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विक्रय पत्र, पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) और रजिस्ट्री क्या हैं?

समस्या-

सुनीता ने निजामुद्दीन, दिल्ली से हरियाणा राज्य की समस्या भेजी है कि-


पावर ऑफ़ अटोर्नी क्या होता है? क्या यह रजिस्ट्री जैसा ही होता है? मैंने जिससे जमीन खऱीदी है, वो यही बोल रहा है। मैं ने प्लाट बल्लबगढ़ हरयाणा में लिया है और वो जेवर, यूपी में बोल रहा है पावर ऑफ़ अटोर्नी करने के लिए। क्या यह सही है? क्या इससे हम बाद में बिना बिल्डर के ही  रजिस्ट्री करा सकते हैं?


समाधान-

आप को और लगभग सभी लोगों को यह समझना चाहिए कि रजिस्ट्री, विक्रय पत्र यानी सेल डीड और पावर ऑव अटॉर्नी अर्थात मुख्तारनामा क्या होते हैं। हम यहाँ बताने का प्रयत्न कर रहे हैं-

रजिस्ट्री या रजिस्ट्रेशन या पंजीकरण-

जब आप कोई पत्र किसी को भेजना चाहते हैं तो साधारण डाक से लिफाफे पर टिकट लगा कर डाक के डब्बे में डाल देते हैं। यह साधारण पत्र होता है। लेकिन जब आप उस पर अधिक (25 रुपए) का डाक टिकट लगा कर तथा एक अभिस्वीकृति पत्र जिस पर आपका व पाने वाले का पता लिख कर डाक घर में देते हैं तो डाक घर आप को रसीद देता है। आप उस के लिए कहते हैं की हमने रजिस्ट्री से चिट्ठी भेजी है। इस चिट्ठी को भेजने के सबूत के तौर पर आपके पास डाकघर की रसीद होती है। डाकघर यह जिम्मेदारी लेता है कि जो अभिस्वीकृति पत्र आप ने लिफाफे के साथ लगाया है उस पर पाने वाले के हस्ताक्षर करवा कर आप के पास लौटाएगा। यदि 30 दिनों में अभिस्वीकृति पत्र आप को वापस नहीं मिलता है तो आप डाकघर को पत्र दे कर पूछ सकते हैं कि उस ने उस पत्र का क्या किया। इस पर डाकघर आप को एक प्रमाण पत्र देता है कि आप का पत्र फलाँ दिन अमुक व्यक्ति को अमुक पते पर डिलीवर कर दिया गया है। अब आप रजिस्टर्ड पत्र या रजिस्ट्री शब्द का अर्थ समझ गए होंगे कि आप का पत्र आप के द्वारा डाक में देने से ले कर पाने वाले तक पहुँचने  तक हर स्थान पर रिकार्ड़ में दर्ज किया जाता है।

इसी तरह जब  कोई भी दस्तावेज जैसे विक्रय पत्र, दान पत्र, मुख्तार नामा, गोदनामा, एग्रीमेंट, राजीनामा, बंटवारानामा आदि लिखा जाता है तो उस में किसी संपत्ति के हस्तांतरण या हस्तान्तरण किए जाने का उल्लेख होता है। अधिकारों का आदान प्रदान होता है। तब उस दस्तावेज को हम डीड या विलेख पत्र, या प्रलेख कहते हैं। हमारे यहाँ पंजीकरण अधिनियम (रजिस्ट्रेशन एक्ट) नाम का एक केन्द्रीय कानून है जिस के अंतर्गत यह तय किया हुआ है कि कौन कौन से दस्तावेज हैं जिन का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा, कौन से दस्तावेज हैं जिन का ऐच्छिक रूप से आप पंजीयन करा सकते हैं। इस के लिए हर तहसील स्तर पर और नगरों में एक या एक से अधिक उप पंजीयकों के दफ्तर खोले हुए हैं जिन में इन दस्तावेजों का पंजीयन होता है। यदि पंजीयन अधिनियम में किसी दस्तावेज की रजिस्ट्री कराना अनिवार्य घोषित किया गया है तो उस दस्तावेज की रजिस्ट्री अनिवार्य है अन्यथा उस दस्तावेज को बाद में सबूत के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर किसी भी 100 रुपए से अधिक मूल्य की स्थाई संपत्ति (प्लाट या मकान, दुकान) के किसी भी प्रकार से हस्तांतरण विक्रय, दान आदि का पंजीकृत होना अनिवार्य है अन्यथा वह संपत्ति का हस्तांतरण नहीं माना जाएगा।  अब आप समझ गए होंगे कि रजिस्ट्री का क्या मतलब होता है। रजिस्ट्री से कोई भी दस्तावेज केवल उप पंजीयक कार्यालय में दर्ज होता है उस का निष्पादन किया जाना प्रथम दृष्टया सही मान लिया जाता है।

विक्रय पत्र सेल डीड –

कोई भी स्थाई अस्थाई संपत्ति जो प्लाट, दुकान, मकान,वाहन, जानवर आदि कुछ भी हो सकता है उसे कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित कर सकता है। यह हस्तांतरण दान हो सकता है अदला बदली हो सकती है, या धन के बदले हो सकता है। जब यह धन के बदले होता है तो इसे विक्रय कहते हैं। इस विक्रय का दस्तावेज लिखना होता है। इसी दस्तावेज को विक्रय पत्र कहते हैं। यदि यह संपत्ति स्थाई हो और उस का मूल्य 100 रुपए हो तो उस का विक्रय पत्र उप पंजीयक के यहाँ पंजीकरण कराना जरूरी है। यदि पंजीकरण नहीं है तो ऐसा विक्रय वैध हस्तान्तरण नहीं माना जाएगा। यह विक्रय पत्र वस्तु को विक्रय करने वाला वस्तु का वर्तमान स्वामी निष्पादित करता है और उस पर गवाहों के ह्स्ताक्षर होते हैं। यदि वस्तु का वर्तमान स्वामी किसी कारण से उप पंजीयक के कार्यालय तक पहुँचने में असमर्थ हो तो उस स्वामी का मुख्तार (अटोर्नी) यह विक्रय पत्र स्वामी की ओर से निष्पादित कर सकता है। इस के लिए उस के पास वैध अधिकार होना चाहिए।

मुख्तारनामा या पावर ऑफ अटॉर्नी-

जब कोई संपत्ति का स्वामी स्वयं पंजीयन के लिए उप पंजीयक के कार्यालय में उपस्थित होने में असमर्थ हो तो वह एक मुख्तार नामा या पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित कर किसी अन्य व्यक्ति को मुख्तार या अटॉर्नी नियुक्त कर देता है जो कि उस की ओर से उप पंजीयक कार्यालय में उपस्थित हो कर दस्तावेज अर्थात विक्रय पत्र आदि का विक्रय पत्र हस्ताक्षर कर सकता है और उस का पंजीयन करा सकता है विक्रय का मूल्य प्राप्त कर सकता है। इस के लिए यह आवश्यक है कि मुख्तार नामा के द्वारा मुख्तार को ये सब अधिकार देना लिखा हो। मुख्तार नामा किसी भी काम के लिए दिया जा सकता है। लेकिन वह उन्हीं कामों के लिए दिया हुआ माना जाएगा जो मुख्तार नामा में अंकित किए गए हैं इस कारण मुख्तार द्वारा कोई दस्तावेज निष्पादित कराए जाने पर मुख्तारनामे को ठीक से पढ़ना जरूरी है जिस से यह पता लगे कि वह किन किन कामों के लिए दिया जा रहा है। मुख्तार नामा का पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है वह किसी नोटेरी से तस्दीक कराया गया हो सकता है लेकिन यदि वह किसी स्थाई संपत्ति मकान, दुकान, प्लाट आदि के विक्रय के हो तो उस का पंजीकृत होना जरूरी है। कई बार जब किसी संपत्ति के हस्तांतरण पर किसी तरह की रोक होती है या कोई और अड़चन होती तब भी वस्तु को विक्रय करने के लिए एग्रीमेंट कर लिया  जाता है और क्रेता के किसी विश्वसनीय व्यक्ति के नाम मुख्तार नामा बना कर दे दिया जाता है ताकि मुख्तार जब वह अड़चन हट जाए तो क्रेता के नाम विक्रय पत्र पंजीकृत करवा ले। लेकिन इस तरह से क्रेता के साथ एक धोखा हो सकता है। मुख्तार नामा कभी भी निरस्त किया जा सकता है। यदि संपत्ति का मालिक ऐसी अड़चन समाप्त होने पर या उस के पहले ही मुख्तार नामा को निरस्त करवा दे तो फिर मुख्तार को विक्रय पत्र निष्पादित करने का अधिकार नहीं रह जाता है। इस तरह मुख्तार नामा के माध्यम से किसी संपत्ति का क्रय करना कभी भी आशंका या खतरा रहित नहीं होता है।

मल्टीपल पॉवर ऑफ अटॉर्नी क्या है और ये कैसे काम करता है?

power of attorneyसमस्या-

राजेश ने ग्रेटर नोएडा,उत्तर प्रदेश से पूछा है-

ल्टीपल पॉवर ऑफ अटॉर्नी क्या है और ये कैसे काम करता है?

समाधान-

ब एक या कुछ कामों के लिए एक से अधिक लोगों को अपना अटार्नी नियुक्त किया जाए तो उसे मल्टीपल पावर ऑफ अटॉर्नी कहा जाता है। जिस तरह एक व्यक्ति अपनी ओर से किए जाने वाले कार्यों के लिए किसी एक व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी दे कर अपना अटॉर्नी बनाता है उसी तरह वह एक से अधिक व्यक्तियों को भी यह अधिकार दे सकता है।

लेकिन इस तरह की पॉवर ऑफ अटॉर्नी की अपनी समस्याएँ हो सकती हैं। एक ही कार्य को दो व्यक्ति अलग अलग तरीके से कर सकते हैं। हो सकता है एक ही संपत्ति के संबंध में दोनों व्यक्ति अलग अलग संविदाएँ कर लें। वैसी स्थिति में परेशानी हो सकती है। इसलिए यह आवश्यक है कि पावर ऑफ अटार्नी में ही यह स्पष्ट किया जाए कि एक से अधिक अटार्नी किस तरह से सामंजस्य बिठाएंगे जिस से किसी कार्य में विसंगतियाँ उत्पन्न न हों।

सी व्यवस्था की जा सकती है कि एक व्यक्ति अटार्नी का काम करे, जब वह काम करने की स्थिति में न हो तो उस के असमर्थता व्यक्त करने पर दूसरा अटार्नी उस काम को करे और जिस अवधि तक दूसरा काम करे उस अवधि में पहला बिलकुल काम न करे। इस तरह की व्यवस्था भी की जा सकती है कि दोनों अटार्नी एक साथ काम करें, और दोनों की सहमति के बिना कोई भी कार्य सम्पन्न हुआ नहीं माना जाए। वास्तव में मल्टीपल पावर ऑफ अटार्नी बहुत ही विशिष्ठ होनी चाहिए जिस से उस के माध्यम से संपन्न होने वाले कार्यों में विसंगतियाँ उत्पन्न न हों। जब भी इस तरह की पावर ऑफ अटार्नी निष्पादित करना हो तो किसी अनुभवी वकील को उसे दिखा कर उस की सलाह के बाद ही उसे निष्पादित किया जाना चाहिए।

अटार्नी द्वारा आप की इच्छा के विरुद्ध संपत्ति विक्रय करने की संभावना होने पर उस की पावर निरस्त कर दें।

power of attorneyसमस्या-

धीरज कुमार ने आगरा, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मारे दादा जी ने एक वसीयत हमारे पिताजी के नाम की थी। हमारे दादाजी स्वर्गवासीहो गये हैं। उस के बाद हमारे पिताजी ने हमारी माता जी के नाम से एक पॉवर ऑफ़अटोर्नी की है। मैं जानना चाहता हूँ की मेरी माताजी इस पॉवर ऑफ़ अटोर्नी केआधार पर इस संपत्ति को बेच सकती हैं? और क्या पॉवर ऑफ़ अटोर्नी के आधार परउस संपत्ति की रजिस्ट्री मेरी माताजी अपने नाम से करा सकती हैं? मेरेपिताजी जीवित हैं। यदि मेरी माताजी उस संपत्ति को बेच दे तो पिताजी क्याक्या कदम उठा सकते हैं। क्या वो उस बिकी हुई संपत्ति को लेकर मेरी माताजीके खिलाफ केस कर सकते हैं।

समाधान-

प के दादा जी ने जो वसीयत की थी उस के कारण उन की संपत्ति आप के पिता जी को प्राप्त हो गई। आप के पिता जी ने माताजी के नाम पावर ऑफ अटोर्नी दी है। आप की माता जी अब आप के पिता जी के प्रतिनिधि के रूप में उन की संपत्ति को विक्रय कर सकती हैं।

दि पिताजी नहीं चाहते कि आप की माताजी उन की संपत्ति को विक्रय करें तो आप के पिताजी को चाहिए कि तुरन्त पावर ऑफ अटार्नी को निरस्त कर के उस की सूचना आप की माता जी को दे दें और सूचना दिए जाने की प्राप्ति स्वीकृति अपने पास रखें। इस के बाद आप की माताजी आप के पिताजी की किसी संपत्ति का विक्रय नहीं कर सकेंगी।

दि आप की माता जी ने पावर ऑफ अटार्नी के आधार पर कोई संपत्ति अब तक विक्रय कर दी है तो वह विक्रय सही है। उस मामले में आप के पिता जी आप की माता जी के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकेंगे। अधिक से अधिक वे यह कह सकते हैं कि संपत्ति के विक्रय से प्राप्त धन माताजी ने उन्हें नहीं दिया। वे उस धन की प्राप्ति के लिए दीवानी कार्यवाही कर सकते हैं, या धन अपने पास रख कर उपयोग करने के लिए अमानत में खयानत का अपराधिक मुकदमा चला सकते हैं।

पावर ऑफ अटार्नी से विक्रय को मूल स्वामी चुनौती दे सकता है

समस्या-

मेरठ, उत्तर प्रदेश से किशनकुमार ने पूछा है –

मेरे माता-पिता ने अपने मकान की संयुक्त वसीयत बनाई जिस के अनुसार एक की मृत्यु हो जाने पर मृतक की संपत्ति का दूसरा स्वामी हो जाएगा। दोनों की मृत्यु हो जाने पर मैं उस संपत्ति का स्वामी हो जाउंगा। मेरी दो विवाहित बहनें हैं। एक बहिन ने पिता जी की मृत्यु के बाद माता जी से पावर ऑफ अटॉर्नी प्राप्त कर एक कमरा दूसरी बहिन को विक्रय कर दिया जिस का पता मुझ बाद में चला। अब मुझे क्या करना चाहिए कि वह किसी और को विक्रय नहीं कर सके और मेरा कमरा मुझे मिल जाए?

समाधान-

वसीयतमाता-पिता ने संयुक्त वसीयत की कि उन में से जिस की भी मृत्यु पहले हो जाएगी उस की संपत्ति का स्वामी दूसरा हो जाएगा। दोनों की मृत्यु हो जाने के उपरान्त वह संपत्ति आप को प्राप्त होगी। इस तरह यह वसीयत एक दोहरी वसीयत है। कोई भी वसीयत तभी प्रभावी होती है जब कि वसीयत कर्ता की मृत्यु हो जाती है। कोई भी वसीयत कर्ता अपने जीवन काल में अपनी वसीयत को परिवर्तित कर सकता है या उसे रद्द कर सकता है।

स मामले में आप के पिता का देहान्त हो गया। उन के देहान्त के साथ ही उन की संपत्ति की स्वामी आप की माता जी हो गई। अब आप की माता जी और पिता की छोड़ी हुई संपत्ति दोनों की स्वामिनी आप की माता जी हैं। माता जी अभी जीवित हैं इस कारण से इस वसीयत का वह भाग जो कि आप की माता जी की इच्छा को प्रकट करता है अभी प्रभावी नहीं है। आप की माता जी अपने हिस्से के वसीयत के भाग को अपने जीवन काल में परिवर्तित कर सकती हैं या रद्द कर सकती हैं। वर्तमान में जो भी संपत्ति है, उन की है। वह आप की नहीं हुई है। इस कारण वे उस संपत्ति को किसी को भी विक्रय या हस्तांतरित कर सकती हैं।

प की माता जी ने एक पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित कर आप की एक बहिन को अपना मुख्तार नियुक्त किया और उस मुख्तार बहिन ने आप की दूसरी बहिन को एक कमरा विक्रय कर दिया। इस में कोई त्रुटि नहीं है, यदि वह विक्रय आप की माता जी के निर्देशानुसार हुआ है। यदि वह आप की माता जी के निर्देशानुसार नहीं हुआ है और किसी धोखे से हुआ है तो आप की माता जी इस हस्तांतरण को चुनौती दे सकती हैं। लेकिन आप को तो इस मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है क्यों कि आप का अभी तक उस संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है।

हाँ, यदि आप की माता जी यह कहती हैं कि आप की मुख्तार बहिन ने उन के निर्देशों के विपरीत यह विक्रय किया है तो आप की माता जी उस विक्रय पत्र को निरस्त कराने के लिए दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकती हैं और आप की दूसरी बहिन जिसे वह कमरा विक्रय किया गया है उसे आगे विक्रय करने पर रोक लगाने के लिए इसी वाद में अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर अस्थाई निषेधाज्ञा जारी करा सकती हैं। जिस से आप की कमरे को खरीदने वाली बहिन उसे आगे विक्रय नहीं कर सकेगी।

भूमि को पूर्व में खरीदने का दावा करने वाले व्यक्ति के कार्यवाही करने तक प्रतीक्षा करें

समस्या-

फतेहपुर, उत्तर प्रदेश से अफ़सर सिद्दीकी ने पूछा है –

मेरे पास राजू नाम का व्यक्ति आया और कहने लगा मेरे पास 4 बीघे खेत है।  1982 से 1986 तक 16 बीघे ज़मीन मैं रामू वकील की पत्नी को बेच चुका हूँ, अब मेरे पास 4 बीघे और है। यह बात 2012 की है।  मैं ने खतौनी देखी सब कुछ उसके और मेरे सलाहकारों के हिसाब से ठीक था।  मैं ने जून में फतेहपुर मे बैनामा करवा लिया। बैनामे के 40 दिन के बाद दाखिल खारिज हो कर मेरा नाम ख़तौनी में आ गया।  फिर 5 दिन बाद मैं ने नाप के लिए वकील से हदबंदी के लिए दायरा किया।  मेरे 4 बीघा की नाप हुई।  नाप के वक्त कुछ लोग आए और कहने लगे कि मेरे पास इसी नम्बर के खेत का 4 बीघे का जनवरी 2006 का बैनामा है।  यह कहकर फोटो कॉपी दिया और नाप रोकने के लिए क़ानूनगो को कहा।  पर क़ानूनगो ने कहा कि मैं क़ानून के हिसाब से अफ़सर की खतौनी के हिसाब से हदबंदी कर रहा हूँ।  वहा पर मैं परेशान हुआ कि अब क्या होगा?  मेरे साथ एक बगल के खेत वाले ने उस आदमी से सवाल किया कि आपने अभी तक दाखिल खारिज (नामान्तरण) क्यूँ नहीं कराया?  इस बेचारे को क्या मालूम कि यह खेत पहले बिक चुका है?  मैं ने उसी जगह पर उसके बैनामे की फोटो-कॉपी पढ़ी।  मैं ने पूछा अपने किससे लिया है तो मैं ने पढ़ा कि बेचने वाला पप्पू है।  उसके पास मुख्तारनामा जैसा कि बैनामे में लिखा है कि उसके पास 25-01-1997 में राजू ने पप्पू को मुख़्तार-आम बनाया है।  उस ने कहा कि उस ने पप्पू से 2006 में बैनामा करवाया है और वह आपत्ति लगवा कर मेरा बैनामा खारिज करवा देगा। मैं ने राजू को फोन किया कि यह कैसा धोका है?  इस वक्त राजू की आयु 75 साल की होगी और मेरी 40 साल। राजू कहने लगे मैं ने मुख्तार नियुक्त नहीं किया। मेरे 3 लड़के हैं मुझे पप्पू को मुख्तार नियुक्त करने की क्या जरूरत थी? फिर मैं उसी दिन पप्पू से मिला तो उस ने कहा कि मुझे याद नही है। हाँ मैं ने अभी तक बहुत ज़मीन बेची है।   इस खेत की पॉवर ऑफ अटॉर्नी मुझे रामू वकील के ज़रीए मिली है और काग़ज़ उन्हीं के पास हैं।  फिर उसी वक्त मैं रामू वकील के पास गया तो वकील साहब कहते हैं कि हाँ मैने राजू से अपनी पत्नी के नाम 16 बीघे खेत लिए हैं और राजू ने पॉवर ऑफ अटॉर्नी मेरे सामने पप्पू को दी थी। फिर मैं रात में राजू के घर गया और पूछा तो राजू ने कहा कि मैं ने किसी को भी अपने हिसाब से कोई मुख़्तार नामा नहीं लिखा है।  अगर लिखा होता तो मैं तुमको ज़मीन (खेत) क्यों बेचता? मैं तुम्हारे साथ हूँ जहाँ कहोगे मैं हर अदालत में कहूंगा।  पर इतना ज़रूर है कि मैं उर्दू में साइन बना लेता हूँ, हिन्दी मुझको लिखना पढ़ना नहीं मालूम है।  रामू मेरा वकील है 1972 से 2002 तक 16 बीघे जमीन कई बार में उसकी पत्नी के हाथ बेचे हैं। मेरे उपर एक लोन का मुक़दमा और घर का मुक़दमा के चक्कर में वकील के पास बराबर तारीखों में जाता था।  कई बार वकील साहब किस में साइन के लिए कहते थे तो मैं करता था।  मेरी माली हालत खराब होती थी तो ज़मीन बेच देता था।  मुक़दमा हार ना जाऊँ इसलिए जिस काग़ज़ में साइन को कहते थे करता था।  कभी अदालत के बाहर काग़ज़ दिए या कभी तहसील में तो मैं साइन करता था।  अब रामू वकील ने मुझसे मुख़्तार नामा लिखवा लिया हो तो मैं नहीं बता सकता।  लेकिन अभी भी मैं बहलफ कहता हूँ.  मुझको चाहे जिसके सामने पेश कर दो, मैं ने हूँस हवस में कोई मुख़्तार आम नही किया है।  यह धोका किया गया है।  फिर मैं ने दूसरे दिन राजू को अपने पास बुलाया और कहा चलो मेरे साथ क्यों कि वकिल रामू ने कहा है की मुख़्तार नामा रजिस्टर्ड है मैं आज 25-10-2012 को गया तो रजिस्ट्री ऑफीस में मोआयना में लोगों ने बताया की यह रजिस्टर्ड राजू तुम्ही ने किया होगा। साइन पहचानो राजू ने कहा साइन मेरी ही लग रही है लेकिन मैने मुख़्तार नामा नही लिखा है।  यह सब धोका किया गया है। मैं पप्पू को जानता भी नहीं हूँ।  हाँ, एक बार रामू को बस्ती में देखा है अब मैं क्या करूँ? मेरे खरीदे हुए खेत 4 बीघे जिसका दाखिल खारिज हो चुका है, हदबंदी भी हो गई है, पप्पू ने जिसको 2006 में बैनामा किया है, जिसका दाखिल खारिज नहीं है यह खेत उसको मिलेंगे या मुझको? मेरे साथ अभी भी राजू बयान देने को तैयार है।  मैं अपनी पत्थर-गड़ी करवा सकता हूँ और क़ब्ज़ा ले सकता हूँ और मैं ही असली मालिक हूँ।  मुझको सही रास्ता दिखाएँ।

समाधान-

प के पास भूमि का स्वामी खुद आया और जमीन बेचने का प्रस्ताव किया। आप ने रिकार्ड में देखा कि जमीन उसी के नाम है। यहाँ आप ने केवल एक गलती की कि आप ने केवल राजस्व रिकार्ड ही देखा। यदि आप ने विगत 12 वर्षों का रजिस्ट्रेशन विभाग का रिकार्ड भी देखा होता तो संभवतः आप को यह पता लग जाता कि उस जमीन के विक्रय पत्र का पंजीयन पहले ही हो चुका है।

प ने पूरी एहतियात बरतने के उपरान्त उक्त भूमि को खरीदा है। विक्रय पत्र का निष्पादन आप के पक्ष में हो चुका है।  राजस्व रिकार्ड में उक्त भूमि का नामान्तरण (दाखिल खारिज) आप के नाम से हो चुका है। राजस्व अधिकारियों से आप भूमि का नाप करवा चुके हैं और मौके पर विक्रेता से कब्जा प्राप्त कर चुके हैं। इस तरह आप उक्त भूमि के सद्भाविक क्रेता हैं और भूमि का कब्जा आप के पास है। आप को सभी प्रकार के भय मन से निकाल कर उक्त भूमि को अपने काम में लेना चाहिए।

जो व्यक्ति यह दावा कर रहा है कि भूमि को वह पूर्व में खरीद चुका है तो अब उसे इस भूमि पर दावा करना चाहिए। यही वह कह रहा है। लेकिन उस के दावे में दम नजर नहीं आ रहा है।  यदि उस ने भूमि पहले खरीदी है तो कब्जा क्यों नहीं लिया?  चाहे भूमि मुख्तार के माध्यम से बेची हो पर यदि कब्जा मूल स्वामी का है तो फिर कब्जा भी मूल स्वामी से प्राप्त करेगा।  इतने वर्ष पहले विक्रय पत्र का पंजीयन होने पर भी उस ने राजस्व रिकार्ड में नामान्तरण अपने नाम क्यों नहीं कराया? ये वे प्रश्न हैं जिन से उस व्यक्ति को जूझना पड़ेगा।

भूमि का पूर्व मालिक स्पष्ट रूप से कहता है कि उस ने उक्त जमीन का मुख्तार नियुक्त करने और जमीन बेचने का अधिकार किसी को नहीं दिया तो वह सही है।  उसे यह कहने की भी आवश्यकता नहीं है कि उस पर हस्ताक्षर उस के हस्ताक्षर जैसे लगते हैं।  जब उस ने खुद कोई मुख्तारनामा निष्पादित नहीं किया तो उसे स्पष्ट कहना चाहिए कि वे हस्ताक्षर उस के नहीं हैं, वह मुख्तारनामा फर्जी है।  यदि उस पर दस्तखत उस के हों भी तो भी वे धोखे से कराए गए हैं और उस वक्त तक कथित मुख्तार को वह जानता तक नहीं था।  उस के खुद के तीन बेटे हैं यदि मुख्तार ही नियुक्त करना होता तो उन में से किसी को करता। एक अजनबी को क्यों करता?  आप इसी आशय का एक शपथ पत्र मूल स्वामी से निष्पादित करवा कर उसे दो साक्षियों के समक्ष नोटेरी से सत्यापित करवा कर रखें। यह आप के काम आएगा।

चूंकि भूमि पर स्वामित्व और कब्जा आप का है, इसलिए आप को उक्त भूमि का उपयोग जो भी करना चाहते हैं करना चाहिए।  आप निश्चिंत हो कर पत्थरगड़ी करवाएँ। यदि कोई व्यक्ति उस भूमि पर अपने स्वामित्व का दावा करता है तो उसे न्यायालय जाना चाहिए, तब आप अपने बचाव के अधिकार का उपयोग कर सकते हैं।  जब तक कोई व्यक्ति आप के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही नहीं करता तब तक आप को अपनी ओर से कानूनी कार्यवाही नहीं करनी चाहिए। यदि वह व्यक्ति आप के कब्जे में दखल देता है या भूमि का आप की इच्छानुसार वैध उपयोग में बाधा डालता है तो भूमि के खातेदार होने के नाते आप न्यायालय में निषेधाज्ञा हेतु दावा प्रस्तुत कर उस के विरुद्ध अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त कर सकते हैं। यदि वह व्यक्ति आप के विरुद्ध उस के पास के दस्तावेजों के आधार पर कार्यवाही करता है तो उसे कार्यवाही करने दें।  उस के द्वारा ये दस्तावेज या उन की प्रतियाँ न्यायालय मे प्रस्तुत करने पर उन के फर्जी होने के आधार पर आप पुलिस थाने के माध्यम से या सीधे अपराधिक न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करें जो आप मूल स्वामी के शपथ पत्र के आधार पर कर सकते हैं।

स्वयं उपलब्ध न हो सकने पर मुख्तार-खास नियुक्त कर उस के माध्यम से विलेख निष्पादित व पंजीकृत कराया जा सकता है

 मथुरा (उ.प्र.) से बृजेन्द्र कुमार दुबे ने पूछा है –

पिताजी के देहांत के बाद हम चार भाई मकान का बँटवारा करना चाहते हैं। एक भाई दिल्ली में रहता है। वह कहता है कि मैं नहीं आ सकता हूँ। तुम दिल्ली आ जाओ और स्टाम्प पेपर पर लिखवा लो या किसी वकील द्वारा स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर मेरे से हस्ताक्षर करवा लो और फोटो ले लो। क्या इस तरह का स्टाम्प मान्य होगा या नहीं। मान्य होगा तो भविष्य में यह भाई किसी प्रकार का विरोध करने का हकदार होगा कि नहीं । स्टाम्प पर क्या लिखवाना होगा और उस के बाद क्या करना पड़ेगा? कृपया उचित सलाह दें।
 
 
 उत्तर –
बृजेन्द्र जी,
प चाहते हैं कि पिता का छोड़ा हुआ मकान का आप बँटवारा कर लें। लेकिन किसी भी संपत्ति का बँटवारा उस के सभी हिस्सेदारों के बिना नहीं होता है। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार किसी भी व्यक्ति के देहावसान पर उस की संपत्ति में उस के उत्तराधिकारियों का हित निहित हो जाता है। प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी के जीवित न होने पर ही द्वितीय श्रेणी के उत्तराधिकारियों का संपत्ति में हित उत्पन्न होता है। आप के मामले में दिवंगत पिता के चार पुत्र मौजूद हैं, जो प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी हैं। लेकिन आप को यह भी देखना होगा कि इन के अतिरिक्त प्रथम श्रेणी का कोई अन्य उत्तराधिकारी तो नहीं है। पुत्रों के अतिरिक्त पुत्रियाँ या दिवंगत पुत्रियों की संतानें और माता भी प्रथम श्रेणी की उत्तराधिकारी हैं। सम्पत्ति के बँटवारे के लिए प्रथम श्रेणी के सभी उत्तराधिकारियों की सहमति बँटवारे में होना आवश्यक है। यदि आप चारों भाई के अतिरिक्त कोई बहिन या आप की माता जीवित हैं तो उन की सहमति भी और बँटवारा विलेख पर उन की सहमति आवश्यक है। 
प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों में से जो भी बँटवारा विलेख पर हस्ताक्षर करने के लिए उपस्थित होने में सक्षम न हो तो बँटवारा विलेख पर हस्ताक्षर करने के लिए उस से मुख्तारनामा-खास प्राप्त किया जा सकता है। वह इस मुख्तारनामे से जिस व्यक्ति को मुख्तार नियुक्त करेगा वह व्यक्ति उस की ओर से बँटवारा विलेख पर हस्ताक्षर कर सकता है। इस मुख्तारनामा-खास में यह अंकित किया जाएगा कि वह किस व्यक्ति को किस उद्देश्य के लिए मुख्तार नियुक्त कर रहा है और मुख्तार को उस का कौन सा काम करना है। बेहतर हो कि आप भाई से मुख्तारनामा-खास निष्पादित करवा कर स्वयं को मुख्तार नियुक्त हो जाएँ। तब आप अपनी ओर से तथा अपने भाई की ओर से बँटवारा विलेख पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि कोई अन्य उत्तराधिकारी बँटवारा-विलेख को हस्ताक्षर करने और उसे पंजीकृत करवाने के लिए उपलब्ध न हो सके तो आप उन के भी मुख्तार नियुक्त हो कर उन की ओर से बँटवारा-विलेख निष्पादित कर उसे पंजीकृत करवा सकते हैं। एक व्यक्ति अनेक व्यक्तियों का भी मुख्तार हो सकता है। लेकिन इस के पहले आप को यह जानकारी करनी होगी कि मुख्तारनामा कितने रुपये के स्टाम्प पेपर पर लिखा जाएगा। यह जानकारी आप मथुरा के उप-पंजीयक कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।  इस कार्यालय में दस्ता
वेजों को पंजीकृत करवाने वाला कोई भी डीड-राइटर यह जानकारी आप को दे सकता है। यदि आप किसी जानकार स्थानीय वकील की सलाह से यह मुख्तारनामा तैयार करवाएँ तो और बेहतर होगा। 
भी उत्तराधिकारियों की सहमति से बँटवारा विलेख तैयार कर उस पर सभी उत्तराधिकारियों के हस्ताक्षर करवाएँ जाएँ और फिर सभी उत्तराधिकारी या उन के मुख्तार उप-पंजीयक कार्यालय में उपस्थित हो कर बँटवारा-विलेख को पंजीकृत करवाएँ। 
 

भाई की पॉवर ऑफ अटॉर्नी से होम लोन संभव नहीं

डा. अनुराग ने पूछा  है …..

अगर एक भाई के पास पॉवर ऑफ़ अटोर्नी है और उसे अपने हिस्से में मकान बनाना है, बैंक से लोन लेने के लिए क्या दोनों भाइयो का आवेदन करना जरूरी है ?

उत्तर 

डॉ. साहब, बैंक मकान बनाने के लिए जो ऋण प्रदान करते हैं उस का आधार भूखंड और उस पर बने मकान के  स्वत्व विलेखों (Title Deeds) को अपने यहां जमा कर संपत्ति को बंधक रखना होता है। यदि संपत्ति पुश्तैनी है अर्थात पिता, माता या किसी भी पूर्वज से दोनों भाइयों के नाम आई है तो वह एक संयुक्त परिवार की संपत्ति होती है और  कानून के मुताबिक उस का बंटवारा होने तक सम्पूर्ण संपत्ति उस के सभी उत्तराधिकारियों का स्वत्वाधिकार होता है। यदि प्रासंगिक सम्पति पर केवल दोनों भाइयों का स्वत्वाधिकार है, यदि संपत्ति दोनों भाइयों के संयुक्त नाम से खरीदी गई हो तो भी वह दोनों भाइयों की संयुक्त संपत्ति होगी। उस के किसी भी भाग पर जो भी निर्माण होगा उस पर भी संयुक्त स्वामित्व होगा।

तो ऐसी हालत में दोनों भाइयों को ही बैंक में आवेदन करना होगा। यदि बंटवारा हो चुका है और स्वतंत्र संपत्ति को चिन्हित किया जा चुका है तो फिर भाई की या उस की पॉवर ऑफ अटॉर्नी की कोई आवश्यकता नहीं है। कोई भी बैंक या वित्तीय संस्ता होम लोन देने के लिए तथा संपत्ति के बंधक के लिए पॉवर ऑफ अटॉर्नी को स्वीकार नहीं करता है। वित्तीय संस्था की सदैव यह चाहत होती है कि बंधक आदि के सभी पेपर्स पर बंधक की जा रही संपत्ति के सभी हिस्सेदारों के हस्ताक्षर हों और ऋण की राशि का भुगतान भी सभी हिस्सेदारों के नाम जारी संयुक्त चैक के माध्यम से ही किया जाए।

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घर खरीदने के लिए क्या पॉवर ऑफ अटॉर्नी सुरक्षित है?

 श्री विनय वाजपेयी ने अपनी समस्या प्रेषित की है कि…..
….. मैं एक अनिवासी भारतीय हूँ और आठ वर्षों से संयु्क्त राज्य में हूँ। तीन वर्ष उपरांत  भारत लौटने की योजना है। इसलिए मैं भारत में एक घर खरीदना चाहता हूँ। मेरी बहिन घर खरीदने में मेरी मदद कर रही है। मैं केवल रजिस्ट्रेशन के लिए भारत नहीं आना चाहता। क्या मेरी बहिन मेरी ओर से लेन-देन कर सकती है। मैं ने सुना है कि वह इस के लिए पॉवर ऑफ अटॉर्नी देनी पड़ेगी? क्या यह सुरक्षित है?

उत्तर – विनय जी, आप की बहिन या कोई भी अन्य व्यक्ति आप की ओर से घर खरीद सकता है। इस खरीद के लिए घर के विक्रेता को धन की अदायगी करनी होगी विक्रेता या उस का यथाविधि अधिकृत अटॉर्नी (मुख्तार) आप के नाम विक्रय पत्र को संबंधित उपपंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत कराएगा। इस में कोई परेशानी नहीं है।

परेशानी यह है कि विक्रयपत्रों के मामलें में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आजकल यह अनिवार्य कर दिया गया है कि विक्रेता और खरीददार के चित्र विक्रयपत्र पर चिपकाए जाएँ। इस में भी कोई परेशानी नहीं है,आप का चित्र उस पर चिपकाया जा सकता है। परेशानी इस बात की है कि आप की अनुपस्थिति में इस बात का निर्णय कैसे हो कि वह चित्र आप का ही है, किसी अन्य व्यक्ति का नहीं? इस का एक हल निकाला जा सकता है कि आप के पासपोर्ट की एक प्रमाणित फोटोप्रति भी साथ में प्रस्तुत की जाए। इस के साथ ही विक्रेता और क्रेता दोनों के चित्र भी उप-पंजीयक के कार्यालय द्वारा तुरंत लिए जा कर रिकॉर्ड का भाग बनते हैं। वहाँ क्रेता की ओर से विक्रेता को मूल्य अदा करने, उस से घर का कब्जा प्राप्त करने और पंजीयन के उपरांत क्रेता की ओर से विक्रयपत्र की पंजीकृत प्रति प्राप्त करने वाले व्यक्ति का भी विक्रयपत्र पर चित्र चिपकाया जाएगा और उप-पंजीयक के कार्यालय द्वारा तुरंत एक चित्र लिया जा कर रिकॉर्ड का भाग बनाया जाएगा। इस के लिए यह भी साबित होना आवश्यक है कि क्रेता का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति उस का सच्चा और वास्तविक प्रतिनिधि है। यह केवल प्रतिनिधि के पक्ष में निष्पादित  पॉवर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तार नामे) के जरिए ही संभव है। इस  पॉवर ऑफ अटॉर्नी पर आप का चित्र और आप के अ़टॉर्नी का चित्र भी लगा हो और प्रमाणित हो तो दोनों की पहचान का काम भी उस के द्वारा हो जाएगा। इस कारण से आप को यदि भारत नहीं आना है तो  पॉवर ऑफ अटॉर्नी  होना आवश्यक है।

आप की शंका यह है कि क्या यह सुरक्षित है? तो इस का उत्तर यह है कि आप जनरल  पॉवर ऑफ अटार्नी निष्पादित न करें। बल्कि उस के स्थान पर स्पेशल  पॉवर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित करें केवल आप के नाम विक्रय पत्र निष्पादित करने, क्रेता को धनराशि भुगतान करने और घर का कब्जा प्राप्त करने, घर का रखरखाव करने, टैक्स आदि का भुगतान करने, नगर-निगम आदि में घर को आप के नाम दर्ज कराने, घर में आप के नाम से नल, बिजली, गैस, टेलीफोन आदि के कनेक्शन लेने आदि के लिए ही हो, अन्य कार्यों के लिए नहीं हो। 

इस मामले में आप की बहिन जहाँ आप के लिए घर खरीदा जा रहा है वहाँ के उप-रजिस्ट्रार कार्यालय से आवश्यक जानकारी हासिल कर सकती है। क्यों कि विभिन्न राज्यों में नियमों में मामूली परिवर्तन हो सकते हैं। इस मामले में यदि आप को विशिष्ठ सूचनाएँ चाहिए, तो आप पुनः हमें लिख सकते हैं।

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