Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Mutation Supreme Court wife Will अदालत अनुबंध अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक नामान्तरण न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

रजिस्टर्ड बंटवारानामा संपत्ति के स्वत्व का दस्तावेज है।

समस्या-

जितेन्द्र ने उज्जैन, से मध्य प्रदेश -समस्या भेजी है कि-

मेरे दादाजी की मुत्यु हो चुकी है। मेरे दादाजी की स्वंय अर्जित सम्पत्ति का एक मकान जो कि हॉउसिंग बोर्ड द्वारा लीज होल्ड है एवं नगर निगम सीमा में है जिसका सम्पत्ति कर वगैरह उस सम्पत्ति पर निवासरत् दादाजी के 3 पुत्रों द्वारा सम्मिलित रूप से जमा किया जाता है। दादीजी का भी देहान्त दिनांक हो गया है। दादाजी की कुल 7 संतानें (5 पुत्र एवं 2 पुत्रियां) हैं। दादाजी ने अपनी मृत्यु के पूर्व कोई भी वसियत भी नहीं की थी। इस सम्पत्ति पर वर्तमान में 3 पुत्रों के परिवार निवासरत है, अन्य में से 1 पुत्र लापता है, 1 पुत्र अन्यत्र निवासरत है, 1 पुत्री का देहान्त कुछ समय पूर्व हो चुका है एवं 1 पुत्री अन्यत्र निवासरत होकर अविवाहित है। इस सम्पत्ति का बंटवारा किस प्रकार किया जा सकता है? सभी संतानों का मालिकाना हक किस प्रकार इस सम्पत्ति पर हो सकता है? मालिकाना हक से संबंधित क्या दस्तावेज तैयार करवा सकते हैं? कृपया बतायें- 1. क्या इस सम्मत्ति की रजिस्ट्री होगी? 2. हॉउसिंग बोर्ड इस सम्पत्ति में क्या कार्यवाही कर सकता है ? 3. रजिस्टर्ड बंटवारा ओर रजिस्ट्री में क्या कोई अंतर है? क्या रजिस्टर्ड बंटवारा में रजिस्ट्री के सभी अधिकार प्राप्त होते है या नहीं?

समाधान-

ब आप रजिस्ट्री शब्द का उल्लेख करते हैं तो आम तौर पर उसका अर्थ पंजीकृत विक्रय पत्र से या पंजीकृत लीज डीड से होता है। लेकिन पंजीकरण का कानून यह है कि यदि 100 रुपए से अधिक कीमत की कोई अचल संपत्ति का हस्तांतरण हो तो उस की रजिस्ट्री होना जरूरी है। बंटवारा भी ऐसा ही एक विलेख है। पंजीकरण कानून कहता है कि बंटवारे के विलेख का पंजीकृत होना जरूरी है वर्ना वह विलेख जरूरत पड़ने पर किसी कार्यवाही में नहीं पढ़ा जाएगा।

संपत्ति के सभी साझेदारों के बीच आपसी सहमति से बंटवारा होता है तो उसे पंजीकृत कराना जरूरी है। यह पंजीकृत विलेख ही संपत्ति के स्वामित्व का विलेख होगा। हाउसिंग बोर्ड या नगर निगम में जहाँ संपत्ति का रिकार्ड रहता है वे अपने रिकार्ड में नामान्तरण करते हैं लेकिन नामान्तरण हो जाने से किसी को स्वत्वाधिकार प्राप्त नहीं होता है। नामान्तरण गलत होने पर न्यायालय के आदेश से उसे हटाया या दुरुस्त किया जा सकता है। स्वअर्जित संपत्ति में सभी पुत्रों और पुत्रियों का समान हिस्सा है। यदि किसी का देहान्त हो गया है तो उस की संपत्ति हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार उस के उत्तराधिकारियों को जाएगी। किसी के मर जाने से या गायब हो जाने से उस का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता है।

विक्रय पत्र, पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) और रजिस्ट्री क्या हैं?

समस्या-

सुनीता ने निजामुद्दीन, दिल्ली से हरियाणा राज्य की समस्या भेजी है कि-


पावर ऑफ़ अटोर्नी क्या होता है? क्या यह रजिस्ट्री जैसा ही होता है? मैंने जिससे जमीन खऱीदी है, वो यही बोल रहा है। मैं ने प्लाट बल्लबगढ़ हरयाणा में लिया है और वो जेवर, यूपी में बोल रहा है पावर ऑफ़ अटोर्नी करने के लिए। क्या यह सही है? क्या इससे हम बाद में बिना बिल्डर के ही  रजिस्ट्री करा सकते हैं?


समाधान-

आप को और लगभग सभी लोगों को यह समझना चाहिए कि रजिस्ट्री, विक्रय पत्र यानी सेल डीड और पावर ऑव अटॉर्नी अर्थात मुख्तारनामा क्या होते हैं। हम यहाँ बताने का प्रयत्न कर रहे हैं-

रजिस्ट्री या रजिस्ट्रेशन या पंजीकरण-

जब आप कोई पत्र किसी को भेजना चाहते हैं तो साधारण डाक से लिफाफे पर टिकट लगा कर डाक के डब्बे में डाल देते हैं। यह साधारण पत्र होता है। लेकिन जब आप उस पर अधिक (25 रुपए) का डाक टिकट लगा कर तथा एक अभिस्वीकृति पत्र जिस पर आपका व पाने वाले का पता लिख कर डाक घर में देते हैं तो डाक घर आप को रसीद देता है। आप उस के लिए कहते हैं की हमने रजिस्ट्री से चिट्ठी भेजी है। इस चिट्ठी को भेजने के सबूत के तौर पर आपके पास डाकघर की रसीद होती है। डाकघर यह जिम्मेदारी लेता है कि जो अभिस्वीकृति पत्र आप ने लिफाफे के साथ लगाया है उस पर पाने वाले के हस्ताक्षर करवा कर आप के पास लौटाएगा। यदि 30 दिनों में अभिस्वीकृति पत्र आप को वापस नहीं मिलता है तो आप डाकघर को पत्र दे कर पूछ सकते हैं कि उस ने उस पत्र का क्या किया। इस पर डाकघर आप को एक प्रमाण पत्र देता है कि आप का पत्र फलाँ दिन अमुक व्यक्ति को अमुक पते पर डिलीवर कर दिया गया है। अब आप रजिस्टर्ड पत्र या रजिस्ट्री शब्द का अर्थ समझ गए होंगे कि आप का पत्र आप के द्वारा डाक में देने से ले कर पाने वाले तक पहुँचने  तक हर स्थान पर रिकार्ड़ में दर्ज किया जाता है।

इसी तरह जब  कोई भी दस्तावेज जैसे विक्रय पत्र, दान पत्र, मुख्तार नामा, गोदनामा, एग्रीमेंट, राजीनामा, बंटवारानामा आदि लिखा जाता है तो उस में किसी संपत्ति के हस्तांतरण या हस्तान्तरण किए जाने का उल्लेख होता है। अधिकारों का आदान प्रदान होता है। तब उस दस्तावेज को हम डीड या विलेख पत्र, या प्रलेख कहते हैं। हमारे यहाँ पंजीकरण अधिनियम (रजिस्ट्रेशन एक्ट) नाम का एक केन्द्रीय कानून है जिस के अंतर्गत यह तय किया हुआ है कि कौन कौन से दस्तावेज हैं जिन का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा, कौन से दस्तावेज हैं जिन का ऐच्छिक रूप से आप पंजीयन करा सकते हैं। इस के लिए हर तहसील स्तर पर और नगरों में एक या एक से अधिक उप पंजीयकों के दफ्तर खोले हुए हैं जिन में इन दस्तावेजों का पंजीयन होता है। यदि पंजीयन अधिनियम में किसी दस्तावेज की रजिस्ट्री कराना अनिवार्य घोषित किया गया है तो उस दस्तावेज की रजिस्ट्री अनिवार्य है अन्यथा उस दस्तावेज को बाद में सबूत के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर किसी भी 100 रुपए से अधिक मूल्य की स्थाई संपत्ति (प्लाट या मकान, दुकान) के किसी भी प्रकार से हस्तांतरण विक्रय, दान आदि का पंजीकृत होना अनिवार्य है अन्यथा वह संपत्ति का हस्तांतरण नहीं माना जाएगा।  अब आप समझ गए होंगे कि रजिस्ट्री का क्या मतलब होता है। रजिस्ट्री से कोई भी दस्तावेज केवल उप पंजीयक कार्यालय में दर्ज होता है उस का निष्पादन किया जाना प्रथम दृष्टया सही मान लिया जाता है।

विक्रय पत्र सेल डीड –

कोई भी स्थाई अस्थाई संपत्ति जो प्लाट, दुकान, मकान,वाहन, जानवर आदि कुछ भी हो सकता है उसे कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित कर सकता है। यह हस्तांतरण दान हो सकता है अदला बदली हो सकती है, या धन के बदले हो सकता है। जब यह धन के बदले होता है तो इसे विक्रय कहते हैं। इस विक्रय का दस्तावेज लिखना होता है। इसी दस्तावेज को विक्रय पत्र कहते हैं। यदि यह संपत्ति स्थाई हो और उस का मूल्य 100 रुपए हो तो उस का विक्रय पत्र उप पंजीयक के यहाँ पंजीकरण कराना जरूरी है। यदि पंजीकरण नहीं है तो ऐसा विक्रय वैध हस्तान्तरण नहीं माना जाएगा। यह विक्रय पत्र वस्तु को विक्रय करने वाला वस्तु का वर्तमान स्वामी निष्पादित करता है और उस पर गवाहों के ह्स्ताक्षर होते हैं। यदि वस्तु का वर्तमान स्वामी किसी कारण से उप पंजीयक के कार्यालय तक पहुँचने में असमर्थ हो तो उस स्वामी का मुख्तार (अटोर्नी) यह विक्रय पत्र स्वामी की ओर से निष्पादित कर सकता है। इस के लिए उस के पास वैध अधिकार होना चाहिए।

मुख्तारनामा या पावर ऑफ अटॉर्नी-

जब कोई संपत्ति का स्वामी स्वयं पंजीयन के लिए उप पंजीयक के कार्यालय में उपस्थित होने में असमर्थ हो तो वह एक मुख्तार नामा या पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित कर किसी अन्य व्यक्ति को मुख्तार या अटॉर्नी नियुक्त कर देता है जो कि उस की ओर से उप पंजीयक कार्यालय में उपस्थित हो कर दस्तावेज अर्थात विक्रय पत्र आदि का विक्रय पत्र हस्ताक्षर कर सकता है और उस का पंजीयन करा सकता है विक्रय का मूल्य प्राप्त कर सकता है। इस के लिए यह आवश्यक है कि मुख्तार नामा के द्वारा मुख्तार को ये सब अधिकार देना लिखा हो। मुख्तार नामा किसी भी काम के लिए दिया जा सकता है। लेकिन वह उन्हीं कामों के लिए दिया हुआ माना जाएगा जो मुख्तार नामा में अंकित किए गए हैं इस कारण मुख्तार द्वारा कोई दस्तावेज निष्पादित कराए जाने पर मुख्तारनामे को ठीक से पढ़ना जरूरी है जिस से यह पता लगे कि वह किन किन कामों के लिए दिया जा रहा है। मुख्तार नामा का पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है वह किसी नोटेरी से तस्दीक कराया गया हो सकता है लेकिन यदि वह किसी स्थाई संपत्ति मकान, दुकान, प्लाट आदि के विक्रय के हो तो उस का पंजीकृत होना जरूरी है। कई बार जब किसी संपत्ति के हस्तांतरण पर किसी तरह की रोक होती है या कोई और अड़चन होती तब भी वस्तु को विक्रय करने के लिए एग्रीमेंट कर लिया  जाता है और क्रेता के किसी विश्वसनीय व्यक्ति के नाम मुख्तार नामा बना कर दे दिया जाता है ताकि मुख्तार जब वह अड़चन हट जाए तो क्रेता के नाम विक्रय पत्र पंजीकृत करवा ले। लेकिन इस तरह से क्रेता के साथ एक धोखा हो सकता है। मुख्तार नामा कभी भी निरस्त किया जा सकता है। यदि संपत्ति का मालिक ऐसी अड़चन समाप्त होने पर या उस के पहले ही मुख्तार नामा को निरस्त करवा दे तो फिर मुख्तार को विक्रय पत्र निष्पादित करने का अधिकार नहीं रह जाता है। इस तरह मुख्तार नामा के माध्यम से किसी संपत्ति का क्रय करना कभी भी आशंका या खतरा रहित नहीं होता है।

संपत्ति का बँटवारा या तो पंजीकृत या न्यायालय की डिक्री से न हो तो वह वैध नहीं है।

rp_fake-medicin.jpgसमस्या-

मीनाली जैन ने बागपत उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मारे और हमारे चाचा के बीच सपंत्ति के बटवारे को लेकर जो समझौतानामा हुआ वह गलत था और 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर हमारे चाचा ने हमारी मम्मी और भाई के हस्ताक्षर करा लिए हमारे पापा का देहान्त हो चुका है। जिन लोगों ने हमारा समझौता कराया था उन्होंने भी गवाह बन कर गलत समझौते नामा पर हस्ताक्षर कर दिए। उस पेपर पर चाचा ने हमारी एक दुकान और चाचा के घर में हमारे पापा  का जो आधा हिस्सा था वो भी अपने नाम कर लिया और पैसे भी नहीं दिए। इस समझौता नामा को रोकने के लिए मेरी मममी या भाई कुछ कर सकते हैं या उनकी जगह पुत्री होने के नाते मैं और मेरी बहन कोई कारवाई कर सकते हैं। ये दुकान और घर हमारे पापा ने खुद खरीदा था।  हमारे दादाजी के देहांत के बाद। पापा के देहान्त के बाद पापा का बिजनेस चाचा देखने लगे जो पापा के बाद अब मेरी मममी के नाम है। लेकिन चाचा ने हमें बिजनेस मे कभी कोई हिस्सा नहीं दिया और हमारी दुकान पर हैं। चाचा ने मममी से 1996 में कुछ पैसे लिए थे ब्याज पर जो चाचा ने कभी वापस नहीं किए पर हमारे पास चाचा को पैसे देने का कोई लिखित नहीं है।

समाधान-

प की मां ने चाचाजी को 1996 में जो धन उधार दिया था उस की लिखित भी नहीं है और होती तो भी अब किसी काम की न रह जाती। कोई भी उधार सिर्फ उधार देने के 3 साल के अंदर वसूला जा सकता है।

जिस समझौतानामा की आप बात कर रही हैं वह पंजीकृत प्रतीत नहीं होता है। ऐसे समझौतानामा का कोई महत्व नहीं है। आप के पिता की संपत्ति कोई पुश्तैनी संपत्ति नहीं थी। उस में आप दोनों बहनों को अधिकार प्राप्त है। आप सम्पूर्ण संपत्ति जिस में दुकान का कारोबार सम्मिलित है के बंटवारे की कार्यवाही कर सकते हैं। इस संबंध में आप को अपने दस्तावेजों के साथ किसी अच्छे स्थानीय दीवानी वकील से मिल कर सलाह प्राप्त करनी चाहिए और कार्यवाही करनी चाहिए।

अपनी जमीन भाई को दे कर उस से पैतृक संपत्ति में हिस्सा प्राप्त करने के लिए एक्सचेंज डीड निष्पादित कराएँ.

rp_property1.jpgसमस्या-
सुदर्शन यादव ने सहरसा, बिहार से समस्या भेजी है कि-

हरसा शहर में सन् 1970 में मैंने एक पैतृक जमीन से अपना हिस्सा बेचकर इसी शहर में दूसरी जगह अपने नाम से रजिस्टर्ड विक्रय पत्र द्वारा जमीन खरीदी जिसका दाखिल-ख़ारिज कर जमाबंदी भी मेरे नाम से कायम है। नए ख़रीदी गई जमीन पर उसी समय से मेरे साथ मेरा छोटा भाई भी घर बनाकर रहता आ रहा है। क्या अब मैं उससे जमीन का कब्ज़ा वापस पा सकता हूँ या नहीं तो क्या इसी आधार पर मुझे छोटे भाई के नाम पर बचे हुए पैतृक जमीन में हिस्सा मिल सकता है?

समाधान-

पैतृक जमीन में से आप ने अपना हिस्सा बेच दिया और आप उस संपत्ति की भागीदारी से अलग हो गए। अब आप का उस जमीन में कोई हिस्सा नहीं है।

प ने उसी पैसे से अलग जमीन खरीद ली। लेकिन उस पर आप के साथ साथ आप का भाई भी मकान बना कर रह रहा है। वह आप की अनुमति से उस भूमि पर रह रहा है जब कि उस भूमि का स्वामित्व आप के नाम है। इस तरह भाई आप की भूमि पर एक लायसेंसी है। आप उस के लायसेंस को नोटिस दे कर रद्द कर सकते हैं और जमीन मकान पर कब्जे के लिए वाद दायर कर सकते हैं।

दि भाई जिस मकान में रह रहा है उस भूमि को आप अपने भाई को दे सकते हैं और बदले में अपनी पैतृक संपत्ति में उस का हिस्सा ले सकते हैं। इस के लिए आप को भाई के मकान वाली जमीन का भाई के नाम तथा पैतृक संपत्ति में उस के हिस्से का आप के नाम हस्तान्तरण करने के लिए एक्सचेंज डीड लिख कर उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत करानी होगी।

अपंजीकृत वसीयत को कैसे पंजीकृत कराएँ?

court-logoसमस्या-

अनुज जी ने मध्य प्रदेश के इंदौर से समस्या भेजी है कि

मेरे दादाजी ने एक वसीयत लिखी थी जो कि रजिस्टर्ड नहीं है। कृपया उसे रजिस्टर्ड कराने का उपाय बताएँ।

समाधान-

प के दादाजी यदि जीवित हैं तो खुद वे उप पंजीयक के कार्यालय में उपस्थित हो कर उस वसीयत को पंजीकृत करवा सकते हैं।

दि आप के दादा जी जीवित नहीं हैं तो आप उस वसीयत के गवाहों को साथ ले जा कर उक्त वसीयत को उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत करवा सकते हैं। वसीयत के गवाह यह प्रमाणित करेंगे कि यह वसीयत उन के सामने आप के दादाजी ने बिना किसी दबाव या प्रभाव के निष्पादित की थी और उन्हों ने उस वसीयत पर अपने सामने निष्पादित किए जाने के गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए थे। इस वसीयत को पंजीकृत करवाने के लिए आप किसी लायसेंस धारक डीड राइटर या फिर किसी स्थानीय वकील से सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

किसी वसीयत का पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है आप के दादा जी ने जो वसीयत की है उसे आप जिला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर उसे प्रोबेट करवा सकते हैं। इस के लिए आप को किसी स्थानीय वकील की सहायता प्राप्त करनी होगी। आप के दादा जी के सभी उत्तराधिकारियों को आवेदन का नोटिस भेज कर तथा एक सामान्य नोटिस अखबार में प्रकाशित करवा कर सूचित किया जाएगा और किसी को आपत्ति न होने पर वसीयत की जाँच कर के या आपत्तियाँ प्रस्तुत होने पर आपत्तियों की सुनवाई कर के वसीयत की जाँच कर के उसे न्यायालय द्वारा प्रोबेट किया जा सकता है। इस के लिए आप को किसी स्थानीय वकील से सहायता प्राप्त करनी होगी।

हस्तान्तरण विलेख के पंजीयन के बिना आप स्थावर/अचल संपत्ति के स्वामी नहीं हो सकते।

basement constructionसमस्या-

कैथल, हरियाणा से यश ने पूछा है-

मैंने कुछ जमीन लगभग २० वर्ष पहले अनुसूचित जाति के लोगो से खरीदी है, उस जमीन की असली मालिक ग्राम पंचायत है। यह जमीन ग्राम पंचायत द्वाराअनुसूचित जाति के लोगों को दी गयी थी| अनुसूचित जाति की जमीन होने के कारनउसकी रजिस्ट्री नहीं हो रही है। मैंने कुछ लोगों से पंचायत में उसकेखरीदने और उसके कब्जे का साधारण कागज पर लेख लिया है जिस में गवाह के रूप मेंग्राम पंचायत की मुहर भी सरपंच द्वारा लगाई हुई है तो कुछ स्टाम्प पेपर परनोटरी द्वारा अटेस्टेड है। अब मैं उस जमीन पर घर बनाना चाहता हूँ उस जमीन परमेरा कब्ज़ा भी तभी से है जब से वो जमीन मैंने खरीदी है। यदि मैं उस जमीन परघर बना लूँ तो कोई दुविधा तो नहीं होगी।

समाधान-

ह ठीक है कि आप ने जमीन खरीदी है जिस के सबूत के रूप में आप के पास सादे कागज पर विक्रय विलेख है और स्टाम्प पर नोटेरी का अटेस्टेशन भी है। पर ये सब मात्र एग्रीमेंट हैं। इन दस्तावेजों से अचल संपत्ति का हस्तान्तरण नहीं हो सकता। इन दस्तावेजों के आधार पर इतना तो माना जा सकता है कि आप ने उक्त जमीन खरीदने का सौदा किया। उस की कीमत अदा कर दी और कब्जा प्राप्त कर लिया। बीस साल से आप का कब्जा है। लेकिन आप किसी भी तरह उस के स्वामी नहीं हुए हैं। क्यों कि किसी भी स्थावर संपत्ति का स्वामित्व केवल रजिस्टर्ड हस्तान्तरण पत्र के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।

मुझे लगता है कि इस जमीन के विक्रय पत्र का पंजीयन न हो सकने का कारण यह नहीं है कि वह जमीन अनुसूचित जाति के लोगों की है। इस का मूल कारण यह होना चाहिए कि जमीन उन्हें पंचायत ने मकान बना कर रहने को दी। उन्हों ने मकान नहीं बनाया बल्कि उस का कब्जा आप को बेच दिया। पंचायत ने उन्हें कभी उस का स्वामित्व हस्तान्तरित ही नहीं किया था। जिस से वे उस के मालिक नहीं बन सके। जो व्यक्ति खुद किसी संपत्ति के मालिक नहीं हैं वे कैसे आप को स्वामित्व हस्तान्तरण कर सकते हैं। यदि ग्राम पंचायत उन्हें पट्टा जारी करती और वे उस पट्टे का पंजीयन करवा लेते तो वे उस जमीन के स्वामी हो सकते थे। तब वे आप को वह भूमि हस्तान्तरित कर के उस का पंजीयन करवा सकते थे।

ब आप मकान तो बना सकते हैं, हो सकता है उस में कोई भौतिक बाधा खड़ी न हो। लेकिन ग्राम पंचायत जो कि सरकार की प्रतिनिधि है। सरकार के किसी निर्णय के आधार पर उस भूमि पर से उस के अनुसूचित जाति के लोगों का आवंटन रद्द कर सकती है। वैसी स्थिति में आप का उक्त जमीन पर कब्जा भी अवैध हो सकता है। उस पर से आप को हटने के लिए भी कहा जा सकता है। हालांकि ऐसे मामलों में अक्सर यह होता है कि सरकार या ग्राम पंचायत उक्त भूमि का प्रीमियम ले कर कब्जेदार को पट्टा जारी कर देती है और कब्जेदार उस पट्टे का पंजीकरण करवा कर लीज होल्ड स्वामित्व प्राप्त कर लेता है।

विक्रय संविदा का पंजीकरण वहाँ होगा जहाँ संपत्ति स्थित है।

partition of propertyसमस्या-

रोहित तिवारी ने फैजाबाद, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मैं फैजाबाद जिले का रहने वाला हूँ और लखनऊ शिफ़्ट होना चाहता हूँ। इस के लियेमैंने लखनऊ में एक जमीन देखी है। लेकिन उसे खरीदने के लिए मेरे पास पूरेपैसे नहीं हैं। विक्रेता मुझे 1 वर्ष का “एग्रीमेन्ट टू सेल” लिखने कोतैयार है।आप से निवेदन है कृपया इस बात के लिये मार्गदर्शन करने की कृपाकरें कि जमीन का “एग्रीमेन्ट टू सेल” किस शहर में रजिस्टर्ड करवाना होगालखनऊ या फैजाबाद में? मैं जमीन का “एग्रीमेन्ट टू सेल” फैजाबाद मेंरजिस्टर्ड करवाना चाहता हूँ। क्या यह सम्भव है कि लखनऊ स्थित जमीन का “एग्रीमेन्ट टू सेल” फैजाबाद रजिस्ट्री दफ्तर में पंजीकृत कराया जाये?

समाधान-

प ने अपनी समस्या में किए जाने वाले एग्रीमेंट का विवरण नहीं दिया है। लेकिन दिए गए विवरण से स्पष्ट होता है कि आप उक्त जमीन को खरीदने का एग्रीमेंट करेंगे और विक्रय मूल्य की राशि का एक हिस्सा अदा कर के जमीन का कब्जा प्राप्त कर लेंगे और उस में आवास का निर्माण करेंगे।

स तरह के एग्रीमेंट को पंजीकृत करवाना आवश्यक नहीं है, लेकिन भविष्य में उस एग्रीमेंट से क्रेता इन्कार न कर दे इस कारण आप उसे पंजीकृत करवाना चाहते हैं। इस एग्रीमेंट में आप विक्रय मूल्य की कुछ राशि क्रेता को देंगे उस की स्वीकृति होगी तथा जमीन का कब्जा निर्माण करने की अनुमति के साथ आप प्राप्त करेंगे जो कि अचल संपत्ति से संबंधित है। ऐसे एग्रीमेंट को केवल वहीं पंजीकृत कराया जा सकता है जहाँ वह अचल संपत्ति स्थित हो। इस तरह आप इस एग्रीमेंट को फैजाबाद में पंजीकृत नहीं करा सकते। इसे आप को लखनऊ में ही पंजीकृत कराना होगा।

अपंजीकृत दानपत्र विधि की दृष्टि में शून्य और अकृत है।

ऊसरसमस्या-

संजय कुमार यादव ने उन्नाव उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरे पिता जी के पास 4 बीघा जमीन थी। मेरे पिता जी दो भाई हैं। दूसरे भाई की नौकरी पुलिस विभाग मे लग गई है। मेरे चाचा जी के पास कोई जमीन नहीं थी। उन्हों ने पिता जी से किसी तरह से 1 बीघा जमीन दान द्वारा प्राप्त कर ली थी। दान-पत्र पर कुछ गांव के ही लागों ने गवाही के तौर पर नाम भी लिखा है। जिसको रजिस्टर्ड नहीं कराया गया है। कुछ दिनों से चाचाजी पिता जी को परेशान कर रहे हैं, वे चाहते हैं कि पूरी जमीन उनको दे दें। परन्तु पिता जी अब उन्हें कुछ नहीं देना चाहते और वो यह चाहते हैं कि जो 1 बीघा जमीन उन्हों ने चाचाजी को दी थी वह भी वापस ले लें। क्योंकि चाचा जी गांव में रहते नहीं हैं और वो जमीन को बेचना चाहते हैं। क्या कोई तरीका है जिससे हम अपनी जमीन वापस पा सकें?

 

समाधान-

किसी भी स्थाई संपत्ति का दान पत्र यदि संपत्ति का मूल्य 100 रुपए से अधिक का हो तो उसे पंजीकृत होना चाहिए। आप के पिताजी द्वारा लिखा गया दानपत्र इस जरूरी शर्त को पूरा नहीं करता इस कारण वह दानपत्र कानून की निगाह में व्यर्थ है। इस दान पत्र के आधार पर तो राजस्व विभाग के रिकार्ड में नामान्तरण नहीं कराया जा सकता। इस स्थिति के अनुसार उक्त जमीन आज भी आप के पिताजी की ही है। जिसे आप दान समझ रहे हैं वह शून्य और अकृत है।

प के पिता जी को उक्त जमीन के मामले में कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। बस वेउस 4 बीघा जमीन पर अपना कब्जा बनाए रखें।

बँटवारा विलेख का पंजीकृत होना जरूरी, लेकिन बँटवारे के स्मरण पत्र का पंजीकरण जरूरी नहीं

partition of propertyसमस्या-
अमित ने इन्दौर, मध्यप्रदेश से पूछा है-

रिवार के मध्य किसी भी प्रकार कि पारिवारिक सदस्यो  के मध्य चल और अचल सम्पत्तियों का बटवारा कैसे हो? इस हेतु कौन सा लेख बनाया जाना आवश्यक है? और उस पर स्टाम्प ड्यूटी क्या होगी?

समाधान-

बँटवारा आपसी सहमति से किया जा सकता है। बँटवारे का विलेख लिखा जा सकता है जिसे आम भाषा में बँटवारानामा या विभाजन–पत्र कहा जाता है।  इस पर परिवार के सभी सदस्य़ों और साक्षीगण के हस्ताक्षर होने आवश्यक हैं। इस का पंजीकृत होना भी जरूरी है।

दि विभाजन-पत्र  पंजीकृत नहीं है तो ऐसा विभाजन-पत्र किसी भी न्यायालय में साक्ष्य के रूप में ग्रहण नहीं किया जा सकता।

र प्रदेश में स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क भिन्न भिन्न है। इस के लिए आप स्थानीय उपपंजीयक के कार्यालय से जानकारी कर सकते हैं कि आप के विभाजन पर कितनी स्टाम्प ड्यूटी और शुल्क देनी होगी।

दि विभाजन परिवार के सदस्यों के बीच मौखिक रूप से हो जाए और विभाजन के अनुसार सब सदस्य अपने अपने हिस्से पर काबिज हो जाएँ, तो पहले से आपसी सहमति से हो चुके विभाजन का स्मरण-पत्र लिखा जा कर परिवार के सभी सदस्यों और साक्षीगण के हस्ताक्षर करवा कर उसे नोटेरी पब्लिक के यहाँ सत्यापित कराया जा सकता है। विभाजन के ऐसे स्मरण पत्र का पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है। ऐसा विभाजन का स्मरण-पत्र न्यायालय के समक्ष साक्ष्य में भी ग्राह्य होगा।

एनजीओ क्या हैं, कैसे बनाए जा सकते हैं और इन के माध्यम से क्या काम किए जा सकते हैं?

Rural development NGOसमस्या-
शरणजोत सिंह और नवदीप ने अनूपगढ़, राजस्थान पूछा है-

मैं शरणजोत सिंह एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ मेरा गाँव चाक 27/ए तहसील अनूपगढ़ जिला श्रीगंगानगर है। हमारे गाँव की गलियों का बहुत बुरा हाल है, हम ने कोशिश की लेकिन कोई मदद नहीं कर रहा है। मुझे सलाह दें कि मैं क्या कर सकता हूँ?

हीं नवदीप ने पूछा है कि मैं एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) खोलना चाहता हूँ, मैं इसे कैसे आरंभ कर सकता हूँ? इस का पंजीयन कहाँ से हो सकता है?

समाधान-

नजीओ का शाब्दिक अर्थ गैर सरकारी संगठन है। इस का विकास अमरीका से हुआ है। अमरीका में सरकार बहुत से सामाजिक कार्य स्वयं करने के स्थान पर इन संगठनों के माध्यम से अनुदान दे कर कराती है। इस कारण से वे लाभ या व्यवसाय के कामों के अतिरिक्त अन्य कार्यों को करने के उद्देश्य से निर्मित गैर सरकारी संगठन जो कि सरकार से या किसी धनी संस्था से अनुदान प्राप्त कर के सामाजिक कार्य करते हैं एनजीओ कहे जाते हैं।

कोई एक व्यक्ति एनजीओ नहीं होता अपितु एक संस्था के रूप में पंजीकृत होने के बाद विधिक व्यक्ति बन जाता है। भारत में लगभग सभी एनजीओ सोसायटीज एक्ट के अन्तर्गत बनाए जाते हैं। इस के लिए केन्द्रीय कानून सोसायटीज एक्ट है तथा राजस्थान में राजस्थान सोसायटीज एक्ट बना हुआ है। कोई भी 7 या अधिक व्यक्ति आपस में मिल कर कोई सोसायटी बना सकते हैं और सोसायटीज एक्ट के अन्तर्गत उसे पंजीकृत करवा सकते हैं। सोसायटी बनाने के लिए यह स्पष्ट करना जरूरी होता है कि उस संगठन की कार्यकारी समिति कैसे बनेगी और कैसे कार्यकरेगी, उस के लिए धन कैसे एकत्र किया जाएगा और कैसे खर्च किया जाएगा आदि आदि। इस को लिए नियम बनाने होते हैं और उन्हें पंजीकृत करवाना होता है। राजस्थान में सहकारी समिति के पंजीयक, अतिरिक्त पंजीयकों और डिप्टी पंजीयकों को ही सोसायटीज एक्ट के अंतर्गत पंजीयक बना रखा है। आप उन के कार्यालय से नमूने के नियम की प्रतिलिपि, आवेदन पत्र की प्रति प्राप्त कर सकते हैं और उस में अपने अनुरूप संशोधन कर के अपने नियम बना कर सोसायटी का पंजीयन करवा सकते हैं। यहाँ नवदीप जी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे किस उद्देश्य के लिए एनजीओ बनाना चाहते हैं। लेकिन यदि उन का इरादा कोई व्यक्तिगत लाभ का काम करने का है तो एनजीओ उस के लिए उचित माध्यम नहीं है।

धर शरणजोत सिंह की समस्या यह है कि गाँव में अव्यवस्था है और उस बारे में उन की कोई सुनता नहीं है। वैसे यह काम गाँव की पंचायत का है। उसे ये सब कार्य करना चाहिए। लेकिन जब तक जनता का दबाव नहीं होता और ग्राम पंचायत में संसाधन और काम करने की इच्छा शक्ति नहीं होती ऐसे कार्य नहीं होते। इस के लिए गाँव में जन दबाव निर्मित करना आवश्यक है। यह काम कोई गैर सरकारी संगठन ही कर सकता है।

रणजोत सिंह जी गाँव के अन्य कम से कम छह और लोगों को एकत्र कर के सोसायटीज एक्ट में एक सोसायटी का निर्माण कर सकते हैं और उसे पंजीकृत करवा सकते हैं। वे इस सोसायटी की सदस्यता बढ़ा सकते हैं। इस के माध्यम से वे ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद पर जन दबाव पैदा कर सकते हैं। वे इस सोसायटी के माध्यम से गाँव के विकास के लिए काम कर सकते हैं, रोजगार के साधन जुटाने के काम कर सकते हैं। गाँव और ग्रामीणों के विकास के लिए बनने वाली सरकारी योजनाओं से सोसायटी के लिए धन प्राप्त कर गाँव और ग्रामीणों के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर सकते हैं।

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada