Tag Archive


Agreement Cheque Civil Suit Complaint Contract Court Cruelty Dispute Dissolution of marriage Divorce Government Husband India Indian Penal Code Justice Lawyer Legal History Legal Remedies legal System Maintenance Marriage Mutation Supreme Court wife Will अदालत अनुबंध अपराध कानून कानूनी उपाय क्रूरता चैक बाउंस तलाक नामान्तरण न्याय न्याय प्रणाली न्यायिक सुधार पति पत्नी भरण-पोषण भारत वकील वसीयत विधिक इतिहास विवाह विच्छेद

गवाह की समन और वारंट से तलबी

समस्या-

निधि जैन ने उदयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मैं किसी व्यक्ति की गवाही कोर्ट में करवाना चाहता हूँ। मुझे विश्वास है कि वह व्यक्ति मेरे पक्ष में बयान देगा, लेकिन पारिवारिक विवाद की वजह से मेरे कहने पर वह व्यक्ति मेरा गवाह नहीं बनेगा। मैं आप से यह जानना चाहता हूँ कि क्या किसी केस में कोर्ट से समन जा सकता है कि वह व्यक्ति गवाही अथवा अपने बयान देवे? अगर ऐसा कोई प्रावधान है तो इसके लिए क्या किया जा सकता है?

समाधान-

किसी भी व्यक्ति की गवाही अदालत में कराये जाने के लिए उस का नाम गवाह की सूची में होना चाहिए। यदि है तो आप अदालत से निवेदन कर सकते हैं कि उस गवाह को समन भेज कर अदालत में गवाही देने के लिए बुलाया जाए। अदालत उसे समन जारी कर के गवाही के लिए बुलाएगी। समन तामील हो जाने पर भी गवाह न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं होता है तो ऐसे गवाह को जमानती वारंट से और जमानती वारंट से भी अदालत में न आने पर गिरफ्तारी वारंट से उसे बुलाया जा सकता है। इस संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता तथा दीवानी प्रक्रिया संहिता दोनों में उपबंध हैं।

यदि किसी वजह से गवाह सूची पेश न हो या सूची में गवाह का नाम न हो तो न्यायालय को आवेदन दे कर गवाह का नाम सूची में बढ़ाया जा सकता है।

समन की तामील समाचार पत्र में प्रकाशन से संभव नहीं है।

rp_courtroom.jpgसमस्या-

अंकित ने जयपुर, मानसरोवर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

दि धारा 138 के अपराध में अभियुक्त से सम्मन तामील करानी हो और उस अभियुक्त का कही पता नही चल पा रहा हो तो क्या अंखबार में उस व्यक्ति के नाम से सम्मन तामील करवाई जा सकती है या नहीं।

समाधान-

धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम के अपराधिक परिवाद से उत्पन्न प्रकरण में या किसी भी अपराधिक प्रकरण में समन रजिस्टर्ड डाक से अथवा अखबार में प्रकाशन के माध्यम से तामील नहीं कराया जा सकता। अपराधिक प्रकरणों में अभियुक्त की उपस्थिति व्यक्तिगत रूप से आवश्यक होती है इस कारण उसे व्यक्तिगत रूप से तामील कराया जाना आवश्यक है।

दि समन एक बार तामील हो भी गया और अभियुक्त पेशी पर उपस्थित नहीं हुआ तो जमानती या गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करना होगा उस की तामील भी व्यक्तिगत रूप से ही करानी पड़ेगी। धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम का मामला एक अपराधिक मामला है, रुपया वसूली की कार्यवाही नहीं है। इस का उद्देश्य चैक अनादरण के बाद मांग पर धनराशि न देने के अपराध के लिए दोषी व्यक्ति को दंडित करना है। इस प्रकार के प्रकरणों में न्यायालय परिवादी को क्षतिपूर्ति के रूप में चैक की राशि से दुगनी राशि तक दिलवा सकती है। पर यह जरूरी नहीं न्यायालय यह भी कर सकता है कि परिवादी को कोई राहत नहीं दिलाए।

Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada