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संयुक्त संपत्ति में हिस्सेदार अपना हिस्सा विक्रय कर सकता है।

समस्या-

जमीला खातून ने सीतापुर उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं ज़मीला खातून निवासी बाराबंकी, हाल सीतापुर मैंने सन १९९५ में एक ६०० स्क्वायर फुट का घर ख़रीदा था। उस बैनामे पर मेरा नाम व मेरी ५ पुत्रियों के नाम भी अंकित हैं। अब मैं अपना मकान बेचना चाहती हूँ, लेकिन मेरी बड़ी पुत्री उसमे टांग मार रही है और उससे मेरा विवाद चल रहा है। तो कृपा करके उसके बेचने का हल बताएँ कि किस प्रकार मैं उसे बेच सकती हूँ? क्या उसमें मैं कोई केस करूँ या पुलिस से शिकायत करूँ? अभी मकान में ताला पड़ा है। मेरी ५ नंबर की पुत्री जिससे मेरा विवाद चल रहा है वो भी अब उस मकान में नहीं रहती है परन्तु जबरन पूरा मकान हथियाना चाह रही है।

समाधान-

प का मकान एक संयुक्त संपत्ति है। इस के छह हिस्सेदार हैं। इस कारण कोई भी हिस्सेदार पूरा मकान नहीं बेच सकते। पूरा मकान सभी छह हिस्सेदार मिल कर ही बेच सकते हैं। हाँ आप पाँच हिस्सेदार अर्थात आप और आप की चार बेटियाँ मिल कर मकान के पाँच हिस्से बेच सकते हैं और मकान का कब्जा आप के पास हो तो खरीददार को हस्तान्तरित कर सकते हैं। लेकिन इस के बाद आपत्ति करने वाली पुत्री का छठा हिस्सा उस मकान में उसी का बना रहेगा। चाहे तो खरीददार प्रयत्न कर के आप की बेटी से छठा हिस्सा भी बाद में खरीद सकता है। या आप की आपत्ति करने वाली बेटी विभाजन का वाद कर सकती है। मकान छोटा होने से उस के भौतिक विभाजन की संभावना नहीं होने से स्थिति यही होगी कि बेटी को कहा जाएगा कि जो भी बाजार मूल्य है उस का छठा हिस्सा ले कर अपना हिस्सा छोड़ दे।

दूसरा रास्ता है कि आप बंटवारे का वाद प्रस्तुत करें और विभाजन करवाएँ विभाजन की कार्यवाही में भी वही होगा जो पहले हम बता चुके हैं। जब आप बेटी का हिस्सा खरीद लें तब आप पूरा मकान बेच सकती हैं।

लीज की संपत्ति का पुत्र के नाम हस्तान्तरण कैसे हो?

समस्या-

अमित भारद्वाज ने गणेश चौक, बारघाट रोड, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-


मेरी दादी की एक दुकान इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय  रोगी कल्याण समिति के काम्प्लेक्स के अंतर्गत है । दुकान 2000 सन में रोगी कल्याण समिति से क्रय की गई थी। किरायेदारी पर रोगी कल्याण समिति 500 रुपये किराया हर माह किरायेदारी के रूप में सभी दुकानदार से लेती है। दादी अब यह चाहती है की दुकान पापा जी के नाम से हस्तान्तरित हो जाये । समिति केअध्यक्ष कलेक्टर महोदय होते हैं और सचिव जिला अस्पताल के सर्जन होते है। दादी ने रोगी कल्याण समिति को आवेदन भी दे दिया है, जन सुनवाई में कलेक्टर ने यह बताया था कि यदि दादी दुकान पापा के नाम करना चाहती है और अन्य पुत्रों को कोई आपत्ति नहीं है तो वह कोर्ट जाने में स्वतंत्र है। लेकिन आवेदन देने के बाद समिति के बाबू काम नहीं कर रहे हैं बोलते है कि कोर्ट जाओ। इस पर हम ने उन से कहा कि दादी अभी जीवित है और जीवित अवस्था में दुकान जिसे चाहे उसे दे सकती है। दादी और पिताजी को क्या करना चाहिए।

समाधान-

प के द्वारा प्रेषित तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि दुकान का स्वामित्व रोगी कल्याण समिति का है और दुकान आप की दादी के नाम लीज पर है। लीज पर दी गयी संपत्ति को हस्तान्तरित करने के लिए मूल स्वामी की अनुमति की आवश्यकता है। दादी के नाम जो लीज डीड है उस की शर्तों पर निर्भर करता है कि दादी दुकान कैसे अपने किसी पुत्र या अन्य व्यक्ति के नाम हस्तान्तरित कर सकती है। सब से पहला काम तो यह किया जा सकता है कि दादी एक वसीयत कर के दुकान को आप के पिता के नाम वसीयत कर दे और इस वसीयत को उप पंजीयक के कार्यालय में वसीयत करा दिया जाए। इस से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि दादी के देहान्त के तुरंत बाद यह दुकान आप के पिता जी के स्वामित्व में स्वतः ही आ जाएगी। तब आप के पिताजी वसीयत की प्रमाणित प्रति रोगी कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर लीज का नामान्तरण उनके नाम करने का आवेदन कर सकते हैं।

विकल्प में आप यह भी कर सकते हैं कि आप उप पंजीयक कार्यालय में लीज डीड को दिखा कर यह पूछ सकते हैंं कि क्या दादी इस लीज को विक्रय या दानपत्र के माध्यम से आप के पिता जी को हस्तान्तरित कर सकती है। यदि उन्हें कोई आपत्ति न हो तो दान पत्र लिख कर उसे पंजीकृत करवा कर दादी उस दुकान को आप के पिताजी के नाम कर सकती है। पंजीकृत दानपत्र के आधार पर लीज आपके पिताजी के नाम नामांतरित करने के लिए रोगी कल्याण समिति को आवेदन किया जा सकता है। वसीयत और दान पत्र दोनों के आधार पर लीज का नामान्तरण न किए जाने पर न्यायालय के समक्ष व्यादेश जारी करने के लिए समिति के विरुद्ध वाद प्रस्तुत किया  जा सकता है।

दिया हुआ दान स्वीकार कर लिए जाने के बाद वापस नहीं हो सकता।

Giftसमस्या-

शकुन्तला ने सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

पिताजी ने सन् 2010 में मकान खरीदा, इसी मकान को पिताजी ने दानपत्र निष्पादित कर पंजीकृत करवा कर बड़ी बेटी को हस्तान्तरित कर दिया। क्या पिता की छोटी बेटी इस मकान में हिस्सा पा सकती है? क्या पिता इस दान को वापस लेने का अधिकार रखते हैं। क्या पिता के देहान्त के बाद छोटी बेटी इस मकान में हिस्सा प्राप्त कर सकती है। अब बड़ी बेटी के पिता इस मकान की कीमत बड़ी बेटी से मांग रहे हैं। बड़ी बेटी भी पिता को मकान की कीमत देना चाहती है। यह राशि दी जाए तो क्या कैसे दी जाए? क्या दस्तावेज लिखवाया जाए?

समाधान-

दि किसी व्यक्ति ने दानपत्र निष्पादित कर उसे पंजीकृत करवा कर कोई अचल संपत्ति किसी को दान कर दी हो, जिसे दान की हो उस ने उस दान को स्वीकार कर लिया हो तथा अचल संपत्ति का कब्जा भी प्राप्त कर लिया हो तो ऐसा दान निरस्त किया जाना संभव नहीं है।

दि बड़ी बेटी ने पिता के दान पत्र को स्वीकार कर उस संपत्ति पर कब्जा प्राप्त कर लिया है तो यह दानपत्र निरस्त नहीं किया जा सकता। छोटी बेटी पिता के जीवनकाल में या उन के जीवन के उपरान्त भी इस दान पत्र को निरस्त नहीं करवा सकती है और न ही उस मकान में कोई हिस्सा प्राप्त करना चाहती है। कोई भी व्यक्ति अपने द्वारा किए हुए दान को दान लेने वाले द्वारा स्वीकार करने के बाद वापस नहीं ले सकता है।

दि पिता दान किए हुए मकान का मूल्य अब मांग रहे हैं तो यह कानून के विरुद्ध है वह अब ऐसा नहीं कर सकते। लेकिन यदि पुत्री अपने पिता को धन देना चाहती है तो वह धन किसी अन्य रूप में ही देना होगा। इस धन का हस्तान्तरण किस विलेक के माध्यम से देना चाहिए यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। कोई अच्छा वकील बड़ी बेटी और पिता से बात कर के निष्पादित दानपत्र का अध्ययन और परिस्थितियों का मूल्यांकन कर के तथा दोनों पक्षों की शंकाओं और कानून को ध्यान में रखते हुए तय कर सकता है कि इस धनराशि के हस्तान्तरण के लिए किस तरह का विलेख लिखना चाहिए।

बेहतर है कि माँ संपत्ति को आप के नाम गिफ्ट डीड कर हस्तान्तरित कर दे।

समस्या-

संजय ने पाली, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे भाई संजय की शादी सन् 2002 में हुई थी, वह दो चार महीने के बाद ही हमारे घर से अलग हो गया। मैं ने मेरे माँ मधु के नाम से बैंक से लोन लेकर शहर पाली जिला पाली (राजस्थान) में प्रॉपर्टी सन् 2000 में खरीदी। उस बैंक लोन की समस्त राशि मेरे द्वारा जमा करवाई गई। अभी भी मैं मेरी माँ के साथ में ही रहता हु। तो क्या मेरा भाई संजय मेरी माँ की मृत्यु के बाद इस प्रॉपर्टी का हिस्सेदार रहेगा? अभी मेरी माँ जीवित है। यदि मेरा भाई संजय हिस्सेदार रहता है तो उसे हिस्सेदारी से अलग करने के लिए मुझे मेरी माँ से इस प्रॉपर्टी सम्बन्ध में क्या क्या दस्तावेज तैयार करवाने चाहिए? जिस से इस मेरी माँ मधु के नाम से बैंक लोन से मेरे द्वारा खरीदी सम्पति का पूरा स्वामित्व मेरा ही रहे, बाद में किसी भी तरह का विवाद न हो।

समाधान

प ने उक्त संपत्ति माँ के नाम से खरीदी, ऋण भी चुका दिया गया। वैसी स्थिति में अब उक्त संपत्ति पर किसी तरह का कोई भार भी नहीं है और वह भार मुक्त है। वैसी स्थिति में उक्त संपत्ति माँ की मानी जाएगी और माता जी की मृत्यु के उपरान्त वह उत्तराधिकार में चली जाएगी। जिस में माँ के सभी उत्तराधिकारी बराबर के हिस्सेदार होंगे। निश्चित रूप से आप का भाई भी होगा और वह बंटवारा करने और हिस्सा देने का वाद संस्थित कर सकता है।

दि आप की माँ उक्त संपत्ति को आप के नाम वसीयत कर उसे पंजीकृत करवा देती हैं और फिर अपने जीवन काल में उस वसीयत को परिवर्तित या रद्द नहीं करती हैं तो वसीयत के अनुसार उक्त संपत्ति आप की हो जाएगी। लेकिन यदि माँ उक्त वसीयत को रद्द करती है या उसे परिवर्तित करती है तो उन की अन्तिम वसीयत ही सही मानी जाएगी।

दि आप वसीयत के बदले जाने की इस आशंका से बचना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि उक्त संपत्ति को आप की माँ आप को गिफ्ट डीड से हस्तान्तरित कर सकती हैं। इस से आप माताजी के जीवन काल में ही उक्त संपत्ति के स्वामी हो जाएंगे।

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