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किसी भी पंजीयन के लिए झूठे तथ्यों का शपथ पत्र देना अपराध है।

समस्या-

मुरारी ने रामगढ़ पचवाड़ा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरा विवाह 2003 में हुआ था, 1989 जन्म तिथि है। तब में 14 वर्ष का था। तो क्या में 21 वर्ष 2010 में होने पर 21 वर्ष की डेट में विवाह पंजीयन करा सकता हूँ?  ये गलत होगा या सही? इससे पहले मेरे दो बच्चे भी हो गए अगर 2010 की डेट में करवाता हूँ तो शादी से पहले दो बच्चे नौकरी में अयोग्यता का आधार तो नही होंगे? उचित सलाह दें।


समाधान-

ब से बड़ी गलत बात तो यह है कि आप विवाह की एक ऐसी तारीख चुन रहे हैं जो सही नहीं है। जिस तिथि को आप का विवाह हुआ था उस के सिवा किसी भी अन्य तारीख का विवाह का पंजीयन कराना गलत होगा। क्यों कि इस के लिए आप झूठ बोलेंगे, झूठा शपथ पत्र देंगे जो अपराध होगा जिस के लिए आप को सजा हो सकती है। यदि नौकरी लग भी जाए तो इसी कारण छूट भी सकती है और आप को कारावास का दंड भी भुगतना पड़ सकता है।

यह सही है कि आप की शादी हुई तब आप नाबालिग थे, या विवाह की उम्र के नहीं थे। विवाह हुए 14 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। यदि वह बाल विवाह किसी के लिए आप के व आप की माता की पत्नी का अपराध था भी तो अब इतना समय गुजर चुका है कि उस मामले में पुलिस या कोई भी उन के वि्रुद्ध कोई कार्यवाही नहीं कर सकता। इस कारण किसी का अपराध छुपाने के लिए झूठ बोलने की  जरूरत ही नहीं है और बोलते हैं तो अपराध छुपाना भी अपराध है। इस कारण से आप को झूठ नहीं बोलना चाहिए।

कोई भी हिन्दू विवाह यदि संपन्न हो जाता है तो वह गलत हो सकता है लेकिन समाप्त नहीं होता और वैध होता है। इस कारण कम उम्र में किया गया आप का विवाह पूरी तरह से वैध है और आप उस का पंजीयन करवा सकते हैं। मेरी राय में आप को विवाह का पंजीयन उसी तिथि का करवाना चाहिए जिस तिथि में आप का विवाह हुआ है। इस से आप को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। यदि पंजीयक पंजीयन करने से  मना करे तो न्यायालय से पंजीयक के विरुद्ध घोषणा व आदेशात्मक व्यादेश का वाद प्रस्तुत कर डिक्री पारित कराई जा सकती है और पंजीयन करवाया जा सकता है।

 

संपत्ति के स्वत्व के दस्तावेज का पंजीयन अवश्य कराएँ।

sub-registrar-officeसमस्या-

तीरथ जैन ने घोरडा, छत्तीसगढ़ से पूछा है-

32 वर्ष पूर्व आबादी भूमि का पट्टा बन चुका है। क्या उस की रजिस्ट्री हो सकती है? ग्रामवासी बेचने पर आपत्ति कर रहे हैं।

समाधान-

कोई भी संपत्ति हस्तान्तरण जो कि 100 रुपए से अधिक की संपत्ति का है उस का पंजीयन कराया जा सकता है। संपत्ति की कीमत 100 रुपए से कम होने पर भी संपत्ति का हस्तान्तरण ऐच्छिक रूप से पंजीकृत कराया जा सकता है। बल्कि संपत्ति के स्वत्व के दस्तावेज का पंजीयन अवश्य करा लेना चाहिए।

आप को पट्टा जिस एजेंसी (ग्राम पंचायत आदि) ने जारी किया हो वहाँ आवेदन प्रस्तुत करें और कहें कि पट्टा रजिस्ट्री कराने के लिए आवश्यक कार्यवाही करें। आप के पास जो मूल पटटा है उस के संबंध में ग्राम पंचायत एक अग्रेषण पत्र उप पंजीयक के नाम जारी करे कि इस पट्टे का पंजीयन किया  जाए। उस पत्र के प्रस्तुत होने पर पट्टे का पंजीयन किया जा सकता है।

यदि ग्राम पंचायत ऐसा पत्र जारी करने से इन्कार कर दे तो भी आप सीधे उप पंजीयक के यहाँ जा कर पंजीयन की प्रक्रिया जान सकते हैं। यह हो सकता है कि आप को संपत्ति की वर्तमान कीमत पर पंजीकरण शुल्क और स्टाम्प ड्यूटी अदा करनी पड़े।

 

पति की मृत्यु हो जाने के उपरान्त विवाह को कैसे पंजीकृत कराएँ?

ChildMarriageसमस्या-

अनिल मीणा बून्दी, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पति का स्वर्गवास जनवरी 2014 में हो गया। पति कि मृत्यु तक मैं ने अपना विवाह प्रमाण पत्र नहीं बनवाया था। अब मैं कहीं भी आवेदन करती हूँ तो सभी मुझसे विवाह प्रमाण पत्र मांगते हैं। श्रीमान क्या अब में विवाह प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकती हूँ। अगर करूँ तो पति कि जगह किस के हस्ताक्षर करवाऊँ। मेरा विवाह 17 मई 2005 को हुआ था।

समाधान-

विवाह का प्रमाण पत्र तभी मिलता है जब कि विवाह का पंजीयन हुआ हो। विवाह के एक पक्षकार का देहान्त हो जाने के उपरान्त आप के विवाह का पंजीकरण होना नियमानुसार संभव नहीं है। यही कारण है कि आप को विवाह का प्रमाण पत्र विवाह पंजीयक से नहीं मिल सकता।

हाँ भी आप आवेदन प्रस्तुत करती हैं तो आप की स्टेटस जानने के लिए विभाग अपने नियमों के अनुसार आप का विवाह प्रमाण पत्र व आप के पति का मृत्यु प्रमाण पत्र चाहते हैं जिस से आप को पति की विधवा होने का सबूत उन्हें मिल सके। आप की इस समस्या का हल केवल सिविल न्यायालय की डिक्री से हो सकता है।

प विवाह के पंजीकरण के लिए आवेदन दें। उस में पति के हस्ताक्षर का स्थान खाली छोड़ दें और अंकित करें कि पति का देहान्त हो गया है तथा साथ में पति का मृत्यु प्रमाण पत्र लगा दें। आप का यह आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। वैसी स्थिति में आप विवाह पंजीयक को प्रतिवादी बनाते हुए सिविल न्यायालय में घोषणा व स्थाई व्यादेश (Permanent Injunction) का वाद प्रस्तुत कर दें जिस में आप यह अभिवचन अंकित करें कि आप का विवाह आप के पति के साथ निश्चित तिथि को हुआ था। आप का यह विवाह पंजीकृत नहीं कराया गया और आप के पति का देहान्त हो गया। अब आप से बार बार हर स्थान पर विवाह प्रमाण पत्र मांगा जाता है लेकिन विवाह पंजीयक ने विवाह का पंजीयन करने से इन्कार कर दिया है। ऐसी स्थिति में घोषणा की जाए कि आप का विवाह आप के पति के साथ हुआ था। पति का देहान्त हो गया और आप आप के पति की विधवा हैं। विवाह पंजीयक को यह व्यादेश प्रदान किया जाए कि वे आप के विवाह का पंजीकरण कर आप को विवाह का प्रमाण पत्र जारी करें।

स मामले में न्यायालय घोषणा की डिक्री तो पारित करेगा ही। इस के साथ ही विवाह पंजीयक को आप का विवाह पंजीकृत करने और विवाह प्रमाण पत्र जारी करने का व्यादेश भी दे सकता है। यदि इस तरह का व्यादेश न भी दे तो न्यायालय की डिक्री से आप का काम चल जाएगा। आप विवाह प्रमाण पत्र के स्थान पर न्यायालय की डिक्री प्रस्तुत कर सकेंगी।

विक्रय के अनुबंध का पंजीयन अनिवार्य नहीं है।

agreementसमस्या-

नितिन ने उत्तर प्रदेश गाजियाबाद से पूछा है-

मेरा एक मित्र गाजियाबाद में एक मकान लेना चाहता है। मकान मालिक से उसकीबातचीत पक्की हो गई है। लेकिन पूरे पैसे इक्टठे नहीं हो पाने के कारण अभीरजिस्ट्री नहीं करा पा रहा है। मकान मालिक को कुछ पैसे देकर विक्रय अनुबंध करवाना चाहता है। सुरक्षा के लिहाज से इस में कितने रुपयेका स्टाम्प पेपर लगेगा और क्या इसका रजिस्ट्रेशन जरूरी है? कृपया मार्गदर्शनकरें।

समाधान-

स्थावर संपत्ति के विक्रय का अनुबंध (Agreement to sale of immovable property) जिस में संपत्ति का कब्जा लेने का कथन नहीं किया गया हो और विक्रय पत्र के पंजीयन से पहले संपत्ति का कब्जा देने का उल्लेख न हो तो जितनी स्टाम्प ड्यूटी विक्रय पत्र पर लगती है उस की आधी स्टाम्प ड्यूटी पर अनुबंध होना चाहिए।

स्थावर संपत्ति के विक्रय पर उत्तर प्रदेश में संपत्ति के बाजार मूल्य के 12.5 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी है। उदाहरणार्थ यदि किसी संपत्ति का मूल्य 1,00,000/- रुपया है तो उस के विक्य पत्र पर 12500/- रुपया स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी और विक्रय के अनुबंध पर 6.25 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी। हम यह स्टाम्प ड्य़ूटी हमारे रिकार्ड के अनुसार बता रहे हैं। फिर भी आप को स्थानीय उप पंजीयक कार्यालय से स्टाम्प ड्यूटी की दर के बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए।

नुबंध पर जितनी स्टाम्प ड्यूटी अदा की जाएगी उतनी स्टाम्प ड्यूटी विक्रय पत्र के पंजीयन के समय कम हो जाएगी।

विक्रय के अनुबंध का पंजीयन अनिवार्य नहीं है। लेकिन यदि आप उस का पंजीयन करवा लेते हैं तो आप सुरक्षित रहेंगे।

वैध विवाह का पंजीयन आवश्यक है, उस के पंजीयन से इन्कार नहीें किया जा सकता।

Hindu Marriage1समस्या-
जितेन्द्र ने कोटा, राजस्थान से पूछा है-

मैं ने पिछले माह मन्दिर में विवाह किया है। इस में मरे परिवार के सभी सदस्य सम्मिलित थे किन्तु मेरी पत्नी का कोई परिजन सम्मिलित नहीं था। हम दोनों वयस्क हैं और आपसी सहमति से विवाह किया है। क्या हमारे विवाह का पंजीयन नगर पालिका/ नगर निगम के जन्म मृत्यु पंजीयक के यहाँ हो सकता है?

समाधान-

प्र त्येक वैध विवाह का पंजीयन आवश्यक है और उस का पंजीयन किए जाने से इन्कार नहीं किया जा सकता। यदि आप का विवाह वैध है तो आप के विवाह का पंजीयन हो सकता है। इस के लिए विवाह के साक्षियों के शपथ पत्र व जिस पंडित ने आप का विवाह संपन्न कराया है उस का प्रमाण पत्र, आप दोनों के फोटो, विवाह के फोटो तथा कुछ अन्य दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है। जिस के बारे में आप को नगर निगम के विवाह पंजीयन कार्यालय में जानकारी प्राप्त हो सकती है। आप नगर निगम से यह जानकारी प्राप्त करें और सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करें।

भूमि की किस्म गलत लिखने पर पंजीकृत विक्रय पत्र निरस्त कराया जा सकता है

agricultural-landसमस्या-

रीवा, मध्यप्रदेश से प्रिया ने पूछा है-

पिता जी ने कृषि भूमि उद्योग को बेची। उस भूमि में पेड़ पौधे थे।  लेकिन उद्योग ने कृषि भूमि को रजिस्ट्री में बंजर भूमि बिना पेड़ पौधे की भूमि लिखाया, पैसे भी बंजर भूमि हिसाब से दिया। पेड़ पौधे का पैसा नहीं दिया। विक्रय पत्र की रजिस्ट्री में जबरन हस्ताक्षर करवा लिये। क्या रजिस्ट्री वैध है?

समाधान-

किसी भी विक्रय पत्र का पंजीयन रजिस्ट्रार कार्यालय में होता है। यदि विक्रय पत्र में पेड़ पौधे वाली भूमि को बंजर लिखाया गया था तो वहीं आपत्ति की जानी चाहिए थी। जब तक विक्रय पत्र को दीवानी न्यायालय से निरस्त नहीं कराया जाता है तब तक उसे वैध ही माना जाएगा। यह सब इस लिए किया जाता है ताकि उद्योग को अधिक स्टाम्प ड्यूटी तथा पंजीयन शुल्क न देनी पड़े।

प के पिता जी के पास एक मार्ग यह है कि वे उप पंजीयक तथा कलेक्टर स्टाम्प को शिकायत करें कि स्टाम्प ड्यूटी व पंजीयन शुल्क बचाने के लिए उद्योग ने विक्रय पत्र में भूमि का मूल्य कम लिखाया है और आप के पिता जी को भी कम दिया गया है। इस से स्टाम्प शुल्क की कमी के कारण रजिस्ट्री में आपत्ति लग जाएगी तथा उस में कलेक्टर स्टाम्प के यहाँ सुनवाई होगी।

प के पिताजी को तुरन्त उद्योग को नोटिस देना चाहिए कि जमीन पेड़ पौधे वाली है और आप को जमीन का मूल्य कम दिया गया है और विक्रय पत्र में भी कम लिखाया गया है। इस कारण से वे आप के पिताजी को शेष मूल्य का भुगतान करें अन्यथा आप के पिताजी विक्रय पत्र निरस्त कराने के लिए वाद दायर करेंगे। साथ ही जो धोखाधड़ी की है उस के लिए पुलिस में रिपोर्ट लिखाएंगे और पुलिस ने कार्यवाही न की तो सीधे न्यायालय में शिकायत करेंगे।

ह सब करने के पहले आप के पिताजी को इस बात के दस्तावेजी सबूत इकट्ठा करने होंगे जिस से वह जमीन पेड़ पौधे वाली साबित हो न कि बंजर साबित हो। अन्यथा किसी भी स्तर पर आप के पिता जी जमीन को पेड़ पौधे वाली साबित नहीं कर सकेंगे और सारे प्रयास असफल हो जाएंगे।

संतान दत्तक ग्रहण करने पर दत्तक ग्रहण विलेख को पंजीकृत अवश्य कराएँ।

समस्या-

दिल्ली से सुनील कुमार ने पूछा है –

मैं अपने भाई का बच्चा गोद लेने वाला हूं जो अभी पैदा होने वाला है और वे अपनी सहमति से अपना बच्चा हमें गोद दे रहे हैं। कल को मेरा भाई अपना बच्चा वापस न मांग ले इसके लिए मुझे किसी ने बताया कि कोर्ट से एडोप्शन डीड (दत्तकग्रहण विलेख) बनवा लें। एडोप्शन डीड क्या होती है?  उसके लिए हमें क्या दस्तावेज देने हैं? कितनी फीस लगती है, क्या सबूत देने होते हैं?  क्या मेरे भाई और उसकी धर्मपत्नी को व मुझे और मेरी धर्मपत्नी को भी कोर्ट जाने की जरूरत है या नहीं? कृपया हमारा मार्गदर्शन करें कि हम क्या करें? जिस से हमें बच्चा गोद लेने के बाद भविष्य में कोई परेशानी न हो।

समाधान-

adoptionकिसी भी बच्चे को गोद तभी लिया जा सकता है जब कि वह पैदा हो चुका हो। इस कारण से आप को दत्तक ग्रहण करने के लिए बच्चे के जन्म की प्रतीक्षा करनी होगी। किसी भी बच्चे को गोद लेने के लिए  गोद लेने वाले बच्चे के माता-पिता और लेने वाले पति-पत्नी की सहमति आवश्यक है। इस के लिए आप को दत्तक ग्रहण विलेख लिखना होगा। जिस में यह उल्लेख किया जाएगा कि बच्चा किन माता पिता का है, वे गोद देना चाहते हैं और कौन पति-पत्नी बच्चा गोद लेना चाहते हैं। चारों की सहमति है। आप दत्तक ग्रहण विलेख किसी वकील या डीडरायटर से लिखवा लेंगे तो उत्तम रहेगा। हर राज्य में इस के लिए अलग अलग स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क निर्धारित है। वकील या उप पंजीयक कार्यालय से पता किया जा सकता है कि कितनी स्टाम्प ड्यूटी लगेगी और कितनी फीस लगेगी। दत्तक ग्रहण को जरूरी नहीं कि पंजीकृत कराया ही जाए। घर में परंपरागत रीति से समारोह कर के भी दत्तक ग्रहण किया जा सकता है। लेकिन ऐसे दत्तक ग्रहण को साबित करने के लिए बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। इस कारण दत्तक ग्रहण विलेख पंजीकृत कराना उचित है, अवश्य ही करवा लेना चाहिए। इस से भविष्य में होने वाली अनेक परेशानियों से बचा जा सकता है।

निर्धारित ड्यूटी के स्टाम्प पेपर पर दत्तक ग्रहण विलेख लिखा या टाइप किया जा कर आवेदन के साथ उप पंजीयक के कार्यालय में प्रस्तुत होगा। वहाँ गोद देने वाले माता-पिता से तथा गोद लेने वाले पति-पत्नी से पूछा जाएगा कि वे क्या सहमति से ऐसा कर रहे हैं। इस के लिए दो साक्षियों का भी उपस्थित रहना आवश्यक है जिन के दत्तक ग्रहण विलेख पर हस्ताक्षर होंगे। गोद देने वाले और लेने वाले दम्पतियों और साक्षीगण की फोटो आईडी और निवास के पते के सबूत आवश्यक हैं। दोनों दम्पतियों के छाया चित्र और बच्चे का छाया चित्र भी आवश्यक है।

प के द्वारा दत्तक ग्रहण विलेख उप पंजीयक के पास प्रस्तुत होने पर उस की संतुष्टि होने पर कि दत्तक ग्रहण स्वेच्छा से किया जा रहा है और किसी तरह का लेन देन इस में सम्मिलित नहीं है उप पंजीयक पंजीयन शुल्क जमा करवा कर विलेख को पंजीकृत कर देगा तथा पंजीकृत प्रलेख आप को दे देगा। इस प्रलेख की एक प्रति उप पंजीयक के कार्यालय में रखी जाएगी जिस का भविष्य में निरीक्षण किया जा सकेगा तथा जिस की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त की जा सकेगी।

विक्रय-पत्र के पंजीयन हेतु मृत विक्रेता के उत्तराधिकारियों पर संविदा के विशिष्ट अनुपालन का वाद किया जा सकता है

समस्या-

मेरठ, उत्तर प्रदेश से युवराज ने पूछा है-

म एक घर में पिछले 30 साल से रह रहे हैं और जिसका मुख़्तार नामा और विक्रय पत्र हमारे पिता जी के नाम है।  विक्रेता ने संपत्ति को विक्रय कर दिया था और पिताजी ने उस संपत्ति का संपूर्ण विक्रय मूल्य अदा कर के संपत्ति पर कब्जा प्राप्त कर लिया था। एग्रीमेंट में सम्पूर्ण संपत्ति का अधिकार हर प्रकार से पिता जी को दिए जाने की बात अंकित है लेकिन पिता जी ने उसकी रजिस्ट्री नहीं कराई थी। तीन महीने पहले पिता जी की मृत्यु हो गई है, मूल विक्रेता की भी मृत्यु हो चुकी है। ऐसी स्थिति में हम किस प्रकार रजिस्ट्री अपने नाम कर सकते हैं या इस के लिए मुझे क्या करना होगा?

समाधान-

hotelकोई भी अपंजीकृत विक्रय पत्र जिस में विक्रय की गई अचल संपत्ति का मूल्य 100 रुपए से अधिक का है मान्य नहीं है। इस कारण विक्रयपत्र का पंजीकृत होना आवश्यक है।  आप ने जिसे विक्रय पत्र कहा है वह विक्रय का इकरारनामा है जिस में विक्रय का संपूर्ण मूल्य प्राप्त कर के विक्रेता ने संपत्ति का कब्जा क्रेता को दे दिया है। क्यों कि संपत्ति का मूल्य दिया जा चुका है और कब्जा भी हस्तांतरित हो चुका है वैसी अवस्था में यदि कोई उस संपत्ति पर से आप का कब्जा हटाने का प्रयत्न करता है या कब्जे के लिए दावा करता है तो आप के पास संपत्ति हस्तान्तरण अधिनियम की धारा 53-ए के अंतर्गत यह प्रतिरक्षा ले सकते हैं कि आप विक्रय मूल्य अदा कर चुके हैं। आप के विरुद्ध उक्त संम्पत्ति का कब्जे का कोई भी दावा निरस्त हो जाएगा। लेकिन बिना विक्रय पत्र के पंजीकरण के आप उक्त संपत्ति के स्वामी नहीं कहलाएंगे और किसी भी सरकारी रिकार्ड में संपत्ति पर आप का स्वामित्व स्थापित नहीं माना जाएगा।

प ने यह नहीं बताया कि उक्त विक्रय संविदा के अंतर्गत विक्रय पत्र का पंजीकरण कराने के लिए क्या शर्त अंकित की गई थी। यदि उस में यह अंकित था कि जब भी क्रेता तैयार होगा तभी विक्रेता विक्रय पत्र का पंजीयन करवा देगा तो आप के पास अब भी उपाय मौजूद है। जो विक्रेता की जिम्मेदारी थी वही उस के उत्तराधिकारियों की जिम्मेदारी है और जो क्रेता का अधिकार है वही क्रेता के उत्तराधिकारियों का अधिकार है। इस कारण आप अपने पिता के सभी उत्तराधिकारियों की ओर से किसी वकील के माध्यम से एक विधिक नोटिस विक्रेता के उत्तराधिकारियों को भिजवाएँ कि वे उक्त संपत्ति का विक्रय पत्र आप के पिता के उत्तराधिकारियों के पक्ष में निष्पादित कर के उस का पंजीयन कराएँ। नोटिस में इस के लिए एक माह तक का समय दिया जा सकता है। यदि इस नोटिस के उपरान्त भी विक्रेता के उत्तराधिकारी विक्रय पत्र निष्पादित कर उस का पंजीयन नहीं कराते हैं तो आप विक्रेता के उत्तराधिकारियों के विरुद्ध दीवानी न्यायालय में विक्य पत्र का निष्पादन कर उस का पंजीयन कराने के लिए संविदा के विशिष्ट पालन के लिए दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

दत्तक ग्रहण विलेख अवश्य पंजीकृत कराएँ

समस्या-

कुक्षी , मध्यप्रदेश से श्रीमती परवीन ने पूछा है-

मेरी कोई संतान नहीं है तथा मैं व मेरे पति संतान गोद लेना चाहते हैं।  मेरी छोटी बहिन का पुत्र है,  छोटी बहिन व उसका पति भी पुत्र को गोद देना चाहते हैं , मेरी समस्या ये है कि गोदनामे की लिखा-पढ़ी कैसे व किस प्रारूप में व कितने रूपये के स्टाम्प पेपर पर की जाये?  तथा गोद नामा की लिखा- पढ़ी में क्या जरूरियात होनी चाहिए?  क्या सिर्फ नोटरी किया हुआ गोदनामा मान्य होगा?

समाधान-

Adoptionप के प्रश्न से यह पता नहीं लग रहा है कि आप का धर्म क्या है जिस से यह पता लगाया जा सके कि आप कौन सी व्यक्तिगत विधि से शासित होंगी।  आप ने अपना नाम परवीन लिखा है।  यह नाम मुस्लिम भी हो सकता है और हिन्दू भी।  लेकिन मुस्लिम विधि में गोद लेने का कोई प्रावधान नहीं है और किसी भी प्रकार से किसी संतान को गोद नहीं लिया जा सकता।  यदि आप मुस्लिम विधि से शासित होतीं हैं तो संतान गोद नहीं ले सकती हैं।  आप अधिक से अधिक संतान को उस के माता-पिता की सहमति से स्वयं के संरक्षण में ले सकती हैं और इस के लिए नोटेरी से सत्यापित किया हुआ एक अनुबंध (एग्रीमेंट) पर्याप्त होगा।  लेकिन इस एग्रीमेंट से केवल बच्चा आप के संरक्षण में आ जाएगा। न तो उस बालक को और न ही आप पति-पत्नी को कोई अधिकार प्राप्त होंगे और न ही कोई दायित्व तीनों पर उत्पन्न होंगे। वह सिर्फ बालक के पालन-पोषण और संरक्षण की सिविल संविदा होगी जो आप पति-पत्नी पर दायित्व तो उत्पन्न करेगी किन्तु बालक पर किसी तरह का अधिकार आप को प्राप्त नहीं होगा।

लेकिन यदि आप हिन्दू हैं तो आप के पति आप की सहमति से उस बालक को गोद ले सकते हैं तथा उस बालक के पिता अपनी पत्नी की सहमति से उसे गोद दे सकते हैं।  इस के लिए हिन्दू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम में प्रावधान दिए गए हैं।   जिस के अनुसरा यह आवश्यक है कि बालक की आयु 15 वर्ष से कम की हो।   लिखा-पढ़ी के लिए अच्छा यह  होगा कि आप दत्तक-ग्रहण के लिए दत्तक अभिलेख अपने यहाँ के किसी स्थानीय वकील से लिखवाएँ और उसे उप पंजीयक के कार्यालय में जहाँ मकानों के बेचने खरीदने के विक्रय पत्रों का पंजीयन होता पंजीकृत करवाएँ।  इस के लिए प्रत्येक राज्य में पृथक पृथक स्टाम्प ड्यूटी व पंजीयन शुल्क निर्धारित है जिस की जानकारी आप अपने क्षेत्र के उपपंजीयक कार्यालय से प्राप्त कर सकती हैं।  दत्तक ग्रहण विलेख पर मामूली स्टाम्प ड्यूटी जो राज्य सरकार द्वारा निर्धारित होती है ली जाती है तथा कुछ पंजीयन शुल्क लिया जाता है।  दत्तक ग्रहण के लिए निर्धारित मूल्य के स्टाम्प पर दत्तक ग्रहण विलेख लिखा जाएगा और पंजीकृत किया जाएगा।  दत्तक ग्रहण विलेख पंजीकृत हो जाने पर वह दत्तक ग्रहण का अविवादित साक्ष्य होता है, उसे किसी प्रकार खंडित किया जाना संभव नहीं होता।

विवाह संबंधी कोई भी कानूनी कार्यवाही करने के पहले विवाह का पंजीयन कराएँ।

समस्या-

गंगानगर, राजस्थान से मनीष ने पूछा है –

मैं ने कुछ समय पूर्व आर्य समाज में एक अन्तर्जातीय अन्तर्जातीय विवाह किया है। आर्य समाज वालों ने हमें विवाह प्रमाण पत्र भी दिया है। विवाह के बाद मेरी पत्नी अपने माता-पिता के साथ ही निवास कर रही है। वह अपने माता-पिता को मनाने का प्रयत्न कर रही है। लेकिन अभी भी उस के माता-पिता हमारे विवाह के पक्ष में नहीं हैं।  हमने अपने विवाह को विवाह पंजीयक के यहाँ पंजीकृत नहीं करवाया है। जिस के कारण हमारे पर विवाह का पंजीकरण प्रमाण पत्र नहीं है। क्या मैं धारा  97, 98 दं.प्र.संहिता में सर्च वारंट निकलवा कर अपनी पत्नी की अभिरक्षा प्राप्त कर सकता हूँ? मेरी पत्नी मेरे पक्ष में बयान देगी। क्या फिर ऐसी कार्यवाही करने के पूर्व मुझे हमारे विवाह को विवाह पंजीयक के यहाँ पंजीकृत करवा लेना चाहिए?

समाधान-

marriage certificateर्य समाज में सम्पन्न विवाह भी एक हिन्दू विवाह है। आज कल देश के अनेक राज्यों में विवाह का पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। इन राज्यों में राजस्थान भी सम्मिलित है। पंजीयन नहीं कराना अपराध भी बनाया गया है। यह दूसरी बात है कि इस अपराध के लिए दंड अत्यन्त मामूली जुर्माना मात्र है।  लेकिन विवाह से संबंधित किसी भी कार्या के लिए विवाह प्रमाण पत्र का होना आवश्यक कर दिया गया है।  धारा 97, 98 के लिए आवेदन करने पर सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट आप से यह कह सकता है कि आप को विवाह का पंजीयन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना चाहिए।

मारी राय में आप को पहले अपने विवाह का पंजीयन करवा कर पंजीयन प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेना चाहिए। विवाह का पंजीयन प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेने के उपरान्त ही अन्य कानूनी कार्यवाहियाँ करनी चाहिए।

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