक्रमण हो। ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह का निर्माण किया जाए तो ग्राम पंचायत इसे रोक सकती है। इस तरह के निर्माण के विरुद्ध सब से आसान तरीका यह है कि जिसे परेशानी हो रही है उसे नगरपालिका अथवा ग्राम पंचायत को शिकायत करनी चाहिए। नगर और ग्राम में व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार इन संस्थाओँ को उचित कार्यवाही करनी चाहिए। लेकिन समस्या यह है कि इस तरह के निर्माण नगर पालिका और ग्राम पंचायत द्वारा उचित कार्यवाही समय पर नहीं करने के कारण ही होते हैं।

दि ऐसा कोई भी निर्माण होने की आशंका हो तो जिस से किसी को परेशानी हो रही हो या फिर किसी के अधिकारों का अतिक्रमण होने वाला हो तो वह सीधे न्यायालय में अस्थाई निषेधाज्ञा के लिए वाद प्रस्तुत कर उसी वाद में अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर सकता है और न्यायालय से ऐसे कार्य को रोके जाने के लिए आदेश जारी करा सकता है। यदि ऐसे निर्माण का कोई भाग या निर्माण पूरा कर लिया गया हो तो आज्ञात्मक निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत करना चाहिए जिस में यह राहत चाही गई हो कि इस तरह का निर्माण वैध नहीं है और इस से आवेदक के अधिकारों का अतिक्रमण हो रहा है। न्यायालय ऐसे मामलों में हो चुके निर्माण को हटाने रास्ते, दरवाजे, खिड़की और पनाले को बन्द करने का आज्ञात्मक आदेश दे सकती है और उस आदेश का पालन करवा सकती है।

डर छोड़ें, निषेधाज्ञा प्राप्त करें और निर्माण कार्य चालू करें ।

Farm & houseसमस्या-

जगदीश ने गाँव जनई, जिला रायबरेली, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

गाँव में हमारा एक भूखंड 0.61 हैक्टर का है, जिसके साथ मेरे पडोसी हीरालाल जी काकच्चा मिट्टी का मकान है। मैं अपनी जमीन के कुछ हिस्से पर निर्माण कार्यकरना चहता हूँ। मेरे पडोसी अपनी दीवार के साथ 10 फीट छोड कर निर्माण कार्यकरने के लिये कहते हैं। मैं 3से 4 फीट छोडने के लिये तैयार हूँ। इसी बात काविवाद है जिस के कारण फौजदारी पर आमादा होते हैं, जान से मारने की धमकी देते हैं। मैंतहसील से आदेश पत्र ले कर आया। राजस्व विभाग के अधिकारी कानूनगो और लेखपालने मौके पर जाकर जाँच की  और विपक्षीगण को समझाया कि प्रार्थी केनिर्माण कार्य में नाजायज हस्ताक्षेप न करें। ये जमीन प्रार्थी के नाम दर्ज है।फिर भी विपक्षीगण नहीं माने और जाँच करने के बाद तहसीलदार महोदय ने लिखितआदेश पुलिस कार्यवाही करने का दिया। पुलिस अधिकारियों के कहने पर भी पडोसी नहीं माने। SDM के अदेश पर सीमा ज्ञान करवाया। पटवारी के नाप करने पर पडोसी की कच्ची दीवार भी मेरी जमीन में आती है। पडोसी 3फीट छोड कर भी निर्माण कार्य नहीं करने देते। इस मामले मे पुलिस की क्या कार्यवाही बनती है? और मुझे न्याय के लिये क्या करना है? सुझाएँ कि  मेरी समस्या का समाधान कैसे हो सकता है?

समाधान-

वास्तव में समस्या आप का डर है। पड़ौसी ने आप की जमीन पर दीवार बना रखी है और हैं कि उस के कहने मात्र से डर जाते हैं। सब कुछ आप ने कर के देख लिया। जब यह सिद्ध हो चुका है कि पडौसी ने दीवार आप की जमीन पर बना रखी है तो उस दीवार को हटवाने और आप की जमीन पर कब्जा प्राप्त करने के लिए तुरन्त दीवानी वाद करें। इसी वाद में यह निषेधाज्ञा की राहत भी मांगें कि पडोसी आप को अपनी जमीन पर निर्माण कार्य से न रोके।

स के बाद आप निर्माण कार्य करना शुरु करें। यदि पडौसी फौजदारी पर आमादा होता है तो होने दें, अपना कार्य जारी रखें। यदि वह कोई अपराध करता है तो उस की रिपोर्ट तुरन्त पुलिस को करें। पुलिस कार्यवाही करेगी। और न करे तो आप मजिस्ट्रेट के न्यायालय में परिवाद दाखिल कर पुलिस अन्वेषण के लिए भिजवाएं। तब पुलिस को कार्यवाही करनी होगी।

जबरन कब्जा करने के प्रयास के विरुद्ध निषेधाज्ञा का वाद कर राहत प्राप्त करने का प्रयत्न करें।

House demolishingसमस्या-

राजेश कुमार ने लखनऊ, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

क प्लॉट की रिजिस्ट्री मेने आमने नाम २२ जनवरी 2014 को करवाई थी और उस परतुरंत बाउंड्री बनवाकर कब्जा प्राप्त कर लिया था, यह प्लॉट उत्तर प्रदेशकी राजधानी लखनउ मे स्थित है. अभी कुछ दिन पहले एक दारोगा जी ने आकर एकपंजीकृत एग्रीमेंट दिखाया जो की ७ जनवरी 2013 को किया गया था जिसके मुताबिकविक्रेता ने यह प्लॉट उससे 8 लाख रुपये मे बेचने का इकरारनामा किया था, क्योंकि प्लॉट सीलिंग मे है इस लिए अग्रीमेंट के अनुसार 6 लाख नगद भुगतानकरके कब्जा प्राप्त करने की बात उस अग्रीमेंट मे लिखी है तथा बाकी 2 लाखरुपये रजिस्ट्री के समये देने को कहा गया है
एग्रीमेंट के अनुसारविक्रेता प्लॉट की सीलिंग निरस्त करवाकर क्रेता को सूचित करेगा उसके बाद एकवर्ष के भीतर क्रेता को उसकी रिजिस्ट्री करवानी है अब दारोगा जी का कहनाहै की हमको प्लॉट पर से कब्जा हटा लेना चाहिए और विक्रेता उसके बदले रुपयेलौटानेको सहमत है लेकिन हम ज़मीन पर से कब्जा नहीं हटाना चाहते। दारोगाजी हमारे बाउंड्री को गिराने और अपने बाउंड्री बनवाने का प्रयास कर रहे हैं।ऐसे स्थिति में हमें क्या करना उचित होगा? क्या रुपये लेकर कब्जा त्याग करनाही सही मार्ग है? उनका तर्क है की उनका एग्रीमेंट पुराना है इस लिएक़ानूनी रूप से वही सही है और मुक़दमे मे उन्ही को सफलता मिलेगी? क्या वोहमारी रजिस्ट्री निरस्त करवा सकते हैं? हमारे लिए सही कदम क्या होगा समझोताया मुक़दमा?अभी तक उस प्लॉट पर दारोगा जी ने कोई बाउंड्री नहीं बनवाई है।

समाधान-

प का मामला अधिक मजबूत है। आप एक सद्भाविक खरीददार हैं। आप की गलती सिर्फ इतनी है कि आप ने खरीद के पूर्व उप रजिस्ट्रार के कार्यालय में सर्च करवा कर यह नहीं देखा कि क्या उस जमीन के संबंध में कोई दस्तावेज पंजीकृत तो नहीं हो रहा है। वैसे मुझे संदेह है कि दारोगा जी का एग्रीमेंट पंजीकृत भी है या नहीं। क्यों कि आम तौर पर ऐसे एग्रीमेंट पंजीकृत नहीं कराए जाते हैं।

ग्रीमेंट में यह अंकित है कि सीलिंग का निर्णय होने पर वह क्रेता को सूचित करेगा। फिर उस निर्णय में जमीन का कब्जा नहीं दिया गया था। इस कारण से कब्जा तो आप का ही है। दरोगा ने केवल खरीदने का एग्रीमेंट किया था उस जमीन को खऱीदा नहीं था जब कि आप उस जमीन को खरीद कर उस पर कब्जा प्राप्त कर चुके हैं और अतिरिक्त धन खर्च कर के उस पर बाउंड्री भी बनवा चुके हैं। दरोगा अधिक से अधिक उन के द्वारा दिया गया धन उन के हर्जाने सहित विक्रेता से वापस प्राप्त कर सकती है। बेहतर है कि आप उस जमीन पर निर्माण की इजाजत ले कर निर्माण आरंभ कर दें।

दि इस में दरोगा कोई बाधा उत्पन्न करता है या उस के द्वारा बाधा उत्पन्न करने या जबरन जमीन पर कब्जा करने की आशंका है तो आपको तुरन्त दीवानी न्यायालय में निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत कर अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करनी चाहिए कि वह भूखंड आप का है और कब्जा भी आप का है, विक्रेता और दरोगा उस में कोई हस्तक्षेप न करे। यदि दरोगा का कोई अधिकार बनता भी है तो वह न्यायालय में विशिष्ठ अनुतोष का वाद प्रस्तुत कर भूखंड की रजिस्ट्री कराने व उस का कब्जा प्राप्त करने की राहत प्राप्त कर सकता है। लेकिन आप के कब्जे में जबरन व गैर कानूनी तरीके से दखल नहीं दे सकता।

स तरह आप दरोगा के गैरकानूनी तरीके से उस भूखंड पर दखल करने के प्रयासों को रोक सकते हैं। यह तो आप को खुद ही तय करना होगा कि विक्रेता से अपना पैसा व हर्जाना लेकर जमीन वापस देने में लाभ है या उस पर कब्जा बनाए रख कर सालों तक मुकदमेबाजी करते रहने में लाभ है।

क्षति की संभावना के ठोस आधार हों तो निर्माण रुकवाने की कार्यवाही की जा सकती है।

basement constructionसमस्या-
राजेश अरोरा ने फरीदाबाद, हरियाणा से पूछा है-

मेरे घर के पास वाले भूखंड पर बेसमेंट में शॉपिंग काम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। मुझे अपने घर के गिरने का डर है। मैं जब भी बेसमेंट बनवाने वालों से कहता हूँ तो वे कहते हैं कि कुछ नहीं होगा। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प का डर केवल संभावना पर टिका है जो हो भी सकती है और नहीं भी हो सकती है। किसी भी घटना की केवल संभावना होने पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकती। लेकिन आप की संभावना ठोस हो तो कार्यवाही की जा सकती है।

वैसे वे लोग अपने प्लाट पर काम कर रहे हैं, जिस की उन्हों ने नगर निगम से अनुमति प्राप्त की होगी। यदि उन के पास अनुमति है तो वे अपना काम कर सकते हैं। आप उन्हें नहीं रोक सकते। लेकिन उन का कर्तव्य है कि यदि वे अपने भूखंड पर काम करते हैं तो पड़ौसियों की संपत्ति को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचे।

दि वे लापरवाही करते हैं, या उन के कार्य से आप को नुकसान होता है तो यह उन का दुष्कृत्य (Tort) होगा। तथा ऐसे दुष्कृत्य से हुई हानि की भरपाई करने की जिम्मेदारी उन की होगी। नुकसान होने पर उस नुकसानी की भऱपाई करने के लिए आप उनके विरुद्ध दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं। यदि आप को नुकसान होने की संभावना के लिए कोई ठोस आधार हों तो आप इन ठोस आधारों के साथ नुकसान होने की संभावना के आधार पर स्थाई निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत कर उन के निर्माण को भी रुकवा सकते हैं। लेकिन यदि ठोस आधार न हुए तो आप जो कार्यवाही करेंगे वह निष्फल हो जाएगी।

मकान पर कब्जे के आधार पर घोषणा व आदेशात्मक निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत करें।

DCF 1.0समस्या-
महेन्द्र सिंह जाट ने नरसिंहपुर मध्यप्रदेश से पूछा है-

मेरे पास जो मकान है उसका नगर पालिका मे रजिस्ट्रेशन नहीं है। अगर रेजिस्ट्रेशन के लिए नगर पालिका जाते हैं तो वह बोलते हैं कि इस मकान या प्लॉट का रेकॉर्ड लाओ। लेकिन मेरे पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। क्यों कि यह मकान मेरे पूर्वजों का है और उस समय जब उन्हों ने खरीदा था जब रजिस्ट्री या नगर पालिका मे रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। लेकिन अब बहुत प्रॉब्लम आ रही है। रजिस्ट्रेशन न होने के कारण न तो नल, बिजली कनेक्शन मिल पा रहा है और यहाँ तक कि नगर पालिका वाले कहते हैं कि यह प्लॉट/मकान अतिक्रमण में है लेकिन हमारे पास में यह मकान पिछले लगभग 80 साल से है।

 

समाधान-

कान 80 वर्ष से आप के व आप के पूर्वजों के कब्जे में चला आ रहा है। लेकिन आप के पास मकान के स्वामित्व के सबूत नहीं हैं। कोई भी विभाग मकान पर स्वामित्व का सबूत हुए बिना नल बिजली कनेक्शन नहीं दे सकता है। ऐसी परिस्थिति में आप को परेशानी होना स्वाभाविक है।

स परिस्थिति में केवल कब्जा ही आप के स्वामित्व का सबूत है। किसी भी अचल संपत्ति के स्वामित्व का प्राथमिक सबूत उस का कब्जा ही होता है। लेकिन स्वामित्व के दस्तावेजों का अपना महत्व होता है। हर जगह तो यह प्रमाणित नहीं किया जा सकता कि मकान पर आप का पुराना कब्जा है।

सी स्थिति में यदि आप यह साबित कर सकते हों कि आप उस प्लाट/मकान पर पिछले 80 वर्षों से आप व आप के पूर्वज लगातार काबिज हैं तो आप को दीवानी न्यायालय में स्वामित्व की घोषणा तथा आदेशात्मक निषेधाज्ञा के लिए वाद प्रस्तुत कर घोषणात्मक जयपत्र प्राप्त करना चाहिए। एक बार न्यायालय यह घोषित कर देगा कि उस मकान पर आप का स्वामित्व है तो फिर उस जयपत्र के आधार पर आप नगरपालिका में अपने मकान का पंजीकरण करवा सकते हैं। इसी मुकदमे में नगरपालिका, नल और बिजली विभागों को पक्षकार बना कर उन के विरुद्ध आदेशात्मक निषेधाज्ञा प्राप्त कर सकते हैं वे आप को नल और बिजली के कनेक्शन दें तथा नगर पालिका आप के मकान का पंजीकरण करे। इसी मुकदमे में आप अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर मुकदमे का निस्तारण होने तक बिजली और नल विभागों को कनेक्शन देने का आदेश जारी करवा सकते हैं। इस मामले में आप को किसी स्थानीय वकील की मदद लेनी चाहिए।

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