Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Mutation Supreme Court wife Will अदालत अनुबंध अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक नामान्तरण न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

विक्रय निरस्त करने, विभाजन और पृथक हिस्से के कब्जे का वाद

समस्या-

कल्पना ने फरीदाबाद, हरयाणा से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी ने अपनी पैतृक जमींन अपनी पुत्र वधू के नाम 6 वर्ष पूर्व बेच दी। पिताजी को किसी प्रकार की आर्थिक आवश्यकता नहीं थी तथा पुत्र वधू किसी प्रकार की आय नहीं करती थी। अब मेरे पिताजी और मेरा बड़ा भाई मुझे, मेरे बच्चों व मेरे पति का मान सम्मान नहीं करते व हमें गाली-गालोंज भी करते है। .क्या अब मैं अपना हक/ ज़मीन वापस ले सकती हूँ?  समाज में बेटी के मान-सम्मान का भी प्रश्न है। कृपया राह सुझाएँ।

समाधान-

प पहले जाँच लें कि जमीन पैतृक ही है। कौन सी जमीन पैतृक है जिस में संतानों का जन्म से अधिकार होता है इस पर तीसरा खंबा पर पहले पोस्टें लिखी जा चुकी हैं, उन्हें सर्च कर के पढ़ लें। लड़कियों को 2005 से पैतृक संपत्ति में अधिकार मिला है। आप की जमीन की बिक्री बाद में हुई है। इस तरह आप जमीन के विक्रय को चुनौती दे सकती हैं। इस मामले में लिमिटेशन की बाधा भी नहीं आएगी। यदि पिता किसी संतान का का हक किसी और को दे देता है तो वाद 12 वर्ष तक की अवधि में किया जा सकता है। आप को चाहिए कि आप विक्रय पत्र निरस्त करवाने तथा संपत्ति का बँटवारा कर आप का हिस्सा अलग करते हुए उस का पृथक कब्जा आप को देने का वाद दीवानी न्यायालय में संस्थित करें।

 

संपत्ति में पुत्रवधु को उस का हिस्सा देना होगा।

partition of propertyसमस्या-

दीपक शर्मा ने गोरखपुर उ.प्र. से पूछा है-

मेरे भाई की शादी 1996 में हुई।  उनकी पत्नी 5 दिन घर में रहने के बाद अपने मैके चली गयी और जाते ही 498 ए और 125 के तहत जलाकर मारने और मेंटनेन्स के लिए दावा कर दिया।  498 ए में मेरे भाई, मेरी माँ, पत्नी,  बहन,  चाचा के नाम थे।  498 ए में हम 2 बार जमानत भी करवा चुके हैं, 2002 मे हम 125 मुक़दमा हार गये और 1996 से 500 रुपए प्रतिमाह खर्चा भी दे रहे हैं। तब से केस चल रहा है।  जनवरी 2016 में सुलह की बात के तहत मेरे भाई की वाइफ को 1,50,000 रुपए भी दिया गया कि अब हमसे तुमसे कोई मतलब नहीं. और उसने 4 केस में सें दो में सरेणडर भी कर दिया। अभी कागज बन ही रहे थे कि तभी मेरे भाई की मृत्यु हो गयी।  अब वो हमसे ज़मीन के लिए लड़ रही है तथा वो इस को लेकर बेचकर पैसा बनाना चाहती है।   इस 20 साल में वो अपने मैके में रह रही थी मुक़दमे के अलावा हमसे कोई मतलब नहीं था। उसका यहाँ का कोई आईडी नहीं है।  क्या वो पैतृक संपत्ति को पाने तथा सेल करने की अधिकारी है?  यह संपत्ति मेरे और मेरे भाई की दिन रात काम करके हम ने हमारी माँ के नाम से खरीदा था।  माँ भी नहीं है।  प्लीज़ आप मुझे सही रास्ता बताएँ की हम इस संपत्ति को ग़लत हाथ में जाने से बचा लें।

समाधान-

प ने जिस संपत्ति के बारे में चिन्ता व्यक्त की है उसे आप दोनों भाइयों ने दिन रात काम कर के खरीदा और माँ के नाम से। इस तरह यह संपत्ति पैतृक नहीं थी। इसे कभी भी पैतृक नहीं कहा जा सकता। यह माँ के नाम थी इस कारण उन की संपत्ति थी। उन के देहान्त के बाद हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार उन के उत्तराधिकारियों की है।

आप की माँ के जितनी भी संतानें हैं (जिस में आप की बहनें भी सम्मिलित हैं) और यदि पिता जीवित हैं तो उन्हें मिला कर जितने उत्तराधिकारी हैं वे सब बराबर के अधिकारी हैं। जब आप की माताजी जीवित थीं और आप के भाई का पत्नी से विवाद चल रहा था। तभी संपत्ति में यह संकट उत्पन्न हो चुका था। आप की माताजी चाहती तो अपने जीवन काल में ही अपनी संपत्ति की वसीयत कर सकती थीं। उन की संपत्ति निर्वसीयती रह जाने से उस का विभाजन होगा जिस में एक हिस्सा आप के मृतक भाई का भी है। भाई की पत्नी चाहे दो दिन ही आप के परिवार में रही हो और उस के बाद केवल लड़ाई के सिवा कुछ भी न किया हो पर पति के जीवित रहते तलाक न होने से उत्तराधिकार के कानून के अनुसार वह एक हिस्सेदार है और उत्तराधिकार के कानून के अनुसार वह एक एक हिस्सेदार है और अपने पति का हिस्सा प्राप्त करने की अधिकारिणी है। आप न देंगे तो लड़ कर लेगी। इस से बेहतर है कि आपसी सहमति से उसे उस के हिस्से के रूप में कुछ दे दिया जाए और उस विभाजन  का दस्तावेज तैयार कर लिया जाए। यदि अदालत में मुकदमा चल रहा हो तो आपसी रजामंदी से विभाजन का आवेदन दे कर विभाजन की डिक्री प्राप्त कर ली जाए।

पहले पता करें कि क्या कोई संपत्ति पैतृक है?

rp_courtroom7.jpgसमस्या-

अजय पाण्डे ने सीहोर मध्यप्रदेश से पूछा है-

क्या पिता अपने पुत्र को दादा की (अविभाजित) पैतृक संपत्ति के अधिकार से वंचित कर सकता है?  दादा जी ने इसे स्वयं अर्जित किया था।  दादा जी का देहान्त सन् 2001 में हुआ है।  पिता ने दादा की (अविभाजित) पैतृक संपत्ति बेच कर कंपनी से  तीन नौकरी ली है।  हम 3 भाई और 1 बहन हैं, बड़ा भाई विवाहित है, पिता ने 1 नौकरी बड़े भाई और 1 नौकरी भाभी को दे दी, 1 नौकरी मुझसे छोटे भाई को दे दी। मुझे और सबसे छोटे भाई और एक बहन को नौकरी से वंचित कर दिया है।  क्या नौकरी में मेरा, छोटे भाई और  बहन का कोई हक नही बनता है?

समाधान-

पैतृक संपत्ति क्या है, इसे समझने में अक्सर गलती की जाती है। पैतृक संपत्ति का वजूद केवल हिन्दू परंपरागत विधि में है। 17 जून 1956 से हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम प्रभावी होने के उपरान्त से नयी पैतृक संपत्ति अस्तित्व में आना असंभव हो चुका है। इस कारण जो भी संपत्ति इस तिथि के पूर्व किसी पुरुष को अपने पिता, दादा या परदादा से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई हो वही पैतृक संपत्ति है। इसलिए आप पहले जाँच लें कि आप जिस संपत्ति की बात कर रहे हैं वह पैतृक संपत्ति है कि नहीं है। यदि यह पैतृक संपत्ति है तो कोई भी किसी को भी पैतृक संपत्ति से वंचित नहीं कर सकता। यदि संपत्ति दादा या परदादा द्वारा स्वअर्जित थी और दादा या परदादा का देहान्त 17 जून 1956 के बाद हुआ है तो यह संपत्ति पैतृक नहीं हो सकती। वैसी स्थिति में आप के पिता ने जो भी अपने विवेक के अनुसार वह कानून के हिसाब से सही है।

आप के बार बार यह प्रश्न तीसरा खंबा को भेजने से कुछ नहीं होगा। इस के लिए किसी अच्छे स्थानीय वकील से सलाह लें और यदि संपत्ति पैतृक है तो उचित कानूनी कार्यवाही करें। कार्यवाही करने से हल निकलेगा केवल प्रश्न पूछते रहने से नहीं। पैतृक संपत्ति क्या है इस का उत्तर तीसरा खंबा में अनेक बार दिया जा चुका है कृपया तीसरा खंबा की पुरानी पोस्टें पढ़ें।

 

मुस्लिम विधि में कोई पैतृक या सहदायिक संपत्ति नहीं।

muslim inheritanceसमस्या-

आर एस ध्रुव ने धमतरी, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

क्या एक मुस्लिम अपने जीवनकाल में अपनी सारी संपत्ति का बँटवारा कर सकता है? उसे संपत्ति अपने पिता से वसीयत में मिली है।

समाधान

मुस्लिम विधि में कोई भी संपत्ति पैतृक या सहदायिक नहीं होती। केवल संयुक्त संपत्ति हो सकती है। लेकिन उस संयुक्त संपत्ति में किसी भी व्यक्ति का हिस्से पर उस का संपूर्ण अधिकार होता है न की उस में किसी अन्य का कोई अधिकार। इस तरह किसी भी मुस्लिम की संपत्ति उस की निजि संपत्ति होती है। इसी तरह किसी भी व्यक्ति को वसीयत में मिली संपत्ति उस की निजि संपत्ति होती है।

पिता से किसी मुस्लिम को वसीयत में प्राप्त संपत्ति उस की व्यक्तिगत संपत्ति है न कि संयुक्त या पैतृक या सहदायिक संपत्ति। इस कारण उस का बँटवारा किया जाना संभव नहीं है। हाँ एक मुस्लिम अपनी संपत्ति को दान कर सकता है, या विक्रय कर सकता है। यदि किसी मुस्लिम को अपनी संपत्ति का बँटवारा कुछ लोगों में करना है तो वह ऐसा केवल संपत्ति हस्तान्तरण की किसी विधि द्वारा कर सकता है। जब कि वह केवल अपने अंतिम संस्कार के खर्च और कर्जों को चुकाने के बाद बची हुई संपत्ति का एक तिहाई ही उन लोगों को वसीयत कर सकता है जो उस के उत्तराधिकारी नहीं हों। यदि किसी उत्तराधिकारी को वसीयत करना हो तो उस के शेष सभी उत्तराधिकारियों की सहमति आवश्यक होगी। इस तरह एक मुस्लिम द्वारा अपनी संपत्ति का बँटवारा किया जाना संभव नहीं है।

पैतृक संपत्ति के मामले में संपत्ति के दस्तावेज व परिवार की संपूर्ण जानकारी दे कर स्थानीय वकील से सलाह लें।

समस्या-house locked

कल्पना राठौर सारागांव जिला जांजगीर-चाम्पा, छत्तीसगढ़ से पूछती हैं-

मेरे दादा जी ने अपनी पैतृक सम्पत्ति 1993 में अपने जीते जी मेरे भाइयों के नामवसीयत करदी थी, वसीयत का पंजीकरण भी करवाया था। उनकादेहांत 20032 में हुआ अब 2014 में मेरी छोटी बुआ अपने हिस्से की मांग कररही है और कोर्ट जाने की धमकी दे रही है, तो ऐसे में क्या मेरी बुआ को उनकाहिस्सा मिल पायेगा|

समाधान-

प ने लिखा है कि दादा जी ने पैतृक संपत्ति को वसीयत कर दिया था। पर पैतृक संपत्ति में तो पुत्रों, पौत्रों और प्रपौत्रों का भी अधिकार जन्म से होता है। इस तरह पैतृक संपत्ति एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं होती। आप के दादा जी की जो पैतृक संपत्ति थी उस में उन के पुत्रों और पौत्रों का भी अधिकार था। वे उस संपत्ति को वसीयत नहीं कर सकते थे, वे केवल उस संपत्ति में से अपने हिस्से की संपत्ति की वसीयत कर सकते थे।

स तरह आप का यह मामला अत्यन्त जटिल है। इस मामले में बहुत सारे तथ्यों का ज्ञान होने पर ही कोई निश्चायक राय दी जा सकती है। मुख्यतः यह जानना आवश्यक है कि 17 जून 1957 के पूर्व उस संपत्ति की स्थिति क्या थी और उस समय कौन कौन लोग उस संपत्ति में अपना सहदायिक हित रखते थे। उस के बाद प्रत्येक के हित और उन की संतानों का पूरा लेखा जोखा (वंश-वृक्ष) की जानकारी होना आवश्यक है।

फिर भी यह कहना उचित होगा कि उक्त संपत्ति में आप की बुआ का हिस्सा हो सकता है। लेकिन उस की ठीक से परीक्षा करनी होगी। यदि हिस्सा हुआ तो वह बुआ को देना पड़ेगा। यह भी हो सकता है कि उन का हिस्सा न हो। आप को अपने यहाँ किसी अच्छे जानकार वकील को संपत्ति के सभी दस्तावेज व परिवार के बारे में संपूर्ण जानकारी दे कर सलाह प्राप्त करनी चाहिए।

पुश्तैनी संपत्ति में संतानों के हिस्से को पिता विक्रय या हस्तान्तरित नहीं कर सकता।

Farm & houseसमस्या-
राजेश शर्मा ने अजमेर, राजस्थान से पूछा है-

 मेरे पिता जी दो भाई हैं।  उन के पास जो दादा जी की पैतृक संपत्ति थी उस को दोनों भाइयों ने आपसी सहमति से 100/- रुपए के स्टम्प पेपर पर नोटेरी करवा कर बँटवारा कर लिया था। मेरे पिता जी ने उन के हिस्से में आई सम्पत्ति की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली थी। उस बात को करीब 18 वर्ष हो चुके हैं। संपत्ति मे कुछ तो खेत की ज़मीन है ओर 2 मकान, ओर दो जगह प्लॉट थे। उस में से मेरे पिताजी ने कुछ संपत्ति बेच दी है। हम भी दो भाई हैं।  कुछ साल पहले मेरे बड़े भाई की मेरे साले से किसी सामाजिक काम को लेकर झगड़ा हो गया। अब मेरे पिता ओर भाई मुझे अपनी पत्नी को छोड़ने का दबाव बना रहे हैं और कहते हैं कि अगर मैं ने अपनी पत्नी को नही छोड़ा तो वे अपनी पूरी संपत्ति बड़े भाई के नाम कर देंगे। लेकिन मेरे एक बेटा भी है ओर मैं अपनी पत्नी को नहीं छोड़ना चाहता। क्या मेरे पिता हमारी संपत्ति को बड़े भाई के नाम कर सकते हैं। पिता के पास उनकी खुद की खरीदी हुई संपत्ति भी है। उन्होंने बँटवारे के पेपर को भी रजिस्टर नहीं कराया था।

समाधान-

प का और आप की पत्नी का रिश्ता यदि अच्छा है और कोई विवाद नहीं है तो यह किसी तरह संभव नहीं है कि भाई के झगड़े के कारण आप अपनी पत्नी को छोड़ दें। आज पत्नी कोई वस्तु नहीं है जिसे जब चाहे तब किसी कारण से छोड़ दिया जाए। यदि छोड़ भी देंगे तो इतने कानून हैं कि आप की पत्नी और साले आप को इतना चकरघिन्नी बना सकते हैं कि आप और आप के पिता व भाई सब परेशान हो सकते हैं और उन परिस्थितियों में सभी को सरेंडर होना पड़ सकता है। इस कारण आप को यह तो दृढ़ता से तय करना होगा कि आप पत्नी को नहीं छोड़ रहे हैं। चाहे आप को आप के पिता संपत्ति दें या न दें। वैसे भी आप की पत्नी का क्या दोष है? उस के भाई ने यदि कोई गलती की है तो उस की सजा क्यों आप की पत्नी को मिले?

प के पिता की स्वअर्जित संपत्ति पर उन के जीवनकाल में उन के अतिरिक्त किसी का कोई अधिकार नहीं है। उसे वे बेच सकते हैं, दान कर सकते हैं या फिर वसीयत कर सकते हैं। लेकिन यदि आप के पिता के पास कोई पुश्तैनी संपत्ति है, (ऐसी संपत्ति जो आप के पिता या दादा या परदादा को 17 जून 1956 के पूर्व उन के पिता या पुरुष पूर्वज से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई थी तथा उस संपत्ति की आय से खरीदी गई संपत्ति पुश्तैनी संपत्ति हैं) तो उस में आप के पिता की सभी संतानों का हिस्सा है और उसे वे न तो किसी को दे सकते हैं न ही विक्रय कर सकते हैं। वे केवल उस संपत्ति में अपना हिस्सा हस्तान्तरित कर सकते हैं। बँटवारा पत्र का पंजीकृत होना जरूरी है। यदि वह पंजीकृत नहीं है तो मान्य नहीं होगा। लेकिन यदि पहले बँटवारा हो चुका हो और बाद में बँटवारे का ज्ञापन लिख कर उसे नोटेरी से सत्यापित कराया गया हो तो वह बँटवारे की सही सबूत हो सकता है।

दि ऐसी कोई संपत्ति है तो आप उस संपत्ति के विभाजन का दीवानी वाद न्यायालय में प्रस्तुत कर के उस संपत्ति के हस्तान्तरण पर रोक लगाने के लिए स्थगन भी प्राप्त कर सकते हैं।

फिर भी संपत्तियों का मामला जटिल है। इस के सभी दस्तावेज देखे और आप से बात किए बिना नहीं बताया जा सकता कि आप के हितों की कैसे और कितनी रक्षा की जा सकती है। इस कारण से आप को दीवानी मामलों के किसी अच्छे स्थानीय वकील से तुरन्त सलाह लेनी चाहिए और उस के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए।

पिता को दादा से प्राप्त संपत्ति में संन्तानों व माता का अधिकार . . .

joint family treeसमस्या-
इन्दौर, मध्यप्रदेश से प्रशान्त ने पूछा है-

मेरे पिता जी के पास 35 बीघा खेती की ज़मीन है और बाकी के मकान है और ये संपति मेरे पिता को मेरे दादा जी से मिली है। मेरे पिता ने अपने से कोई संपति नहीं खरीदी है। मेरे पिताजी अपने माता-पिता के एक ही पुत्र हैं और हम चार भाई और एक बहन पाँच लोग हैं तो हिस्सा किस प्रकार मिलेगा? 1/6 भाग लगेगा या फिर कैसे होगा? और इस में क्या मेरी माता जी को भी हिस्सा लगेगा या वो पिता जी के साथ हैं इस लिए उन्हें नहीं मिलेगा?

समाधान-

प को सब से पहले दादा जी से आप के पिता जी को प्राप्त हुई संपत्ति के बारे में यह तय करना पड़ेगा कि आप के पिता की यह सारी संपत्ति सहदायिक (पैतृक) संपत्ति है अथवा नहीं है, या उस में से कुछ सहदायिक है और कुछ उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति है, या फिर सारी की सारी संपत्ति उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति है।  यह निर्धारित करने के लिए यह जानकारी होना आवश्यक है कि आप के दादा जी के पास उक्त संपत्ति का कौन सा हिस्सा कैसे आया था? तथा दादा जी का देहान्त कब हुआ? जिस से वह संपत्ति आप के पिता जी को प्राप्त हुई। यदि दादा जी का देहान्त 17 जून 1956 के पहले हो गया था तो यह संपत्ति सहदायिक संपत्ति है। यदि इस के बाद हुआ था और आप के दादा जी को भी यह सारी संपत्ति उन के पिताजी से प्राप्त हुई थी तब भी यह सारी संपत्ति सहदायिक है। यदि कोई संपत्ति दादाजी को उन के पिता से प्राप्त हुई थी और उसी संपत्ति के उपयोग से उन्हों ने नई संपत्तियाँ बनाई थीं तो भी वे भी सहदायिक हैं। लेकिन दादा जी ने कोई संपत्ति स्वयं बिना पिता से प्राप्त संपत्ति के सहयोग के बनाई थीं तो वे दादा जी की व्यक्तिगत संपत्तियाँ हैं और दादाजी का देहान्त 17 जून 1956 के बाद हुआ है तो वे संपत्तियाँ आप के पिता को उत्तराधिकार में प्राप्त हुई हैं और उन पर पिता के जीवित रहते आप का, आप के भाइयों, बहनों व माताजी का कोई अधिकार नहीं है।

ब जो सहदायिक संपत्तियाँ आप के पिता के पास हैं उन में आप का तथा आप भाइयों और बहनों  व पिता का समान हिस्सा है। आप की माता जी का कोई हिस्सा उन सम्पत्तियों में नहीं है। इस कारण से सहदायिक संपत्ति का यदि बँटवारा होता है तो आप को 1/6 हिस्सा प्राप्त होगा। इस बँटवारे से जो हिस्सा आप के पिता को प्राप्त होगा और जो उन के द्वारा व्यक्तिगत रूप से अर्जित संपत्ति होगी। यदि उस की कोई वसीयत आप के पिता नहीं करते हैं और उसे किसी अन्य रीति से हस्तान्तरित भी नहीं करते हैं तो आप के पिता के जीवनकाल के उपरान्त वह संपत्ति उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 के अनुसार उत्तराधिकार में प्राप्त होगी उस में आप, आप के भाइयों, आप की बहन और आप की माता जी में से प्रत्येक को 1/6 हिस्सा प्राप्त होगा।

पिता व भाई दगा करें तो क्या उपाय है?

पति पत्नी और वोसमस्या-
दिल्ली से सुमन दुबे पूछती हैं –

मैं बिहार से हूँ और 2006 से मैं अपने पति के साथ दिल्ली में रहती हूँ। आज से लगभग 3 साल पहले( 2010 में मैं ने अपने पिता को दो लाख रुपये दिया एक लाख मैं ने दिया और एक लाख मैं ने अपने ससुराल से ससुर जी से दिलवाया। लेकिन पिता होने के कारण हम ने उनसे कोई लिखित नहीं लिया। उस के बाद मेरा भाई मेरे पास दिल्ली रहने आया। मेरे पिता ने मुझसे काफ़ी निवेदन किया और हम ने उसे बुला लिया और वह दिल्ली में रह कर ऑटो चलाने लगा। उसके बाद वो ग़लत संगति करना, शराब पीना, मेरे साथ गाली गलोज़ करना दो दो दिन घर से गायब रहना। घर में चोरी करना शुरू कर दिया। ऑटो किराए पर थी, गाड़ी का किराया भी मैं ने अपने गहने गिरवी रख कर दिया और अभी भी गाड़ी वाले का 50000/- रुपये बाकी है। मेरा भाई गाड़ी खड़ी करके भाग गया। आज उसे भागे दो साल  हो चुके हैं।  मेरे भाई और पिता ने मुझे काफ़ी मानसिक और आर्थिक तरीके से मजबूर किया, यहाँ तक कि मैं ने कितनी ही बार आत्म हत्या करने की ठान ली। लेकिन बच्चों के और पति तथा ससुराल वालों के प्यार को देख कर ऐसा नहीं कर पाई। नहीं तो मेरे ससुराल वाले उल्टे ही फँस जाते। लोग कहते हैं कि ससुराल वाले गलत हैं। लेकिन मैं कहती हूँ कि मायके वाले क्या ग़लती नहीं कर सकते? मेरे मायके वालों ने मुझे वो जख्म दिया है जो जीवन भर नहीं भरेगा। मैं अपने ससुराल वालों की बेटी हूँ, बहू नहीं। इतना प्यार मिलता है मुझे। 2012 में मैने अपने पिता को दिए हुए 200000/- रुपये वापस माँगे तो उन्होंने देने से मना करते हुए कहा कि मेरे बेटे ने तुझे कमा कर दे दिया है, अब तेरा कोई रुपया बाकी नहीं है। आज के बाद फ़ोन मत करना।  उस के बाद मैं ने पिता की संपत्ति में बँटवारे का केस डाल दिया। मेरे पिता के पास बिहार में पुश्तैनी घर और 35 बीघा खेती की ज़मीन है। हम तीन बहनें, दो भाई, मेरी दादी है। जब से मैने ये केस जिला न्यायालय में डाला है तब से मेरे भाई और पिता मेरे ससुराल वालों को, मुझे और मेरे पति को डरा-धमका रहे हैं। जान से मारने झूठे केस में फँसाने और किडनैपिंग करने की धमकी देते हैं। मेरे खिलाफ मेरे ससुराल वालों को भड़काते हैं और कहते हैं कि मैं ने आप का रुपया आप की बहू को दे दिया है। अब आप का कोई रुपया बाकी नहीं है। आप सभी लोग जेल जाओगे। मेरे भाई और पिता मेरे ससुराल वालों की और मेरी काफ़ी बेइज्जती करते हैं। मैं ये जानना चाहती हूँ कि क्या मुझे मेरा रुपया ब्याज़ के साथ मिल सकता है और क्या साथ ही पिता की संपत्ति भी मिल सकती है?  कुछ ज़मीनें मेरे दादा जी, दादी जी और पिता जी के नाम पर हैं तथा अभी मेरे पिता व दादी जी जीवित हैं और दादा जी काफ़ी साल पहले गुजर गये। साथ ही क्या मैं अपने मायके वालों पर बेइज्जती के लिए और डराने, धमकाने, के लिए भी दिल्ली में और बिहार में दोनो जगह केस डाल सकती हूँ?  मेरा भाई लोग मुझे गंदी गंदी गालियों का भी इस्तेमाल करता है और बहुत कुछ ऐसी बात कहते हैं जिस का ज़िक्र मैं यहाँ इस में नहीं कर सकती। उम्मीद करती हूँ आप समझ जाएँगे। अब सोचती हूँ की आत्महत्या कर ही लूँ। मेरा भाई यहाँ दिल्ली से हमारे जानने वालों से भी 50000/- रुपये लेकर भाग है दो साल हो गये।  जिससे लिया है वो हमारे ऊपर दबाव बना रहे हैं। अब आप सलाह दें कि क्या करना चाहिए?

समाधान-

प बहुत खुशकिस्मत इंसान हैं। आप को पिता और भाई अच्छे न मिले लेकिन आप को पति और ससुराल वाले अच्छे और भले मिले हैं। आप खुद भी अच्छी और भली हैं, यदि न होतीं तो आप पति और भाई की मदद न करतीं और छल का शिकार नहीं होतीं। लेकिन स्वार्थी और गंदे संबधियों के कारण आत्महत्या की सोचना भी गलत है। यदि आप ऐसा करती हैं तो आप आप से प्यार करने वाले पति, बच्चों और ससुराल के संबंधियों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करेंगी। आत्महत्या के बारे में सोचना बिलकुल बंद कर दें। विषम से विषम परिस्थितियों में लड़ना बेहतर होता है, बजाय इस के कि जीवन समाप्त कर लिया जाए।

ब से पहला काम तो आप ये कर सकती हैं कि आप दिल्ली के किसी दैनिक अखबार में सूचना प्रकाशित करवा सकती हैं कि आप के पिता और भाई से आप ने अपने सम्बन्ध उन के व्यवहार के कारण समाप्त कर लिए हैं। जिस से आप के संबंध के आधार पर कोई उन से व्यवहार न करे। जो लोग आप पर भाई का कर्जा चुकाने का दबाव डाल रहे हैं उन्हें साफ कह दें कि आप कुछ नहीं कर सकते। भाई को कर्जा या उधार सामान देते समय आप ने उस की गारन्टी तो नहीं दी थी कि वे आप को तंग करें।

प अपने पिता को दिए गए कर्जे को वसूल नहीं कर सकतीं यदि आप के पास उन्हें कर्ज देने का कोई दस्तावेज सबूत नहीं है। यदि कर्ज का दस्तावेजी सबूत है और कर्ज दिए हुए तीन वर्ष समाप्त नहीं हुए हैं तो आप कर्ज की वसूली के लिए दीवानी वाद दिल्ली के दीवानी न्यायालय में प्रस्तुत कर सकती हैं।

दि आप की दादा कोई पुश्तैनी जमीन/संपत्ति छोड़ गए हैं और उस का बँटवारा नहीं हुआ है तो आप उस में अपने हिस्से के लिए बिहार में दावा कर सकती हैं। लेकिन इस के लिए आप को उक्त संपत्ति के दस्तावेज दिखा कर बिहार में किसी दीवानी मामलों की वकालत करने वाले वकील से सलाह करनी चाहिए। कृषि भूमि से संबंधित कानून सब राज्यों में भिन्न भिन्न हैं और उन मामलों में राजस्व विभाग के रिकार्ड पर बहुत कुछ निर्भर करता है।

हाँ तक आप के पिता और भाई द्वारा किए गए अपराधिक कृत्यों मारपीट की धमकी देना, गाली गलौज करना आदि के लिए आप जहाँ उन्हों ने ये कृत्य किए हैं पुलिस थाना में रपट लिखा कर कार्यवाही कर सकती हैं या सीधे न्यायालय को शिकायत प्रस्तुत कर के कार्यवाही कर सकती हैं।

लेकिन व्यवहारिक बात ये है कि आप दिल्ली में रहती हैं और आप के पिता व भाई बिहार में। यह सही है कि पिता व भाई ने आप को आर्थिक हानि पहुँचाई है और अपराधिक व्यवहार किया है। उन्हें इस का दंड मिलना चाहिए। लेकिन हमारी न्याय व्यवस्था इतनी सुस्त है कि उस में राहत प्राप्त करने में वर्षों लग जाते हैं। वह इतनी लचीली भी है कि कोई फर्जी रिपोर्ट करा दे या मुकदमा बना दे तो उसे भी प्रारंभिक स्तर पर फर्जी मान कर निरस्त नहीं किया जाता है। आप इस तथ्य पर भी विचार करें कि आप के पिता और भाई भी अपने बचाव में कुछ कार्यवाही कर सकते हैं। बेहतर यही है कि आप अपने पिता व भाई से संबंध विच्छेद करने का विज्ञापन दें और उन्हें उन के हाल पर छोड़ दें। अपने पति, बच्चों व ससुराल के भले और अच्छे लोगों के साथ अपने नए जीवन का आरंभ करें।

पैतृक संपत्ति में पुत्री का हिस्सा

agricultural-landसमस्या –
उदयपुर, राजस्थान से प्रियंका ने पूछा है –

मैं एक महिला हूं। मेरा एक भाई भी है। अपने पिता की हम दो ही संतान हैं। मेरे पिता को पिछले साल दादा जी के मौत के बाद विरासत में खेती की जमीन अपने पिता से मिली है। मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या मेरे पिता सिर्फ मेरे भाई को उस संपत्ति का वारिस बना सकते हैं या पिता की इच्छा न होने पर भी मुझे उसमें हिस्सा मिल सकता है। कृपया दादा की संपत्ति में हक के बारे में बताएँ।

समाधान –

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 6 में 2005 में हुए संशोधन से पैतृक /सहदायिक संपत्ति में पुत्रियों को पुत्रो के समान ही अधिकार प्राप्त हो गए हैं। लेकिन आप के मामले में यह देखना पड़ेगा कि जो भूमि आप के दादा जी से आप के पिता को प्राप्त हुई है उस की स्थिति 17 जून 1956 के पूर्व क्या थी। यदि उक्त तिथि के पूर्व उक्त संपत्ति आप के किसी पूर्वज को उन के पूर्वज से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई थी तो यह संपत्ति सहदायिक / पुश्तैनी संपत्ति है और इस संपत्ति में आप का वर्तमान में अधिकार निहित है। आप का जो भी हिस्सा उक्त भूमि में है उस पर आप का अधिकार है उसे आप की सहमति के बिना कुछ भी नहीं किया जा सकता। लेकिन इसी तरह उस में आप के पिता और भाई का भी हिस्सा होगा। पिता चाहेँ तो उन के हिस्से की भूमि वे अपने पुत्र या पुत्री दोनों को दे सकते हैं।

दि यह संपत्ति आप के दादा जी की स्वअर्जित संपत्ति थी तो फिर आप के पिता को वह उत्तराधिकार में प्राप्त हुई थी तो उस संपत्ति पर आप के पिता का संपूर्ण अधिकार है। वे अपने जीवनकाल में इसे विक्रय कर सकते हैं, दान कर सकते हैं या वसीयत कर सकते हैं। यदि आप के पिता उक्त संपत्ति को वसीयत करते हैं तो जिसे भी वे वसीयत करेंगे, उन के जीवनकाल के उपरान्त यह संपत्ति उसी वसीयती की हो जाएगी। न आप और न ही आप के भाई उस पर कोई आपत्ति कर सकते हैं। यदि पिताजी अपने जीवन काल में उक्त संपत्ति को किसी भी प्रकार से हस्तान्तरित नहीं करते हैं और शेष रह जाती है तो आप के भाई और और आप को आधी आधी संपत्ति उत्तराधिकार में प्राप्त हो सकती है।

पिता के जीवित रहने पर संपत्ति में पुत्र का कोई अधिकार नहीं

समस्या-

वैधान सिंगरौली मध्यप्रदेश से बालमुकुन्द शाह ने पूछा है-

पुत्र ने पिता व भाई के पर स्थाई निषेधाज्ञा हेतु दीवानी वाद प्रस्तुत किया गया है जिसमें भूमि को पुश्तैनी बताया गया है। जिला सिंगरौली मध्य प्रदेश का मामला है शासकीय रिकार्ड में भूमि पिता के नाम है परन्तु दूसरे भाई से मिल जुल कर पिता द्वारा भूमियों की बिक्री की जा रही है। अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन वादपत्र के साथ दिया था लेकन आवेदन यह मानकर खारीज कर दिया गया कि पिता के जीवन काल में पुत्र को कोई भी हिस्सा लेने का अधिकार नहीं है।  जिसकी अपील भी की गयी है।  कृपया सलाह दीजिए कि अब क्या करना चाहिये कि पुत्र को हिस्सा मिल जाय व जमीन की बिक्री पर रोक लग जाए। कोई निर्देश प्रकरण भी बताइएगा जिसे न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सके।

समाधान-

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियमप के प्रकरण में सारा झगड़ा इस बात का है कि क्या भूमि पुश्तैनी या सहदायिक (Coparcenery) है अथवा नहीं।  मैं अनेक बार यहाँ स्पष्ट कर चुका हूँ कि पुश्तैनी या सहदायिक संपत्ति की विधि परम्परागत हिन्दू विधि का हिस्सा थी जिसे 17 जून 1956 से हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम लागू कर के बदला गया है। यदि कोई संपत्ति उक्त तिथि 17 जून 1956 के पहले सहदायिक थी तो वह सहदायिक बनी रहेगी। लेकिन यदि उस के बाद किसी बँटवारे में कुछ संपत्ति पुत्रियों के हिस्से में आई तो उस बँटवारे के उपरान्त वह संपत्ति भी सहदायिक संपत्ति नहीं रहेगी। इस के लिए आप ने जिस भूमि के लिए स्थाई निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत किया है उस भूमि की स्थिति जाँचना होगा कि वह अभी तक सहदायिक संपत्ति है अथवा नहीं। आप को उस भूमि के स्वामित्व के संबंध में 1956 के पहले से आज तक के सभी दस्तावेज जिन से उस का स्वामित्व समय समय पर बदला है देखना होगा। यदि फिर भी भूमि पुश्तैनी या सहदायिक पायी जाती है तो ही आप को लाभ मिल सकता है अन्यथा नहीं।

स मामले को आप इस तरह समझ सकते हैं कि यदि 17 जून 1956 से पहले उक्त भूमि जिस व्यक्ति के नाम थी उसे वह भूमि उस के पिता या पूर्वज से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई थी तो वह पुश्तैनी भूमि थी उस भूमि में उस व्यक्ति के पुत्र, पौत्र और प्रपोत्र का भी हिस्सा था। 17 जून 1956 को हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम लागू होने के बाद जन्म लेने वालों का हिस्सा नहीं रहा। लेकिन भूमि सहदायिक बनी रही। इस सहदायिक भूमि में यदि किसी का हित है तो उस की मृत्यु के उपरान्त उस के हित का उत्तराधिकार उत्तरजीविता के आधार पर होगा लेकिन यदि उस के उत्तराधिकारियों में कोई स्त्री हुई तो उस का उत्तराधिकार उत्तरजीविता के आधार पर न हो कर वसीयत के आधार पर तथा वसीयत न होने पर हि्न्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-8 के अनुसार होगा।  इस के लिए आप 29 सितंबर 2006 का सुप्रीम कोर्ट का Sheela Devi And Ors vs Lal Chand And Anr  on 29 September, 2006 के मामले में दिया गया निर्णय देखें।

स निर्णय के अनुसार यदि पुत्र का जन्म 17 जून 1956 के बाद हुआ है तो उसे अपने पिता की संपत्ति में पिता के जीवित रहते कोई अधिकार नहीं है, चाहे वह संपत्ति पिता को पिता से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई है। इस स्थिति के अनुसार पुत्र को अस्थाई निषेधाज्ञा का लाभ प्रदान न करना उचित ही है। लेकिन हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम में समय समय पर संशोधन हुए हैं। जिन के कारण उन की व्याख्या में बहुत विसंगतियाँ हैं। इन के आधार पर पुत्र अपने मुकदमे को चलाए रख सकता है। यदि कभी उच्चतम न्यायालय ने अपनी व्याख्या को संशोधित किया तो पुत्र को लाभ मिल सकता है।

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada