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किराएदार की बेदखली के लिए मुकदमा करने में विलम्ब न करें।

समस्या-

सत्येन्द्र कुमार ने लखनऊ, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरा मकान जो मिट्टी के गारे से बना हुआ पुराना मकान है, बरसात में सीलन दीवारों पर उपर तक पहुँच जाती है।  बाहर से अच्च्छा दिखाई देता है। मेरे मकान में दुकानदार दुकान किराए पर चलाते हैं। दीवारे गारे से बनी होने के कारण दो मंज़िल बनवाया नहीं जा सकता। मेरी दो संतानें हैं मैं मकान तोड़कर दो भागो में बनवाना चाहता हूँ। किरायेदार खाली नहीं करना चाह रहे हैं।  मैं बहुत परेशान हूँ, मुझे अच्छी सलाह दें जिससे मैं इस समस्या से झुटकारा पा सकूँ।

समाधान-

कुल मिला कर आप की समस्या ये है कि वर्तमान मकान का विस्तार बिना मकान गिराए संभव नहीं है। चूंकि आप का परिवार बढ़ गया है इस कारण आप दोनों बच्चों और परिवार के निवास की जरूरत के लिए मकान गिरा कर मकान बनाना चाहते हैं। यह आप की सद्भाविक एवं युक्तियुक्त आवश्यकता है। आप इस आधार पर मकान किराएदार से खाली करवा सकते हैं।

आप को तुरन्त बिना किसी देरी के मकान खाली कराने का मुकदमा किराएदार के विरुद्ध कर देना चाहिए। तुरन्त तो नहीं लेकिन मकान खाली कराने की डिक्री आप के पक्ष में हो जाएगी। इस के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। इस कारण जितनी देर आप मुकदमा करने में करेंगे उतनी ही देरी से आप अपनी योजना को मूर्तरूप दे पाएंगे।

परिवार के किसी सदस्य की जरूरत के लिए दुकान खाली कराई जा सकती है।

समस्या-

सोरू ने उत्तर प्रदेश के अज्ञात स्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पति सरकारी नौकरी करते हैं। हम लोग अपनी माँ के साथ ही रहते हैं। पिता का देहान्त हो चुका है। मेरी छोटी बहिन अभी पढ़ रही है। मेरी माँ के मकान में दुकान है जो किराए पर दे रखी है। मेरे कोई भाई नहीं है। मैं  उस दुकान में अपना व्यवस्या करना चाहती हूँ, मेरी माँ भी इस से सहमत है तो क्या हम अपने किराएदार से दुकान खाली करवा सकते हैं?

समाधान-

कान की स्वामी आप की माताजी हैं। यदि मकान के स्वामी आप के पिताजी थे तो उन के बाद उस की स्वामी आप की माताजी के साथ साथ आप दोनों बहने भी हैं। इस तरह यदि आप तीनों मकान की स्वामी हैं तो आप को अपने व्यवसाय के लिए दुकान की जरूरत होने पर आप कानूनी तरीके से दुकान किराएदार से खाली करवा सकती हैं। परिवार के किसी भी सदस्य की जरूरत के लिए दुकान खाली कराई जा सकती है।

इस के लिए आप को तुरन्त किसी स्थानीय वकील से सलाह ले कर बिना कोई देरी किए दुकान खाली कराने का मुकदमा कर देना चाहिए। क्यों कि फिर अदालत में भी समय लगेगा। लेकिन आप जितनी जल्दी मुकदमा कर देंगी उतनी जल्दी आप दुकान खाली करवा सकेंगी। यदि मकान माँ के नाम है तो यह  मुकदमा केवल माँ कीा ओर से हो सकता है।  यदि पिता के नाम था तो उत्तराधिकार के कनूुन के अनुसार आप तीनों उस की स्वामी हैं। इस कारण मुकदमा तीनो  तरफ से संयुक्त रुप से होगा।

दुकान मकान खाली कराने के लिए अदालत जाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं है।

समस्या-

सत्नू राजपूत ने लखनऊ उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी सासू माँ के मकान में चार दुकानदारों ने दुकान किराए पर ले रखी है। मेरी सासू माँ वेवा महिला है। मेरे ससुर की मृत्यु हो चुकी है। घर पर कमाने वाला कोई नहीं है। उन के दो लड़कियाँ हैं एक की शादी मेरे साथ हो चुकी है एक अभी अविवाहित है। लड़के नहीं हैं। 1-पहले दुकानदार के बड़े भाई ने बिना लिखा के दुकान किराए पर ली थी और बिजली कनेक्शन अपने नाम पर लिया था बीमारी की वजह से दुकान उनका छोटा भाई कर रहा है। अब बड़े भाई की मृत्यु हो चुकी है। बड़े भाई के बच्चे भी साथ नहीं रहते हैं। वो अलग रहते हैं क्या छोटे भाई का अधिकार बनता है। दुकान खाली करने के लिए कहने पर दुकान खाली नहीं कर रहा है, किराया भी बहुत कम देता है। 2-दूसरा दुकानदार 14-15 साल पहले 11माह के एग्रीमेंट पर दुकान किराए पर ली थी। बिना अनुमति के दुकान के अंदर टाइल्स लगवा लिया है। मना करने पर दबँगई दिखाते हैं, किराया भी बहुत कम देता हैं, कहने पर दुकान खाली नही कर रहा है। 3-तीसरे दुकानदार के बड़े भाई ने बिना लिखा पढ़ी के दुकान किराए पर ली थी जो अब दुकान नहीं चलाता है उनका छोटा भाई दुकान चलाता है। खाली करने को कहो तो नहीं कर रहा है। दुकान मिल जाएगी तब खाली करूँगा लगभग 5-6 सालों से कहता चला आ रहा है। बिजली का कनेक्सन भी नही है. 4-चौथा दुकानदार 14-15 साल पहले पीसीओ चलाने के लिए 11 माह के एग्रीमेंट पर दुकान किराए पर ली थी. लगभग 7-8 सालो से पीसीओ की दुकान बंद है। 3-4 सालों से दुकान बंद है। अब दुकान के सामने एक सब्जी वाले को लगा रक्खा है जो बिजली बिल का भुगतान करता है वह सब्जी देता हैं किराया भी नहीं देता है।. अब मेरी सासू मा अपना स्वयं का बिजनेस करना चाहती है। जिसके लिए दुकानों की आवश्यकता है। दुकान खाली करने के उपाय बताएँ।

समाधान-

प की सासू माँ की चारों दुकानें उन का खुद का बिजनेस करने की जरूरत के आधार पर खाली हो सकती हैं। बिजनेस ऐसा हो जिस के लिए चारों दुकानों की जरूरत हो। चारों दुकाने तोड़ कर शो रूम बनाया जा सकता है।

आप वास्तव में सासू माँ की मदद करना चाहते हैं तो तुरन्त दीवानी मामले के किसी वकील से मिलें और चारों के विरुद्ध किराया बढ़ाने, बकाया किराया वसूली और दुकान खाली कराने के लिए मुकदमे दायर कर दे। कई लोग ये सोचते हैं कि अदालत में दुकान मकान को खाली कराने का मुकदमा करेंगे तो कई साल लगेंगे। कई साल तो इस कारण लगते हैं कि अदालतों की संख्या पर्याप्त नहीं है। लेकिन उपाय अन्य कोई नहीं है दुकान मकान खाली कराने का एक मात्र उपाय अदालत के जरीए खाली कराना ही है। आप मुकदमा करने में जितनी देरी करेंगे उतनी ही देरी से आप को राहत मिलेगी। इस कारण देरी न करें।

किसी को भी स्थावर संपत्ति से जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता।

समस्या-

गोलू साहू ने पंडुका, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-


मेरे पिता ने पैतृक संपत्ति को बिना हमारे जानकारी व सहमति तथा बिना हमारा हिस्सा अलग किये बिना ही 1/2 एकड़ जमीन को अज्ञात महिला व्यक्ति के नाम पर रजिस्ट्री कर दी है। तथा उस व्यक्ति द्वारा नामांतरण व रिकॉर्ड में अपना नाम भी दर्ज करवा लिया है।  लेकिन जमीन पर कब्जा हमारा है , सर क्या हम कब्जे पर बने रहे..? क्या वह व्यक्ति जबरदस्ती हमसे कब्जा छीन सकता है….? हमें क्या करना चाहिए…….?


समाधान-

कोई भी व्यक्ति जबरन किसी से स्थावर सम्पत्ति का कब्जा छीन कर वर्तमान में काबिज व्यक्ति को बेदखल नहीं कर सकता। यदि कोई ऐसी कोशिश करता है या बेदखल करता है तो तुरन्त पुलिस को रिपोर्ट करें तथा एसडीएम के न्यायालय में धारा 145-146 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत करें। यदि किसी को ऐसा आवेदन प्रस्तुत करने के पहले के 60 दिनों में बेदखल भी कर दिया गया है तो उसे संपत्ति का कब्जा वापस दिलाया जाएगा।

पैतृक/ सहदायिक संपत्ति का बंटवारा हुए बिना कोई भी पिता अपनी संतानों को पैतृक संपत्ति से अलग नहीं कर सकता। इस तरह संपत्ति का उक्त हस्तान्तरण वैध नहीं है। लेकिन उस जमीन में पिता अपने हिस्से की जमीन को बिना बंटवारा किए भी हस्तांतरित कर सकता है, उस हस्तान्तरण के आधार पर नामान्तरण भी खोला जा सकता है। लेकिन जिस व्यक्ति को संपत्ति का हिस्सा हस्तांतरित किया गया है वह व्यक्ति संपत्ति पर कब्जा केवल बंटवारे के माध्यम से ही प्राप्त कर सकता है। आप रजिस्ट्री को निरस्त कराने के लिए दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकते हैं तथा संपत्ति से बेदखली के विरुद्ध इसी न्यायालय से अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त कर सकते हैं। इस मामले में दस्तावेजों को किसी स्थानीय वकील को दिखा कर सलाह लें और आगे की कार्यवाही करें।

मकान खाली कराना है तो जल्दी से जल्दी मुकदमा पेश करें।

rp_law-suit.jpgसमस्या-

गणेश ने कानपुर उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मैं कानपुर में रहता हूँ, मेरे दादाजी ने 35 वर्ष पूर्व एक विधवा महिला को किराए पर कमरा दिया था। अब हम उसे मकान खाली करने को कहते हैं तो वह कमरा खाली नहीं कर रही है। उस की उम्र अधिक होने से वह अपने रिश्तेदारों को अपने साथ रखे हुए है। हमें क्या करना चाहिए?

समाधान-

प ने यह नहीं बताया कि आप उस वृद्ध किराएदार स्त्री से मकान या कमरा खाली क्यों कराना चाहते हैं। नगरीय क्षेत्रों में जहाँ जहाँ किराया नियंत्रण कानून प्रभावी है वहाँ बिना किसी वैध कारण के मकान या परिसर खाली कराया जाना संभव नहीं है। आप को पहले कोई वैध आधार तलाशना पड़ेगा।

इस के लिए आप को किसी स्थानीय वकील से मिल कर उसे सारी बात बतानी चाहिए। फिर वह आप से कानून के अनुसार आवश्यक जानकारी प्राप्त कर यह पता लगाएगा कि आप के पास कमरा खाली कराने के लिए क्या आधार हो सकते हैं? यदि वकील आप को सुझाता है कि एक या एक से अधिक आधारों पर मकान खाली कराने का दावा किया जा सकता है तो आप को वकील की सलाह मानते हुए तुरन्त कमरा खाली कराने का दावा कर देना चाहिए।

मकान मालिक अपने पुत्र की आवश्यकता के लिए दुकान खाली करा सकता है।

House and shopसमस्या-

दिवेश कुमार ने मवाना (मेरठ), उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता व्यापार करते हैं। उनके दो बेटे है बडा बेरोजगार है, दूसरा पढ़ता है। दो दुकानें मेरठ उत्तर प्रदेश के मवाना में तीस साल से किराये पर दे रखी हैं। किराया २००४ से न्यायालय में जमा हो रहा है। ३५० रुपये प्रति माह से। जब कि यहाँ २००० रुपये में भी दूकान नही मिलेगी। खाली कराना चाहता हूँ।

समाधान

प की समस्या से पता नहीं लग रहा है कि आप दुकान को क्यों खाली कराना चाहते हैं। उस के दो कारण हो सकते हैं। एक कारण तो यह है कि आप को किराया कम मिल रहा है और आप बाजार दर से किराया चाहते हैं। लेकिन किराया कम होने के कारण आप दुकान को खाली नहीं करवा सकते। आप किराया बढ़ाने के लिए न्यायालय में वाद संस्थित कर सकते हैं। जिस में वाद प्रस्तुत करने की तिथि से बाजार दर से किराया बढ़ाया जा सकता है।

लेकिन आप बेरोजगार हैं और आप को खुद का व्यवसाय करने के लिए दुकान की आवश्यकता है तो आप अपनी आवश्यकता के लिए उस दुकान को खाली करवा सकते हैं।

मारी राय है कि आप को अपनी आवश्यकता के लिए दुकान खाली कराने का दावा न्यायालय में प्रस्तुत करना चाहिए साथ में इसी दावे में यह भी अंकित करना चाहिए कि दुकान का किराया अत्य़धिक कम है और आप को दावे की तिथि से दुकान खाली करने की तिथि तक बाजार दर से किराया बढ़ा कर दिलाया जाना चाहिए।

किराया कानून हर प्रदेश का भिन्न भिन्न है। इस कारण इस मामले में किसी अच्छे स्थानीय वकील से संपर्क करें और उस की सेवाएँ प्राप्त कर न्यायालय में दावा दाखिल करें। इस तरह के दावों के निर्णय में कुछ समय अधिक लगता है लेकिन आप दावा करने में जितनी देरी करेंगे उतनी ही देरी से आप का निर्णय भी होगा दुकान देरी से खाली होगी। इस कारण इस मामले में तुरन्त निर्णय ले कर दावा करें।

संतानों को संपत्ति से बेदखल करने के विज्ञापनों का कोई अर्थ नहीं है।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

श्वेत गुप्ता ने हलदौर, बिजनौर उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी माताजी पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापिका के पद पर कार्यरत थीं। मेरी एक छोटी बहन है, जो विवाहित है, जिसका विवाह वर्ष 2001 में हो गया था। मेरी माताजी की मृत्यु के उपरान्त मुझे पता चला है कि मेरे बहनोई ने मेरी माताजी के द्वारा साजिश करके वर्ष 2003 में समाचार पत्र में एक विज्ञापन दिलवा दिया था कि मैं अपने पुत्र को गलत चाल चलन होने के कारण अपनी चल अचल सम्पत्ति से बेदखल करती हूँ। इस बात का पता हमें उनकी मृत्यु के बाद चला। जब मैं बेसिक शिक्षा विभाग में अनुकम्पा नियुक्ति हेतु गया तो वहाँ पर पता चला कि मेरी बहन ने आपत्ति लगाई हुई है तथा उसके द्वारा नियुक्ति की मांग की जा रही है। क्या विवाहित लडकी अनुकम्पा नियुक्ति की हकदार है ? अपने पुत्र को किसी भी चीज से बेदखल करने की क्या प्रक्रिया है? क्या बेदखल होने वाले व्यक्ति के पास कोई नोटिस या अन्य कोई कानूनी प्रक्रिया होती है? मैं बहुत परेशान हूँ। क्या मेरी माताजी के स्थान पर मुझे अनुकम्पा नियुक्ति मिल सकती है? क्या बहन व बहनोई कोई अडचन लगा सकते हैं। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

क्सर ऐसे विज्ञापन अखबारों में देखने को मिलते हैं जिन में माता पिता यह कहते हैं कि हम ने हमारे पुत्र या पुत्री को अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया है। लेकिन वह संपत्ति तो तब माता पिता की होती है। संतानों को संपत्ति तो जिस के नाम होती है उस की मृत्यु के उपरान्त उत्तराधिकार में प्राप्त होती है। इस तरह जिस दिन बेदखल करने का विज्ञापन प्रकाशित होता है या कोई दस्तावेज लिखा जाता है उस दिन संपत्ति उस के नाम नहीं होती है जिसे बेदखल किया जा रहा होता है। जो व्यक्ति किसी संपत्ति का स्वामी ही नहीं है और जिस का उस में कोई दखल ही नहीं है उसे कैसे उस से बेदखल किया जा सकता है? यदि कोई किसी संपत्ति का स्वामी हो तो उसे बेदखल इस लिए नहीं किया जा सकता कि वह संपत्ति का स्वामी है और उस का उस संपत्ति पर दखल का पूरा अधिकार है। इस तरह आप के मामले में बेदखली का विज्ञापन पूरी तरह से बेमानी है। उस का कोई अर्थ नहीं है। जो भी संपत्ति आप की माताजी की है उस में आप दोनों भाई बहन की संयुक्त हो गयी है और आप को अपना हिस्सा प्राप्त करने का अधिकार है। चाहे यह संपत्ति कोई अचल संपत्ति हो या फिर बैंक में जमा राशि हो या बीमा और आप की माताजी की नौकरी के लाभ हों।

कोई भी विवाहित बहिन यदि उस का पति जीवित है तो अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त नहीं कर सकती क्यों कि विवाहित स्त्री उस के पति की आश्रित है न कि आप की माता जी की। हाँ यदि कोई स्त्री विधवा हो जाए या उस का विवाह विच्छेद हो जाए और अपने माता पिता के साथ रहने आ जाए तो वह आश्रित हो सकती है। आप की बहिन के साथ ऐसा नहीं है। इस कारण से वह अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त नहीं कर सकती। उस के द्वारा लगाई गई आपत्ति का कोई अर्थ नहीं है, आप प्रतिआपत्ति प्रस्तुत करें वह निरस्त हो जाएगी। यदि आप अपनी माताजी के आश्रित हैं तो आप अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। आप ने अब तक अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने के लिए आवेदन नहीं किया हो तो आप को तुरन्त आवेदन करना चाहिए।

प को बेदखल करने की प्रक्रिया से कोई मतलब नहीं है, उस की आप को जानने की आवश्यकता नहीं है इस कारण हम यहाँ नहीं बता रहे हैं। वैसे तीसरा खंबा को सर्च करेंगे तो वहाँ यह प्रक्रिया पहले बताई जा चुकी है।

किराया अदा न करने के आधार पर मकान खाली करने की अर्जी लगाएँ!

court-logoसमस्या-

सोमदत्त ने नागौर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

बिना किरायेनामे अथवा एग्रीमेन्‍ट के 20 वर्ष से किरायेदार रह रहे हैं। जिन का किराया 20 माह का बकाया है। जिस का कोई दस्तावेज नहीं है। आपसी याददास्‍त से किराया बकाया है। पूर्व में किराया नगदी दिया व लिया गया है। किसी भी पार्टी के कहीं पर भी हस्‍ताक्षर नहीं है। बिजली का बिल मकान मालिक के नाम से है जो किरायेदार जमा करवाता था। सन 2012 से बिल जमा नहीं करवाये जाने पर सन 2013 में बिजली विभाग द्वारा कनेक्‍शन काट दिया गया व मीटर उतार लिया गया। मकान खाली कैसे करवाया जा सकता है।

समाधान-

दि आप का मकान जिला मुख्यालय नागौर में स्थित है तो आप के यहाँ राजस्थान किराया नियन्त्रण अधिनियम 2001 प्रभावी है। इस अधिनियम में यह प्रावधान है कि यदि कोई किराएदार चार माह का किराया बकाया कर दे तो उसे किराया अदा करने के लिए नोटिस दिया जाए जिस में मकान मालिक अपना बैंक खाता प्रदर्शित करेगा जिस में किराया जमा कराया जा सके। यदि वह एक माह में किराया अदा नहीं करता है तो इसी आधार पर किराएदार के विरुद्ध मकान खाली कराने तथा बकाया किराया वसूली का मुकदमा किया जा सकता है। लेकिन किराया अधिकतम केवल 36 माह का ही वसूला जा सकता है।

किराएदार ने बिल जमा न कर के आप का बिजली कनेक्शन भी कटवा दिया है यह भी परिसर में सारभूत परिवर्तन है। इसे भी मकान खाली कराने का एक आधार बनाया जा सकता है।

दि मकान की मकान मालिक या उस के परिवार के किसी व्यक्ति के लिए आवश्यकता है तो यह मकान खाली कराने का सब से मजबूत आधार है।

प इन सब आधारों पर मकान खाली करने की अर्जी किराया अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करें। आप जब वकील से बात करेंगे और सारी परिस्थितियाँ बताएंगे तो हो सकता है वकील आप से बातचीत के दौरान अन्य आधार भी तलाश कर सके। आप स्वयं भी किराया नियंत्रण अधिनियम की पुस्तक खरीद कर उसे पढ़ कर उचित आधार तलाश सकते हैं और अपने वकील को सुझाव दे सकते हैं।

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