Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Mutation Supreme Court wife Will अदालत अनुबंध अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक नामान्तरण न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

परिसर केवल किराया नियंत्रण कानून के अनुसार ही खाली कराए जा सकते हैं।

समस्या-

देवेन्द्र कुमार ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

व्यवसायिक दुकान को तीन वर्षीय एग्रीमेंट रजिस्टर्ड करवा कर देने के क्या लाभ हैं? या 100 रुपए के स्टाम्प पर 11 माह के किराए का एग्रीमेंट नोटेरी से अटेस्ट करा कर देना सही है? समय आने पर दोनों में से किस एग्रीमेंट में दुकान खाली कराना आसान रहेगा?

समाधान-

प राजस्थान से हैं, और राजस्थान में किराया नियंत्रण अधिनियम 2001 अन्य सब राज्यों के किराएदारी कानून से भिन्न है। जिला मुख्यालय वाले नगरों में प्रभावी है। इन नगरों में किराएदारी इस कानून के अनुसार ही हो सकती है। इस अधिनियम के अनुसार निश्चित अवधि  के लिए कोई भी परिसर 5 वर्ष से कम की निर्धारित अवधि के लिए दिया जाता है तो भी उस अवधि की समाप्ति पर परिसर इस आधार पर खाली नहीं कराया जा सकता।  केवल 5 वर्ष से अधिक की निश्चित अवधि के लिए ही परिसर कांट्रेक्ट पर दिया जा सकता है तब अवधि की समाप्ति पर भूस्वामी किराएदार से परिसर खाली कर सकता है।  इस तरह तीन वर्षीय किसी भी रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के माध्यम से किराये पर परिसर देने से कोई लाभ नहीं होगा।

इस कारण 11 माह या उस से कम का एग्रीमेंट किया जा सकता है। दुकान तो दोनों ही मामलों में कानून के मुताबिक ही हो सकेगी। एग्रीमेंट से किसी प्रकार का अतिरिक्त या कानून से भिन्न अधिकार भूस्वामी को नहीं मिलता।

जिस भूमि पर आप 15 वर्ष से मकान बना कर काबिज हैं उस से आप को बेदखल नहीं किया जा सकता।

rp_property.jpgसमस्या-

हितेश शर्मा ने दवाना, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी द्वारा 1997 में 40×108 का प्लाट ख़रीदा गया था और उसकी रजिस्ट्री भी करवा ली गई किन्तु प्लाट सीधा न होने की वजह से सन 2000 में मकान बनाते वक़्त 743 वर्ग फीट जमीन और खरीदनी पड़ी जिसका सिर्फ 50 रूपए के स्टाम्प पर विक्रय अनुबंध हुआ था जिसकी नोटरी भी नहीं की गई थी। किन्तु आज सन 2015 में प्लाट मालिक के मन में बेईमानी आ गई है और वह कहता है कि यह 743 वर्ग फीट जगह मेरी है। क्या मेरे द्वारा न्यायालय में केस दायर किया जा सकता है? क्या उक्त जमीन की रजिस्ट्री विक्रय पत्र के आधार पर मेरे नाम से हो सकती है? यहाँ मैं आपको इस बात से अवगत करना चाहूँगा कि सन २०१२ में मेरे पिताजी की म्रत्यु हो चुकी है और उक्त पूरी जमीन पर मेरे पिताजी द्वारा सन 2000 में ही मकान बनाकर कब्ज़ा ले लिया गया था और पिछले 15 वर्षो से हम यहाँ निवास कर रहे हैं।

समाधान

वैसे तो आप के पास एक विक्रय अनुबंध है। हम ने वह देखा नहीं है। लेकिन उस विक्रय अनुबंध में यह तो अंकित होगा कि जमीन का स्वामी इतने रुपए में अमुक जमीन आप के पिता को विक्रय कर रहा है और उस की कीमत उस ने प्राप्त कर ली है और कब्जा दे दिया है, जब भी आप के पिता चाहेंगे वह विक्रय पत्र की रजिस्ट्री करवा देगा। उस के बाद आप के पिता जी ने उस जमीन पर सन् 2000 में ही मकान बना लिया।

ब स्थिति यह है कि जमीन का मालिक रजिस्ट्री कराने से इन्कार कर रहा है। उस विक्रय अनुबंध के आधार पर जो कि सन् 2000 का है अब विक्रय पत्र निष्पादित कर उस की रजिस्ट्री कराने का विशिष्ट अनुपालन का वाद आप नहीं कर सकते क्यों कि उस की मियाद निकल चुकी है। यदि वाद करेंगे तो वह मियाद के आधार पर निरस्त हो जाएगा।

लेकिन उक्त जमीन पर आप का कब्जा है। जमीन की कीमत अदा करना अनुबंध में लिखा तो ठीक है न लिखा है तब भी ठीक है। उस अनुबंध का आंशिक पालन आप के पिता को जमीन का कब्जा सौंप कर कर दिया गया है। विगत 15 वर्ष में कोई आपत्ति भी उस पर नहीं हुई है, आप 15 वर्षों से उस जमीन पर मकान बना कर रह रहे हैं और काबिज हैं। संपत्ति हस्तान्तरण अधिनियम की धारा 53 ए में यह प्रावधान है कि यदि संविदा का आंशिक पालन हो गया हो और स्थाई संपत्ति का कब्जा दे दिया गया हो तो उस के कब्जे में दखल नहीं दिया जा सकता। यह एक तरह की प्रतिरक्षा का सिद्धान्त है। अर्थात यदि कोई आप के विरुद्ध कब्जे का दावा करे तो आप अपनी प्रतिरक्षा में इसे काम में ले सकते हैं। इस तरह जमीन का विक्रेता आप के विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही करे तो आप इस प्रतिवाद के साथ अपनी प्रतिरक्षा कर सकते हैं। हमारे विचार में आप को कोई वाद नहीं करना चाहिए और जो उस जमीन पर अपना हक बता रहा है उसे कानूनी कार्यवाही करने देनी चाहिए। आप यह मजबूत प्रतिवाद कर सकते हैं।

दि किसी तरह से यह प्रतिवाद असफल होता दिखे तो भी आप 15 वर्ष से उस जमीन पर मकान बना कर रह रहे हैं। किसी ने आपत्ति नहीं की है। यदि यह मान लिया जाए कि कोई संविदा नहीं हुई थी तो भी आप के मकान का बनना उस जमीन के मालिक की अनुमति से था। जो एक तरह का लायसेंस है। यदि कोई लायसेंस वाली भूमि पर स्थाई निर्माण करवा लेता है तो वह लायसेंस अनिरस्तनीय (irrevocable) है। इस आधार पर भी आप से उस जमीन का कब्जा वापस नहीं लिया जा सकता।

दि जमीन का मालिक कोई जोर जबर वाला व्यक्ति हो जबरन कुछ करने की संभावना हो तो आप इस आधार पर इस आशय की निषेधाज्ञा का वाद कर सकते हैं कि आप15 वर्ष से उस जमीन पर मकान बना कर रह रहे हैं और वह आप को बेदखल करना चाहता है इस कारण वह बिना किसी कानूनी तरीके से आप को जबरन बलपूर्वक बेदखल न करे। इस वाद में आवेदन प्रस्तुत करने पर आप को इसी आशय की निषेधाज्ञा भी मिल सकती है।

नियमित पद के लिए चयन में संविदा नियुक्ति का कोई लाभ नहीं मिल सकता।

rp_empcontract.jpgसमस्या-

कमल ने उदयपुर, राजस्‍थान से समस्या भेजी है कि-

मैं वर्तमान में नगर पालिका में 06 वर्षो से कम्‍प्‍यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हूँ तथा अभी 02 माह के बाद स्‍वायत शासन विभाग द्वारा क0 लिपिक की भर्ती निकाली जा रही है। जिस में हमारी सेवा का हमें कोई लाभ नहीं दिया गया है। उक्‍त भर्ती एक्‍जाम के द्वारा होगी। इस सन्‍दर्भ में मार्गदर्शन प्रदान करें कि भर्ती पर मेरे द्वारा न्‍यायालय से स्‍थगन प्राप्‍त किया जा सकता है या नहीं? अगर स्‍थगन लगाया जा सकता है तो क्‍या विधि रहेगी?

समाधान

प ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आप पिछले छह वर्ष से किस तरह सेवा में हैं। हमारा सोचना है कि आप की यह नियुक्ति संविदा नियुक्ति रही होगी। संविदा नियुक्ति में स्पष्ट होता है कि उन्हें संविदा पर निश्चित अवधि तक के लिए काम करने को रखा गया है। यह निश्चित अवधि समाप्त होने पर नयी संविदा नियुक्ति दे दी जाती है। संविदा नियुक्ति में नियुक्ति पत्र में ही यह अंकित होता है कि कर्मचारी की नियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए है और उस के बाद सेवाएँ स्वतः ही समाप्त हो जाएगी। इस कारण से आपको इस नौकरी का कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। इतना अवश्य है कि साक्षात्कार में यह ध्यान रखा जा सकता है कि आप के पास छह वर्ष तक कार्य करने का अनुभव है।

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि सभी सरकारी और अर्ध सरकारी सेवा में स्थाई कर्मचारियों को नियम के अनुसार परीक्षा ले कर तथा साक्षात्कार ले कर नियोजन देना चाहिए। सरकारी नौकरियों पर सभी का अधिकार है और उन नौकरियों के लिए चयन प्रतियोगिता के माध्यम से ही होना चाहिए। इस कारण से यदि आप ने संविदा नियुक्ति पर कार्य किया है तो उस का लाभ स्थाई सरकारी सेवा के लिए नहीं दिया सकता है। हमारी राय में आप को चयन प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए और स्वयं को प्रतियोगिता में योग्य सिद्ध करते हुए यह नौकरी हासिल करनी चाहिए। उस के अलावा कोई मार्ग शेष है। इन नियुक्तियों पर आप के द्वारा स्थगन लेना लगभग असंभव है।

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada