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पति को प्रतिबंधित करना पड़ेगा।

समस्या-

कविता ने इन्दौर, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी को 14 साल हो गए हैं 2 बच्चे हैं। शादी बहुत जल्दी मे हुई थी दोनों परिवार आपस में एक दूसरे को समझ नहीं पाए। मेरे पापा ने अपनी क्षमता अनुसार शादी की परन्तु ससुराल वालों को व्यवस्थाओं मे भारी कमी लगी। ससुराल वाले मुझसे पहले दिन से ही शिकायत करने लगे। पति को काफी भड़काया ना पति का व्यवहार मेरे साथ ठीक था ना परिवार का। मेरे पति सरकारी नौकरी में थे परन्तु उन्होंने मुझे अपने साथ नही रखा, मुझसे कहते थे तुम्हे मम्मी पापा के साथ ही रहना होगा। देवर ननद दोनों की शादी पहले ही हो चुकी थी। देवर भी अपनी पत्नी को साथ ले गया था। पति हर शनिवार आते थे और जब भी आते थे शादी की कमियों को लेकर झगड़ा करते थे। मै नौकरी भी छोड़ चुकी थी। मेरे पास रोने के अलावा कोई रास्ता नही था फिर भी माता पिता और मैं रिश्ते को सामान्य करने के लिए कोशिश करते रहे। एक साल तक सिर्फ़ झगड़े होते रहे। विवाह विच्छेद जैसी बात कभी दिमाग में ही नही थी। मैने इन सब के साथ भी पढ़ाई जारी रखी मेरा अब बड़े पद पर चयन हो गया। लेकिन पति और ससुराल वाले नौकरी के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने शर्त रखी यदि नौकरी करेगी तो हम रखेंगे नही। मेरे ससुराल वाले ना तो मेरा कोई खर्च उठा रहे थे। कम दहेज के लिए ताने मारते रहते थे। उस समय मै तीन महीने के गर्भ से थी जीवन भर मैं अपने पापा पर निर्भर नहीं रहना चाहती थी इसलिए मैने मेरे परिवार की हिम्मत से नौकरी कर ली। तब से अभी तक ससुराल वाले मुझसे कोई रिश्ता नही रखते। धीरे धीरे पति आने लगे लेकिन मुझे ससुराल नहीं ले जाते थे। फिर मैंने महिला परामर्श केन्द्र में शिकायत की फिर ससुराल वालों ने पति के साथ घर में आने की इजाजत दी। पति अब साथ में ही रहते हैं लेकिन ससुराल वाले अभी भी रिश्ता नहीं रखते। मै जब भी जाने की कोशिश करती हूँ ससुराल में सास देवर देरानी ताने मारते हैं। कभी कोई बात नहीं करते। देवर ननद को फोन करती हूँ तो भी बात नहीं करते हैं। पति के अपने परिवार से सामान्य रिश्ते हैं परन्तु मुझसे अभी भी वैसे ही हैम मै यदि शिकायत करती हूँ तो कहते हैं, तुम बहू हो तुम्हें ऐसे ही रहना होगा। मै 14 सालों से उपेक्षित हूँ। लगातार अपमान सह सह कर मैं मानसिक रूप से परेशान हो गयी हूँ। पति कहते हैं तुम्हे हमेशा ऐसे ही रहना है। मै कुछ नहीं कर सकता। पति का बेटियों के प्रति प्रेम देखकर मै कोई कानूनी कदम नहीं उठाना चाहती परन्तु अब यह अपमान की जिन्दगी जीते नहीं बन रही है। समझ नहीं आ रहा है क्या करूँ?

समाधान-

प का अपमान सास, ननद और देवर ही नहीं कर रहे हैं। आप के पति भी कर रहे हैं। आप की सास, ननद और देवरों से अधिक कर रहे हैं। पति का बेटियों के प्रति प्रेम है तो कुछ उन्हें भी उस के लिए त्याग करना चाहिए। आप आत्मनिर्भर हो कर भी इतने बरसों से क्यों सहन कर रही हैं यह हमारी भी समझ से परे हैं।

आप कानूनी कार्यवाही नहीं करना चाहती हैं तो न करें। लेकिन मानसिक परेशानी से बचने के लिए पति को स्पष्ट रूप से कह दें कि उन्हें अपने परिवार और आप में से एक को चुनना पड़ेगा। यदि वे परिवार को चुनना चाहते हैं तो आप से और बेटियों से रिश्ता समाप्त समझें और आपसे व बेटियों से मिलने आना बन्द करें। वे फिर भी नहीं मानते हैं तो हिन्दू विवाह अधिनियम के अन्तर्गत न्यायिक पृथक्करण के लिए आवेदन अवश्य कर दें। उस आवेदन में अन्तरिम रूप से यह आवेदन भी प्रस्तुत करें कि आप के पति को आदेश दिया जाए कि वह आप से दूर रहें। इस के बाद देखें कि क्या होता है? आगे का रास्ता आप के पति की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

आप घरेलू हिंसा अधिनियम में कार्यवाही कर सकती हैं।

समस्या-

नेहा सक्सेना ने बरेली, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी 14 एप्रिल 2015 में हुई है और मेरी 14 माह की एक बेटी है।  मेरे पति बरेली के अच्छे सीबीएसई पैटर्न स्कूल में टीचर हैं और मैं भी टीचिंग जॉब में ही हूँ। मेरी शादी के दूसरे माह से ही प्रॉब्लम्स स्टार्ट हो गई थी। मेरे पति मेरी मदर-इन-लॉ की हर बात मानते हैं, यहाँ तक कि हमारे पर्सनल रिलेशन्स कैसे रहेंगे ये भी वही डिसाइड करती है। शादी के पहले से ही मेरी ननद जो कि शादीशुदा है और उस के दो बच्चे हैं रोज़ सुबह मेरे घर आ जाती है और शाम को 8-9 बजे तक वापस जाती है। बेटी होने वाली थी तब भी मेरी सास ननद और पति ने मुझे बहुत टॉर्चर किया इतना कि मैं अपने मायके वापस आ गयी। लगभग 3-4 माह मैं मायके रही तब भी मेरे पति ने मुझे ले जाने की कोई कोशिश नहीं की तब मेरे पक्ष के लोगों ने पंचायत बैठा कर मुझे ससुराल भेजा। अब फिर वही परिस्थिति है और अब मेरी सास सभी से ये कह रही है कि मैं इस को किसी भी कीमत पर अपने बेटे के साथ नहीं रहने दूँगी क्यूंकि मैंने अपनी ननद के रोज़ आने पर आपत्ति  उठाई थी। मेरे पति हमेशा की तरह अपने घरवालों के साथ हैं। मैं अपनी बेटी के साथ मायके में हूँ और पति से किसी तरह का कोई सम्पर्क नहीं है। मैं अपने पति के साथ ही रहना चाहती हूँ लेकिन सास ननद और पति के टोर्चर के साथ नहीं। इसकी वजह से ही पुलिस में अभी तक कोई कंप्लेंट  नहीं की है। मैं जानना चाहती हूँ कि मुझे क्या करना चाहिए।. क्या मैं पति से क़ानूनी तौर पर पेरेंट्स से अलग होने की माँग कर सकती हूँ? क्या मैं अपने ससुराल मे ननद के रोज़ रोज़ आने पर रोक लगाने के लिए कोई कानूनी कार्यवाही कर सकती हूँ? साथ ही मेरे पति मुझे खर्च के लिए कुछ नहीं देते तो साथ रहते हुए क्या क़ानूनी तौर पर पति से अपने और बेटी के खर्च के लिए डिमांड कर सकती हूँ? मैं परेशानी में हूँ, मुझे सही रास्ता सुझाएँ। मायके से कोई भी सपोर्ट नहीं है, पिता की मृत्यु हो चुकी है बस मम्मी और छोटी बहिन है।

समाधान-

ति पत्नी का रिश्ता ऐसा है कि वह दोनों के चलाने से चलता है। कानून के हस्तक्षेप से उस में बहुत मामूली सुधार संभव है, अधिक नहीं। मामला अधिक गंभीर होने पर तलाक के सिवा कोई चारा नहीं रहता है।  पूरी कहानी में आप के पति आप के साथ खड़े कभी नहीं दिखाई देते हैं। जब कि ननद का अपना घर है और माताजी के सिवा कोई अन्य दायित्व उन पर नहीं है। लेकिन जैसी उन का स्वभाव है वे अपनी माँ और बहिन के विरुद्ध कुछ नहीं बोलेंगे और आप को अभी भी वे अपना नहीं पराये परिवार का प्राणी समझते हैं। जब तक पति स्वयं आप के साथ माँ और बहिन के सामने नहीं खड़े होते आप का ससुराल जा कर रहना मुनासिब नहीं वर्ना वही पुरानी स्थितियाँ झेलनी पड़ेगी।

आप के साथ जो व्यवहार हुआ है वह घरेलू हिंसा है और आप घरेलू हिंसा अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही कर सकती हैं। आप इस अधिनियम में अलग आवास की सुविधा की मांग कर सकती हैं, आप अपने लिए और अपनी बेटी के लिए खर्चे की मांग कर सकती हैं। हमारा सुझाव है कि पहले आप इस अधिनियम के अंतर्गत इन दोनों राहतों के लिए आवेदन करें। आप खुद कमाती हैं, हो सकता है आप की कमाई बहुत कम हो लेकिन फिर भी मितव्ययता बरतते हुए माँ और बहिन के साथ रहते हुए अपने आत्मसम्मान को बनाए रख सकती हैं। इस अधिनियम में न्यायालय अंतरिम राहत भी प्रदान कर सकता है। जिस से आप को एक राशि हर माह मिलना आरंभ हो सकती है। जब तक खुद आप के पति अपने साथ रहने को नहीं बोलें और माँ, बहिन की क्रूरता के विरुद्ध आप के साथ खड़े होने तथा खुद क्रूरता करने का वादा न करें तब तक आप को उन के साथ जा कर नहीं रहना चाहिए। जरूरी होने पर पुलिस में 498ए के अंतर्गत रिपोर्ट करायी जा सकती है। अभी इतना करें। फिर प्रतिक्रिया देखें और आगे की कार्यवाही तय करें।

जो भी करें पत्नी को विश्वास में ले कर करें।

समस्या-

मनीश ने मरु मंदिर, सीकर, राजस्थान  से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी जनवरी 2015 में हुई और मुझे एक 9 महीने की बच्ची भी है। मेरी पत्नी मार्च से अपने पीहर में है। उस का ओर मेरा रिश्ता अच्छा नहीं चल रहा है। उससे मेरी बात होती है, वो मेरे परिवार से खुश नहीं है वो कहती है कि मेरी माँ और बहन उसके घर वालों के नाम से उसे गालियां देते हैं और उनकी वजह से वह परेशान है। उसके पिताजी मुझे धमकियाँ दे रहे हैं कि वो मेरे परिवार सहित मुझे जेल में डलवा देंगे। लेकिन चार महीने बाद क्योकि उनके लड़के की शादी होने के बाद अब उसके मामाजी का कॉल आया है कि उसे जाकर ले आऊँ। तो में किसी भी कानूनी समस्या में तो न फंस जाऊंगा? कहीं उसे लेकर आने के बाद ओर कोई समस्या हो जाये और परिवार किसी मुसीबत न फंस जाए कोई तरीका बताएँ कि अब उसे लेकर आना चाहिये या नहीं। अगर लेकर आऊँ तो फिर वो क्या कर सकते हैं मेरे ओर परिवार के साथ किस तरीके से मैं बच सकता हूँ?

समाधान-

प की पत्नी की शिकायत की ओर आप को ध्यान देना चाहिए। यदि किसी स्त्री को उस के माता पिता को गालियाँ देते हुए अक्सर सास ननद प्रताड़ित करें तो यह तो कोई भी स्त्री सहन नहीं कर सकती। यदि आप की पत्नी की बात सही है जिस का पता आप सहज ही लगा सकते हैं तो आप को अपने परिवार में अपनी पत्नी की तरफदारी करते हुए बात करनी चाहिए कि ऐसा गलत व्यवहार आप अपनी पत्नी के साथ सहन नहीं करेंगे। यह अच्छी बात है कि पत्नी के साथ आप की बातचीत है। इस का अर्थ यह भी है कि वह सच बोल रही है। आप को अपनी पत्नी को आश्वस्त करना चाहिए कि उस के साथ ऐसा व्यवहार अब नहीं होगा। यदि होता है तो हम अलग रहेंगे।

आप को चाहिए कि आप पत्नी से बात करें। उस के आश्वस्त होने पर ही उसे ले कर आएँ। यदि आप अपनी पत्नी में विश्वास पैदा कर पाते हैं और प्रताड़ना के विरुद्ध उस का साथ देते हैं तो पत्नी भी आप के साथ खड़ी हो जाएगी। यदि पत्नी आप के विरुद्ध कुछ नहीं करती है तो उस के परिजन भी आपके विरुद्ध कुछ नहीं कर पाएंगे। इस कारण सब से पहले आप स्वयं अपने और अपनी पत्नी के बीच आपसी विश्वास अर्जित करें। इस के लिए आप को कई बार आप की ससुराल जाना पड़े तो भी जाइए।

तलाकशुदा होने का झूठा तथ्य बता कर नौकरी प्राप्त करना अपराध है।

समस्या-

मितेश पालीवाल ने नाथद्वारा, जिला राजसमन्द , राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरी शादी 5 साल पूर्व हिन्दू रीती से हुई थी। हम दोनों ने शादी से पूर्व b.ed. की थी। मेरे एक लड़का भी है जिसे मेरी पत्नी मुझे देना नहीं चाहती क्योंकि मेरी पत्नी मुझसे सिर्फ सरकारी नौकरी पाने के इरादे से मुझसे तलाक चाहती है। मेरे द्वारा मना करने पर उसने मेरे व मेरे परिवार पर दहेज़, महिला उत्पीडन, मेन्टेनेंस आदि केस कर दिए हैं कोर्ट ने 4000 की डिग्री भी कर दी है। मेरी पत्नी ने RPSC सेकण्ड ग्रैड में ऑनलाइन आवेदन भी कर दिया है। जिसमें उसने अपने आप को तलाकशुदा बताया है।  उसका कहना है कि जब तक rpsc का exam होगा तब तक तो वो मुझ से तलाक भी ले लेगी,  मेने उस तलाक के फॉर्म को ऑनलाइन निकाल कर कोर्ट में पेश कर दिया है कोर्ट ने भी उसे गलत माना। साथ ही उसे आगे से एसा नहीं करने की नसीहत दी। श्रीमान मेरी पत्नी व सास-ससुर लालची प्रवृत्ति के हैं,  ये सब मुझसे पैसों की डिमांड करते रहते हैं।   मेरा सवाल है की मेरी पत्नी ने तलाक नहीं होने के बावजूद rpsc में तलाकशुदा का आवेदन किया है क्या यह गैरक़ानूनी है। अगर है तो किस धारा के अंतर्गत साथ ही और कोई उपाय हो तो अवगत करावे। मैं अपनी बात को मिडिया में भी बताना चाहता हूँ।

समाधान-

प की पत्नी नौकरी करना चाहती है और आत्मनिर्भर बनना चाहती है, यह एक अच्छी बात है। पर उस ने नौकरी पाने के लिए जो कदम उठाया है खुद को तलाकशुदा बता कर, वह गलत है और इस तरह वह नौकरी प्राप्त करती है तो वह धारा 420 आईपीसी का अपराध होगा। इस से प्राप्त की हुई नौकरी भी जा सकती है और उस पर अपराधिक मुकदमा चलाया जा कर उसे कारावास के दंड से दंडित भी किया जा सकता है।

मुझे नहीं लगता कि आप की पत्नी ने आप का घर छोड़ा है वह केवल इस कारण छोड़ा है कि वह तलाक की डिक्री प्राप्त कर नौकरी कर सके। लगता है यह योजना बाद में दिमाग में आई हो। आप के बीच विवाद का कारण कुछ और है जो आप यहां बताना नहीं चाहते। मीडिया में इस तथ्य को उजागर करना आप के लिए ठीक नहीं होगा। आप उस के पति हैं और यह पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण होगा। मेरे  विचार से आप को अपनी पत्नी को ऐसा गलत कदम उठाने से रोकना चाहिए। जब तक वाकई तलाक नहीं  हो जाता है तब तक आप की ओर से कोई कदम ऐसा नहीं उठाया जाना चाहिए जो पत्नी के प्रति दुर्भावना को व्यक्त करता हो।

मिथ्या प्रकरणों के आधार का उपयोग करने में जल्दबाजी न करें।

समस्या-

रवि ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी जनवरी 2015 मे हुई थी, जुलाई 2016 में मुझे उसके प्रेम प्रसंग के बारे मे पता चला, जो शादी से पहले से ही था। लड़का उसकी भाभी का चचेरा भाई है। 9 अगस्त 2016 को लड़की के घर वाले लड़की को ले गये।  23 अगस्त 2016 को मेने अवैध संबंध के आधार तलाक का केस कर दिया। उसके कुछ दिन बाद मुझे पता चला कि लड़की वालों ने मुझपर और मेरे परिवार पर झूठा 498ए का दहेज का केस कर दिया है।  7 सितम्बर 2016 को पुलिस ने समझाइश को बुलाया, उस दिन दोनों परिवारों की पंचायत हुई, उस दिन 1150000 रुपये, 14 सितम्बर तक पंचो को देने की बात हुई तथा केस वापसी व तलाक की बात मौखिक रूप से तय हुई।  7 सितम्बर 2016 को एक स्टाम्प दहेज केस में कार्रवाई न करवाने बाबत दिया, हमने कुछ दिन बाद पंचो को रूपए दे दिए।  इसके कुछ दिन बाद जिस पंच के पास रूपए जमा थे उसने लड़की वालो को पैसे दे दिए, और उसने लड़की के बाप से एक स्टाम्प लिखवा लिया कि इस 1150000 रूपए मैंने प्राप्त कर लिए हैं, जो परिवार, समाज कहेगा वो मेैं करुंगा।  लड़की वालों ने उसके बाद झूठे 498ए, 406, व 125 के केस दर्ज करवा दिए। वो पंच गवाही देने को पुलिस स्टेशन नहीं आया।  दहेज केस मे पुलिस ने मुझे मुलजिम बनाया।  दहेज केस में मुझे जमानत मिल गई। उसके बाद लड़की वालों ने लड़की के द्वारा दिसम्बर 2016 के लास्ट वीक मे मेरे छोटे भाई पर बलात्कार (अक्टूबर 2015 में ) का झूठा केस व मेरी मम्मी, मुझ पर सबूत मिटने का झूठा केस कोर्ट के जरिये दर्ज करवा दिया। मार्च 2017 मे 376 केस को पुलिस झूठा केस मानकर कोर्ट मे अपनी जाँच रिपोर्ट दे दी।  लड़की वालों की सभी को मुलजिम बनाने की 190 की एप्लीकेशन निरस्त कर दी।

१. क्या मैं 376 के झूठे केस के आधार पर तलाक पा सकता हूँ, तो उसका क्या प्रोसेस है? २. 125 का केस तो झूठा है क्युँकि हमने तो पहले ही 1150000 रूपए दे चुके हैं। तो इस में हमको क्या करना चाहिए, कैसे उन पंचो को अदालत मे बुलायें?  ३. 376 case में मानहानि का क्या प्रोसेस है और इसके साथ और क्या क्या किया जा सकता है? इसमें ४. 498a मे 190 की एप्लीकेशन निरस्त होने का तलाक के केस में कोई यूज़ है क्या?


समाधान-

प ने जारता के आधार पर विवाह विच्छेद का मुकदमा पत्नी के विरुद्ध किया है। विवाह के पूर्व क्या संबंध स्त्री के किसी पुरुष से थे इस से कोई फर्क नहीं पड़ता। यह तलाक का आधार नहीं हो सकता। जारता के लिए आप को प्रमाणित करना होगा कि विवाह के उपरान्त आप की पत्नी ने किसी अन्य पुरुष से यौन संबंध स्थापित किया है। इसे साबित करना आसान नहीं होता।

पहले 498ए में केवल पुलिस को शिकायत दर्ज हुई है, केस दर्ज नहीं हुआ होगा। उसी में आपने समझौता कर लिया। आप के रुपये दे देने के बाद लड़की और उस का पिता बदल गया। इस कारण उस ने दुबारा 498ए का केस दर्ज कराया हैं, वह अभी न्यायालय के पास लंबित है यह साबित नहीं हुआ है कि आप निर्दोष हैं। तीसरे उस ने आप के भाई पर 476 तथा आप व माँ पर सबूत छुपाने का केस लगाया है जिस में पुलिस ने अभी न्यायालय को अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की है। अभी आपकी पत्नी उसमें आपत्तियाँ कर सकती है कि पुलिस ने आप से मिल कर ठीक जाँच नहीं की। न्यायालय उस में सुनवाई कर के उसे दर्ज कर के आप के विरुद्ध समन जारी कर सकता है। इस कारण जब तक न्यायालय उस में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को मंजूर न कर ले तब तक अंतिम रूप से उसे झूठा केस नहीं कहा जा सकता।

यदि आप साबित कर देते हैं कि पत्नी पहले ही आजीवन भरण पोषण के लिए 11,50,000/- रुपए प्राप्त कर चुकी है तो धारा 125 दं.प्र.संहिता का प्रकरण खारिज हो सकता है। लेकिन उस के लिए आप को उस का लिखा एग्रीमेंट साबित करना होगा। गवाह (पंच) को न्यायालय में बुलाने के लिए न्यायालय को आवेदन दे कर समन भेज कर गवाह को अदालत में बुलाया जा सकता है। मुझे यह समझ नहीं आया कि आप ने कैसे पंच तय किए जो पुलिस में बयान तक देने नहीं आ सके।

यदि बलात्कार के केस में एफआर न्यायालय द्वारा मंजूर हो जाती है और 498ए में आप बरी हो जाते हैं तो यह विवाह विच्छेद के लिए एक नया आधार होगा। आप को चाहिए कि तब आप अपने वर्तमान विवाह विच्छेद के प्रकरण में संशोधन करवा कर इन नए आधारों को शामिल करें। या फिर एक नया विवाह विच्छेद आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करें। मान हानि के संबंध में भी जब तक किसी प्रकरण में अन्तिम रूप से सिद्ध न हो जाए कि आप के विरुद्ध की हुई रिपोर्ट मिथ्या थीं हमारी राय में कोई कार्यवाही करना  उचित नहीं है। समय से पहले की गयी कार्यवाही कभी कभी  खुद के गले भी पड़ जाती है।

 

न्यायालय में गवाही होने के उपरान्त ही धारा 340 दं.प्र.संहिता का आवेदन प्रस्तुत करें।

rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

प्रमोद ने भिलाई छत्तीसगढ़ से पूछा है-

त्नी व ससुराल वालों ने मेरे व मेरे परिवार के विरुद्ध आजमगढ़ न्यायालय (उ.प्र.) में डी.वी. एक्ट 2005, 125, 498ए, 323, 504, 506, 3/4 डी.पी. एक्ट के तहत झूठा मुकदमा लगाया है। उसने अपने आरोप पत्र में दहेज मांगने, दिनांक 15/08/2015 को मार-पीट गाली-गलौज करके घर (गांव के घर) से निकाल देने का आरोप लगाया है। उसने अपने गांव के सरपंच से फर्जी कागज बनवाया है जिसमें उसने शादी का स्थान उसके गांव कोलमोदीपुर (आजमगढ़) को दर्शाया व उसे न्यायालय में लगाया है। जबकि शादी दिनांक 22/02/2015 को गाजीपुर (उ.प्र.) में होने के गवाह व सबूत हैं तथा दिनांक 15/08/2015 को मैं अपने गांव के घर में नहीं था उस दिन मैं ट्रैन से यात्रा कर रहा था उसका टिकट व गवाह हैं। मेरे भाई भी गांव में नहीं थे वे हमारे मूल- निवास भिलाई (छ.ग.) में थे।  मेरे पास ये भी सबूत है कि पत्नी के विदाई के दिनांक 14/08/2015 को ही पत्नी अपने पिता व रिश्तेदार के साथ मिलकर गांव-समाज व पंचायत के सामने अपने मांग का सिन्दूर पोंछकर तलाक देने की बात कहकर अपना पूरा सामान गहना व हमलोगों से रुपये लेकर अपने मायके चली गयी थी।  मेरे पास पत्नी के द्वारा दिया हुआ नोटरियल इकरारनामा/ शपथपूर्वक कथन है जिसमें स्पष्ट लिखा है कि मैं और मेरा परिवार कभी भी उससे या उसके परिवार से धन- दहेज की मांग नहीं किये है, कभी भी उसके साथ मार- पीट गाली गलौज व दुर्व्यवहार नहीं किया है। उल्टा पत्नी ने ही मेरे व मेरे परिवार वालो से गाली गलौज व दुर्व्यवहार किया है तथा उसके तलाक देना व उसकी धमकियों का विवरण है। उसने यह नोटरी अपने मायके (गाजीपुर) में रहते हुए गाजीपुर न्यायालय में दिनांक 07/12/2015 को कर के दिया है। जिसमें उसका फोटो व हस्ताक्षर तथा उसके पिता व चार गवाहों के हस्ताक्षर हैं।  मेरे पास गवाह दस्तावेजी सबूत है जिससे यह साबित हो जायेगा कि मैं और मेरा परिवार निर्दोष है तथा पत्नी व ससुराल वाले दोषी साबित हो जायेंगे। मेरे ससुराल वाले किसी भी तरह से समझौता नहीं करना चाहते हैं। मेरा प्रश्न आप से यह है कि क्या मैं सीआरपीसी की धारा 340 के तहत मुकदमा कर सकता हूँ यदि हाँ तो किस प्रकार से और किस न्यायालय में (मेरी शादी के स्थान गाजीपुर या मूल निवास भिलाई में) और यदि नहीं तो किस वजह से नहीं कर सकता हूँ इसका कारण बताईये । यह भी जानना चाहता हूँ कि और कौन- कौन सा मुकदमा उनके विरुद्ध कर सकता हूँ?

समाधान-

प ने अपनी समस्या से संबंधित काफी तथ्य यहाँ रखे हैं। हमारी अपराधिक न्याय व्यवस्था ऐसी है कि जब तक न्यायालय किसी अपराधिक मामले में प्रसंज्ञान नहीं ले लेता तब तक अभियुक्त को कुछ कहने का अधिकार नहीं है, अदालत को भी उसे सुनने का अधिकार नहीं है। प्रसंज्ञान लेने के उपरान्त आरोप विरचित करने के लिए बहस होती है वहाँ अभियुक्त को सुनवाई का अवसर प्राप्त होता है वहाँ आप अपनी बात कह सकते हैं, लेकिन वहाँ भी आप के बचाव वाले सबूतों को नहीं देखा जाएगा।

जब मुकदमे की सुनवाई होगी तब आप को गवाहों से जिरह का अवसर मिलेगा। अभियोजन पक्ष की गवाही हो जाने के उपरान्त आप को बचाव में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा तब आप इन सारे सबूतों का उपयोग कर सकते हैं। मुकदमे तो आप को लड़ने ही होंगे।

धारा 340 दंड प्रक्रिया संहिता में आप उसी न्यायालय को शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं जहाँ आप के विरुद्ध झूठे सबूत या गवाही आदि दी जा रही है। पर यदि आप अभी यह आवेदन प्रस्तुत करेंगे तो यह जल्दबाजी होगी। पहले उन सबूतों को गवाही से प्रमाणित हो जाने दीजिए तभी तो आप धारा 340 के अन्तर्गत आवेदन दे सकेंगे।

आप किन किन धाराओं के अन्तर्गत धारा 340 का आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं यह आप की सामग्री का अध्ययन कर तथा आप से बातचीत कर के आप के वकील तय कर सकते हैं।

फिर भी आप को लगता है कि प्रथम दृष्टया ही आप यह साबित कर सकते हैं कि आप के विरुद्ध किए गए मुकदमे झूठे हैं तो आप प्रथम सूचना रिपोर्ट तथा मुकदमा रद्द कराने के लिए उच्च न्यायालय में धारा 482 के अन्तर्गत रिविजन याचिका दायर कर सकते हैं।

विवाद को हल करने के लिए संभव हो तो काउंसलर्स की मदद लें।

rp_judicial-sep8.jpgसमस्या-

दिनेश कुशवाहा ने गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश  से समस्या भेजी है कि-

विवाह को 2 साल हो चुके हैं। एक स्टेच्यूटरी बॉडी (अटॉनमस बॉडी अंडर मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स) में क्लास ई ऑफीसर हूँ। आपसी मनमुटाव/ वैचारिक मतभेद के कारण हम एक ही घर में अलग अलग रहते हैं। (खाना सोना, बर्तन सब कुछ अलग)। एक बेटी भी है जो कि 1 साल की हो चुकी है। बहुत प्रयासों के बाद भी मन नहीं मिल सके। वो मेरे माता पिता, भाई बहन को कोसती रहती है सारा दिन। पिछले 6 महीने से फिज़िकल रीलेशन भी नहीं है। ज़बरदस्ती करता हूँ तो कहती है कि मेरीटल रेप का केस कर देगी। एक बार इस कारण से उसने गाज़ियाबाद पुलिस को फोन कर दिया, पुलीस ने आकर समझौता करा दिया और एक कॉपी अपने साथ लेकर समझा बुझा कर चली गयी। मेरा जीना दूभर हो गया है। मैं बीवी से तलाक़ लेना चाहता हूँ। वो कहती है की एक बार एफआईआर करा दूँगी तो दहेज केस, डोमेस्टिक क्रूएल्टी आदि में अंदर चला जाएगा और नौकरी भी चली जाएगी। मैं बहुत डरा हुआ रहता हूँ। डर है कि ये हालत मुझे बीमार बना देंगे। आप कोई रास्ता सुझाएँ। क्या 498ए डोमेस्टिक वायलेंस आदि से क्या नौकरी जा सकती है? क्या मुझे तलाक़ मिल सकता है? वह मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है।।

समाधान-

प ने  अपनी समस्या तो बता दी, लेकिन मनमुटाव/ वैचारिक मतभेद कहने से समस्या स्पष्ट नहीं हुई। ये मनमुटाव या वैचारिक मतभेद किस प्रकार के हैं उन का विवरण आप को देना चाहिए था। पत्नी का जो व्यवहार आप ने बताया है उस का भी कोई कारण तो रहा होगा या वह बताती होगी। यदि आप तलाक लेना चाहते हैं तो केवल और केवल उन्हीं आधारों पर ले सकते हैं जो आधार हिन्दू विवाह अधिनियम विवाह विच्छेद के लिए अनुमत करता है। इन आधारों की आप को तीसरा खंबा में सर्च करने पर मिल जाएगी। बिना विस्तृत तथ्यों के इन आधारों का पता लगाया जाना संभव नहीं है।

भारत में मेरीटल रेप जैसा कोई अपराध नहीं है, जिस में किसी व्यक्ति को दंडित किया जा सकता हो। लेकिन किसी विवाहित स्त्री के साथ क्रूरता अवश्य दंडनीय अपराध है। यदि आप की पत्नी किसी मामले में आप के विरुद्ध कोई प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराती है और पुलिस को साक्ष्य से लगता है कि आप ने कोई अपराध किया है तो आप की गिरफ्तारी हो सकती है और आप पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

लेकिन यदि आप स्वयं निर्दोष हैं तो आप के डरने का कोई कारण नहीं है। आप को अपने पारिवारिक विवाद की सूचना आप के नियोजक को देनी चाहिए। जिस से बाद में किसी तरह मामला न्यायालय में जाने पर आप की नौकरी पर प्रभाव कम से कम हो। आप का नियोजक वैवाहिक विवाद या अपराध के कारण आप को नौकरी से निकाल सकता है या नहीं यह आप की सेवा शर्तों से तय होगा। जिस की जानकारी हमें नहीं है, न आप ने दी है।

मारा सुझाव है कि आप को कोई भी कानूनी कार्यवाही करने के पूर्व संभव हो सकते तो काउंसलर्स की मदद से काउंसलिंग का उपयोग करना चाहिए। इस संबंध में आप जिला न्यायालय स्थित विधिक सेवा प्राधिकरण की मदद ले सकते हैं। तुरन्त न्यायालय में न्यायिक पृथक्करण के लिए आवेदन करना चाहिए। आप किसी वकील से परामर्श का शुल्क देने में सक्षम हैं और आप को इस के लिए पहले किसी अच्छे और विश्वसनीय स्थानीय वकील से स्वयं मिल कर सारे तथ्य बताते हुए सलाह करनी चाहिए और आगे कदम उठाना चाहिए।

पहले पत्नी का विश्वास जीतने की कोशिश करें।

rp_judicial-sepr2.jpgसमस्या-

भारत ने मेरठ, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी पत्नी अपने घर वालों और अपने रिश्तेदारों की ही बात मानती है। मेरे घर पर ज्यादा टाइम नहीं रुकती और अगर आती भी है तो जल्दी ही मुझ से लड़ कर के अपने घर चली जाती है। वह अपने रिश्तेदारों से मुझे धमकी दिलवाती है। मेरी शादी 2012 में हुई थी और आज तक मुझ से सही तरीके से किसी ने कोई बात नहीं की। वे मुझे धमकी भी देते है डाइवोर्स की। मैं उन से बहुत परेशान हो गया हूँ। उस से बचने में मेरी मदद कीजिए।

समाधान

प की पत्नी उस के विवाह के पहले भी उस के घर वालों और रिश्तेदारों की ही बात मानती थी। आप से तथा आप के परिवार वालों से उस का कोई संबंध नहीं था। आप उस से कुछ कहते तो भी वह नहीं मानती। अब आप की शादी हो गयी और वह आप के घर आ गयी रहने के लिए। आप को तथा आप के परिवार वालों का दायित्व था कि वे अपने व्यवहार से उस का विश्वास अर्जित करते जिस से वह आप की बात मानने लगती। हो सकता है आप ने कुछ कोशिश भी की हो पर आप की यह कोशिश कामयाब नहीं हुई।

भारतीय शादियाँ अक्सर अरेंज मेरिज होती हैं जो दो परिवारों की सहमति से होती हैं। उस में वर-वधु की सहमति या तो होती ही नहीं है या फिर नाम मात्र की होती है। विवाह के पहले वर-वधु को आपस में एक दूसरे को समझने का अवसर नहीं मिलता। उन का पहला और वास्तविक मेल मिलाप विवाह के बाद ही आरंभ होता है। इस लिए यह मानना चाहिए कि यूरोप व विकसित समाजों में विवाह के पहले डेटिंग की परंपरा जो भूमिका अदा करती है वह काम विवाह के बाद आरंभ होता है। यह सफल भी हो सकता है और असफल भी हो सकता है।

भारतीय अरेंज मैरिज में पति और उस के रिश्तेदार यह मान कर चलते हैं कि नयी बहू घर में आई है उसे तुरन्त सारी जिम्मेदारियाँ संभाल लेनी चाहिए। हर कोई उसे आदेश देने वाला होता है। उस की सुनने वाला कोई नहीं होता या सिर्फ पति होता है। अक्सर पति भी आदेश देने वाला ही होता है पत्नी की या तो सुनी ही नहीं जाती या बहुत कम सुनी जाती है। नतीजा यह होता है कि पत्नी समझने लगती है कि उसे समझने वाला कोई नहीं है। यही कारण है कि आज कल लगभग हर विवाह में इस तरह की समस्याएँ उत्पन्न होने लगी हैं। इन समस्याओं का हल कुछ लोग मिल बैठ कर निकाल लेते हैं। जिन का नहीं निकल पाता वे विवाह विच्छेद के लिए अदालतों के हवाले हो जाती हैं।

प का विवाह हुए अभी अधिक समय नहीं हुआ है। कहीं न कहीं आप की ओर से कमी है जिस के कारण आप उस का विश्वास नहीं जीत पाए हैं। आप ने अपनी पत्नी को समझने की कोशिश ही नहीं की। आप को यह काम अब करना चाहिए। आप जाएँ अपनी पत्नी से मिलें, उस के साथ कुछ समय बिताएँ और अपनी बात कम से कम कहें उसे समझने की कोशिश करें। धीरे धीरे उस में अपने लिए विश्वास जगाएँ। उसे इतना विश्वास हो जाए कि उस के परम हितैषी सिर्फ आप हैं जो वास्तव में होना चाहिए। अभी तो आप ही उसे पराया समझ रहे हैं तो वह जो एक नए वातावरण में आई है आप पर विश्वास कैसे कर सकती है। यही आप की समस्या का मूल है। आप कोशिश करें और समस्या को हल करें। अन्यथा एक पत्नी जब अपने पति के घर में एडजस्ट नहीं हो पाती है तो वह उस रिश्ते से छुटकारा पाने का प्रयास करती है और अपने मायके के रिश्तेदारों व वकीलों की सलाह के अनुसार सभी तरह के मिथ्या आरोप भी लगाती है और पतियों को बहुत परेशानी हो जाती है। अदालतों में मुकदमे आसानी से नहीं निपटते और दो जीवन कानून और अदालत की भेंट चढ़ जाते हैं।

दि बात बिलकुल बनने वाली न हो तो भी आपस में मिल बैठ कर विवाह विच्छेद का प्रारूप तय कर के सहमति से विवाह विच्छेद का मार्ग अपनाना चाहिए, जिस से अदालती रास्ते की बेवजह देरी और कष्टदायक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।

वैवाहिक विवादों को आपस में बैठ कर हल किया जाए तो बेहतर है।

rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

दीपक कुमार सोनी ने सिवान, बिहार से समस्या भेजी है कि-

मेरे ससुराल वाले शादी के 3-4 महीने बाद से ही दबाव बनाने लगे कि हमारी लड़की को मैके में ही रहने दो और आप हर महीने खर्चा देते रहो। मैं नहीं मानता था। उस के बाद उस के घर वाले मेरे घर आते तो मेरी बीवी पैसा या जेवर कुछ हमेशा मैके भेजने लगी। मैं किसी को कुछ नहीं बता पा रहा था। कुछ समझ में नही आ रहा था कि क्या करूँ। 25.4.2015 को वो ज़बरदस्ती अपनी आदत अनुसार मेरी पत्नी को ले कर चले गये और 28.4.2015 को 498ए, 34, 323 आईपीसी का केस फाइल कर दिया जो 156 (3) दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत है। उसके बाद 125 दंड प्रक्रिया संहिता का केस कर दिया 125 का नोटिस आ गया है। 23.7.2015 को मेरी पेशी है मैं अपनी पत्नी को रखना चाहता हूँ पर वो अपने माँ बाप के बहकावे में आकर रहना नहीं चाहती। मैं क्या करूँ। 498ए, 34 के केस में अभी थाने में एफआईआर दर्ज नही हुई है। उन लोगो ने पैसा देकर दबा दिया है और मुझसे 50000 हज़ार माँग रहे हैं मैं क्या करूँ?

समाधान-

मारे यहाँ शादियाँ जिस तरह से तय होती हैं, उन में न तो पति पत्नी एक दूसरे को ठीक से जानते हैं और न ही एक दूसरे के बारे में विश्वसनीय रुप से कुछ कह सकते हैं। यही कारण है कि आज कल होने वाली शादियों में अक्सर ऐसी शिकायतें आती हैं। हमारा शादी का परंपरागत रूप लगभग अवसान पर है और नया तरीका जिस में पति-पत्नी विवाह के पहले एक दूसरे को ठीक से समझ सकें समाज आगे बढ़ा नहीं रहा है। यह एक संक्रमण काल है। इस संक्रमण काल में ऐसी समस्याएँ खूब देखने को मिलेंगी। इन समस्याओं का इलाज भी अदालतों और कानून से नहीं निकल पाता है। कानून और अदालतें फैसला करने में इतनी देर करती हैं कि दोनों जीवन बरबाद हो जाते हैं।

प ने यह नहीं बताया है कि आप के ससुराल वाले आप की पत्नी को मायके में क्यों रखना चाहते थे। बिना कोई कारण बताए तो उन्हों ने ऐसे ही कुछ नहीं कहा होगा। आप वह कारण बताते तो कुछ समझ आता। आखिर 323 और 498ए की शिकायत का कोई तो आधार रहा होगा।

स तरह के मामलों में बेहतर है कि आपस में मिल बैठ कर रास्ता निकाला जाए। लेकिन उस के पहले यदि प्रथम सूचना दर्ज होती है तो आप अग्रिम जमानत करवा लें। अन्यथा आप को कुछ दिन जेल में गुजारने पड़ सकते हैं। धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता में भी आप को पत्नी का खर्चा तो देना होगा। पत्नी को आप उस की मर्जी से ही अपने साथ रख सकते हैं। उस की मर्जी के बगैर नहीं रख सकते। सब से बढ़िया हल यही है कि जो मुकदमे हुए हैं उन के लिए अच्छा वकील करें जो पूरी मेहनत से आप का मुकदमा लड़े और बातचीत का रास्ता कभी बन्द न करें।

पत्नी से बात कर मसले को हल करने का प्रयत्न करें

rp_Desertion-marriage.jpgसमस्या-

राज कुमार ने उज्जैन, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

 मेरी शादी को 2 साल हो गये हैं, मेरी पत्नी की सरकारी नौकरी हॉस्पिटल में है और 15000/- रु. प्रतिमाह वेतन है। मेरी प्राइवेट नौकरी है मेरा वेतन 8000/- प्रति माह है। सब अच्छे से चल रहा था। शादी के 1 साल बाद मेरी सास ओर साले के कहने में आ कर मेरी शिकायत कर दी कि मेरा किसी लड़की से चक्कर चल रहा है और उस से शादी कर ली है। बाद में महिला थाने में परामर्श केन्द्र में फैसला हुआ कि मेरी पत्नी को शक था, किसी ने कहा था। मेरा किसी और से कोई चक्कर नहीं है और न ही किसी और से शादी की। ये साबित हुआ तो मेरी सास ओर मेरी पत्नी ने समझौते के तौर पर अलग रहने की मांग की जब कि मैं मेरे माता पिता मै इकलौता लड़का हूँ। घर जोड़ने के लिए मैं अलग रहने लगा, पत्नी के साथ। 2 महीने बाद हम पति पत्नी के बीच छोटी सी बात को ले कर कहा सुनी हो गई। जिस में गुस्से में हम दोनों ने एक दूसरे पे हाथ उठा लिए। फिर सब नॉर्मल हो गया। यह घटना मेरी पत्नी ने मेरे साढू भाई को बताई। ऐसा हुआ तो उसके कहने पर मुझे मेरे साढू भाई और मेरे साले ने मुझे जहा हम लग रहे थे वहाँ से भगा दिया और मारा। इस बात की मैं ने शिकायत पुलिस में की। ये बात मालूम होते ही मेरी पत्नी ने मुझ पर झूठा 498ए की रिपोर्ट डाल दी जो कि अभी चल रहि है। उस के बाद मैं ने धारा 9 का आवेदन प्रस्तुत किया लेकिन वह उस की तारीख पर नहीं आ रही है और बोल रही है कि मुझे तलाक चाहिए। उस के बाद धारा 24 लगा दी मुझ से हर महीने 10000/- रु. खर्चे के लिए। इस बीच मेैंने पत्नी से बात भी की। पर मेरे साढ़ू भाई ने हम लोगों को मिलते जुलते देख लिया। तब से वो नहीं मिल रही है। न ही फोन पर बात कर रही है। उस के ऑफीस में भी मुझे डाँट दिया कि मेरे से दूर रहो। अब बताएँ कि मैं क्या करूँ? इन तीनों केस को मैं केैसे जीतूँ।

समाधान-

प किसी अच्छे वकील की मदद से दोनों मुकदमे लड़िए। तीसरी धारा 24 का आवेदन तो धारा 9 के मुकदमे में लगा है। यदि आप मुकदमे ठीक से लड़ेंगे तो जीत जाएंगे।

प के अभी बच्चे नहीं है। हमें लगता है कि आप की यह शादी नहीं चल सकेगी। क्यों कि आप की पत्नी मानने को तैयार होगी तो उसे आप का साला और साढ़ू भाई न मानने देगा। आप अपनी पत्नी को संदेश दें कि आप तलाक देने को तैयार हैं और आपसी सहमति से आवेदन दे सकते हैं। लेकिन इस शर्त पर कि वह 498ए का मुकदमा वापस ले लेगी। यदि पत्नी बात करने को तैयार हो तो आप उसे साफ कह दें कि आप उसे कुछ नहीं देंगे।

धारा 498ए और धारा 24 में कुछ नहीं होने का है। आप की पत्नी आप से अधिक कमाती है उसे भरण पोषण नहीं मिेलेगा आधिक से अधिक वह अदालत का खर्चा प्राप्त कर सकती है। 498ए में भी आप के विरुद्ध कुछ भी साबित करना असंभव लगता है क्यों कि वह उस के साथ हुई मारपीट को साबित नहीं कर सकेगी। फिर भी यदि पत्नी से मुकदमे की तारीख के दौरान या अन्यत्र बात संभव हो और वह अपने भाई और जीजा की बात को अनदेखा करने और साथ रहने को मान जाए तो साथ रहना आरंभ करें। दोनों के बीच तालमेल रहा तो मुकदमे भी खत्म हो जाएंगे।

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