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पत्नी के साथ प्रेमिका से संबंध रखते हुए दोनों के अधिकारों की बात करना पाखंड है।

rp_two-vives.jpgसमस्या-

 दीपक शर्मा ने पानीपत, हरियाणा से पूछा है-

मेरी शादी को 7 महीने हो गये हैं, लेकिन मैं किसी और से प्यार करता हूँ, जिससे मैं शारीरिक संबंध भी बना चुका हूँ। एक माह के बच्चे का अबोर्शन भी करवा चुका हूँ। इन सब बातों को मैं अपनी पत्नी को भी बता चुका हूँ।  मैं अपनी प्रेमिका को अपने साथ ही रखना चाहता हूँ। इस से मेरी पत्नी को भी कोई परेशानी नहीं है। लेकिन मैं अपनी पत्नी को भी नहीं छोड सकता। कृपया मुझे कोई तरीका बताएँ जिससे मैं दोनों को एकसाथ रखते हुए उनको समान अधिकार दिलवा सकूँ। कृपया मुझे उचित समाधान बताएँ?

समाधान-

प ने यह क्या कर लिया है और अब क्या करने जा रहे हैं? औरत कोई वस्तु या पालतू पशु नहीं है जो पूरी तरह पुरुषों की पालतू हो कर रहने लगेगी। आप की समस्या में सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी पुरुष एक से अधिक पत्नी नहीं रख सकता। विवाह के उपरान्त पत्नी के सिवाय दूसरी स्त्री से यौन संबंध नहीं रख सकता। यदि दूसरी स्त्री से संबंध रखेगा तो पत्नी इसी आधार पर उस से अलग रहने और भरण पोषण प्राप्त करने की अधिकारी तो होगी ही वह आप से तलाक की भी अधिकारी होगी और जब तक वह पुनर्विवाह नहीं कर लेती है तब तक आप से भरण पोषण प्राप्त करने की अधिकारी होगी।

पत्नी का अधिकार तो तभी भंग हो गया जब आप ने उसे बता दिया कि आप किसी को प्रेम करते हैं और साथ रखना चाहते हैं। यदि आप उसे घर नहीं भी लाते और बाहर ही प्रेमिका से संबंध रखते हैं तब भी पत्नी का अधिकार तो बाधित हो ही गया। प्रेमिका से विवाह न कर के दूसरी स्त्री से आप ने विवाह किया इस तरह प्रेमिका के पत्नी बनने के अधिकार को समाप्त ही कर दिया है। इस कारण आप दोनों के अधिकारों की बात तो न ही करें। पत्नी के साथ प्रेमिका से संंबंध रखते हुए दोनों के अधिकारों की बात करना पाखंड है।

आप ने दूसरा विवाह कर के गलती की है। आप को दोनों में से किसी एक को त्यागना पड़ेगा। आप तीनों मिल कर यह तय कर लें कि आप किस के साथ रहेंगे। यदि पत्नी के साथ रहना है तो प्रेमिका को त्याग दें। यदि प्रेमिका को छोड़ नहीं सकते हैं तो पत्नी से तलाक ले लें। उसे जो कुछ देना हो दें और खुद उस का दूसरा विवाह कराएँ। यही बेहतर है। वर्ना आप तीनों की उम्र आपस में कानूनी लड़ाइयाँ लड़ते लड़ते गुजर जानी है।

निस्सहाय माँ और बहिन का भरण पोषण करना पुरुष का दायित्व।

समस्या-marriage concilation

रवि शर्मा ने मेरठ, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरी शादी 05-12-2012 को हुई थी, लेकिन पत्नी शादी के बाद कुछ समय तक तो सही रही, बाद में मुझ पर दवाब बनाने लगी कि मैं अपनी माँ और बहन से अलग रहूँ। मेरी बहन मानसिक रूप  से विकलांग है।  मेरे पिताजी का देहान्त 2011 में हो चुका है। अब मेरी बहन और मेरी मां का मेरे अलावा कोई भी नहीं है। ऐसे में मैं अपनी माँ और बहन को कैसे छोड़ सकता हूँ।  मैने ये बात उसको कई बार समझाई लेकिन वो मेरी बात मानने को तैयार नही है। उसके माता पिता से बात की तो वो भी अपनी लड़की का पक्ष लेते हैं।  जब मैं ने उनसे ज़्यादा कहा तो उन्होने मेरे साथ लड़ाई की और कहा कि या तो जैसा हस कहते हैं वैसा करो नहीं तो आज के बाद हमारी लड़की को लेने मत आना। नही तो हम तुम्हें दहेज के केस में फँसा देंगे। फिर मैं उसको लेने के लिए नही गया।   कुछ दिनों बाद उन्होंने मुझ पर दहेज का झूठा केस कर दिया जिस में उन्होने मेरे सहित मेरे परिवार के अन्य लोगों जैसे मामा, मामी, ताऊ  और मामा के लड़के का नाम लिखवाया है। हम सब पर उन्होने धारा 376 ,377,504,506,307,498ए, 3/4 डीपी एक्ट धारा की 323  धाराएं लगाई हैं जिस में हम सब लोगों की जमानत हो चुकी है। इसके अलावा उन्होंने मुझ पर घरेलू हिंसा  व धारा 125 दंड प्र. संहिता का केस भी किया हुया है। जेल से बाहर आने के बाद मैंने अपनी पत्नी पर  तलाक़ का केस कर दिया है जो कि अभी कोर्ट में चल रहा हैं जिस के चलते हुए अभी 1 वर्ष चार माह हो चुके हैं  धारा 125 मे मेंटीनेन्स भी बंध चुका है और मैं उसको हर महीने मेंटीनेन्स दे रहा हूँ। अब मेरा आप से एक सवाल हैं कि क्या मुझे क्रूरता  के आधार पर तलाक़ मिल सकता हैं और तलाक़ के केस को तेज़ी से चलाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए? क्यूंकी मेरी उमर अब 30 वर्ष हैं यदि 1 या 2 साल में मुझे तलाक़ नहीं मिला तो मेरी उम्र शादी के लायक नहीं रह जाएगी। लेकिंन वो लड़की मुझे तलाक़ नहीं दे रही है। मैं ने कई बार म्यूचुअल डाइवोर्स  के लिए भी कोशिश कर के देख लिया है। लेकिन वो म्यूचुअल डाइवोर्स के लिए तैयार नही है। अब मैने फ़ैसला कर लिया हैं कि अब मैं उसको किसी भी कीमत पर नही रखूँगा। क्या मैं उस पर पर्जुरी का केस कर सकता हूँ?

समाधान-

प की कहानी एक आम कहानी है। निश्चित रूप से आप अपनी बहन और माँ को नहीं छोड़ सकते। आप की जो भी परिस्थितियाँ हैं उन में ऐसा करना अमानवीयता भी होगी और एक अपराध भी होगा। आप की माँ और बहन दोनों आप पर निर्भर हैं। यदि आप उन्हें छोड़ देते हैं तो वे महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा अधिनियम में आप के विरुद्ध कार्यवाही कर सकती हैं। इस के अलावा वे धारा 125 अपराध प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत भी भरण पोषण मांगने की हकदार हैं। वे इतना ही नहीं करतीं बल्कि आप की पत्नी के आप का घर छोड़ देने के बाद आप की देखभाल करने का जिम्मा भी उठा रही होंगी।

लेकिन जब आप की पत्नी और उस के परिजन आप के विरुद्ध वे सभी कानूनी कार्यवाहियाँ कर चुके हैं जो वे कर सकते थे। अब उन के तरकश में कोई तीर शेष नहीं है। आप को और आप के परिजनों को परेशान करने के जितनी शक्ति और अवसर थे उन सब का वे प्रयोग कर चुके हैं। आगे आप का कुछ नहीं बिगड़ना है। सभी अपराधिक मुकदमे मिथ्या हैं इस कारण उन सब में आप और आप के परिजन दोष मुक्त हो जाएंगे। आप को सिर्फ इतना करना है कि मुकदमों को ध्यान से लड़ना है, वकील अच्छा हो तो और भी अच्छा है। आप सफल होंगे। इन परिस्थितियों में आप को तलाक भी मिल जाएगा। आप यह सोचना बन्द कर दें कि एक दो साल बाद आप को जीवन साथी का अकाल हो जाएगा। अब वह जमाना नहीं रहा जब कि इस उम्र में जीवन साथी न मिले। यदि आप जाति की परवाह न करें तो अच्छी जीवनसाथी आप को मिल जाएगी।

हमारे यहाँ मुकदमों में समय लगता है। लेकिन यदि आप को अच्छा जीवन साथी मिले तो आप बिना विवाह के भी उस के साथ लिव-इन रिलेशन बना कर रह सकते हैं। यह कोई अपराध नहीं है। इस में तलाक होना जरूरी नहीं है।

मेरा एक सुझाव है कि आप अपनी माँ और बहिन को सुझाव दें कि वे आप के विरुद्ध घरेलू हिंसा अधिनियम में आप के विरुद्ध आवास और भरण पोषण की मांग करते हुए मुकदमा कर दें। आप उस का विरोध करें या न करें तब भी उन दोनों को आवास और भरण पोषण प्रदान करने का आदेश अदालत आप के विरुद्ध दे देगी। तब उन दोनों के लिए यह सब उपलब्ध कराना आप का दायित्व हो जाएगा जिसे आप अपने मुकदमों में भी प्रदर्शित कर सकते हैं। इस से आप को आप की पत्नी द्वारा किए गए मुकदमों में बचाव करने में मदद मिलेगी।

पति के देहान्त के उपरान्त उस की संपत्ति में पत्नी का अधिकार।

Hindu succession actसमस्या-

विकी पन्त ने खटीमा, उत्तराखंड से समस्या भेजी है कि-

ति की मृत्यु क़े बाद उसकी जायदाद पर मालिकाना हक किसका होगा?

सुनीता ने कुरुक्षेत्र हरियाणा से समस्या भेजी है कि-

मेरी उम्र 22 वर्ष है, मेरा सवा साल का एक पुत्र है। मेरी शादी लगभग दो साल पहले हुई थी। लेकिन कुछ समय पहले दुर्घटना में मेरे पति का देहान्‍त हो चुका है। मेरे पति के छोटे भाई से भी मेरी शादी की बात नहीं बन पाई। अब मैं यह पूछना चाहती हूं कि अगर मैं पुनर्विवाह करूँ तो मेरा व मेरे पुत्र का मेरे पहले पति व मेरे पति के पिता पर क्‍या क्‍या अधिकार हो सकता है? ताकि मैं अपना हक व अपने बेटे के भविष्‍य को दुरुस्‍त कर सकूँ।

समाधान-

ति की मृत्यु के उपरान्त उस का उत्तराधिकार हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार निर्धारित होता है। इस अधिनियम की धारा 8 में प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों के उपलब्ध होने पर पत्नी, संतानें और माँ को उत्तराधिकार प्राप्त होता है। इस तरह पति की जो भी संपत्ति है इन तीन प्रकार के उत्तराधिकारियों का उस में समान हिस्सा होता है। उदाहरण के रूप में यदि पत्नी, माँ और दो संतानें हैं तो कुल संख्या 4 होने से प्रत्येक को हिस्से में एक चौथाई संपत्ति का अधिकार प्राप्त होता है। इस संपत्ति का बंटवारा होने तक पति की संपत्ति इन चारों उत्तराधिकारियों की संयुक्त संपत्ति होती है।

दि कोई पुश्तैनी संपत्ति परिवार में मौजूद है जिस में पति का हिस्सा भी था तो उस पति के हिस्से की स्थिति भी वही होगी जो पति की अन्य संपत्ति की होगी।

सुनीता जी को और उन के पुत्र के अतिरिक्त यदि उन के पति की माँ जीवित है तो उन के पति की जो भी संपत्ति है या परिवार में किसी पुश्तैनी संपत्ति में उन के पति का पुश्तैनी हिस्सा था तो उस सब के तीन हिस्से होंगे जिस में से एक हिस्से पर सुनीता जी का तथा एक हिस्से पर उन के पुत्र का अधिकार है। वे अपने व अपने पुत्र के लिए उस संपत्ति में अपना हिस्सा अलग कराने के लिए बंटवारे का वाद संस्थित कर सकती हैं। पुनर्विवाह करने पर कोई बाधा नहीं है क्यों कि उन्हें पति की संपत्ति में अधिकार उसी दिन प्राप्त हो गया है जिस दिन उन के पति का देहान्त हुआ है। उन से यह अधिकार पुनर्विवाह होने के कारण छीना नहीं जा सकता।

जारकर्म (Adultery) का अपराध क्या है?

rp_sex.jpgसमस्या-

योगेन्द्र सिंह ने मंडी धनोरा, अमरोहा उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

त्नी के किसी दूसरे पुरुष के साथ सम्बन्ध हों तो दूसरे पुरुष के विरुद्ध क्या कार्यवाही की जा सकती है?

समाधान-

दि किसी व्यक्ति की पत्नी के साथ कोई दूसरा पुरुष यौन संबंध स्थापित करता है और उस पुरुष का यह कृत्य बलात्कार नहीं है तो यह धारा 497 भा.दंड संहिता के अन्तर्गत “जारकर्म” का अपराध है जिस में उस दूसरे पुरुष को पाँच वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों तरह के दण्ड से दण्डित किया जा सकता है। जारकर्म के अपराध का दोषी केवल पुरुष हो सकता है। धारा 497 भा.दं.संहिता निम्न प्रकार है-

  1. जारकर्म

जो कोई ऐसे व्यक्ति के साथ, जो कि किसी अन्य पुरुष की पत्नी है और जिसका किसी अन्य पुरुष की पत्नी होना वह जानता है या विश्वास करने का कारण रखता है, उस पुरुष की सम्मति या मौनानुकूलता के बिना ऐसा मैथुन करेगा जो बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता, वह जारकर्म के अपराध का दोषी होगा, और दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा। ऐसे मामले में पत्नी दुष्प्रेरक के रूप में दण्डनीय नहीं होगी।

स अपराध को साबित करने के लिए पत्नी के साथ दूसरे पुरूष का यौन संबंध स्थापित किया जाना साबित करना होगा, उस में स्त्री के पति की सम्मति या मौनानुकूलता नहीं होनी चाहिए।

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 198 की उपधारा (2) के अन्तर्गत उक्त अपराध के लिए केवल उस स्त्री का पति ही व्यथित व्यक्ति माना जाएगा और केवल वही इस अपराध के अन्तर्गत अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है।

ह अपराध संज्ञेय नहीं है इस कारण इस पर पुलिस सीधे कार्यवाही नहीं कर सकती। इस मामले में व्यथित व्यक्ति अर्थात उस स्त्री के पिता को ही क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के न्यायालय में स्वयं ही परिवाद प्रस्तुत करना होगा।

मतभेद गहरे हों तो विवाह विच्छेद ही उत्तम उपाय है।

domestic_violenceसमस्या-

ओमप्रकाश वनकार ने गोशमहल, बारादरी, हैदराबाद. तेलंगाना से समस्या भेजी है कि-

 मेरी पत्नी के कूर स्वभाव, कारण तो कई हैं. कुछ मुख्य कारण हैं कि, मैं शाकाहारी और वह मांसाहारी वो मुझे मांसाहार और वाइन पीने के लिये कहती है और महिला मंडली की धमकी देती है कि पुलिस में “दहेज के केस” में तुझे पिटवाऊंगी, घर का काम नहीं करना, (मैं शॉप को जाने के बाद, भोजन बनाकर खाना, शॉप से घर को आने के बाद फिर से झगड़ा शुरू. अगर मैं-मैं चुप-चाप रहता हूँ तो कहती है कि तू मुझे इस तरह पुकार-पुकार के मारना चाहता है, मेरे पर शॅंक करना, मेरे भाभियों के साथ मेरे संबंघ बताना और मेरे बड़े भाई पर उसे छेड़ना का आरोप लगाना. जब कि हम 3 ब्रदर हैं और हम एक ही शॉप (प्रिंटिंग प्रेस) में काम करते हैं. हमारे शॉप को आने-जाने का समय एक-सा रहता है. मेरे 2 बेटियाँ हैं। पत्नी लड़कर 27 एप्रिल, 2015 को अपने मायके चली गई और महिला सुरक्षा सेल में हमारे खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी. हमें नंगी-नंगी गाली-गलोच, मेरी पत्नी और उस के भाई ने दी हैं उस की हमारे पास वाइस रेकॉर्ड है.

समाधान-

भी कुछ दिन पहले ही हम कह चुके हैं कि पति-पत्नी के विवादों के लिए अधिकांशतः सांस्कृतिक अन्तर बहुत बड़ा कारण है। जब विवाह करना होता है तो यह देखते ही नहीं कि पत्नी की आदतें, खान-पान और रहन सहन कैसा है। पति पत्नी को साथ रहना होता है और परिवार में रहना होता है। अक्सर पत्नी पति के परिवार में आ कर रहती है। यदि उस के खान-पान, आदतों और रोजमर्रा के व्यवहार में बहुत अधिक अन्तर होता है तो वह कभी भी पति और उस के परिवार के साथ समायोजन बना नहीं सकती। इन सब चीजों का पता विवाह के पहले होना चाहिए। पर हम तो वस्तुतः एक लड़की को कोरा वस्तु समझते हैं और बहू बना लाते हैं और सोचते हैं आखिर हमारे परिवार में हमारी तरह रहना होगा।

लेकिन कोई लड़की या स्त्री वस्तु नहीं होती, केवल समझी जाती है। वह एक जीता जागता इंसान होती है। वह सोचती है कि जब आप पत्नी के लिए अपनी आदतें नहीं बदल रहे हैं तो वही क्यों बदले। जब उस के मायके में पिता, माता और भाई उस का साथ देने वाले होते हैं तो यह जिद बहुत गंभीर रुप धारण कर लेती है, और जब कानून पत्नी का साथ देने वाला हो तो और भी मुश्किल खड़ी हो जाती है। इतने बरस से लोग हाँका लगा रहे हैं कि कानून स्त्रियों का साथ देता है। क्यों न दे। क्यों कि अधिकांश स्त्रियाँ तो कुछ ही समय में ससुराल के परिवार के सामने हथियार डाल देती हैं। चन्द स्त्रियाँ ही इस तरह जिद पर आती हैं जैसे आप की पत्नी है। होना तो यह चाहिए था कि पत्नी या जीवनसाथी के चुनाव का तरीका बदलना चाहिए था।

में नहीं लगता कि आप की समस्या का हल सफल दाम्पत्य में हो सकता है। वायस रेकार्डिंग पत्नी द्वारा किए गए मुकदमों में आप के बचाव के सबूत के रूप में प्रस्तुत की जा सकती है। पर आप को जैसे तैसे यह विवाह विच्छेद करना होगा। आप को चाहिए कि आप सीधे सीधे सहमति से विवाह विच्छेद के लिए प्रयास करें। पत्नी को उस का स्त्री धन और स्थाई पुनर्भरण की राशि दे कर सहमति से विवाह विच्छेद का मार्ग तलाशें।

पत्नी से बात कर के निर्णय करें कि आप को आगे क्या करना चाहिए।

rp_sex.jpgसमस्या-

राज ने उज्जैन, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं उज्जैन में एक प्राइवेट जॉब करता हूँ। मेरी सगाई 24 जून 2012 को हुई थी और शादी 30-11-2012 को। इस बीच मेरी पत्नी से मेरी बातचीत होती थी, अच्छी तरह से। हम घूमते फिरते बातें करते थे। मेरी पत्नी की शादी के पहले से ही सरकारी अस्पताल में जॉब थी। शादी के पहले मुझे मेरी पत्नी ने बताया था कि उसकी माँ उसे परेशान करती है, खाने को नहीं देती, मारती ओर जॉब की सैलेरी भी रख लेती है। 30-11-2012 को शादी होने के बाद मेरी पत्नी का मेरे घर आना-जाना चलता रहता था क्यों कि जॉब का ट्रांसफर नहीं हुआ था। इसी बीच मेरी पत्नी छुट्टी में मिलने मेरे घर आई थी तो मेरी सास ओर साले ने मेरी पत्नी को फोन पे अपशब्द कहे। मैं ने इसका विरोध किया तो मेरी सास ओर साले को बुरा लगा और उन्हों ने मुझे अप शब्द कहे कि हम तो तुम्हारे डीओर्स करा देंगेष फिर मैं ओर मेरे घर के लोग मेरे सुसराल वालों से मिल के मसले का हाल निकाला और अच्छे से रहने लगे। छह माह बाद मेरी पत्नी का ट्रांसफर खरणों से उज्जैन के सरकारी अस्पताल में हो गया। फिर हम हंसी ख़ुशी से रह रहे थे। 25-12-2013 को मेरी पत्नी परीक्षा की बोल के उस की माँ के यहाँ गई। मेरे साढू भाई ओर उसकी पत्नी के साथ जो कि उज्जैन में ही मेरे घर के पास में रहते हैं। दो दिन बाद मैं ने फ़ोन किया तो मेरी पत्नी कॉल नहीं उठा रही थी। फिर मुझे कॉल ट्रैक से पता चला कि मेरी पत्नी शिरडी महाराष्ट्र घूमने गयी। ये बात 3 दिन बाद मैं ने पूछी तो मुझे मना कर दिया और जूठ बोला कि मैं कहीं नहीं गई। मैं ने इस बात पे उसे फोन पर डाँटा और कहा कि झूठ बोलने वालों की मेरे जिंदगी मे कोई जगह नहीं है, मत आना मेरे घर। फिर भी वह उज्जैन आ गई ओर उसके जीजा ओर बड़ी बहन के घर रहने लगी। तो मुझे ये अच्छा नहीं लगा तो मेरे घर के लोगो ने मुझे ओर मेरी पत्नी को समझाया और वापस घर आ गयी। फिर अच्छे से रहने लगे। 10 जुलाइ 2014 को मेरी पत्नी उसके जीजा के घर पर रहने लगी। ये बात मैं ने पूछी तो बोले की तुम्हारा किसी लड़की से चक्कर चल रहा है। ये बात बोल के 17 जुलाई को मेरे घर पर आ कर मेरी सास साले और साढू भाई ने गाली गलौच की और मारने की धमकी दी और उसके बाद मेरे खिलाफ झूठी रिपोर्ट की। मैं ने दूसरी शादी कर ली है। एसी महिला परामर्श केंद्र में रिपोर्ट दर्ज़ करा दी। वहाँ साबित हुआ कि मेरे किसी लड़की से कोई चक्कर नहीं है, ना ही दूसरी शादी की है। फिर वहाँ मेरी पत्नी ने मेरे साथ अलग रहने की डिमांड रखी। सास ससुर के साथ नहीं रहना। फिर हम अलग रहने लगे अच्छे से। 2 महीने बाद नवरात्र में 28-9-14 को लड़कों के साथ गरवा खेलने को मना करने पर हम पति पत्नी के बीच विवाद हो गया। जिस के चलते दूसरे दिन 29-9-14 को जहाँ हम लोग रहा रहे थे। वहाँ मेरे ससुराल वाले आ कर मेरा सामान रूम से बाहर फैंक दिया और मुझे मारा। इस की रिपोर्ट मैं ने थाने में कर दी। ये बात मालूम होते ही मेरे ससुराल वालों ने 3 दिन बाद 1-10-14 को मेरे ओर मेरी माँ के खिलाफ 498 की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। उसके एक माह बाद मैं ने धारा 9 का आवेदन लगा दिया साथ रहने के लिए। पर वह तारीख पर अभी तक नहीं आ रही है। और 01-10-14 से आज दिनांक 19-5-15 तक मेरी पत्नी हम मिलते जुलते हैं। मैं ने पूछा कि एसी रिपोर्ट क्यों की तो उस ने कहा कि मेरे घर के लोग नहीं चाहते तुम्हें रखना। और मैं कुछ नही कर सकती क्यों कि पत्नी ने 498 में गवाह में उसके जीजा बहन, माँ और उसके दोस्त का नाम लिखा है और मै मेरी पत्नी के साथ जहाँ भी घूमता हूँ वहाँ के फोटो ओर रिकॉर्डिंग है मेरे पास। ये सब बात मैं ने मेरी सास ओर साले को समझाने की कोशिश की पर वो नहीं मान रहे हैं ओर मेरा साढू भाई मेरे खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज करा देता है थाने में और साबित होने पर कुछ नहीं निकलता और जान से मारने की धमकी देता है कि डाइवोर्स दे दो वरना मार डालूंगा। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

प लगातार पत्नी से मिल रहे हैं। उस के परिजन उसे आप से अलग करना चाहते हैं। वह फिर भी आप से मिलती जुलती है। आप के पास दो विकल्प हैं पत्नी के साथ रहने का और उस से विवाह विच्छेद कर देने का। इस का अर्थ यह है कि असली विरोध तो आप की पत्नी के अंदर है। आप पत्नी को समझाएँ कि दोनों में से एक ही बात निभ सकती है। या तो वह अपने परिवार की बात मान ले या फिर उन से सारे संबंध तोड़ कर आप के साथ हो जाए। यदि वह अपने परिवार की कीमत पर आप के साथ रहना चाहती है तो आप दोनों का साथ निभ सकता है अन्यथा नहीं। इस कारण जब तक वह अन्तिम निर्णय ले कर आप को न बता दे आप को वर्तमान स्थिति से आगे नहीं बढ़ना चाहिए। हो सकता है आप की पत्नी आप से प्रेम करती हो और आप की सास व रिश्तेदारों में से किसी ने आप का अहित करने के लिए उसे धमकाया हो और वह आप को नहीं बता रही हो। यदि ऐसा है तो आप को यह बात भी अपनी पत्नी से उगलवानी पड़ेगी जिस से वस्तुस्थिति का पता चल सके। आप की पत्नी नौकरी करती है आत्मनिर्भर है। हो सकता है उस के परिजन ये समझते हों कि यदि वह आप के प्रभाव में आ गयी तो उन की उपेक्षा करने लगेगी।

प अनन्त काल तक इस बात का इन्तजार नहीं कर सकते कि आप की पत्नी कोई निर्णय करे। इस के लिए उसे एक उचित समय भी दीजिए जिस में वह अपना अन्तिम निर्णय आप को बता दे। यदि वह आप के साथ रहना चाहती है तो धारा 9 हिन्दू विवाह अधिनियम वाले मुकदमे में न्यायालय में उपस्थित हो और बयान दे कि वह आप के साथ रहना चाहती है और उसी समय आप के साथ जाना चाहती है। लेकिन उस के परिजन इस में बाधा डालते हैं। उन से सुरक्षा प्रदान कराई जाए। इस बयान पर न्यायालय आप की पत्नी को अदालत से ही आप के साथ जाने को कह सकता है और आप अदालत की आदेशिका में यह सबह बातें आ जाने के बाद अपनी पत्नी को साथ ला कर रह सकते हैं। यदि फिर भी आप की पत्नी के परिजन आप के निजी जीवन को बाधित करते हैं तो आप अपनी पत्नी के साथ संयुक्त रिट याचिका उच्च न्यायालय में लगाएँ कि आप दोनों विवाहित हैं और आप की पत्नी की माँ व कुछ संबंधी आप को साथ रहने नहीं देना चाहते इस के लिए आप दोनों को सुरक्षा प्रदान की जाए। लेकिन यह सब तभी संभव है जब आप अपनी पत्नी को इस के लिए तैयार कर लें। यदि आप की पत्नी एक उचित समय में यह सब करने को तैयार नहीं है तो आप उसे कह सकते हैं कि इस से अच्छा है आप दोनों सहमति से विवाह विच्छेद कर लें। दोनों में से एक बात उसे माननी होगी। यदि वह इस के लिए मानती है तो फिर विवाह विच्छेद करना ही बेहतर है।

विवाह विच्छेद हो जाने के बाद पत्नी या पति जीवन साथी नहीं होते।

RTIसमस्या-

यसदानी खान ने रायपुर, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

मैं रायपुर में ही हायर सेकण्डरी स्कूल मे प्रिंसपल के पद पर कार्यरत हूँ। मेरे स्टाफ मे कुलदीप भानू व्याख्याता पद पर कार्यरत है जिस की उम्र 40 वर्ष है कुलदीप ने अपनी शादी 23 वर्ष की उम्र में की थी। वह 30 साल की उम्र तक अपनी पत्नी के साथ रहा फिर दोनों सामाजिक समझौते के तहत तलाक लेकर अलग रहने लगे। 1 साल बाद कुलदीप ने दूसरा विवाह कर लिया। कुलदीप को अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहते हुए 9 साल हो गये हैं और उसके दो पुत्र भी हैं। जनवरी 2014 में कुलदीप की पहली पत्नि के भाई ने सूचना अधिकार के तहत कुलदीप की सारी गोपनीय जानकारी की मांग की। कुलदीप एक सरकारी कर्मचारी है जिससे उसके शासकीय गोपनीय चरित्रावली की जानकारी देना सूचना अधिकार के अंर्तगत नहीं था जिस से मैं ने उसको जानकारी नहीं दी। फिर उनके भाई उनके द्वारा राज्य सूचना आयोग में भी आवेदन किया मगर वहाँ भी उनको जानकारी देने से मना कर दिया गया। उसके बाद मार्च 2014 मे कुलदीप की पहली पत्नि ने रायपुर कुटुम्ब न्यायालय में भरण पोषण के लिए आवेदन किया और कुटुम्ब न्यायालय ने जुलाई 2014 में अंतरिम भरण पोषण की राशि तय कर दी आज तक कुलदीप अपनी पहली पत्नी को भरण पोषण की अंतरिम राशि देकर भरण पोषण कर रहा है। आज वर्तमान तक कुटुम्ब न्यायालय में कुलदीप और उनकी पहली पत्नी का केस चल रहा है फाईनल आदेश नहीं हुआ है। अब मार्च 2015 में कुलदीप की पहली पत्नी ने सूचना के अधिकार 2005 के तहत कुलदीप की शासकीय गोपनीय चरित्रावली की मांग की है कुलदीप की पहली पत्नी ने केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा पारित निर्णय prashansha Sharma V/s Delhi Transco Ltd. No. CIC/SA/A/2014/000433 date 03.02.2015 के आधार पर आवेदन किया है। उनका कहना है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत कोई भी अपने जीवन साथी की आय, सम्पत्ति निवेश आदि की जानकारी मांग सकता है। केन्द्रीय सूचना आयोग (सी. आई. सी) ने इस बारे में आदेश जारी कर दिये हैं। पति की कमाई आरटीआई के अधीन हो गयी है। सूचना आयुक्त ने नई रूलिंग दी है अभी तक यह सूचनाएँ थर्ड पार्टी के तहत गोपनीय होती थी। अब पति की कमाई और निवेश का ब्यौरा पत्नि मांग सकती है। यह सभी दलिलें कुलदीप की पहली पत्नि ने आवेदन में लिख कर मुझ से कुलदीप की गोपनीय जानकारियों की मांग की है। मैं आपको ये बताना चाहूंगा की मै नें सीआईसी के द्वारा पारित उपरोक्त निर्णय को ध्यान से पढ़ा। मेरे हिसाब से उपरोक्त केस मेम सीआईसी ने सिर्फ आवेदिका और अनावेदक के लिए ही आदेश दिया है। उपरोक्त केस का फैसला केस से असंबंधित लोगों के लिए नहीं है और उपरोक्त केस में अनावेदक, आवेदिका का भरण पोषण नहीं कर रहा था इसलिए सीआईसी ने उपरोक्त केस का फैसला आवेदिका के पक्ष में किया। अब मै आपसे यह पुछना चाहता हूँ कि क्या सीआईसी ने ऐसा कुछ आदेश निकाला है जिसके तहत मुझे कुलदीप की गोपनीय जानकारीयाँ उनकी पहली पत्नी को देना पड़े, और अगर ऐसा कुछ नया नियम निकाला गया है तो सूचना के अधिकार 2005 के किस धारा में संशोधन/एड किया गया है और मुझे इन सभी नियमों की जानकारी किस बुक से प्राप्त हो सकता है। सीआईसी द्वारा उपरोक्त केस का निर्णय 03.02.2015 को लिया गया है और कुलदीप की पहली पत्नी के आवेदन के अनुसार सीआईसी द्वारा नई रूलिंग भी 03.02.2015 को पारित किया गया है। सीआईसी द्वारा उपरोक्त केस में पारित निर्णय के अनुसार जब कोई पति अपनी पत्नि का भरण पोषण नहीं कर रहा है तब पत्नि अपने पति से उनकी कमाई व निवेश का ब्यौरा मांग सकती है मगर यहाँ स्थिति यह है कि कुलदीप भानु अपनी पहली पत्नी का भरण पोषण न्यायालय के आदेश के अनुसार 15.07.2014 से कर रहा है तो आप बताइऐ कि क्या? कुलदीप की पहली पत्नी को उनके द्वारा मांगी गई जानकारी देना आवश्यक है या नहीं।

समाधान-

प की जानकारी के लिए बता रहे हैं कि सूचना के अधिकार कानून में कोई संशोधन नहीं किया गया है। यह केवल सूचना आयुक्त का निर्णय है। भारत का संविधान यह उपबंध करता है कि ऊंचे न्यायालय का निर्णय निचले न्यायालय पर बाध्यकारी होगा। इस कारण आप से यह मांग की जा रही है कि आप सूचना दें।

लेकिन इस मांग में कई खामियाँ हैं। आयुक्त का निर्णय यह कहता भी हो कि जीवन साथी की आय व संपत्ति के बारे में सूचना दिया जाना चाहिए, तो भी यह महिला उस व्यक्ति की जिस के बारे में आप से सूचना मांगी गयी है अब जीवन साथी अर्थात पत्नी नहीं है। उस की जीवन साथी तो उस की वर्तमान पत्नी है। जिसने सूचना मांगी है वह तो इस व्यक्ति से विवाह विच्छेद कर चुकी है। इस कारण आप को यह सूचना नहीं देना चाहिए।

दूसरी बात यह है कि यह आयुक्त का निर्णय है। कानून में कोई परिवर्तन नहीं है। और आप सूचना अधिकारी हो सकते हैं लेकिन न्यायालय नहीं हैं। आप पर यह निर्णय वैसे भी बाध्यकारी नहीं है। इस कारण आप के द्वारा यह निर्णय नहीं लेना चाहिए कि यह सूचना दी जाए। एक व्यक्ति की गोपनीय जानकारी सूचना के अधिकार के अन्तर्गत देना उचित नहीं है। यदि आप आवेदिका का आवेदन निरस्त करते हैं तो उसे अपील करने दीजिए। यदि अपील न्यायालय आप को निर्देश दे कि आप सूचना दें तो आप सूचना दे सकते हैं।

पत्नी का उत्तराधिकार केवल पति की संपत्ति में है उस के अन्य परिजनों की संपत्ति में नहीं।

court-logoसमस्या-

राजीव कुमार ने चन्दौसी, जिला संबल, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे भाई ने फाँसी लगा कर आत्महत्या कर ली। पर सच में उन की हत्या मेरी भाभी ने की थी। पर सबूत न होने से प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी। अब भाभी मेरे पापा के बनाए मकान में हिस्सा मांग रही है। अगर मेरे पापा मेरे को मकान का दान पत्र निष्पादित कर सकते हैं? मेरी भाभी कोई केस डाल कर मकान में हिस्सा तो नहीं ले सकती? मेरे तीन बहनें हैं जिन का विवाह हो चुका है।

समाधान-

म तौर पर जब एक व्यक्ति की फाँसी लगने से मृत्यु होती है और उस की पत्नी से उस का विवाद चल रहा होता है तो उस व्यक्ति के परिजन यही समझते हैं कि उस की पत्नी ने हत्या की है। पर अकेली पत्नी द्वारा किसी पुरुष को उस के होश में रहते फाँसी दे कर हत्या करना असंभव काम है। यदि वह बेहोश भी हो तो भी लगभग असंभव है। वास्तव में ऐसे मामले वैवाहिक विवाद से डिप्रेशन में आये पुरुष द्वारा आत्महत्या करने के ही होते हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि पत्नी पति की फाँसी लगा कर हत्या कर दे और कोई सबूत नहीं मिले।

वैसे आप की समस्या का आप के भाई की मृत्यु का कोई संबंध नहीं है। आप की भाभी का अधिकार सिर्फ आप के मृत भाई की संपत्ति पर है। यदि परिवार में कोई पुश्तैनी या सहदायिक संपत्ति हो और उस में भाई का हिस्सा हो तो उस पर वह अपना उत्तराधिकार जता सकती है। यदि मकान आप के पिताजी के स्वामित्व का है तो वे उस का दान-पत्र आप के नाम निष्पादित कर सकते हैं। इस दान पत्र से वह संपत्ति आप के नाम हस्तांतरित हो जाएगी। वैसे वे दान पत्र के स्थान पर विक्रय पत्र भी आप के नाम निष्पादित कर सकते हैं दोनों में समान खर्चा होता है। खर्चा बचाना हो तो वसीयत पंजीकृत कराने से भी काम हो सकता है लेकिन वसीयत कोई भी अपने जीवनकाल में बदल सकता है और उस में स्वामित्व हस्तान्तरण भी वसीयत करने वाले की मृत्यु पर भी होता है।

प की भाभी यदि मुकदमा करना चाहती है तो कर सकती है। लेकिन संपत्ति के लिए किया गया उस का मुकदमा निरस्त हो जाएगा क्यों कि उस का अधिकार उस के पति की संपत्ति के अतिरिक्त किसी भी संपत्ति पर नहीं है।

पत्नी जब साथ छोड़ फर्जी रिपोर्ट कराए तो उसे छोड़ देना ही ठीक है …

Wife 50-50समस्या-

रामकुमार ने राजगढ़, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी उम्र ३० वर्ष है मेरे एक लड़की अंजलि २५ वर्ष से पिछले ९ वर्षो से प्रेम सम्बन्ध थे, पिछले ८ वर्षो से हम दोनों ने शादी के बहुत प्रयास किये परन्तु विवाह नहीं हो पाया। क्यूंकि अंजलि भाग कर शादी के लिए राजी नहीं हुई, न अपने घर वालों से यह बात की कि वह मुझ से प्यार करती है। १ फरवरी २०१३ एक दिन घर वालों को इस बात का पता चला कि हम एक दूसरे को प्यार करते हैं तो उन्होंने लड़की को परेशान कर ब्लैक मेल करने की शिकायत आवेदन हरिजन थाने में दे दिया। जिस पर लड़की ने मेरे पक्ष में बयान दिया। मैं ने वहाँ उन के घर वालों से कहा कि मैं अंजलि से किसी प्रकार का कोई सम्बन्ध नहीं रखूँगा इस बात पर समझौता हुआ, बात यहीं ख़त्म हो गयी। ३-४ दिन बाद हम फिर से मिलने जुलने लगे क्योंकि अंजलि हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई भोपाल में कर रही थी। मैं अपने शहर राजगढ़ से उस से मिलने जाता और वो भी मुझ से हॉस्टल से घर जाने का झूट बोल कर मिलने आया करती। २०१४ तक इसी तरह चलता रहा। फिर उसने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मेरे शहर में ही विधि पाठ्यक्रम में दाखिला ले लिया। क्योंकि हम आस पास के शहर के निवासी थे। अब हमारा सप्ताह में ३ से चार दिन मिलना जुलना होने लगा। फिर १ मई २०१४ को मेरे छोटे भाई की शादी हुई। मेरे घर में अब मैं ही अविवाहित रह गया था। मेरा एक भाई और दो बहिने हैं जिनका विवाह हो चुका है और अंजलि भी अपने घर में अकेली अविवाहित रह गयी थी। मेरे छोटे भाई की शादी के बाद मेरे ऊपर शादी का दवाब बढ़ने लगा। मैंने अब अंजलि के सामने विवाह करने का प्रस्ताव रखा जिस को उसने २८ जून को ठुकरा दिया कहा मैं घर वालों के विरुद्ध जाकर विवाह नहीं कर पाऊँगी। फिर मैं ने उस से दूरिया बढ़ानी शुरू की और बातचीत भी खत्म की। इस के बाद मैं ने ५ जुलाई २०१४ को अपने समाज यानी की स्वर्णकार में घरवालों की इच्छा के अनुसार सगाई कर ली। जब इस बात का अंजलि को पता चला कि मेरी सगाई हो चुकी है तो वो टूट सी गयी और अगस्त में उसने मेरे सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया। अब मैं क्या करता कहने लगी कि मैं मर जाउंगी, अगर आप से दूर हुई तो, किसी तरह से मुझसे दूर मत हो जाना। आप एक सप्ताह के अंदर ही मुझ से शादी करलो। मैं आपके साथ ही जीवन बिताना चाहती हूँ। मैं भी उससे बहुत प्यार करता था इसलिए मैं राजी हुआ और उस से दिनांक १ सितम्बर २०१४ आर्य समाज मंदिर में शादी करली और उसका हम दोनों ने विवाह पंजीयन भी करवा लिया। अब अंजलि ने मुझे विश्वास दिलाया कि वह अपने घर वालों को १ से २ महीने में इस विवाह के लिए राजी कर लेगी। पर इस समय अवधि में वह ऐसा नहीं कर सकी। जो सगाई समाज में हुई थी उसको भी मैं ने तोड़ दिया। क्यूंकि शादी की तारीख नजदीक आने लग रही थी। एक दिन मैं ने अंजलि के चाचा को सारी बात बता डाली कि हम ने इस तरह से घर वालों से छुपा कर शादी कर ली है। इस बात से दोनों परिवार वालो तनाव चिंता की स्थिति बन गयी। अंजलि के चाचा भी राजगढ़ पुलिस में हैड के पद पर हैं और काफी समझदार भी रहे उन्होंने अंजलि के परिवार वालों को इस शादी के लिए राज़ी कर लिया। उन्होंने दिनाक १ दिसम्बर २०१४ राजगढ़ स्थित जालपा माता मंदिर से अंजलि को मेरे साथ विदा कर दिया। जिस में मेरे कुछ मित्र और अंजलि की माता जी और चाचा चाची उपस्थित रहे। अब मेरे घर वाले अंजलि को अपनाने के लिए राजी नहीं थे। और वह मुझसे २०० किलोमीटर दूर इंदौर में निवास करते थे मैने भी ठान लिया कि हम जीवन खुद जिएंगे। उन्होंने मुझे मौखिकः रूप से अपने सम्पति और जायदाद से बेदखल कर सब रिश्ते तोड़ दिए। अब हम अच्छे से प्रेम से राजगढ़ में मेरे एक घर जो कि मेरी माता जी के नाम है उसमे निवास कर रहे थे। मैं ने अंन्जलि को उसके घर वालों से कभी भी मिलने से नहीं रोका, उसका फोन से भी उसके माता पिता से संपर्क होता रहा और महीने में ४ से ५ बार मिलती रही। सब अच्छा चल रहा था। एक रिश्तेदार के शादी में २७ जनवरी को इंदौर जाना हुआ वहाँ मेरे घर वालों का भी मिलना हुआ और उन्होंने अंजलि के बारे में अपशब्द कहे। जिस से गुस्से में आकर उनसे विवाद हो गया। फिर अंजलि और मैं निज निवास राजगढ़ १ फरवरी रात को १२ बजे लौट आये। अगले दिन अंजलि का पेट दर्द हुआ तो मैं ने उसे शासकीय अस्पताल में एडमिट कराया और उसका उपचार कराया सोनोग्राफी करवाई और उसी दिन रात को छुट्टी करवा कर घर ले आया। २ दिन ठीक से रहे फिर उसको पेट दर्द की शिकायत हुई तो मैं ने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी। मैं अकेला उसे संभाल नहीं पा रहा था इस लिए मैंने अंजलि को ३००० रूपये दिए और उसकी बड़ी बहिन के यहाँ जो हमारे शहर में ही रहती है एक दिन छोड़ने का फैसला लिया। अंजलि अक्सर उनसे मिलती रहती थी मेरा सोचना था की ०७ फ़रवरी को रविवार है और उनकी बहिन की छुट्टी भी रहेगी तो बहिन से बात कर मैं ने दिनाक ०६ शनिवार शाम को उनको उनके पास छोड़ दिया। संडे उन्होंने अंजलि को दिखाया और सोमवार को मेरे पास छोड़ दिया। अब उसी दिन ०९ फरवरी सोमवार को मैं व अंजू जनपद में किसी काम से जाना हुआ और काम करने के बाद हम रवाना ही होने वाले थे की उसके चाचा जी जनपद में पहुंच गए और मुझसे और अंजलि से उनके घर चलने को कहा और खाने पर बुलाया। मैं ने कहा मैं १५ मिनिट में आता हूँ आप अंजलि को ले जाओ। दोपहर के ४ बजे अंजलि का कॉल आया आप आ जाओ फिर घर चलते हैं। मैं आधे घंटे बाद अंजलि को लेने पहुंचा और जब चलने को कहा तो उनकी चाची ने बोला आपकी बहुत शिकायतें आ रही हैं। मैं ने कहा बात क्या है, कौन सी शिकायत? उन्होंने मुझसे बोला कि आप अंजलि के साथ लात घूसों से मारपीट करते हैं और उसे अक्सर बेल्टों से मारपीट करते हैं। मुझे सब बातें सुनकर धक्का सा लगा। हम दो महीने से अच्छे से रह रहे थे कोई झगड़ा हमारा हुआ नहीं, ना ही कोई मनमुटाव हुआ। फिर एक दम से क्या हुआ इतने में अंन्जलि यही सब बातें कहने लगी। कि मेरे साथ इन्होने मारपीट की है और १५ से २० मिनिट में वही अंजलि के माता पिता भी पहुंच गए। जो कि हमारे शहर से ७० किलोमीटर दूर रहते हैं और उन लोगों ने भी मेरे साथ गाली गलौच और अपशब्द कहे। मैं समझ चुका था कि मेरे विरुद्ध कुछ तो साजिश हुई है। मैं उन लोगों से अपने रिश्ते को बनाये रखने के लिए मेरे से जाने अनजाने में हुई गलती की माफ़ी भी मांगी। पर वो अंजलि को मेरे साथ भेजने के लिए तैयार नहीं हुए और ना ही अंजलि आने के लिए तैयार हुई। उन लोगों ने मेरी पत्नी से मुझे आज दिनाक २० फ़रवरी तक कोई बात भी नहीं होने दी। उसका मोबाइल भी बंद है और दिनांक ०९ फरवरी २०१४ को रात्रि में ही महिला थाना राजगढ और हरिजन कल्याण थाना राजगढ़ में मेरे विरुद्ध, मेरे माता पिता, दोनों बहिनो के विरुद्ध अंन्जलि ने घरेलू हिंसा, शराब पीकर मारपीट और दहेज़ के लिए मांग की शिकायत कर दी है। अभी आवेदन दिया है मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। मैं सभी तरह के माध्यमों से बातचीत का प्रयास कर चुका हूँ पर कोई हल नहीं निकला है। अंजलि ने मेरे माता पिता भाई बहिन को भी इसमें आरोपी बनाया है जब कि उन से हमारे कोई सम्बन्ध नहीं हैं। न वो हमारे साथ निवास करते हैं। उनकी कोई गलती भी नहीं है। अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूँ मैं ने उसके साथ कोई मारपीट नहीं की, न कोई बुरा व्यवहार किया और न ही मेरे किसी घरवाले ने। अब तक मैं ने उसके पढ़ाई के सारे खर्चे विवाह पूर्व के उठाये हैं। जिस का भुगतान मेरे अकउंट से हुआ। उस ने अपने पिता के इलाज के लिए मुझ से ३ लाख रूपये भी लिए थे २०१३ में जो कि उस ने स्वयं चेक द्वारा भुनाए थे। जब दिनांक ९ रात्रि में घर पर लौटा तो अलमारी के लॉकर में २ लाख कीमत की जो रकम थी और बीस हजार नगद थे वो मेरी पत्नी ले जा चुकी थी। अब मैं अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा हूँ। आत्महत्या जैसे विचार मन में आ रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि क्या करूँ। शिकायत उस ने जो मेरी की है मेरे परिवार वालों की क्यों की है? ऐसा क्यों किया? न कोई बात हुई है न उसके घर वाले होने दे रहे हैं। क्या मेरे माता पिता पर जो अलग शहर में रहते हैं वो भी इस प्रेम विवाह में दहेज़ प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के दायरे में आते हैं। मुझे अब क्या करना चाहिये? मुझे लगता है कि अंजलि के माँ बाप ने उस की कहीं और शादी करने का विचार बना लिया है और मेरा इस्तेमाल सिर्फ पैसों के लिए किया गया था।

समाधान-

प की कहानी पढ़ी। ऐसी ही अनेक कहानियाँ हमें प्रत्यक्ष भी देखने को मिलती हैं। आप दोनों में प्रेम भी था और आप ने अपना घर भी बसा लिया था। लेकिन आप दोनों के परिवार इस के लिए तैयार नहीं थे। अंजलि के चाचा के दबाव में आ कर उन्हों ने अंजलि को आप के साथ भेज दिया। क्यों कि तब अंजलि किसी भी कीमत पर आप के साथ रहना चाहती थी। वह पुलिस थाने में बयान दे चुकी थी और उस के परिवार वालों को एक हार का सामना करना पड़ा था। वे अंजलि को आप के साथ भेजने के बाद भी उस हार को पचा नहीं पा रहे थे। वे लगातार इस बात से दुखी रहे। चाहते रहे कि अंजलि किसी भी तरह आप से नाता तोड़ कर वापस लौट आए। अंजलि के समाज में एक विवाह टूटने पर दूसरा विवाह होना एक सामान्य बात रही होगी। इस कारण वे इस के लिए प्रयास भी करते रहे। वे लगातार अंजलि की काउंसलिंग करते रहे। जो धीरे धीरे उस पर असर करती रही। विवाह में आप के परिवार वालों ने उस के साथ जो दुर्व्यवहार किया उस ने उस असर को कई गुना बढ़ा दिया। उधर उस के परिवार वालों का उस के साथ संपर्क केवल अंजलि की काउंसलिंग के लिए था। इधर आप के परिवार वाले भी उस को अपना नहीं पा रहे थे। अंजलि दोनों तरफ से परिवार विहीन हो गई थी।

स के बीमार होने पर आप उस की खुद देखभाल नहीं कर सके। उस के लिए उस की बहिन की मदद आप को लेनी पड़ी। इस बात ने अंजलि को अन्दर तक दहला दिया। एक औरत के जीवन में अनेक अवसर होते हैं जब पति से इतर परिवार की उसे आवश्यकता होती है। जब वह एक दिन उस की बहिन के यहाँ रही तो उस के परिवार वालों ने उस की काउंसलिंग की और उसे आप से अलग होने को तैयार कर लिया। दूसरी बार उसे जो पेट दर्द हुआ वह फर्जी भी हो सकता है। हो सकता है बहिन के यहाँ दुबारा डाक्टर को बहिन के द्वारा दिखाने का सुझाव भी आप को अंजलि ने ही दिया हो। वह पूरी तैयारी से बहिन के यहाँ गयी और योजनाबद्ध तरीके से नकद और जेवर आदि साथ ले गई। अब वह उसी नक्शे पर काम कर रही है। उसे आप से प्रेम था और आप से मिलने के बाद उस का इस फर्जी नक्शे को छोड़ आप के साथ आ सकने की संभावना थी। इसी कारण उस का परिवार उसे आप से मिलने नहीं दे रहा है। अब खेल बदल गया है। इसे फिर से बदलना तभी संभव है जब आप और अंजलि मिलें और गिले शिकवे दूर करें। यह अवसर आप को अब शायद परिवार न्यायालय में होने वाली अनिवार्य काउंसलिंग में ही मिल सकता है। उस से पहले नहीं।

प के परिवार वालों ने कुछ नहीं किया है इस कारण उन के विरुद्ध शिकायत रद्द हो सकती है यदि आप प्रयत्न करें। प्रथम सूचना दर्ज हो जाए तो उसे निरस्त कराने के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष निगरानी याचिका दाखिल की जा सकती है। लेकिन आप के विरुद्ध मामला दर्ज हो सकता है और चल सकता है। अंजलि का दूसरा विवाह करने के लिए आप से तलाक होना जरूरी है। वे चाहते हैं कि आप दबाव में आप कर खुद इस की पहल करें।

प आत्महत्या की सोच रहे हैं, वह पूरी तरह गलत है। ऐसे जीवन नहीं हारा जाता। मुझे नहीं लगता कि अब अंजलि को आप वापस ला सकते हैं। यदि वापस ले भी आएँ तो फर्जी मुकदमा दर्ज कराने की जो गांठ उस के और आप के बीच पड़ गयी है वह कभी नहीं निकलेगी। बेहतर है कि आप उस के परिवार से बात कर के इस रिश्ते को अब भी त्याग दें। जो लड़की कमजोर हो कर अपने माता पिता का गलत काम में सहयोग कर रही है उस के साथ जीवन ठीक नहीं निभेगा। जो चला गया है वह चला गया है। आप सहमति से विवाह विच्छेद का मार्ग निकालें और अपना जीवन नए सिरे जीने का विचार बनाएँ।

जब आप का मन खुद आप को सताए तो क्या करें?

समस्या-1

श्री चन्द्र ने दिल्ली से समस्या भेजी है कि-

ब पत्नी और बच्चे सताएं तो पति कहाँ जाये? मेरी पत्नी सरकारी नौकरी करती है तथा दोनों बच्चे वयस्क व अविवाहित हैं, तीनों मुझे लगभग 6 महीने पहले छोड़ कर चले गए, ये मेरी पत्नी द्वारा शादी के पहले दिन से ही रचा हुआ षड़यंत्र था क्योंकि 24 साल हुए परन्तु वो अपने पिता के दबाव में इस रिश्ते को निभाती रही। अब तक बच्चों को मानसिक रूप से इतना तैयार कर लिया था कि वो मुझ पर हाथ भी उठाने लगे थे। ( प्रश्न कर सकते हैं कि वो ऐसा क्यों करते थे तो मेरा जवाब यही है कि मै उनकी मन-मानी जिद व जवान लड़की का घर से रात को बाहर रहना पसंद नहीं करता था) जिस की मैंने पुलिस-कमिश्नर को मेल द्वारा शिकायत भी की, स्थानीय पुलिस -स्टेशन में शिकायत भी दर्ज करायी, परन्तु पुलिस हर बार समझौता कराती रही। कई बार घर छोड़ कर गयी या किसी ना किसी रूप से मानसिक परेशान करती रही। ,मै लोक-लिहाज की शर्म करता हुआ तथा घर की पूरी जिमेवारी संभालता हुआ, हर बार समझौता करता रहा। मैं भी एक सरकारी बैंक में कार्यरत हूँ, और अकेला रह कर इतना डिप्रेशन में आ गया हूँ कि नौकरी पर भी नहीं जा पा रहा हूँ। जाते-जाते घर, जो की किराये का है ,वहां से मेरे कच्छा-बनियान तक उठा ले गयी, जिस की पुलिस ने रोजनामचा रिपोर्ट दर्ज की किन्तु कोई कारवाही नहीं की। मैं किसी भी हालत में ‘तलाक’ लेना चाहता हूँ। मेरी उम्र ५२ साल व पत्नी की उम्र ४७ साल है। समझौते की कोई गुंजाईश नहीं है, तलाक ना देने की धमकी के साथ वो और उसके सगे मुझे धमकी देते हैं कि ना तो तुम्हें तलाक देंगे ना ही कोई पैसा। कोर्ट के धक्के लगवाएंगे और सड़ा-सड़ा कर मारेंगे, मेरे साथ कोई सहयोगी नहीं है। कई बार आत्म-हत्या का ख्याल आया। परन्तु अपने खानदान की इज्जत का ख्याल आ गया, पुलिस और वकील मेरी आर्थिक -दशा को देखते हुए उन्हीं के साथ हैं। वकीलों और कानूनी प्रकिया को तो आप जानते हैं कि कितने लंबे खींच जाते हैं ऐसे केस, और फिर वकीलों के चक्कर, उनकी फीस?  मैं एक कमरे में बंद हो कर रह रहा हूँ, लोक -लाज की शर्म में ,बहुत ज्यादा डेप्रेसिन में हूँ। आप कोई व्यायाम आदि की सलाह देंगे तो मैं बता दूँ कि मेरा बिस्तर तक से उठने का मन नहीं करता। बेटी  M.S.C कर चुकी है, बेटा B.S.C कर रहा है, जिसका EDUCATION -लोन भी सह-ऋणी होते हुए मुझे ही चुकाना है, क्यों की उस की अभी नौकरी नहीं लगी। मेरा सारा पैसा वो किसी ना किसी रूप में खर्च करवाते रहे, तथा बैंक-लोन भी काफी हो गया है। नौकरी पर ना जाने की वजह से सैलरी भी नहीं मिल रही है। २६ साल की नौकरी होने के बावजूद बैंक मुझे नौकरी से निकाल सकता है क्यों कि हम अपनी पूरी सर्विस के दौरान ३६० दिन से अधिक अवैनिक अवकाश नहीं रह सकते, पत्नी ब्रह्मकुमारी धर्म अपना चुकी है जिसे मैं कोर्ट में प्रूव नहीं कर सकता। परन्तु शारीरिक संबंध लगभग एक साल से नहीं बने। कृपया इस अँधेरी-जिंदगी में आप ही एक उम्मीद की किरण नजर आये हैं, मार्गदर्शन करें वर्ना आत्महत्या के अलावा मुझे कुछ नहीं सूझ रहा।

समाधान-

प की इस बात से हम मुतमइन नहीं कि शादी के पहले दिन से ही पत्नी आप के विरुद्ध षड़यंत्र कर रही थी और अब 24 वर्ष बाद उस षड़यंत्र का परिणाम सामने आया। हाँ यह हो सकता है कि आप की पत्नी आप के साथ रिश्ते को किसी दबाव में निभा रही हो। लेकिन यह दबाव पिता का नहीं अपितु एक स्त्री की सामाजिक स्थिति का माना जा सकता है। हो सकता है यह रिश्ता आप की पत्नी की इच्छा के विरुद्ध हुआ हो। वह विवाह ही न करना चाहती हो या उस के लिए तैयार न हो। वैसी स्थिति में विवाह हो जाने से तथा विवाह के उपरान्त जबरन होने वाले यौन व्यवहार ने उसे पति द्वेषी बना दिया हो। जिस का अनिवार्य परिणाम यह हुआ हो कि आप की पत्नी ब्रह्मकुमारी हो गयी हों। इस तरह की संस्थाएँ स्त्रियों की इन्हीं विपरीत परिस्थितियों का तो लाभ उठाती रही हैं।

प को इन परिस्थितियों के लिए सारा दोष अपनी पत्नी और बच्चों को देना बिलकुल बन्द करें और अपनी समस्या पर विचार करें। इन सारी परिस्थितियों का निर्माण करने में आप का, आप के परिवार का और सामाजिक स्थितियों का योगदान सब से अधिक रहा है। वास्तव में अधिकांश वैवाहिक समस्याएँ किसी एक व्यक्ति के दोष के कारण नहीं अपितु अपनी सामाजिक परिस्थितियों के कारण उत्पन्न होती हैं।

ब तक जो कुछ हुआ भूल जाएँ। पुलिस ने कुछ नहीं किया या अदालत कुछ नहीं करती, बहुत समय तक परिणाम नहीं देती। यह सब सोचना बन्द कीजिए। पुलिस का चरित्र और अदालतों की गति न आप बदल सकते हैं और न कोई और ये सब एक बड़े परिवर्तन के मोहताज हैं। ये तब बदलेंगे जब देश की राजनीति बदलेगी और समाजोन्मुखी होगी। वर्तमान राजनीति में तो सब कुछ बाजारोन्मुखी है। आप को अपना भविष्य का जीवन खुद तय करना होगा।

जो जा चुका, जा चुका उसे भूल जाइए। पत्नी और बच्चे आप को छोड़ कर जा चुके हैं। बच्चे वयस्क हैं उन की कोई जिम्मेदारी आप की नहीं है। पत्नी खुद कमाती हैं। वे आप से कुछ भी मांग सकने में समर्थ नहीं हैं। समझ लीजिए कि वे कभी आप के जीवन में नहीं थे। यदि आप की कोई संपत्ति है तो उस के आप स्वयं स्वामी हैं और उस का प्रबंधन खुद कर सकते हैं, किसी को हस्तान्तरित कर सकते हैं या उस की वसीयत कर सकते हैं। आप की समस्या अकेले रहने की है तो पत्नी और बच्चे तो आप के लिए षड़यंत्रकारी हैं, उन के साथ रहने के बजाए अकेले रहने की स्थिति अधिक बेहतर है। इसे आप को स्वीकार करना होगा। डिप्रेशन से निकलिए, उस के लिए जरूरी हो तो किसी मनोविज्ञानी से काउंसिलिंग लीजिए और बैंक की नौकरी पर जाना आरंभ कीजिए। आप का सब से बड़ा शत्रु तो आप का मन है जो आप को नौकरी जाने से रोकता है। उस की चिकित्सा कीजिए। यदि आपने बैंक की नौकरी पर जाना आरंभ कर दिया तो बहुत समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। शेष भी समाप्त होने का मार्ग तय होगा। बहुत लोग अकेले रहेते हैं जिन के पास अपने घर नहीं होते। दुनिया में स्त्री और बच्चों के अलावा भी बहुत कुछ है। संगीत, लेखन आदि कलाएँ हैं, सामाजिक कार्य हैं, आप नौकरी से बचे समय में उन में अपना मन लगा सकते हैं। आप ने लिखा है “जब पत्नी और बच्चे सताएं तो पति कहाँ जाये?” मैं इस के उत्तर में अब आप को कहना चाहता हूँ कि जब आप का मन खुद आप को सताए तो क्या करें?

प की पत्नी और बच्चे जाते जाते रोजनामचा में रपट दर्ज करा गये हैं या आप ने कराई है वह रपट दर्ज है। थाने से उस की प्रतिलिपि प्राप्त कीजिए। छह माह हो चुके हैं छह और निकल जाने दीजिए। उस के बाद आप डेजर्शन और पत्नी के ब्रह्मकुमारी पंथ में संन्यास ले लेने के आधार पर विवाह विच्छेद हेतु आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

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