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पत्नी के साथ प्रेमिका से संबंध रखते हुए दोनों के अधिकारों की बात करना पाखंड है।

rp_two-vives.jpgसमस्या-

 दीपक शर्मा ने पानीपत, हरियाणा से पूछा है-

मेरी शादी को 7 महीने हो गये हैं, लेकिन मैं किसी और से प्यार करता हूँ, जिससे मैं शारीरिक संबंध भी बना चुका हूँ। एक माह के बच्चे का अबोर्शन भी करवा चुका हूँ। इन सब बातों को मैं अपनी पत्नी को भी बता चुका हूँ।  मैं अपनी प्रेमिका को अपने साथ ही रखना चाहता हूँ। इस से मेरी पत्नी को भी कोई परेशानी नहीं है। लेकिन मैं अपनी पत्नी को भी नहीं छोड सकता। कृपया मुझे कोई तरीका बताएँ जिससे मैं दोनों को एकसाथ रखते हुए उनको समान अधिकार दिलवा सकूँ। कृपया मुझे उचित समाधान बताएँ?

समाधान-

प ने यह क्या कर लिया है और अब क्या करने जा रहे हैं? औरत कोई वस्तु या पालतू पशु नहीं है जो पूरी तरह पुरुषों की पालतू हो कर रहने लगेगी। आप की समस्या में सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी पुरुष एक से अधिक पत्नी नहीं रख सकता। विवाह के उपरान्त पत्नी के सिवाय दूसरी स्त्री से यौन संबंध नहीं रख सकता। यदि दूसरी स्त्री से संबंध रखेगा तो पत्नी इसी आधार पर उस से अलग रहने और भरण पोषण प्राप्त करने की अधिकारी तो होगी ही वह आप से तलाक की भी अधिकारी होगी और जब तक वह पुनर्विवाह नहीं कर लेती है तब तक आप से भरण पोषण प्राप्त करने की अधिकारी होगी।

पत्नी का अधिकार तो तभी भंग हो गया जब आप ने उसे बता दिया कि आप किसी को प्रेम करते हैं और साथ रखना चाहते हैं। यदि आप उसे घर नहीं भी लाते और बाहर ही प्रेमिका से संबंध रखते हैं तब भी पत्नी का अधिकार तो बाधित हो ही गया। प्रेमिका से विवाह न कर के दूसरी स्त्री से आप ने विवाह किया इस तरह प्रेमिका के पत्नी बनने के अधिकार को समाप्त ही कर दिया है। इस कारण आप दोनों के अधिकारों की बात तो न ही करें। पत्नी के साथ प्रेमिका से संंबंध रखते हुए दोनों के अधिकारों की बात करना पाखंड है।

आप ने दूसरा विवाह कर के गलती की है। आप को दोनों में से किसी एक को त्यागना पड़ेगा। आप तीनों मिल कर यह तय कर लें कि आप किस के साथ रहेंगे। यदि पत्नी के साथ रहना है तो प्रेमिका को त्याग दें। यदि प्रेमिका को छोड़ नहीं सकते हैं तो पत्नी से तलाक ले लें। उसे जो कुछ देना हो दें और खुद उस का दूसरा विवाह कराएँ। यही बेहतर है। वर्ना आप तीनों की उम्र आपस में कानूनी लड़ाइयाँ लड़ते लड़ते गुजर जानी है।

जारकर्म (Adultery) का अपराध क्या है?

rp_sex.jpgसमस्या-

योगेन्द्र सिंह ने मंडी धनोरा, अमरोहा उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

त्नी के किसी दूसरे पुरुष के साथ सम्बन्ध हों तो दूसरे पुरुष के विरुद्ध क्या कार्यवाही की जा सकती है?

समाधान-

दि किसी व्यक्ति की पत्नी के साथ कोई दूसरा पुरुष यौन संबंध स्थापित करता है और उस पुरुष का यह कृत्य बलात्कार नहीं है तो यह धारा 497 भा.दंड संहिता के अन्तर्गत “जारकर्म” का अपराध है जिस में उस दूसरे पुरुष को पाँच वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों तरह के दण्ड से दण्डित किया जा सकता है। जारकर्म के अपराध का दोषी केवल पुरुष हो सकता है। धारा 497 भा.दं.संहिता निम्न प्रकार है-

  1. जारकर्म

जो कोई ऐसे व्यक्ति के साथ, जो कि किसी अन्य पुरुष की पत्नी है और जिसका किसी अन्य पुरुष की पत्नी होना वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है, उस पुरुष की सम्मति या मौनानुकूलता के बिना ऐसा मैथुन करेगा जो बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता, वह जारकर्म के अपराध का दोषी होगा, और दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा। ऐसे मामले में पत्नी दुष्प्रेरक के रूप में दण्डनीय नहीं होगी।

स अपराध को साबित करने के लिए पत्नी के साथ दूसरे पुरूष का यौन संबंध स्थापित किया जाना साबित करना होगा, उस में स्त्री के पति की सम्मति या मौनानुकूलता नहीं होनी चाहिए।

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 198 की उपधारा (2) के अन्तर्गत उक्त अपराध के लिए केवल उस स्त्री का पति ही व्यथित व्यक्ति माना जाएगा और केवल वही इस अपराध के अन्तर्गत अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है।

ह अपराध संज्ञेय नहीं है इस कारण इस पर पुलिस सीधे कार्यवाही नहीं कर सकती। इस मामले में व्यथित व्यक्ति अर्थात उस स्त्री के पिता को ही क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के न्यायालय में स्वयं ही परिवाद प्रस्तुत करना होगा।

मतभेद गहरे हों तो विवाह विच्छेद ही उत्तम उपाय है।

domestic_violenceसमस्या-

ओमप्रकाश वनकार ने गोशमहल, बारादरी, हैदराबाद. तेलंगाना से समस्या भेजी है कि-

 मेरी पत्नी के कूर स्वभाव, कारण तो कई हैं. कुछ मुख्य कारण हैं कि, मैं शाकाहारी और वह मांसाहारी वो मुझे मांसाहार और वाइन पीने के लिये कहती है और महिला मंडली की धमकी देती है कि पुलिस में “दहेज के केस” में तुझे पिटवाऊंगी, घर का काम नहीं करना, (मैं शॉप को जाने के बाद, भोजन बनाकर खाना, शॉप से घर को आने के बाद फिर से झगड़ा शुरू. अगर मैं-मैं चुप-चाप रहता हूँ तो कहती है कि तू मुझे इस तरह पुकार-पुकार के मारना चाहता है, मेरे पर शॅंक करना, मेरे भाभियों के साथ मेरे संबंघ बताना और मेरे बड़े भाई पर उसे छेड़ना का आरोप लगाना. जब कि हम 3 ब्रदर हैं और हम एक ही शॉप (प्रिंटिंग प्रेस) में काम करते हैं. हमारे शॉप को आने-जाने का समय एक-सा रहता है. मेरे 2 बेटियाँ हैं। पत्नी लड़कर 27 एप्रिल, 2015 को अपने मायके चली गई और महिला सुरक्षा सेल में हमारे खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी. हमें नंगी-नंगी गाली-गलोच, मेरी पत्नी और उस के भाई ने दी हैं उस की हमारे पास वाइस रेकॉर्ड है.

समाधान-

भी कुछ दिन पहले ही हम कह चुके हैं कि पति-पत्नी के विवादों के लिए अधिकांशतः सांस्कृतिक अन्तर बहुत बड़ा कारण है। जब विवाह करना होता है तो यह देखते ही नहीं कि पत्नी की आदतें, खान-पान और रहन सहन कैसा है। पति पत्नी को साथ रहना होता है और परिवार में रहना होता है। अक्सर पत्नी पति के परिवार में आ कर रहती है। यदि उस के खान-पान, आदतों और रोजमर्रा के व्यवहार में बहुत अधिक अन्तर होता है तो वह कभी भी पति और उस के परिवार के साथ समायोजन बना नहीं सकती। इन सब चीजों का पता विवाह के पहले होना चाहिए। पर हम तो वस्तुतः एक लड़की को कोरा वस्तु समझते हैं और बहू बना लाते हैं और सोचते हैं आखिर हमारे परिवार में हमारी तरह रहना होगा।

लेकिन कोई लड़की या स्त्री वस्तु नहीं होती, केवल समझी जाती है। वह एक जीता जागता इंसान होती है। वह सोचती है कि जब आप पत्नी के लिए अपनी आदतें नहीं बदल रहे हैं तो वही क्यों बदले। जब उस के मायके में पिता, माता और भाई उस का साथ देने वाले होते हैं तो यह जिद बहुत गंभीर रुप धारण कर लेती है, और जब कानून पत्नी का साथ देने वाला हो तो और भी मुश्किल खड़ी हो जाती है। इतने बरस से लोग हाँका लगा रहे हैं कि कानून स्त्रियों का साथ देता है। क्यों न दे। क्यों कि अधिकांश स्त्रियाँ तो कुछ ही समय में ससुराल के परिवार के सामने हथियार डाल देती हैं। चन्द स्त्रियाँ ही इस तरह जिद पर आती हैं जैसे आप की पत्नी है। होना तो यह चाहिए था कि पत्नी या जीवनसाथी के चुनाव का तरीका बदलना चाहिए था।

में नहीं लगता कि आप की समस्या का हल सफल दाम्पत्य में हो सकता है। वायस रेकार्डिंग पत्नी द्वारा किए गए मुकदमों में आप के बचाव के सबूत के रूप में प्रस्तुत की जा सकती है। पर आप को जैसे तैसे यह विवाह विच्छेद करना होगा। आप को चाहिए कि आप सीधे सीधे सहमति से विवाह विच्छेद के लिए प्रयास करें। पत्नी को उस का स्त्री धन और स्थाई पुनर्भरण की राशि दे कर सहमति से विवाह विच्छेद का मार्ग तलाशें।

पत्नी से बात कर के निर्णय करें कि आप को आगे क्या करना चाहिए।

rp_sex.jpgसमस्या-

राज ने उज्जैन, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं उज्जैन में एक प्राइवेट जॉब करता हूँ। मेरी सगाई 24 जून 2012 को हुई थी और शादी 30-11-2012 को। इस बीच मेरी पत्नी से मेरी बातचीत होती थी, अच्छी तरह से। हम घूमते फिरते बातें करते थे। मेरी पत्नी की शादी के पहले से ही सरकारी अस्पताल में जॉब थी। शादी के पहले मुझे मेरी पत्नी ने बताया था कि उसकी माँ उसे परेशान करती है, खाने को नहीं देती, मारती ओर जॉब की सैलेरी भी रख लेती है। 30-11-2012 को शादी होने के बाद मेरी पत्नी का मेरे घर आना-जाना चलता रहता था क्यों कि जॉब का ट्रांसफर नहीं हुआ था। इसी बीच मेरी पत्नी छुट्टी में मिलने मेरे घर आई थी तो मेरी सास ओर साले ने मेरी पत्नी को फोन पे अपशब्द कहे। मैं ने इसका विरोध किया तो मेरी सास ओर साले को बुरा लगा और उन्हों ने मुझे अप शब्द कहे कि हम तो तुम्हारे डीओर्स करा देंगेष फिर मैं ओर मेरे घर के लोग मेरे सुसराल वालों से मिल के मसले का हाल निकाला और अच्छे से रहने लगे। छह माह बाद मेरी पत्नी का ट्रांसफर खरणों से उज्जैन के सरकारी अस्पताल में हो गया। फिर हम हंसी ख़ुशी से रह रहे थे। 25-12-2013 को मेरी पत्नी परीक्षा की बोल के उस की माँ के यहाँ गई। मेरे साढू भाई ओर उसकी पत्नी के साथ जो कि उज्जैन में ही मेरे घर के पास में रहते हैं। दो दिन बाद मैं ने फ़ोन किया तो मेरी पत्नी कॉल नहीं उठा रही थी। फिर मुझे कॉल ट्रैक से पता चला कि मेरी पत्नी शिरडी महाराष्ट्र घूमने गयी। ये बात 3 दिन बाद मैं ने पूछी तो मुझे मना कर दिया और जूठ बोला कि मैं कहीं नहीं गई। मैं ने इस बात पे उसे फोन पर डाँटा और कहा कि झूठ बोलने वालों की मेरे जिंदगी मे कोई जगह नहीं है, मत आना मेरे घर। फिर भी वह उज्जैन आ गई ओर उसके जीजा ओर बड़ी बहन के घर रहने लगी। तो मुझे ये अच्छा नहीं लगा तो मेरे घर के लोगो ने मुझे ओर मेरी पत्नी को समझाया और वापस घर आ गयी। फिर अच्छे से रहने लगे। 10 जुलाइ 2014 को मेरी पत्नी उसके जीजा के घर पर रहने लगी। ये बात मैं ने पूछी तो बोले की तुम्हारा किसी लड़की से चक्कर चल रहा है। ये बात बोल के 17 जुलाई को मेरे घर पर आ कर मेरी सास साले और साढू भाई ने गाली गलौच की और मारने की धमकी दी और उसके बाद मेरे खिलाफ झूठी रिपोर्ट की। मैं ने दूसरी शादी कर ली है। एसी महिला परामर्श केंद्र में रिपोर्ट दर्ज़ करा दी। वहाँ साबित हुआ कि मेरे किसी लड़की से कोई चक्कर नहीं है, ना ही दूसरी शादी की है। फिर वहाँ मेरी पत्नी ने मेरे साथ अलग रहने की डिमांड रखी। सास ससुर के साथ नहीं रहना। फिर हम अलग रहने लगे अच्छे से। 2 महीने बाद नवरात्र में 28-9-14 को लड़कों के साथ गरवा खेलने को मना करने पर हम पति पत्नी के बीच विवाद हो गया। जिस के चलते दूसरे दिन 29-9-14 को जहाँ हम लोग रहा रहे थे। वहाँ मेरे ससुराल वाले आ कर मेरा सामान रूम से बाहर फैंक दिया और मुझे मारा। इस की रिपोर्ट मैं ने थाने में कर दी। ये बात मालूम होते ही मेरे ससुराल वालों ने 3 दिन बाद 1-10-14 को मेरे ओर मेरी माँ के खिलाफ 498 की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। उसके एक माह बाद मैं ने धारा 9 का आवेदन लगा दिया साथ रहने के लिए। पर वह तारीख पर अभी तक नहीं आ रही है। और 01-10-14 से आज दिनांक 19-5-15 तक मेरी पत्नी हम मिलते जुलते हैं। मैं ने पूछा कि एसी रिपोर्ट क्यों की तो उस ने कहा कि मेरे घर के लोग नहीं चाहते तुम्हें रखना। और मैं कुछ नही कर सकती क्यों कि पत्नी ने 498 में गवाह में उसके जीजा बहन, माँ और उसके दोस्त का नाम लिखा है और मै मेरी पत्नी के साथ जहाँ भी घूमता हूँ वहाँ के फोटो ओर रिकॉर्डिंग है मेरे पास। ये सब बात मैं ने मेरी सास ओर साले को समझाने की कोशिश की पर वो नहीं मान रहे हैं ओर मेरा साढू भाई मेरे खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज करा देता है थाने में और साबित होने पर कुछ नहीं निकलता और जान से मारने की धमकी देता है कि डाइवोर्स दे दो वरना मार डालूंगा। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प लगातार पत्नी से मिल रहे हैं। उस के परिजन उसे आप से अलग करना चाहते हैं। वह फिर भी आप से मिलती जुलती है। आप के पास दो विकल्प हैं पत्नी के साथ रहने का और उस से विवाह विच्छेद कर देने का। इस का अर्थ यह है कि असली विरोध तो आप की पत्नी के अंदर है। आप पत्नी को समझाएँ कि दोनों में से एक ही बात निभ सकती है। या तो वह अपने परिवार की बात मान ले या फिर उन से सारे संबंध तोड़ कर आप के साथ हो जाए। यदि वह अपने परिवार की कीमत पर आप के साथ रहना चाहती है तो आप दोनों का साथ निभ सकता है अन्यथा नहीं। इस कारण जब तक वह अन्तिम निर्णय ले कर आप को न बता दे आप को वर्तमान स्थिति से आगे नहीं बढ़ना चाहिए। हो सकता है आप की पत्नी आप से प्रेम करती हो और आप की सास व रिश्तेदारों में से किसी ने आप का अहित करने के लिए उसे धमकाया हो और वह आप को नहीं बता रही हो। यदि ऐसा है तो आप को यह बात भी अपनी पत्नी से उगलवानी पड़ेगी जिस से वस्तुस्थिति का पता चल सके। आप की पत्नी नौकरी करती है आत्मनिर्भर है। हो सकता है उस के परिजन ये समझते हों कि यदि वह आप के प्रभाव में आ गयी तो उन की उपेक्षा करने लगेगी।

प अनन्त काल तक इस बात का इन्तजार नहीं कर सकते कि आप की पत्नी कोई निर्णय करे। इस के लिए उसे एक उचित समय भी दीजिए जिस में वह अपना अन्तिम निर्णय आप को बता दे। यदि वह आप के साथ रहना चाहती है तो धारा 9 हिन्दू विवाह अधिनियम वाले मुकदमे में न्यायालय में उपस्थित हो और बयान दे कि वह आप के साथ रहना चाहती है और उसी समय आप के साथ जाना चाहती है। लेकिन उस के परिजन इस में बाधा डालते हैं। उन से सुरक्षा प्रदान कराई जाए। इस बयान पर न्यायालय आप की पत्नी को अदालत से ही आप के साथ जाने को कह सकता है और आप अदालत की आदेशिका में यह सबह बातें आ जाने के बाद अपनी पत्नी को साथ ला कर रह सकते हैं। यदि फिर भी आप की पत्नी के परिजन आप के निजी जीवन को बाधित करते हैं तो आप अपनी पत्नी के साथ संयुक्त रिट याचिका उच्च न्यायालय में लगाएँ कि आप दोनों विवाहित हैं और आप की पत्नी की माँ व कुछ संबंधी आप को साथ रहने नहीं देना चाहते इस के लिए आप दोनों को सुरक्षा प्रदान की जाए। लेकिन यह सब तभी संभव है जब आप अपनी पत्नी को इस के लिए तैयार कर लें। यदि आप की पत्नी एक उचित समय में यह सब करने को तैयार नहीं है तो आप उसे कह सकते हैं कि इस से अच्छा है आप दोनों सहमति से विवाह विच्छेद कर लें। दोनों में से एक बात उसे माननी होगी। यदि वह इस के लिए मानती है तो फिर विवाह विच्छेद करना ही बेहतर है।

विवाह विच्छेद हो जाने के बाद पत्नी या पति जीवन साथी नहीं होते।

RTIसमस्या-

यसदानी खान ने रायपुर, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

मैं रायपुर में ही हायर सेकण्डरी स्कूल मे प्रिंसपल के पद पर कार्यरत हूँ। मेरे स्टाफ मे कुलदीप भानू व्याख्याता पद पर कार्यरत है जिस की उम्र 40 वर्ष है कुलदीप ने अपनी शादी 23 वर्ष की उम्र में की थी। वह 30 साल की उम्र तक अपनी पत्नी के साथ रहा फिर दोनों सामाजिक समझौते के तहत तलाक लेकर अलग रहने लगे। 1 साल बाद कुलदीप ने दूसरा विवाह कर लिया। कुलदीप को अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहते हुए 9 साल हो गये हैं और उसके दो पुत्र भी हैं। जनवरी 2014 में कुलदीप की पहली पत्नि के भाई ने सूचना अधिकार के तहत कुलदीप की सारी गोपनीय जानकारी की मांग की। कुलदीप एक सरकारी कर्मचारी है जिससे उसके शासकीय गोपनीय चरित्रावली की जानकारी देना सूचना अधिकार के अंर्तगत नहीं था जिस से मैं ने उसको जानकारी नहीं दी। फिर उनके भाई उनके द्वारा राज्य सूचना आयोग में भी आवेदन किया मगर वहाँ भी उनको जानकारी देने से मना कर दिया गया। उसके बाद मार्च 2014 मे कुलदीप की पहली पत्नि ने रायपुर कुटुम्ब न्यायालय में भरण पोषण के लिए आवेदन किया और कुटुम्ब न्यायालय ने जुलाई 2014 में अंतरिम भरण पोषण की राशि तय कर दी आज तक कुलदीप अपनी पहली पत्नी को भरण पोषण की अंतरिम राशि देकर भरण पोषण कर रहा है। आज वर्तमान तक कुटुम्ब न्यायालय में कुलदीप और उनकी पहली पत्नी का केस चल रहा है फाईनल आदेश नहीं हुआ है। अब मार्च 2015 में कुलदीप की पहली पत्नी ने सूचना के अधिकार 2005 के तहत कुलदीप की शासकीय गोपनीय चरित्रावली की मांग की है कुलदीप की पहली पत्नी ने केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा पारित निर्णय prashansha Sharma V/s Delhi Transco Ltd. No. CIC/SA/A/2014/000433 date 03.02.2015 के आधार पर आवेदन किया है। उनका कहना है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत कोई भी अपने जीवन साथी की आय, सम्पत्ति निवेश आदि की जानकारी मांग सकता है। केन्द्रीय सूचना आयोग (सी. आई. सी) ने इस बारे में आदेश जारी कर दिये हैं। पति की कमाई आरटीआई के अधीन हो गयी है। सूचना आयुक्त ने नई रूलिंग दी है अभी तक यह सूचनाएँ थर्ड पार्टी के तहत गोपनीय होती थी। अब पति की कमाई और निवेश का ब्यौरा पत्नि मांग सकती है। यह सभी दलिलें कुलदीप की पहली पत्नि ने आवेदन में लिख कर मुझ से कुलदीप की गोपनीय जानकारियों की मांग की है। मैं आपको ये बताना चाहूंगा की मै नें सीआईसी के द्वारा पारित उपरोक्त निर्णय को ध्यान से पढ़ा। मेरे हिसाब से उपरोक्त केस मेम सीआईसी ने सिर्फ आवेदिका और अनावेदक के लिए ही आदेश दिया है। उपरोक्त केस का फैसला केस से असंबंधित लोगों के लिए नहीं है और उपरोक्त केस में अनावेदक, आवेदिका का भरण पोषण नहीं कर रहा था इसलिए सीआईसी ने उपरोक्त केस का फैसला आवेदिका के पक्ष में किया। अब मै आपसे यह पुछना चाहता हूँ कि क्या सीआईसी ने ऐसा कुछ आदेश निकाला है जिसके तहत मुझे कुलदीप की गोपनीय जानकारीयाँ उनकी पहली पत्नी को देना पड़े, और अगर ऐसा कुछ नया नियम निकाला गया है तो सूचना के अधिकार 2005 के किस धारा में संशोधन/एड किया गया है और मुझे इन सभी नियमों की जानकारी किस बुक से प्राप्त हो सकता है। सीआईसी द्वारा उपरोक्त केस का निर्णय 03.02.2015 को लिया गया है और कुलदीप की पहली पत्नी के आवेदन के अनुसार सीआईसी द्वारा नई रूलिंग भी 03.02.2015 को पारित किया गया है। सीआईसी द्वारा उपरोक्त केस में पारित निर्णय के अनुसार जब कोई पति अपनी पत्नि का भरण पोषण नहीं कर रहा है तब पत्नि अपने पति से उनकी कमाई व निवेश का ब्यौरा मांग सकती है मगर यहाँ स्थिति यह है कि कुलदीप भानु अपनी पहली पत्नी का भरण पोषण न्यायालय के आदेश के अनुसार 15.07.2014 से कर रहा है तो आप बताइऐ कि क्या? कुलदीप की पहली पत्नी को उनके द्वारा मांगी गई जानकारी देना आवश्यक है या नहीं।

समाधान-

प की जानकारी के लिए बता रहे हैं कि सूचना के अधिकार कानून में कोई संशोधन नहीं किया गया है। यह केवल सूचना आयुक्त का निर्णय है। भारत का संविधान यह उपबंध करता है कि ऊंचे न्यायालय का निर्णय निचले न्यायालय पर बाध्यकारी होगा। इस कारण आप से यह मांग की जा रही है कि आप सूचना दें।

लेकिन इस मांग में कई खामियाँ हैं। आयुक्त का निर्णय यह कहता भी हो कि जीवन साथी की आय व संपत्ति के बारे में सूचना दिया जाना चाहिए, तो भी यह महिला उस व्यक्ति की जिस के बारे में आप से सूचना मांगी गयी है अब जीवन साथी अर्थात पत्नी नहीं है। उस की जीवन साथी तो उस की वर्तमान पत्नी है। जिसने सूचना मांगी है वह तो इस व्यक्ति से विवाह विच्छेद कर चुकी है। इस कारण आप को यह सूचना नहीं देना चाहिए।

दूसरी बात यह है कि यह आयुक्त का निर्णय है। कानून में कोई परिवर्तन नहीं है। और आप सूचना अधिकारी हो सकते हैं लेकिन न्यायालय नहीं हैं। आप पर यह निर्णय वैसे भी बाध्यकारी नहीं है। इस कारण आप के द्वारा यह निर्णय नहीं लेना चाहिए कि यह सूचना दी जाए। एक व्यक्ति की गोपनीय जानकारी सूचना के अधिकार के अन्तर्गत देना उचित नहीं है। यदि आप आवेदिका का आवेदन निरस्त करते हैं तो उसे अपील करने दीजिए। यदि अपील न्यायालय आप को निर्देश दे कि आप सूचना दें तो आप सूचना दे सकते हैं।

पत्नी जब साथ छोड़ फर्जी रिपोर्ट कराए तो उसे छोड़ देना ही ठीक है …

Wife 50-50समस्या-

रामकुमार ने राजगढ़, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी उम्र ३० वर्ष है मेरे एक लड़की अंजलि २५ वर्ष से पिछले ९ वर्षो से प्रेम सम्बन्ध थे, पिछले ८ वर्षो से हम दोनों ने शादी के बहुत प्रयास किये परन्तु विवाह नहीं हो पाया। क्यूंकि अंजलि भाग कर शादी के लिए राजी नहीं हुई, न अपने घर वालों से यह बात की कि वह मुझ से प्यार करती है। १ फरवरी २०१३ एक दिन घर वालों को इस बात का पता चला कि हम एक दूसरे को प्यार करते हैं तो उन्होंने लड़की को परेशान कर ब्लैक मेल करने की शिकायत आवेदन हरिजन थाने में दे दिया। जिस पर लड़की ने मेरे पक्ष में बयान दिया। मैं ने वहाँ उन के घर वालों से कहा कि मैं अंजलि से किसी प्रकार का कोई सम्बन्ध नहीं रखूँगा इस बात पर समझौता हुआ, बात यहीं ख़त्म हो गयी। ३-४ दिन बाद हम फिर से मिलने जुलने लगे क्योंकि अंजलि हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई भोपाल में कर रही थी। मैं अपने शहर राजगढ़ से उस से मिलने जाता और वो भी मुझ से हॉस्टल से घर जाने का झूट बोल कर मिलने आया करती। २०१४ तक इसी तरह चलता रहा। फिर उसने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मेरे शहर में ही विधि पाठ्यक्रम में दाखिला ले लिया। क्योंकि हम आस पास के शहर के निवासी थे। अब हमारा सप्ताह में ३ से चार दिन मिलना जुलना होने लगा। फिर १ मई २०१४ को मेरे छोटे भाई की शादी हुई। मेरे घर में अब मैं ही अविवाहित रह गया था। मेरा एक भाई और दो बहिने हैं जिनका विवाह हो चुका है और अंजलि भी अपने घर में अकेली अविवाहित रह गयी थी। मेरे छोटे भाई की शादी के बाद मेरे ऊपर शादी का दवाब बढ़ने लगा। मैंने अब अंजलि के सामने विवाह करने का प्रस्ताव रखा जिस को उसने २८ जून को ठुकरा दिया कहा मैं घर वालों के विरुद्ध जाकर विवाह नहीं कर पाऊँगी। फिर मैं ने उस से दूरिया बढ़ानी शुरू की और बातचीत भी खत्म की। इस के बाद मैं ने ५ जुलाई २०१४ को अपने समाज यानी की स्वर्णकार में घरवालों की इच्छा के अनुसार सगाई कर ली। जब इस बात का अंजलि को पता चला कि मेरी सगाई हो चुकी है तो वो टूट सी गयी और अगस्त में उसने मेरे सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। अब मैं क्या करता कहने लगी कि मैं मर जाउंगी, अगर आप से दूर हुई तो, किसी तरह से मुझसे दूर मत हो जाना। आप एक सप्ताह के अंदर ही मुझ से शादी करलो। मैं आपके साथ ही जीवन बिताना चाहती हूँ। मैं भी उससे बहुत प्यार करता था इसलिए मैं राजी हुआ और उस से दिनांक १ सितम्बर २०१४ आर्य समाज मंदिर में शादी करली और उसका हम दोनों ने विवाह पंजीयन भी करवा लिया। अब अंजलि ने मुझे विश्वास दिलाया कि वह अपने घर वालों को १ से २ महीने में इस विवाह के लिए राजी कर लेगी। पर इस समय अवधि में वह ऐसा नहीं कर सकी। जो सगाई समाज में हुई थी उसको भी मैं ने तोड़ दिया। क्यूंकि शादी की तारीख नजदीक आने लग रही थी। एक दिन मैं ने अंजलि के चाचा को सारी बात बता डाली कि हम ने इस तरह से घर वालों से छुपा कर शादी कर ली है। इस बात से दोनों परिवार वालो तनाव चिंता की स्थिति बन गयी। अंजलि के चाचा भी राजगढ़ पुलिस में हैड के पद पर हैं और काफी समझदार भी रहे उन्होंने अंजलि के परिवार वालों को इस शादी के लिए राज़ी कर लिया। उन्होंने दिनाक १ दिसम्बर २०१४ राजगढ़ स्थित जालपा माता मंदिर से अंजलि को मेरे साथ विदा कर दिया। जिस में मेरे कुछ मित्र और अंजलि की माता जी और चाचा चाची उपस्थित रहे। अब मेरे घर वाले अंजलि को अपनाने के लिए राजी नहीं थे। और वह मुझसे २०० किलोमीटर दूर इंदौर में निवास करते थे मैने भी ठान लिया कि हम जीवन खुद जिएंगे। उन्होंने मुझे मौखिकः रूप से अपने सम्पति और जायदाद से बेदखल कर सब रिश्ते तोड़ दिए। अब हम अच्छे से प्रेम से राजगढ़ में मेरे एक घर जो कि मेरी माता जी के नाम है उसमे निवास कर रहे थे। मैं ने अंन्जलि को उसके घर वालों से कभी भी मिलने से नहीं रोका, उसका फोन से भी उसके माता पिता से संपर्क होता रहा और महीने में ४ से ५ बार मिलती रही। सब अच्छा चल रहा था। एक रिश्तेदार के शादी में २७ जनवरी को इंदौर जाना हुआ वहाँ मेरे घर वालों का भी मिलना हुआ और उन्होंने अंजलि के बारे में अपशब्द कहे। जिस से गुस्से में आकर उनसे विवाद हो गया। फिर अंजलि और मैं निज निवास राजगढ़ १ फरवरी रात को १२ बजे लौट आये। अगले दिन अंजलि का पेट दर्द हुआ तो मैं ने उसे शासकीय अस्पताल में एडमिट कराया और उसका उपचार कराया सोनोग्राफी करवाई और उसी दिन रात को छुट्टी करवा कर घर ले आया। २ दिन ठीक से रहे फिर उसको पेट दर्द की शिकायत हुई तो मैं ने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी। मैं अकेला उसे संभाल नहीं पा रहा था इस लिए मैंने अंजलि को ३००० रूपये दिए और उसकी बड़ी बहिन के यहाँ जो हमारे शहर में ही रहती है एक दिन छोड़ने का फैसला लिया। अंजलि अक्सर उनसे मिलती रहती थी मेरा सोचना था की ०७ फ़रवरी को रविवार है और उनकी बहिन की छुट्टी भी रहेगी तो बहिन से बात कर मैं ने दिनाक ०६ शनिवार शाम को उनको उनके पास छोड़ दिया। संडे उन्होंने अंजलि को दिखाया और सोमवार को मेरे पास छोड़ दिया। अब उसी दिन ०९ फरवरी सोमवार को मैं व अंजू जनपद में किसी काम से जाना हुआ और काम करने के बाद हम रवाना ही होने वाले थे की उसके चाचा जी जनपद में पहुंच गए और मुझसे और अंजलि से उनके घर चलने को कहा और खाने पर बुलाया। मैं ने कहा मैं १५ मिनिट में आता हूँ आप अंजलि को ले जाओ। दोपहर के ४ बजे अंजलि का कॉल आया आप आ जाओ फिर घर चलते हैं। मैं आधे घंटे बाद अंजलि को लेने पहुंचा और जब चलने को कहा तो उनकी चाची ने बोला आपकी बहुत शिकायतें आ रही हैं। मैं ने कहा बात क्या है, कौन सी शिकायत? उन्होंने मुझसे बोला कि आप अंजलि के साथ लात घूसों से मारपीट करते हैं और उसे अक्सर बेल्टों से मारपीट करते हैं। मुझे सब बातें सुनकर धक्का सा लगा। हम दो महीने से अच्छे से रह रहे थे कोई झगड़ा हमारा हुआ नहीं, ना ही कोई मनमुटाव हुआ। फिर एक दम से क्या हुआ इतने में अंन्जलि यही सब बातें कहने लगी। कि मेरे साथ इन्होने मारपीट की है और १५ से २० मिनिट में वही अंजलि के माता पिता भी पहुंच गए। जो कि हमारे शहर से ७० किलोमीटर दूर रहते हैं और उन लोगों ने भी मेरे साथ गाली गलौच और अपशब्द कहे। मैं समझ चुका था कि मेरे विरुद्ध कुछ तो साजिश हुई है। मैं उन लोगों से अपने रिश्ते को बनाये रखने के लिए मेरे से जाने अनजाने में हुई गलती की माफ़ी भी मांगी। पर वो अंजलि को मेरे साथ भेजने के लिए तैयार नहीं हुए और ना ही अंजलि आने के लिए तैयार हुई। उन लोगों ने मेरी पत्नी से मुझे आज दिनाक २० फ़रवरी तक कोई बात भी नहीं होने दी। उसका मोबाइल भी बंद है और दिनांक ०९ फरवरी २०१४ को रात्रि में ही महिला थाना राजगढ और हरिजन कल्याण थाना राजगढ़ में मेरे विरुद्ध, मेरे माता पिता, दोनों बहिनो के विरुद्ध अंन्जलि ने घरेलू हिंसा, शराब पीकर मारपीट और दहेज़ के लिए मांग की शिकायत कर दी है। अभी आवेदन दिया है मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। मैं सभी तरह के माध्यमों से बातचीत का प्रयास कर चुका हूँ पर कोई हल नहीं निकला है। अंजलि ने मेरे माता पिता भाई बहिन को भी इसमें आरोपी बनाया है जब कि उन से हमारे कोई सम्बन्ध नहीं हैं। न वो हमारे साथ निवास करते हैं। उनकी कोई गलती भी नहीं है। अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूँ मैं ने उसके साथ कोई मारपीट नहीं की, न कोई बुरा व्यवहार किया और न ही मेरे किसी घरवाले ने। अब तक मैं ने उसके पढ़ाई के सारे खर्चे विवाह पूर्व के उठाये हैं। जिस का भुगतान मेरे अकउंट से हुआ। उस ने अपने पिता के इलाज के लिए मुझ से ३ लाख रूपये भी लिए थे २०१३ में जो कि उस ने स्वयं चेक द्वारा भुनाए थे। जब दिनांक ९ रात्रि में घर पर लौटा तो अलमारी के लॉकर में २ लाख कीमत की जो रकम थी और बीस हजार नगद थे वो मेरी पत्नी ले जा चुकी थी। अब मैं अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा हूँ। आत्महत्या जैसे विचार मन में आ रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ। शिकायत उस ने जो मेरी की है मेरे परिवार वालों की क्यों की है? ऐसा क्यों किया? न कोई बात हुई है न उसके घर वाले होने दे रहे हैं। क्या मेरे माता पिता पर जो अलग शहर में रहते हैं वो भी इस प्रेम विवाह में दहेज़ प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के दायरे में आते हैं। मुझे अब क्या करना चाहिये? मुझे लगता है कि अंजलि के माँ बाप ने उस की कहीं और शादी करने का विचार बना लिया है और मेरा इस्तेमाल सिर्फ पैसों के लिए किया गया था।

समाधान-

प की कहानी पढ़ी। ऐसी ही अनेक कहानियाँ हमें प्रत्यक्ष भी देखने को मिलती हैं। आप दोनों में प्रेम भी था और आप ने अपना घर भी बसा लिया था। लेकिन आप दोनों के परिवार इस के लिए तैयार नहीं थे। अंजलि के चाचा के दबाव में आ कर उन्हों ने अंजलि को आप के साथ भेज दिया। क्यों कि तब अंजलि किसी भी कीमत पर आप के साथ रहना चाहती थी। वह पुलिस थाने में बयान दे चुकी थी और उस के परिवार वालों को एक हार का सामना करना पड़ा था। वे अंजलि को आप के साथ भेजने के बाद भी उस हार को पचा नहीं पा रहे थे। वे लगातार इस बात से दुखी रहे। चाहते रहे कि अंजलि किसी भी तरह आप से नाता तोड़ कर वापस लौट आए। अंजलि के समाज में एक विवाह टूटने पर दूसरा विवाह होना एक सामान्य बात रही होगी। इस कारण वे इस के लिए प्रयास भी करते रहे। वे लगातार अंजलि की काउंसलिंग करते रहे। जो धीरे धीरे उस पर असर करती रही। विवाह में आप के परिवार वालों ने उस के साथ जो दुर्व्यवहार किया उस ने उस असर को कई गुना बढ़ा दिया। उधर उस के परिवार वालों का उस के साथ संपर्क केवल अंजलि की काउंसलिंग के लिए था। इधर आप के परिवार वाले भी उस को अपना नहीं पा रहे थे। अंजलि दोनों तरफ से परिवार विहीन हो गई थी।

स के बीमार होने पर आप उस की खुद देखभाल नहीं कर सके। उस के लिए उस की बहिन की मदद आप को लेनी पड़ी। इस बात ने अंजलि को अन्दर तक दहला दिया। एक औरत के जीवन में अनेक अवसर होते हैं जब पति से इतर परिवार की उसे आवश्यकता होती है। जब वह एक दिन उस की बहिन के यहाँ रही तो उस के परिवार वालों ने उस की काउंसलिंग की और उसे आप से अलग होने को तैयार कर लिया। दूसरी बार उसे जो पेट दर्द हुआ वह फर्जी भी हो सकता है। हो सकता है बहिन के यहाँ दुबारा डाक्टर को बहिन के द्वारा दिखाने का सुझाव भी आप को अंजलि ने ही दिया हो। वह पूरी तैयारी से बहिन के यहाँ गयी और योजनाबद्ध तरीके से नकद और जेवर आदि साथ ले गई। अब वह उसी नक्शे पर काम कर रही है। उसे आप से प्रेम था और आप से मिलने के बाद उस का इस फर्जी नक्शे को छोड़ आप के साथ आ सकने की संभावना थी। इसी कारण उस का परिवार उसे आप से मिलने नहीं दे रहा है। अब खेल बदल गया है। इसे फिर से बदलना तभी संभव है जब आप और अंजलि मिलें और गिले शिकवे दूर करें। यह अवसर आप को अब शायद परिवार न्यायालय में होने वाली अनिवार्य काउंसलिंग में ही मिल सकता है। उस से पहले नहीं।

प के परिवार वालों ने कुछ नहीं किया है इस कारण उन के विरुद्ध शिकायत रद्द हो सकती है यदि आप प्रयत्न करें। प्रथम सूचना दर्ज हो जाए तो उसे निरस्त कराने के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष निगरानी याचिका दाखिल की जा सकती है। लेकिन आप के विरुद्ध मामला दर्ज हो सकता है और चल सकता है। अंजलि का दूसरा विवाह करने के लिए आप से तलाक होना जरूरी है। वे चाहते हैं कि आप दबाव में आप कर खुद इस की पहल करें।

प आत्महत्या की सोच रहे हैं, वह पूरी तरह गलत है। ऐसे जीवन नहीं हारा जाता। मुझे नहीं लगता कि अब अंजलि को आप वापस ला सकते हैं। यदि वापस ले भी आएँ तो फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की जो गांठ उस के और आप के बीच पड़ गयी है वह कभी नहीं निकलेगी। बेहतर है कि आप उस के परिवार से बात कर के इस रिश्ते को अब भी त्याग दें। जो लड़की कमजोर हो कर अपने माता पिता का गलत काम में सहयोग कर रही है उस के साथ जीवन ठीक नहीं निभेगा। जो चला गया है वह चला गया है। आप सहमति से विवाह विच्छेद का मार्ग निकालें और अपना जीवन नए सिरे जीने का विचार बनाएँ।

आपसी बातचीत से समाधान निकालने के लिए प्रयत्न करें …

two wives one husbandमस्या-

वनित ने जलालाबाद, पंजाब से समस्या भेजी है कि-

मेरे विवाह १४-०७-२०१३ को विधिवत हुआ था। ये मेरी दूसरी शादी थी। मेरी पहली पत्नी का देहांत हो चुका है। मेरे पास पहले भी एक बेटी थी। पूनम (जिस से दोबारा शादी हुई) के पास भी एक बेटी थी। शादी के बाद दोनों बेटियां इकठ्ठी रहने लगी। छोटी छोटी बातों से समस्या उत्पन्न होने लगी। जब भी पूनम की बेटी की कोई फरमाइश या उसकी पसंद की चीज न लाई जाती तो घर में तू-तू मैं मैं होने लगती। मैं जब भी पूनम की बेटी नाम अन्वी को किसी भी शरारत या किसी और बात के लिए डांटता तो ये मुझसे ऊंचे स्वर में बात करने लगती। पूनम मुझसे पहले शादी करने से पहले विधवा थी। ये हर बात में अपने पहले पति की बातें या पति के ननदों की बाते ही हर समय में करती रहती। जब मैं पूनम को कहता कि अब तुम उन रिश्तों को भूल जाओ तो वो कहती कि मैं उन रिश्तो को नहीं भूल सकती। तब हम किराये के मकान में रह रहे थे। एक बार अनजाने में पूनम द्वारा ये कहने पर कि तुम मेरी बेटी को हाथ लगा कर दिखाओ, तो मैंने पूनम के बेटी अन्वी को एक थप्पड़ मार दिया और इस पर पूनम ने मुझ पर हाथ उठा दिया। तब मकान मालिक भी उपस्थित थे। किसी तरह से मैं ने उस को रोका। उस के बाद अपनी बेटी को नीचे ले कर जाते हुए ये कहती हुई गयी कि मैं पुलिस स्टेशन जा रही हूँ। खैर नीचे मकान मालिक ने उसको थाने न जाने दिया। इस की मैंने कम्प्लेंट थाने में की तो उन्होंने इस पर कोई भी कार्रवाई करने से मना करते हुए मुझसे ये लिखवा लिया कि मैं अपना झगड़ा कोर्ट द्वारा निबटाऊंगा। इस की कापी मेरे पास मौजूद है। इसके बाद इस के भाइयों ने आकर सुलह सफाई करवा दी। लेकिन ये नोंक झोंक चलती रही। इसके बाद इसके दोबारा फिर तू तू मैं मैं होने पर इस ने मेरे और मेरी लड़की के लिए खाना बनाना, बर्तन धोना, कपडे धोना तक छोड़ दिया। घर से लड़ाई खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी। पूनम किसी न किसी बहाने लड़ाई का कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेती। इस के बाद मैं ने वो किराये का मकान छोड़ दिया व अपने पुराने छोटे से घर में अपनी बेटी निहारिका के साथ आ कर रहने लगा। ये २२ या २३ दिसम्बर की बात है। इसके कुछ दिनों बाद सुबह के वक्त जब नहा रहा था तो किसी ने दरवाजा खटखटाया। मुझे नहाने में पांच सात मिनट लग गये। जब नहा कर निकला तो फिर से दरवाजा खटखटाया गया तो मैंने पूछा कि कौन है? पूनम की आवाज आयी कि दरवाजा खोलो। मैं ने पूछा कि क्या काम है? इस पर तो कहने लगी कि पहले दरवाजा खोलो फिर बताउंगी। मेरे मना करने पर बोली कि मर्द हो तो दरवाजा खोलो। मैं इसके साथ लड़ाई नहीं चाहता था इसलिए मैंने दरवाजा नहीं खोला। वह बाहर खड़ी ऊँचे स्वर में बोलने लगी कि मुझे पता है कि दोपहर को तैयार रहना मैं तुम्हारा जलूस निकाल के जाउंगी। तो मैंने अंदर से कह दिया कि तुमने जो करना है कर लो, क्या जान ले लोगी? तो बाहर से ही बोलने लगी कि जरूरत पड़ी तो जान भी ले लूँगी। इस के बाद बोलती हुई दरवाजे को लात मार कर वहां से चली गई। मैंने ये बात अपने मामा जी के बेटे की पत्नी को बताई क्योंकि मेरा सारा परिवार मोहाली में रहता है। इसके कुछ दिन बाद किसी अंकल ने हमारा पैचअप करवा दिया। मैं २४ जनवरी को फिर से उसी किराये के मकान में पूनम के साथ रहने लगा। इसके १० दिन बाद फिर वही चिक-चिक शुरू हो गयी। वही इल्जाम। मेरी बेटी ध्यान नहीं रखते, उस को डांटते रहते हो। कुछ इसी तरह से दिन कट रहे थे कि एक दिन मुझे कहने लगी कि आप के पुराने घर में चलते हैं। मैंने कहा की यहाँ पर ठीक है तुम्हे तो वो घर पसंद ही नहीं था, तभी हम किराये के मकान में आये थे। तो कहने लगी कि मुझे किसी ने राय दी कि तू उस पुराने घर में शिफ्ट हो जा तो ये फिर तुझ को छोड़ कर नहीं जा सकेगा। मैंने ये बात मान ली व मकान मालिक को कह दिया कि हम इस फरवरी के आखिर में मकान खाली कर देंगे। एक मार्च को हम अपने पुराने घर में शिफ्ट हो गये। इस के बाद तीन अप्रैल को अन्वी के कारण एक बार फिर हम दोनो में तू-तू मैं मैं हुई तो गुस्से में पूनम बोलने लगी कि मैं तुम्हारा जलूस निकाल दूँगी, अब मैं सर्विस करने लगी हूँ, मैं अपनी बेटी को पाल लूंगी। मैंने इतना कह दिया कि चल आज जुलूस निकाल ही दे तो ये बाहर आंगन में आ गई व जोर से चिल्लाने लगी। बाहर के गेट को ताला लगा हुआ था फिर अन्दर जा कर ताले के चाबी उठा कर में गेट खोल कर बाहर बैठ गई व जोर से चिल्लाने लगी। आस पडोस वाले इकठ्ठे हो गये इस ने मेरे मामा जी के लडके को भी फोन कर दिया, वो भी आ गये। इस ने आपने भाइयों की भी फोन कर दिया। मेरे मामा जी के लडके ने इसे बहुत कहा कि पूनम चल अन्दर बैठ कर बात करते हैं। लेकिन ये नहीं मानी व अपनी बेटी को उठा कर अपने पास गली में बैठा लिया। जब इसके भाई फाजिल्का से यहाँ पहुंचे तो आते ही उन्होंने मुझसे लड़ाई झगड़ा शुरू कर दिया। मेरे मामा जी के लडके ने बीच बचाव किया फिर उसके बाद गली खड़े बोलते रहे। खैर किसी तरह से मेरे मामा जी का लड़का व उस की पत्नी इनको समझा कर अपने घर ले गये। उस रात से हम दोनों अलग अलग रह रहे हैं। अब मुझे तिथि ३०-१०-२०१४ को उसकी तरफ से 125 CPC के तहत के सम्मन प्राप्त हुआ है इस में दी गई सारी बाते झूठ हैं। मैंने किसी तरह की कोई मांग नहीं की, न ही किसी तरह की मारपीट की है और मेरे परिवार वाले तो यहाँ पर रहते ही नहीं। जब से मुझे यहाँ पर जॉब मिली है मैं अकेला ही जलालाबाद में रह रहा हूँ। मेरे परिवार का मेरी फैमली में किसी तरह का कोई दखल ही नहीं है। मैं क्या करूं? मैं एक जॉब ही करता हूँ। मेरा कोई रियल एस्टेट का बिजनेस नहीं है हाँ कटकटा के मुझे सेलरी २६०००/- प्रति मास मिलती है। जिस में से मुझे अपनी बेटी की स्कूल फीस, ट्यूशन फीस घर का राशन, दूध का बिल, बिजली का बिल, राशन का बिल, बाइक का पट्रोल, गैस सिलेंडर का रिफिल आदि भरने होते हैं। मुझे कितना गुजारा भत्ता प्रति महिना देना होगा? 406 व 498A के तहत मुझे किस तरह की परेशानी उठानी पड़ेगी। ये 406 व 498A क्या है कृपया सही रास्ता दिखाने की अनुकम्पा करे।

समाधान-

मैं लगभग सभी से कहता हूँ कि विवाह के पहले स्त्री-पुरुष का एक दूसरे को समझना जरूरी है। उन में तालमेल बनेगा या नहीं यह परखना जरूरी है। लेकिन हमारा समाज है कि इसी बात की उपेक्षा करता है। यदि कहीं विवाह की बात चलेगी तो दोनों को मिलने नहीं दिया जाएगा। मिलने दिया भी जाएगा तो किसी की उपस्थिति जरूरी होगी। ऐसा लगता है कि यदि विवाह के पहले लड़के लड़की आपस में अकेले में मिल लिए तो जरूर कोई आतंकवादी षड़यंत्र कर डालेंगे।

प का तो यह दूसरा विवाह था। दोनों के पास एक एक बेटी थी। एक ही माता-पिता की दो सन्तानों के होने पर भी बच्चों के कारण झगड़े उठ खड़े होते हैं। फिर यहाँ तो दोनों के माता पिता अलग थे। एक के साथ अधिक और दूसरे के साथ कोई लगाव नहीं की स्थिति बनना स्वाभाविक था। इस बात पर पहले विचार करना था और विवाद की स्थिति में विवाद से बाहर निकलने का तरीका भी तय कर लेना था। आप दोनों गरम मिजाज के हैं और एक दूसरे से उलझ पड़ते हैं। यही आप के बीच के झगड़ों का मूल कारण है। दोनों ही यदि यह तय कर लें कि दूसरे की गर्मी के वक्त वह ठंडी से काम लेगा तो अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है आप दोनों के बीच बात फिर से बन सकती है। आप दोनों को एक लंबे समय तक काउंसलिंग की जरूरत है। यदि आप को अपने यहाँ अच्छे काउंसलर मिल जाएँ तो उन की सहायता से आप यह मामला निपटा सकते हैं।

प को चाहिए कि आप अपने यहाँ के जिला विधिक प्राधिकरण के समक्ष अपना आवेदन दें और कहें कि आप की समस्या काउंसलिंग से दूर हो सकती है। जिला विधिक प्राधिकरण के पास प्रशिक्षित काउंसलर होते हैं, वे आप की मदद कर सकते हैं आप की पत्नी को भी इस मामले को आपस में बैठ कर निपटाने को तैयार कर सकते हैं। इस मामले में आप को सब से पहले धारा 125 का मामला जिस न्यायालय में है उस में भी आवेदन देना चाहिए कि आप राजीनामे से मामले को निपटाना चाहते हैं इस कारण मामला लोक अदालत या जिला विधिक प्राधिकरण को प्रेषित किया जाए।

498ए व 406 आईपीसी के मामले में फिलहाल पुलिस अन्वेषण करेगी। आप सारी बातें पुलिस के सामने स्पष्ट रखें और नीयत बता दें कि आप मामले को आपसी बात से निपटा सकते हैं, तो वहाँ भी मामले को आपसी बातचीत से निपटाने की कोशिश होगी। यदि पुलिस प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर ले तो आप की गिरफ्तारी भी हो सकती है। इस कारण प्रथम सूचना रिपोर्ट को निरस्त कराने के लिए आप उच्च न्यायालय में रिविजन कर सकते हैं, तथा गिरफ्तारी पर रोक लगाने व अग्रिम जमानत देने की प्रार्थना भी कर सकते हैं।

म ने आप के द्वारा भेजा 125 का आवेदन पढ़ा है। उस में वही तथ्य हैं जो कि हर आवेदन में वकील सामान्य रूप से करते हैं। यदि उस के तथ्य मिथ्या हैं तो उन्हें साबित करने की जिम्मेदारी आप की पत्नी की है। आप को घबराने की जरूरत नहीं है। आप अपने तथ्य रखें। कोशिश करें कि आप के सभी मामले एक ही वकील करे जिस से अनावश्यक रूप से विपरीत कथन करने से बचा जा सके। यदि आप केवल नौकरी करते हैं और आप को 26000 वेतन मिलता है तो आप पर 8 से 10 हजार रुपया प्रतिमाह भरण पोषण देने का दायित्व आ सकता है। वर्ष में यह दायित्व एक लाख रुपया हो सकता है। उस के साथ ही मुकदमे लड़ने पड़ेंगे। यदि आप दोनों में तालमेल अब भी संभव हो तो उस तरफ बढ़ें और संभव न हो तो आपस में मिल कर पत्नी को एक मुश्त भरण पोषण राशि तय कर के उसे देते हुए विवाह विच्छेद करने का सोचें।

विवाह पंजीकृत है तो साथ रहें, लेकिन सावधानी के साथ …

‘तीसरा खंबा’  8वें वर्ष में …

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रवि सोनी ने कृष्णापुरा, ब्यावरा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं ने अनुसूचित जाति की अंजुलता बंशीवाल उम्र २४ वर्ष निवासी नरसिंहगढ़ से आर्य समाज सीहोर में विवाह किया। आर्य समाज सीहोर द्वारा विवाह प्रमाण पत्र जारी किया गया है आपके कहे अनुसार मैं ने सिहोर नगर पालिका से विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र भी प्राप्त कर लिया है। श्रीमान हमारा यह विवाह हम दोनों के परिवार से छिपा हुआ है। अभी मेरी पत्नी उस के माता पिता के घर में निवास कर रही है, शादी के पहले हम दोनों के मध्य तय हुआ था की अंजू अपने घर वालों को इस रिश्ते के लिए राजी करेगी और घर वालों के राजी नहीं होने पर हम साथ रहने लगेंगे। मेरी पत्नी के हर प्रयास के बाद भी वह इस रिश्ते के लिए राजी नहीं हैं। जब कि मेरे घर वाले इस रिश्ते से सहमत हैं। अब हम दोनों के सामने समस्या यह है कि अगर अंजू लता अपने घर से मेरे साथ रहने के लिए आती है तो स्वाभाविक रूप से अंजुलता के घरवाले मेरे विरुद्ध अपहरण बलात्कार जैसे गंभीर अपराध पंजीबद्ध करना चाहेंगे। कृपया मेरा मार्ग दर्शन कर कुछ ऐसा उपाय बताएँ जिस से मेरी पत्नी और मैं साथ निवास कर सकें और किसी प्रकार के अपराध अंजुलता के घरवाले मेरे विरुद्ध दर्ज़ न करवा सकें। क्यूंकि मेरे घर का पालन पोषण करने वाला में ही हूँ हम दोनों बिना किसी क़ानूनी अड़चन के साथ रहना चाहते हैं। हमें क्या करना चाहिए जिससे किसी प्रकार की समस्या से

बचा जा सके?

समाधान-

प की समस्या काल्पनिक है। आप चाहते हैं कि कोई आप के विरुद्ध रिपोर्ट कराए और कोई जाँच तक न करे। ऐसा सम्भव नहीं है। आप की पत्नी के माता पिता यदि कोई रिपोर्ट कराते हैं तो पुलिस कम से कम इस बात की जाँच अवश्य करेगी कि उन की रिपोर्ट में कोई सचाई है या नहीं। इस के लिए वह आप से और आप की पत्नी से पूछताछ भी कर सकती है। आप को इस के लिए तैयार रहना चाहिए। उस में परेशान होने की कोई बात नहीं है। जब तक आप की पत्नी खुद अपने माता पिता या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की गई शिकायत का खुद समर्थन नहीं करती तब तक आप को कोई परेशानी नहीं होगी। आप को अपनी पत्नी से बात कर के उसे ब्यावरा बुला लेना चाहिए और अपने साथ रहने को कहना चाहिए। वह आ जाती है तो उसे साथ रखना चाहिए।

प ब्यावरा से हैं और आप की पत्नी अंजु नरसिंहगढ़ से हैं। दोनों एक ही जिले के नगर हैं। यदि आप को पूरा अंदेशा हो कि वे इस बात को समझते हुए भी कि अंजु आप के साथ है रिपोर्ट करा देंगे तो जिस दिन आप की पत्नी अपने माता पिता का घर छोड़े आप दोनों उसी दिन राजगढ़ जाएँ और सीधे कलेक्टर से मिल कर आवेदन दे दें। कि आप दोनों ने विवाह कर लिया है, आप दोनों का विवाह पंजीकृत भी हो चुका है और अब साथ रहने जा रहे हैं आप दोनों को अंदेशा है कि अंजू के परिवार वाले आप के विरुद्ध मिथ्या रिपोर्ट दर्ज करा कर आप को परेशान करेंगे और स्वतंत्र जीवन जीने में बाधा उत्पन्न करेंगे। इस कारण जिले की पुलिस को निर्देशित किया जाए कि जब भी आप के विवाह के संबंध में कोई रिपोर्ट दर्ज कराई जाए पुलिस उस पर जाँच भले ही करे लेकिन आप दोनों को तंग न करे।

मारा मानना है कि इतना करने के बाद आप को कोई परेशानी नहीं होगी। यदि आप समझते हैं कि पुलिस को बीच में डाले बिना भी आप की पत्नी के परिवार के लोग आप को परेशान करने के लिए हमला वगैरह कर सकते हैं तो आप दोनों को एक संयुक्त रिट याचिका इन्दौर उच्च न्यायालय में प्रस्तुत कर पुलिस संरक्षा की मांग करनी चाहिए।

आपस में मामला निपटाएँ या अच्छे काउंसलर की मदद लें।

Counsellingसमस्या-

सुजीत ने रांची, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मारी शादी एक प्रेम विवाह था। हमारी एक 6 साल की बेटी भी है। मेरी पत्नी पिछले 11 माह से मायके में है। मेरी पत्नी चाहती है कि मकान-जमीन का बँटवारा हो जाए। मेरी पत्नी बिना तलाक लिए मेरे से 5000/- रुपए गुजारा भत्ता प्राप्त करती है। वह मुझे हमेशा आत्महत्या की धमकी देती है। मेरा घर सुविधा वाला है। फिर भी वह अलग अपार्टमेंट [20 लाख ] खरीदना चाहती है। सर मैं निजी काम करता हूँ, तो मेरी क्षमता अभी अपार्टमेंट खरीदने की नहीं है। मेरी पत्नी की दो बहन भी हैं, जिन्होंने अपने-अपने पति को छोड़ रखा है। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प का प्रश्न बहुत अधूरा है। आप ने यह नहीं बताया कि पत्नी किस जमीन मकान का बँटवारा चाहती है? और वे किस के स्वामित्व के हैं? आप का सुविधा वाला घर आप के स्वामित्व का है या संयुक्त स्वामित्व का है?

किसी भी पत्नी को यह अधिकार नहीं कि वह संयुक्त स्वामित्व की संपत्तियों में पति के हिस्से का बँटवारा चाहे। आप का सुविधा वाला घर भी संयुक्त स्वामित्व का प्रतीत होता है। जिस की सुविधाएँ बहुत से लोग एक साथ साझा करते हैं। आप की पत्नी ये सब सुविधाएँ स्वयं के लिए चाहती है बिना किसी के साथ साझा किए। यही कारण है कि वह आप पर अलग अपार्टमेंट लेने के लिए दबाव बना रही है। उस की दो बहनें अपने पतियों को छोड़ कर स्वतंत्र रूप से रह रही हैं। उन से भी उसे प्रेरणा तो मिलती ही है।

कोई भी व्यक्ति किसी को उस की इच्छा के विरुद्ध साथ नहीं रख सकता। इस कारण इस समस्या का हल यही है कि आप और आप की पत्नी इस मसले को आपस में बैठ कर सुलझाएँ। यदि आपस में बैठ सुलझाना संभव न हो तो किसी अच्छे काउंसलर की मदद लें। यदि आप कानूनी रास्ता चुनेंगे तो वह भी दबाव को बनाए रखने के लिए अनेक कानूनी उपायों की शरण में जा सकती है जो आप की समस्या को बढ़ाएंगे ही घटाएंगे नहीं।

पति की मृत्यु हो जाने के उपरान्त विवाह को कैसे पंजीकृत कराएँ?

ChildMarriageसमस्या-

अनिल मीणा बून्दी, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पति का स्वर्गवास जनवरी 2014 में हो गया। पति कि मृत्यु तक मैं ने अपना विवाह प्रमाण पत्र नहीं बनवाया था। अब मैं कहीं भी आवेदन करती हूँ तो सभी मुझसे विवाह प्रमाण पत्र मांगते हैं। श्रीमान क्या अब में विवाह प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकती हूँ। अगर करूँ तो पति कि जगह किस के हस्ताक्षर करवाऊँ। मेरा विवाह 17 मई 2005 को हुआ था।

समाधान-

विवाह का प्रमाण पत्र तभी मिलता है जब कि विवाह का पंजीयन हुआ हो। विवाह के एक पक्षकार का देहान्त हो जाने के उपरान्त आप के विवाह का पंजीकरण होना नियमानुसार संभव नहीं है। यही कारण है कि आप को विवाह का प्रमाण पत्र विवाह पंजीयक से नहीं मिल सकता।

हाँ भी आप आवेदन प्रस्तुत करती हैं तो आप की स्टेटस जानने के लिए विभाग अपने नियमों के अनुसार आप का विवाह प्रमाण पत्र व आप के पति का मृत्यु प्रमाण पत्र चाहते हैं जिस से आप को पति की विधवा होने का सबूत उन्हें मिल सके। आप की इस समस्या का हल केवल सिविल न्यायालय की डिक्री से हो सकता है।

प विवाह के पंजीकरण के लिए आवेदन दें। उस में पति के हस्ताक्षर का स्थान खाली छोड़ दें और अंकित करें कि पति का देहान्त हो गया है तथा साथ में पति का मृत्यु प्रमाण पत्र लगा दें। आप का यह आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। वैसी स्थिति में आप विवाह पंजीयक को प्रतिवादी बनाते हुए सिविल न्यायालय में घोषणा व स्थाई व्यादेश (Permanent Injunction) का वाद प्रस्तुत कर दें जिस में आप यह अभिवचन अंकित करें कि आप का विवाह आप के पति के साथ निश्चित तिथि को हुआ था। आप का यह विवाह पंजीकृत नहीं कराया गया और आप के पति का देहान्त हो गया। अब आप से बार बार हर स्थान पर विवाह प्रमाण पत्र मांगा जाता है लेकिन विवाह पंजीयक ने विवाह का पंजीयन करने से इन्कार कर दिया है। ऐसी स्थिति में घोषणा की जाए कि आप का विवाह आप के पति के साथ हुआ था। पति का देहान्त हो गया और आप आप के पति की विधवा हैं। विवाह पंजीयक को यह व्यादेश प्रदान किया जाए कि वे आप के विवाह का पंजीकरण कर आप को विवाह का प्रमाण पत्र जारी करें।

स मामले में न्यायालय घोषणा की डिक्री तो पारित करेगा ही। इस के साथ ही विवाह पंजीयक को आप का विवाह पंजीकृत करने और विवाह प्रमाण पत्र जारी करने का व्यादेश भी दे सकता है। यदि इस तरह का व्यादेश न भी दे तो न्यायालय की डिक्री से आप का काम चल जाएगा। आप विवाह प्रमाण पत्र के स्थान पर न्यायालय की डिक्री प्रस्तुत कर सकेंगी।

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