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संपत्ति पर आप का कब्जा है तो आप को अदालत जाने की जरूरत नहीं।

समस्या-

महेश ने खंडवा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे नानाजी का तीन कमरो का पुराना मकान था। अब उसे तोड़कर मेरी मौसी और माताजी के सहयोग से ये मकान नया बना लिया। मेरे तीनो मामाओ ने जब  मकान बन रहा था तब किसी ने आपत्ति नही ली। मैं उस वक्त पढ़ाई के लिये इंदौर गया था। अब हम उस मकान में चार साल से रह रहे हैं। मेरा बड़ा मामा कह रहा है कि तुम कब्जा करने आ गये हो, तुम्हारा क्या हे यहाँ से निकलो। हमारी मकान की रजिस्ट्री भी नहीं है अब हम क्या कानूनी कार्यवाही करें?

समाधान-

कान तो नाना जी का था जिसे गिराया गया था। फिर आप की माता जी और मौसी के सहयोग से बनाया गया। मामाओं का भी कुछ तो सहयोग रहा होगा। उस मकान में अब कौन कौन रहते हैं यह भी आपने नहीं बताया। जब तक पूरा विवरण न हो पूरा समाधान भी संभव नहीं है। नानाजी अब शायद नहीं हैं। यदि हैं तो मामाजी आप को उस मकान से नहीं निकाल सकते। यदि नहीं हैं तो उस मकान के जितने हिस्से का स्वामी हर मामा है उतने ही हिस्से के मालिक आप की माँ और मौसी हैं। इस कारण यदि उस मकान पर कब्जा है तो वे आप को उस मकान से नहीं निकाल सकते। जैसे बड़े मामान ने कहा है वैसे आप की माँ और मौसी कह सकती हैं कि तुम निकलो मकान हमने बनाया है। जिस के पास संपत्ति का कब्जा है उसे अदालत में जाने की जरूरत नहीं है। जिस के पास संपत्ति का कब्जा नहीं है उसे अदालत जाने दें।

यदि मामाजी कुछ गड़बड़ करें तो मौसी और माताजी अदालत में इस आशय का वाद संस्थित कर सकती हैं कि वे भी मकान में हिस्सेदार हैं और उन्हें मकान से न निकाला जाए। पह हमारी राय है कि अदालत में आप की माँ व मौसी न जाएँ। मामा को अदालत में जाने दें। मौसी व माताजी ने निर्माण में जो खर्च किया उस का हिसाब और सबूत हो तो संभाल कर रखें। मुकदमे में काम आएंगे।

हिस्सेदार अधिक से अधिक मकान के बंटवारे की मांग कर सकते हैं और बंटवारे का वाद संस्थित कर सकते हैं।

सह-स्वामी मकान को गिरवी रख कर ऋण लेना चाहते हैं, उन्हें कैसे रोकें?

rp_property1.jpgसमस्या-

तमन्ना पाण्डेय ने आगरा उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरे स्वसुर जी एल पाण्डेय जिनका देहांत 2008 में हो चुका है तथा सास सरिता पाण्डेय ने जिनका देहांत 2004 में हो चुका है, 250 वर्ग गज में मकान बनाया जिसके 4 हिस्सेदार, 3 भाई और 1 बहिन हैं। बहिन ने मकान में हिस्सा लेने से मना कर दिया है। मेरी समस्या यह है कि घर अभी भी मेरी सास के नाम पर है, मैं घर की बड़ी बहू हूँ।  मेरे पति लेक्चरर है, दूसरे नंबर के भाई ऐ के पाण्डेय जो कि पेशे से वकील हैं उन्होंने तीसरे नंबर के भाई के साथ मिलकर एक फर्जी वसीयतनामा बनवा लिया है जिस में दो भाई को ही घर का वारिस बताया गया है। ऐ के पाण्डेय तथा आर के पाण्डेय। मेरे पति वी के पाण्डेय का नाम नहीं लिखवाया है। अब वो 250 वर्ग गज के पुरे घर पे बैंक से लोन लेने की कोशिश कर रहे हैं। घर के तीसरे हिस्से पर हमारा कब्ज़ा है यानी हम लोग रहते हैं।

-घर के दो हिस्से वो (दूसरे नंबर के भाई ऐ के पाण्डेय) पहले ही एक व्यक्ति के पास गिरवी रख चुके है जिस पर उक्त व्यक्ति ने दो कमरों पर कब्ज़ा कर लिया है। तो फिर ये कैसे दुबारा पूरा घर बैंक में गिरवी रख सकते हैँ।

– घर का असली बैनामा मेरी ननद के पास था जोकि उन्हें मिल नहीं रहा, हम सबके पास उस बैनामे की फ़ोटो कॉपी है। हम क्या करे जिससे वो हमारा हिस्सा न गिरवी रखे बैंक के पास।

– ये पेशे से वकील है और बहुत चालाक धूर्त किस्म के हैं। इन्हों बहुत से लोगों से तथा बहुत सी बैंको से फर्जी तरह से लोन लिया है जिसके कर्जदाता आकर हमे परेशान करते हैं क्योंकि हम उस घर में रह रहे हैं बाकी दोनों भाई आगरा से फरार है बाहर कहीं रहते है। हम इनसे सभी रिश्ते खत्म करना चाहते है जिससे इनके दवारा किये गए किसी भी फर्जी काम में हम न फंसे।

– क्या हम अपना हिस्सा बेच सकते है अगर हाँ तो क्या प्रक्रिया होगी?

– ये हमें और हमारे परिवार को कोई शारीरिक कष्ट न दे सके इसके लिए क्या हमें पहले से ही पुलिस में एफ़आईआर दर्ज करवानी चाहिए।

समाधान-

जब भी संपत्ति के स्वामी की मृत्यु हो जाती है तब संपत्ति उस के उत्तराधिकारियों की हो जाती है। जब एक से अधिक उत्तराधिकारी हों तब वह संपत्ति संयुक्त स्वामित्व में होती है। इस तरह यदि आप के देवर द्वारा बताया जा रहा वसीयतनामा फर्जी है तो उक्त संपत्ति सभी उत्तराधिकारियों की संयुक्त संपत्ति है। कोई भी व्यक्ति किसी भी संपत्ति में अपने हिस्से को बेच सकता है तथा अपने कब्जे की संपत्ति का कब्जा क्रेता को हस्तान्तरित कर सकता है। पर तब भी इस में यह झगड़ा रहेगा कि क्रेता संयुक्त संपत्ति में हिस्सेदार रहेगा लेकिन अपने कब्जे की संपत्ति पर कब्जा बनाए रखेगा। इस झगड़े के कारण आप को अच्छा खरीददार नहीं मिलेगा। यदि मिल जाए तो आप अपना हिस्सा बेच सकते है और अपने अधिकार की संपत्ति पर उसे कब्जा दे सकते हैं।

बैंक में मकान को गिरवी रखने से बचने के लिए आप के पति मकान के बंटवारे का दावा कर सकते हैं और इस दावे में संपत्ति को बेचने, इधर उधर करने, गिरवी रखने आदि पर अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त कर सकते हैं। इस के लिए आप को अच्छे स्थानीय वकील से संपर्क कर सलाह और सेवाएँ प्राप्त करनी चाहिए। बँटवारे के दावें में फर्जी वसीयत भी अदालत के सामने आ जाएगी उस का सहारा लेने वालो को उसे प्रमाणित करना पड़ेगा और उसे फर्जी बताने वाले उसे फर्जी प्रमाणित कर सकते हैं।

 

हाथ पर हाथ धर बैठने से कुछ नहीं होगा।

partition of propertyसमस्या-

प्रदीप सैनी ने चिड़ावा, राजस्थान से पूछा है-

मेरे दादाजी व पिताजी की मृत्यु 10 वर्ष पहले हो चुकी है। परन्तु अन्य परिजन अब तक मिलने वाला हिस्सा पुरा देने से इनकार करते हैं। मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

भाई, हाथ पर हाथ धर कर बैठने से तो कुछ  नहीं होगा। पानी पीने के लिए भी कुएँ से पानी खींचना पड़ता है, नदी तक जाना होता है या नल हो तो उस की टोंटी खोलनी पड़ती है। यदि आप चाहते हैं कि दादाजी और पिताजी की जो संयुक्त संपत्तियाँ हैं उन में से आप का हिस्सा आप को मिल जाए तो आप को बँटवारा कराना होगा। बँटवारा हिस्सेदारों की आपसी सहमति से हो सकता है या फिर न्यायालय के निर्णय से।

आप देरी मत कीजिए, तुरन्त न्यायालय में संयुक्त संपत्ति के बँटवारे के लिए वाद  प्रस्तुत कीजिए। यदि संपत्ति का लाभ एक या कुछ ही हिस्सेदार ले रहे हैं तो सम्पत्ति को रिसीवर को सौंपने का आदेश भी कराया जा सकता है और संपत्ति के किसी भी भाग को हस्तांतरित करने या कब्जा हस्तान्तरित करने से रोकने के लिए स्थगन आदेश भी पारित कराया जा सकता है।

संयुक्त संपत्ति का बँटवारा कैसे होगा?

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संदेश चौरसिया ने बीना, जिला सागर मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे दादा जी ने १९५५ में एक घर ख़रीदा। कुछ समय बाद उन की मृत्यु हो गई। उस के बाद मेरे पिता जी के बड़े भाई (ताऊ) शादी होने के बाद घर छोड़ कर चले गए। कुछ समय बाद उन्होंने घर का कुछ हिस्सा बेच दिया दादी की मर्जी से। उस टाइम मेरे पिताजी की उम्र १७ थी, जिस में उन के भी हस्ताक्षर हुए। बेचने के बाद घर का नांमांतरण नहीं हुआ। मेरी दादी की भी मृत्यु हो चुकी है २००३ में। अब मेरे ताऊ जी के पुत्र उस में अपना हिस्सा बता रहे हैं कृपया सलाह दें। मेरे दादाजी के ४ संताने थीं जिन में २ पुत्र २ पुत्री हैं जिन में से ताऊ जी की मृत्यु हो चुकी है।

समाधान

दादा का खरीदा हुआ मकान उन की मृत्यु के उपरान्त संयुक्त हिन्दू परिवार की संपत्ति हो गया। जिस में दादी, ताऊ जी आप के पिता जी और दो बुआओँ का बराबर हिस्सा था। उस के बाद तीनों के हस्ताक्षर से उस का कुछ हिस्सा बेच दिया गया। साधारण रूप से यह माना जाएगा कि उक्त हिस्सा तीनों ने विक्रय किया जब तक कि अन्यथा रूप से यह प्रमाणित नहीं कर दिया जाता कि ताऊजी ने अपना हिस्सा बेच दिया था। इस तरह मकान का जो हिस्सा बचा उस पर भी पाँचों का स्वामित्व था। लेकिन यदि आप साबित करते हैं कि जो हिस्सा बेचा गया वह ताऊजी का था और उक्त बेचान के उपरान्त ताऊजी का कोई हिस्सा मकान में नहीं रहा तो शेष हिस्से के केवल चार हिस्सेदार रह गये।

लेकिन दादी की मृत्यु के उपरान्त उन का हिस्सा पुनः उन के पुत्र पुत्रियों को मिल गया। इस तरह ताऊजी या उन के उत्तराधिकारियों का फिर से शेष संपत्ति में 1/5 X ¼ = 1/20 हिस्सा हो गया। यदि यह माना जाए कि बेचा गया मकान केवल आप के ताऊजी के तत्कालीन हिस्से का न हो कर सब के हिस्से से बेचा गया था तो शेष संपत्ति में ताऊजी के उत्तराधिकारियों का ¼ हिस्सा होगा।

स के निर्धारण का यही तरीका है कि ताऊजी के उत्तराधिकारी या आप के पिताजी मकान के विभाजन का वाद प्रस्तुत करें। आप के पिताजी यदि यह साबित कर पाते हैं कि तब ताऊजी के हिस्सा अलग कर के उसे बेचा गया था और शेष संपत्ति में उन का कोई हक नहीं रह गया था तो उन के उत्तराधिकारियों को 1/20 हिस्सा मिलेगा और यदि यह साबित नहीं होता है तो उन्हें ¼ हिस्सा मिलेगा।

संयुक्त संपत्ति का बँटवारा

rp_judge-caricather11.jpgसमस्या-

एडवोकेट बृजेश ने सतना, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे बाबा ने वर्ष 1949 में 18 एकड़ कृषि भूमि खरीदी थी। मेरे बाबा तीन भाई थे, सभी ने लड़ाई कर मेरे बाबा से 1/3 हिस्सा ले लिया है। मेरे बाबा के एक भाई की शादी नहीं हुई थी उन को भी 1/3 हिस्सा मिला था। जो अब लाबल्द फौत हो चुके हैं। मेरे बाबा के दूसरे भाई के पुत्रों ने फर्जी वसीयत के आधार पर लाबल्द फौत बाबा के जमीन को हड़पने का मुकदमा कर दिया है। मेरे बाबा के चार पुत्र हैं जिन में से तीन पुत्रों को बाबा ने 1980 में बटवारा कर दिया था। चौथे पुत्र को नहीं दिया था, अब बाबा भी फौत हैं। क्या लाबल्द फौत बाबा की जमीन सभी में बराबर – बराबर बाटीं जा सकती है? क्या मेरे बाबा के चौथे फौत पुत्र की लड़की अब हिस्सा का दावा चला सकती है?

समाधान-

प के बाबा ने जो जमीन खरीदी थी वह पुश्तैनी नहीं थी। ऐसा प्रतीत होता है कि वह तीनों भाइयों की संयुक्त संपत्ति थी। इसी कारण तीनों भाइयों के बीच बंटवारा हो कर तीनों एक तिहाई हिस्सा प्राप्त कर लिया। एक बाबा निस्संतान मर गए। यदि उन की संपत्ति पर दूसरे भाई के बच्चों ने फर्जी वसीयत बना कर कब्जा कर लिया है तो आप के पिताजी को चाहिए था कि वे मृत भाई की संपत्ति के बंटवारे का वाद संस्थित करते और वसीयत सामने आती तो उसे भी चुनौती दे कर फर्जी साबित कर देते। यह सारे मामले की जानकारी के बाद ही कहा जा सकता है कि क्या इस बंटवारे का मुकदमा अब किया जा सकता है या नहीं।

प के बाबा के चार पुत्रों में से तीन पुत्रों के बीच बंटवारा होना समझ नहीं आता। यदि बंटवारा होता तो संपत्ति के पाँच हिस्से होते चार बेटों के और एक खुद बाबा का। इस लिए वह बंटवारा प्रतीत नहीं होता है बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि बाबा ने पुत्रों के असंतोष को दूर करने के लिए संपत्ति के कुछ हिस्सों पर रहने और उपयोग करने की अनुमति बाबा ने दे दी थी। लेकिन संपत्ति फिर भी संयुक्त बनी रही।

चौथे पुत्र की पुत्री भी इस संपत्ति की उत्तराधिकारी है। इस कारण वह अपने हिस्से का दावा कर सकती है। यह कहते हुए कर सकती है कि निस्संतान मृत्यु को प्राप्त हुए बाबा ने कोई वसीयत नहीं की थी और उस में भी उस का हिस्सा है।

इस मामले में आप को सारे दस्तावेज आदि किसी अच्छे वकील को दिखा कर उन से सलाह करते हुए बंटवारे का वाद संस्थित करवाना चाहिए।

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