Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Mutation Supreme Court wife Will अदालत अनुबंध अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक नामान्तरण न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

किसी अपराध के लिए मुकदमा विचाराधीन हो या दंडित कर दिया गया हो तो नौकरी प्राप्त करते समय न छुपाएँ।

rp_termination-of-employment.jpgसमस्या-

हंसराज मीणा ने कोटा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

म ने नौकरी मांग को लेकर राजस्थान सरकार के विरुद्ध आन्दोलन किया तो हमारे साथियों को गिफ्तार किया। मुझे सलाह चाहिए कि क्या धारा 332,352,147,149,448 आईपीसी लगने और मुकदमा विचाराधीन होने पर सरकारी नौकरी लग सकती है। हमारे पास इस से मुक्ति का क्या उपाय है? क्या हमें इन धारा को छुपाकर नौकरी करते समय कोई दिक्कत हो सकती है? कौनसी धारा के तहत सरकारी नौकरी मे लगने से रोका जा सकता है यदि मामला विचाराधीन हो?

समाधान-

कोई अपराधिक मुकदमा विचाराधीन होने पर, उस में सजा होने पर प्रोबेशन पर छोड़े जाने पर, सजा हो जाने पर, संदेह के आधार पर या साक्ष्य न आने या साक्षी के विरुद्ध हो जाने से दण्डित न किए जाने पर हर सरकार और सरकारी विभागों की अलग अलग नीति हो सकती है। आप को चाहिए कि आप जहाँ नौकरी के लिए आवेदन दे रहे हैं उस नौकरी के संबंध में उस सरकार या विभाग की क्या नीति है। उसी से आप के प्रश्न का उत्तर मिल सकता है।

म तौर पर किसी अनैतिक अपराध के मामले में या किसी गंभीर अपराध के मामले में ही किसी को नौकरी देने से वंचित किया जा सकता है। यदि मामला विचाराधीन है तो चयन होने पर नियुक्ति को मामले में निर्णय होने तक नियुक्ति को रोका जा सकता है। दिल्ली पुलिस की इस तरह की गाइड लाइन्स या नीति को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गयी थी जिस में दिनांक 2 जुलाई 2013 को निर्णय प्रदान किया गया है। Commissioner Of Police And Anr vs Mehar Singh के मामले में दिए गए इस निर्णय को आप यहाँ क्लिक कर के पढ सकते हैं।

दि कोई मामला आप के विरुद्ध विचाराधीन है तो उसे छुपाना बहुत गलत है यह अलग से एक अपराध होगा और मिली हुई नौकरी कभी भी छीनी जा सकती है और तथ्य छुपाने के लिए सजा अलग से मिल सकती है। आप को विचाराधीन अपराधिक प्रकरण और यदि किसी मामले में दंडित किया गया है तो उसे स्पष्ट रूप से अपने आवेदन में पूछे जाने पर अंकित करना चाहिए।

प का मामला हक के लिए आंदोलन के दौरान बनाया गया है। इस तरह के अपराधिक मामले सरकार वापस भी ले लेती है। यदि स्वयं सरकार इस तरह के अपराधिक मामले वापस ले लेती है तो फिर नौकरी प्राप्त करने में कोई बाधा नहीं रहती है।

लायसेंस समाप्त कर मकान का कब्जा प्राप्त करने के लिए न्यायालय में दीवानी वाद प्रस्तुत करें।

rp_lawyerx200.jpgसमस्या-

ऊषा रानी ने सनलाईट कालोनी नम्बर-1, नई दिल्ली-14 से समस्या भेजी है-

मैं अपने परिवार के साथ रहती हूँ, और जंगपुरा मे दैनिक मजदूरी करती हूँ। मेरे पति श्री सतीश कुमार का 2008 मे हार्ट का ओपरेशन हुआ है और वह अब घर पर ही रहते  हैं। 443, नः का मकान मेरे पति के पिता जी की सम्पत्ति है। काफी समय से हमारे साथ मेरे पति के चाचा के लड़के के बच्चे भी रह रहे हैं। हम लोग उन से किसी भी प्रकार का किराया भी नहीं लेते और मेरे पति समय-समय पर इन लोगों की रूपये पैसो से सहायता भी करते रहे हैं। हमने जब हमारे दिए हुए पैसों को राजकुमारी को वापस करने को कहा तब-तब कोई ना कोई बहाना देती है। हमारे पास पैसों के लेन-देन का राजकुमारी के पति स्वर्गीय श्री सुरेश कुमार का लिखित और इन सब के अंगुठे कि छाप व हस्ताक्षर किया हुआ एग्रीमेंट भी है। जनाब काफी समय से राजकुमारी अपने दोनो लड़को के साथ मिल कर मुझे और मेरे पति एवं बच्चो को परेसान कर रहे हैं। इसका छोटा लड़का अपराधी प्रवृति का है और मेरे बच्चों को अकसर मारने पीटने कि धमकी देता रहता है। हम लोग चुप रह जाते हैं क्योकि मेरे पति का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। दिल भी काफी कमजोर है। डाक्टरो ने उन्हें ज्यादा बोलने चलने फिरने को मना करा हुआ है इसलिए हम लोग उन्हे कुछ नहीं बताते। एक बार पहले भी रितेश कुमार और निकेश कुमार उर्फ कल्ली दोनो भाई मेरे पति के साथ मार पीट कर चुके हैं और मेरे पति को मेट्रो हॉस्पिटल मे भरती करना पडा था। हमें काफी मुश्किलो का सामना करना पड़ा था। हमने इनकी हरकतो से परेशान होकर हमारा मकान खाली करने को कहा और इनका एक डी.डी.ए.क्वाटर ए-57 गढ़ी ईस्ट ऑफ केलाश में है वहां जाकर रहने को कहा। इस पर राजकुमारी बोली वह मकान मेरे पति और सास ने काफी समय पहले बेच दिया। इस पर मेरे पति ने कहा जब वो बेच रहे थे तब मुझे क्यों नहीं बताया। राजकुमारी बोली हमने जरूरी नहीं समझा। ये सुनकर मेरे पति खामोश हो गए। मेरे पति ने राजकुमारी से कहा भाभी देखो आपके बच्चे भी बड़े हो गए हैं और मेरे बच्चे भी और मैं काफी समय से बीमार भी चल रहा हूँ। रिश्तों में काफी खटास आगई है अच्छा यही रहेगा आप मेरा मकान छोड कहीं और चले जाओ। इस से रिश्ते भी बचे रहगें और सब शांति से भी रहेंगे। राजकुमारी बोली ये तो मैं भी समझती हूँ और चाहती भी हूँ पर मेरी भी मजबूरी है मेरी आमदनी से अपना खर्च ही बडी मुश्किल से चला पाती हूँ। बस थोडे दिनों की बात है मैं परमानेन्ट होने वाली हूँ (राजकुमारी MCD में दैनिक मजदूरी सफाई कर्मचारी थी) पक्की होते ही चली जाऊँगी। मेरे पति ने कहा चलो ठीक है, अब राजकुमारी को परमानेन्ट हुए भी काफी समय हो गया। मेरे बेटे की शादी का वक्त भी करीब आ रहा था। शादी की तारीख 25-01-2015 थी। मेरे पति ने राजकुमारी से फिर कहा भाभी अब आप परमानेन्ट भी हो गई हो और घर मे शादी भी है। जगह की जरूरत पडेगी, अब तो घर खाली कर दो। वो बोली मैं परमानेन्ट तो हो गई पर मेरे पास अभी पैसों का जुगाड़ नही हो पा रहा है, जगह भी लेनी है और बनाना भी है तुम्हारे पैसे भी देने हैं। थोडा और रुक जाओ जैसे ही पैसों का जुगाड़ होगा मै खुद ही चली जाऊंगी। इस पर मेरे पति ने कहा भाभी मेरे पैसो की फिक्र मत करो जब तुम्हारे पास हो तब दे देना। फिर राजकुमारी ने कहा मुझे जमीन भी तो खरीदनी पडेगी इतने पैसे कहां से लाऊं। अगर मेरे पास जमीन होती तो कहीं ना कहीं से कर्जा लेकर और कुछ पास से मिला कर बना लेती। इतना सुनकर मेरे पति ने कहा भाभी लगता है कि तुम्हारा ईरादा घर खाली करने का नहीं है। राजकुमारी बोली नही तुम गलत समझ रहे हो भगवान कि कसम खा कर बोल रही हूँ। जमीन लेते ही उसे बनाते ही मैं चली जाऊँगी। मेरे पति ने कहा अगर ऐसी बात है तो जैसा कि तुम्हें मालूम है मेरे पास होलम्बी कलाँ अलीपुर नरेला के पास एक प्लॉट खाली पडा है। अगर तुम चाहो तो उसे बनाकर रह लो। जब आपके पास पैसे हो तब दे देना। राजकुमारी बोली मुझे मंजूर है। मेरे पति ने होलम्बी कलाँ अलीपुर नरेला के खाली प्लॉट के कागज राजकुमारी को सौप दिए। इस बात को भी काफी समय हो गय़ा जब मेरे पति ने होलम्बी कलाँ मे रहने वाले अपने दोस्त से जानकारी हासिल की तब उसने बताया राजकुमारी प्लाँट बेचने की कोशिश कर रही है। जनाब हमने इस बारे में अभी कोई बात नहीं की है। अब मुझे ये खबर भी मिली है कि मेरे मकान 443, में रिपेरिगं के नाम पर मेरे घर पर कब्जा करने की साजिश कर रही है। जनाब मुझ गरीब की मदद करें। राजकुमारी के लडके निकेश और रितेश कि हमें जान से मारने की धमकी से हमें हर वक्त एक अजीब सा डर लगा रहता है। मेरे पति बीमार हैं उनकी देख भाल के लिए मेरा छोटा बेटा और जवान लडकी घर पर ही रहती है। वो निकेश और उसके अपराधी किस्म के बदमाशो का सामना नहीं कर पाएंगे कृप्या करके बताए हम क्या करे ।

उषा रानी के पति सतीश कुमार ने अलग से लिखा है-

मेरी उम्र 51 वर्ष के आस पास हो गई है। मेरे पिता का देहांत 1969 में ही हो गया था। तब से ही दूसरे लोग हम बेसहारा लोगों का फायदा उठा रहे हैं। पिताजी के बाद उनकी नौकरी ले ली और हमें भूखा रह कर गुजारा करना पड़ा। हमारी जमीन हड़प ली और जो मकान मेरे पिताजी ने बनवाया उस पर भी आकर रहने लगे। बोले बच्चे छोटे हैं हम इनकी देखभाल करेंगे। बस फिर क्या था एक-एक करके मेरे पिता के नाम जो भी था हड़प लिया। अब एक मकान बचा है जिस में मैं अपने  परिवार के साथ रह रहा हूँ उसपर भी कब्जे की साजिश चल रही है। मैं इंडियन एयर लाईन्स मे अस्थाई हैल्पर लोडर के पद पर सन 2000 से कार्यरत हूँ। ,2008 में मेरा हार्ट का ओपरेशन हुआ तब से भारी कार्य करने की मनाही है। पर काम ना चला जाए इस डर के कारण सब कुछ करना पडा। 2011 में एयर पोर्ट ड्यूटी पर जाते वक्त मैं दुर्घटना का शिकार हो गया, चोट सीने पर ज्यादा आई। ईलाज के दौरान मुझे टी.बी. हो गई जिस वजह से कार्य पर नहीं जा सका। उसके बाद से घर पर ही हूँ। फिर से भूखे रहने की नोबत आ गई तो मेरी पत्नी ने कुछ घरों में सफाई का कार्य करके हमें सम्भाला। पर अब मैं ठीक हूँ और हर कार्य कर सकता हूँ। क्या मैं दुबारा नौकरी पर जा सकता हूँ, क्योंकि हमे कोर्ट के आदेश पर कम्पनी ने रखा है मेरा नाम भी पैनल में है और जो मकान मेरे पिता के नाम है मैं उसी मे रहता हूँ और मेरी चाची के लडके की बहू अपने बच्चो के साथ ऱह रही है मकान को अपने नाम कैसे करा सकता हूँ?  मेरी चाची के लडके की बहू को कैसे निकाल सकता हूँ?

समाधान

प का मकान सतीश कुमार के पिता के नाम है जिन की मृत्यु हो चुकी है। उत्तराधिकार में वह मकान सतीश कुमार को मिल चुका है और उन्हीं की संपत्ति है। उसे अलग से सतीश कुमार के नाम करवाने की जरूरत नहीं है। यदि नगर निगम में मकान का रिकार्ड हो और मकान सतीश कुमार के पिता के नाम लीज पर हो तो नगर निगम में पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र और उन के पुत्र होने व अन्य कोई उत्तराधिकारी न होने की साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए आवेदन प्रस्तुत करने से मकान की लीज सतीश कुमार के नाम हस्तान्तरित की जा सकती है। इस मामले में आप को नगर निगम से जानकारी करनी चाहिए और मकान की लीज को अपने नाम करवा लेना चाहिए।

प के चाचा की बहू अपने बेटों के साथ इसी मकान में रह रही है वह आप की अनुमति से रह रही है, उस का इस मकान पर कोई हक नहीं है। जिस तरह से आप की पत्नी उषा रानी ने लिखा है, वह कोई कार्यवाही किए बिना मकान खाली नहीं करेगी। उस के लिए आप को कानूनी कार्यवाही अदालत में करनी होगी। यदि उस ने कोई किरायानामा लिखा हो तो वह किराएदार हो सकती है। यदि आप उसे कहें कि अब वह नहीं रह सकती यदि रहना है तो उसे किरायानामा लिखना होगा। यदि वह किरायानामा लिख देती है तो आप अपनी जरूरत के आधार पर उस के विरुद्ध किराए का मकान खाली करने का मुकदमा अदालत में कर सकती हैं। यदि किरायानामा न हो कोई किराए की रसीद नहीं हो तो यह माना जाएगा कि वह एक लायसेंसी की हैसियत से मकान में निवास कर रही है। वैसी स्थिति में आप को एक नोटिस दे कर उस का लायसेंस समाप्त करना होगा। लायसेंस समाप्त करने की तारीख के बाद उस के विरुद्ध मकान खाली करने का मुकदमा करना पड़ेगा। इस काम को करने के लिए आप को किसी स्थानीय वकील की सहायता लेनी पड़ेगी। आप किसी स्थानीय वकील से संपर्क करें और पूछें कि क्या किया जा सकता है। उन्हें हमारी राय बताएँ और अपने वकील के बताए अनुसार कार्यवाही करें।

प को कोर्ट के आदेश से नौकरी पर रखा था। लेकिन आप दुर्घटना में घायल होने व बीमार होने से नौकरी पर नहीं जा सके। आप ने नौकरी पर यह सब लिख कर दिया ही होगा कि आप क्यों नौकरी पर नहीं आ पा रहे हैं। अब आप को नौकरी पर न गए समय का दुर्घटना व बीमारी के कारण इलाज और आराम करने का प्रमाण पत्र डाक्टरों से ले कर उन प्रमाण पत्रों के साथ नौकरी पर लिए जाने के लिए अपने नियोजक को आवेदन करना चाहिए। यदि वे नौकरी पर ले लेते हैं तो ठीक है यदि वे नौकरी पर लेने में 10-15 दिन से अधिक लगाते हैं तो आप को श्रम न्यायालय में कार्यवाही करने वाले वकील से संपर्क कर के अपना मुकदमा श्रम विभाग में लगाना चाहिए।

क और समस्या उषा रानी ने बताई है कि चाची की बहू के लड़के आप के व आप के परिवार के साथ मारपीट करने की धमकी देते हैं। उन की रिपोर्ट पुलिस में कराइए और यदि कोई घटना होती है तो तुरन्त पुलिस को सूचित करें। पुलिस यदि कार्यवाही नहीं करती है तो सीधे मजिस्ट्रेट के न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर कार्यवाही करें।

गलत सूचना या प्रमाण पत्र के आधार पर प्राप्त सेवा से कार्मिक को हटाया जा सकता है।

appointment-letterसमस्या-

शशि साहु ने हल्दवानी, नैनीताल, उत्तराखंड से समस्या भेजी है कि-

क प्रिंसिपल अनुसूचित जाति के मिथ्या प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहा है। यह प्रमाण पत्र आरटीआई द्वारा चाही गई सूचना में भी गलत बताया गया है। क्या किया जा सकता है?

समाधान-

दि जिस रिक्त पद पर उस की नियुक्ति की गई है वह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पद है और उस व्यक्ति ने एक मिथ्या प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त कर ली है तो उस का इस तरह नौकरी प्राप्त करना गलत है, उस की नौकरी गलत सूचना और प्रमाण पत्र के आधार पर प्राप्त करने के आधार पर समाप्त की जा सकती है। यह एक दुराचरण भी है जिस के लिए उसे आरोप पत्र दिया जा सकता है और उसे सेवा च्युति का दंड दिया जा सकता है। यह अपराध भी है और उस के विरुद्ध विभाग द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है व अनुसंधान के बाद अपराध प्रमाणित पाए जाने पर उसे दंडित किया जा सकता है। इस तरह की नियुक्ति से अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति का नियुक्ति का अधिकार समाप्त हुआ है।

प इस के लिए उस के नियोजक अधिकारी को लिखित शिकायत करें। यदि आप की शिकायत पर कार्यवाही न हो तो आप उच्च न्यायालय में रिट प्रस्तुत कर के न्यायालय से प्रार्थना कर सकते हैं कि सरकार इस तरह गलत तरीके से नियुक्ति प्राप्त किए हुए व्यक्ति के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं कर रही है सरकार को निर्देश दिया जाए कि ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध तुरन्त कार्यवाही करे।

स्वयं से संबंधित नियमों का स्वयं अध्ययन कर अपने हितों को सुरक्षित रखें।

lawसमस्या-

अंकित ने मेड़ता, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरा नाम अंकित है म्रेरी उम्र 26 वर्ष है मेरे दो पुत्र है मेरी सरकारी नौकरी अभी तक नही लगी है लेकिन मै एक लड़की गोद लेना चाहता हू मै ये जानना चाहता हू कि कानूनन रूप से दो से ज्यादा बच्चे 2002 के बाद होने पर सरकारी नौकरी मे तथा यदि हम चुनाव लड़ना चाहे तो भी कई समस्याए आती है मै जानना चाहता हू कि क्या मै लड़की को गोद ले सकता हू ये जो नियम है दो से ज्यादा बच्चो का यह किन किन जगहो पर लागू होता है क्या यह नियम (दो से अधिक बच्चो का)सिर्फ राजस्थान की स्टेट लेवल की नौकरी मे ही लागू है या ये केन्द्र की नौकरी मे भी लागू है क्या यह नियम केवल दो से ज्यादा प्रसव होने पर ही लागू होता है यानि यदि दो प्रसव बाद हम किसी को गोद लेते है तो क्या यह नियम लागू नही होता है कृपा करके मेरी समस्या पर ध्यान दे

समाधान-

केन्द्र, राज्य सरकार व सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के सेवा नियमों में इस तरह के प्रावधान हैं कि 2002 के बाद से जिन लोगों ने तीसरा बच्चा पैदा किया हो वे सेवा ग्रहण करने के अयोग्य होंगे तथा जो सेवा में हैं वे अगले पाँच वर्ष तक पदोन्नति से वंचित रहेंगे। लेकिन हर राज्य, केन्द्र और संस्थानों के नियम भिन्न हैं। उन सब का निहितार्थ अलग अलग हो सकता है। इस कारण जिस सेवा से आप का तात्पर्य हो उस सेवा के सेवा नियमों का आप को अध्ययन करना चाहिए और स्वयं ही उस का तात्पर्य समझने की कोशिश करना चाहिए। यह ठीक से समझ लेना चाहिए कि आप के क्या करने के? क्या परिणाम? हो सकते हैं। हम यहाँ उन सब नियमों की व्याख्या नहीं कर सकते। अभी तक इन नियमों की कोई न्यायिक व्याख्या भी उपलब्ध नहीं है, जिस से दिशा प्राप्त की जा सके। यदि किसी खास नियम को संदर्भ बना कर यहाँ समस्या प्रस्तुत की जाती तो उस नियम की व्याख्या करने की कोशिश की जा सकती थी।

सामान्य रूप से इन नियमों में तीसरी संतान होने पर असुविधाएं खड़ी की गई हैं। इन नियमों में संतान शब्द का प्रयोग किया गया है और औरस व दत्तक संतानों में विभेद नहीं किया गया है। संतान में भेद नहीं किया दत्तक संतान को भी उस में सम्मिलित मानना चाहिए। इस कारण आप के दृष्टिकोण से इस का अर्थ यही लेना उपयुक्त होगा कि दत्तक संतान भी उस की संतानों में सम्मिलित होगी। क्यों कि इस से विपरीत अर्थ लेने से आप तीसरी संतान गोद लेने पर राजकीय सेवा से वंचित हो जाएंगे। इस तरह की स्थितियों में स्वयं से संबंधित नियमों का स्वयं ही अध्ययन कर उस का तात्पर्य समझ कर अपने हितों को सुरक्षित करना चाहिए।

फर्जी और धोकेबाज कंपनियों से सावधान रहें।

समस्या-

कर्णाटक, बैंगलोर से श्वेता शर्मा पूछती हैं –

मैं एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हूँ। 2 महीने पहले मैंने साउथ अफ्रीका स्थित एक कंसल्टेंसी में अपनी योग्गता के अनुसार एक रिक्तता देख कर आवेदन किया।  उस कंसल्टेंसी के एक कर्मचारी ने मुझे ईमेल के द्वारा एक ऑनलाइन टेस्ट देने को कहा।  वो टेस्ट मैंने क्लियर किया।  उसके कुछ दिनों बाद एक टेलीफोनिक इंटरव्यू हुआ जिस में मैंने डायरेक्ट क्लाइंट को इंटरव्यू दिया।  अब कंसल्टेंसी ने मुझे नियुक्ति पत्र भेज दिया है और उन्हों ने मुझे अपने सारे शेक्षिक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी देने को कहा है और PCC सर्टिफिकेट भी जो पासपोर्ट सेवा केंद्र से मिलता है।  मेरी समस्या ये है कि जब मैंने उनसे TAN देने को कहा तो कम्पनी ने अभी तक कोई उत्तर नहीं दिया है नाही कोई Enterprise Reg No. दिया है।  मुझे लगता है ये कंपनी लीगल नहीं है।  मैं इसके खिलाफ शिकायत कहाँ और कैसे दर्ज सकती हूँ?

समाधान-

स कंपनी के साथ आप का अब तक का जो व्यवहार हुआ है वह इंटरनेट के माध्यम से ही हुआ है। कंपनी जो कुछ कर रही है वह जहाँ जिस देश में स्थित कंम्प्यूटर के उपयोग से यह सब कर रही है, उस के विरुद्ध कार्यवाही उसी देश में उसी स्थान पर क्षेत्राधिकार रखने वाले न्यायालय या कार्यालय को की जा सकती है।  इस तरह के मामलों में कार्यवाही करना असंभव जैसा होता है। इस कारण से इस तरह के मामलों में सावधान रहना चाहिए और इस तरह के संस्थानों से किसी तरह का कोई व्यवहार नहीं करना चाहिए।

प को यदि लगता है कि कंपनी फर्जी है या किसी कपट में संलग्न है तो बेहतर यह है कि आप इस कंपनी से किसी तरह का व्यवहार न करें।  इंटरनेट पर ऐसी साइटस् आप को मिल जाएंगी जिस से आप यह जान सकती हैं कि यह कंपनी फर्जी है या किसी तरह के कपट में संलग्न है अथवा नहीं।

अधिवक्ता बार कौंसिल की अनुमति से अंशकालिक नौकरी कर सकता है

समस्या-

सिरसा, हरियाणा से रामसिंह ने पूछा है-

मैं एक अधिवक्ता (एडवोकेट) हूँ।  मैं बी.ए., एलएल.बी., बी.एड. आदि डिग्रीधारी हूँ। क्या मैं बार कौंसिल में अपना एनरॉलमेंट होते हुए भी एक अध्यापन का अनुभव प्राप्त करने के लिए अध्यापक के रूप में काम करने के लिए अपनी बी.एड. की डिग्री किसी स्कूल में प्रस्तुत कर सकता हूँ?

समाधान-

प एक अधिवक्ता के रूप में बार कौंसिल में अपना एनरॉलमेंट बनाए रखते हुए न केवल अपनी बी.एड. की डिग्री किसी स्कूल में प्रस्तुत कर सकते हैं, वहाँ नियोजन के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं और साक्षात्कार भी दे सकते हैं। लेकिन यदि आप को किसी स्कूल में पूर्णकालिक नौकरी के लिए प्रस्ताव प्राप्त होता है तो आप वह स्वीकार नहीं कर सकते।  लेकिन कोई अंशकालिक नौकरी का प्रस्ताव आप अपने राज्य की बार कौंसिल की अनुमति प्राप्त करने के उपरान्त स्वीकार कर सकते हैं।

बार कौंसिल की राय में यदि वह पाती है कि इस अंशकालिक नौकरी का आप के अधिवक्ता के रूप में किए जाने वाले प्रोफेशनल कार्य के साथ कोई टकराव नहीं है और आप के प्रोफेशनल सम्मान को उस नौकरी से कोई आँच नहीं आएगी तो कुछ उचित निर्देशों के साथ राज्य बार कौंसिल एक अधिवक्ता को ऐसी नौकरी करने के लिए अनुमति प्रदान कर देगी।

सेवा से लंबी अनुपस्थिति को स्वेच्छा से सेवा का परित्याग माना जा सकता है

समस्या-

मैं एक अर्धशासकीय निगम में लगातार 12 वर्ष तक अस्थाई रूपसे निर्धारित वेतन पर कार्यरत रहा था। इस दौरान मेरे वेतन से कर्मचारी भविष्य निधि की कटौती भी होती थी। पिछले 10 वर्षो से मैं घरेलू जिम्मेदारियों के कारण अपने कार्यालय से लापता रहा हूँ। इस दौरान मेरे साथ कार्यरत सभी साथियों को नियमित कर दिया गया है। पिछले 10 वर्षों में मेरे कार्यालय ने मेरी सेवाएँ समाप्त करने के लिए कोई कार्यवाही नहीं की है। अभी मैं ने जब अपने कार्यालय से अपने भविष्य निधि खाते से धन निकालने हेतु संपर्क किया तो वहाँ से जवाब मिला कि पहले त्यागपत्र दो। लेकिन इस स्थिति को जानने के उपरान्त मैं त्यागपत्र नहीं देना चाहता और सेवा में वापस आना चाहता हूँ। इस सम्बन्ध में कानूनी स्थिति क्या होगी? मुझे क्या करना चाहिए।

-मुरारी संजय गोयल, बीना, मध्यप्रदेश

 समाधान-

किसी भी सेवा में निरन्तर बना रहना सेवा की एक स्थाई शर्त है। यदि कोई व्यक्ति बिना किसी सूचना के अनुपस्थित हो जाए तो सेवा में उसे तब तक लगातार अनुपस्थित माना जाएगा जब तक कि वह सेवा में स्वयं उपस्थित नहीं हो जाता है। यह भी हो सकता है कि कोई नियोजक एक लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के कारण अनुपस्थित रहने वाले व्यक्ति की सेवाएँ समाप्त कर दे। आप के मामले में जो तथ्य सामने आए हैं उस से पता लगता है कि आप की सेवाएँ आप के निगम द्वारा समाप्त नहीं की गई हैं। लेकिन आप पिछले दस वर्ष से अनुपस्थित चल रहे हैं। आप ने वहाँ जा कर अपने भविष्य निधि खाते को बंद करने और उस में जमा धन वापस प्राप्त करने का प्रयास किया तो उन के सामने समस्या यह आ गई कि वे आप के भविष्य निधि खाते में आप की प्रास्थिति नौकरी से अनुपस्थित बताएँ अथवा आप को सेवामुक्त बताएँ। रिकार्ड के अनुसार आप आज तक सेवा मुक्त नहीं हैं। अनुपस्थित बताने से आप के भविष्य निधि खाते का समापन संभव नहीं है। इस कारण से आप को निगम द्वारा यह सलाह दी गई कि आप त्याग पत्र दे दें जिस से आप की प्रास्थिति ऐसी बन जाए कि आप के भविष्य निधि खाते का समापन हो सके और आप की भविष्य निधि की राशि आप को प्राप्त हो सके।

दि कोई व्यक्ति बिना बताए सेवा से अनुपस्थित हो जाता है और एक लंबे समय तक अनुपस्थित रहता है तो नियोजक के पास यह आधार उपलब्ध रहता है कि कर्मचारी ने स्वयं ही सेवा त्याग दी है। इस तरह उस की सेवाएँ समाप्त समझी जा सकती हैं। दूसरा विकल्प यह है कि नियोजक एक लंबी अवधि तक अनुपस्थित रहने पर आप को आरोप पत्र दे कि आप बिना कोई सूचना दिए और बिना कोई कारण बताए अनुपस्थित हैं जो कि एक दुराचरण है, और आप इस आरोप का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।  कर्मचारी का कोई भी उत्तर प्राप्त न होने पर नियोजक कर्मचारी के विरुद्ध औपचारिक जाँच कार्यवाही कर उसे सेवा समाप्ति के दंड से दंडित कर सकता है। आप के मामले में आप के नियोजक के पास उक्त दोनों ही विकल्प खुले हैं। एक तीसरा विकल्प यह भी है कि जब भी कर्मचारी सेवा पर उपस्थित हो उसे सेवा में ले ले और अनुपस्थिति के काल को उस के सेवा काल से हटा कर उस के कुल सेवाकाल की गणना कर ले। यह तीसरा विकल्प तभी संभव हो पाता है जब कि नियोजक को आप की सेवाओँ की आवश्यकता हो और नियोजक कर्मचारी के प्रति अत्यधिक सहिष्णुता का रवैया अपनाए।

ब आप के साथियों के नियमित हो जाने से उन्हें अच्छे वेतन प्राप्त हो रहे हैं और सेवा शर्तें भी अच्छी हैं इस कारण से आप नौकरी करना चाहते हैं। इस लिए मेरी राय में आप को सेवा में उपस्थिति दे देनी चाहिए। एक आवेदन प्रस्तुत कर यह बताना चाहिए कि आप किन कारणों से सेवा में उपस्थित नहीं हो सके थे और अब सेवा में उपस्थित हैं आप को सेवा में लिया जाए। यदि आप द्वारा बताए गए कारणों से आप का नियोजक संतुष्ट हो जाता है तो वह आप को तुरन्त सेवा में ले लेगा। यदि वह संतुष्ट नहीं होता है तो आप को पत्र दे कर यह बताएगा कि आप ने इतने दिन  अनुपस्थित रह कर स्वयं ही सेवा का त्याग कर दिया है और अब आप को सेवा में लिया जाना संभव नहीं है। आप की अनुपस्थिति को आप के नियोजक द्वारा स्वेच्छा से सेवा का परित्याग मान लिए जाने पर आप उस के विरुद्ध औद्योगिक विवाद उठा सकते हैं और इस विवाद में यदि श्रम न्यायालय यह मानता है कि आप के पास दस वर्ष की अनुपस्थिति का उचित कारण था और नियोजक को यह मानने का कोई अधिकार नहीं था कि आप ने सेवा का परित्याग कर दिया है तो आप को सेवा दुबारा प्राप्त हो सकती है। श्रम न्यायालय यदि यह मानता है कि आप का दस वर्ष से सेवा में अनुपस्थित रहना सेवा परित्याग के समान है तो आप को कोई भी राहत प्राप्त नहीं होगी। निर्णय बहुत कुछ आप और आप के नियोजक द्वारा श्रम न्यायालय के समक्षअपने अपने पक्ष में प्रस्तुत साक्ष्य पर निर्भर करेगा।

ह आप पर निर्भर करता है कि आप सेवा से त्याग पत्र दे कर अपना हिसाब लेना चाहते हैं या फिर सेवा प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहते हैं।

रिक्त पद पर अनुकम्पा नियुक्ति

बड़वानी मध्यप्रदेश से नीलेश सैनियार ने पूछा है-

महोदय,

मेरी अनुकम्पा नियुक्ति आदिवासी विकास विभाग के अन्तर्गत भृत्य के पद की गई। मेरे द्वारा मेरी योग्यता अनुसार लिपिक के पद हेतु आवेदन दिया गया था। मेरे आवेदन के उपरान्त विभाग द्वारा आदिवासी विकास विभाग में लिपिक का कोई भी पद खाली नही है ऐसा लिखित में दिया जाकर मुझसे भृत्य के पद पर नियुक्ति हेतु सहमति ली गई।  जिसके पश्चात मेरी नियुक्ति भृत्य के पद पर हो गई।  परंतु मुझे ज्ञात हुआ है कि ठीक एक माह बाद ही दूसरे अन्य आवेदक को जो कि निर्धारित योग्यताएं भी पूर्ण नही करता था और न ही आरक्षण रोस्टर के अनुसार एस.सी. का पद रिक्त था, फिर भी उसे लिपिक के पद पर नियुक्ति दी गई है।  मुझे प्रतीत होता है कि यहाँ रूपयो का लेनदेन कर गलत नियुक्ति प्रदान की गई है।  उक्त संदर्भ में उचित कानूनी सलाह प्रदान करें।

उत्तर-

 नीलेश जी,

प का साक्षात्कार लिपिक पद के लिए हुआ, लेकिन आप की अनुमति से आप को भृत्य के पद पर नियुक्ति दे दी गई। बाद में एक अन्य व्यक्ति को लिपिक पद पर नियमों का उल्लंघन कर के नियुक्ति दे दी गई और अब आप चाहते हैं कि आप को लिपिक के पद पर नियुक्त किया जाए। आप को यदि यह भय हो कि कहीं पूछताछ और आपत्ति किए जाने के कारण आप की वर्तमान नौकरी भी समाप्त न कर दी जाए। तो आप को अपने इस भय को निकाल देना चाहिए। क्योंकि आप को अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त हुई है। यह सही है कि अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं है लेकिन एक बार नियुक्ति हो जाने पर वह अधिकार के समान ही है। यदिlegal advice आप लिपिक पद की योग्यता रखते हैं और आप को भृत्य पद पर नियुक्ति दी गई है और कुछ समय बाद ही लिपिक पद रिक्त हो जाता है तो आप लिपिक पद पर नियुक्त किए जाने के लिए आवेदन दे सकते हैं। यदि यह पद जिस समय आप को नियुक्त किया गया उस समय भी रिक्त था तो आप का यह अधिकार हो जाता है कि आप उस पद पर नियुक्ति प्राप्त करें।

प सब से पहले तो आप की नियुक्ति से संबंधित समस्त तथ्यों को और बाद में लिपिक पद पर की गई अनियमित नियुक्ति के संबंध में सभी तथ्य और दस्तावेज एकत्र करें। यह काम आप सूचना के अधिकार के अंतर्गत सूचना मांग कर कर सकते हैं। एक बार आप के पास सभी आवश्यक सूचनाएँ एकत्र हो जाएँ फिर इन सूचनाओं को ले कर आप अपने उच्च न्यायालय में सेवा संबंधी मामलों की प्रेक्टिस करने वाले किसी वकील से मिल लें और राय लें कि क्या किया जा सकता है? यदि आप को वकील सलाह देता है कि आप बाद में हुई लिपिक पद की नियुक्ति को निरस्त करवा कर उस के स्थान पर लिपिक का पद प्राप्त कर सकते हैं तो आप को उच्च न्यायालय में इस के लिए रिट याचिका दाखिल कर देनी चाहिए।

क्या मुझे मृतक आश्रित के रूप में नौकरी मिल सकती है?

 गाजीपुर (उ.प्र.) से प्रशान्त वर्मा पूछते हैं –
मेरी माँ सरकारी जूनियर हाईस्कूल में प्रिन्सिपल के पद पर कार्यरत थी और वो 30.06.2012 को अवकाश प्राप्त होने वाली थी।  मेरी माँ पिछले करीब दो सालों से कैन्सर से पीड़ित थी। उनके इलाज़ में काफी पैसा खर्च हुआ।  माँ कैन्सर से पीड़ित थी और उनका इलाज करने के दौरान दिनांक 08.08.2011 को निधन हो गया।  मैं इंटर तक ही पढ़ सका।  क्या मुझे क्लर्क की नौकरी मिल सकती है।  नौकरी मिलने के बाद अगर मैं बी.ए. कर लेता हूँ तो क्या मुझे अध्यापक की नौकरी मिल सकती है।  मेरी उम्र इस समय 40 वर्ष है। मैं इस समय बेरोजगार हूँ और पूर्णतया माँ पर ही आश्रित था।  कृपया मुझे उचित सलाह दें। 
 उत्तर –
प्रशान्त जी,
भी राज्य सरकारों ने अपने कर्मचारी के सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाने पर उस के आश्रितों में से किसी एक को राज्य सेवा में नियोजन प्रदान करने के लिए नियम बनाए हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस के लिए  U. P. Recruitment of Dependants of Government Servants (Dying-in-Harness) Rules, 1974 बनाए हैं, तथा इन में समय समय पर संशोधन भी हुए हैं। आप ने इन नियमों के अन्तर्गत आप की माता जी के नियुक्ति अधिकारी को आवेदन प्रस्तुत कर दिया होगा। यदि नहीं किया है तो तुरन्त आवेदन प्रस्तुत कर दें। इस काम में देरी करने से कोई लाभ नहीं है। 
जो विवरण आप ने अपने बारे में दिया है उस के अनुसार आप को उक्त नियमों के अंतर्गत नियुक्ति प्रदान करने में कोई बाधा प्रतीत नहीं होती है। लेकिन आप को आप की वर्तमान योग्यता के आधार पर नियुक्ति प्राप्त होगी। किसी किसी पद के लिए यदि प्रशिक्षण अनिवार्य है तो उस की छूट मिल सकती है। वर्तमान योग्यता के अनुसार आप को एक लिपिक के पद पर नियुक्ति प्राप्त हो सकती है। लेकिन आप का पद बाद में बदला नहीं जा सकता है। यदि आप शिक्षक के पद पर नियुक्ति चाहते हैं और प्राथमिक शाला के पद पर नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता यदि हायर सैकंडरी है तो आप को प्रशिक्षण से छूट प्राप्त हो सकती है। आप को यह प्रशिक्षण नौकरी प्राप्त होने के उपरान्त निर्धारित अवधि में पूर्ण करना होगा।  इस संबंध में आप को अपनी माता जी के नियोक्ता के कार्यालय से संपूर्ण जानकारी कर लेनी चाहिए।  इन नियमों में पद रिक्त होने पर ही नियुक्ति दी जा सकती है इस कारण से आप को जिस पद पर नियुक्ति मिलने की शीघ्र संभावना हो उस पर नियुक्ति प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करना चाहिए।
Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada